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शरजील इमाम पर चलेगा देशद्रोह का केस: दिल्ली कोर्ट ने दिया आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य आरोपित शरजील इमाम  के खिलाफ 24 जनवरी 2022 को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा (UAPA) समेत कई अन्य धाराएँ लगाने का आदेश दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (यूपी) और जामिया इलाके (दिल्ली) में एंटी-सीएए (Citizenship Amendment Act) प्रदर्शन के दौरान शरजील द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों को लेकर ये धाराएँ लगाई जाएँगी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आदेश दिया है कि यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) के साथ आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (आरोप, राष्ट्रीय-एकता के लिए पूर्वाग्रह), 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए बयान) के तहत आरोप तय किए जाएँ।

वहीं शरजील इमाम की ओर से पेश हुए वकील तनवीर अहमद मीर ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल द्वारा दिए गए भाषणों में हिंसा को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया था। अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोप केवल बयानबाजी थी, जिनका कोई आधार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं हो सकता है।

शरजील इमाम का नाम शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में भी लिया जाता है। वह JNU का पूर्व छात्र है। 2013 में उसने जेएनयू में आधुनिक इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसी के साथ उसने एमटेक की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। वह मूल रूप से वह बिहार के जहानाबाद स्थित गाँव काको का निवासी है। शरजील इमाम पर मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी केस दर्ज हैं।

शरजील पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उसने अपना भाषण ‘अस-सलामु अलैकुम’ बोल कर शुरू किया था, जो यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि वह एक विशेष समुदाय को भड़काने का प्रयास कर रहा था। इमाम को 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया में और 16 जनवरी, 2020 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी में भड़काऊ भाषण देने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

शरजील इमाम को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद के काको से गिरफ्तार किया गया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए उसने कहा था, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नॉर्थ-ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।” वह 28 जनवरी, 2020 से जेल में बंद है।

'15 अगस्त के बाद दोबारा CAA-NRC के खिलाफ प्रोटेस्ट… इंशाल्लाह’ : महमूद प्राचा

15 अगस्त CAA-NRC प्रोटेस्टकोरोना वायरस के कारण स्थगित हुए (ऐसा वो कहते हैं) एंटी CAA-NRC प्रोटेस्ट को दोबारा से शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कहा है कि जल्द ही पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन फिर शुरू होगा, जिसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मोहर्रम को लेकर कहा कि देश में हर धर्म के लिए कानून है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस भी कहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पुरी की जगन्नाथ यात्रा को सशर्त अनुमति दी गई कि 500 से अधिक लोग इस रथयात्रा में उपस्थित नहीं होंगे, इसी तरह उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि मोहर्रम के जुलूस को भी शर्तों के साथ अनुमति दी जाए। क्योंकि जो नियम एक धर्म के लिए हो सकता है, वह अन्य धर्म पर भी लागू हो सकता है।
उनका कहना है कि वह आंदोलन के अलावा मोहर्रम से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों के बारे में भी समुदाय के लोगों को जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को बताया जाएगा कि किस प्रकार कानूनी दायरे में रहकर मोहर्रम में गतिविधियाँ पूरी की जाएँगी। इसके अलावा अगर उन्हें कोई गलत तरह से प्रताड़ित करे, तो उससे कैसे बचा जाएगा- ये भी वह समुदाय के लोगों को समझाएँगे।
महमूद प्राचा ने कहा कि भारत सरकार की अनलॉक स्टेज काफी एडवांस स्टेज पर पहुँच गई है। सरकार ने भी अनलॉक गाइडलाइन जारी कर दी है। पूरे देश में हर प्रकार की गतिविधि को सरकार अनुमति दे रही है। ऐसे में न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्राचा कहते हैं, “15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के आसपास से दोबारा ‘संविधान बचाओ आंदोलन शुरू होगा इंशाल्लाह।”
प्राचा द्वारा ‘संविधान बचाओ आंदोलन शुरू होगा इंशाल्लाह।” को नकारात्मक लेने की बजाए सकारात्मक लेने की जरुरत है। संविधान की दुहाई देने वालों को ज्ञात होगा कि संविधान हमें बराबरी का अधिकार देता है, फिर किसी भी तरह के निम्न भेदभाव भी समाप्त होने चाहिए:
*शिया, सुन्नी, वहाबी, अहमदी आदि सब एक ही मस्जिद में नमाज पढ़ें अलग-अलग मस्जिदों में नहीं; 
*सभी के मृतक एक ही कब्रिस्तान में दफ़न किए जाएं अलग-अलग कब्रिस्तानों में नहीं, क्योकि हिन्दू का मृतक--चाहे वह किसी भी जाति से है--एक ही शमशान में जलाया जाता है;
*जिस तरह बड़े मंदिरों में आने वाले चढ़ावे पर सरकार का नियंत्रण है, उसी भांति जितनी भी बड़ी मस्जिदें और दरगाहों के चढ़ावे भी सरकार के नियंत्रण में हों;
*जिस तरह मस्जिदों के इमामों और कर्मचारियों को सरकार वेतन देती है, उसी भांति मंदिरों के महन्त और कर्मचारियों को सरकार की तरफ से वेतन मिलना चाहिए, 
*जिस तरह मुहर्रम के दिन ताजिया निकलते समय उन मार्गों का ट्रैफिक रोक दिया जाता है, उसी भांति रामलीला निकलते समय उस मार्ग का ट्रैफिक भी रोक देना चाहिए;
*जिस प्रकार अल्पसंख्यक आयोग है, उसी तरह बहुसंख्यक आयोग का गठन हो, दोनों आयोग के नियम एवं शर्तों में कोई अंतर न हो;
*सभी पर यूनिफार्म सिविल कोड लागू हो;
*जिस तरह मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मदरसे खोलने की आज़ादी है, उसी तरह गुरुकुल भी खोले जाएं;
*एक से ज्यादा निकाह पर पाबन्दी हो(विशेष परिस्थिति को छोड़);
*सरकारी अवकाश अथवा साप्ताहिक अवकाश में जब कत्लगाह बंद रहते हैं, उस दिन किसी भी प्रकार के मांस की बिक्री पर पूर्णरूप से प्रतिबंधित हो; आदि आदि अनेकों ज्वलंत प्रश्नों का संज्ञान लेना चाहिए तभी संविधान का सम्मान होगा।
 
