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कांग्रेस की “लंकिनी सेना” के “फर्जी गांधी” चुनाव से पहले श्री राम मंदिर “पर्यटन” पर जाएंगे; अभी नए कपड़े बनवा रहे हैं

लेखक 
सुभाष चन्द्र

कांग्रेस की “लंकिनी सेना” के “फर्जी गांधी” जैसे हर चुनाव से पहले मंदिर मंदिर भटकते हैं, वैसे ही अबकी बार ये लोग 2024 लोकसभा चुनाव से पहले “अयोध्या जी” में जाकर रामलला के दर्शन भी करेंगे भले ही आज प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया है। ये लोग यह सोचते हैं कि मंदिर तो कभी भी चले जाएंगे जिससे उसका आज का “पाप” धुल जाएगा।

अभी ये लोग नए कपड़े बनवा रहे हैं, जब शिलान्यास हुआ था तब जिस तरह कांग्रेस के लोगों ने “काले वस्त्र” पहने थे, वैसे ही हो सकता है ये लोग प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन पहनेंगे लेकिन जब मंदिर जाना होगा तो उसके लिए नए सफ़ेद वस्त्र या बनवाएंगे या किराये पर लेंगे। 

कांग्रेस यह आरोप लगा कर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं जाना चाहती कि भाजपा/RSS ने इसे अपना निजी राजनीतिक उत्सव बना दिया है जबकि कांग्रेस कहती है कि मंदिर के ताले तो राजीव गांधी ने खोले थे। यदि यह सत्य है तो फिर भाजपा ने आंदोलन अपने हाथ में कैसे ले लिया और कांग्रेस ने इसे अपने हाथ से कैसे जाने दिया। ताला खुलवाने और शिलान्यास करवाने के पीछे बहुत गहरा षड़यंत्र था, जिसे यदाकदा सनातन प्रेमी उजागर करते रहे हैं, लेकिन तुष्टिकरण गैंग उन्हें साम्प्रदायिक कहकर बदनाम करता रहा। 

सीता राम गोयल 
अपुष्ट सूत्रों के अनुसार राजीव गाँधी ने रामजन्मभूमि का ताला शाहबानो नहीं बल्कि Calcutta High Court में दर्ज कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध केस के आने वाले निर्णय को बदलवाने पर हिन्दुओं में विरोध की ज्वाला न भड़क जाए राममंदिर के ताले खुलवाए थे, जिसे याचिकाकर्ता द्वारा अपनी पुस्तक The Quran Petition की प्रस्तावना में दबे शब्दों, कहा जाए की शब्दों के जाल में फिरो कर अपने दर्द को व्यक्त किया है। जिसे निर्भीक लेखक एवं प्रकाशक सीता राम गोयल ने प्रकाशित किया था।  

और शिलान्यास करवाने का कारण 31 जुलाई 1986 को कुरान की 24 आयतों के विरुद्ध दिल्ली तीस हज़ारी कोर्ट के मजिस्ट्रेट Z S Lohat, हौज़ काज़ी थाना में दर्ज हिन्दू महासभा के दो सदस्यों के पक्ष में देना बताया जाता है। हिन्दू महासभा के इन सदस्यों ने इन विवादित आयतों के पोस्टरों से दिल्ली को पाट दिया था। https://sangamtalks.org/petition-against-few-verses-of-quran-shri-karunesh-shukla/  

ये 1986 की बात है दिल्ली के मैट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट जेड़एस लोहाट ने एक जजमेंट पास किया था। जिसका जिक्र सीताराम गोयल की पुस्तक कलकत्ता कुरान पेटीशन में मिलता है। इंद्रसेन और राजकुमार नामक व्यक्ति ने कुरान की कुछ आयतों को लेकर एक पोस्टर बनाया था और उसमें लिखा था कि ये 24 आयतें हटाई जानी चाहिए क्योंकि ये पूरी तरह से हिंसा फैलाती हैं। इस वजह से उनके खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 295ए और 153ए के अंतर्गत मामला दर्ज हो गया। 

जिसके ऊपर फैसला सुनाते हुए जज लोहाट ने जो कहा वो गौर से सुनने लायक है। उन्होंने कहा कि मैंने सभी आयतों को कुरान मजीद से मिलान किया और पाया कि सभी अधिकाशंत: आयतें वैसे ही उधृत की गई हैं जैसी कि कुरान में हैं। लेखकों को सुझाव मात्र है कि यदि ऐसी आयतें न हटाई गईं तो सांप्रदायिक दंगे रोकना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुरान मजीद की पवित्र पुस्तक के प्रति आदर रखते हुए इन आयतों के सूक्ष्म अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि ये आयतें बहुत हानिकारक हैं और घृणा की शिक्षा देती हैं। जिनसे एक तरफ मुसलमानों और दूसरी ओर देश के शेष समुदायों के बीच मतभेदों की पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने दोनों व्यक्ति को बरी करते हुए मामले को खारिज कर दिया। 

यानि कांग्रेस ने सच्चाई को दबाकर भ्रमित बयानों से जनता को गुमराह कर हिन्दू-मुसलमान की गन्दी सियासत करती रही है। जब ताला खुलवाया और शिलान्यास करवाया, फिर क्यों इतने वर्ष अयोध्या को विवादित बनाये रखा? यही स्थिति काशी, मथुरा और अन्य हिन्दू के धार्मिक स्थलों की है। यह वह ज्वलंत प्रश्न है जिसका कांग्रेस को जवाब देना होगा या यह कहना बंद करे कि राजीव गाँधी ने ताला खुलवाया।   

ये 1986 की बात है दिल्ली के मैट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट जेड़एस लोहाट ने एक जजमेंट पास किया था। जिसका जिक्र सीताराम गोयल की पुस्तक कलकत्ता कुरान पेटीशन में मिलता है। इंद्रसेन और राजकुमार नामक व्यक्ति ने कुरान की कुछ आयतों को लेकर एक पोस्टर बनाया था और उसमें लिखा था कि ये 24 आयतें हटाई जानी चाहिए क्योंकि ये पूरी तरह से हिंसा फैलाती हैं। इस वजह से उनके खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 295ए और 153ए के अंतर्गत मामला दर्ज हो गया। 

जिसके ऊपर फैसला सुनाते हुए जज लोहाट ने जो कहा वो गौर से सुनने लायक है। उन्होंने कहा कि मैंने सभी आयतों को कुरान मजीद से मिलान किया और पाया कि सभी अधिकाशंत: आयतें वैसे ही उधृत की गई हैं जैसी कि कुरान में हैं। लेखकों को सुझाव मात्र है कि यदि ऐसी आयतें न हटाई गईं तो सांप्रदायिक दंगे रोकना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुरान मजीद की पवित्र पुस्तक के प्रति आदर रखते हुए इन आयतों के सूक्ष्म अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि ये आयतें बहुत हानिकारक हैं और घृणा की शिक्षा देती हैं। जिनसे एक तरफ मुसलमानों और दूसरी ओर देश के शेष समुदायों के बीच मतभेदों की पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने दोनों व्यक्ति को बरी करते हुए मामले को खारिज कर दिया।

