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10,000 करोड़ रूपए का घोटाला : 4500 चर्च पर जिसका नियंत्रण उसे अब नहीं मिलेगा विदेशी फंड, ईसाई संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द

'                                        चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया' का FCRA लाइसेंस रद्द हो गया है (चित्र साभार: CWM)
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने देश के बड़े ईसाई संगठन ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ (CNI) एनजीओ का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है। अब यह संगठन विदेशी चंदा नहीं ले सकेगा। यह ईसाई संगठन पिछले पाँच दशक से भारत में ईसाइयत को फैलाने का काम कर रहा है।

इस ईसाई संगठन को अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा समेत यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों से भी बड़ी मात्रा में चंदा मिलता है। अब इस ‘चर्च ऑफ नार्थ इंडिया’ का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है, यह खबर अंग्रेजी समाचार वेबसाइट ‘इकॉनोमिक टाइम्स‘ ने दी है। गृह मंत्रालय विदेशी चंदे के नियमों का उल्लंघन करने पर ये कार्रवाई करता है।

                                                                    CNI का एक पोस्टर

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ को वर्ष 1970 में 6 अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। इसके अंतर्गत चर्च ऑफ़ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा (म्यांमार), सीलोन (श्रीलंका) के तथा कुछ अन्य ईसाई संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। यह उत्तर भारत में चर्च का नियन्त्रण करने वाली संस्था है।

इस संस्था का दावा है कि 22 लाख लोग इसके सदस्य हैं। इसके अलावा यह भारत के 28 क्षेत्रों में अपने बिशप रखता है जो कि वहाँ के चर्च पर नियंत्रण रखते हैं। इसके अलावा ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ का दावा है कि इसके पास 2200 से अधिक पादरी हैं और 4500 से अधिक चर्च इसके नियन्त्रण में हैं।

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ के अंतर्गत 564 स्कूल और कॉलेज तथा 60 नर्सिंग एवं मेडिकल कॉलेज चलते हैं। ऐसा इसकी वेबसाइट बताती है। देश में प्रसिद्ध लखनऊ का लॉ मार्टिनियर कॉलेज भी इसी के अंतर्गत है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे प्रदेशों में स्थित कई मिशनरी स्कूल भी इसके अंतर्गत आते हैं।

CNI के कुछ पादरियों पर वर्ष 2019 में ₹10,000 करोड़ के जमीन घोटाले का आरोप लगा था। इस मामले में संगठन के कुछ पादरियों ने अपने ही साथियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कागजों में गड़बड़ी करके सैकड़ों एकड़ जमीन बेच दी। बीते कुछ समय में ऐसे कई NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं जो कि विदेशों से फंड लेकर यहाँ गड़बड़ियाँ फैला रहे थे। यह NGO विदेशों से लिए गए पैसों का स्पष्ट हिसाब भी नहीं रख रहे थे। इनमें ऑक्सफैम, सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च और राजीव गाँधी फाउंडेशन जैसे कुछ NGO शामिल रहे हैं।

राज्यसभा में दिसम्बर 2022 में दी गई एक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2022 के बीच में गृह मंत्रालय ने 6677 NGO के विदेशी चंदा लेने के लाइसेंस खत्म किए हैं। यह सभी विदेशी चंदा लेकर गड़बड़ी करने के दोषी पाए गए थे। ऑपइंडिया ने ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ की वेबसाइट पर दिए गए नम्बर पर सम्पर्क किया तो जवाब आया कि उन्हें अभी इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। वह मामले की जानकारी ले कर आगे बताएँगे।

जामिया मिलिया, इस्लामिक सेंटर और OXFAM अब विदेशों से नहीं ले सकेंगे चंदा, लगभग 6000 NGO का FCRA लाइसेंस रद्द

                                                     साभार: अमर उजाला
जामिया मिलिया, इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, ऑक्सफैम इंडिया सहित लगभग 6,000 गैर-सरकारी संगठन यानि एनजीओ (NGO) अब विदशों से दान या चंदा नहीं ले सकेेंगे। इन संगठनों का विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस 31 दिसंबर को समाप्त हो गया। इनमें से कुछ संगठनों के लाइसेंस को निरस्त भी कर दिया गया है, जबकि अधिकांश ने लाइसेंस रिन्युअल के लिए आवेदन ही नहीं दिया।

FCRA की सूची में से 5,789 संगठनों को बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था। यह विदेशी धन प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, 179 संगठनों के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया। दस्तावेजों की जाँच के दौरान इन संगठनों को FCRA नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

मंत्रालय ने बताया कि इन संस्थानों को 31 दिसंबर से पहले FCRA नवीनीकरण के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही इन्हें कई बार रिमाइंडर भी भेजा गया था। इसके बावजूद इन संस्थानों ने आवेदन नहीं किया। मंत्रालय ने कहा कि अब इन संगठनों को विदेशों से चंदे लेने की इजाजत नहीं होगी।

