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दिल्ली : घाट वाली छठ पर पल-पल पैंतरा बदल रहे मुख्यमंत्री केजरीवाल

कुर्सी की खातिर रंग बदलने में दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने गिरगिट को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है।  
दिल्ली में छठ पूजा पर DDMA के माध्यम से रोक लगाने के बाद केजरीवाल सरकार के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस मुद्दे पर बीजेपी के लगातार हमले के जवाब में सिसोदिया द्वारा गेंद केंद्र के पाले में डालने की नाकाम कोशिश की गई थी तो वहीं अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद मैदान में उतर आए हैं। केजरीवाल ने राजधानी में सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की मंजूरी के लिए उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल को पत्र लिखा है।

एलजी को लिखे पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में पिछले तीन महीनों से कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। इसलिए कोरोना प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखने हुए छठ पूजा मनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली से सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से सटे अन्य राज्यों में भी नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए उचित प्रतिबंधों के साथ छठ पूजा मनाने की अनुमति दी गई है।

दिल्ली के लोगों और बीजेपी के हमलों के मद्देनजर केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल से अपील किया है कि जल्द से जल्द DDMA की बैठक बुलाकर छठ पूजा के लिए मंजूरी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से एलजी अनिल बैजल से कहा है कि दिल्ली के लोग बड़ी आस्था के छठ पूजा का पर्व हर साल मनाते हैं। यह त्योहार हमारी वैदिक आर्य संस्कृति का अहम हिस्सा है। छठ पूजा पर सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य समृद्धि और सुखों का लाभ होता है।

पत्र देखकर ऐसा लग रहा होगा जैसे इसके पहले प्रतिबन्ध किसी और ने लगाया था लेकिन ऐसा नहीं है। हालाँकि पिछली बार कोरोना के चलते दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व का आयोजन नहीं किया गया था। तो वहीं इस साल ईद सहित कई आयोजनों की अनुमति दी गई जबकि उस समय कोरोना के मामले ज़्यादा थे। लेकिन छठ के मामले में इस साल भी दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने कोरोना की आड़ लेते हुए आदेश जारी कर सार्वजनिक जगहों पर छठ पर्व के आयोजन पर रोक लगा दी है। जिसे लेकर दिल्ली बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। यहाँ तक की बीजेपी ने ईद पर अनुमति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री हाउस का घेराव करने की भी कोशिश की थी।

वहीं दो दिन पहले 12 अक्टूबर, 2021 को छठ पूजा पर प्रतिबंध को राजनीतिक मुद्दा बनते देखकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर गेंद केंद्र के पाले में डालने की कोशिश की थी, ताकि इस मुद्दे पर भाजपा के हमले को कुंद किया जा सके। लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसले की जिम्मेदारी सौंपते हुए गेंद वापस दिल्ली सरकार के पाले में डाल दी है। बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र भेजकर पर्व को मनाने की अनुमति और इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की थी।

डिप्टी सीएम का कहना था कि छठ पूजा उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में मनाए जाने वाला ऐतिहासिक पर्व है। यह पूर्वांचल समाज के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक त्योहार है। पूर्वांचल समाज के लोग इस पर्व को मनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

वहीं छठ पूजा को लेकर दिल्ली सरकार और भाजपा के बीच मचे राजनीतिक घमासान के बीच केंद्र ने यह साफ कर दिया था कि इसके लिए अलग से दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के लिए पहले से पूरे देश के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है और दिल्ली सरकार को उसी के अनुरूप फैसला लेना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रीय स्तर का एक एसओपी केंद्र की ओर से जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी राज्य अपने-अपने यहाँ संक्रमण की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर त्योहारों के लिए दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं। दिल्ली सरकार भी उसी के अनुरूप फैसला ले सकती है।

वहीं आज केजरीवाल के पत्र पर दिल्ली बीजेपी के मनोज तिवारी ने ट्वीट किया है, “जय छठी मैया… आस्था के आगे जिद टूटी… जितनी कहानी आज चिट्ठी में लिखे हो दिल्ली के मुख्यमंत्री जी.. ये सब प्रतिबंध लगाते याद नही था क्या? ख़ैर देर आए दुरुस्त आए… चलो मिल कर छठ मनाए… छठी मैया की जय।”

यह पूरा मामला तब गरमाया जब दिल्ली सरकार ने खुले में छठ के आयोजन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। दिल्ली बीजेपी ने छठ आयोजन की मनाही का विरोध करते हुए दिल्ली सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर अनुमति नहीं मिली तो उसके बावजूद भी छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी की दलील थी कि अगर पूरी दिल्ली को अनलॉक किया जा सकता है और सभी तरह की एक्टिविटी को अनुमति दे दी गई है तो छठ के आयोजन पर मनाही किस बात को लेकर है।

