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अयोध्या में भव्य श्रीराम मन्दिर निर्माण का हो गया श्रीगणेश

राम मंदिर
लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू हो गया है। यह जानकारी गुरुवार (20 अगस्त, 2020) को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने ट्वीट के माध्यम सेे साझा की है।
5 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन का कार्य संपन्न किया था। जिसके बाद सभी को इस बात की प्रतीक्षा थी कि मंदिर का निर्माण कार्य कब शुरू होगा। जिसका जवाब ट्रस्ट के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से दिया गया है। राम मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा, “श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है। CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है। मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।”

ट्रस्ट ने बताया, “श्री रामजन्मभूमि मन्दिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो। मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा।”
 इससे पहले राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने भी राममंदिर को लेकर जानकारी साझा की थी। उन्होंने कहा था कि राम मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह होगा कि इस पर किसी प्रकार के कोई प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं होगा। हजारों सालों तक इस पर भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं का कोई असर नहीं होगा।
उन्होंने आगे कहा था कि मंदिर के लिए जिस उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, उससे ये मंदिर 1000 साल तक आँधी तूफान सहने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित होगा। जिस तरह नदियों का पुल बनता है, उसी तरह नींव के पिलर खड़े होंगे। बस अंतर इतना होगा कि नींव में लोहे का प्रयोग नहीं होगा, बीम पत्थर की बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राम भक्तों को राम मंदिर के परिसर में खुदाई में मिले पुरातत्वों के भी दर्शन प्राप्त होंगे।
वहीं अयोध्या मंदिर के ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी राम मंदिर के लेआउट प्लान को लेकर भी जानकारी साझा की थी। जिसके अनुसार सोमनाथ और अक्षरधाम मंदिरों से भी भव्य राम मंदिर बनने की बात कही गई थी।

ज्ञानवापी मस्जिद मामले को कोर्ट से बाहर फेंको: असदुद्दीन ओवैसी, सांसद

AIMIM मुखिया असुदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या दौरे पर निशाना साधा है
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर फिर ज़हर उगला है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या दौरे का भी विरोध किया है। उन्होंने भूमि पूजन में मोदी के शामिल होने का विरोध करते हुए कहा कि उनका ऐसा करना उनकी उस शपथ का उल्लंघन होगा, जो उन्होंने प्रधानमंत्री पद ग्रहण करते हुए ली थी।
ओवैसी शायद यह भी भूल रहे हैं कि राष्ट्रपति से बड़ा कोई संवैधनिक व्यक्ति नहीं, जब राष्ट्रपति होते डॉ राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्वार उपरांत प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा विरोध करने के बावजूद मंदिर उद्घाटन में शामिल होने गए थे, कौन-सा संविधान खतरे में पड़ गया था। हकीकत यह है कि अयोध्या में कोई राम मंदिर नहीं बन रहा, बल्कि अब तक हिन्दुओं को अपमानित कर भारत की मासूम को गुमराह करने के उनके घिनौने कारनामों की पोल खुलने का श्रीगणेश हो रहा है। दूसरे, संविधान में कहाँ लिखा है कि प्रधानमंत्री द्वारा मंदिर के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से संविधान खतरे में पड़ जायेगा, क्यों गलत भ्रांतियां फैलाकर संविधान को बदनाम कर रहो हो। 
विश्व हिन्दू परिषद् ने कई बार कहा था कि "हमारे ये तीन तीर्थ--अयोध्या, काशी और मथुरा-- दे दो, शेष 5997 से अपना हक़ छोड़ देंगे, अन्यथा समस्त स्थान लेकर रहेंगे।" किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें नहीं मालूम था कि 2014 चुनावों से जो लहर उठेगी, वह उनके सारे अरमानों पर पानी फेर देगी।  
बकौल असदुद्दीन ओवैसी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन में हिस्सा लेना उनके द्वारा ली गई संवैधानिक शपथ का उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सेकुलरिज्म हमारे संविधान की सबसे मूल संरचना है। उन्होंने कहा कि वो कभी नहीं भूलेंगे कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद 400 वर्षों तक खड़ा रहा था। उन्होंने 1992 बाबरी मस्जिद ध्वस्त करने वालों को भी ‘आपराधिक भीड़’ करार दिया।
ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद एक मस्जिद था और हमेशा मस्जिद ही रहेगा। उन्होंने ‘आउटलुक’ को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि ये उनकी आस्था है और कोई उनसे उनकी आस्था को नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि अगर बाबरी को ध्वस्त नहीं किया जाता तो शायद राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय भी नहीं आता। उन्होंने इसके लिए दिसम्बर 1949 में मस्जिद में चोरी-चुपके मूर्ति रखने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि मुसलमान अपनी अगली जनरेशन को ये बताते रहेंगे कि मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था। यह भी बताना नहीं भूलना कि खुदाई में मंदिर के अवशेष मिले थे, मस्जिद का एक भी सबूत नहीं। उन्होंने मुसलमानों की आवाजों को दबाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बतौर पीएम, मोदी हर धर्म के लोगों के लिए जिम्मेदार हैं और उनके लिए भी, जो किसी धर्म को नहीं मानते। उन्होंने कहा कि 1992 में तत्कालीन यूपी के सीएम और देश के पीएम बाबरी को बचाने में अक्षम रहे।