FCRA लाइसेंस गँवाने वाले संस्थानों में ऑक्सफैम इंडिया ट्रस्ट जैसे विवादित एनजीओ भी हैं। इसके अलावा, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), लेप्रोसी मिशन, ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर भी इस सूची में शामिल हैं।

आईआईटी दिल्ली, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल फाउंडेशन, लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन, दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय, इमैनुएल हॉस्पिटल एसोसिएशन, विश्व धर्मायतन, महर्षि आयुर्वेद प्रतिष्ठान, नेशनल फेडरेशन ऑफ फिशरमेन कोऑपरेटिव्स लिमिटेड भी अब विदेशों से दान ले पाएँगे।

देश में शुक्रवार (31 दिसंबर) तक 22,797 संगठन FCRA के तहत पंजीकृत संगठन थे। अब सिर्फ देश में 16,829 संगठन रह गए हैं, जो FCRA के तहत रजिस्टर्ड हैं। 31 दिसंबर 2021 तक 5,968 संगठनों (5,789 ने आवेदन नहीं किया + 179 उल्लंघन के लिए खारिज कर दिया) को हटा दिया गया।

इससे पहले 25 दिसंबर को मदर टेरेसा द्वारा कोलकाता में स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी को पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसको लेकर केंद्र पर निशाना साधा था। वहीं, गृह मंत्रालय ने ऐसी किसी से कार्रवाई से इनकार किया था।

केरल के NGO का लाइसेंस रद्द : ‘भारत के ग्रैंड मुफ़्ती’ की संस्था को 146 करोड़ रूपए का विदेशी चंदा

शेख अबूबकर अहमद (फोटो साभार: Muslim Mirror)
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA), 2010 के प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रमुख सुन्नी नेता शेख अबूबकर अहमद से जुड़े केरल के एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के विदेशी फंडिंग लाइसेंस को निलंबित कर दिया है।

केंद्र सरकार को अन्य NGOs की भी गंभीरता  जाँच करनी चाहिए। कई NGOs ऐसे भी हैं, जो जो पाठ्यक्रम वितरित करने के नाम पर धांधली कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन पुस्तक विक्रेता से पाठ्यक्रम ख़रीदा जा रहा है, उसकी भी जाँच होनी चाहिए।  

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। मरकज़ुल इघासथिल कैरियाथिल हिंडिया (Markazul Ighasathil Kairiyathil Hindiyya) नामक NGO कोझीकोड के पास स्थित है। यह एक टॉप विदेशी वित्त पोषित संगठन है। इस संगठन को पिछले तीन वर्षों में विदेशों से 146 करोड़ रुपए से अधिक का डोनेशन मिला है। हालाँकि, गृह मंत्रालय ने NGO को FCRA मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पाया। जिसके बाद इसे पूर्व अनुमति के बिना या निलंबन आदेश के निरस्त होने तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय डोनर्स से धन प्राप्त करने से रोक दिया।

27 अगस्त, 2021 को जारी निलंबन आदेश में कहा गया कि गैर सरकारी संगठन FCRA मानदंडों का उल्लंघन करते हुए विदेशी योगदानों का अनुचित उपयोग किया और साथ ही वर्ष 2019-20 के लिए वार्षिक FCRA रिटर्न जमा करने में विफल रहा।

 NGO के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने गृह मंत्रालय से मिले निलंबन आदेश को मामूली बताने की कोशिश की। अधिकारी ने कहा कि कुछ लिपिकीय त्रुटियों (clerical errors) के कारण निलंबन हुआ। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ग्रुप आदेश को पढ़ने के बाद स्पष्टीकरण जारी करेगा।

हालाँकि, एक सरकारी अधिकारी, जिनसे टाइम्स ऑफ इंडिया ने बात की थी, ने कहा कि मरकज़ुल के एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित करने का निर्णय एक उचित जाँच प्रक्रिया का पालन करने के बाद लिया गया था। 05.04.2018 को एनजीओ को सवालों की एक लिस्ट भेजी गई थी। अधिकारी ने कहा कि सवालों के जवाब ने पुष्टि की कि एसोसिएशन ने एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi), धारा 18 और धारा 19 का उल्लंघन किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जमीन की खरीद के लिए एसोसिएशन को 50 लाख रुपए का विदेशी फंड मिला। हालाँकि, 13.01.2015 को, भूमि सौदे को रद्द करने पर गैर सरकारी संगठन को राशि वापस मिल गई। यह राशि विदेशी योगदानकर्ता के बैंक अकाउंट में जमा नहीं किया गया। मरकजुल ने कहा कि पैसे अनाथ देखभाल कार्यक्रम के लिए वितरित किया गया था। हालाँकि, जाँच और एनजीओ के रिकॉर्ड से पता चला कि राशि प्राप्त करने से छह महीने पहले जुलाई 2014 से दिसंबर 2014 के बीच ही यह नकद ट्रांसफर किया गया था।

गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, “रद्द किए गए लैंड डीड के कारण प्राप्त 50 लाख रुपए की राशि का हिसाब नहीं है और ऐसा मालूम होता है कि इसका दुरुपयोग किया गया है। यह एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi), धारा 18 और धारा 19 का उल्लंघन था।”

एसोसिएशन पर व्यक्तिगत जरूरतों के लिए समूह द्वारा प्राप्त धन का उपयोग करने का भी आरोप है। गृह मंत्रालय ने एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi) का एक और उल्लंघन बताते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि संगठन के पैसे से वाहन किसी व्यक्ति के नाम पर खरीदा गया था न कि एसोसिएशन के नाम पर। आदेश में यह भी कहा गया है कि एनजीओ ने वक्फ बोर्ड ऑफ इंडिया से इस्लामिक एजुकेशन बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा लीज पर ली गई जमीन पर इमारत के निर्माण के लिए विदेश से प्राप्त धन का उपयोग किया था।

इसके अलावा, मरकजुल ने वर्ष 2019-20 के लिए अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं किया, जो एफसीआरए की धारा 18 का उल्लंघन है। शेख अबुबकर अहमद उर्फ ​​कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार केरल के राजनेताओं में एक प्रमुख व्यक्ति हैं और उनके अनुयायियों द्वारा उन्हें ‘भारत का ग्रैंड मुफ्ती’ कहा जाता है। उन्हें 2000 में मरकज़ुल की स्थापना का श्रेय दिया जाता है और वे शिक्षा, सांस्कृतिक बहाली, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और स्वच्छता आदि जैसे क्षेत्रों से संबंधित कार्यों में शामिल हैं। वह जामिया मरकज़ के चांसलर, सिराज डेली के अध्यक्ष और अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलमा के महासचिव भी हैं। 

केरल के NGO में क्या पाया?

                                                                            Source: The NGO’s FC-4 form

हमने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए FCRA ऑनलाइन वेबसाइट से मरकजुल इघासथिल कैरियाथिल हिंडिया द्वारा जमा किए गए एफसी-4 फॉर्म को एक्सेस किया। इससे हमें पता चला कि वित्तीय वर्ष के दौरान संगठन को एक विदेशी स्रोत से 70,15,29,185.06 रुपए प्राप्त हुए।

35 लिस्टेड विदेशी योगदानों में से 28 यूएई से थे। अन्य ओमान, तुर्की और यूनाइटेड किंगडम से थे। यूएई रेड क्रिसेंट सोसाइटी और दुबई चैरिटी एसोसिएशन ने समूह को बड़ी रकम दान की है।

पिछले वित्तीय वर्ष, 2017-18 में ग्रुप को 33,61,18,095.60 रुपए विदेशी योगदान के रूप में मिला। यूएई ने फिर से सबसे अधिक दान किया था।

गृह मंत्रालय ने दिया ग्रीन सिग्नल : उमर खालिद और शरजील इमाम पर चलेगा UAPA के तहत मुकदमा

                            शरजील इमाम और उमर खालिद पर चलेगा यूएपीए अधिनियम के तहत मुकदमा
उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों और हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। ऐलान के मुताबिक़ जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरलीज इमाम पर गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने को हरी झंडी दिखा दी गई है। यानी उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। 

कुछ महीनों पहले ही उमर खालिद पर फरवरी के दौरान राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों की जाँच होने के बाद उमर खालिद को यूएपीए अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

क़ानूनी प्रक्रिया को मद्देनज़र रखते हुए किसी भी व्यक्ति पर यूएपीए के तहत मामला चलाने के लिए गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गृह मंत्रालय ने लगभग एक हफ्ते पहले इस पर स्वीकृति जारी की थी। बहुत जल्द दिल्ली पुलिस उमर खालिद और शरजील इमाम के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दायर करने जा रही है। 

इसके अलावा कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 30 दिन तक बढ़ाने के लिए अर्जी लगाई थी। उमर खालिद के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह पुलिस को जाँच के दौरान पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस की तरफ से इस तरह का आरोप लगाना कि उमर पुलिस की जाँच प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा है, यह आरोप निराधार है। उमर की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई अर्जी सरासर गलत है। 