कांग्रेस ने मंदिर निर्माण रोकने के लिए हर कार्य किया। भगवान राम को काल्पनिक कहने वाली कांग्रेस ही थी और आज कह रहे हैं कि राम सबके हैं। सबके हैं तो तुम क्यों नहीं जाना चाहते। भाजपा / RSS ने राम को अपना बनाया तो तुम्हें कौन रोक रहा है, तुम भी राम को अपना लो लेकिन तुम ऐसा कर ही नहीं सकते। 

कांग्रेस ने तो नरसिम्हा राव सरकार के हाथों भाजपा के कई सरकार बर्खास्त करा दी थी और राव ने मुसलमानों को आश्वस्त किया था कि तुम्हारी मस्जिद उसी जगह पर बना कर दी जाएगी जो उसके वश में नहीं था। राव को कुछ लोग बहुत बड़ा हिंदू नेता मानते है मगर सच्चाई यह है कि उनके कुछ कामों से हिन्दुओं को बहुत आघात पहुंचा है।

नरसिम्हा राव सरकार ही थी जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 लेकर आई थी जिसने हिन्दुओं के अधिकारों पर जबरदस्त प्रहार किया था - नरसिम्हा राव सरकार ही 1995 में वक्फ एक्ट लेकर आई जिसमें मुसलमानों को देश भर में जमीने हड़पने का “असीमित अधिकार” दे दिया और जिसकी वजह से आज मुस्लिम देश में 8 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा भूमि कब्ज़ा चुके हैं। बाबरी ढांचा गिरने पर भाजपा सरकारें बर्खास्त कर राव ने कहा था कि उसने भाजपा के हाथ से मंदिर मुद्दा छीन लिया। 

एक अन्य मामला है जिसमे ISRO के नम्बी नारायण जैसे अधिकारी पर फर्जी केस चला कर गिरफ्तार किया गया और उसे अपनी प्रतिष्ठा वापस प्राप्त करने में 25 साल लग गए, राव उस समय के Science & Technology मंत्री थे।

जनवरी 15 को कांग्रेस के कुछ नेता अयोध्या गए थे और उनकी यात्रा के दौरान कांग्रेसी झंडे को लेकर कथित तौर पर कुछ झड़प भी हुई लेकिन एक चैनल पर बताया गया था कि उन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी पर अभद्र टिप्पणी करते हुए उन्हें “पत्नी द्रोही” कहा था जबकि वो लोग भूल गए कि एक बीवी को घर में रख कर कई औरतों से संबंध रखने वाला नेहरू असली “पत्नी द्रोही” था। मोदी पर बयानबाजी में गिरावट की पराकाष्ठा तो ये लोग न जाने कब से दिखा रहे हैं।

शंकराचार्यों के बारे में एक रिपोर्ट (authentic) और सामने आई है कि निश्चलानंद जी और अविमुक्तेश्वरानंद जी 2014 चुनाव में कांग्रेस के साथ मोदी के विरुद्ध प्रचार करने गए थे बनारस में। आज उनका विरोध उस दृष्टि से ठीक ही है।

शंकराचार्य एक बात भूल रहे हैं कि जनमानस की इच्छा शक्ति हर मुहूर्त, हर विधि विधान से ऊपर होती है और आज जो प्राण प्रतिष्ठा हो रही है वह इच्छा शक्ति से ही हो रही है, मुहूर्त भी निकला है अलग।

पहले ही दिन मैंने कहा था, कोई विपक्षी नहीं जाएगा अयोध्या, बहिष्कार तो नेहरू ने ही शुरू कर दिया था, नौवीं फेल तेजस्वी का बाप मंदिर नहीं गया

                                                                 साभार 
सुभाष चन्द्र

दिसंबर में खबर आई थी कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 22 जनवरी को होने वाले रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए देश के सभी राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों और पूर्व प्रधानमंत्रियों को आमंत्रित कर रहा है। सोनिया गांधी को न्यौता दिया गया था। इसके अलावा खड़गे, अधीर रंजन चौधरी, मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी और देवेगौड़ा के अलावा अरविन्द केजरीवाल, मायावती एवं अखिलेश यादव का भी नाम था लिस्ट में। निमंत्रण गया लेकिन अस्वीकार करना इनके चुनावी हिन्दू होने का चेहरा भी सामने आ गया है। 

राममंदिर पक्षकारों ने राममंदिर विरोधियों यानि विपक्ष को निमंत्रण देकर सांप और छछूंदर वाली स्थिति में ला दिया है। कोट पर जनेऊ डाल हिन्दू होने का स्वांग भी सामने आ गया। दूसरे हिन्दू क्षेत्रों में हाथ में कलावा बांधना और मुस्लिम क्षेत्रों में कलावा गायब कर दोगली सियासत करने वालों को देखना है कि कौन हिन्दू इनको वोट देता है। पाखंडी यानि चुनावी हिन्दू बनने का भी स्वांग जनता के सामने आ गया है।  

इसके बाद अपने लेख में मैंने 21 दिसंबर को ही लिख दिया था कि कोई भी ‘सेकुलर’ नेता इस समारोह में नहीं जाएगा और एक महीने के समय में बहाने बना लिए जाएंगे। यही हुआ और सबसे पहले सीताराम राम येचुरी ने निमंत्रण ठुकरा कर सिलसिला शुरू किया।

लेखक 
कांग्रेस की तरफ से सोनिया खड़गे अधीर रंजन सभी नेताओं ने कहते हैं निमंत्रण को ठोकर मारने से पहले मुस्लिम नेताओं से विचार विमर्श कर उन्हें टटोलने की कोशिश की थी जिसकी जिम्मेदारी सलमान खुर्शीद को दी गई थी। उसने रिपोर्ट दी कि यदि प्राण प्रतिष्ठा में गए तो मुस्लिम वोट बैंक हाथ से सरक सकता है। लिहाजा ठीकरा फोड़ दिया गया BJP/RSS पर, और जाने से मना कर दिया गया।

2014 के चुनाव में हार की समीक्षा करने वाली ए के अंटोनी समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि कांग्रेस की छवि हिन्दू विरोधी पार्टी की बनी जिसकी वजह से चुनाव हारे। लेकिन आज भी कांग्रेस अपने को सुधारने के मूड में नहीं है क्योंकि उसे केवल मुस्लिम वोट पर नियंत्रण चाहिए, हिन्दू तो उसकी चाल समझता ही नहीं और वोट देता रहेगा।

कांग्रेस ने किस विषय पर बहिष्कार नहीं किया, उसने द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया, नई संसद का बहिष्कार किया, इतना ही नहीं प्रतिज्ञा भी कर ली कि सत्ता में लौटे तो पुरानी संसद फिर शुरू कर देंगे, सरदार पटेल की मूर्ति, कर्तव्य पथ पर बोस की मूर्ति और National War Memorial एवं Police Memorial का भी बहिष्कार किया। 

यह बहिष्कार की प्रथा तो नेहरू ने शुरू की थी जब नवंबर 1947 में हुए सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा  के लिए निमंत्रण को ठुकरा ही नहीं दिया, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी पत्र लिख कर जाने से मना किया लेकिन राजेंद्र प्रसाद फिर भी गए। नतीजा यह हुआ कि नेहरू ने उनसे संबंध इस हद तक बिगाड़ लिए कि उनकी मृत्यु पर न खुद गए और अपने अधिकारियों को भी जाने से रोका।