 
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ये मानता है कि अयोध्या जजमेंट फैक्ट पर कम और आस्था पर ज्यादा निर्भर है। उन्होंने पूछा कि अगर ‘1991 प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ मौजूद है, फिर भी ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ का मामला कोर्ट में क्यों पेंडिंग पड़ा हुआ है? उन्होंने इस केस को तुरंत अदालत से बाहर फेंकने की माँग की। साथ ही उन्होंने डर जताया कि भाजपा सरकार इस एक्ट को हटा सकती है।
ओवैसी और अन्य राम विरोधियों को सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि जब मंदिर निर्माण में पूरे परिसर की खुदाई होने पर जो अवशेष निकलेंगे, उससे उनके द्वारा फैलाया पाखंड जगजाहिर हो जायेगा, जो अन्य विवादों में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर मथुरा, काशी एवं अन्य स्थानों पर उनकी लड़ाई को कमजोर करने में सहायक होंगे। और संभव है कि भविष्य में अधिकांश मुस्लिम ही उनके विरोध में खड़े न हो जाएं।  
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय इतिहास से छेड़छाड़ सर्वविदित हैं। वामपंथियों ने बड़ी सफाई से इस्लामिक आक्रा.....
संबित पात्रा ने राम मंदिर भूमि पूजन का विरोध कर रहे लोगों के लिए ‘कहीं पूजन, कहीं सूजन’ हैशटैग का आइडिया दिया है। संबित पात्रा ने राम मंदिर का विरोध करने वालों को ‘दिलजले’ करार देते हुए ‘कहीं दीप जले, कहीं दिल’ वाले लता मंगेशकर के गाने को याद किया। उन्होंने कहा कि जब ऐसे लोगों का दिल जलेगा तो उसे सूँघ कर उन्हें परम सुख की अनुभूति होगी, जिसे एन्जॉय करना चाहिए।

कांग्रेसी मुखपत्र को खटका अयोध्या में रामलला विराजमान, फैसले को बताया पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश जैसा

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला देते ही शनिवार(नवम्बर 9) को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वह कोर्ट के निर्णय के साथ है और अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनना चाहिए। लेकिन रविवार(नवम्बर 10) को कांग्रेस के मुखपत्र 'नेशनल हेराल्ड' में एक ऐसा विवादित कार्टून छपा जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इससे कांग्रेस के दोहरे रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नेशनल हेराल्ड में एक एक विवादित कार्टून छापा है जिसमें 1992 की अयोध्या वाली तस्वीर और 2019 वाले सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर है और कार्टून में लिखा गया है, 'जिसकी लाठी. उसकी भैंस।' इसके साथ कैप्शन दिया गया है, 'क्या भगवान बल, हिंसा और रक्तपात से निर्मित मंदिर में निवास कर सकते हैं? भले ही भगवान वहाँ निवास करने का निर्णय लेते हों लेकिन क्या कभी ऐसे मंदिर में प्रार्थना की जा सकती है?
नेशनल हेराल्ड में छपे इस कार्टून को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस की जमकर आलोचना की है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'भारत की सर्वोच्च न्यायालय और भारत की न्याय प्रणाली से अच्छी न्याय प्रणाली पूरे विश्व भर में नहीं है और उस न्याय प्रणाली पर उँगली उठाने का काम कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड एक शर्मनाक तरीके से करती है।'
दशकों पुराने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का ज्यादातर लोगों ने स्वागत किया है। लेकिन, एक वर्ग ऐसा भी है जिन्हें विवादित जमीन रामलला को मिलना खटक रहा है। ऐसा ही हाल कांग्रेस का भी है। एक तरफ उसके नेता फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो दूसरी ओर उसका मुखपत्र नेशनल हेराल्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तुलना पाकिस्तानी कोर्ट के एक बेतुके फरमान से कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामजन्मभूमि बताते हुए पूरी राम मंदिर के निर्माण के लिए देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना हक साबित करने में विफल रहा। बावजूद इसके अदालत ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पॉंच एकड़ जमीन मुहैया कराने का आदेश भी केंद्र सरकार को दिया है।
इस फैसले का स्वागत कांग्रेस ने भी किया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने फैसला आने के बाद ट्वीट कर कहा, “सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ चुका है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भगवान श्री राम के मंदिर के निर्माण की पक्षधर है।”

