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वामपंथियों के गढ़ जेएनयू में कोरोना, 74 छात्र और स्टाफ संक्रमित: 4 की हालत गंभीर

कोरोना वायरस के कहर के बीच वामपंथियों के गढ़ माने जाने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में भी कोविड ने एंट्री मार ली है। विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक 74 छात्र और स्टाफ संक्रमित पाए गए हैं।

संक्रमितों में 11 विश्वविद्यालय के स्टाफ हैं। 4 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। क्रिटिकल कंडीशन में दो को फोर्टिस तो एक को बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी सभी को झज्जर एम्स और सुल्तानपुरी के क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने वाले व्यक्ति ने बताया कि संक्रमण की हालत इतनी बुरी है कि 18 अप्रैल को एक छात्र की हालत खराब होने के बाद उसे 3 अस्पतालों में ले गए, लेकिन कहीं भी भर्ती नही किया जा सका। इसके बाद अंत में बीएल कपूर अस्पताल में उसे एडमिट कराया जा सका। ड्राइवर ने बताया कि छात्र का ऑक्सीजन लेवल 40 से भी नीचे पहुँच गया था। वहीं फोर्टिस में 3-4 घंटे लंबे इंतजार के बाद दो अन्य को एंट्री मिली।

एक स्वास्थ्यकर्मी के मुताबिक क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए छात्रों में से एक दो को छोड़कर सभी को ऑक्सीजन के सपोर्ट पर रखा गया है। अधिकतर लोगों का ऑक्सीजन लेवल 40 से नीचे आ गया था और उनकी नाक से खून निकलने लगा था। हालाँकि, अभी सभी की हालात बेहतर है।

विश्वविद्यालय में बदतर होते हालात 

कोरोना की सेकेंड वेव से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में दिल्ली भी शामिल हैं। यहाँ वामपंथ की पाठशाला जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कोविड के चलते हालात बेहद बुरे हो गए हैं। विश्वविद्यालय में 3,000 छात्र, 1000 स्टाफ और 350 गार्ड समेत 4,350 कर्मचारी हैं। संक्रमण तेजी से फैलने के कारण बाकियों पर भी इसका खतरा मंडरा रहा है। 

बदतर होते हालात को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने कोविड-19 रिस्पांस कमेटी बना दी है। 9 सदस्यीय कमेटी में रजिस्ट्रार इसके अध्यक्ष हैं। कमेटी के सदस्य डॉ सौरभ शर्मा ने बताया है कि वो लोग लगातार छात्रों के संपर्क में बने हुए हैं।

JNU के ‘पढ़ाकू’ वामपंथियों को फसाद की नई वजह मिली, आइशी घोष पर जुर्माना

                                                           शेहला रशीद और आइशी घोष
जेएनयू में हुई हिंसा का चेहरा रही आइशी घोष फिर से चर्चा में हैं। उनके चर्चा में आते ही शेहला रशीद ने भी खुद को सुर्खियों में रखने का तरीका खोज निकाला है। इससे लगता है कि जेएनयू में पढ़ने वाले वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ और कथित छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने की नई वजह मिल गई है। यह वजह है कैंपस के अंदर हॉस्टल के कमरों में अवैध रूप से प्रवेश करके कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर कई छात्रों पर जुर्माना लगाया जाना।

रिपोर्टों के अनुसार, जेएनयू प्रशासन ने पिछले साल दिसंबर में कोरोना वायरस महामारी के बीच कई छात्रों को परिसर में हॉस्टल के कमरों में अवैध रूप से रहने के लिए जुर्माना देने के लिए कहा था। JNU के कुछ ‘छात्रों’ ने यूनिवर्सिटी में आधिकारिक रूप से दोबारा प्रवेश की अनुमति देने से पहले ही छात्रावास में प्रवेश किया था।

वर्तमान में केवल अंतिम वर्ष के पीएचडी, एमफिल और साइंस स्ट्रीम से एमटेक छात्रों को ही परिसर के अंदर रहने की अनुमति है। लॉकडाउन के दौरान, छात्रों को कैंपस में कोरोना वायरस मामलों की बढ़ती संख्या के कारण अपने घर लौटने के लिए कहा गया था। विश्वविद्यालय ने अभी तक परिसर में छात्रावासों के खुलने की सूचना नहीं दी है। केवल कुछ छात्रों को ही छात्रावास में रहने की अनुमति दी गई है।