लेकिन Fact Checkers इस बात को झूठ बताते हैं कि 1955 में सऊदी अरब के राजा की बनारस यात्रा के दौरान नेहरू ने बनारस के सभी मंदिरों को तिरपालों से ढकने के आदेश दिए थे लेकिन जब नेहरू सोमनाथ का बहिष्कार कर सकते थे तो कोई बड़ी बात नहीं बनारस के मंदिर भी ढकवा दिए हों।

नौवीं फेल तेजस्वी कह रहा है कि बीमार पड़ोगे तो मंदिर जाएंगे या अस्पताल, मंदिर जाएंगे तो वहां तो दान मांग लेंगे। अरे निकम्मे निर्लज्ज, तेरे बाप ने भगवान राम से बैर मोल लिया था और नतीजा देख ले, क्या मिला, मंदिर नहीं गया लेकिन अस्पताल में ही पड़ा रहा जब जब गिरफ्तार होने की बारी आई और अपनी Kidney भी नहीं बचा सका। 

अखिलेश यादव  स्वामी प्रसाद मौर्य पर कुछ कंट्रोल नहीं कर सकता, मालूम था अखिलेश तो मंदिर में जाएगा ही नहीं और जाए कैसे, उसके बाप ने राम भक्तों के शव बिछा दिए, उसे राम से क्या काम हो सकता है और मौर्य आज भी कह रहा है कि मुलायम ने जो किया वह ठीक किया।

एक बार याद कर लो, सैफई में आवारागर्दी के जलसों पर अखिलेश राज में  2012 में खर्च हुआ था 195 करोड़, 2013 में 216 करोड़, 2014 में 256 करोड़, 2015 में 271 करोड़ और 2016 में हुआ 300 करोड़, और 2016 से आज तक अखिलेश द्वारा सैफई मेला नहीं किया गया और मायावती 1400 करोड़ हाथियों की मूर्तियां बनवाने में पेल दिए थे। 

विदेशों में भी राम मंदिर उद्घाटन की धूम, एफिल टावर से टाइम्स स्क्वॉयर तक गूंजेगा जय श्री राम

अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन समारोह है। इसकी तैयारियां करीब-करीब पूरी हो चुकी हैं। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश-विदेश के राम भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। हर तरफ उत्सव का माहौल है। इस कार्यक्रम के लिए पूरी अयोध्या नगरी और देशभर में धार्मिक स्थलों पर तैयारी चल रही है। खास बात ये भी है कि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोग काफी उत्साहित हैं। दुनियाभर के देशों में ‘रामोत्सव’ की तैयारी की जा रही है। फ्रांस में जहां एफिल टावर तक रथयात्रा निकालने की तैयारी है, वहीं अमेरिका में कैलिफर्निया के साथ ही वाशिंगटन, शिकागो और अन्य शहरों में विशाल कार रैली निकाली जाएगी।

अमेरिका से लेकर कनाडा तक के मंदिरों में पूजन व दीपोत्सव
हिंदू मंदिर एंपावरमेंट कांउसिल ने नार्थ अमेरिका से लेकर कनाडा तक के मंदिरों में पूजन व दीपोत्सव के आयोजन का फैसला किया है। प्राण प्रतिष्ठा भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 12:30 बजे होगी। उस समय पैरिस में सुबह व अमेरिका में देर रात का समय होगा।

राम मंदिर के जश्न में अमेरिका के कई शहरों में कार रैली
कई हफ्तों में वाशिंगटन, शिकागो और दूसरे अमेरिकी शहरों में राम मंदिर के जश्न में कार रैलियां निकाली गई हैं। आयोजकों में रोहित शर्मा, मणि किरण, परम देसाई, दैपायन देब, दीपक बजाज और बिमल भागवत जैसे कई लोग शामिल हैं। अब ये ग्रुप कैलिफोर्निया में कार रैली निकालने का प्लान कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अयोध्या नहीं आ सकते हैं लेकिन राम जी उनके दिलों में हैं और उनकी घर वापसी में उनकी अटूट श्रद्धा है।

न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण
22 जनवरी के दिन अयोध्या राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर पर भी किया जाएगा। इससे पहले 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर के भूमि पूजन को चिह्नित करते हुए टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर का एक डिजिटल बिलबोर्ड चलाया गया था। अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन पर न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम ने कहा है कि अगर हम न्यूयॉर्क शहर में हिंदू समुदाय को देखें, तो यह कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। यह उन्हें जश्न मनाने और अपनी आध्यात्मिकता को ऊपर उठाने का मौका देता है।

न्यूयॉर्क शहर मेयर एडम्स ने कहा- राम मंदिर का उद्घाटन अत्यंत महत्वपूर्ण
न्यूयॉर्क शहर मेयर एडम्स ने कहा, “हमारे यहां शहर में सबसे बड़ी भारतीय आबादी है और राम मंदिर उद्घाटन उन्हें जश्न मनाने और अपनी आध्यात्मिकता बढ़ाने की अनुमति देता है।” यह पूछे जाने पर कि अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन और न्यूयॉर्क शहर के हिंदुओं के लिए इसका क्या मतलब है एडम्स ने कहा कि राम मंदिर का उद्घाटन “अत्यंत महत्वपूर्ण” है। उन्होंने आगे कहा, “अगर हम न्यूयॉर्क शहर में हिंदू समुदाय को देखें, तो यह बेहद महत्वपूर्ण है। यह उन्हें जश्न मनाने और अपनी आध्यात्मिकता को ऊपर उठाने का मौका देता है…।”

एफिल टॉवर पर बड़े पैमाने पर उत्सव
सोशल मीडिया पर पेरिस में रहने वाले अविनाश मिश्रा नाम के यूजर ने राम रथ यात्रा के बारे में डिटेल साझा की है। उन्होंने लिखा- “21 जनवरी 2024 को पेरिस में राम रथ यात्रा! फ्रांस में रहने वाले हम भारतीय पूरे पेरिस में “राम रथ यात्रा” और एफिल टॉवर पर बड़े पैमाने पर उत्सव का आयोजन करके अयोध्या में श्री राम मंदिर उद्घाटन के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अवसर में शामिल होंगे।” अविनाश मिश्रा की पोस्ट को रि-ट्वीट करते हुए राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ने कहा है कि अयोध्या में जन्मस्थान पर भगवान श्री रामलला सरकार की प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बनना सभी रामभक्तों के लिए एक आशीर्वाद है।


श्री राम मंदिर एक ही बार बनेगा, वो बन कर रहेगा, फिर इतने “नाराज़ फूफा” क्यों हैं?

