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दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा: जमानत के लिए बीवी ने बनवाए फर्जी सर्टिफिकेट

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, गुलेल
दंगाई भीड़ की पनाहगार बना था यही फैसल फारुख का राजधानी स्कूल
वोट के भूखे नेता और पार्टियां जिन दंगाइयों को गरीब, नादान, मजलूम, नासमझ और ना जाने कितने नामों से सम्बोधित कर इनको बचाने का प्रयास करते हैं, देखो इन्हीं गरीब, मजलूम और नासमझ लोगों का दिमाग कितना शातिर है कि जमानत मंजूर नहीं होने पर फर्जी बीमारी के सर्टिफिकेट बनवाये जाते हैं। अगर ये शातिर गरीब और मजलूम नहीं होते, फिर तो पता नहीं क्या सकते थे, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और इनके समर्थकों का जब कोई बस नहीं चलता, Victim Card खिलवा देते हैं, कि 'मुसलमान होने पर जबरदस्ती फंसाया जा रहा है। गंगा-जमुना तहजीब जैसे धूर्त नारों से जनता को पागल बनाया जाता है।' जब किसी स्कूल का मालिक ही फर्जी सर्टिफिकेट बनवाएगा, अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को क्या तालीम दी जाती होगी?      
दिल्ली पुलिस ने राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख, उसकी पत्नी, डॉक्टर और वकील के खिलाफ फर्जी दस्तावेज जमा करने का केस दर्ज किया गया है। फर्जी दस्तावेज इस साल फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जमानत पाने के लिए जमा किए गए थे।
एक हफ्ते पहले, दिल्ली के दंगों के मुख्य आरोपित फैजल फारुख ने फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर जमानत पाने की कोशिश की थी। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर को दिल्ली मेडिकल काउंसिल की तरफ से पहले भी इस तरह के जाली दस्तावेज बनाने के कारण निलंबित किया गया था।
डॉक्टर ने फैजल की पत्नी के नाम से एक फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनाया था, जिसमें लिखा गया था कि cyst निकालने के लिए उनका ऑपरेशन करना जरूरी है। फैजल ने अपने आवेदन में कहा कि उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। दिल्ली दंगे में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अदालत उसकी जमानत याचिका दो बार रद्द कर चुकी है।
जब फैजल ने अदालत में जमानत याचिका को मेडिकल प्रमाण-पत्र और कुछ दस्तावेजों के साथ “बेहद जरूरी मामला” के रूप में प्रस्तुत किया, तो अदालत ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से दस्तावेजों की वैधता की जाँच करने के लिए कहा।
जब जाँच अधिकारियों ने सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. गजेंद्र नायर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने मामले में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गाँव रोड स्थित उसके नर्सिंग होम का दौरा किया। वहाँ उन्हें पता चला कि फैजल की पत्नी के नाम पर नर्सिंग होम में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
पुलिस ने अपनी जाँच रिपोर्ट में यह भी कहा कि उसकी पत्नी दिल्ली के यमुना विहार में रहती है। यह जगह नर्सिंग होम जगह से बहुत दूर है और दिल्ली में बहुत बेहतर और सस्ती मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने डॉक्टर के बारे में और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि उनके लाइसेंस को पिछले साल दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने निलंबित कर दिया था।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पूर्व में दो बार डॉ. गजेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की थी। पहली बार उन्हें 6 महीने का निलंबन और दूसरी बार एक साल के लिए निलंबित किया गया था। वर्तमान में, वह एक निलंबित लाइसेंस पर काम कर रहा था। उसके निलंबन की अवधि नवंबर 2020 में समाप्त होगी।
जब क्राइम ब्रांच ने डॉ. गजेंद्र नायर ने पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि जमानत दिलाने में मदद करने के लिए वो पहले भी कई लोगों का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बना चुका है।
डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने फैजल की पत्नी को कभी देखा भी नहीं है। एक ब्रोकर बुर्का पहने महिला के साथ आया और उससे महिला के पति की जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा। फिलहाल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में शामिल सभी के खिलाफ विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान फैजल फारुख के राजधानी स्कूल का इस्तेमाल अटैक बेस की तौर पर किया गया था। स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इस ठीक बगल में स्थित स्कूल तबाह हो गया था।



राजधानी पब्लिक स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था। स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।
राजधानी स्कूल दिल्ली दंगा
‘आज देख लेंगे हिंदुओं को… शाहरुख भाई वो रहा हिंदू, मारो साले को’
जैसाकि सर्वविदित है कि डीआरपी स्कूल का मालिक एक हिंदू व्यक्ति था। राजधानी स्कूल की छत पर मौजूद भीड़ ने डीआरपी स्कूल को काफी नुकसान पहुँचाया था। उस दिन पुलिस कंट्रोल रूम को जितने भी फोन किए गए थे, उसमें ज़्यादातर डीआरपी स्कूल से धर्मेश शर्मा ने ही किए थे। पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में डीआरपी स्कूल के गार्ड का बयान भी दर्ज है। इससे दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ़ रची गई साज़िश का खुलासा होता है।
गार्ड ने अपने बयान में कहा, “जैसे ही वह डीआरपी स्कूल का मुख्य द्वार बंद करने गया तभी उसने देखा राजधानी स्कूल के सामने भारी संख्या में मुस्लिम लोग खड़े थे। उनके साथ राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख भी था। फैज़ल उस वक्त अपनी दो पहिया गाड़ी पर बैठा था। उसने राजधानी स्कूल के गार्ड (जो खुद हिन्दू था और उसकी पहचान छुपाई गई है) से कहा कि मुस्लिमों को स्कूल में दाखिल होने दिया जाए।”
इसके बाद डीआरपी स्कूल के गार्ड ने जो कहा वह हैरान कर देने वाला था। उसने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” इसके बाद फैज़ल के साथ मौजूद मुस्लिमों की भीड़ कई तरह के हथियारों के साथ डीआरपी स्कूल में दाखिल हुई। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों ने उसकी तरफ देखा और एक ने चीखते हुए कहा “शाहरुख भाई वह रहा हिंदू, मारो साले को।” इसी तरह एक और चश्मदीद ने (उसकी पहचान भी इस रिपोर्ट में छुपाई जा रही है) अपना बयान दर्ज कराया था। 
उसने भी गार्ड के बयान से अलग कुछ नहीं बताया, दोनों ने लगभग एक घटनाक्रम ही बताया। उसने बयान में कहा कि उसने 24 फरवरी की दोपहर 2 बजे के आसपास फैज़ल को उसके कई मुस्लिम साथियों के साथ राजधानी स्कूल के सामने देखा। इसके बाद फैज़ल के साथियों ने राजधानी स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही। इसके अलावा चश्मदीद ने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” एक चश्मदीद ने फैज़ल के उस ड्राइवर की भी पहचान की जिसने दंगों के दौरान डीआरपी स्कूल को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी।
हिंदुओं के खिलाफ़ लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल किए गए राजधानी स्कूल के हिंदू गार्ड ने भी घटनास्थल पर कई मुस्लिमों के साथ फैजल की मौजूदगी की पुष्टि की थी। उसने कई बार स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही थी। जैसे ही गार्ड ने मुस्लिम भीड़ को आते हुए देखा और अपने परिवार वालों के साथ वहाँ से भाग निकला।
चार्जशीट के मुताबिक़ एक खबरी की जानकारी के आधार पर पुलिस ने शाहरुख को पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के दौरान उसने दंगों में फैज़ल के शामिल होने की बात कबूल की। इसके अलावा उसने दंगों में खुद भी शामिल होने की बात स्वीकार की थी। सबसे रोचक बात यह थी कि उसने फैज़ल की पहचान उस वक्त की जब पुलिस उससे दूसरे मामले में पूछताछ कर रही थी। शाहरुख ने पुलिस की पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि फैज़ल उससे एक बात हमेशा कहता था, अगर सीएए और एनआरसी लागू हो गया तो सारे मुस्लिम देश के बाहर कर दिए जाएँगे।  