  
उनका कहना है कि वह इस आंदोलन की शुरुआत एक बार दोबारा संविधान बचाओ कानून और आरक्षण बचाओ मिशन के तहत करेंगे। मगर, अभी फिलहाल वह हर शहर में जाकर इसके लिए लोगों को तैयार कर रहे हैं। उनके मुताबिक अलीगढ़ में इस आंदोलन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अलीगढ़ से एक संदेश पूरे देश और दुनिया में जाता है, इसलिए यह आंदोलन के लिए बेहद खास है।
प्राचा ने अपनी बात को रखते हुए उन लोगों के बारे में भी बात की, जिन्हें कई आरोपों के तहत जेल में बंद किया गया है। वे कहते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों को झूठे मुकदमे लगा कर जेलों में बंद किया गया। उन्हें देश के सामने खलनायक प्रस्तुत किया गया जो कि उचित नहीं है। अब वह सही तस्वीर सामने लाएँगे।
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दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार गुलफिशा उर्फ गुल से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल का कहन...
महमूद प्राचा की इन बातों के बाद उनके खिलाफ सिविल लाइन थाने में तहरीर दी गई है। तहरीर में कहा गया है कि वह सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। अब मामले में थाना पुलिस ने मेडिकल चौकी इंचार्ज को जाँच सौंप दी है। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई है।

उत्तर प्रदेश : ‘भारत को खंडित करके ‘उर्दूस्तान’ बनाओ, लाल किले पर PM मोदी को नहीं फहराने देंगे झंडा’; FIR दर्ज