                                                                                                  साभार 
सुभाष चन्द्र

चाहे राम भक्त हों या राम मंदिर से विमुख बैठे “नाराज़ फूफा” हों, सबके लिए श्री राम मंदिर केवल एक बार ही बनेगा और वह तो बन कर रहेगा जिसमें भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा भी होकर रहेगी, फिर रंग में भंग डालने का क्या औचित्य है, यज्ञ में आहुति डालने की जगह यज्ञ विध्वंस करने का काम तो राक्षस प्रवत्ति के लोगों का होता है। जिस कारण भगवान विष्णु को राम रूप में धरती पर आना पड़ा। संभव है कि कलयुगी रक्षक इतने वर्षों से अयोध्या में रामजन्मभूमि मन्दिर का विरोध करते आ रहे हैं। श्रीराम विरोधियों को नहीं मालूम की रावण को भी अंतिम समय "श्रीराम" कहना पड़ा था। 

लेखक 

राम रावण युद्ध में अनेक प्रसंग हैं जिनमे देखा गया था जब रावण की सेना और लंकावासियों ने भगवान राम की सराहना की थी। जब मेघनाथ का पार्थिव शरीर लंका भेजा गया था तो उसे भगवान राम ने अपने वस्त्र से ढक कर भेजा था और तब लंकावासियों ने कहा था राम कितने भले इंसान हैं उन्होंने युवराज के शव का भी आदर किया है, लेकिन आज की “लंकिनी” की सेना में एक भी ऐसा नहीं है जिसे श्री मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा में कुछ भी अच्छा नज़र आ रहा हो, हर कोई यज्ञ में हड्डियां डालने को आतुर है।

राजनीतिक दलों के लोगों की मति भी लगता है भगवान राम ने भ्रष्ट कर दी है उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा, जिसके मुंह में जो आ रहा है वह बोल रहा है। उसके अलावा सबसे ज्यादा दुःख की बात है कि सभी शंकराचार्यों ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह में न जाने का फैसला किया है। द्वारका के शंकराचार्य अविमुक्त आनन्द में स्वरूपानंद की आत्मा वास करती है लेकिन पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती कह रहे हैं कि मोदी पूजा करेगा तो वह कैसे ताली बजाएंगे, यह मंदिर विनाश लाएगा।  

कोई इन शंकराचार्यों से पूछे कि श्री राम मंदिर बनाने के लिए आपने क्या योगदान किया है और आज तक हिन्दू समाज के लिए आपने क्या क्या पुण्य कार्य किये हैं जबकि आपके मठों में पैसे की कमी नहीं है। कोई शंकराचार्य, कोई गुरु, कोई जाति, कोई नेता या कोई भी समाज भगवान राम से बड़ा नहीं हो सकता लेकिन आज समाज के ऐसे प्रबुद्ध लोग रामकाज में अड़ंगे डालने का प्रयास कर रहे हैं। राजनेताओं का तो समझ आता है कि वह अपनी दुकान चलाए रखने की राजनीति के लिए विरोध कर रहे हैं लेकिन धर्माचार्यों का ऐसा आचरण समझ से परे है।

चाहे नेता हो या धर्माचार्य, सबका मकसद बस मोदी विरोध है, बस मोदी को श्री राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी चाहिए। एक ढकोसला शुरू किया हुआ है कि राम तो सबके हैं, भाजपा अपना कार्यक्रम कैसे बना सकती है। ठीक है भाई, राम सबके हैं, तो फिर विपक्ष बताए उसने मंदिर निर्माण के लिए क्या किया था और क्या भगवान राम को काल्पनिक नहीं कहा था। आज वह काल्पनिक राम आपका हो सकता है, हमारे लिए तो सत्य सनातन श्री राम हमारे हैं।

जो नेता भगवान राम का अपमान कर रहे हैं, सबसे पहले उनकी सुरक्षा हटा देनी चाहिए, उनकी सुरक्षा पर जनता का पैसा खर्च नहीं होना चाहिए। वो लोग जब जन-जन के स्वामी भगवान राम का अपमान कर सकते हैं तो उन्हें भक्तो के बीच में खुला छोड़ देना चाहिए। आप संयम नहीं रख सकते बोलते हुए तो भक्तों को भी संयम रखने के लिए बाध्य नहीं होना चाहिए।

अभी तो श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई नहीं है लेकिन अभी से अयोध्या जी में श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दे रहा है जिसमें विपक्ष की फैलाया हुआ जात पात का जहर दिखाई नहीं दे रहा।अपनी दुकान चलाने के लिए जात-पात इन्ही पाखंडियों द्वारा फैला हुआ है। मंदिर उद्घाटन के बाद जो प्रचंड सैलाब उमड़ेगा तब क्या होगा, विपक्ष को चिंता यह है क्योंकि वह मोदी को 400 पहुंचाने में मदद करेगा। 

शंकराचार्यों को पुनर्विचार करना चाहिए वरना फिर हिन्दू समाज उन पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होगा। शंकराचार्य समाज से से हैं, समाज उनसे नहीं है। यदि समय रहते शंकराचार्य नहीं चेते निश्चित रूप से वह दिन भी अधिक दुर नहीं होगा, जब सनातनी प्रेमियों द्वारा उनका उपहास होना उन्हें शून्य में ले आएगा। राजनेता तो किसी न किसी बहाने अपनी दुकान को चलाने के लिए कोई तिकड़म कर लेंगे, जिसका समस्त बीजेपी विरोधियों द्वारा I.N.D.I.गठबंधन एक उदाहरण है। इनको मालूँम है राममंदिर पालिका से लेकर लोक सभा चुनावों तक उनकी दुकान को भारी नुकसान होने वाला है।  

हमारा राष्ट्रीय पराक्रम का प्रतीक राम मंदिर


डॉ राकेश कुमार आर्य 

   किसी भी राष्ट्र को तेजस्विता उसके तेजस्वी नेतृत्व से प्राप्त होती है। यदि नेतृत्व अभाहीन है या अपने आप को ही स्थापित करने के प्रति लापरवाह है या अपने अतीत के गौरव को प्रस्तुत करने में भी उसे शर्म की अनुभूति होती है तो राष्ट्र की आत्मा कांतिहीन होने का आभास देने लगती है । यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि भारतवर्ष में स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात जो नेतृत्व उभर कर सामने आया ,उसे अपने आप को अर्थात भारत की आत्मा को ही प्रस्तुत करने में लज्जा की अनुभूति होती थी। आधुनिकता और प्रगतिशीलता के नाम पर उसने निजता की धज्जियां उड़ा दीं,अस्मिता को नीलाम कर दिया और राष्ट्र की आभा को आभाहीन करने में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी। यद्यपि भारत के बारे में यह बात पूर्णतया सत्य है कि भारत की आत्मा में पुनरुज्जीवी पराक्रम का ऐसा संस्कार निहित है जिसने इस सनातन राष्ट्र को कभी पुरातन नहीं होने दिया। यह पुरातन होकर भी नूतन बना रहा और अपनी नूतनता का आभास देते हुए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता सदा प्राप्त किए रहा। 