राजधानी में छठ पूजा पर बैन हटाने की मॉँग करते हुए मनोज तिवारी के नेतृत्‍व में भाजपा नेताओं के एक समूह ने मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को सीएम हाउस के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्‍ली पुलिस ने सीएम हाउस के चारों ओर बैरिकेडिंग की थी। इसका मकसद प्रदर्शनकारियों को सीएम हाउस तक पहुँचने से रोकना था। छठ पूजा पर बैन के खिलाफ मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन के दौरान उन्‍हें चोटें भी आईं थी।

दिल्ली : ‘कमाल के नमक हराम मुख्यमंत्री हैं केजरीवाल… ’ : मनोज तिवारी, भाजपा सांसद की लगा दी क्लास

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा पर राज्य सरकार के रोक के बाद बीजेपी और आप के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में अब दिल्ली बीजेपी के पूर्व चीफ और सांसद ने मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपशब्द तक बोल दिए। तिवारी ने कहा कि गाइडलाइंस के नाम पर झूठा ड्रामा किया जा रहा है। कोरोना महामारी के कारण राज्य सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की अनुमति नहीं दी है और दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को सही बताया है।

सत्ता के नशे में कभी अपशब्दों का प्रयोग किसी सम्मानित व्यक्ति को शोभा नहीं देता। विशेषकर, मनोज तिवारी जैसे गायक को। धर्म के नाम पर राजनीती करने के अनेकों अवसर थे, जब करवाचौथ, होली, दीपावली, राम नवमी, रक्षा बंधन आदि त्योहारों पर व्यंगात्मक आलोचना होने पर चुप्पी साधे रहे, क्यों? क्यों नहीं केजरीवाल की नाकामियों को लेकर टिप्पणी की, धरने और प्रदर्शन किए? तिवारी जी आपसे ज्यादा मैं इस पार्टी के गठन होने से विरोध करता आ रहा हूँ। जिसके लिए फोन पर धमकी भी मिल चुकी है। अपने लेखों में स्पष्ट रूप से लिखता आ रहा हूँ कि "जो मतदाता यह कहे मैंने कांग्रेस नहीं आप को वोट दिया, वह उसकी ग़लतफ़हमी है, कांग्रेस और आप सिक्के के एक ही पहलु हैं, दोनों का DNA भी एक है।" विस्तार से लिख भी चूका हूँ, जिसका धमकी देने वाले ने भी खंडन करने का साहस नहीं किया। आपके दिल्ली भाजपा अध्यक्ष रहते विधायक को सदन से बाहर निकाल दिया जाता है, आप चुप रहे। केवल नरेंद्र मोदी के कंधे बैठ गलत शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जो आपने दिल्ली सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किए, आधी दिल्ली के कार्यकर्ता तक नहीं होते, कोरोना रोकथाम में बरती गयी लापरवाहियों को उजागर करना था।   

इस तरह की बयानबाज़ी कर केजरीवाल को सुर्ख़ियों में ला रहे हैं, जो आने वाले चुनावों में भाजपा पर ही भारी पड़ेगा, मनोज जी यह कटु सच्चाई है। 

मनोज तिवारी ने ट्वीट कर कहा, “कमाल के नमकहराम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। कोविड के सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन कर आप छठ नहीं करने देंगे और गाइडलाइंस सेंटर से माँगने का झूठा ड्रामा अपने लोगों से करवाते हैं। तो बताएँ, ये 24 घंटे शराब परसोने के लिए परमिशन कौन से गाइडलाइंस को फ़ॉलो कर ली थी, बोलो CM।”

लोगों ने लगा दी मनोज तिवारी की क्लास:- 

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के कारण दिल्ली सरकार के सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा नहीं कराने के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा की अनुमति देना इस जानलेवा बीमारी का तेजी से प्रसार का रास्ता तैयार करना होगा।

उन्होंने दिल्ली में कोरोना से बिगड़े हालात के पीछे सीधे-सीधे अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया और सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा पर रोक के पीछे बिहार चुनाव में बीजेपी को मिली जीत बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल बीजेपी की जीत से चिढ़ गए हैं।

बीजेपी सांसद ने कहा कि पहले कोरोना के अटैक में भी अरविंद केजरीवाल घर से बाहर नहीं निकले थे। केजरीवाल सिर्फ विज्ञापन करते हैं। गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में व्यवस्थाएँ बेहतर हुई हैं। अभी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में छठ पूजा पर अटैक कर दिया है। आज मंदिर-मस्जिद, सप्ताहिक बाजार सब खुले हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर छठ नहीं मनाने दिया जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अरविंद केजरीवाल उत्तर प्रदेश और बिहार में हार से नाराज हैं। उन्हें दिल्ली में छठ पूजा को लेकर नियमों के तहत मनाने की छूट देनी चाहिए।

दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा पर बैन को लेकर बीजेपी और AAP में जमकर जुबानी जंग जारी है। सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा करने की माँग को लेकर दिल्ली बीजेपी पूर्वांचल मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को सीएम आवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में दिल्ली बीजेपी के महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह, पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा व अन्य कई लोग मौजूद रहे।

उधर, छठ पूजा के आयोजन को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने गाइडलाइंस जारी करके छठ पर्व मनाने पर रोक लगाई है। बीजेपी नेता दिल्ली सरकार पर पर्व मनाने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाकर राजनीति कर रहे हैं।

 बीजेपी प्रदेश महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जब दिल्ली में मुख्यमंत्री साप्ताहिक बाजारों, मॉल, शराब के ठेकों और ई-रिक्शा को चलाने की अनुमति दे सकते हैं, तो छठ पूजा के आयोजन के लिए अनुमति क्यों नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सैकड़ों लोगों के साथ अक्षरधाम मंदिर में पूजा कर सकते हैं तो छठ पूजा के आयोजन पर भी अनुमति देना चाहिए।

छठ पूजा पर रोक लगा कर मुख्यमंत्री ने लाखों पूर्वांचलियों के साथ भेदभाव किया है और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा ने कहा कि किसी भी पूर्वांचली ने यह नहीं सोचा था कि उन्हें छठ के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री से ऐसे अनुरोध करना पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष कौशल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘पूर्वांचल विरोधी’ करार दिया और कहा कि इस प्रतिबंध से दिल्ली में रहने वाले बिहार एवं पूर्वांचल के लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

महापर्व छठ : भगवान राम ने सूर्य देव का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत में क्या किया था