JNUSU अध्यक्ष आइशी घोष अवैध रूप से हॉस्टल में रह रही

JNUSU अध्यक्ष और JNU दंगा मामले में आरोपित आइशी घोष और कुछ अन्य छात्रों ने हॉस्टल के कमरों पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया। इसके बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने नोटिस भेजकर उन्हें अवैध रूप से रहने के लिए जुर्माना भरने को कहा है।
कोयना छात्रावास में रहने वाली आइशी घोष को हाल ही में अवैध रूप से रहने के लिए नोटिस भेजा गया और 2,000 रुपए का जुर्माना देने को कहा गया। वरिष्ठ वार्डन द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस में कहा गया है, “सुरक्षा गार्ड द्वारा हमारे संज्ञान में लाया गया कि आइशी घोष को कोयना हॉस्टल में 5 नवंबर को सुबह 4.30 बजे देखा गया। इसलिए समिति घोष पर 2,000 रुपए का जुर्माना लगाने का फैसला करती है।”
उन्होंने कहा, ”आपको 2,000 रुपए का जुर्माना (सात दिनों के भीतर) जमा करना होगा। इस जुर्माने को जमा करने में असफल रहने पर आपसे प्रति सप्ताह 2,000 रुपए और शुल्क लिया जाएगा।”
सपना रतन शाह के अनुसार, कोयना हॉस्टल के एक वरिष्ठ वार्डन ने कहा कि छात्रों ने कमरों के ताले तोड़े और अवैध रूप से हॉस्टल में घुस गए। इसलिए, वार्डन समिति ने उन पर जुर्माना लगाने का फैसला किया, क्योंकि इंटर-हॉल एडमिनिस्ट्रेशन (IHA) का दिशा-निर्देश बताता है कि जुर्माना उन छात्रों पर लगाया जाएगा जो अनधिकृत प्रविष्टि में संलग्न हैं। बता दें कि IHA एक निकाय है, जो 18 JNU छात्रावासों का प्रबंधन करता है।
आइशी घोष और उनके समर्थकों को परेशान करने का 
इस बीच, विवादास्पद जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष ने ट्विटर पर कहा कि उन्हें 2,000 रुपए का भुगतान करने के लिए कहा गया है। दावा किया है कि छात्रों को परेशान किया जा रहा है, क्योंकि ‘वे छात्रावास में वापस आना चाहते हैं और फिर से शैक्षणिक गतिविधियों को शुरू कर रहे हैं।’ आइशी घोष ने जेएनयू के अधिकारियों से प्राप्त नोटिस को भी साझा किया, जिसमें उसे अवैध रूप से हॉस्टल में रहने के लिए जुर्माना भरने के लिए कहा गया है।
उसने कहा, “हम में से कई 30 सितंबर के बाद आए, प्रशासन ने 8 अक्टूबर तक एक सर्कुलर नहीं निकाला कि क्या छात्र वापस लौट सकते हैं। हमने वार्डन और हमारे अन्य अधिकारियों को अपनी वापसी के बारे में सूचित किया, लेकिन हमें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।”
शेहला रशीद भी कूदी 
फ्रीलांस प्रदर्शनकारी और अपने ही ‘बायलॉजिकल’ पिता को धमकी देने की आरोपित शेहला रशीद ने मामले में कूदकर विश्वविद्यालय परिसर के अंदर और अराजकता पैदा करने की स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की।
जेएनयू में एक लंबे समय तक रहने वाली रशीद ने झूठे दावे करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “उड़ानें, शादी, चुनाव, क्रिकेट टूर्नामेंट, धार्मिक कार्य, संगीत कार्यक्रम- सब कुछ हो सकता है, लेकिन छात्र अपने स्वयं के छात्रावास के कमरों में प्रवेश नहीं कर सकते हैं! घोर कलयुग।” शेहला रशीद ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से छात्र जुर्माना वापस करने की माँग की।
प्रदर्शनकारी से नेता बनी शेहला रशीद ने यह दावा करने के लिए कुछ कथित शोध-पत्र भी जारी किए कि महामारी के दौरान महिला शिक्षाविदों को यह महसूस करना पड़ा कि विश्वविद्यालय को महामारी प्रोटोकॉल को दरकिनार कर छात्रावास खोलना चाहिए।
इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश में शेहला रशीद ने ट्विटर पर लिखा, “दुर्भाग्य से, जेएनयू प्रशासन के विचार केवल राजनीतिक हैं। छात्रों को परिसर से बाहर रखने का कदम विशुद्ध रूप से राजनीतिक है। ऐसा लगता है जैसे COVID केवल JNU में मौजूद है, जबकि शेष विश्व प्रतिरक्षात्मक है।”
हालाँकि, शेहला राशिद के दावों के विपरीत, अधिकारियों ने महामारी के दौरान कुछ गतिविधियों पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें निजी और सार्वजनिक गतिविधियाँ शामिल हैं। राज्य और केंद्र दोनों ने समय-समय पर सार्वजनिक डोमेन में कई अधिसूचनाएँ जारी की हैं, जिसमें जनता को ‘क्या करें’ और ‘क्या न करें’ के बारे में विस्तार से बताया गया, ताकि वे सामूहिक रूप से चीनी महामारी से लड़ सकें।
इसी तरह से, जेएनयू के अधिकारियों ने भी अपने छात्रों को महामारी के खिलाफ एहतियाती कदम उठाने के लिए परिसर के अंदर कुछ प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा है और इसे सख्ती से लागू कर रहे हैं। हालाँकि, शेहला रशीद बेशर्मी से महामारी के कठिन समय में भी एक राजनीतिक एंगल खोजने की कोशिश करते हुए अपने फर्जी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रही है।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ‘मैंने ही लोगों से कहा- पत्थर, तेजाब, पेट्रोल व हथियारों को इकट्ठा करें’: उमर खालिद

कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार(दिसंबर 30) को चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

खबरों के अनुसार, उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उमर खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्‍चों का इस्‍तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी कई खुलासे किए हैं।

क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्‍यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।

पुलिस को दिए बयान में उमर ने कबूला, “2019 में जिस तरह से संसद में भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। उसके बाद मैंने अपने साथी जो यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य थे, हम सब ने मिलकर एक मीटिंग की कि एंटी सीएए (CAA) बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इसके लिए हमें आवाज उठानी चाहिए। मेरी बात पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य सहमत हो गए। तब हमने योजना बनाई की JNU और जामिया (Jamia) के मुस्लिम छात्र मिलकर इस बिल के खिलाफ आवाज उठाते है क्योंकि भारत सरकार बिना दबाव बनाए इस बिल को वापस नही लेगी। जिसके बाद हमने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, जेएनयू और जामिया के मुस्लिम छात्रों को इकट्ठा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें देखते ही देखते काफी लोग इकट्ठा हो गए।”

उमर ने आगे कहा, “फिर हमने जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जिसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मीटिंग की और आंदोलन को अगले पड़ाव पर ले जाने की प्लानिंग बनाई। जिसके लिए हमने बच्चों और औरतों को आगे रखकर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने की योजना बनाई। इसके लिए बाकायदा एक और नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया ‘हम भारत के लोग’ नाम से। उधर तब तक एंटी CAA बिल लोकसभा में पास कर दिया गया था और यह एक कानून बन गया।”

उसने आगे बताया, “इसके बाद हमने योजना बनाई कि हमें और सख्त तरीक़े से चक्का जाम करने की जरूरत है। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एक मात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वो अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़ेगी इसका इस्तेमाल करें।”

खालिद ने खुलासा किया कि, वह दिल्ली में करीब 23-24 जगह चल रहे एंटी CAA प्रदर्शनो में शामिल हुआ था। “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा की हम सब डोनॉल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगें और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”

खालिद को पुलिस ने 14 सितंबर को भयावह पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जाँच के लिए उसे समन जारी किया था जिसके बाद वह गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाल ही में दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मंजूरी दे दी थी, जिसमें हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता कट्टरपंथी उमर खालिद, शरजील इमाम, AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन और अन्य कई लोगों को देशद्रोह के आरोप में शामिल किया गया था।

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में नताशा नरवाल, देवांगना कालिता, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और 15 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें साल 2020 की शुरूआत में हुए इस दंगे में लगभग 50 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

अब्बू ने खोली शेहला रशीद की पोल, देश विरोधी गतिविधि में शामिल होने का किया दावा

भारतीय सेना पर आरोप लगाने वाली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की सदस्य शेहला रशीद के अब्बू ने उनकी पोल खोल दी है। शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। अब्दुल शोरा का कहना है कि बेटी शेहला उन्हें जान से मारने की धमकी दे रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘शेहला कुख्यात गतिविधियों में शामिल है।’