    जिसे हम गुलामी का काल कहते हैं उसमें भी इस जीवंत और सनातन राष्ट्र ने जीवंतता के अनेक आयामों को स्पर्श करने का ऐतिहासिक कार्य किया। जब भारत के राष्ट्र मंदिर अर्थात राम मंदिर को एक विदेशी आक्रमणकारी बाबर ने तोड़ने का दुस्साहस किया था तो उस समय इस राष्ट्र ने अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए लाखों का बलिदान दिया था। इसने अपनी जीवंतता और सनातनता का परिचय देते हुए बलिदानों की झड़ी लगा दी और प्रतीक्षा व परीक्षा दोनों में उत्तीर्ण होने के लिए 500 वर्ष तक निरंतर प्रयास करने की सतत साधना की। इसने लड़ाई लड़ी ,बलिदान दिए, तपस्या की, साधना की और अंत में अपने आप को उस समय बहुत ही शांत भाव से विजयी घोषित किया जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर की राष्ट्र मन्दिर के रूप में आधारशिला रखी। जिस समय प्रधानमंत्री ने इस राष्ट्र मंदिर की आधारशिला रखी थी, वे क्षण सचमुच ऐतिहासिक क्षण थे। क्योंकि उन क्षणों में राष्ट्र ने अपने आप से अपने आप बातचीत करने का अवसर खोजा था। उसने अपनी अस्मिता को, अपनी निजता को और अपनी आभा को फिर से मुखरित होते हुए देखा। उसने मौन रहकर उन सभी क्रांतिकारी वीर वीरांगनाओं को और उनके बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने लाखों की संख्या में दर्जनों युद्धों में इन क्षणों को लाने के लिए अपने बलिदान दिए थे।

    उन क्षणों में हमने इतिहास की एक परिक्रमा पूर्ण की थी और फिर से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए नए आगाज का संदेश और संकेत किया था। हमने श्रीराम की मर्यादा को नमन किया था। राम के आदर्शों को स्मरण किया था। राम की उच्चता और महानता को सारे राष्ट्र ने झुक कर प्रणाम किया था । सारे राष्ट्र ने अपने दिव्य और भव्य मर्यादा पुरुषोत्तम को अपना आदर्श स्वीकार कर सहज रूप में संकल्पित होकर उन्हें यह विश्वास दिलाया कि अब हम आतंक के विरुद्ध उसी प्रकार कटिबद्ध होकर खड़े होंगे जिस प्रकार आपने अपने जीवन काल में आतंकियों और राक्षसों का संहार किया था । हमने अपने मर्यादा पुरुषोत्तम से कह दिया था कि भगवन ! हम आपको यह भी विश्वास दिलाते हैं कि एक गाल पर चांटा खाकर दूसरे गाल को आगे करने की मूर्खताओं के दिन अब लद चुके हैं। अब हम फिर इस बात को लेकर संकल्पित होते हैं कि :-

विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीत।

 लक्ष्मण बाण संभालेहु भय बिन होय न प्रीत।।

आज जब भगवान श्री राम जी का मंदिर बनने के अपने अंतिम चरण में है तब सारा देश ही अपने भीतर नव प्राणों का संचार होता हुआ अनुभव कर रहा है। 500 वर्ष से अयोध्या अपनी जिस दिव्यता और भव्यता के लिए तरस रही थी, आज उसे मोदी योगी के यशस्वी नेतृत्व के चलते अपनी दिव्यता और भव्यता की पुरातन अनुभूति हो रही है। अयोध्या में जलते हुए दीपों को देखकर सारा देश दीप्तिमान हो रहा है। सारे भूमंडल को लग रहा है कि भारत उठ खड़ा हुआ है- अपनी दिव्य संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए, उसकी रक्षा के लिए, उसे पुनः  वैश्विक संस्कृति बनाने के दिव्य संकल्प के साथ। जब किसी राष्ट्र के जीवन में इस प्रकार के क्षण आते हैं तब समझिए कि वह लंबी दूरी तय करने का संकल्प धारण कर चुका है। परिवर्तित भारत परिवर्तित परिस्थितियों में आज बहुत कुछ कह रहा है। राम मंदिर का निर्माण सचमुच हमारी देशभक्ति का प्रमाण है। अपनी संस्कृति की रक्षा के प्रति समर्पित होने और अपने महान क्रांतिकारियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के क्षणों में जितना अधिक अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत कर लिया जाए उतना कम है। इसलिए राम मंदिर के निर्माण के इन क्षणों में जलने वाले प्रत्येक दीप को अपनी आंतरिक शक्तियों के साथ समन्वित करना प्रत्येक राष्ट्रवासी का कार्य और दायित्व है। उसे यह अनुभव करना चाहिए कि जैसे एक दीप के साथ एक बलिदानी उसकी आत्मा के साथ समन्वित हो चुका है और मैं अपने कृतज्ञ हृदय में आत्मा की गहराइयों से उसके साथ समन्वित होकर उसे अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं।

  जब हम मात्र 4 वर्ष के संक्षिप्त से काल में अयोध्या का आमूल चूल परिवर्तन होते देख रहे हैं तो समझिए कि हमने 500 वर्ष की अपनी सारी मलीनता को धोकर सरयू में बहा दिया है। रामचंद्र जी संकरी गलियों के जाल से मुक्त होकर आज जिस विशालता और भव्यता को प्राप्त होकर स्थापित हो रहे हैं, वह हमारी चिरकाल की साधना का परिणाम है। जब रामचंद्र जी की प्रतिमा को हमने ऊंची ऊंची सलाखों के भीतर डरे और सहमे हुए राष्ट्र के रूप में बाधित और बंधित होते देखा था तब नहीं लगता था कि कभी इन्हें खुली हवाओं में भी स्थापित किया जा सकेगा पर आज हमारा राष्ट्रीय सांझा संकल्प हमसे ऐसा कुछ करवाने में सफल हो गया है जो कभी अकल्पनीय और अविश्वसनीय लगता था। वर्तमान में 90 फीट चौड़ा आधुनिक सुविधाओं से युक्त पथ हमारी आस्था की कहानी को सुर्ख कर रहा है। आज हमने अपनी अयोध्या नगरी को फिर उसी प्रकार सुसज्जित किया है जो उसकी गरिमा अनुकूल है। सचमुच आज अयोध्या के इस सौंदर्यकरण को देखकर लग रहा है कि जैसे इसे देखने के लिए एक बार फिर मनु महाराज, महाराज रघु ,राजा दशरथ और उनकी वंश परंपरा के अनेक सम्राट तथा इसे अंतिम बार पूर्ण रूप से सजाने वाले महाराजा विक्रमादित्य भी हमारे बीच आ उपस्थित हुए हैं। 

  गंदे नालों में परिवर्तित हो चुकी राम की पैड़ी को अब लगभग 50 करोड रुपए की लागत से पूरी भव्यता प्रदान की गई है। मठ मंदिरों में भी पुरानी आभा लौट रही है । सौर ऊर्जा से पार्किंग में नई रोशनी बिखर रही है। रामनगरी का नयाघाट चौराहा जो कि अब लता मंगेश्कर चौक के नाम से प्रसिद्ध है, अब अपने नए स्वरूप में दिखाई दे रहा है।  नयाघाट चौराहा पहले मात्र 30 फीट चौड़ा हुआ करता था, जिसे नई योजना में ढालते हुए 100 फीट चौड़ा किया जा चुका है। 

    इस सब के उपरांत भी हमें यह ध्यान रखना होगा कि अभी हमें बहुत कुछ करना है और बहुत आगे जाना है। इतिहास बड़ी-बड़ी अपेक्षाओं के साथ हमारी ओर देख रहा है। आज इतिहास स्वयं चलकर हमारे आंगन में खड़ा होकर अपने पृष्ठों पर अपने आप बहुत कुछ उकेर रहा है वह जो कुछ लिख रहा है वह हमारे भव्य को दिव्य बनाने का संकल्प है। याद रखें कि दीप जल तो उठे हैं, पर हवाओं की फितरत में भी शरारत है। वह क्या कब कर गुजरें ? कुछ कह नहीं सकते। इसलिए सावधान भी रहना होगा।

