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राम मंदिर पर कोर्ट के फैसले के बाद ही अध्यादेश पर विचार: प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी

Narendra modiआम चुनाव 2019 में अभी वक्त है। लेकिन राजनीतिक दल सभी सियासी समीकरणों पर काम कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एएनआई को विशेष साक्षात्कार दिया। पीएम नरेंद्र मोदी 2019 के आम चुनाव पर कहा कि ये लड़ाई मोदी या किसी अन्य के खिलाफ नहीं है। आने वाला आम चुनाव जनता बनाम गठबंधन के बीच होने जा रहा है। जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं की मोदी सिर्फ आवाज हैं।
कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये एक तथ्य है कि जिन लोगों ने परिवार के बारे में सोचा और दशकों तक देश की कमान संभाले रहे आज वो जमानत पर है। सबसे बड़ी बात है कि उन लोगों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के मामले हैं। यह एक बड़ी बात है, उन लोगों के साथ कुछ लोगों का जमावड़ा है जो सूचनाओं को दबा कर रखते थे। यहीं नहीं वो अपनी सुविधा के हिसाब से राजनीतिक घटनाओं को जबान देते थे।
मोदी ने देश के सामने सभी ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय रखी। राम मंदिर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही अध्यादेश पर या किसी अन्य रास्ते पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी के लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि इस विषय पर एक ऐसा फैसला सामने आए जो देश के सभी लोगों को स्वीकार्य हो।
PM modi interview 2019आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत वजहों से उन्होंने इस्तीफा देने के लिए कहा था। वो पहली बार इस राज से पर्दा उठा रहे हैं कि उर्जित पटेल 6-7 महीने पहले से ही इस्तीफा देने की बात कर रहे थे। उनके इस्तीफे का राजनीति से लेना देना नहीं था। सच कहूं तो उनके ऊपर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं था। उन्होंने आरबीआई गवर्नर रहते हुए शानदार काम किया था।
नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि यह झटका नहीं था। सरकार ने लोगों को एक साल पहले ही आगाह किया था कि काला धन रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले ये सामान्य धारणा थी कि आप पैसे जमा करें, पेनल्टी अदा करें और आपको राहत मिल जाएगी। लोगों को लगता था कि मोदी भी उसी तरह काम करेंगे। लेकिन सच ये है कि कुछ लोग ही स्वेच्छा से सामने आए। 
कश्मीर में आतंकवाद और पाकिस्तान के रवैये पर पीएम मोदी ने बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी सीमापार से आतंकवाद का निर्यात हो रहा है। ये सोचना गलत होगा कि एक लड़ाई से पाकिस्तान सपधर जाएगा। ये सोचना बड़ी गलती होगी। पाकिस्तान को सुधारने में अभी और वक्त लगेगा।

अयोध्या में राममन्दिर विरोधी आखिर कब तक डराते रहेंगे?