Modi unfurls national flag at Red Fort - Window To News
लाल किले पर झंडा फहराते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (प्रतीकात्मक) 
अगस्त 5 को अयोध्या में शिलान्यास होने के बाद से जो उपद्रवियों द्वारा कुछ नेताओं और पार्टियों के इशारे पर देश में अराजकता फैलाकर सौहार्द ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं, इसका इतिहास जानने के लिए ज्यादा दूर नहीं केवल 1947 में हुए बंटवारे के समय पाकिस्तान जाते मुसलमानों द्वारा लगाए जा रहे नारों "हंस के लिया पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिन्दुस्तान" को स्मरण करना होगा। और उन नारों को स्मरण कर इनका समर्थन कर रहे नेताओं और पार्टियों की मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका भारत प्रेम एक ढोकला है, अन्यथा भारत विरोधी गतिविधियों पर शुरू से ही सख्ती दिखाई होती आज यह स्थिति नहीं होती, जिन परिस्थितियों से भारत झूझना पड़ रहा है। 
CAA विरोध के नाम पर आर्थिक जिहाद की माँग
 विरोधी मुसलमानों को स्वामी रामदेव, रिलायंस,अम्बानी और अडानी के उत्पादों के बहिष्कार करने के लिए बोल सकते हैं, लेकिन आज तक किसी में चीनी उत्पादों के बहिष्कार करने की हिम्मत नहीं हुई, जहाँ पर अब नए कुरान लिखे जाने की कवायद शुरू होने के अलावा इस्लाम पर इतनी पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं, जिसका समय-समय पर अपने ब्लॉग में उल्लेख भी करता रहा हूँ। यदि इसका एक प्रतिशत भी भारत में हो रहा होता, CAA से कहीं अधिक चीख-पुकार हो रही होने के साथ-साथ सारे मानवाधिकार वाले भी शोर मचा रहे होते। लेकिन चीन में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर सब खामोश हैं, क्यों? इस बात को विश्व भी जनता है कि मुसलमान जितना सुरक्षित भारत में है, कहीं और नहीं।
कुछ दिनों पहले तक कई खबरें आये दिन आती थी जिसमे मुस्लिम कट्टरपंथी कहते थे की हम वन्दे मातरम नहीं कहेंगे, और कई घटनाओं में तो जन गन मन का भी विरोध किया गया, पर इन दिनों देश भर में यही तत्व तिरंगा लेकर चल रहे है और राष्ट्रगान गा रहे है।
असल में ये एक सोची समझी चाल है और इस बात को खुद मुस्लिम पत्रकार अरफा खानुम ने स्वीकार किया है, जहाँ सभी धर्म के लोग होते है वहां पर सेकुलरिज्म, देशभक्ति की बात करो, पर जहाँ पर सभी मुसलमान हो वहां पर इस्लामिक हुकूमत की बात करो।
अरफा खानुम का विडियो सामने आया है जिसमे वो मुसलमानों की भीड़ के आगे बोल रही है और बता रही है की कुछ समय के लिए हमे भारत के प्रति वफादारी दिखानी है, हमे तिरंगा लहराना है, राष्ट्रगान भी गाना है पर ये चीज सिर्फ तब तक जब तक हम इस्लामिक सोसाइटी यानि भारत में इस्लाम की हुकूमत न ले आये। (विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे लिंक को क्लिक करिये)
गोधरा पर सियापा करने वाले ये नेता और पार्टियां तुष्टिकरण के आगे देश को विभाजित करने वाली ताकतों का तन,मन और धन से साथ देने में संकोच तक नहीं कर रहे। देखिए प्रमाण : इन नेताओं की मानसिकता उस समय भी जगजाहिर हो गयी थी, जब ये जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश को तोड़ने वाले "टुकड़े-टुकड़े गैंग" का समर्थन करने पहुँच गए थे। 
दूसरे जब नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हिन्दुत्व विरोधी, देश का इस्लामीकरण करने(देखिए नीचे दिया लिंक), मोदी और योगी की कब्र खोदने के नारे लगाए जा रहे थे, किसी ने इन आपत्तिजनक नारों का विरोध नहीं किया। क्यों? जबकि ये अराजकता और हिन्दू विरोधी हरकतें करने वाले हिन्दुओं के सामने कुछ और उनके पीछे अपने असली मकसद पर चर्चा करते थे। और न ही कोई #not in my name, #award vapasi, #intolerence और गंगा-जमुना तहजीब आदि का ढोंग करने वाला कोई गैंगस्टर तक एक शब्द नहीं बोला। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि ये गैंगस्टर देश विरोधियों के बिकाऊ गुलाम हैं और ये लोग अपनी तिजोरी भरने के लिए किसी हद तक जा सकते हैं। इनकी बला से कितने बेगुनाहों की जानें जाती हैं। सरकार को चाहिए ऐसे तत्वों पर केवल कार्यवाही ही नहीं, इनके परिवार में सभी(बच्चों से लेकर परिवार के वरिष्ठ तक) के बैंक खाते और व्यवसाय की जाँच करनी चाहिए।      
शिलान्यास के बाद से गुलाम मानसिकता वाले उपद्रव करने में लगे हुए हैं, जिन्हे मीडिया भी इतना महत्व नहीं दिया जा रहा। अब उत्तर प्रदेश लखनऊ में शनिवार (अगस्त 8, 2020) की दोपहर तब अचानक से हड़कंप मच गया, जब पत्रकारों को विदेशी नम्बरों से फोन कॉल्स आने लगे। 12 बजे के बाद करीब 3 बजे तक ये सिलसिला चला। फोन कॉल्स का लोकेशन यूनाइटेड स्टेट्स और एटलांटा बता रहा था। साथ ही ये फोन कॉल्स पर ‘यूसुफ अली’ का नाम दिखा रहा था। इन फोन कॉल्स में अयोध्या के राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर धमकियाँ दी जा रही थीं।
साथ ही मुसलमानों को भी भड़काया जा रहा है। अपील की जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया जाए और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर मुसलमानों को भी भड़काया जा रहा है। लोगों को किए गए फोन कॉल्स में कहा गया कि भारत के मुसलमान मिल कर अब एक अलग देश ‘उर्दूस्तान’ की माँग करें, जो भारत को खंडित कर के बनाया जाएगा। पत्रकारों ने तुरंत इस बात की शिकायत कराई।