ऐसे में चर्चा यह भी है कि इतने समय बाद एक बाप अपनी ही बेटी के विरुद्ध पुलिस को सूचित कर रहा है? क्या शेहला के बाप को बेटी पर जाँच एजेंसीज के हाथ पहुँचने की खबर लग गयी थी, जिससे घबरा कर बाप अपना दामन बचाकर अपनी बेटी शेहला पर सारा दोष डाल अपने आपको बचा रहा है? देश की इतनी चिंता थी, तो जब घर में चांदी के सिक्कों की बारिश हो रही थी, तब क्यों नहीं बेटी से पूछा और पुलिस को सूचना दी?चलो देर आए, दुरुस्त आए। 

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को दी अपनी शिकायत में उन्होंने शेहला की कुख्यात गतिविधियों को उजागर किया है। साथ ही शेहला की बैंक अकाउंट की जांच की मांग की है।

अब इस पर प्रश्न उठने लाजमी हैं, देखो इन प्रश्नों का जवाब देने कौन आगे आता है:-  शिकायत पत्र में अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया कि शेहला ने कश्मीर की राजनीति में शामिल होने के लिए कुख्यात लोगों से तीन करोड़ रुपये लिए हैं। उन्होंने मांग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच वित्तीय डील की जांच की जाए।

जाहिर है कि पिछले दिनों शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप था। शेहला ने भारतीय सेना पर कश्मीर के लोगों को प्रताड़ित करने और दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।

JNU : विवेकानंद मूर्ति के नीचे ‘भगवा जलेगा, Fu*# BJP…’ लिखने वाले वामपंथियों की तुरंत गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति एम जगदीश ने रविवार (नवंबर 8, 2020) को दी है। 

कुलपति ने अपने बयान में बताया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को शाम 6:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का (वीडियो-कॉन्फ्रेंस से) अनावरण करेंगे। प्रतिमा के अनावरण से पहले स्वामी विवेकानंद पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत में हुए सबसे प्रिय बौद्धिक और आध्यात्मिक नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने युवाओं को भारत में स्वतंत्रता, विकास, सद्भाव और शांति के अपने संदेशों से प्रेरित किया।

स्वामी विवेकानंद की मूर्ति जेएनयू के कुछ पूर्व छात्रों के समर्थन से स्थापित की गई है। कुछ समय पहले दिल्ली की सड़कों को जाम करने के बाद यहाँ के कुछ वामपंथी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को अपना निशाना बनाया था।

इसी नई स्थापित मूर्ति को बदरंग करते हुए उसके पेडेस्टल पर माओवंशियों ने अपशब्द लिखे थे। “भगवा जलेगा”, “Fu(k BJP” आदि को लाल रंग के पेंट से लिखकर पेडेस्टल को कुरूप बना दिया था। इसकी तस्वीर वैज्ञानिक, लेखक और JNU में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफ़ेसर आनंद रंगनाथन ने ट्विटर पर शेयर की थी।

उन्होंने तस्वीर शेयर करते हुए बताया था कि जिस मूर्ति को निशाना बनाया गया, उस प्रतिमा का तो अनावरण भी अभी तक नहीं हुआ मगर अर्बन नक्सलियों ने इसे अपनी अंधी नफ़रत का शिकार बना दिया।

 रंगनाथन का यह पोस्ट देख कर ट्विटर पर कई लोग बिफर उठे थे। उनकी पोस्ट को रीट्वीट कर व उनके कमेंट बॉक्स में लोगों ने कम्युनिस्टों को जमकर कोसा था। उस दौरान JNU को बंद करने की माँग भी उठी थी।

वर्तमान मोदी सरकार को चाहिए कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की भांति इस यूनिवर्सिटी को तत्काल कुछ वर्षों के बंद कर दी जाये। 

केजरीवाल द्वारा उमर खालिद UAPA के तहत मुक़दमे पर भड़की आइशी घोष ने कहा- ‘ये विश्वासघात नहीं भुलाया जाएगा’

