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उत्तर प्रदेश : "राम का अस्तित्व नहीं " : समाजवादी नेता लौटन राम निषाद का आपत्तिजनक बयान

राम काल्पनिक पात्र सपा नेता
समाजवादी नेता चौधरी लौटन राम निषाद (साभार: न्यूज़ नेशन)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक समय था जब समाजवादी पार्टी ही के मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम वोट की खातिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते निहत्ते रामभक्तों पर गोलियां चलवाकर उनके खून की होली खेलने में तनिक भी संकोच नहीं किया। फिर जब उनके पुत्र अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री  काल में 84 कोसी यात्रा को बाधित करने का प्रयास किया। 
आज उत्तर प्रदेश ही नहीं, राष्ट्र समाजवादी पार्टी और दूसरे दलों में समस्त हिन्दुओं से जानना चाहता है कि "क्या अपनी कुर्सी और तिजोरी भरने के लिए आखिर कब तक राम के अस्तित्व को नकार हिन्दू होते हुए अपने ही देवी-देवताओं का अपमान करते रहोगे? और जिन मुस्लिम वोटों के लिए ये जो छिछोरी सियासत कर रहे हो, उनसे कुछ शिक्षा लो, और अगर नहीं ले सकते हो, सियासत करना छोड़ दो।" जिन मुस्लिम वोटों की खातिर तुम बेशर्म हिन्दू बकवास कर रहे हो, बेंगलुरु में देखा नहीं। जिस कांग्रेस ने जिन मुस्लिम वोटों की खातिर सच्चाई को छुपाकर कभी अयोध्या मुद्दा हल नहीं होने दिया और इतना ही नहीं, मथुरा में श्रीकृष्णा जन्मभूमि पर आये छह के छह निर्णय श्रीकृष्णा जन्मभूमि के पक्ष में आने के बावजूद अपनी कुर्सी की खातिर विवाद बनाकर रखे रहे, कोर्ट के निर्णय तक लागू करने में अनगिनत जीरो लेकर फेल रहे, जबकि उसी कांग्रेस के विधायक के रिश्तेदार द्वारा मोहम्मद पर टिप्पणी करने पर तुम्हारे शांतिप्रिय, गरीब और मजलूमों ने दंगा कर दिया।
आखिर कब तक तुष्टिकरण पुजारी बने रहोगे? सच्चाई को स्वीकार करना सीखो और समाज को सच्चाई से अवगत करवाओ, बहुत खेल ली हिन्दू-मुसलमान के खून की होली। दंगा में मरता बेगुनाह है, तुम्हारे जैसे दंगे की चिंगारी छोड़ने वाले नहीं। समय बदल रहा है, इतिहास की वास्तविकता को स्वीकारो। 
समाजवादी पार्टी के नेता चौधरी लौटन राम निषाद ने 18 अगस्त, 2020 को राम मंदिर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। निषाद ने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया है।
समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि भगवान श्री राम फिल्मों की तरह ही एक काल्पनिक पात्र थे। निषाद पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों का चयन करने के लिए अगस्त 18 को अयोध्या पहुँचे थे।

अपने हिंदू विरोधी बयानबाजी को जारी रखते हुए, सपा नेता निषाद ने आगे दावा किया कि संविधान ने भी स्वीकार किया है कि भगवान राम जैसा कोई नायक कभी भारत में पैदा नहीं हुआ था।
संविधान की मूल प्रति में राम और ...लगता है इन जैसे सियासतखोरों ने संविधान को कभी खोलकर नहीं देखा। बात करते हैं संविधान की। पता कौन अक्ल से पैदल इन जैसों को नेता बनाता और मानता है? ऐसे नेता पागल कहा जाये या फिर किसी अन्य अमर्यादित शब्द से, जिसे नहीं मालूम की संविधान के प्रारम्भ के पृष्ठों में ही श्रीराम की अयोध्या लौटते चित्र है।ये लोग वास्तव में अनपढ़ हैं, इन्हें इतना भी नहीं मालूम की डॉ अम्बेडकर ने इनके गरीब, मजलूम और शांतिप्रिय के लिए क्या शब्द बोले हुए हैं। भारत में दंगे इन जैसे कुर्सी और तिजोरी भरने के भूखे लोगों की वजह से होते हैं, चिंगारी छोड़ चुपचाप पतली गली से निकल जाते हैं, और मर जाते बेगुनाह हैं। उत्तर प्रदेश योगी सरकार को ऐसे नेताओं को संज्ञान में लेना चाहिए।   
मीडिया से बात करते हुए निषाद ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर बने या कृष्ण मंदिर, उससे मुझे कोई लेना देना नहीं है। भगवान राम में मेरी आस्था नहीं है। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। मेरा विश्वास डॉ.भीमराव अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, छत्रपति साहूजी महाराज, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा बनाए गए संविधान पर है, जिनसे हमें सरकारी नौकरियों में पढ़ने, लिखने, बैठने का अधिकार मिला है।” इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा मेरी आस्था उनमें है जिनकी वजह से मुझे सीधा लाभ मिला।
भगवान राम के अस्तित्व पर संदेह जताते हुए निषाद ने आगे कहा, “राम पर ही नहीं मैं उनके अस्तित्व पर भी सवाल उठाता हूँ। राम एक काल्पनिक पात्र है, जो फिल्म की पटकथा के समान है। राम एक ऐसा चरित्र है, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। संविधान ने यह भी कहा है कि राम का जन्म किसी नायक से नहीं हुआ, राम नाम का कोई नायक भारत में पैदा नहीं हुआ।”

