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क्या पाकिस्तान परमाणु हमले का खतरा उठा सकता है?

जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के भारत सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर नाकाम होने के बाद युद्धोन्माद फैलाने में जुटा है। उसने एलओसी के पास अपने एसएसजी कमांडो तैनात किए हैं और तनाव बढ़ाते हुए अपनी गजनवी मिसाइल का परीक्षण किया है। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद दोनों देशों के बीच युद्ध होने का समय बता चुके हैं। जबकि प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि दोनों देशों के बीच जंग परमाणु युद्ध की तरफ जा सकता है। पाकिस्तान के हुक्मरान परमाणु युद्ध की धमकी देने लगे हैं। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं।  
दरअसल, परमाणु युद्ध होने पर क्षेत्र में भयंकर तबाही होगी और यह किसी भी देश के हित में नहीं होगा। बुलेटिन ऑफ द एटमिक साइंटिस्ट्स द्वारा एकत्र डाटा यही इशारा करता है कि विगत वर्षों में परमाणु हथियारों के संग्रह पर होड़ में लगातार कमी आई है। जबकि फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट का कहना है कि 1990 के दशक की तुलना में परमाणु हथियारों में कटौती करने की गति में उल्लेखनीय कमी आई है और परमाणु हथियारों की मौजूदा तस्वीर शीत युद्ध के समय से कहीं बेहतर है। आइए एक नजर डालते हैं दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार और इनके इस्तेमाल पर होने वाले प्रभावों पर-
एक-दूसरे को कहीं पर भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं भारत-पाकिस्तान 
भारत और पाकिस्तान दोनों के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो एक-दूसरे के किसी भी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से लैस अपनी मिसाइलों से निशाना बना सकते हैं। भारत के पास परमाणु हथियारों से लैस ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो 350 किलोमीटर से से 5000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती हैं। भारत की मिसाइलों की जद में पूरा पाकिस्तान आता है। जबकि पाकिस्तान की मिसाइल 2750 किलोमीटर तक परमाणु हथियारों से हमला कर सकती है। इसकी मारक क्षमता के दायरे में भारत का अधिकांश क्षेत्र आता है। 

Indian missile
pakistan missileदुनिया ने जापान के शहरों हिरोशिमा एवं नागासाकी पर हुए परमाणु हमले की भयावहता एवं विनाशलीला देखी है। हिरोशिमा पर जो परमाणु बम गिराया गया था वह 15 किलोटन (केटी) टीएनटी का था जबकि नागासाकी पर गिराया गया परमाणु बम 20 (केटी) का था। भारत ने अब तक जो सबसे बड़ा परमाणु बम का टेस्ट किया है उसकी क्षमता 60 केटी की है। यदि 100 केटी का परमाणु बम दिल्ली अथवा इस्लामाबाद पर गिरता है तो दोनों जगहों पर बड़े क्षेत्र में तबाही होगी।
100 केटी का परमाणु बम यदि दिल्ली पर गिरे तो... 
दिल्ली के इंडिया गेट पर यदि 100 केटी की क्षमता वाला परमाणु बम गिरता है तो फॉयरबॉल (दायरा 0.79 किलोमीटर) के क्षेत्र में आने वाली सभी चीजें गैस में तब्दील हो जाएंगी यानि कि इंडिया गेट के 0.79 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी चीजें विलुप्त हो सकती हैं। एयरब्लास्ट-1 का दायरा 3.21 किलोमीटर का होता है। इस दायरे में आने वालीं सभी इमारतें जमींदोज हो जाएंगी और सौ प्रतिशत तबाही होगी। इसका रेडिएशन 10.5 किलोमीटर तक फैलेगा जिससे 50 से 90 प्रतिशत तबाही होगी।

एयरब्रस्ट-2 के दायरे 14.2 किलोमीटर में आने वाली ज्यादातर इमारतें धराशायी हो जाएंगी। परमाणु हमले का थर्मल रेडिएशन 47.9 किलोमीटर तक फैलेगा और 100 प्रतिशत थर्ड डिग्री बर्न की आशंका रहेगी। एयरब्लास्ट-3 का दायरा 93.7 किलोमीटर का होता है। इस दायरे में इमारतों के कांच टूट जाएंगे। परमाणु हमले के विकिरण का प्रभाव बहुत कुछ हवा के बहाव पर निर्भर करेगा। परमाणु हमले से होने वाला विकिरण काफी दूर तक जाता है। दिल्ली पर गिरने वाले बम का विकिरण रेवाड़ी, रोहतक, हिसार, शहारनपुर, अलीगढ़, आगरा और अलवर तक को अपनी चपेट में ले लेगा।  
क्या होता है एयरब्लास्ट
एयर ब्लास्ट हवा में कराया जाता है। परमाणु हमले के एयरब्लास्ट से मचने वाली तबाही अन्य विस्फोटों से कहीं ज्यादा भीषण और कई तरह का प्रभाव वाली होती है। एयरब्लास्ट के बाद वायु में बनने वाला गैस का दबाव एवं विकिरण बड़े पैमाने पर विध्वंस करता है। यह थर्मल रेडिएशन पैदा करता है। हिरोशिमा में परमाणु बम का एयरब्लास्ट हुआ था।  