वहीं दिल्ली पुलिस ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष रखा था। दिल्ली पुलिस का कड़कड़डूमा अदालत के समक्ष कहना था कि मामले की जाँच हो रही है इस बात को मद्देनज़र रखते हुए उमर खालिद को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। फ़िलहाल उमर खालिद न्यायिक हिरासत में ही है और पुलिस इस मामले से जुड़े अहम पहलुओं की जाँच कर रही है। 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार (13 सितंबर 2020) को गिरफ्तार किया था। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोध के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद पर उन दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। 

वहीं शरजील इमाम ने पिछले साल सीएए विरोधी प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ बयान देकर असम को भारत से अलग करने की बात की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शरजील ने कई दिनों तक पुलिस से बचने का प्रयास किया। मगर बाद में उसकी गिरफ्तारी बिहार के जहानाबाद से हुई थी। पूछताछ में पता चला था कि शरजील भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। अपने इस काम के लिए उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे।

अपने घृणित विवादित बयान शरजील इमाम ने कहा था, “हमारे पास संगठित लोग हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो एक-दो महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से कट कर ही सकते हैं। रेलवे ट्रैक पर इतना मलबा डालो कि उनको एक महीना हटाने में लगेगा… जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।”

टेरर फंडिंग और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल बॉलीवुड का पाकिस्तानी ‘इवेंट मैनेजर’ रेहान सिद्दीकी बैन

रेहान सिद्दीक़ी
रेहान सिद्दीकी 
पाकिस्तानी मूल के इवेंट मैनेजर रेहान सिद्दीकी पर भारत सरकार ने बैन लगा दिया है। वह​ बॉलीवुड कलाकारों का विदेश में शो आयोजित करवाता है।
रेहान पर टेरर फंडिंग का आरोप है। भारत विरोधी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता पाई गई है। 17 फरवरी को शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने इस मसले पर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था।
इसके जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया है कि इस मुद्दे की जाँच और ह्यूस्टन के कांसुलेट जनरल की सलाह पर रेहान सिद्दीकी, राकेश कौशल और दर्शन मेहता को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि वॉशिंगटन डीसी में भारत के दूतावास और ह्यूस्टन में भारत के कांसुलेट जनरल से भी अनुरोध किया गया है कि वे प्रसिद्ध लोगों, कल्चरल बॉडीज, बॉलीवुड से संबद्ध’ स्थानीय संस्थाओं से भारतीय एक्टर और कलाकारों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों दूर रहने का सन्देश दे।
कौन है रेहान सिद्दीकी?
यह मुद्दा इस साल की शुरुआत में सामने आया जब रेहान सिद्दीकी का संबंध बॉलीवुड के इवेंट्स का आयोजन करने के साथ भारत विरोधी गतिविधियों के प्रचार-प्रसार करने और कश्मीर में आतंक बढ़ाने के लिए उसके द्वारा किए जा रहे फंडिंग का पता चला।
फरवरी में रेहान सिद्दीकी बॉलीवुड सेलेब्रिटी एवेंट्स के जरिये मिलने वाले राजस्व से कश्मीर में भारत विरोधी तत्वों को कथित रूप से सहायता करने को लेकर भारतीय अधिकारियों के रडार पर था।
रेहान सिद्दीक़ी पाकिस्तानी है। वह ह्यूस्टन में एक रेडियो चैनल का मालिक है। वह रेडियो चैनल का दुरुपयोग कर नियमित रूप से कश्मीर और भारत में आतंकवादी गतिविधियों की जासूसी करता है और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देता है। रेहान सिद्दीकी के पास संगीत और रेडियो उद्योग में व्यापक अनुभव था। इसके साथ दक्षिण एशिया, विशेषकर बॉलीवुड के सितारों के साथ रेहान सिद्दीकी ने 400 से भी ज़्यादा कॉन्सर्ट्स का सफलतापूर्वक आयोजन कराया है।
ह्यूस्टन में एक भारतीय सदस्य ने बताया कि “वह एक रेडियो चैनल का मालिक है और भारतीय कलाकारों को ह्यूस्टन आमंत्रित कर बॉलीवुड सिंगिंग इवेंट्स का आयोजन करता है। अपने रेडियो चैनल का इस्तेमाल वो भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने के लिए करता है”।
संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने सिद्दीकी का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने भारत सरकार से आईएसआई (ISI) एजेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में बॉलीवुड हस्तियों को भाग लेने से मना करने का आग्रह भी किया था। उन्होंने माँग की है कि सरकार को बॉलीवुड हस्तियों को शो में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा है कि सिद्दीकी और अन्य पाकिस्तानी नागरिक सीएए को लेकर ह्यूस्टन में इसका विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे ह्यूस्टन के सिख समुदाय में खालिस्तानी विचारधारा के लिए हमदर्दी पैदा करने का काम भी करते हैं। सिद्दीकी के रेडियो चैनल पर पुलवामा हमले और उसके बाद हुए बालाकोट हमले के मद्देनजर भारत विरोधी प्रचार चलाने का भी आरोप है।
2019 में, FWICE ने गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ को पाकिस्तानी रेहान सिद्दीकी द्वारा प्रचारित शो में नहीं परफॉर्म करने के लिए कहा गया था। इसके बाद दोसांझ ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाल कर यह जानकारी दी थी कि वह शो और किसी पाकिस्तानी नागरिक के बीच किसी भी लिंक से इनकार करते हुए अपने अमेरिकी दौरे को स्थगित कर देंगे। उन्होंने संदेश दिया, “मैं अपने देश से प्यार करता हूँ और राष्ट्र के हित के लिए हमेशा खड़ा रहूँगा।”
वहीं फरवरी 2020 में, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने भी रेहान सिद्दीकी के खिलाफ लगाए गए आतंकी फंडिंग के आरोपों की वजह से अपने कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।