Image may contain: 1 person, beard, text that says 'शांति दूत" के महान विचार सुनिए-- अमप्रकाश भारत आसानी से इस्लामिक देश बनाया जा सकता को से संतानें पैदा करनी संतानें भले ही भूखी- रहें लेकिन वोट तो दे ही सर्कैगी।अपने वोटों से हम अपने MLA, MP, cm, PM चुनेंगे| फिर 50% जनसंख्या होने पर लोकतंत्र समाप्त कर शरिया कानून लागू कर दिया जाएगा| इसके बाद हम गैरमजहबी लोगों को खदेड़ कर उनकी संपत्ति और औरतों पर अधिकार कर लेंगे और अमीर हो जाएंगे जैसा कि कश्मीर में हुआ| लेकिन यह सब बड़े गोपनीय तौर पर करना है| उन्हें सबकुछ स्वाभाविक लगना Dr Zakir Naik'
लखनऊ स्थित हजरतगंज पुलिस स्टेशन में इसे लेकर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि पत्रकारों के अलावा कई अन्य लोगों को भी फोन कॉल्स से वॉइस मैसेज प्राप्त हुए, जिसमें 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर धमकाया जा रहा है और साथ ही देश की एकता को खंडित किए जाने वाली बातें की जा रही हैं। इस मामले में FIR दर्ज हो गई है।
पांडेय ने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। यूएपीए और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, कई पत्रकारों ने इंटरनेशनल नम्बर देख कर कॉल नहीं उठाया था। लेकिन, लखनऊ में यूपी इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट से जितने भी पत्रकार जुड़े हुए हैं, उन सभी को फोन कॉल्स आए। उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पत्रकारों को ये कॉल्स आए।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार ऐसा लगता है मानो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, CAA-NRC का विरोध अब शाहीन बाग़ से होते हुए अपने असल....
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पूर्व जब सभी का मत था कि "जो भी निर्णय होगा मान्य होगा", फिर आज हिन्दुओं पर प्रहार, मंद.....
कहा गया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर के राम मंदिर बनाया जा रहा है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही उदाहरण देते हुए भड़काया गया कि जिस तरह से सिख एक अलग खालिस्तान की माँग कर रहे हैं, उसी तरह से मुसलमानों को भारत से कट कर एक अलग देश उर्दूस्तान के लिए प्रयास करना चाहिए। इसमें खालिस्तान का भी समर्थन किया गया।