अयोध्या में 25 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की रैली को लेकर राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने चिंता जाहिर की है। 
राम मंदिर निर्माण को लेकर होने वाले RSS और VHP के कार्यक्रम पर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या का मुस्लिम समुदाय अगर ऐसी ही दहशत में रहा, तो मुसलमान अपनी जान की हिफाजत के लिए अयोध्या छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। 
उन्होंने कहा कि अयोध्या में साल 1992 की तरह का एक बार फिर से माहौल बनाया जा रहा है। संघ और वीएचपी ने ऐसे ही भीड़ साल 1992 में इकट्ठा की थी। उस समय कोई भी मुस्लिम मस्जिद बचाने नहीं गया था।  इसके बावजूद मुस्लिम समाज के घर और दुकान लूटे गए थे 
इकबाल अंसारी ने कहा कि उस समय मुस्लिम समुदाय के लोगों के कारोबार को तबाह किया गया था। वैसा ही माहौल फिर बनाया जा रहा है. हालांकि हम पहले ही कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने को तैयार हैं. ऐसे में अब अयोध्या में भीड़ क्यों इकट्ठा की जा रही है 
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को डराने के मकसद से यहां भीड़ जुटाई जा रही है।आपको बता दें कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।हालांकि साधु-संत और RSS समेत कई हिंदूवादी संगठन राम मंदिर पर संसद में कानून लाने की मांग कर रहे हैं 
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के लोगों से अयोध्या पहुंचने की अपील 
राम मंदिर निर्माण के लिए 25 नवंबर को अयोध्या में होने वाली हुंकार रैली में शामिल होने के लिए हिंदुओं से अपील की जा रही है. इसके लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं।  इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी लोगों से हुंकार रैली में पहुंचने की अपील की जा रही है. केंद्रीय पूजा समिति और विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले शहर के टाउनहॉल मैदान से पूरे उत्साह के साथ लोगों से अयोध्या चलने की गुजारिश की गई 
इक़बाल अंसारी हिन्दुओं को नहीं बल्कि अपने ही मुस्लिम समाज को बताएं कि "अपनी तिजोरियाँ भरने के लिए खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को छुपा कर कोर्ट को धोखा दिया गया था। खुदाई में मस्जिद का कोई भी सबूत नहीं मिला था। हम लोगों ने कोर्ट को धोखा जनता की नज़रों में विहिप, भाजपा, संघ और बजरंग दल को बदनाम करने के लिए दिया था। यह बात सच है कि यदि खुदाई में मिले समस्त अवशेषों को कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया होता, अयोध्या में मंदिर कई वर्ष पूर्व ही बन चुका होता।" इक़बाल मियाँ आखिर कब तक जितना झूठ बोलोगे? कब तक अपने ही मुसलमान भाईयों को पागल बनाते रहोगे? ये डराने की नौटंकी बन्द करों। खुदाई ने तुम पाखण्डियों और जयचन्दों को बेनकाब कर दिया है। किसी और ने नहीं, आपके ही मुस्लिम भाई ने पुस्तक लिख कर।  
अयोध्या में राममन्दिर विरोधी शायद यह भूल रहे हैं कि विहिप ने प्रारम्भ में ही अनुरोध किया था "तीन मन्दिर --अयोध्या, काशी और मथुरा-- दे दो, अन्यथा 3000 मन्दिर जिन्हे मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तानों में तब्दील कर दिया गया, उन्हें भी लेकर रहेंगे।"  
