आज विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) छद्दम सेक्युलरिस्टों को ही बेनकाब नहीं कर रही, बल्कि कश्मीर के माध्यम से भारत में उस वास्तविक इतिहास को उजागर करने के लिए मजबूर कर रही है, जिससे भारतवासियों विशेषकर वर्तमान युवा पीढ़ी को अँधेरे में रखा गया। जिसे कुर्सी के भूखे नेताओं ने पहले मुग़ल आक्रांताओं को महान भारतीय इतिहास को धूमिल किया, फिर इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम पर देश को भ्रमित किया गया।
विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) की रिलीज के साथ ही जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से 1990 के दौरान पलायन के लिए मजबूर हुए कश्मीरी हिंदुओं की बात हर कोई कर रहा है, लेकिन प्रख्यात गीतकार संतोष आनंद (Santosh Anand) ने खुलासा किया है कि 90 के दशक में आतंकवाद इस कदर अपने चरम पर था कि उनके गाने तक से कश्मीर का नाम हटा दिया गया था। वो कहते हैं कि कश्मीर में हुआ नरसंहार ऐसा सच है, जिसे न तो दबाया जा सकता है और न ही छुपाया जा सकता है।
प्रख्यात गीतकार और कवि संतोष आनंद ने यह बात 29 मार्च 2022 को प्रयागराज में कही। वो यहाँ कीडगंज में आयोजित ‘काव्य चकल्लस-2022’ के तहत हो रहे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि 1992 में सुपरहिट फिल्म ‘तहलका’ आई थी। इसका एक गाना था ‘दिल दीवाने का डोला दिलदार के लिए …’ इस गाने को संतोष आनंद ने ही लिखा था। उन्होंने बताया कि ये गाना असली नहीं है। इसके असली बोल थे, ‘दिल दीवानों का डोला कश्मीर के लिए..हर देशभक्त ये बोला कश्मीर के लिए..मेरा रंग दे बसंती चोला कश्मीर के लिए।’
संतोष आनंद कहते हैं कि उस वक्त घनघोर आतंकवाद था। उस दौरान कश्मीर का नाम लेना भी मुनासिब नहीं था। मेरे गाने को रोक दिया गया। इसकी न्यूज तक नहीं आई। वो बताते हैं कि उनके गाने को लेकर एक समाचार के वरिष्ठ संवाददाता ने बुलाकर दिखाया था कि एक पेज की खबर बनी थी, लेकिन पूरे पेज पर विज्ञापन लगा दिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि वो एक राष्ट्रवादी विचारधारा वाले व्यक्ति हैं।
No comments:
Post a Comment