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दिल्ली : विधानसभा चुनाव से पहले बांग्लादेशियों के बन रहे थे आधार-वोटर कार्ड, दिल्ली पुलिस ने 11 लोगों के गैंग को पकड़ा: कबाड़ बीनने से लेकर फैक्ट्री तक में काम कर रहे घुसपैठिए


दिल्ली में अवैध घुसपैठियों के विरुद्ध वर्तमान में बड़ा अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में घुसपैठियों के भारतीय पहचान पत्र बनाने वाले एक बड़े गिरोह के 11 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। पकड़े गए लोगों में से 5 बांग्लादेशी हैं जबकि बाकी भारतीय हैं। पकड़े गए में गिरोह आधार कार्ड ऑपरेटर और टेक्निकल एक्सपर्ट भी शामिल हैं। इनके द्वारा अब तक बनाए गए पहचान पत्रों और उसे बनवाने वालों की भी पड़ताल चल रही है।

दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई मंगलवार (24 दिसंबर, 2024) को की है। दिल्ली के DCP दक्षिणी अंकित चौहान ने इस कार्रवाई की जानकारी मीडिया से साझा की है। उन्होंने बताया है कि जंगलों के रास्ते भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी विभिन्न रास्तों से दिल्ली पहुँच कर इस गिरोह से मिलते थे।

 DCP अंकित चौहान ने बताया, “हमने कुछ दिन पहले 4 लोगों को हत्या के एक मामले में पकड़ा था। उन्होंने बताया कि वह बांग्लादेशी हैं। उन्होंने सेंटो शेख नाम के एक आदमी ने उन्हें बुलाया था। उसने यहाँ दिल्ली के रोहिणी इलाके में पूनम कम्प्यूटर सेंटर चलाने वाले साहिल से मिलकर इन बांग्लादेशियों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया। उनका आधार कार्ड भी बनवाया गया। 11 लोग गिरफ्तार किया गया है। इसमें 5 बांग्लादेशी और 6 उनके मददगार शामिल हैं।”

DCP अंकित चौहान ने बताया, “यह लोग जंगल के रास्ते भारत आते हैं। इसके बाद यह फर्जी कागजों के सहारे दिल्ली तक आते हैं। इसके बाद यह दिल्ली आकर फर्जी कागज बनाने वाले नेटवर्क से मिलकर आधार कार्ड वगैरह हासिल करते हैं। इसमें एक वेबसाइट का भी खुलासा हुआ है। इस वेबसाइट से फर्जी कागज बनाए जाते थे। यह वेबसाइट रजत मिश्रा, सद्दाम, सोनू कुमार और चाँद मोहम्मद मिलकर चलाते थे। इससे 228 प्रमाण पत्र 2 अकाउंट से बनाए गए हैं। कुल प्रमाण पत्र हजारों में हो सकते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि एक महिला ने भारत में आकर अपना वोटर कार्ड भी बनवा लिया था। उसको भी पकड़ा गया है। पुलिस ने बताया है कि वह दिल्ली में घुसपैठियों की रोज तलाश कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह घुसपैठिए कबाड़ बीनने से लेकर फैक्ट्रियों में काम करने में लगे हुए हैं। इन सभी से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि इनके द्वारा बनाए गए पहचान पत्रों का उपयोग कर के कौन सा घुसपैठिया कहाँ रह रहा है। इन गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। इन्होंने कितने फर्जी दस्तावेज अब तक तैयार कर दिए, इस पर भी जाँच हो रही है।

फरवरी,2025 में दिल्ली में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से पहले उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने पुलिस को अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सघन अभियान चलाने का आदेश दिया है। इस अभियान के तहत अब तक 175 संदिग्ध बांग्लादेशी की पहचान की जा चुकी है। उनके कागजों का सत्यापन हो रहा है। इसके अलावा दिल्ली के स्कूलों को भी यह आदेश मिला है कि वह अवैध घुसपैठियों के बच्चों को दाखिला ना दें। भाजपा इससे पहले आरोप लगाती आई है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने अवैध घुसपैठियों को संरक्षण दिया है।

जनसंख्या 13.8 लाख, आधार कार्ड बने 14.53 लाख… बांग्लादेशियों की घुसपैठ के लिए बदनाम झारखंड में एक और ‘कमाल’


झारखंड के संथाल परगना समेत बाकी इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ के संकेत लगातार मिल रहे हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि झारखंड के कई जिलों में जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसका आँकड़ा भी मौजूद है। इससे पहले वोटरों की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी की बात भी सामने आई थी।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के संथाल परगना के हिस्से साहिबगंज और पाकुड़ में अनुमानित जनसंख्या से कहीं अधिक आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट में आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी UIDAI और अनुमानित जनसंख्या के आँकड़ों की तुलना की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साहिबगंज की अक्टूबर, 2024 तक अनुमानित जनसंख्या 13.8 लाख थी जबकि यहाँ 14.53 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। इसी तरह पाकुड़ में भी अनुमानित जनसंख्या 10.89 लाख है लेकिन यहाँ 11.36 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानि इन दोनों जिलों में जनसंख्या किए मुकाबले 104% आधार कार्ड बने हैं।

