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शरजील इमाम पर चलेगा देशद्रोह का केस: दिल्ली कोर्ट ने दिया आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य आरोपित शरजील इमाम  के खिलाफ 24 जनवरी 2022 को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा (UAPA) समेत कई अन्य धाराएँ लगाने का आदेश दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (यूपी) और जामिया इलाके (दिल्ली) में एंटी-सीएए (Citizenship Amendment Act) प्रदर्शन के दौरान शरजील द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों को लेकर ये धाराएँ लगाई जाएँगी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आदेश दिया है कि यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) के साथ आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (आरोप, राष्ट्रीय-एकता के लिए पूर्वाग्रह), 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान) के तहत आरोप तय किए जाएँ।

वहीं शरजील इमाम की ओर से पेश हुए वकील तनवीर अहमद मीर ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल द्वारा दिए गए भाषणों में हिंसा को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया था। अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोप केवल बयानबाजी थी, जिनका कोई आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं हो सकता है।

शरजील इमाम का नाम शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में भी लिया जाता है। वह JNU का पूर्व छात्र है। 2013 में उसने जेएनयू में आधुनिक इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसी के साथ उसने एमटेक की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। वह मूल रूप से वह बिहार के जहानाबाद स्थित गाँव काको का निवासी है। शरजील इमाम पर मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी केस दर्ज हैं।

शरजील पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उसने अपना भाषण ‘अस-सलामु अलैकुम’ बोल कर शुरू किया था, जो यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि वह एक विशेष समुदाय को भड़काने का प्रयास कर रहा था। इमाम को 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया में और 16 जनवरी, 2020 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी में भड़काऊ भाषण देने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

शरजील इमाम को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद के काको से गिरफ्तार किया गया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए उसने कहा था, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नॉर्थ-ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।” वह 28 जनवरी, 2020 से जेल में बंद है।

जामिया मिलिया, इस्लामिक सेंटर और OXFAM अब विदेशों से नहीं ले सकेंगे चंदा, लगभग 6000 NGO का FCRA लाइसेंस रद्द

                                                     साभार: अमर उजाला
जामिया मिलिया, इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, ऑक्सफैम इंडिया सहित लगभग 6,000 गैर-सरकारी संगठन यानि एनजीओ (NGO) अब विदशों से दान या चंदा नहीं ले सकेेंगे। इन संगठनों का विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस 31 दिसंबर को समाप्त हो गया। इनमें से कुछ संगठनों के लाइसेंस को निरस्त भी कर दिया गया है, जबकि अधिकांश ने लाइसेंस रिन्युअल के लिए आवेदन ही नहीं दिया।

FCRA की सूची में से 5,789 संगठनों को बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था। यह विदेशी धन प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, 179 संगठनों के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया। दस्तावेजों की जाँच के दौरान इन संगठनों को FCRA नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

मंत्रालय ने बताया कि इन संस्थानों को 31 दिसंबर से पहले FCRA नवीनीकरण के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही इन्हें कई बार रिमाइंडर भी भेजा गया था। इसके बावजूद इन संस्थानों ने आवेदन नहीं किया। मंत्रालय ने कहा कि अब इन संगठनों को विदेशों से चंदे लेने की इजाजत नहीं होगी।

FCRA लाइसेंस गँवाने वाले संस्थानों में ऑक्सफैम इंडिया ट्रस्ट जैसे विवादित एनजीओ भी हैं। इसके अलावा, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), लेप्रोसी मिशन, ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर भी इस सूची में शामिल हैं।

आईआईटी दिल्ली, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल फाउंडेशन, लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन, दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय, इमैनुएल हॉस्पिटल एसोसिएशन, विश्व धर्मायतन, महर्षि आयुर्वेद प्रतिष्ठान, नेशनल फेडरेशन ऑफ फिशरमेन कोऑपरेटिव्स लिमिटेड भी अब विदेशों से दान ले पाएँगे।

देश में शुक्रवार (31 दिसंबर) तक 22,797 संगठन FCRA के तहत पंजीकृत संगठन थे। अब सिर्फ देश में 16,829 संगठन रह गए हैं, जो FCRA के तहत रजिस्टर्ड हैं। 31 दिसंबर 2021 तक 5,968 संगठनों (5,789 ने आवेदन नहीं किया + 179 उल्लंघन के लिए खारिज कर दिया) को हटा दिया गया।

इससे पहले 25 दिसंबर को मदर टेरेसा द्वारा कोलकाता में स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी को पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसको लेकर केंद्र पर निशाना साधा था। वहीं, गृह मंत्रालय ने ऐसी किसी से कार्रवाई से इनकार किया था।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ‘मैंने ही लोगों से कहा- पत्थर, तेजाब, पेट्रोल व हथियारों को इकट्ठा करें’: उमर खालिद

कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार(दिसंबर 30) को चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

खबरों के अनुसार, उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उमर खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्‍चों का इस्‍तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी कई खुलासे किए हैं।

क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्‍यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।

पुलिस को दिए बयान में उमर ने कबूला, “2019 में जिस तरह से संसद में भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। उसके बाद मैंने अपने साथी जो यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य थे, हम सब ने मिलकर एक मीटिंग की कि एंटी सीएए (CAA) बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इसके लिए हमें आवाज उठानी चाहिए। मेरी बात पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य सहमत हो गए। तब हमने योजना बनाई की JNU और जामिया (Jamia) के मुस्लिम छात्र मिलकर इस बिल के खिलाफ आवाज उठाते है क्योंकि भारत सरकार बिना दबाव बनाए इस बिल को वापस नही लेगी। जिसके बाद हमने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, जेएनयू और जामिया के मुस्लिम छात्रों को इकट्ठा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें देखते ही देखते काफी लोग इकट्ठा हो गए।”

उमर ने आगे कहा, “फिर हमने जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जिसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मीटिंग की और आंदोलन को अगले पड़ाव पर ले जाने की प्लानिंग बनाई। जिसके लिए हमने बच्चों और औरतों को आगे रखकर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने की योजना बनाई। इसके लिए बाकायदा एक और नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया ‘हम भारत के लोग’ नाम से। उधर तब तक एंटी CAA बिल लोकसभा में पास कर दिया गया था और यह एक कानून बन गया।”

उसने आगे बताया, “इसके बाद हमने योजना बनाई कि हमें और सख्त तरीक़े से चक्का जाम करने की जरूरत है। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एक मात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वो अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़ेगी इसका इस्तेमाल करें।”

खालिद ने खुलासा किया कि, वह दिल्ली में करीब 23-24 जगह चल रहे एंटी CAA प्रदर्शनो में शामिल हुआ था। “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा की हम सब डोनॉल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगें और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”

खालिद को पुलिस ने 14 सितंबर को भयावह पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जाँच के लिए उसे समन जारी किया था जिसके बाद वह गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाल ही में दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मंजूरी दे दी थी, जिसमें हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता कट्टरपंथी उमर खालिद, शरजील इमाम, AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन और अन्य कई लोगों को देशद्रोह के आरोप में शामिल किया गया था।

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में नताशा नरवाल, देवांगना कालिता, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और 15 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें साल 2020 की शुरूआत में हुए इस दंगे में लगभग 50 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।