प्रतीकात्मक तस्वीर/साभार: नवभारत टाइम्स
कट्टरपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) देश की सम्प्रभुता और एकता को तोड़ने के लिए अलग-अलग तरीके से काम करता रहा है। देश में दंगे भड़काने से लेकर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने के बाद अब पीएफआई की एक और करतूत का खुलासा हुआ है।
दरअसल, पटना पुलिस की जाँच के बाद यह सामने आया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) अपने संगठन में भर्ती करने के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों (Rohingya) और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड बनवा रहा है।
PFI यदि घुसपैठियों के आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड बनवा रहा है, केवल किसी सरकारी बाबू को रिश्वत देकर यह काम नहीं किया जा रहा, इसकी एक लम्बी कड़ी है, जिसमे दलाल और संविधान की शपथ लेकर निर्वाचित(सत्ता अथवा विपक्ष) में बैठे नेता भी शामिल होते हैं, क्योकि बिना सियासतखोर की छत्रसाया के यह काम नहीं हो सकता, पुलिस भी कार्यवाही के नाम पर या तो दलाल को पकड़ लेती है या सिर्फ बाबू को। लेकिन भ्रष्टाचार को पनाह देने वाले बेफिक्र आज़ाद घूमते रहते हैं।
पटना पुलिस ने अपनी इस जाँच में कहा है कि हमें आशंका है कि पीएफआई आधार कार्ड बनवाने के लिए तस्करों द्वारा फर्जी कागजात तैयार करवाने के साथ ही ऐसे तरीके अपना रहा है जिससे घुसपैठियों की पहचान होना बेहद मुश्किल है।
पुलिस ने यह भी कहा कि पीएफआई रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को कर्नाटक और समेत अन्य राज्यों में मज़दूर के रूप में भेज रहा है ताकि इनकी नई पहचान बनाई जा सके।
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र खासतौर से किशनगंज, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सुपौल और पूर्णिया जिलों को टारगेट किया जा रहा है।