हॉस्टल खाली करो और घर जाओ : जामिया इस्लामिया का फरमान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने तत्काल प्रभाव से छात्रों को हॉस्टल (गर्ल्स और ब्यॉयज) खाली करने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से छात्रों को निर्देश देते हुए कहा गया है कि सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइंस का पालन करते हुए छात्र अपने घर जा सकते हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय ने यह आदेश शुक्रवार (मई 1, 2020) को जारी किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के लिए सरकार की नई गाइडलाइंस में ट्रांसपोर्ट और ट्रैवल प्रोटोकॉल है। गौरतलब है कि लॉकडाउन घोषित किए जाने के कारण कई छात्र अपने घर नहीं जा सके थे और हॉस्टल में ही रुके हुए हैं। 
लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे लोगों को घरों तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकारों की अपील के बाद भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें भी चला रही हैं। वहीं कई राज्य सरकारों ने विशेष बसों के माध्यम से अपने राज्यों के छात्रों की वापसी सुनिश्चित करवाई है। 
इन व्यवस्थाओं के शुरू होने के बाद जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से हॉस्टल खाली करने को कहा है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ए.पी. सिद्धकी ने शुक्रवार देर रात एक पत्र जारी करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी हॉस्टल में रह गए थे, उन्हें अब हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया जाता है। विश्वविद्यालय के आसपास का क्षेत्र पहले ही हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना कठिन होगा।”
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में मौजूद छात्रों से कहा, “आप सभी को मालूम है कि कोरोना वायरस के कारण विश्वविद्यालय बंद है। यहाँ लाइब्रेरी समेत सभी शैक्षणिक गतिविधियाँ पूरी तरह से बंद हैं। विश्वविद्यालय जुलाई में परीक्षाएँ लेगा और इसी के साथ नया सत्र सितंबर 2020 से शुरू होगा।”
गृह मंत्रालय ने राज्यों को अपने निवासियों को बसों में वापस लाने की अनुमति दे दी है। इसके बाद केंद्र सरकार ने फँसे हुए प्रवासियों को घर पहुँचाने के लिए ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ की शुरुआत की है। इन ट्रेनों में प्रवासी मजदूरों के अलावा विभिन्न राज्यों में फंसे स्टूडेंट्स, शरणार्थी, टूरिस्ट को भी घर भेजा जा रहा है।
यात्रा से पहले सभी यात्रियों की स्कीनिंग की जा रही है और केवल उन्हीं लोगों को भेजा जा रहा है, जिनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं दिखाई नहीं दे रहे। इसके साथ ही मास्क पहनना अनिवार्य है। साथ ही यात्रियों को ट्रेन में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडियन रेलवे ने साफ कर दिया है कि टिकट खरीदने के लिए कोई भी पैसेंजर रेलवे स्टेशन नहीं जाएगा। पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अभी शुरू नहीं किया गया है।
इन ट्रेनों में केवल राज्य सरकार द्वारा चिन्हित किए गए और ​रजिस्टर किए गए लोगों को ही ट्रैवल करने का मौका मिलेगा। गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, राज्यों द्वारा ही इन यात्रियों को टिकटों की व्यवस्था की जाएगी। व्यक्तिगत तौर पर किसी को भी रेलवे टिकट नहीं जारी करेगा।