आइशी घोष ने लगाया केजरीवाल पर विश्वासघात का आरोप
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की इजाजत देने पर पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी प्रक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं, जिन्हें सुनने एवं पढ़ने पर हंसी आना स्वाभाविक है, क्योंकि केजरीवाल को समझना बहुत टेडी खीर है। ये कब गिरगिट की तरह रंग बदल ले, कहना कठिन है। ये कोरोना के प्रकोप ने साइन करने को मजबूर किया है। वरना संविधान की शपथ लेने वाला, क्यों देश तोड़ने और साम्प्रदायिक दंगे करवाने वालों की फाइल पर अब तक क्यों साइन न करने पर बहाने तलाश रहा था। इस सच्चाई को सोंचने और समझने की जरुरत है।  
जो केजरीवाल इतने वर्ष कन्हैया कुमार की फाइल दबाए रखे थे, आखिर किस कारण से साइन की, और अब उमर खालिद और शरजील इमाम की फाइल? अपनी नाकामियों को छुपाने दिल्लीवासियों को मुफ्त की रेवड़ियां बांट सत्ता हथियाने का हत्कण्डा अपनाया। खैर, कोरोना से बेहाल होती दिल्ली को बचाने के लिए केन्द्र में मोदी सरकार को कोसने वाले को जब उसी सरकार की मदद की जरुरत लेने की मजबूरी ने कन्हैया कुमार की फाइल पर साइन किए। और पुनः कोरोना से बेकाबू हो रही दिल्ली को बचाने की मजबूरी ने ही उमर और शरजील की फाइल साइन करने को मबजूर किया। यदि उस समय दिल्ली को बचाने के लिए कन्हैया की फाइल साइन नहीं की होती, दिल्ली आज तक बहुत ख़राब स्थिति होती। अगर दिल्ली को केजरीवाल सरकार ने काबू में रखा होता, न कन्हैया की फाइल साइन होती और न ही अब उमर और शरजील की।   
दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार ने यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब यही बात JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष को आहत कर गई। आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी।

आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक यूजर ने आइशी के इस ट्वीट को पढ़कर अरविंद केजरीवाल के पक्ष में अपनी दलील रखी। श्याम नाम के यूजर ने लिखा, “एलजी को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करके केंद्र सरकार ने प्रॉजिक्यूटर्स नियुक्त किए। आप सरकार ने निर्णय का विरोध भी किया और पैनल को खारिज भी किया लेकिन एलजी ने आप सरकार को ओवर रूल कर लिया। आइशी तुम छात्र राजनीति में कभी कन्हैया की जगह नहीं ले पाओगी। अपने फैक्ट्स को सुधारो।”

आइशी के इस ट्वीट पर कई लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने मुख्यमंत्री को सही ठहराया। वहीं कुछ ने पूछा कि केजरीवाल ने कौन सा विश्वासघात कर दिया? इस पर एक यूजर ने लिखा कि पहले चंदा लिया, वोट लिया और फिर मुकदमा चलाने की भी इजाजत दे दी, आखिर ये धोखा नहीं तो क्या है? इसी तरह कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेटिजन्स बोले कि पहले इन्हें मैक्रों ने धोखा दिया अब केजरीवाल ने।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं। लेकिन ट्विटर पर हर कोई केजरीवाल के इस निर्णय से दगाबाज़ कहने से भी नहीं चूक रहे। अपने आप को ढका सा महसूस कर रहे हैं।

परन्तु कुछ लोग केजरीवाल पर भी व्यंग करने से नहीं चूक रहे।

इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।  

कठुआ केस की वकील दीपिका सिंह राजावत का नया छद्दम सेकुलरिज्म : ईद पर बधाइयां और नवरात्रि पर हिन्दुओं का अपमान

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज कल हिन्दुओं को अपमानित करना और मुस्लिमों के प्रति प्यार दर्शाना सेक्युलर गैंग का फैशन बन गया है। लेकिन अब तक की इन छद्दम सेकुलरों द्वारा मजहब और जाति देख सियासत करने पर आभास होता है, शायद इनको सेकुलरिज्म भावार्थ तक का ज्ञान नहीं। अगर होता तो देश में कोई अराजक तत्व मुंह उठाने का साहस नहीं करता। 

लेकिन जो जितना अधिक हिन्दुओं के देवी-देवताओं के खिलाफ बोलेगा और लिखेगा, वह उतना ही बड़ा सेक्युलर कहलाएगा। इसका ताजा प्रमाण कठुआ केस की विवादास्पद वकील दीपिका सिंह राजावत के ट्वीट से मिलता है। एक तरफ वह ईद के मौके पर मुस्लिमों को बधाइयां देती नजर आती हैं, वहीं नवरात्रि पर हिन्दुओं के धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने के लिए ट्वीट करती है। दीपिका ने सोमवार एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने दिखाया कि नवरात्रि के दिनों में लड़कियों की क्या स्थिति होती है और बाकी दिनों में क्या होती है।