किसने किया इन नारों का विरोध ?
इन्ही जैसे वोट के भूखे नेताओं के सहयोग और समर्थन के कारण पिछली यूपीए सरकार इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दू धर्म को कलंकित कर बेगुनाह साधु-संत जैसे साध्वी प्रज्ञा(वर्तमान सांसद), स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित आदि को जेलों में डाल रही थी। अपना मुंह बचाने के लिए पकडे गए आतंकवादियों को तो कोरमा, बिरयानी खिलाई जा रही थी, और इनकी सात्विकता को भंग किया जा रहा था। दूसरे, नागरिकता संशोधक कानून विरोध की आड़ में इन्ही जैसे ढोंगी कुर्सी के भूखे नेताओं की आड़ में "fuck hintuva" और "हिन्दू तेरी कब्र खुदेगी" जैसे नारे लगे, किसी का साहस नहीं विरोध करने का। धर्म-निरपेक्षता की क,ख तक आती नहीं चले हैं धर्म-निरपेक्ष बनने। दिल्ली दंगे में पकडे गए दंगाई कबूल रहे हैं विरोध की असली वजह। अगर अभी भी वोट के भूखे नेता अपनी आंखें नहीं खोलते, फिर कोई नहीं खोल सकता। इन्ही जैसों ने कांग्रेस और वामपंथियों से साठगांठ कर भारत के गौरवमयी इतिहास को धूमिल मुग़ल आक्रांताओं को महान पढ़ाने में सफल हुए थे।  
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साभार : यूट्यूब आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार शीर्षक देख आप सोंचगे...
इस बीच, भाजपा ने सपा नेता लोटन राम निषाद के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से स्पष्टीकरण की माँग की है।

हिंदुओं को बताया ‘भेड़ों की नस्ल’ : भगवान श्रीराम से लेकर गोधरा तक का मजाक उड़ाने वाले मुनव्वर फारूकी ने

मुनव्वर फारूकी के ख़िलाफ़ शिकायत हुई दर्ज
 शिव रावत ने दर्ज कराई  मुनव्वर फारूकी के ख़िलाफ़ शिकायत
स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम हिंदू देवी देवताओं पर अभद्र टिप्पणियाँ करने वाले मुनव्वर फारूकी के ख़िलाफ़ एक बार फिर एफआईआर करवाने की तैयारी है। हालाँकि, अभी ये एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। लेकिन उसके ख़िलाफ़ शिकायत दायर करवा दी गई है।
दिल्ली के किशनगढ़ थाने में शिवम राउत नाम के युवक ने फारूकी के खिलाफ़ ये शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में उन्होंने मुनव्वर फारूकी समेत मुंबई स्थित ‘द हैबीटेट- कॉमेडी एंड म्यूजिक कैफे’ पर भी एफआईआर दर्ज करने की अपील की है।
उनका कहना है कि कुछ समय पहले जब फारूकी की वीडियोज वायरल होना शुरू हुईं थी, तब कई एक्टिविस्टों ने इस मामले को उठाया था। चारों ओर से आलोचना और निंदा को देखते हुए उस वीडियो से विवादित पार्ट को हटा दिया गया और यूट्यूब पर वीडियो मौजूद रही।
कई शिकायतों के बाद भी जब फारूकी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई। नतीजतन ये दोबारा यूट्यूब पर आया और इस बार एक नए अंदाज में उन लोगों का मजाक बनाया जो उसके ख़िलाफ़ थे। उसने इस वीडियो में उन लोगों (मुख्यत: हिंदुओं) को ‘भेड़ों की नस्ल’ बताया। साथ ही कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आगे वो आगे नेटफ्लिक्स पर भी आएगा। लोगों ने उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके बस उसे फेमस किया है।
शिवम मानते हैं कि फारूकी को अब ये लगने लगा है कि वो कुछ भी बोलेगा लेकिन उसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