(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है। )

राम मंदिर के जवाब में 1993 जैसे हमलों की फिराक में आतंकी

भूमिपूजन, मोदी
अगस्त 5 को भूमिपूजन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
और संघ सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत 
लगभग 500 वर्ष चले अयोध्या में राममन्दिर विवाद पर पूर्ण विराम और फिर अगस्त 5 को भूमिपूजन से जो राममंदिर विरोधियों द्वारा उन्माद किए जाने पर समुद्र मंथन स्मरण आता है, जिसमें से निकला था अमृत जिसका देवताओं ने पान किया, लेकिन विष का देवों के देव महादेव ने, जिसे उन्होंने अपने कंठ में समां लेने के कारण नीलकंठ के नाम से भी जाने लगे। 
परन्तु वर्तमान सन्दर्भ में अयोध्या मुद्दा समुद्र मंथन की भूमिका में है। मन्दिर से पक्ष में वर्षों से रुकवाया गया निर्णय आने से विरोधी कोई न कोई उत्तेजित बयान दे रहे हैं, लेकिन भूल रहे हैं कि केंद्र में कांग्रेस या कांग्रेस समर्थित सरकार नहीं। जो इनकी धमकी से डर जाएगी। वर्तमान सरकार का संकल्प मुग़ल आक्रांताओं और पिछली सरकारों की तुष्टिकरण नीति के वजह से खोई भारतीय संस्कृति को वापस मूलरूप में लाना है। खुदाई में मिले मंदिर प्रमाणों को अपनी कुर्सी की खातिर जनता और कोर्ट से छुपाया गया। इतना ही नहीं मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से पक्ष में आये निर्णय तक लागू करने में पूर्णरूप से असफल हुए। 1964 में आए अंतिम निर्णय से पूर्व पिछले पांचों निर्णय श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ही पक्ष में आये हैं। आखिर अपनी अस्मिता को दांव पर लगा कर कुर्सी की खातिर तुष्टिकरण करना केवल मजहब के आगे नतमस्तक होना न कहा जाए तो क्या कहा जाए।     
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही भारत में मौजूद पाकिस्तान समर्थित आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने हमलों और दंगों की साजिश रची है। ये खुलासा टाइम्स नाऊ ने किया है।
न्यूज चैनल का दावा है कि उनके हाथ इंटेलीजेंस की खुफिया रिपोर्ट लगी है। इससे पता चलता है कि इस्लामिक आतंकी इस बार भी साल 1993 जैसा साम्प्रदायिक माहौल बनाने की फिराक में हैं। केंद्र ने इसी कारण 2 राज्यों को रेड अलर्ट पर भी रखा है।

इसके अलावा रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह आतंकी मंदिर को मुद्दा बनाकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद समेत दक्षिणपंथी समूहों के नेताओं के साथ भाजपा नेताओं को मारने और दंगे भड़काने की साजिश रच रहे हैं। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में कई राज्यों को अलर्ट कर दिया है।


टाइम्स नाऊ के पत्रकार निकुंज ने बताया है कि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि पाकिस्तान के आतंकी और पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकियों को इस कार्य के लिए निर्देश मिल चुका है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की निंदा से बचने के लिए पाकिस्तान ने इस बार सीमा पार से आतंकियों को नहीं भेजा है। वह भारत में मौजूद अपने लोगों के सहारे ही आतंकी मंसूबों को पूरा करने की फिराक में है

।
राम मंदिर का भूमिपूजन 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। भूमि पूजन की तारीख के ऐलान के बाद से ही खुफिया एजेंसियों के पास हमले को लेकर अलर्ट है। एजेंसियों ने अयोध्या में 5 अगस्त से 15 अगस्त के बीच बड़ी आतंकी साजिश का अंदेशा जताया था। इसके बाद यूपी के सभी जिलों के बस स्टैंड्स, रेलवे स्टेशन पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। स्वयं भूमि पूजन से पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुरक्षा को लेकर बैठक की थी और हर जिले में सतर्कता के साथ सभी असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा था।

उत्तर प्रदेश : "राम का अस्तित्व नहीं " : समाजवादी नेता लौटन राम निषाद का आपत्तिजनक बयान

राम काल्पनिक पात्र सपा नेता
समाजवादी नेता चौधरी लौटन राम निषाद (साभार: न्यूज़ नेशन)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक समय था जब समाजवादी पार्टी ही के मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम वोट की खातिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते निहत्ते रामभक्तों पर गोलियां चलवाकर उनके खून की होली खेलने में तनिक भी संकोच नहीं किया। फिर जब उनके पुत्र अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री  काल में 84 कोसी यात्रा को बाधित करने का प्रयास किया। 
आज उत्तर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्र समाजवादी पार्टी और दूसरे दलों में समस्त हिन्दुओं से जानना चाहता है कि "क्या अपनी कुर्सी और तिजोरी भरने के लिए आखिर कब तक राम के अस्तित्व को नकार हिन्दू होते हुए अपने ही देवी-देवताओं का अपमान करते रहोगे? और जिन मुस्लिम वोटों के लिए ये जो छिछोरी सियासत कर रहे हो, उनसे कुछ शिक्षा लो, और अगर नहीं ले सकते हो, सियासत करना छोड़ दो।" जिन मुस्लिम वोटों की खातिर तुम बेशर्म हिन्दू बकवास कर रहे हो, बेंगलुरु में देखा नहीं। जिस कांग्रेस ने जिन मुस्लिम वोटों की खातिर सच्चाई को छुपाकर कभी अयोध्या मुद्दा हल नहीं होने दिया और इतना ही नहीं, मथुरा में श्रीकृष्णा जन्मभूमि पर आये छह के छह निर्णय श्रीकृष्णा जन्मभूमि के पक्ष में आने के बावजूद अपनी कुर्सी की खातिर विवाद बनाकर रखे रहे, कोर्ट के निर्णय तक लागू करने में अनगिनत जीरो लेकर फेल रहे, जबकि उसी कांग्रेस के विधायक के रिश्तेदार द्वारा मोहम्मद पर टिप्पणी करने पर तुम्हारे शांतिप्रिय, गरीब और मजलूमों ने दंगा कर दिया।
आखिर कब तक तुष्टिकरण पुजारी बने रहोगे? सच्चाई को स्वीकार करना सीखो और समाज को सच्चाई से अवगत करवाओ, बहुत खेल ली हिन्दू-मुसलमान के खून की होली। दंगा में मरता बेगुनाह है, तुम्हारे जैसे दंगे की चिंगारी छोड़ने वाले नहीं। समय बदल रहा है, इतिहास की वास्तविकता को स्वीकारो। 
समाजवादी पार्टी के नेता चौधरी लौटन राम निषाद ने 18 अगस्त, 2020 को राम मंदिर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। निषाद ने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया है।
समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि भगवान श्री राम फिल्मों की तरह ही एक काल्पनिक पात्र थे। निषाद पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों का चयन करने के लिए अगस्त 18 को अयोध्या पहुँचे थे।