रोहिंग्या मुसलमान : गृह मंत्रालय ने पुलिस को कहा – सबको ढूँढो

रोहिंग्या मुसलमान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश में जारी कोरोना के कहर के बीच शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर रोहिंग्याओं मुसलमानों का पता लगाने का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी रिपोर्ट मिली है कि निजामुद्दीन मरकज की शिविर में तबलीगी जमात के लोगों के साथ कुछ रोहिंग्या मुसलमान भी शामिल हुए थे। मंत्रालय ने इन रोहिंग्या मुसलमानों को खोजने के लिए चार राज्यों को प्रमुख स्थानों के रूप में चिह्नित किया है। ये राज्य हैं- नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा।
गृह मंत्रालय द्वारा राज्य पुलिस प्रमुखों और मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमानों ने तबलीगी जमात के ‘इज्तेमास’ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया है और उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना है। पत्र में हैदराबाद, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, जम्मू और मेवात में शिविरों में रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान के लिए विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है, जहाँ पर अधिकतर रोहिंग्या रहते हैं।
सभी राज्यों के पुलिस प्रमुखों को रोहिंग्या शरणार्थियों का पता लगाने के लिए एक गहन अभ‍ियान चलाने को कहा गया है क्योंकि उनमें से कई अपने निर्धारित श‍िविरों से लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि हैदराबाद के शिविर में रहने वाले रोहिंग्या हरियाणा के मेवात में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और वे दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मरकज भी आए थे। इसी तरह, दिल्ली के श्रम विहार और शाहीनबाग इलाके में रह रहे रोहिंग्या भी तबलीगी जमात के कार्यक्रम में गए थे लेकिन वे वापस अपने शिविरों में नहीं लौटे।


मंत्रालय ने बताया कि ऐसी खबर है कि पंजाब के डेराबस्सी और जम्मू-कश्मीर के जम्मू इलाके में रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं और वे तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे हैं। राज्यों से किए गए संवाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों और उनके संपर्क में आने वालों की कोविड-19 जाँच कराने की जरूरत है और इसी के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने की जरूरत है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज अगर देश में कोरोना की इतनी भयावह स्थिति बनी है तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ तबलीगी जम.....
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक देश में 40 हजार रोहिंग्या दिल्ली, जम्मू और हैदराबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। पिछले महीने जम्मू में रहने वाले आठ रोहिंग्या मुस्लिमों को निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होकर लौटने के बाद क्वारंटाइन में रखा गया था। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में 500 से अधिक कोरोना वायरस पॉजिटिव केस और देश में लगभग 20 मौतें दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात कार्यक्रम से जुड़े पाए गए।

'अमित शाह को अगर रक्षा मंत्रालय मिला तो हल हो जाएगा पाकिस्तान का सवाल'

नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री के पद की शपथ लेने के बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि नरेंद्र मोदी से देश के साथ साथ दुनिया की भी उम्मीदें बढ़ी हैं, मोदी की सरकार उसी दिशा में उड़ान भरेगी ऐसी उम्मीद भी की जा रही है। शिवसेना ने अपने लेख में लिखा है कि मोदी सरकार-2 का चेहरा भी नरेंद्र मोदी ही है, उनके मंत्रिमंडल के मोहरे क्या करते है ये देखना होगा? इस लेख में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की तारीफ करते हुए उन्हें बीजेपी की जीत की शिल्पकार बताया है पार्टी ने लिखा है कि अब शाह के पास पूरा नियंत्रण आ गया है, अब मोदी की तरफ से सरकार पर भी उनका नियंत्रण रहेगा। 
वैसे अटकलों का बाजार गर्म है, परन्तु होगा वही जो मोदी और अमित चाहेंगे। गृह या फिर रक्षा ही अमित के अधिक उपयुक्त हैं।गृह इसलिए भी जरुरी है कि स्मरण हो, राममन्दिर बनने पर या फिर कश्मीर से अनुच्छेद 350 और 35A समाप्त करने की स्थिति में आतंकवाद की आड़ में पाकिस्तान समर्थक महबूबा मुफ़्ती और छद्दम देशप्रेमी नेताओं के संरक्षण में दंगे आदि से देश का माहौल ख़राब करने की स्थिति में सख्त गृह मन्त्री ही कारगर सिद्ध होगा, जो सात तालों से दंगाइयों को निकाल उनके उचित स्थान पर पहुँचा सके।    
अमित शाह के आने से पूर होंगे रुके हुए यह काम
शिवसेना के मुताबिक शाह को रक्षा विभाग मिला तो पाकिस्तान का सवाल हमेशा के लिए हल हो जाएगा, गृह विभाग मिला तो अयोध्या में राम मंदिर आसानी से बन जाएगा, इसके अलावा कश्मीर में धारा-370 और 35A रद्द करने की घोषणा उन्होंने की है उस कार्य को गति मिलेगी, समान नागरिक कानून लागू हो ऐसी अमित शाह की ही इच्छा थी, देश भावना वही होने के कारण समान नागरिक कानून के बारे में वीर सावरकर का सपना साकार होगा, नक्सलवाद और माओवादियों के हिंसाचार को खत्म किया जा सकेगा, शाह यदि वित्तमंत्री बने तो विकास कार्यों को और आर्थिक सुधारों को गति मिलेगी मुख्य रूप से ‘डॉलर’ की तुलना में रुपए में गिरावट रोज हो रही है इस गिरावट पर लगाम लगेगी शाह के आने से मोदी सरकार को बल मिलेगा 