यदि सरकार अध्यादेश लाये तो उसके साथ-साथ एक और अध्यादेश लाये कि कोर्ट में झूठा केस दर्ज़ करवाने वाले पर कम से कम 5 लाख रूपए का जुर्माना वसूला जायेगा। जो अदालतों में लम्बित हज़ारों झूठे केसों के वापस होने की स्थिति आ सकते हैं। 
 6 दिसम्बर से शुरू हो सकता है राम मंदिर निर्माण--भाजपा सांसद साक्षी महाराज
राम मंदिर का मुद्दा इस समय सुर्ख़ियों में छाया हुआ है, सभी राजनेता इस मुद्दे पर अपनी अपनी राय रख रहे हैं। इसी कड़ी में भाजपा सांसद स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज ने भी बयान देते हुए कहा है कि मंदिर निर्माण अभी नहीं हुआ तो कभी नहीं होगा, अध्यादेश लाने की जरूरत है, तो वह लाया जाएगा. उन्होंने मंदिर निर्माण की तारीख का अंदाजा लगाते हुए कहा है कि राम मंदिर निर्माण की शुरुआत  6 दिसंबर से हो सकती है 
दरअसल,  भाजपा सांसद नवम्बर 16 को मैनपुरी के बरौनी जाते समय कुछ देर के लिए कन्नौज में रुके थे, इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राम मंदिर पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि संतों ने भी नवंबर माह में विशाल सम्मेलन कर इस बात को उठाया है, अध्यादेश या कानून जो भी बनाना है उस पर सरकार द्वारा विचार किया जा रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने जो जमीन राम मंदिर की अधिग्रहीत की थी, वह सरकार वापस कर दे और उसी पर भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। यह मंदिर सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया जाएगा 
उन्होंने कहा कि यदि अभी मंदिर निर्माण शुरू नहीं हुआ तो यह प्रभु राम के साथ बेईमानी होगी, उन्होंने कहा कि भाजपा कहती है कि जो राम का नहीं वह किसी के काम का नहीं, इसलिए मंदिर हर हाल में बनकर ही रहेगा। उन्होंने सपा, बसपा व कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पार्टियां केवल लोगों को भ्रमित करने का काम करते हैं, कभी राहुल गाँधी शिवभक्त बन जाते हैं तो कभी अखिलेश कृष्ण का नाम लेते हैं, लेकिन जहां राम मंदिर की बात आती है, तब सब साम्प्रदायिकता का राग अलापते हैं 
राम मंदिर को लेकर दिग्विजय ने दिया बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर मसले पर विवादित बयान देकर एक बार फिर मामले को तूल दे दिया है. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर चुनावी मौसम में ही भगवान राम को याद करने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने बयान में भाजपा के फायरब्रांड नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी जमकर निशाना साधा. 
दिग्गी राजा के नाम से मशहूर नेता ने कहा, ‘अजीब बात है जब चुनाव आता है भगवान राम का मंदिर बनाने की बात सामने आती है, मंदिर बने इसमें किसी को ऐतराज नहीं है, हम सब भी यही चाहते हैं, लेकिन भगवान राम भी नहीं चाहेंगे कि किसी विवादास्पद स्थल उनका मंदिर बनाया जाए.’ दिग्विजय के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बयानबाज़ी की जा रही है, दिग्विजय ने यह बयान मध्य प्रदेश में एक चुनावी जनसभा के दौरान दिया है.
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने अयोध्या के रामजन्मूभि पर राम मंदिर बनाने का निर्णय ले लिया था। राजीव गांधी को ....
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अयोध्या में राम जन्मभूमि के मालिकाना हक़ को लेकर 1990 में पहली बार पूरे देश में बहस ने जोर पकड़ा था। इसके पहले 1976-77 में प...