सोशल मीडिया पर इस ट्वीट के खिलाफ काफी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने इस ट्वीट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। बढ़ते विरोध को देखकर दीपिका ने फिर ट्वीट किया। लेकिन उनका यह दूसरा ट्वीट लोगों को शांत करने की जगह और भड़काने का काम किया। दीपिका ने उल्टे लोगों को उपदेश देते हुए लिखा, “मेरी धार्मिक भावनाएं कोई कांच नहीं हैं कि पल भर में टूट जाएंगी। मैं मेरा धर्म और कर्म बेखूबी जानती हूं।”

हिन्दू विरोधी मानसिकता से ग्रसित दीपिका अपना सेक्युलर चेहरा चमकाने और खुद को सेक्युलर गैंग का झंडाबरदार साबित करने के लिए किस तरह मुस्लिमों से प्यार दर्शाती है, इसका प्रमाण ईद के मौके पर दी गई बधाइयां हैं।

ऐसा पहली बार नहीं है, जब दीपिका ने मुस्लिमों की तरफदारी की हो। इससे पहले भी हिन्दुओं के खिलाफ और मुस्लिमों के पक्ष में ट्वीट करती रही है।


दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगे : केजरीवाल शरजील इमाम के विरुद्ध देशद्रोह चलाने इजाजत की क्यों नहीं दे रहे?

शरजील इमाम गिरफ्तार, तलाश में थी छह ...
दिल्ली की एक अदालत ने जुलाई 29, 2020 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र शरजील इमाम को गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) के तहत अपराधों का संज्ञान लेते हुए, इस साल जनवरी माह में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एक भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दोषी करार दिया है।
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसने शरजील इमाम के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली सरकार से मंजूरी माँगी है लेकिन, अभी तक दिल्ली सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।
जाँच एजेंसी ने अदालत को बताया कि शरजील इमाम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी का अभी तक इंतजार है। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने अन्य सेक्शन का संज्ञान नहीं लिया, जिनमें राजद्रोह (124A) और 153 A (धर्म के खिलाफ की गई सजा या हमले के लिए सजा आदि) शामिल हैं। 
"क्या दिल्ली सरकार दंगाइयों के समर्थकों द्वारा चलायी जा रही है?"
अब तो मुफ्त की रेवड़ियों के लालच में आकर आम पार्टी को वोट देने वाले भी प्रश्न करने लगे हैं कि "क्यों फ्री के चक्कर में आकर केजरीवाल को फिर से सत्ता थमा दी?" दंगाइयों पर कार्यवाही करने में रुकावटें डाले जाने से लोग इस शंका में हैं कि "क्या दिल्ली सरकार दंगाइयों के समर्थकों द्वारा चलायी जा रही है?" केजरीवाल को डर है कि यदि दिल्ली सरकार दंगाइयों के विरुद्ध कार्यवाही की इजाजत दे देगी तो चुनावों में पार्टी को कौन वोट देगा?


दरअसल, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर इन्वेस्टिगेटिंग) के तहत, जाँच एजेंसियों को राजद्रोह के मामलों में आरोप पत्र दाखिल करते समय राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती है।
जुलाई 29, 2020 को, अतिरिक्त सरकारी वकील इरफान अहमद ने अदालत को बताया कि यूएपीए के तहत अभियोजन की मंजूरी दी गई थी, जबकि राजद्रोह के मामले में मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुरोध किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि शरजील इमाम जामिया यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर देश विरोधी बयानबाजी कर रहा था। शरजील इमाम ने युवाओं को भड़काने का प्रयास किया था, जिसके बाद ही जामिया में हिंसा हुई थी।
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि शरजील इमाम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के बाहर भी देश के टुकड़े करने की बात कर रहा था। शरजील इमाम के ऐसे कई वीडियो क्राइम ब्रांच को मिले थे। इन वीडियो की वॉयस और शरजील की वॉयस के सैंपल लिए गए थे, जो फॉरेंसिक जांच में मैच कर गए हैं। शरजील इमाम के खिलाफ दिल्ली समेत कई राज्यों में राजद्रोह के मुकदमे दर्ज हैं।
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दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपना दोगलापन दिखाने किस सीमा तक जा सकते हैं, स्वयं अपनी हरकतों से सिद्ध कर रह....
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शरजील इमाम को दिल्ली पुलिस ने बिहार के जहानाबाद से 28 जनवरी को गिरफ्तार किया था। 18 अप्रैल को जामिया मिलिया इस्लामिया के बाहर हुए दंगों के सिलसिले में पुलिस ने इमाम के खिलाफ पहली चार्जशीट दायर की थी, इस दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए थे।