अब पंजाब में भी कांग्रेस पर मंडला रहे संकट के बादल

राहुल गॉंधी, अमरिंदर सिंह
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
केंद्र में मोदी सरकार द्वारा लिए जा फैसलों से मोदी विरोधी जनता में जरूर रोष उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हों, लेकिन फैसलों ने कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों में एक भूचाल-सा ला दिया है। चाहे GST हो, तीन तलाक हो, अनुच्छेद 370 हो, नागरिकता संशोधक कानून हो,  पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद का भारत की धरती को बेगुनाहों के खून से लाल करने पर "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से इस्लामिक आतंकवादियों का बचाव करना या फिर अत्याधिक तुष्टिकरण कर हिन्दुओं को अपमानित करना आदि। 
दूसरे, जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून विरोध की आड़ में मोदी और योगी की कब्र खोदने जैसे नारों के साथ-साथ हिन्दुत्व विरोधी नारों से कांग्रेस और अन्य दलों के हिन्दुओं की सोंच में जो अंतर घर कर रहा है, उसे कोई वरिष्ठ नेता समझने में असमर्थ हो रहा है। बस नेता कोई न कोई बहाना कर पार्टी से अलग होने का मन बना रहे हैं। और अगर इस नब्ज को पढ़ भारतीय जनता पार्टी भुनाती है, तो उसका कसूर नहीं। 
आज देश में बदल रहे समीकरणों को समझ समस्त भाजपा विरोधियों को तुष्टिकरण को नकार समान अधिकार के मुद्दे को अपनाना होगा। मोदी सरकार को टक्कर देने के लिए जिन-जिन राज्यों में गैर-भाजपाई सरकारें हैं, उन्हें अपनी छद्दम हिन्दुवादी सोंच पर मंथन करना होगा। अब तुष्टिकरण का समय नहीं। धूमिल किये वास्तविक भारतीय इतिहास को मुखरित करना होगा, अन्यथा वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं, जब गैर-भाजपाई पार्टियां केवल चुटकी भर लोगों की पार्टियां बन हिन्दू-विरोधी के नाम से जानी जाएंगी। दंगाइयों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही पर केंद्र का उसी तरह साथ दें, जिस तरह युद्ध दिनों में दिया जाता है। सिर्फ चुनावों में कोट पर जनेऊ पहनने, हनुमान चालीसा पढ़ने, मंदिरों में माथा टेकना और यज्ञ करवाने आदि ढोंग को ख़त्म करना होगा। समय घटना-क्रम बहुत तेजी से बदल रहा है। अंग्रेजी में एक कहावत है Eye or no Eye.  
मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड के बाद अब पंजाब कांग्रेस का मतभेद भी खुलकर सामने आ गया है। राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर मॅंडरा रहे संकट के बीच पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर के ख़िलाफ पार्टी नेताओं ने घेराबंदी शुरू कर दी है।
पंजाब से कांग्रेस के दो राज्यसभा सदस्यों प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह ढुल्लो ने 7 अगस्त, 2020 को कहा कि अगर राज्य में पार्टी को बचाना है तो अमरिंदर और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ को उनके पदों से हटाना होगा।
इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर पार्टी आलाकमान ऐसा निर्णय नहीं लेता है, तो कांग्रेस का पंजाब में वही हाल होगा जो सिद्धार्थ शंकर राय (पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री) के बाद पश्चिम बंगाल में हुआ था।
इससे पहले राज्यसभा के दोनों सदस्यों ने जहरीली शराब से मौत के लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार घेरा था। बाजवा और ढुल्लो ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले में सीबीआई और ईडी से जाँच करवाने की माँग की थी। उन्‍होंने गृह जनपद में दो अवैध डिस्टिलरी चलने का आरोप लगाते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था फेल बताया था।
कैप्‍टन को हटाने के लिए कांग्रेस की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गाँधी से माँग तक कर डाली है। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सरकार ने सही समय पर सख्त कदम नहीं उठाए। इसकी वजह से 100 से ऊपर लोगों की मौत हो गई है।
वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों ने जहरीली शराब मामले में राज्य सरकार की आलोचना करने पर बाजवा और ढुल्लो को तत्काल कांग्रेस से निष्कासित करने और अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई करने की माँग की थी।
कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश में इसी तरह की स्थिति में कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ज्योदितारित्य सिंधिया की कांग्रेस में उपेक्षा से नाराज उनके समर्थक विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।
वहीं राजस्थान में सरकार बनने के बाद से ही उपेक्षा झेल रहे उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बगावती तेवर ने गहलोत सरकार को मुश्किल में डाल रखा है। सचिन पायलट के विद्रोह करने के बाद कांग्रेस के आलाकमान ने उन्हें उप मुख्यमंत्री पद से भी हटा दिया। बावजूद कांग्रेस हाईकमान इस बगावत खत्म करने में असफल रही। कांग्रेस ने अपने विधायकों की होटल में घेराबंदी कर रखी है।
पिछले दिनों झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में उपेक्षा से परेशान कांग्रेस के नौ विधायकों ने आलाकमान से फरियाद लगाई थी। विधायकों ने दिल्ली पहुँच कर शिकायत की। राज्यसभा सदस्य धीरज साहू के नेतृत्व में कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और उमाशंकर अकेला ने सोनिया गाँधी के सलाहकार अहमद पटेल और गुलाब नबी आजाद से गुहार लगाई थी।
विधायकों ने हाइकमान को आगाह किया था कि अगर इस मामले में कुछ एक्शन नहीं लिया जाता तो झारखंड में भी सरकार अस्थिर हो सकती है। दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की ओर से उन्हें शांत रहने की नसीहत दी गई थी।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा: जमानत के लिए बीवी ने बनवाए फर्जी सर्टिफिकेट