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करते हुए हम सब को आपसी सद्भाव बनाए रखना है। ये वक्त हम सभी भारतीयों के बीच बन्धुत्व,विश्वास और प्रेम का है।”

प्रियंका गाँधी ने इस फैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा, “अयोध्या मुद्दे पर भारत की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है। सभी पक्षों, समुदायों और नागरिकों को इस फ़ैसले का सम्मान करते हुए हमारी सदियों से चली आ रही मेलजोल की संस्कृति को बनाए रखना चाहिए। हम सबको एक होकर आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करना होगा।”
लेकिन, मुखपत्र नेशनल हेराल्ड के एक लेख के जरिए इस फैसले की तुलना पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश से की गई है। कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वैसा ही फैसला सुनाया जैसा शुरुआत से भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद चाहती रही है। फैसले से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी तौर पर वही किया है जिसकी मॉंग बीजेपी और विहिप लंबे समय से कर रही थी।
नेशनल हेराल्ड के इस लेख को लिखा है आकार पटेल ने। लेख में अपना एक अनुभव साझा करते हुए पटेल ने लिखा है कि 30 साल पहले जब वो छात्र थे, तो बोकारो में उनके यूनिवर्सिटी में इसी मुद्दे पर बोलने के लिए अरुण शौरी आए थे, जो उस समय भाजपा समर्थक थे। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम कहीं और मस्जिद बनाए, क्योंकि यह स्थान हिन्दू के लिए पवित्र स्थान है। आकार पटेल ने लिखा कि अभी जो हुआ, वह वही बात है, सिवाय इसके कि अब इसे कानूनी कवर मिल गया है।
नेशनल हेराल्ड के इस लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के 65 साल पुराने एक आदेश जैसा है। लेख में कहा गया है कि 1948 में जिन्ना की मौत और 1951 में उनके उत्तराधिकारी लियाकत अली खान की हत्या के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग नेतृत्व विहीन हो गया। ऐसे हालात में गुलाम मोहम्मद गवर्नर जनरल बना। उसने 1954 में पाकिस्तान की संविधान सभा को गैरकानूनी तरीके से भंग कर दिया। इसके खिलाफ अदालत में अपील की गई। गुलाम ने जो किया वह कानून के खिलाफ होने के बावजूद अदालत ने उसके फैसले का बचाव किया। इस फैसले ने गुलाम मोहम्मद को मनमर्जी करने की छूट दे दी।
लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दूरगामी असर होगा। समय के साथ यह देखने को मिलेगा। लेकिन, यह तय है कि इसके नतीजे दिखाई पड़ेंगे ही। हालाँकि लेखक ने ‘उम्मीद’ जताई है कि भारत के लिए यह उतना घातक नहीं हो, जिस तरह वह फैसला पाकिस्तान के लिए साबित हुआ।
कांग्रेस ने की शर्मनाक हरकत, पाक जाकर सिद्धू ने किया देश को बदनाम
वहीं सिद्धू द्वारा पाकिस्तान के करतारपुर जाकर दिए गए बयान  पर भी बीजेपी ने सिद्धू और कांग्रेस दोनों को घेरा है। संबित पात्रा ने कहा, 'करतारपुर कॉरिडोर और राम जन्मभूमि को लेकर जिस प्रकार कांग्रेस का रवैया रहा है वो आज हमारे सामने उजागर हुआ है। नवजोत सिंह सिद्धू वो करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में पाकिस्तान की ओर से मुख्य अतिथि के रूप में जाते हैं और भारत के पहले जत्थे में भी नहीं जाते हैं।'
सिद्धू पर भारत को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए संबित पात्रा ने कहा, 'नवजोत सिंह सिद्धू का ये कहना कि 'हम मार रहे हैं और वो (पाकिस्तान) बचा रहे है' ये कांग्रेस की मनोस्थिति दर्शाता है। अगर जान से कोई मारने का काम करता है तो ये पाकिस्तान करता है। हमारे जवानों को मारने का काम करता है वो पाकिस्तान करता है। नवजोत सिंह सिद्धू और कांग्रेस पार्टी का पाकिस्तान में जाकर हिंदुस्तान को बदनाम  करने साजिश है। हम माँग करते है कि सोनिया गांधी जी देश से क्षमा माँगे।'