100 केटी का परमाणु बम इस्लामाबाद पर गिरने पर
इस्लामाबाद पर यदि 100 केटी का परमाणु बम गिरा तो वहां भी दिल्ली जैसी तबाही एवं बर्बादी देखने को मिलेगी। परमाणु हमले से पैदा होने वाले विकिरण के प्रभाव में एबटाबाद, पेशावर, बारामूला, श्रीनगर, पुलवामा और जलालाबाद आएंगे। 

Atom bomकिसके पास हैं कितने परमाणु हथियार
दुनिया के नौ देशों के पास परमाणु हथियारों से संपन्न हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स का अनुमान है कि 2019 तक नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों के पास करीब 13890 न्यूक्लियर वारहेड्स हैं और परमाणु हथियारों का 90 प्रतिशत से ज्यादा जखीरा अमेरिका और रूस के पास है। यही नहीं दुनिया के प्रत्येक 10 परमाणु बमों में से 9 बम रूस और अमेरिका के हैं।

चार देशों ने 'रेडी टू यूज' स्तर पर तैनात किया है वारहेड्स 
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मुताबिक चार देशों ने अपने सैन्य ठिकानों और अंतरमहाद्विपीय मिसाइलों पर 3600 वारहेड्स लगा रखे हैं। ये न्यूक्लियर वारहेड्स परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाले सैन्य बलों के नियंत्रण में हैं। इनमें से 1800 वारहेड्स हाई अलर्ट पर हैं जिनका शॉर्ट नोटिस पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रूस और अमेरिका ने 1600 वारहेड्स, फ्रांस ने 280 और ब्रिटेन ने 120 वारहेड्स तैनात कर रखे हैं। (साभार)

महाभारत युद्ध के बाद क्या फिर से परमाणु हमले में तबाह हो जाएगा पाकिस्तान?