मोदी शाह को मंत्रिमंडल में जो चाहिए था वो मिला
सामना के लेख में शिवसेना ने लिखा है, 'मोदी और शाह को जो लोग चाहिए थे, वही मंत्रिमंडल में आए और जो नहीं चाहिए थे वे बाहर रहे मंत्रिमंडल की तस्वीर अब स्पष्ट हो गई है राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी को छोड़ दिया जाए तो ‘दिग्गज’ या ‘हैवीवेट’ कहा जाए, ऐसा विशेष कोई दिखाई नहीं दे रहा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण नाम अमित शाह का हैभाजपा की जीत के शिल्पकार अमित शाह हैं ही इसलिए उनके मंत्रिमंडल में आने के बारे में अटकलें लगाई जा रही थीं भाजपा पर शाह का पूरा नियंत्रण आ गया है अब मोदी की तरफ से सरकार पर भी उनका नियंत्रण रहेगा'

कौन लेगा सुषमा और प्रभु की जगह
शिवसेना ने आगे लिखा, 'मोदी सरकार में अब सुषमा स्वराज नहीं हैं सुरेश प्रभु दिखाई नहीं दे रहे नीतीश कुमार की जनता दल (यू) ने मोदी मंत्रिमंडल में शामिल न होने की भूमिका अपनाई है हालांकि उनकी इस भूमिका पर बाद में चर्चा की जाएगी किन फिलहाल सभी राज्यों के नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की कोशिश की गई है सच तो यह है कि कोशिश कहने की बजाय इसे कसरत ही कहना पड़ेगा एस. जयशंकर विदेश विभाग के सचिव थे और उन्होंने मंत्रिपद की शपथ ली है महाराष्ट्र से संजय धोत्रे शामिल हुए हैं'

शिवसेना ने आगे लिखा है, 'पश्चिम बंगाल को अच्छा प्रतिनिधित्व मिला है पश्चिम बंगाल की अगली लड़ाई जीतने की ही यह योजना है इस राज्य की आधी लड़ाई जीत ली गई है बचा हुआ युद्ध जीतने के लिए बंगाल के सरदार मोदी मंत्रिमंडल में आए हैं नरेंद्र मोदी दिल्ली में जब एक बार फिर विराजमान हो रहे थे तब देश के साथ ही दुनिया की भी उम्मीदें बढ़ी हैंमोदी की सरकार उस दिशा में ऊंची उड़ान भरेगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है मोदी-2 सरकार का चेहरा मोदी ही है उनके मंत्रिमंडल के मोहरे क्या करते हैं यह देखना होगा।अन्यथा अमित शाह का चाबुक वहां है ही'

कोलकाता में निजी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस कर रहे हैं CBI अधिकारी

CBI vs Mamataकेन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से राज्य के मौजूदा हालात का जायजा लेने को कहा है। अधिकारियों ने फरवरी 4 को उक्त जानकारी दी। गौरलतब है कि शारदा पोंजी घोटाला मामले में कोलकाता पुलिस आयुक्त से पूछताछ करने पहुंचे सीबीआई के एक दल को दरवाजे पर ही रोकने और उसे हिरासत में लेने के बाद से राज्य में गंभीर स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मामले को लेकर फरवरी 3 की रात से धरने पर बैठी हुई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के आधिकारिक और आवासीय परिसर में केंद्रीय बलों को तैनात करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्रालय स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है।’ अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय को फरवरी 3 की शाम जानकारी मिली थी कि ‘‘उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत शारदा घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी कोलकाता में निजी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस कर रहे हैं।’
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उन्होंने बताया कि राजनाथ सिंह ने राज्यपाल को सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने, धमकाने और उनकी कार्रवाई को बाधित किए जाने की दुर्भाग्यपूर्ण और अभूतपूर्व स्थिति से जुड़े तथ्यों से अवगत होने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार त्रिपाठी ने राजनाथ सिंह से कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तलब किया है और स्थिति से निपटने के लिए उन्हें तत्काल कदम उठाने का निर्देश भी दिया है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई संयुक्त निदेशक के आवास को कोलकाता पुलिस द्वारा घेरे जाने की भी खबरें हैं।