राम मंदिर पर कोर्ट के फैसले के बाद ही अध्यादेश पर विचार: प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी

Narendra modiआम चुनाव 2019 में अभी वक्त है। लेकिन राजनीतिक दल सभी सियासी समीकरणों पर काम कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एएनआई को विशेष साक्षात्कार दिया। पीएम नरेंद्र मोदी 2019 के आम चुनाव पर कहा कि ये लड़ाई मोदी या किसी अन्य के खिलाफ नहीं है। आने वाला आम चुनाव जनता बनाम गठबंधन के बीच होने जा रहा है। जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं की मोदी सिर्फ आवाज हैं।
कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये एक तथ्य है कि जिन लोगों ने परिवार के बारे में सोचा और दशकों तक देश की कमान संभाले रहे आज वो जमानत पर है। सबसे बड़ी बात है कि उन लोगों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के मामले हैं। यह एक बड़ी बात है, उन लोगों के साथ कुछ लोगों का जमावड़ा है जो सूचनाओं को दबा कर रखते थे। यहीं नहीं वो अपनी सुविधा के हिसाब से राजनीतिक घटनाओं को जबान देते थे।
मोदी ने देश के सामने सभी ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखी। राम मंदिर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही अध्यादेश पर या किसी अन्य रास्ते पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी के लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि इस विषय पर एक ऐसा फैसला सामने आए जो देश के सभी लोगों को स्वीकार्य हो।
PM modi interview 2019आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत वजहों से उन्होंने इस्तीफा देने के लिए कहा था। वो पहली बार इस राज से पर्दा उठा रहे हैं कि उर्जित पटेल 6-7 महीने पहले से ही इस्तीफा देने की बात कर रहे थे। उनके इस्तीफे का राजनीति से लेना देना नहीं था। सच कहूं तो उनके ऊपर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं था। उन्होंने आरबीआई गवर्नर रहते हुए शानदार काम किया था।
नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि यह झटका नहीं था। सरकार ने लोगों को एक साल पहले ही आगाह किया था कि काला धन रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले ये सामान्य धारणा थी कि आप पैसे जमा करें, पेनल्टी अदा करें और आपको राहत मिल जाएगी। लोगों को लगता था कि मोदी भी उसी तरह काम करेंगे। लेकिन सच ये है कि कुछ लोग ही स्वेच्छा से सामने आए। 
कश्मीर में आतंकवाद और पाकिस्तान के रवैये पर पीएम मोदी ने बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी सीमापार से आतंकवाद का निर्यात हो रहा है। ये सोचना गलत होगा कि एक लड़ाई से पाकिस्तान सपधर जाएगा। ये सोचना बड़ी गलती होगी। पाकिस्तान को सुधारने में अभी और वक्त लगेगा।

गठबंधन में गांठ: 10 दिसंबर को विपक्ष की बैठक में मायावती के शामिल होने पर बना सस्‍पेंस

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आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
एक पुरानी नहीं, प्राचीन कहावत है "गांव बसा नहीं, लुटेरे पहले आ गए" या यूँ कहिए "इश्क में एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को रिझाने खूब सब्जबाग दिखाता है", ठीक वैसी ही स्थिति समस्त गैर-भाजपाइयों की हो रही है, जो 2019 में सत्ता से मोदी सरकार को हटाने में एक-दूसरे को सब्जबाग दिखा, एकजुट होने के लिए ललचा रहे हैं। और लगभग हर दल प्रेमिका की भाँति भाव दिखा रहा है। वैसे अधिकतर को कांग्रेस का साथ पसंद नहीं, तो किसी को किसी अन्य का। एक डर यह भी है कि कांग्रेस का विरोध करने पर कहीं कांग्रेस ही उनको बेनकाब न कर दे। सम्भावनाएं कुछ भी हो सकती हैं। उपचुनाव के गठबंधन और आम चुनाव के गठबंधन में जमीन और आसमान का अंतर होता है। जो प्रमाणित करता है कि इस सभी गैर-भाजपाइयों का विरोध मोदी सरकार से नहीं,बल्कि नरेन्द्र मोदी से है। इन सबको डर है कि 2019 में पुनः मोदी की वापसी इनके काले कारनामों को जनता के समक्ष लाकर इन्हें कहीं का नहीं छोड़ने वाले। 
सत्ता के गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि 2019 में नरेन्द्र मोदी की वापसी केवल कांग्रेस ही नहीं, वामपंथियों और दो या तीन क्षेत्रीय पार्टियों के अलावा कुछ बुद्धिजीविओं पर भी भारी पड़ने वाली है।यही कारण है कि ये लोग कहीं रामजन्मभूमि पर तो कहीं वंदे मातरम, तो कहीं गौ हत्या की आड़ में तो कहीं जाति के नाम पर उपद्रव कर सौहार्द बिगाड़ जनता के दिमाग में डर बैठाने का प्रयत्न कर रहे हैं। जिसका संकेत अभी संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में प्रधानमन्त्री मोदी ने राममन्दिर के विरोधियों को बेनकाब करने का प्रयास किया है। किस तरह कोर्ट में गलत बयान देकर हिन्दुओं को अपमानित कर मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के प्रयास में मुस्लिम समाज को वास्तविकता से गुमराह करते रहे हैं। अब तो तत्कालीन पुरातत्व विभाग के निदेशक के.के.मोहम्मद भी परिचर्चाओं में खुदाई में मिले राममंदिर के अवशेषों का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि कोर्ट को धोखा दिया गया। इन गैर-भाजपाई पार्टियों में जितने भी हिन्दू हैं, क्या कोर्ट में राममन्दिर के विरुद्ध झूठ बोले जाने का किसी ने विरोध किया? यदि यही झूठ मस्जिद के बोला जाता, सबके सब सड़क से लेकर संसद तक सियापा कर रहे होते। रातों को अदालतें खुलवाते, और झूठ बोलने वालों को जेल में भेजने के लिए खूब प्रदर्शन और घिराओ कर जेल पहुंचाकर ही आंदोलन शान्त होता। जिसे अब जनता भी समझ रही है। 
देखिए वीडियो  