शिवम बेंगलुरु में हुई हिंसा की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, “हम ऐसी हरकतों का विरोध उस तरह नहीं करेंगे जैसे पिछले दिनों हमने देखा, जहाँ पुलिस थानों को जलाया गया, शहर पर हमला किया गया, सार्वजनिक संपत्तियों को आग लगाकर शहर को दाव पर लगा दिया गया। लेकिन, हम ये जानते हैं कि इन लोगों को कैसे सबक सिखाया जाएगा। हमारे पास न्यायव्यवस्था है, कानून है और हम उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसीलिए मैंने मुनव्वर फारूकी और उस हैबीटेट क्लब के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवा दी है।”
शिवम का कहना है कि ये शिकायत दर्ज करवाने में उन्हें कई थानों से लेकर साइबर सेल के चक्कर लगाने पड़े। कोई भी इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं था। लेकिन लगातार प्रयासों, दबाव, और 5-7 घंटे के इंतजार के बाद शिकायत को दर्ज कर लिया गया।
कंप्लेन नंबर मिलने के बाद अब वह लगातार कोशिश कर रहे हैं कि मुनव्वर फारूकी को उसके कृत्य के लिए जेल में डाला जाए। वे कहते हैं कि फारूकी ने भगवान के बारे में असंवेदनशील टिप्पणियाँ कीं जो किसी भी रूप में बर्दाश्त योग्य नहीं है। इसके अलावा उन्होंने गोधरा कांड में भी फारूकी की टिप्पणी का जिक्र किया। जहाँ उसने कारसेवकों के मरने का मजाक बनाया था।

वह अकरम हुसैन के केस का जिक्र करते हुए कहते हैं कि ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है, अगर हम कदम उठाएँ। अगर हम शिकायत करेंगे तो एक आशा रहती है कि इनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई होगी और इन्हें जेल में डाला जाएगा।
यूट्यूब चैनल पेन ऑफ धर्म पर पूरे मामले के बारे बताते हुए शिवम कहते हैं कि अगर हम लोग शिकायत नहीं दर्ज करवाएँगे, तो सोशल मीडिया एक्टिविजम केवल एकतरफा होता है, वो भी एक निश्चित समय के लिए। हमें लगता है कि जंग जीत ली गई। लेकिन सच ये होता है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई ऐसी जंग एक शुरूआत होती है, अंत नहीं। वहाँ सक्रियता दिखाना जरूरी है। मगर, हकीकत में हमें उससे आगे निकलना होगा। ताकि ऐसे लोगों को पता चल सके कि अगर वह कुछ गलत करेंगे तो उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसलिए उन्होंने इस फारूखी के अलावा उस जगह पर भी शिकायत करवाई है जहाँ उसने कॉमेडी की।

महापर्व छठ : भगवान राम ने सूर्य देव का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत में क्या किया था