शाहरुख का कहना था कि फैज़ल ने उससे कह दिया था कि वह अपनी कौम के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहे। शाहरुख के मुताबिक़ फैज़ल ने उसे हिंदुओं को ख़त्म करने के लिए 5 हज़ार रुपए दिए थे। उसने यह भी बताया कि फैज़ल के देवबंद से संबंध बहुत अच्छे थे और वह अक्सर वहाँ जाता रहता था।

चार्जशीट में इस बात भी भी ज़िक्र है कि राजधानी स्कूल के नज़दीक से जितने हथियार मिले थे उन्हें एक दिन में जमा नहीं किया जा सकता था। इतना ही नहीं फैज़ल अपने इलाके का नेता था, क्योंकि वह अमीर था और उसके पास संसाधन मौजूद थे। ऐसे लगभग हर मौकों पर वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए योजना तैयार करता था। राजधानी स्कूल की इमारत बड़ी थी, इसलिए इसका इस्तेमाल हिंदुओं पर हमला करने के लिए किया गया। 
पूछताछ के दौरान फैजल फारुख ने खुद यह बात स्वीकार की कि सीएए और एनआरसी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ थे। इसलिए वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जारी विरोध-प्रदर्शन का सक्रिय रूप से हिस्सा बना रहा। चार्जशीट के मुताबिक़ उसने तमाम मौलवियों, पिंजरा तोड़, जेसीसी और इस्लामी आतंकी समूह पीएफआई के सदस्यों की बैठक की बात भी स्वीकार की। वह हर तरह की मदद और सहयोग के लिए पूरी तरह आश्वस्त था।
फैज़ल जेसीसी के माध्यम से सफूरा ज़रगर के संपर्क में भी था। जब सफूरा को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तब उसे बहुत सहानुभूति भी मिली। उस वक्त वह गर्भवती भी थी। इसके अलावा पिंजरा तोड़ के माध्यम से दिव्यांगना और नताशा नरवाल से फैज़ल मिला। अंत में उसकी मुलाक़ात पीएफआई दिल्ली के मुखिया मोहम्मद इलियास से भी हुई। 
चार्जशीट के मुताबिक़ फैज़ल दंगों से एक दिन पहले 23 फरवरी की तारीख को देवबंद उत्तर प्रदेश गया था। वह सुबह 7 बजे दिल्ली से निकला था और रात 8 बजे वापस आ गया था। देवबंद इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़ माना जाता रहा है। साथ ही दारुल-उल-देवबंद का घर भी माना जाता है जहाँ से सुन्नी देवबंद इस्लामिक आन्दोलन की शुरुआत हुई थी। 
दिल्ली दंगों के मामले में यह पहली ऐसी चार्जशीट जो दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर की गई थी। इसके जरिए ज़रिये तमाम तरह की जानकारी सामने आई है। यह बात खुद में कितनी हैरान कर देने वाली है कि कैसे महीनों पहले इन दंगों की योजना तैयार की गई। इसके बाद 24 और 25 फरवरी के दिन देश की राजधानी में इन दंगों को अंजाम दिया गया। 

दिल्ली दंगे : मुख्य आरोपित फैजल फारुख था मरकज और देवबंद के संपर्क में

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा, गुलेल
दंगाई भीड़ की पनाहगार बनी थी यही फैसल फारुख  का राजधानी स्कूल
दिल्ली दंगों की जाँच में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस को जाँच के दौरान पता चला है कि इन दंगों का निजामुद्दीन मरकज कनेक्शन भी हो सकता है, क्योंकि जिस राजधानी स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए एसिड बम आदि फेंके गए थे उस स्कूल का मालिक फैजल फारुख निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के संपर्क में था। इसके साथ ही दंगे से 1 दिन पहले वह देवबंद भी गया था।
दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।
पुलिस ने बताया कि जाँच के दौरान यह पाया गया कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।
दिल्ली पुलिस ने स्कूल और स्कूल के मालिक की दिल्ली दंगों में संदिग्ध भूमिका की जाँच के चलते स्कूल मालिक फैसल फारुख समेत 18 को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही राजधानी स्कूल को सील भी कर दिया गया था। बता दें कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 53 लोगों की मौतें हुई, वहीं घटना में कुल 400 लोग घायल हुए थे।
24 फरवरी को दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं।