आपको बता दें कि 2019 लोक सभा चुनाव की नज़दीकियों के चलते राम मंदिर मुद्दा एक बार फिर से सुर्ख़ियों में छाया हुआ है, आरएसएस और भाजपा के कई नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस मुद्दे पर कानून लाए और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे, वहीं सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे  को विवादित जमीन मामले का नाम देकर दोनों पक्षों की सुनवाई करके हल निकालने के पक्ष में है 

राम भक्तों को नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार--योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवम्बर 4 को कहा कि अयोध्या में जल्द ही राम मंदिर बनेगा और इस बाबत देश के सभी ‘राम भक्तों’ को खुशखबरी का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। योगी ने कहा कि छह नवंबर को दिवाली मनाने के लिए दक्षिण कोरिया का एक प्रतिनिधि मंडल अयोध्या पहुंच रहा है और भगवान राम की जन्मस्थली में बड़े पैमाने पर दिवाली मनाई जाएगी
स्थानीय पतंजलि योगपीठ में दो दिवसीय ज्ञानकुंभ को संबोधित करते हुए मुख्यमन्त्री ने कहा कि देश के राम भक्तों को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी खुशखबरी के लिए ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगाउन्होंने सभी से अपील की कि वे भगवान राम के नाम पर एक दीया जलाएं
सम्भावनाएँ यह भी व्यक्त की जा रही हैं, कि दीपावली के पावन अवसर पर मुख्यमन्त्री राममन्दिर के भव्य मन्दिर निर्माण की घोषणा से सबको आश्चर्यचकित न कर दें। 
ज्ञात हो, शाहबानो प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट निर्णय को तत्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने निरस्त किया था। उस प्रकरण के बाद से सुप्रीम कोर्ट धर्म से जुड़े किसी भी विवाद पर एकमत निर्णय देने में संकोच करती है। इस बात को भारत ही नहीं, अपितु विश्व की हर अदालत मान रही है कि भारत में किस तरह तुष्टिकरण के चलते नेता कोर्ट को भ्रमित कर रहे हैं। राम के अस्तित्व, जन्म एवं रामसेतू पर ही शंका व्यक्त करने के साथ-साथ खुदाई में मिले मन्दिर के प्रमाणों को कोर्ट से छुपा लिया 
देश में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा में कदाचार पर रोक लगनी चाहिए और शिक्षकों को इसके लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में ऐसे कदम उठाए गए हैं। योग गुरू रामदेव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ देश का भविष्य हैं और भाजपा के सांसदों को अयोध्या में राम मंदिर बनाने की खातिर संसद में विधेयक लाना चाहिए। रामदेव ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में संसद सर्वोच्च संस्था है’’ 
नवम्बर 3 को सीएम योगी ने राजस्थान के बीकानेर में कहा था कि राम मंदिर को लेकर सपना साकार करने का वक्त आ चुका है। दिवाली से इस दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साल दिवाली में अयोध्या में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे भगवान राम के नाम पर एक-एक दीपक जरूर जलाएं
रामविरोधियों के दबाव चलते, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद  सुनवाई 2019 तक टाले जाने से जो जन आक्रोश उमड़ रहा है, उससे साधु-संत ही नहीं नेता भी भयभीत हो रहे हैं, कि "अयोध्या में कहीं 1992 न दोहरा जाए।"  
समलैंगिकता पर फैसला सुनाने के लिए कोर्ट के पास समय, लेकिन राम मंदिर के लिए नहीं--सुशील मोदी, बिहार उपमुख्यमन्त्री 
अब बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राम मंदिर निर्माण की वकालत की है। उन्होंने इसे करोड़ों हिंदुओं की भावना बताया। सुशील मोदी ने कहा कि 2010 में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया थासाथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालतों ने राम मंदिर को लटकाकर रखने का उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का मामला जब आता है तो कोर्ट के पास समय नहीं होता है
सुशील मोदी ने कहा कि मस्जिद कहीं भी बन सकता है, लेकिन राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा। कोर्ट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समलैंगिकता और अर्बन नक्सल पर सुप्रीम कोर्ट फैसला दे सकती है तो राम मंदिर पर क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि हम राम मंदिर को छोड़ नहीं सकते हैं, केंद्र सरकार भव्य राम मंदिर के पक्ष में है
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उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने शुक्रवार को यहां कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित ह...

‘सोमनाथ मंदिर के पक्ष में नहीं थे नेहरू’
सुशील मोदी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बहाने कांग्रेस पार्टी पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि नेहरू सोमनाथ मंदिर के पक्ष में नहीं थे। वह मंदिर के पुनर्निर्माण के घोर विरोधी थे। साथ ही उन्होंने कहा कि नेहरू, राजेन्द्र बाबू का राष्ट्रपति भी बनाना नहीं चाहते थे। सुशील मोदी ने कहा कि नेहरू ने खत लिखकर सोमनाथ मंदिर नहीं जाने के लिए कहा था

डिप्टी सीएम सुशील मोदी के बयान पर बोली जेडीयू ने भी प्रतिक्रिया दिया है। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि देश संविधान से चलता है, जिसे बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ने बनाया है। राम मंदिर का मसला कोर्ट में है, वहां से फैसला होगा। अगर दोनों पक्षों में आपसी सहमति से हाल निकलता है तो भी ठीक है। संसद में अध्यादेश आने पर पार्टी फैसला लेगी। अध्यादेश आने पर पार्टी का रुख केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा
आतंकवादियों की फांसी रुकवाने वालों के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट रात को भी खुल सकती है, लेकिन मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा भारत  स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने पर सुप्रीम कोर्ट तारीख पे तारीख दे रही हैं। 