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
त्यौहारों के देश भारत में कई ऐसे पर्व हैं, जिन्हें काफी कठिन माना जाता है और इन्हीं में से एक है लोक आस्था का महापर्व छठ, जिसे रामायण और महाभारत काल से ही मनाने की परंपरा रही है।
महापर्व छठ पूजा इस साल 31 अक्टूबर से लेकर 3 नवबंर तक मनाई जाएगी। छठ पूजा भारत के पूर्वी हिस्सें में मनाई जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इन राज्यों में छठ पूजा का महत्व सबसे बड़े त्यौहार के रूप में है। इस पर्व का लोग पूरे साल बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। छठ पूजा के करने के लिए बिहार के लोग अपने घर वापस लौट आते हैं। इस दिन बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक नए कपड़े पहनते हैं। लोगों के बीच इस महापर्व का काफी उत्साह होता है। महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीरमहापर्व छठ पूजा की कब शुरूआत हुई, इसको लेकर चार पौराणिक कथाएं हैं- जानते हैं पहली कथा के बारे में जिसमें महापर्व छठ पूजा करने की बात कही गई है। फिर उसी दिन से छठ पूजा मनाने की शुरूआत हुई- पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान राम ने सबसे पहले छठ पूजा किया था।अयोध्या नगरी में दशरथ नाम के राजा थे। जिनकी कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा नाम की पत्नियां थी।भगवान राम के विवाह के बाद राजा दशरथ ने राम जी का राज्याभिषेक करने की इच्छा जताई। इस पर देव लोक में देवताओं को चिंता होने लगी कि राम को राज्य मिल जाएगा तो फिर रावण का वध असंभव हो जाएगा
देवताओं ने व्याकुल होकर देवी सरस्वती से उपाए करने की प्रार्थना की। देवी सरस्वती ने मन्थरा, जो कि रानी कैकयी की दासी थी, उसकी मती को फेर दिया. इसके बाद मन्थरा की सलाह पर रानी कैकयी कोपभवन में चली गई। राजा दशरथ जब रानी को कैकयी को मनाने आए तो उन्होंने वरदान मांगा कि भरत को राजा बनाया जाए और राम को 14 साल के लिए वनवास पर भेज दिया जाए।   इसके बाद भगवान राम जी के साथ सीता और लक्ष्मण भी वनवास पर चले गए
मान्यता है कि भगवान राम सूर्यवंशी थे और इनके कुल देवता सूर्य भगवान थे। इसलिए भगवान राम और सीता जब वनवास खत्म होने और लंका से रावण वध करके अयोध्या वापस लौटे तो अपने कुलदेवता का आशीर्वाद पाने के लिए इन्होंने देवी सीता के साथ षष्ठी तिथि का व्रत रखा और सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्टान एवं अन्य वस्तुओं से अर्घ्य प्रदान किया। सप्तमी तिथि को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राजकाज संभालना शुरु किया। इसके बाद से आम जन भी सूर्यषष्ठी का पर्व हर साल मनाने लगे
Related imageRelated imageनहाय-खाय के साथ आरंभ हुए लोकआस्था के इस चार दिवसीय महापर्व को लेकर कई कथाएं मौजूद हैं। एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है। कहते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। मान्याताओं के अनुसार, वे प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे।
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किंवदंती के अनुसार, ऐतिहासिक नगरी मुंगेर के सीता चरण में कभी मां सीता ने छह दिनों तक रह कर छठ पूजा की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया। इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया। ऋषि की आज्ञा पर भगवान राम एवं सीता स्वयं यहां आए और उन्हें इसकी पूजा के बारे में बताया गया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता को गंगा छिड़क कर पवित्र किया एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। यहीं रह कर माता सीता ने छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।
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इस लोकआस्था और सूर्य उपासना के चार दिवसीय त्यौहार की शुरुआत नहाय-खाय की परम्परा से होती है। यह त्यौहार पूरी तरह से श्रद्धा और शुद्धता का पर्व है। इस व्रत को महिलाओं के साथ ही पुरुष भी रखते हैं। चार दिनों तक चलने वाले लोकआस्था के इस महापर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जला व्रत रखा जाता है।
छठ को पहले केवल बिहार, झारखंड और उत्तर भारत में ही मनाया जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे पूरे देश में इसके महत्व को स्वीकार कर लिया गया है। छठ पर्व षष्ठी का अपभ्रंश है। इस कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया। छठ वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक माह में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है।
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इस पूजा के लिए चार दिन महत्वपूर्ण हैं नहाय-खाय, खरना या लोहंडा, सांझा अर्घ्य और सूर्योदय अर्घ्य। छठ की पूजा में गन्ना, फल, डाला और सूप आदि का प्रयोग किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया को भगवान सूर्य की बहन बताया गया हैं। इस पर्व के दौरान छठी मइया के अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की छठी माता रक्षा करती हैं। कहते हैं कि भगवान की शक्ति से ही चार दिनों का यह कठिन व्रत संपन्न हो पाता है।
Image result for महापर्व छठछठ वास्तव में सूर्योपासना का पर्व है। इसलिए इसे सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सूर्य की उपासना उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन सूर्यदेव की आराधना करने से व्रती को सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व के आयोजन का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी पाया जाता है। इस दिन पुण्यसलिला नदियों, तालाब या फिर किसी पोखर के किनारे पर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था। प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं। बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी में किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए। इस मान्यता के तहत ही इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा।
यह पर्व सबको एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। इस पर्व में अमीर-गरीब, बड़े-छोटे का भेद मिट जाता है। सब एक समान एक ही विधि से भगवान की पूजा करते हैं। अमीर हो वो भी मिट्टी के चूल्हे पर ही प्रसाद बनाता है और गरीब भी, सब एक साथ गंगा तट पर एक जैसे दिखते हैं। बांस के बने सूप में ही अर्घ्य दिया जाता है। प्रसाद भी एक जैसा ही और गंगा और भगवान भास्कर सबके लिए एक जैसे हैं।
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व्रती महिलाएं न करें ये काम
छठ में साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाता है, इसलिए इस दिन व्रत करने वाले को साफ सुथरे और धुले कपड़े ही पहनने चाहिए। छठ पर्व के 4 दिन व्रत करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिस्तर पर भी सोना नहीं चाहिए
कौन हैं छठ देवी और क्यों होती है पूजा?
मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं। उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना और उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर (तालाब) के किनारे यह पूजा की जाती है। षष्ठी मां यानी कि छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है और इसलिए छठ पूजा की जाती है
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छठी मैया से मिलते हैं सैकड़ों यज्ञों के फल
  • छठी मैया का पूजा करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उनके जीवन को खुशहाल रखती हैं
  • छठी मैया की पूजा से सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है
  • परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी छठी मैया का व्रत किया जाता है
  • छठी मैया की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
पौराणिक मान्यता के अनुसार छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है, जो एक कठिन तपस्या की तरह है। यह प्राय: महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। 
व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैया का भी त्याग किया जाता है।  
छठ पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती द्वारा फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं, पर व्रती बिना सिलाई किए कपड़े पहनते हैं। 
महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहन कर छठ करते हैं। इस व्रत को शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहिता महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए। (इनपुट्स सहित)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीराम की 7 फुट ऊंची मूर्ति का किया अनावरण