यही वो राजधानी स्कूल है, जिसकी सबसे ऊपरी छत को दंगाइयों ने अपना केन्द्र बनाते हुए वहाँ बड़ी गुलेल को लगाया था। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम और तेजाब की बोतलों को छत पर पहले ले ही तैयारी के साथ रखा गया था। दंगाइयों ने पहले बगल वाले डीआरपी स्कूल को निशाना बनाया। राजधानी स्कूल दंगाइयों का मुख्य अड्डा बना और सारी गोलीबारी, पत्थरबाजी और बमबारी यहीं से हुई। इसके बाद डीआरपी स्कूल को जला कर ख़ाक कर दिया गया।
स्कूल के कंप्यूटर और मँहगे सामान लूट लिए गए। फारुख के इशारे पर इन दंगाइयों ने पास ही एक दूसरी इमारत में भी आग लगा दी।
फैज़ल के इशारे पर ही डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल, अनिल स्वीट्स और पास बनीं 2 बड़ी पार्किंग को आग के हवाले किया गया था। पुलिस को स्कूल के गार्डों, मैनेजर और कर्मचारियों के अलावा कई और गवाह मिले हैं। इस मामले की जाँच के दौरान जो तथ्य सामने आया है, उससे एक बार फिर दिल्ली का निजामुद्दीन मरकज सवालों के बड़े घेरे में आ जाता है।
राजधानी स्कूल दिल्ली दंगा
राजधानी स्कूल हुआ था बेनकाब: दिल्ली दंगों में निजामुद्दीन कनेक्शन की कहानी
गत फरवरी माह में हिन्दू-विरोधी दिल्ली दंगों की जाँच में दिल्ली पुलिस को इन दंगों का सम्बन्ध निजामुद्दीन मरकज से होने के भी प्रमाण मिल रहे हैं।
राजधानी पब्लिक स्कूल (Rajdhani Public School, Shiv Vihar) की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। इस स्कूल का मालिक फैजल फारुख (Faisal Farooque) के मोबाइल से इस बात के अहम सबूत मिले हैं। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था।
दंगों के मामलों में दूसरी चार्जशीट राजधानी स्कूल केस में दायर की गई है, जो कि 5 मार्च को दर्ज किया गया था। यह मामला राजधानी पब्लिक स्कूल, शिव विहार, न्यू मुस्तफाबाद, दिल्ली के बाहर 24 फरवरी को हुए दंगों के लिए दर्ज किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में राजधानी पब्लिक स्कूल (Rajdhani Public School, Shiv Vihar) के मालिक फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।
दिल्ली में घटित हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे एक वीडियो में से एक शिव विहार के राजधानी पब्लिक स्कूल का भी सामने आया था। इस स्कूल का मालिक ही फैज़ल फारुख है।
ऑपइंडिया ने इन दंगों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान दिल्ली के शिव विहार स्थित राजधानी स्कूल और उसके आस पास के क्षेत्र से कुछ जानकारियाँ जुटाई थीं, जो कुछ इस तरह से हैं –

  1. फरवरी 24, 2020 को दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं।
  2. राजधानी स्कूल को एक ‘अटैक बेस’ की तरह प्रयोग में लाया गया। वहाँ दंगाइयों को संरक्षण मिला था।
  3. इस स्कूल की छत पर एक बडा गुलेल सेट किया गया था।
  4. छत पर बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम तथा तेजाब की बोतलों को पहले से ही तैयारी के साथ रखा गया था।
  5. इस गुलेल का इस्तेमाल पत्थर और पेट्रोल बम बरसाने के लिए किया गया। यहीं से पूरे क्षेत्र में बमबारी की गई, पत्थरबाजी हुई, गोली चलाई गई।
  6. ये गुलेल आम गुलेल की तरह नहीं बल्कि लोहे की रॉड पर रबड़ लगाकर बड़े आकार में बनाया गया था।
  7. स्कूल की छत से बगल में हिन्दुओं के एक स्कूल को दंगाइयों ने तहस-नहस कर दिया।
  8. स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।
  9. स्कूल की छत को अपना केन्द्र बनाकर हजारों दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों और संपत्तियों को निशाना बनाकर उनको तबाह किया था।
दंगाइयों ने अनिल स्वीट्स से जुड़ी एक इमारत को भी जला दिया था, जो सड़क के दूसरी तरफ राजधानी स्कूल के सामने मौजूद थी। यहीं अनिल स्वीट्स के एक कर्मचारी दिलबर नेगी अंदर फंसे हुए थे, जिन्हें काटकर जिन्दा आग में झोंक दिया गया था और उनका राख हुआ शव पुलिस को बाद में बरामद हुआ था।
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इस मामले में फैज़ल फारुख, जो कि राजधानी पब्लिक स्कूल का मालिक है, सहित अठारह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।