mabharat pakistanभारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान द्वारा  बार बार दी जा रही परमाणु धमकी के जवाब में कहा कि हमारी नीति रही है कि हम परमाणु हथियार का पहले प्रयोग नहीं करेंगे। लेकिन आगे क्या होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। राजनाथ सिंह ने यह बयान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर पोखरण में दिया था। भारत के विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु हमले का इंतज़ार करने के बाद फिर परमाणु हमला करना मूर्खता होगी।
इस बयान के बाद समूचे पाकिस्तान में डर का माहौल कायम हो गया और खौफजदा प्रधानमंत्री इमरान खान ने लगातार कई ट्वीट्स करके भारत के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई है। इमरान खान ने लिखा कि भारत के परमाणु हथियार का नियंत्रण फासीवादी मोदी सरकार के हाथ में है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे केवल क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इमरान खान ने एक ट्वीट में लिखा, "हिन्दुत्ववादी मोदी सरकार केवल पाकिस्तान के लिए ही नहीं बल्कि भारत के अल्पसंख्यकों और 'नेहरू-गांधी के भारत' के लिए भी खतरा है।"
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ज्ञात हो, जब से पाकिस्तान ने परमाणु बनाया है, तब से पाकिस्तान के हुक्ममरान भारत को परमाणु धमकियों से नवाज़ते रहे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने पाकिस्तान की धमकी का माकूल जवाब नहीं दिया। और पाकिस्तान इस धमकी को अपना ब्रह्मास्त्र समझने की भूल में फलीफूत हो, भारत की धरती को लाल करता रहा। समय ने पलटा खाया, कि जब उसी की भाषा में धमकी का जवाब धमकी देते ही, बिलख रहा है। दूसरे, जब भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परिक्षण किए थे, तब भारत के परमाणु का असर दूर देशों तक हुआ था, जबकि पाकिस्तान परमाणु का असर केवल अफ़ग़ानिस्तान तक ही महसूस किया गया था। जो सिद्ध करता है कि भारत के परमाणु पाकिस्तान से कहीं अधिक खतरनाक हैं। 
फिर कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है, जो धूमिल हुए इतिहास को मुखरित कर देता है। पाकिस्तान को रामायण और महाभारत ग्रंथों को अध्धयन करने की जरुरत है।  
क्या महाभारत में छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से नष्ट हुई थी सिंधु घाटी?
अब हम जरा इतिहास में जाते हैं। महाभारत काल में कंबोज, गांधार, कैकय, कुरु, पांचाल, वृत्सु, सीबीर, बल्हिक, यदु और मद्र जनपद अस्तित्व में थे। इन्हीं के कुछ हिस्सों को मिलाकर आज का पाकिस्तान है। दरअसल, उस काल में अधिकतर लोग सिंधु और सरस्वती के किनारे ही रहते थे। यहीं पर उसी काल में सिंधु घाटी की सभ्यता अपने चरम पर थी। यह सभी लोग दृविड़ ही थे जिन्हें आर्य कहा जाता था। वर्तमान में सिंधु घाटी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में हैं।
आज जिस हिस्से को पाकिस्तान और अफगानिस्तान कहा जाता है, महाभारत काल में उसके उत्तरी हिस्से को गांधार, मद्र, कैकय और कंबोज की स्थली कहा जाता था। अयोध्या और मथुरा से लेकर कंबोज (अफगानिस्तान का उत्तर इलाका) तक आर्यावर्त के बीच वाले खंड में कुरुक्षेत्र होता था, जहां यह युद्ध हुआ। उस काल में कुरुक्षेत्र बहुत बड़ा क्षेत्र होता था। आज कल यह हरियाणा का एक छोटा-सा क्षेत्र है।
उस काल में सिन्धु और सरस्वती नदी के पास ही लोग रहते थे। सिन्धु और सरस्वती के बीच के क्षेत्र में कुरु रहते थे। यहीं सिन्धु घाटी की सभ्यता और मोहनजोदड़ो के शहर बसे थे, जो मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी तक फैले थे। सिन्धु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि स्थानों की प्राचीनता और उनके रहस्यों को आज भी सुलझाया नहीं जा सका है। मोहनजोदड़ो सिन्धु नदी के दो टापुओं पर स्थित है।
जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोहनजोदड़ो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था तो उन्होंने देखा कि वहां की गलियों में नरकंकाल पड़े थे। कई अस्थिपंजर चित अवस्था में लेटे थे और कई अस्थिपंजरों ने एक-दूसरे के हाथ इस तरह पकड़ रखे थे, मानो किसी विपत्ति ने उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुंचा दिया था।
उन नरकंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो एक्टिविटी के चिह्न थे, जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गए थे। मोहनजोदड़ो स्थल के अवशेषों पर नाइट्रिफिकेशन के जो चिह्न पाए गए थे, उसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था, क्योंकि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि उसी काल में महाभारत का युद्ध हुआ था। उस दौरान गुरु द्रोण के पुत्र अश्‍वत्थामा ने भगवान कृष्ण के मना करने के बावजूद ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ा, प्रत्युत्तर में अर्जुन ने भी छोड़ा। अश्वत्थामा ने पांडवों के नाश के लिए छोड़ा था और अर्जुन ने उसके ब्रह्मास्त्र को नष्ट करने के लिए। दोनों द्वारा छोड़े गए इस ब्रह्मास्त्र के कारण लाखों लोगों की जान चली गई थी। महाभारत में इस ब्रह्मास्त्र के प्रभाव का वर्णन मिलता है।
तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम।
सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम।
चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा।। महाभारत ।। 8-10-14 ।।
अर्थात : ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगी। सहस्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे। भूतमात्र को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया। आकाश में बड़ा शब्द हुआ। आकाश जलने लगा। पर्वत, अरण्य, वृक्षों के साथ पृथ्वी हिल गई।
महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम दिए गए हैं। यह परिणाम ऐसे ही हैं जैसा कि वर्तमान में परमाणु अस्त्र छोड़े जाने के बाद घटित होते हैं। कुछ जानकारों के अनुसार अश्‍वत्थामा द्वारा छोड़ा गया ब्रह्मास्त्र परमाणु बम जैसा ही था। इसमें इसका उल्लेख भी मिलता है कि ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद 12 वर्ष तक धरती पर निर्जन रहता है। वर्षा नहीं होती है और प्रभावित होने वाले संपूर्ण क्षेत्र में जीव जंतु और सभी तरह के प्राणी मर जाते हैं।
परमाणु बम छोड़े जाने के बाद भी कुछ इसी तरह के प्रभाव होने का उल्लेख मिलता है। आधुनिक काल में जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया ट्रिनिटी (त्रिदेव)। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 का बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह कार्य किया। 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया था।
शोध कार्य के बाद विदेशी वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में महाभारत में परमाणु बम का प्रयोग हुआ था। 42 वर्ष पहले पुणे के डॉक्टर व लेखक पद्माकर विष्णु वर्तक ने अपने शोध कार्य के आधार पर कहा था कि महाभारत के समय जो ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया गया था वह परमाणु बम के समान ही था। डॉ. वर्तक ने 1969-70 में एक किताब लिखी ‘स्वयंभू’। इसमें इसका उल्लेख मिलता है।
एरिक वॉन अपनी बेस्ट सेलर पुस्तक 'चैरियट्स ऑफ गॉड्स' में लिखते हैं, 'लगभग 5,000 वर्ष पुरानी महाभारत के तत्कालीन कालखंड में कोई योद्धा किसी ऐसे अस्त्र के बारे में कैसे जानता था जिसे चलाने से 12 साल तक उस धरती पर सूखा पड़ जाता, ऐसा कोई अस्त्र जो इतना शक्तिशाली हो कि वह माताओं के गर्भ में पलने वाले शिशु को भी मार सके? इसका अर्थ है कि ऐसा कुछ न कुछ तो था जिसका ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया गया अथवा लिपिबद्ध नहीं हुआ और गुम हो गया।'
भारतीय सेना पाकिस्तान का वजूद मिटा देने की क्षमता रखती है फिर भले ही इसमें चीन किसी भी प्रकार का अडंगा डाले। वर्तमान में चीन और पाकिस्तान ने भारत के डर से भारत को उलझाने के लिए कश्मीर और अन्य राज्यों में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। वे दोनों मिलकर दक्षिण एशिया में एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं और आने वाले समय में यदि यह खेल और बढ़ता है तो ऐसी आशंका है कि पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा, क्योंकि भारत अब पहले का भारत नहीं रहा। वर्तमान सरकार की नीति घर में घुसकर मारने की है और जैसा की रक्षा मंत्री राजनाथ ने संकेत दिए हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के हित में पहले भी परमाणु हमला कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं। भारत किसी भी हालत में नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को कोई मौका दिया जाए।
पिछले वर्ष अमेरिका में दक्षिण एशियाई मामलों के एक शीर्ष परमाणु विशेषज्ञ ने दावा किया था कि अगर भारत को यह आशंका हुई कि पाकिस्तान उस पर परमाणु हथियार से आक्रमण कर सकता है तो वह परमाणु का 'पहले इस्तेमाल नहीं करने' की अपनी नीति को संभवत: त्याग सकता है और पाकिस्तान के खिलाफ उसके हमला से पहले ही हमला कर सकता है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दक्षिण एशियाई परमाणु रणनीति के विशेषज्ञ विपिन नारंग ने वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा 'ऐसे दावे बढ़ रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को पहले कदम उठाने की इजाजत नहीं देगा।' उन्होंने कहा कि भारत पहले परमाणु इस्तेमाल नहीं करने की अपनी नीति छोड़ सकता है और अगर उसे शक हुआ कि पाकिस्तान उसके खिलाफ परमाणु हथियारों या 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है तो वह पाकिस्तान के हमला करने से पहले ही हमला कर सकता है। बहरहाल, उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारत का पहले हमला परंपरागत हमला नहीं होगा और वह पाकिस्तान के 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों के मिसाइल लॉन्चरों को भी निशाना बना सकता है।
लेकिन यदि जवाब में पाकिस्तान ने परमाणु हमला किया तो फिर विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत ने जवाब में सिर्फ एक ही परमाणु बम छोड़ दिया तो पाकिस्तान का वजूद ही मिट जाएगा। पाकिस्तान के नदी, तालाब, जंगल सभी जलकर नष्ट हो जाएंगे। यह विश्व की सबसे भयानक त्रासदी होगी। निश्चित ही भारत का जवाब बहुत तगड़ा होगा। क्या आप सोच सकते हैं कि पाकिस्तान के जवाब में भारत चुप बैठा रहेगा? पाकिस्तान और भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को वर्तमान मोदी सरकार की नीतियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। इन्हें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। परन्तु पाकिस्तान ने अपनी फौज के इशारों पर चलते खुद ही अपनी दुर्दशा कर ली है। अगर वर्तमान इमरान सरकार कश्मीर को भूल वहां बढ़ती महंगाई और जनता में होते रोष को शांत करने का प्रयास करती है,तो फौज अपना बगावती तेवर दिखाने में संकोच नहीं करेगी या फिर वहां पनप रहे आतंकवाद पर लगाम कसती है तो भी फौज बगावत पर आकर तख्ता पलट सकती है। स्थिति यह है कि खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर कटना खरबूजे ने ही है, यानि पाकिस्तान सरकार इस समय हाशिये पर है, इस कटु सच्चाई को जानने और समझने की जरुरत है। 