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भगवान राम की मूर्ति का अनावरण करते हुए योगी आदित्यनाथ 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने आज(जून 7) अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास के 81वें जन्मोत्सव समारोह के दौरान भगवान राम की 7 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया। यह समारोह 14 जून तक चलेगा और 15 जून को एक धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है जिसमें राम मंदिर को लेकर रणनीति तय की जाएगी।
7 फुट ऊंची यह आदमकद प्रतिमा खास तरह की लकड़ी से बनी है और यह दुर्लभ काष्‍ठकला की श्रेणी में आता है। इस मूर्ति को अयोध्या शोध संस्थान के शिल्प संग्रहालय में स्थापित किया जाएगा। यह प्रतिमा कर्नाटक के कावेरी कर्नाटक स्टेट आर्ट्स एवं क्राफ्ट इंपोरियम से करीब 35 लाख रुपये में खरीदी गई है। इस मूर्ति को बनाने में लगभग 3 साल का समय लगा। योगी सरकार पहले ही अयोध्या में भगवान राम की 221 मीटरी ऊंटी कांस्य प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान कर चुकी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, योगी 'कैरेबियन देशों की रामलीला यात्रा', 'अयोध्या की पुरातात्विक रिपोर्ट', 'थारुओं की कला एवं संस्कृति' तथा 'अवध की लोक चित्रकला' पुस्तक का लोकार्पण करेंगे। इस दौरान वह मूर्तिकारों, चित्रकारों एवं साहित्यकारों का सम्मान करेंगे। इराक एवं होंडुरास के राजदूत द्वारा प्रेषित 'राम की विश्व यात्रा' सम्बन्धी अभिलेखों के फोल्डर इस अवसर पर उन्हें भेंट किए जाएंगे।
भ्रमण के अवसर पर मुख्यमंत्री अयोध्या के विकास कार्यो का निरीक्षण करेंगे। वह राम की पैड़ी, वहां निर्माणाधीन भजन स्थल, अयोध्या बस स्टेशन के निर्माण कार्य तथा गुप्तार घाट के सौंदर्यीकरण कार्य की प्रगति की जानकारी प्राप्त करेंगे।