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, गुलेल
दंगाई भीड़ की पनाहगार बना था यही फैसल फारुख का राजधानी स्कूल
वोट के भूखे नेता और पार्टियां जिन दंगाइयों को गरीब, नादान, मजलूम, नासमझ और ना जाने कितने नामों से सम्बोधित कर इनको बचाने का प्रयास करते हैं, देखो इन्हीं गरीब, मजलूम और नासमझ लोगों का दिमाग कितना शातिर है कि जमानत मंजूर नहीं होने पर फर्जी बीमारी के सर्टिफिकेट बनवाये जाते हैं। अगर ये शातिर गरीब और मजलूम नहीं होते, फिर तो पता नहीं क्या सकते थे, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और इनके समर्थकों का जब कोई बस नहीं चलता, Victim Card खिलवा देते हैं, कि 'मुसलमान होने पर जबरदस्ती फंसाया जा रहा है। गंगा-जमुना तहजीब जैसे धूर्त नारों से जनता को पागल बनाया जाता है।' जब किसी स्कूल का मालिक ही फर्जी सर्टिफिकेट बनवाएगा, अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को क्या तालीम दी जाती होगी?      
दिल्ली पुलिस ने राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख, उसकी पत्नी, डॉक्टर और वकील के खिलाफ फर्जी दस्तावेज जमा करने का केस दर्ज किया गया है। फर्जी दस्तावेज इस साल फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जमानत पाने के लिए जमा किए गए थे।
एक हफ्ते पहले, दिल्ली के दंगों के मुख्य आरोपित फैजल फारुख ने फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर जमानत पाने की कोशिश की थी। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर को दिल्ली मेडिकल काउंसिल की तरफ से पहले भी इस तरह के जाली दस्तावेज बनाने के कारण निलंबित किया गया था।
डॉक्टर ने फैजल की पत्नी के नाम से एक फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनाया था, जिसमें लिखा गया था कि cyst निकालने के लिए उनका ऑपरेशन करना जरूरी है। फैजल ने अपने आवेदन में कहा कि उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। दिल्ली दंगे में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अदालत उसकी जमानत याचिका दो बार रद्द कर चुकी है।
जब फैजल ने अदालत में जमानत याचिका को मेडिकल प्रमाण-पत्र और कुछ दस्तावेजों के साथ “बेहद जरूरी मामला” के रूप में प्रस्तुत किया, तो अदालत ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से दस्तावेजों की वैधता की जाँच करने के लिए कहा।
जब जाँच अधिकारियों ने सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. गजेंद्र नायर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने मामले में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गाँव रोड स्थित उसके नर्सिंग होम का दौरा किया। वहाँ उन्हें पता चला कि फैजल की पत्नी के नाम पर नर्सिंग होम में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
पुलिस ने अपनी जाँच रिपोर्ट में यह भी कहा कि उसकी पत्नी दिल्ली के यमुना विहार में रहती है। यह जगह नर्सिंग होम जगह से बहुत दूर है और दिल्ली में बहुत बेहतर और सस्ती मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने डॉक्टर के बारे में और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि उनके लाइसेंस को पिछले साल दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने निलंबित कर दिया था।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पूर्व में दो बार डॉ. गजेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की थी। पहली बार उन्हें 6 महीने का निलंबन और दूसरी बार एक साल के लिए निलंबित किया गया था। वर्तमान में, वह एक निलंबित लाइसेंस पर काम कर रहा था। उसके निलंबन की अवधि नवंबर 2020 में समाप्त होगी।
जब क्राइम ब्रांच ने डॉ. गजेंद्र नायर ने पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि जमानत दिलाने में मदद करने के लिए वो पहले भी कई लोगों का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बना चुका है।
डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने फैजल की पत्नी को कभी देखा भी नहीं है। एक ब्रोकर बुर्का पहने महिला के साथ आया और उससे महिला के पति की जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा। फिलहाल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में शामिल सभी के खिलाफ विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान फैजल फारुख के राजधानी स्कूल का इस्तेमाल अटैक बेस की तौर पर किया गया था। स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इस ठीक बगल में स्थित स्कूल तबाह हो गया था।



राजधानी पब्लिक स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था। स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।
राजधानी स्कूल दिल्ली दंगा
‘आज देख लेंगे हिंदुओं को… शाहरुख भाई वो रहा हिंदू, मारो साले को’
जैसाकि सर्वविदित है कि डीआरपी स्कूल का मालिक एक हिंदू व्यक्ति था। राजधानी स्कूल की छत पर मौजूद भीड़ ने डीआरपी स्कूल को काफी नुकसान पहुँचाया था। उस दिन पुलिस कंट्रोल रूम को जितने भी फोन किए गए थे, उसमें ज़्यादातर डीआरपी स्कूल से धर्मेश शर्मा ने ही किए थे। पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में डीआरपी स्कूल के गार्ड का बयान भी दर्ज है। इससे दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ़ रची गई साज़िश का खुलासा होता है।
गार्ड ने अपने बयान में कहा, “जैसे ही वह डीआरपी स्कूल का मुख्य द्वार बंद करने गया तभी उसने देखा राजधानी स्कूल के सामने भारी संख्या में मुस्लिम लोग खड़े थे। उनके साथ राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख भी था। फैज़ल उस वक्त अपनी दो पहिया गाड़ी पर बैठा था। उसने राजधानी स्कूल के गार्ड (जो खुद हिन्दू था और उसकी पहचान छुपाई गई है) से कहा कि मुस्लिमों को स्कूल में दाखिल होने दिया जाए।”
इसके बाद डीआरपी स्कूल के गार्ड ने जो कहा वह हैरान कर देने वाला था। उसने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” इसके बाद फैज़ल के साथ मौजूद मुस्लिमों की भीड़ कई तरह के हथियारों के साथ डीआरपी स्कूल में दाखिल हुई। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों ने उसकी तरफ देखा और एक ने चीखते हुए कहा “शाहरुख भाई वह रहा हिंदू, मारो साले को।” इसी तरह एक और चश्मदीद ने (उसकी पहचान भी इस रिपोर्ट में छुपाई जा रही है) अपना बयान दर्ज कराया था। 
उसने भी गार्ड के बयान से अलग कुछ नहीं बताया, दोनों ने लगभग एक घटनाक्रम ही बताया। उसने बयान में कहा कि उसने 24 फरवरी की दोपहर 2 बजे के आसपास फैज़ल को उसके कई मुस्लिम साथियों के साथ राजधानी स्कूल के सामने देखा। इसके बाद फैज़ल के साथियों ने राजधानी स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही। इसके अलावा चश्मदीद ने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” एक चश्मदीद ने फैज़ल के उस ड्राइवर की भी पहचान की जिसने दंगों के दौरान डीआरपी स्कूल को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी।
हिंदुओं के खिलाफ़ लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल किए गए राजधानी स्कूल के हिंदू गार्ड ने भी घटनास्थल पर कई मुस्लिमों के साथ फैजल की मौजूदगी की पुष्टि की थी। उसने कई बार स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही थी। जैसे ही गार्ड ने मुस्लिम भीड़ को आते हुए देखा और अपने परिवार वालों के साथ वहाँ से भाग निकला।
चार्जशीट के मुताबिक़ एक खबरी की जानकारी के आधार पर पुलिस ने शाहरुख को पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के दौरान उसने दंगों में फैज़ल के शामिल होने की बात कबूल की। इसके अलावा उसने दंगों में खुद भी शामिल होने की बात स्वीकार की थी। सबसे रोचक बात यह थी कि उसने फैज़ल की पहचान उस वक्त की जब पुलिस उससे दूसरे मामले में पूछताछ कर रही थी। शाहरुख ने पुलिस की पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि फैज़ल उससे एक बात हमेशा कहता था, अगर सीएए और एनआरसी लागू हो गया तो सारे मुस्लिम देश के बाहर कर दिए जाएँगे।  
शाहरुख का कहना था कि फैज़ल ने उससे कह दिया था कि वह अपनी कौम के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहे। शाहरुख के मुताबिक़ फैज़ल ने उसे हिंदुओं को ख़त्म करने के लिए 5 हज़ार रुपए दिए थे। उसने यह भी बताया कि फैज़ल के देवबंद से संबंध बहुत अच्छे थे और वह अक्सर वहाँ जाता रहता था।