डेटिंग एप पर चैटिंग के दौरान एक युवती की धमकी ; "परमाणु हमले और राष्ट्रपति भवन को उड़ाने की सूचना"

दिल्ली में परमाणु हमले और राष्ट्रपति भवन को उड़ाने की सूचना से फरवरी 20 की रात दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए। पुलिस को सीए के एक छात्र ने फोन किया था। सुरक्षा एजेंसी और दिल्ली पुलिस की टीम युवक की लोकेशन ट्रेस कर लक्ष्मीनगर स्थित उसके घर पहुंची। पूछताछ में पता चला कि एक डेटिंग एप पर चैटिंग के दौरान नोकझोंक होने पर एक युवती ने यह धमकी दी थी।
हरकत में दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसीज 
पुलिस अब युवती की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार, बुधवार(फरवरी 20) रात करीब 10:30 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में एक युवक ने फोन कर दिल्ली में परमाणु हमले और राष्ट्रपति भवन को उड़ाने के बारे में सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। फोन करने वाले युवक की तुरंत लोकेशन ट्रेस की गई। उसकी लोकेशन लक्ष्मीनगर के गुरु रामदास नगर के एक मकान की मिली। टीम फौरन वहां पहुंची और सूचना देने वाले 23 वर्षीय युवक को उठा लिया। सीए की पढ़ाई करने वाले युवक से आईबी, स्पेशल सेल, स्थानीय पुलिस के अलावा अन्य जांच एजेंसियों ने लक्ष्मीनगर थाने में पूछताछ की। इस दौरान उसने चैटिंग के दौरान युवती से झगड़े में धमकी के बारे में बताया।
युवक बोला, देशहित में पुलिस को सूचना दी : युवक ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह डेटिंग एप टिंडर पर एक युवती से चैटिंग कर रहा था। इस दौरान उसकी नोकझोंक हो गई। इस पर युवती ने उसे धमकी देते हुए कहा कि ‘वह उसे जानता नहीं है। अब दिल्ली में परमाणु हमला होगा और राष्ट्रपति भवन भी बम से उड़ जाएगा’। उसने देशहित में पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर सूचना दे दी। पूछताछ के बाद युवक को छोड़ दिया गया। अब पुलिस चैट पर धमकी देने वाली युवती की तलाश कर रही है। ताकि सच्चाई का पता लग सके।
जांच में कुछ संदिग्ध नहीं
सूचना मिलने के बाद राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा को देखते हुए बीडीएस और डॉग स्क्वॉयड की टीम बुलाई गई। इसके बाद टीम की मदद से राष्ट्रपति भवन के आसपास सर्च अभियान चलाया गया। हालांकि, तलाशी के दौरान किसी तरह का कुछ संदिग्ध नहीं मिला।
युवक मानसिक बीमारी से पीड़ित
पुलवामा में आतंकवादी हमले को देखते हुए एजेंसियों की तरफ से सतर्कता बरतते हुए युवक की कॉल डिटेल भी खंगाली गई। साथ ही उसके कमरे की भी जांच की गई। इस दौरान पता चला कि युवक ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ‘ओसीडी’ (एक तरह की मानसिक बीमारी) से ग्रसित है। उसका इहबास अस्पताल में इलाज भी चल रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं बीमारी की वजह से युवक ने झूठी सूचना तो नहीं दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार धमकी देने वाली युवती के पकड़े जाने पर पूरे मामले का खुलासा होगा।(साभार)
वैसे इस बात को गंभीरता से भी लेने की जरुरत है, ज्ञात हो, कई बार पाकिस्तान से छुटपुट आते समाचारों में इस बात के संकेत के मिले थे कि पाकिस्तान ने अपनी शाहीन मिसाइल और परमाणु का रुख भारत के प्रमुख शहरों की ओर कर रखा है। उस समय हमारे रक्षा विशेषज्ञों ने गंभीर चिन्ता भी व्यक्त की थी, परन्तु सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन आज केन्द्र में सत्ता परिवर्तन ने सबकी सोंच में जरुरत से अधिक बदलाव आ गया है। उपरोक्त समाचार से वर्षों पूर्व धूल में पड़ी सूचना को शायद बल मिल गया है। दूसरे आज आतंकवादी "हनीट्रैप" का भी भरपूर प्रयोग कर रहे हैं, जिससे हर देशप्रेमी को सतर्क रहने की जरुरत है।