न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है: न्यायमूर्ति चेलमेश्वर

Justice Chelameswarउच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने शुक्रवार को यहां कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े संगठन ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (एआईपीसी) की ओर से आयोजित एक परिचर्चा सत्र में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी की। इस साल की शुरुआत में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर उच्चतम न्यायालय के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाए थे। 
नवंबर 2 को परिचर्चा सत्र में जब चेलमेश्वर से पूछा गया कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान क्या संसद राम मंदिर के लिए कानून पारित कर सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह एक पहलू है कि कानूनी तौर पर यह हो सकता है (या नहीं)। दूसरा यह है कि यह होगा (या नहीं)। मुझे कुछ ऐसे मामले पता हैं जो पहले हो चुके हैं, जिनमें विधायी प्रक्रिया ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में अवरोध पैदा किया था।’
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्ती चेलमेश्वर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सकती है. उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालती फैसलों में अवरोध पैदा करने के उदाहरण पहले भी रहे हैं. न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक कानून बनाने की मांग संघ परिवार में बढ़ती जा रही है.
चेलमेश्वर ने कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय का आदेश पलटने के लिए कर्नाटक विधानसभा द्वारा एक कानून पारित करने का उदाहरण दिया। उन्होंने राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद से जुड़ी ऐसी ही एक घटना का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ‘देश को इन चीजों को लेकर बहुत पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था....यह (राम मंदिर पर कानून) संभव है, क्योंकि हमने इसे उस वक्त नहीं रोका।’
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मुगलवाद को जिस तरह भारत में ज़िंदा रखा जा रहा है और वोट के भूखे नेता कट्टरपंथियों के आगे शीश झुकाते हैं, विश्व में भारत को एक मजाक बना दिया है, विश्व इन करतूतों की वजह से हम पर हँसता है। मक्का जिसे इस्लाम का तीर्थ कहा जाता है, भारत में मुगलों के हिमायती जवाब दें कि मक्का में बानी बिलाल मस्जिद कहाँ है? जहाँ सजदा किए बिना हज पूरा नहीं होता था। किसी माई के लाल में हिम्मत है, सऊदी सरकार के विरुद्ध एक लब्ज़ निकाल सकें। भारत में मुगलों के लिए विधवा-विलाप करने वाले सऊदी सरकार के विरुद्ध मुँह खोलने का अर्थ भलीभाँति जानते है कि कहीं हमारे हज के जाने पर वहाँ की सरकार प्रतिबन्ध न लगा दे। भारत में ही कह सकते हैं "हमारा सिर सिर्फ अल्लाह के आगे झुकता है, किसी और के आगे नहीं", अब कोई इनसे पूछे सऊदी सरकार के विरुद्ध क्यों नहीं ? सऊदी सरकार के आगे झुक गया न सिर, इससे बड़ा प्रमाण और क्या चाहिए?

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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने अयोध्या के रामजन्मूभि पर राम मंदिर बनाने का निर्णय ले लिया था। राजीव गांधी को ....





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अयोध्या में राम जन्मभूमि के मालिकाना हक़ को लेकर 1990 में पहली बार पूरे देश में बहस ने जोर 
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राम मंदिर निर्माण को लेकर आ रहे बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक ओर आरएसएस लगातार केंद्र सरकार से रा.....

जनवरी में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले चार जजों में जस्टिस जे चेलमेश्‍वर भी शामिल थे. ऐसा भी कहा जाता है कि उस समय प्रेस कांफ्रेंस करने का निर्णय भी जस्टिस चेलमेश्‍वर का ही था. हालांकि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर कहा कि वह अभी इस मामले पर एक साल और कुछ नहीं बोल सकते.