अपने हिंदू विरोधी बयानबाजी को जारी रखते हुए, सपा नेता निषाद ने आगे दावा किया कि संविधान ने भी स्वीकार किया है कि भगवान राम जैसा कोई नायक कभी भारत में पैदा नहीं हुआ था।
संविधान की मूल प्रति में राम और ...लगता है इन जैसे सियासतखोरों ने संविधान को कभी खोलकर नहीं देखा। बात करते हैं संविधान की। पता कौन अक्ल से पैदल इन जैसों को नेता बनाता और मानता है? ऐसे नेता पागल कहा जाये या फिर किसी अन्य अमर्यादित शब्द से, जिसे नहीं मालूम की संविधान के प्रारम्भ के पृष्ठों में ही श्रीराम की अयोध्या लौटते चित्र है।ये लोग वास्तव में अनपढ़ हैं, इन्हें इतना भी नहीं मालूम की डॉ अम्बेडकर ने इनके गरीब, मजलूम और शांतिप्रिय के लिए क्या शब्द बोले हुए हैं। भारत में दंगे इन जैसे कुर्सी और तिजोरी भरने के भूखे लोगों की वजह से होते हैं, चिंगारी छोड़ चुपचाप पतली गली से निकल जाते हैं, और मर जाते बेगुनाह हैं। उत्तर प्रदेश योगी सरकार को ऐसे नेताओं को संज्ञान में लेना चाहिए।   
मीडिया से बात करते हुए निषाद ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर बने या कृष्ण मंदिर, उससे मुझे कोई लेना देना नहीं है। भगवान राम में मेरी आस्था नहीं है। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। मेरा विश्वास डॉ.भीमराव अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, छत्रपति साहूजी महाराज, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा बनाए गए संविधान पर है, जिनसे हमें सरकारी नौकरियों में पढ़ने, लिखने, बैठने का अधिकार मिला है।” इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा मेरी आस्था उनमें है जिनकी वजह से मुझे सीधा लाभ मिला।
भगवान राम के अस्तित्व पर संदेह जताते हुए निषाद ने आगे कहा, “राम पर ही नहीं मैं उनके अस्तित्व पर भी सवाल उठाता हूँ। राम एक काल्पनिक पात्र है, जो फिल्म की पटकथा के समान है। राम एक ऐसा चरित्र है, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। संविधान ने यह भी कहा है कि राम का जन्म किसी नायक से नहीं हुआ, राम नाम का कोई नायक भारत में पैदा नहीं हुआ।”

किसने किया इन नारों का विरोध ?
इन्ही जैसे वोट के भूखे नेताओं के सहयोग और समर्थन के कारण पिछली यूपीए सरकार इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दू धर्म को कलंकित कर बेगुनाह साधु-संत जैसे साध्वी प्रज्ञा(वर्तमान सांसद), स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित आदि को जेलों में डाल रही थी। अपना मुंह बचाने के लिए पकडे गए आतंकवादियों को तो कोरमा, बिरयानी खिलाई जा रही थी, और इनकी सात्विकता को भंग किया जा रहा था। दूसरे, नागरिकता संशोधक कानून विरोध की आड़ में इन्ही जैसे ढोंगी कुर्सी के भूखे नेताओं की आड़ में "fuck hintuva" और "हिन्दू तेरी कब्र खुदेगी" जैसे नारे लगे, किसी का साहस नहीं विरोध करने का। धर्म-निरपेक्षता की क,ख तक आती नहीं चले हैं धर्म-निरपेक्ष बनने। दिल्ली दंगे में पकडे गए दंगाई कबूल रहे हैं विरोध की असली वजह। अगर अभी भी वोट के भूखे नेता अपनी आंखें नहीं खोलते, फिर कोई नहीं खोल सकता। इन्ही जैसों ने कांग्रेस और वामपंथियों से साठगांठ कर भारत के गौरवमयी इतिहास को धूमिल मुग़ल आक्रांताओं को महान पढ़ाने में सफल हुए थे।  
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साभार : यूट्यूब आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार शीर्षक देख आप सोंचगे...
इस बीच, भाजपा ने सपा नेता लोटन राम निषाद के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से स्पष्टीकरण की माँग की है।

अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर निर्माण का हो गया श्रीगणेश

राम मंदिर
लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू हो गया है। यह जानकारी गुरुवार (20 अगस्त, 2020) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने ट्वीट के माध्यम सेे साझा की है।
5 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन का कार्य संपन्न किया था। जिसके बाद सभी को इस बात की प्रतीक्षा थी कि मंदिर का निर्माण कार्य कब शुरू होगा। जिसका जवाब ट्रस्ट के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से दिया गया है। राम मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा, “श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है। CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है। मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।”

ट्रस्ट ने बताया, “श्री रामजन्मभूमि मन्दिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो। मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा।”
 इससे पहले राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने भी राममंदिर को लेकर जानकारी साझा की थी। उन्होंने कहा था कि राम मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह होगा कि इस पर किसी प्रकार के कोई प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं होगा। हजारों सालों तक इस पर भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं का कोई असर नहीं होगा।
उन्होंने आगे कहा था कि मंदिर के लिए जिस उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, उससे ये मंदिर 1000 साल तक आँधी तूफान सहने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित होगा। जिस तरह नदियों का पुल बनता है, उसी तरह नींव के पिलर खड़े होंगे। बस अंतर इतना होगा कि नींव में लोहे का प्रयोग नहीं होगा, बीम पत्थर की बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राम भक्तों को राम मंदिर के परिसर में खुदाई में मिले पुरातत्वों के भी दर्शन प्राप्त होंगे।
वहीं अयोध्या मंदिर के ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी राम मंदिर के लेआउट प्लान को लेकर भी जानकारी साझा की थी। जिसके अनुसार सोमनाथ और अक्षरधाम मंदिरों से भी भव्य राम मंदिर बनने की बात कही गई थी।

उत्तर प्रदेश : ‘भारत को खंडित करके ‘उर्दूस्तान’ बनाओ, लाल किले पर PM मोदी को नहीं फहराने देंगे झंडा’; FIR दर्ज