कुत्ते भी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से अच्छे : निर्मल खन्ना, बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी

निर्मल खन्ना, साजिब बिन सईदबलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने जेएनयू स्कॉलर साजिब बिन सईद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मॉंग की है। साजिब ने भारतीय सेना को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मल खन्ना ने कहा कि कुत्ते भी ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देशद्रोह क़ानून के अंतर्गत तुरंत सज़ा दी जानी चाहिए।
देशद्रोह क़ानून के अंतर्गत तुरंत सज़ा
जेएनयू स्कॉलर साजिब बिन सईद ने भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर में नरसंहार के लिए जिम्मेदार बताया था। ‘टाइम्स नाउ’ के वरिष्ठ संपादक प्रदीप दत्ता ने इसी सन्दर्भ में निर्मल खन्ना से बातचीत की। बता दें कि निहत्थे रवि खन्ना और उनके साथियों को यासीन मालिक और उसके गैंग ने तब मार डाला था जब वे लोग श्रीनगर में बस का इन्तजार कर रहे थे।
निर्मल खन्ना ने कहा कि वो एक जेएनयू स्कॉलर की तरफ से इस प्रकार के अर्थहीन बयान से बेचैनी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि साजिब बिन सईद को अपने बयान में भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए खुद पर शर्म आनी चाहिए। निर्मल खन्ना ने कहा कि ऐसे अच्छी तरह पढ़े-लिखे लोगों द्वारा देश व जनता की सुरक्षा करने वाले सेना के प्रति इस तरह के विचार रखना काफी दर्द देने वाला है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के सुरक्षा बलों के खिलाफ इस तरह का तुच्छ प्रोपेगेंडा चलते देखना उनके लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह देश की सेवा करते हुए उनके पति ने अपने जान न्योछावर कर दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये छद्म-बुद्धिजीवी जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की कुटिल हरकतों से ध्यान बँटाने के लिए और उनका बचाव करने के लिए सेना पर ऐसे आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा:
“राष्ट्र के खिलाफ बोलने के लिए ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। ऐसे लोग, जो खुलेआम देश के प्रति गद्दारी को प्रदर्शित करते हैं और भारतीय सुरक्षा बलों को बदनाम करते हैं, उनके खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। देश के खिलाफ साँठगाँठ करने वालों इन लोगों को ऐसी सज़ा दी जानी चाहिए कि ये भविष्य के लिए भी सबक हो। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। वो रहते तो हैं इस देश में लेकिन नाम पाकिस्तान का जपते रहते हैं।”


निर्मल खन्ना ने सवाल उठाया कि आखिर साजिब बिन सईद जैसे लोग उसी सेना को बदनाम करने का प्रयास करते हुए पाकिस्तान का गुण गाते हैं, जो सेना उन्हें इसी पाकिस्तान द्वारा थोपे गए आतंकवाद से बचा रही है। उन्होंने कहा कि अगर बलिदानी आत्माओं की शांति चाहिए तो ऐसे लोगों और उनके संगठनों को भारतीय सेना और देश के लिए वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाना बंद करना चाहिए।
अपने ट्वीट के माध्यम से नफरत फैलाने वाले जेएनयू के स्कॉलर साजिद बिन सईद पर दिल्ली पुलिस ने शिकंजा कसा है। सईद ने भारतीय सेना और आरएसएस पर ‘कश्मीरियों के विनाशकारी नरसंहार’ का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस ने सईद के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। जल्द ही दिल्ली पुलिस सईद से पूछताछ शुरू कर सकती है। सईद के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, और 153 के तहत FIR दर्ज किया गया है।
कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष साजिद बिन सईद ने ट्विटर पर पोस्ट कर कहा था, “भारतीय सेना कश्मीरियों के नरसंहार को अंजाम देती है, जो आरएसएस द्वारा तैयार किया जाता है। भाजपा सरकार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा गारंटीकृत स्व-निर्णय के लिए कश्मीरियों के अधिकार को स्वीकार करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का सही समय आ गया है।”