चार्जशीट में इस बात भी भी ज़िक्र है कि राजधानी स्कूल के नज़दीक से जितने हथियार मिले थे उन्हें एक दिन में जमा नहीं किया जा सकता था। इतना ही नहीं फैज़ल अपने इलाके का नेता था, क्योंकि वह अमीर था और उसके पास संसाधन मौजूद थे। ऐसे लगभग हर मौकों पर वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए योजना तैयार करता था। राजधानी स्कूल की इमारत बड़ी थी, इसलिए इसका इस्तेमाल हिंदुओं पर हमला करने के लिए किया गया। 
पूछताछ के दौरान फैजल फारुख ने खुद यह बात स्वीकार की कि सीएए और एनआरसी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ थे। इसलिए वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जारी विरोध-प्रदर्शन का सक्रिय रूप से हिस्सा बना रहा। चार्जशीट के मुताबिक़ उसने तमाम मौलवियों, पिंजरा तोड़, जेसीसी और इस्लामी आतंकी समूह पीएफआई के सदस्यों की बैठक की बात भी स्वीकार की। वह हर तरह की मदद और सहयोग के लिए पूरी तरह आश्वस्त था।
फैज़ल जेसीसी के माध्यम से सफूरा ज़रगर के संपर्क में भी था। जब सफूरा को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तब उसे बहुत सहानुभूति भी मिली। उस वक्त वह गर्भवती भी थी। इसके अलावा पिंजरा तोड़ के माध्यम से दिव्यांगना और नताशा नरवाल से फैज़ल मिला। अंत में उसकी मुलाक़ात पीएफआई दिल्ली के मुखिया मोहम्मद इलियास से भी हुई। 
चार्जशीट के मुताबिक़ फैज़ल दंगों से एक दिन पहले 23 फरवरी की तारीख को देवबंद उत्तर प्रदेश गया था। वह सुबह 7 बजे दिल्ली से निकला था और रात 8 बजे वापस आ गया था। देवबंद इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़ माना जाता रहा है। साथ ही दारुल-उल-देवबंद का घर भी माना जाता है जहाँ से सुन्नी देवबंद इस्लामिक आन्दोलन की शुरुआत हुई थी। 
दिल्ली दंगों के मामले में यह पहली ऐसी चार्जशीट जो दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर की गई थी। इसके जरिए ज़रिये तमाम तरह की जानकारी सामने आई है। यह बात खुद में कितनी हैरान कर देने वाली है कि कैसे महीनों पहले इन दंगों की योजना तैयार की गई। इसके बाद 24 और 25 फरवरी के दिन देश की राजधानी में इन दंगों को अंजाम दिया गया। 

रोती बहन का सवाल : इस रक्षाबंधन सब सूना, मेरे भाई अंकित को क्यों मारा? : दंगाइयों का बचाव करने वाले बेशर्म लिबरल जवाब दो