भीमा कोरेगांव केस: माओवादियों-एक्टिविस्‍ट्स में संपर्क के हैं 'साक्ष्‍य'-- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पांच एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद एक्टिविस्‍ट्स की नजरबंदी 4 सप्‍ताह और रहेगी। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच एसआईटी से कराने की अपील भी ठुकरा दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्‍टया माओवादियों से संपर्क रखने के साक्ष्‍य मिले हैं।
भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पांच एक्टिविस्ट्स- वरवरा राव, अरुण फरेरा, वरनॉन गोंजालविस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है। इतिहासकार रोमिला थापर ने पहले उनकी गिरफ्तारी और फिर उन्‍हें उनके घरों में नजरबंद किए जाने को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम बातें:
*कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एक्टिविस्‍ट्स की गिरफ्तारी दुर्भावनापूर्ण नहीं दिखती
*शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी जांच एजेंसी का चयन नहीं कर सकते
*सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की अपील खारिज करते हुए पुणे पुलिस को मामले की जांच जारी रखने को कहा है
*शीर्ष अदालत ने हालांकि एक्टिविस्‍ट्स को राहत के लिए निचली अदालत में अपील करने की अनुमति दी
*चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर ने कहा कि ये गिरफ्तारियां राजनीतिक असहमतियों की वजह से नहीं हुईं, बल्कि प्रथम दृष्‍टया ऐसे साक्ष्‍य मिलते हैं, जिससे माओवादियों के साथ उनके संबंधों के बारे में पता चलता है
*जस्टिस चंद्रचूड़ का फैसला हालांकि अलग रहा। उन्होंने इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस की जांच के तरीकों पर पर सवाल उठाए और एक्टिविस्‍ट्स की गिरफ्तारी को उनकी 'आवाज दबाने का प्रयास' बताया
*जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच के लिए बिल्कुल उपयुक्‍त मामला है। उन्‍होंने पुणे पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि मामले में कोर्ट में होने के बाद भी पुलिस ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की और 'पब्लिक ओपिनियन' बनाने का प्रयास किया
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गिरफ्तार किए गए आरोपी भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सुप्....

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में इतिहासकार रोमिला थापर के अतिरिक्‍त अर्थशास्‍त्री प्रभात पटनायक व देवकी जैन, समाजशास्‍त्र के प्रोफेसर सतीश देशपांडे और मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले माजा दारुवाला भी शामिल हैं। उन्‍होंने एक्टिविस्‍ट्स की तत्‍काल रिहाई के साथ-साथ इस मामले की स्‍वतंत्र जांच कराए जाने की मांग भी की थी।
इतिहासकार सहित अन्‍य बुद्धिजीवियों ने इनके खिलाफ आरोपों को मनगढ़ंत बताया। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपियों और माओवादियों के बीच संंपर्क के प्रथम दृष्‍टया साक्ष्‍य मिलते हैं।  इससे पहले कोर्ट ने 20 सितंबर को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। महाराष्ट्र पुलिस ने एक्टिविस्‍ट्स को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वे 29 अगस्‍त से ही अपने घरों में नजरबंद हैं।

देश में गृहयुद्ध छेड़ने के अलावा PM मोदी को मारने की साजिश रच रहे थे गिरफ्तार बुद्धिजीवी: देवेंद्र फडणवीस

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में नक्सल कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तारी के बाद नजरबंद किए गए एक्टिविस्ट्स को लेकर लगातार आलोचना झेल रही भाजपा शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फ्रंटफुट पर आ गई है। कांग्रेस इन गिरफ्तारियों के लेकर सरकार पर लगातार हमले कर रही थी। इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।
सितम्बर 28 को सुप्रीम कोर्ट ने पांचों एक्टिविस्ट्स की तुरंत रिहाई और इस प्रकरण की एसआईटी जांच के गठन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। इस फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हम फैसले का स्वागत करते हैं। जांच के आधार पर पुणे पुलिस को जो सबूत मिले हैं उसे स्वीकार किया गया और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले में दखल नहीं दे सकता है।View image on Twitter
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We welcome the decision. On basis of investigation conducted & evidence collected by Pune Police, it has been considered valid & SC has said it'll not interfere in the investigation: Maharashtra CM Devendra Fadnavis on SC upholds arrests of 5 activists in matter
उन्होंने आगे कहा 'वे देश में गृहयुद्ध छेड़ने का प्रयास कर रहे थे। वे नक्सलियों का बचाव करते थे और पीएम मोदी को मारना चाहते थे। अब सबकुछ सामने आ गया है।'
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए फडणवीस ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि इसमें किसी तरह की राजनीतिक दखंलदाजी नहीं थी और यह विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास नहीं था। यह पुणे पुलिस और देश की जीत है। वे (एक्टिविस्ट्स) ऐसा कई वर्षों से कर रहे थे लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था, इसलिए जांच पूरी नहीं हो सकी।'
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना करते हुए फडणवीस ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि इसमें किसी तरह की राजनीतिक दखंलदाजी नहीं थी और यह विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास नहीं था। यह पुणे पुलिस और देश की जीत है। वे (एक्टिविस्ट्स) ऐसा कई वर्षों से कर रहे थे लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था, इसलिए जांच पूरी नहीं हो सकी।'