इसी तरह का मामला लोहरदगा से भी सामने आया है। यहाँ 5.58 लाख की जनसंख्या पर 6.08 लाख आधार कार्ड बन चुके हैं। यानी यहाँ जनसंख्या के मुकाबले 108% आधार बने हैं। कमोबेश यही मामला कुछ और जिलों में हैं। इन आँकड़ों पर अब चिंता जताई गई है।

यह भी प्रश्न उठे हैं कि जब इन जिलों की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा खुद बाहर काम करने के लिए रहता है तो यहाँ आधार कार्ड में कैसे बढ़ोतरी हो गई। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीधी सुई बांग्लादेशी घुसपैठियों की तरफ जा रही है। साहिबगंज और पाकुड़ जैसे इलाके पश्चिम बंगाल से सटे हुए हैं और यहाँ से बांग्लादेश भी दूर नहीं है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने खुफिया एजेंसियों की एक टीम को संथाल परगना के जिलों में हाल ही में कुछ दिन के लिए भेजा था। यह टीम यहाँ से बांग्लादेशी घुसपैठ के सबूत लेकर लौटी है। इसने साहिबगंज के कई इलाकों का दौरा भी किया है।

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी आँकड़ों में असामान्य वृद्धि हुई हो। इससे पहले वोटर लिस्ट में भी असामान्य वृद्धि की बात कही गई थी। भाजपा ने इसको लेकर एक रिपोर्ट भी पेश की थी। भाजपा ने पाया था कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।

भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया था कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने हिन्दू बूथों पर आबादी घटने की बात भी कही थी।

झारखंड में होने वाली अवैध घुसपैठ को लेकर हाई कोर्ट में एक मामला भी चल रहा है। दान्याल दानिश की याचिका पर हाई कोर्ट राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों के सर्वे और उनको बाहर निकले जाने के निर्देश तक दे चुका है। हालाँकि, राज्य की हेमंत सोरेन सरकार किसी भी प्रकार की घुसपैठ से इनकार करती आई है।

हेमंत सोरेन की सरकार ने इसको लेकर लीपापोती का प्रयास किया है। हाल ही में हाई कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान पूरे राज्य में सत्यापन का आदेश दिया था। सोरेन सरकार ने आनन-फानन में इस संबंध में समितियाँ बनाई और कुछ ही दिनों के भीतर हलफनामा दायर कर दिया कि राज्य कोई घुसपैठिया नहीं है।

शिव कुमार तिवारी के बेटे सोनू को माँ परवीन बानो ने आधार कार्ड में बना दिया ‘फिरोज अंसारी’: माँ-मामा ने किया ‘खेला’

                      सोनू तिवारी को आधार कार्ड में बना दिया गया फ़िरोज़ अंसारी (चित्र साभार: दैनिक भास्कर)
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से एक हिंदू युवक को आधार कार्ड में मुस्लिम बना देने का मामला सामने आया है। पीड़ित का नाम सोनू तिवारी है। उसके पिता शिव कुमार तिवारी है। लेकिन आधार कार्ड में उसका नाम फिरोज अंसारी और पिता का नाम राजू अंसारी कर दिया गया है।

शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में सोनू और उसके पिता का असली नाम दर्ज है। अब आधार कार्ड में हुए इस ‘खेल’ को दुरुस्त करवाने के लिए वह दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सोनू के अनुसार उसकी पहचान बदलने का ‘खेला’ उसकी माँ और मामा ने ही किया है। उसकी माँ परवीन बानो मुस्लिम है।

दैनिक भास्कर ने सोनू की पीड़ा को लेकर विस्तार से रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दुर्ग जिले के कसारीडीह इलाके का है। सोनू के पिता शिव कुमार तिवारी अपने इलाके के हिस्ट्रीशीटर थे और मुस्लिम महिला परवीन बानो से लव मैरिज की थी। 8 सितंबर 1992 को परवीन ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम सोनू तिवारी रखा गया।

पीड़ित ने बताया कि उसकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा सोनू तिवारी के ही नाम से कसारीडीह के प्राइमरी स्कूल में हुई। इस स्कूल से मिली टीसी और मार्कशीट में भी उसका नाम सोनू तिवारी दर्ज है। उसकी पढ़ाई के ही दौरान शिवकुमार तिवारी को किसी मामले में जेल हो गई। पिता के जेल जाने के बाद परवीन अपने बच्चे के साथ मायके चली आई। यहाँ सोनू तिवारी का नया आधार कार्ड बनवाया गया। इस आधार कार्ड में सोनू का नाम फ़िरोज़ अंसारी कर दिया गया।

सोनू का कहना है कि आधार कार्ड में उसके पिता का भी नाम बदला दिया गया है। शिव प्रसाद तिवारी की जगह आधार कार्ड में राजू अंसारी लिखा हुआ है। इसी आधार कार्ड पर सोनू तिवारी का ड्राइविंग लाइसेंस भी फ़िरोज़ अंसारी के नाम से बनवा दिया गया। सोनू तिवारी ने इस साजिश में अपने मामा की मिलीभगत भी बताई है। फ़िलहाल सोनू अपनी असली पहचान वापस पाने की लड़ाई लड़ रहा है।