Modi unfurls national flag at Red Fort - Window To News
लाल किले पर झंडा फहराते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (प्रतीकात्मक) 
अगस्त 5 को अयोध्या में शिलान्यास होने के बाद से जो उपद्रवियों द्वारा कुछ नेताओं और पार्टियों के इशारे पर देश में अराजकता फैलाकर सौहार्द ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं, इसका इतिहास जानने के लिए ज्यादा दूर नहीं केवल 1947 में हुए बंटवारे के समय पाकिस्तान जाते मुसलमानों द्वारा लगाए जा रहे नारों "हंस के लिया पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिन्दुस्तान" को स्मरण करना होगा। और उन नारों को स्मरण कर इनका समर्थन कर रहे नेताओं और पार्टियों की मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनका भारत प्रेम एक ढोकला है, अन्यथा भारत विरोधी गतिविधियों पर शुरू से ही सख्ती दिखाई होती आज यह स्थिति नहीं होती, जिन परिस्थितियों से भारत झूझना पड़ रहा है। 
CAA विरोध के नाम पर आर्थिक जिहाद की माँग
 विरोधी मुसलमानों को स्वामी रामदेव, रिलायंस,अम्बानी और अडानी के उत्पादों के बहिष्कार करने के लिए बोल सकते हैं, लेकिन आज तक किसी में चीनी उत्पादों के बहिष्कार करने की हिम्मत नहीं हुई, जहाँ पर अब नए कुरान लिखे जाने की कवायद शुरू होने के अलावा इस्लाम पर इतनी पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं, जिसका समय-समय पर अपने ब्लॉग में उल्लेख भी करता रहा हूँ। यदि इसका एक प्रतिशत भी भारत में हो रहा होता, CAA से कहीं अधिक चीख-पुकार हो रही होने के साथ-साथ सारे मानवाधिकार वाले भी शोर मचा रहे होते। लेकिन चीन में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर सब खामोश हैं, क्यों? इस बात को विश्व भी जनता है कि मुसलमान जितना सुरक्षित भारत में है, कहीं और नहीं।
कुछ दिनों पहले तक कई खबरें आये दिन आती थी जिसमे मुस्लिम कट्टरपंथी कहते थे की हम वन्दे मातरम नहीं कहेंगे, और कई घटनाओं में तो जन गन मन का भी विरोध किया गया, पर इन दिनों देश भर में यही तत्व तिरंगा लेकर चल रहे है और राष्ट्रगान गा रहे है।
असल में ये एक सोची समझी चाल है और इस बात को खुद मुस्लिम पत्रकार अरफा खानुम ने स्वीकार किया है, जहाँ सभी धर्म के लोग होते है वहां पर सेकुलरिज्म, देशभक्ति की बात करो, पर जहाँ पर सभी मुसलमान हो वहां पर इस्लामिक हुकूमत की बात करो।
अरफा खानुम का विडियो सामने आया है जिसमे वो मुसलमानों की भीड़ के आगे बोल रही है और बता रही है की कुछ समय के लिए हमे भारत के प्रति वफादारी दिखानी है, हमे तिरंगा लहराना है, राष्ट्रगान भी गाना है पर ये चीज सिर्फ तब तक जब तक हम इस्लामिक सोसाइटी यानि भारत में इस्लाम की हुकूमत न ले आये। (विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे लिंक को क्लिक करिये)
गोधरा पर सियापा करने वाले ये नेता और पार्टियां तुष्टिकरण के आगे देश को विभाजित करने वाली ताकतों का तन,मन और धन से साथ देने में संकोच तक नहीं कर रहे। देखिए प्रमाण : इन नेताओं की मानसिकता उस समय भी जगजाहिर हो गयी थी, जब ये जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश को तोड़ने वाले "टुकड़े-टुकड़े गैंग" का समर्थन करने पहुँच गए थे। 
दूसरे जब नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हिन्दुत्व विरोधी, देश का इस्लामीकरण करने(देखिए नीचे दिया लिंक), मोदी और योगी की कब्र खोदने के नारे लगाए जा रहे थे, किसी ने इन आपत्तिजनक नारों का विरोध नहीं किया। क्यों? जबकि ये अराजकता और हिन्दू विरोधी हरकतें करने वाले हिन्दुओं के सामने कुछ और उनके पीछे अपने असली मकसद पर चर्चा करते थे। और न ही कोई #not in my name, #award vapasi, #intolerence और गंगा-जमुना तहजीब आदि का ढोंग करने वाला कोई गैंगस्टर तक एक शब्द नहीं बोला। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि ये गैंगस्टर देश विरोधियों के बिकाऊ गुलाम हैं और ये लोग अपनी तिजोरी भरने के लिए किसी हद तक जा सकते हैं। इनकी बला से कितने बेगुनाहों की जानें जाती हैं। सरकार को चाहिए ऐसे तत्वों पर केवल कार्यवाही ही नहीं, इनके परिवार में सभी(बच्चों से लेकर परिवार के वरिष्ठ तक) के बैंक खाते और व्यवसाय की जाँच करनी चाहिए।      
शिलान्यास के बाद से गुलाम मानसिकता वाले उपद्रव करने में लगे हुए हैं, जिन्हे मीडिया भी इतना महत्व नहीं दिया जा रहा। अब उत्तर प्रदेश लखनऊ में शनिवार (अगस्त 8, 2020) की दोपहर तब अचानक से हड़कंप मच गया, जब पत्रकारों को विदेशी नम्बरों से फोन कॉल्स आने लगे। 12 बजे के बाद करीब 3 बजे तक ये सिलसिला चला। फोन कॉल्स का लोकेशन यूनाइटेड स्टेट्स और एटलांटा बता रहा था। साथ ही ये फोन कॉल्स पर ‘यूसुफ अली’ का नाम दिखा रहा था। इन फोन कॉल्स में अयोध्या के राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर धमकियाँ दी जा रही थीं।
साथ ही मुसलमानों को भी भड़काया जा रहा है। अपील की जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया जाए और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर मुसलमानों को भी भड़काया जा रहा है। लोगों को किए गए फोन कॉल्स में कहा गया कि भारत के मुसलमान मिल कर अब एक अलग देश ‘उर्दूस्तान’ की माँग करें, जो भारत को खंडित कर के बनाया जाएगा। पत्रकारों ने तुरंत इस बात की शिकायत कराई।



Image may contain: 1 person, beard, text that says 'शांति दूत" के महान विचार सुनिए-- अमप्रकाश भारत आसानी से इस्लामिक देश बनाया जा सकता को से संतानें पैदा करनी संतानें भले ही भूखी- रहें लेकिन वोट तो दे ही सर्कैगी।अपने वोटों से हम अपने MLA, MP, cm, PM चुनेंगे| फिर 50% जनसंख्या होने पर लोकतंत्र समाप्त कर शरिया कानून लागू कर दिया जाएगा| इसके बाद हम गैरमजहबी लोगों को खदेड़ कर उनकी संपत्ति और औरतों पर अधिकार कर लेंगे और अमीर हो जाएंगे जैसा कि कश्मीर में हुआ| लेकिन यह सब बड़े गोपनीय तौर पर करना है| उन्हें सबकुछ स्वाभाविक लगना Dr Zakir Naik'
लखनऊ स्थित हजरतगंज पुलिस स्टेशन में इसे लेकर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि पत्रकारों के अलावा कई अन्य लोगों को भी फोन कॉल्स से वॉइस मैसेज प्राप्त हुए, जिसमें 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर धमकाया जा रहा है और साथ ही देश की एकता को खंडित किए जाने वाली बातें की जा रही हैं। इस मामले में FIR दर्ज हो गई है।
पांडेय ने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। यूएपीए और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, कई पत्रकारों ने इंटरनेशनल नम्बर देख कर कॉल नहीं उठाया था। लेकिन, लखनऊ में यूपी इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट से जितने भी पत्रकार जुड़े हुए हैं, उन सभी को फोन कॉल्स आए। उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पत्रकारों को ये कॉल्स आए।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पूर्व जब सभी का मत था कि "जो भी निर्णय होगा मान्य होगा", फिर आज हिन्दुओं पर प्रहार, मंद.....
कहा गया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर के राम मंदिर बनाया जा रहा है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही उदाहरण देते हुए भड़काया गया कि जिस तरह से सिख एक अलग खालिस्तान की माँग कर रहे हैं, उसी तरह से मुसलमानों को भारत से कट कर एक अलग देश उर्दूस्तान के लिए प्रयास करना चाहिए। इसमें खालिस्तान का भी समर्थन किया गया।