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
त्यौहारों के देश भारत में कई ऐसे पर्व हैं, जिन्हें काफी कठिन माना जाता है और इन्हीं में से एक है लोक आस्था का महापर्व छठ, जिसे रामायण और महाभारत काल से ही मनाने की परंपरा रही है।
महापर्व छठ पूजा इस साल 31 अक्टूबर से लेकर 3 नवबंर तक मनाई जाएगी। छठ पूजा भारत के पूर्वी हिस्सें में मनाई जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इन राज्यों में छठ पूजा का महत्व सबसे बड़े त्यौहार के रूप में है। इस पर्व का लोग पूरे साल बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। छठ पूजा के करने के लिए बिहार के लोग अपने घर वापस लौट आते हैं। इस दिन बड़े बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक नए कपड़े पहनते हैं। लोगों के बीच इस महापर्व का काफी उत्साह होता है। महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीरमहापर्व छठ पूजा की कब शुरूआत हुई, इसको लेकर चार पौराणिक कथाएं हैं- जानते हैं पहली कथा के बारे में जिसमें महापर्व छठ पूजा करने की बात कही गई है। फिर उसी दिन से छठ पूजा मनाने की शुरूआत हुई- पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान राम ने सबसे पहले छठ पूजा किया था।अयोध्या नगरी में दशरथ नाम के राजा थे। जिनकी कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा नाम की पत्नियां थी।भगवान राम के विवाह के बाद राजा दशरथ ने राम जी का राज्याभिषेक करने की इच्छा जताई। इस पर देव लोक में देवताओं को चिंता होने लगी कि राम को राज्य मिल जाएगा तो फिर रावण का वध असंभव हो जाएगा
देवताओं ने व्याकुल होकर देवी सरस्वती से उपाए करने की प्रार्थना की। देवी सरस्वती ने मन्थरा, जो कि रानी कैकयी की दासी थी, उसकी मती को फेर दिया. इसके बाद मन्थरा की सलाह पर रानी कैकयी कोपभवन में चली गई। राजा दशरथ जब रानी को कैकयी को मनाने आए तो उन्होंने वरदान मांगा कि भरत को राजा बनाया जाए और राम को 14 साल के लिए वनवास पर भेज दिया जाए।   इसके बाद भगवान राम जी के साथ सीता और लक्ष्मण भी वनवास पर चले गए
मान्यता है कि भगवान राम सूर्यवंशी थे और इनके कुल देवता सूर्य भगवान थे। इसलिए भगवान राम और सीता जब वनवास खत्म होने और लंका से रावण वध करके अयोध्या वापस लौटे तो अपने कुलदेवता का आशीर्वाद पाने के लिए इन्होंने देवी सीता के साथ षष्ठी तिथि का व्रत रखा और सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्टान एवं अन्य वस्तुओं से अर्घ्य प्रदान किया। सप्तमी तिथि को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राजकाज संभालना शुरु किया। इसके बाद से आम जन भी सूर्यषष्ठी का पर्व हर साल मनाने लगे
Related imageRelated imageनहाय-खाय के साथ आरंभ हुए लोकआस्था के इस चार दिवसीय महापर्व को लेकर कई कथाएं मौजूद हैं। एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है। कहते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। मान्याताओं के अनुसार, वे प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे।
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किंवदंती के अनुसार, ऐतिहासिक नगरी मुंगेर के सीता चरण में कभी मां सीता ने छह दिनों तक रह कर छठ पूजा की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया। इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया। ऋषि की आज्ञा पर भगवान राम एवं सीता स्वयं यहां आए और उन्हें इसकी पूजा के बारे में बताया गया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता को गंगा छिड़क कर पवित्र किया एवं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। यहीं रह कर माता सीता ने छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी।
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इस लोकआस्था और सूर्य उपासना के चार दिवसीय त्यौहार की शुरुआत नहाय-खाय की परम्परा से होती है। यह त्यौहार पूरी तरह से श्रद्धा और शुद्धता का पर्व है। इस व्रत को महिलाओं के साथ ही पुरुष भी रखते हैं। चार दिनों तक चलने वाले लोकआस्था के इस महापर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जला व्रत रखा जाता है।
छठ को पहले केवल बिहार, झारखंड और उत्तर भारत में ही मनाया जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे पूरे देश में इसके महत्व को स्वीकार कर लिया गया है। छठ पर्व षष्ठी का अपभ्रंश है। इस कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया। छठ वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक माह में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है।
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इस पूजा के लिए चार दिन महत्वपूर्ण हैं नहाय-खाय, खरना या लोहंडा, सांझा अर्घ्य और सूर्योदय अर्घ्य। छठ की पूजा में गन्ना, फल, डाला और सूप आदि का प्रयोग किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया को भगवान सूर्य की बहन बताया गया हैं। इस पर्व के दौरान छठी मइया के अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की छठी माता रक्षा करती हैं। कहते हैं कि भगवान की शक्ति से ही चार दिनों का यह कठिन व्रत संपन्न हो पाता है।
Image result for महापर्व छठछठ वास्तव में सूर्योपासना का पर्व है। इसलिए इसे सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सूर्य की उपासना उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन सूर्यदेव की आराधना करने से व्रती को सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व के आयोजन का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी पाया जाता है। इस दिन पुण्यसलिला नदियों, तालाब या फिर किसी पोखर के किनारे पर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था। प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं। बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी में किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए। इस मान्यता के तहत ही इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा।
यह पर्व सबको एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। इस पर्व में अमीर-गरीब, बड़े-छोटे का भेद मिट जाता है। सब एक समान एक ही विधि से भगवान की पूजा करते हैं। अमीर हो वो भी मिट्टी के चूल्हे पर ही प्रसाद बनाता है और गरीब भी, सब एक साथ गंगा तट पर एक जैसे दिखते हैं। बांस के बने सूप में ही अर्घ्य दिया जाता है। प्रसाद भी एक जैसा ही और गंगा और भगवान भास्कर सबके लिए एक जैसे हैं।
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व्रती महिलाएं न करें ये काम
छठ में साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाता है, इसलिए इस दिन व्रत करने वाले को साफ सुथरे और धुले कपड़े ही पहनने चाहिए। छठ पर्व के 4 दिन व्रत करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिस्तर पर भी सोना नहीं चाहिए
कौन हैं छठ देवी और क्यों होती है पूजा?
मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं। उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना और उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर (तालाब) के किनारे यह पूजा की जाती है। षष्ठी मां यानी कि छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है और इसलिए छठ पूजा की जाती है
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छठी मैया से मिलते हैं सैकड़ों यज्ञों के फल
  • छठी मैया का पूजा करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उनके जीवन को खुशहाल रखती हैं
  • छठी मैया की पूजा से सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है
  • परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी छठी मैया का व्रत किया जाता है
  • छठी मैया की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
पौराणिक मान्यता के अनुसार छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है, जो एक कठिन तपस्या की तरह है। यह प्राय: महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। 
व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैया का भी त्याग किया जाता है।  
छठ पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती द्वारा फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं, पर व्रती बिना सिलाई किए कपड़े पहनते हैं। 
महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहन कर छठ करते हैं। इस व्रत को शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालोसाल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहिता महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए। (इनपुट्स सहित)