वह 2 साल से जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे कर इस गलती को दुरुस्त करने की गुहार लगा रहा है। सोनू का कहना है कि वह हिंदू है और इसी पहचान के साथ रहना चाहता है। उसने SDM को इस संबंध में आवेदन दिया है। बताया जाता है कि अब उसकी माँ ने भी सहमति दे दी है। SDM मुकेश रावटे के अनुसार मामले में जाँच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

9 से ज्यादा SIM खरीदने पर लग सकता है 2 लाख रूपए का जुर्माना, गड़बड़ करके लिया तो देने पड़ सकते हैं 50 लाख रूपए : नए टेलीकॉम बिल


टेलीकम्यूनिकेशंस एक्ट, 2023 के कुछ हिस्से बुधवार (26 जून, 2024) से लागू कर दिए गए हैं। इसके अंतर्गत कई नए नियम देश में SIM लेने और उसके उपयोग के संबंध में लागू किए गए है। गड़बड़ी के संबंध में सजा और जुर्माने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है।

टेलीकम्यूनिकेशंस बिल, 2023 को दिसम्बर, 2023 में संसद में पास किया गया था। इसके बाद इस पर राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी थी। इस कानून में 60 से अधिक खंड हैं। इस कानून से सरकार देश में संचार माध्यमों के नियमन को नए तरीके से नियमित करना चाहती है, अभी तक यह काम एक सदी पुराने क़ानून के सहारे होता था।

इस कानून में संचार माध्यम (फोन नेटवर्क, इंटरनेट) लगाने, उनके उपयोग, उनमें गड़बड़ी पर सजा और उनके नियमन सम्बन्धी प्रावधान हैं। इससे संचार माध्यमों का कोई दुरूपयोग ना करे, इसके लिए भी प्रावधान किए गए हैं। कानून के तहत अब भारत में कोई भी व्यक्ति तय सीमा से अधिक SIM अपने पास नहीं रख पाएगा।

SIM खरीदने को लेकर क्या है कानून?

इस कानून के तहत भारत में एक व्यक्ति जीवन भर में अब 9 SIM ही खरीद सकेगा। यह SIM उसके आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान पत्र से जुड़े होंगे। इस सीमा को जम्मू कश्मीर और उत्तरपूर्व में 6 ही रखा गया है। इस नियम का उल्लंघन करने पर पहली बार ₹50,000 और फिर प्रत्येक बार ₹2 लाख का जुर्माना देना पड़ेगा।
हालाँकि, SIM खरीदने की सीमा का उल्लंघन करने पर सजा नहीं होगी। SIM खरीदने पर सीमा लगाने के पीछे इसके दुरूपयोग को रोकने की मंशा है। आतंकियों समेत तमाम देश विरोधी ताकतें इससे पहले एक ही पहचान पत्र के आधार पर कई SIM चालू कर लेती थीं, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
वहीं किसी ऐसे SIM या इंटरनेट का उपयोग करने पर, जिसको सरकार ने अनुमति नहीं दी है, भारी जुर्माना होगा। नए कानून के अनुसार, ऐसी स्थिति में ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यानि अब बिना कानूनी अनुमति के इंटरनेट या अन्य ऐसी ही किसी सुविधा का इस्तेमाल करना मुश्किल कर दिया गया है।
इसके अलावा SIM खरीदने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए यदि कोई व्यक्ति फर्जी जानकारी देता है, तो इसके लिए उस पर ₹50 लाख तक जुर्माना और 3 वर्ष की सजा हो सकती है। फर्जी SIM से होने वाले अपराधों को देखते हुए इस नियम को इतना कठोर बनाया गया है।

अपने नाम से चल रहे SIM भी जानें

जहाँ एक ओर सरकार ने लोगों के SIM खरीदने को लेकर सीमा लगाई है, वहीं दूसरी तरफ उसने कुछ सुविधाएँ भी दी हैं। सरकार ने हाल ही में संचार सारथी नाम से वेबसाइट भी चालू की थी, इस पर आप उन नम्बरों को जान सकते हैं जो आपके आधार से जुड़े हुए हैं। इसके लिए आपको Sancharsaathi.gov.in पर जाकर अपना फोन नम्बर देना होगा। यह वेबसाइट आपके नंबर पर एक OTP भेजेगी, जिसके बाद आपको पता चल जाएगा कि आपके आधार पर कितने SIM चलाए जा रहे हैं।
इस वेबसाइट में उपयोग में ना लाए जाने वाले SIM को बंद करने और अपने आधार से हटाने की सुविधा भी है। साथ ही इस वेबसाइट से अपने खोए हुए मोबाइल को भी ढूँढने के लिए IMEI नम्बर ब्लॉक करवाया जा सकता है। इससे फोन का दुरूपयोग नहीं हो सकेगा।