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Mr K K MUHAMMED, Ex Regional Director, ASI, Demolished the theory of Babri Masjid spread by…  

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शुभ समाचार - आप सभी प्रशंसकों की Demand पर हम लेकर आये हैं नया Namokar Poetry Channel - https://www.yout…
विपक्षी महागठबंधन की सुगबुगाहट के बीच 10 दिसंबर को देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों की बैठक होने जा रही है. आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू इस बैठक के आयोजक हैं. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बसपा सुप्रीमो और उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती के इसमें शामिल होने पर सस्‍पेंस बना हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मायावती संभवतया इस बैठक में शिरकत नहीं करेंगी. सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने उनके प्रतिनिधि सतीश चंद्र मिश्रा को इस संबंध में मनाने के प्रयास किए थे लेकिन कोई सफलता नहीं मिली.
इससे पहले मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान चुनावों में बसपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया था. उसके बाद मायावती के इस संभावित कदम को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से बड़ा झटका माना जा रहा है.
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दरअसल इस साल मार्च में कर्नाटक चुनावों के बाद जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन बनाकर सरकार में आने और यूपी के गोरखपुर, कैराना, फूलपुर लोकसभा उपचुनावों में विपक्ष ने महागठबंधन बनाकर बीजेपी को शिकस्‍त दी थी. उसके बाद से ही 2019 के लोकसभा चुनावों में यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस के महागठबंधन की चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में जिस तरह मायावती ने कांग्रेस को नजरअंदाज किया, उससे इस तरह की संभावना पर प्रश्‍नचिन्‍ह लग गया है.
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THE purpose of implementing the reservations in Independent India was to…

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जिस वामपंथ को जिग्नेश अपने साथ रखे हुए, क्या कभी इनसे पूछा कि "आपकी पार्टी में दलित या अनुसूचित जाति के कितने लोग पद.....

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अकेला मोदी, सब पर भारी आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 2019 में नरेन्द्र मोदी को मात देने को हर कोई लगा हुआ है, लेकिन अपने अ...

सपा-बसपा गठबंधन पर संशय
सपा नेता अखिलेश यादव भी कई बार कह चुके हैं कि यदि बसपा के साथ गठबंधन के मसले पर उनको दो कदम पीछे भी हटना पड़ेगा तो वो इसके लिए तैयार हैं. राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक बसपा के साथ सीटों पर समझौते के लिहाज से अखिलेश यादव ने ये बात कही. लेकिन बसपा की तरफ से अभी तक सीधेतौर पर किसी भी दल के साथ गठबंधन को लेकर कुछ नहीं गया है. यूपी में विपक्षी दलों का गठबंधन इसलिए अहमियत रखता है क्‍योंकि राज्‍य की 80 लोकसभा सीटों में से पिछली बार बीजेपी के नेतृत्‍व में एनडीए ने 73 सीटें जीती थीं. ऐसे में बीजेपी को इस बार रोकने के लिए विपक्ष की नजर इस संभावित गठबंधन पर है लेकिन मायावती के रुख ने फिलहाल विपक्ष के लिए संशय की स्थिति उत्‍पन्‍न कर दी है.