अंकित शर्मा, ताहिर, खालिद
दिल्ली दंगों के दौरान ताहिर हुसैन और उसके गुंडों पर आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। दंगों की जाँच के बीच रक्षाबंधन भी आ गया है। ऐसे में अंकित शर्मा की बहन इस बार राखी किसे बाँधेंगीं, यही सोच कर वो बार-बार बिलख कर रो उठती हैं। ताहिर हुसैन और खालिद सैफी जैसों ने एक बहन से उसके निर्दोष भाई को छीन लिया और लिबरल गैंग बेशर्म बन उलटा दंगाइयों को बचाने में लगा हुआ है। बेशर्म बन Victim Card खेला जा रहा है। किसी लिबरल गैंग ने मारे गए निर्दोषों के घर जाकर उनके बच्चों और परिवार का दर्द जानने की कोशिश की? क्या उनको इस काम के लिए धन नहीं मिला है? 
‘Kreately’ की ख़बर के अनुसार, अंकित शर्मा की बहन सोनम बार-बार यही पूछते हुए रो उठती हैं कि मेरे भाई को क्यों मारा, इस बार मैं राखी किसे बाँधूँगी? सोनम का कहना है कि इस रक्षाबंधन उनके लिए सब कुछ सूना-सूना सा है। जब कई नेता, पत्रकार और बुद्धिजीवी हत्यारोपित ताहिर हुसैन और खालिद सैफी जैसों को बचाने में लगे हुए हैं, क्या उन्हें एक बहन की चीख नहीं सुनाई दे रही है?

हाल ही में कट्टर इस्लामी पत्रकार राणा अयूब ने ट्विटर पर खालिद सैफी की बेटी की तस्वीर शेयर करते हुए भावनात्मक पोस्ट लिखा और एक अपराधी को ऐसे पेश किया जैसे वो किसी स्वतंत्रता सेनानी के लिए आवाज़ उठा रही हों। अयूब ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए पूछा कि ये बच्चे पूछ रहे हैं कि इस ईद पर उनके अब्बू आएँगे या नहीं या फिर उनके जन्मदिन पर वो रहेंगे या नहीं? जबकि सवाल तो यह पूछा जाना चाहिए था कि क्या खालिद ने ऐसा अपराध करने से पहले सोचा था?
जिहादियों के हिमायती दंगे भड़काने वाले, उनकी फन्डिंग करने वाले, और बेरहमी से हत्या करने वालों के बच्चों की तस्वीरें लगा कर ईद की बातें करते हैं और ईमोशनल कार्ड खेल कर माहौल बनाते हैं, क्या उनसे ये सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि जिनका वो बचाव कर रहे हैं, उन्हीं के द्वारा बेरहमी से मार डाले गए हिंदुओं के पीड़ित परिवारों का क्या होगा, जो सदा के लिए दूर चले गए?
इसमें कोई शक नहीं कि नाबालिग बच्चे का कोई दोष नहीं। लेकिन, क्या खालिद सैफी जैसों को यह नहीं सोचना चाहिए था कि उसके घर में बच्चे हैं या उसका परिवार है तो वो कोई ऐसा काम ही न करे, जिससे वो अपराधी बन जाए और उसकी करतूतें उसके ही परिवार पर भारी पड़ने लगे? ईद की बात कर के मजहब को बीच में लाया जाता है और अपराधियों को बचाने के लिए ये लिबरल पत्रकार हर बार यह कार्ड खेलते हैं।
क्या आपको पता है कि खालिद सैफी कौन है और उसने किया क्या था? खालिद सैफी (Khalid Saifi) पर आरोप है कि उसने दिल्ली में हिंसा से पहले शाहीन बाग में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और पूर्व आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के बीच मीटिंग करवाई थी। शाहीन बाग में इस साल 8 जनवरी को दोनों की मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग में उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।
प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार, आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर सोशल मीडिया पर इस्लामी विचारधारा की समर्थक RJ सायमा सहित न जाने कितनी ही कथित सेक्युलर हस्तियों के साथ उसकी तस्वीरें वायरल हुई थीं। इससे उसकी पहुँच का अंदाज लगता है। जाहिर है, उसके नेटवर्क में शामिल उसके लोग हर क्षेत्र में हैं, जो उसे बचाने के लिए हर जतन करेंगे ही। उसका ‘कर्ज’ चुकाएँगे ही।
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दिल्ली के एक सेशन कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ताहिर हुसै.....
खालिद सैफी वही शख्स है, जिस पर आरोप लगा है कि उसने सिंगापुर सहित मध्य-पूर्व के एक देश से दंगों के लिए धन जुटाया और मलेशिया तक जाकर जाकिर नाइक से मुलाकात की। इसके अलावा उमर खालिद और ताहिर हुसैन की शाहीन बाग में मीटिंग कराने वाला भी यही शख्स था। जिसके संबंध बड़े बड़े मीडिया गिरोह के लोगों से भी थे। राणा अय्यूब जैसों ने आज इस्लामिक आतताइयों के कारनामों को धो-पोंछ कर उन्हें स्मृतियों से मिटाने का बीड़ा उठाया है।