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‘सनातन खत्म होना ही चाहिए’: अब शरद पवार की पार्टी के नेता ने खोला हिन्दू विरोधी घृणा का पिटारा, पूछा – अचानक कहाँ से हो गया इस धर्म का जन्म?

                                  उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ पूर्व मंत्री जितेंद्र आव्हाड
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। इसके बाद से सनातन धर्म के खिलाफ बयान देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब शरद पवार की पार्टी के नेता और उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री रहे जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म हो जाना चाहिए। उन्होंने पूछा है कि सनातन धर्म अचानक से कहाँ से पैदा हुआ है?

मोदी विरोध में हुए गठबंधन का सनातन विरोध करने से ऐसा आभास हो रहा कि इनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है। जनता में अब चर्चा है कि सनातन विरोधियों का केंद्र सरकार को इनका डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। शंका है ये लोग मुग़ल काल में बने हरम में कैद महिलाओं की तो संतानें नहीं। पहले मुगलों को सम्मान, और विश्व में भारत ही एक ऐसा एकलौता देश है जहाँ आतताई मुगलों का गुणगान किया जाता है। डीएनए टेस्ट करवाने की चर्चा होने में दम भी नज़र आता है, क्योकि आतताई मुग़ल भी सनातन विरोधी थे। इन सनातन विरोधियों को शायद यह नहीं मालूम कि सनातन विरोधियों का दुनियां में कोई नाम लेने वाला नहीं। जितना विरोध करना है, कर लें, फिर वह दिन भी अधिक दूर, जब इनके परिवार वाले भी इनका नाम लेने में लज्जा महसूस करेंगे। ये सनातन विरोधी तो आतताई मुगलों का नाम ले रहे हैं लेकिन इनका कोई नहीं होगा। जनता में यह भी चर्चा हो रही है कि इन सनातन के विरुद्ध किसी पुलिस या न्यायालय की शरण में जाने की बजाए इनका परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार कर देना चाहिए, जो किसी पुलिस या न्यायालय द्वारा दी जाने वाली सजा से कहीं अधिक घातक होगी। समय इन चर्चाओं के चरितार्थ होने की उसी तरह प्रतीक्षा कर रहा है, जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने शिशु पाल द्वारा दी जाने वाली 100 वीं गाली की प्रतीक्षा की थी। तब अंतिम समय पता चलेगा, सनातन धर्म क्या है, कितने युगों से है। जो नेता एवं पार्टी कुर्सी की खातिर अपने ही धर्म के विरुद्ध बोले, जनता का क्या भला करेगा?    

एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता जितेंद्र आव्हाड ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “सनातन धर्म खत्म होना ही चाहिए। यह तो बाबा साहब आंबेडकर की माँग थी। इसलिए ही तो उन्होंने मनुस्मृति जलाई। इतने दिन कहाँ था सनातन धर्म। हमारे प्रधानमंत्रियों के पिछले कई सालों के भाषण निकालिए, वह तो हिंदू धर्म की ही बात करते थे। अचानक से सनातन धर्म का कहाँ से जन्म हो गया?”

उन्होंने आगे कहा है, “सनातन धर्म के लोग सिर्फ और सिर्फ धर्म की ही राजनीति करते हैं। अपने धर्म में ही दो शाखाएँ तैयार कर दीं। हम तो मोहन भागवत जी का समर्थन करते हैं। इस मामले में आरएसएस का समर्थन कर रहा हूँ मैं। वह कहते हैं कि यहाँ पर कुछ लोगों ने कुछ लोगों को पिछड़ा रखा। अब उन पिछड़े लोगों को आगे लाने के लिए हमें हिम्मत दिखानी चाहिए। इसके लिए हमें काम करना चाहिए। इन लोगों को पीछे रखने वाले लोग सनातनी थे।”

महाराष्ट्र के स्थानीय मीडिया पोर्टल ‘लय भारी’ के अनुसार, जितेंद्र आव्हाड ने यह भी कहा, “सनातन धर्म का समर्थन करने वाले लोगों के कुछ सवाल हैं, उन्हें इनका जवाब देना चाहिए। चार्वाक को किसने मारा? छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को किसने अस्वीकार कर दिया? हत्यारों को महात्मा ज्योतिराव फुले के पास किसने भेजा?”

आव्हाड ने आगे कहा, “सती प्रथा के खिलाफ लड़ने वाले राजा राममोहन राय के खिलाफ तलवार उठाने वाला कौन था? राजर्षि शाहू महाराज को बदनाम करने और उनकी हत्या करने वाले षड्यंत्रकारी कौन थे? वे कौन थे जिन्होंने एक विशेष जाति समूह को पानी पीने से रोका? इन सभी चीजों के अपराधी सनातनी धर्म के अनुयायी थे। हम उनका विरोध जारी रखेंगे।”

इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उदयनिधि ने कहा था, “मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

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उदयनिधि के बयान का कांग्रेस ने भी समर्थन किया था। तमिलनाडु कॉन्ग्रेस की महासचिव लक्ष्मी रामचंद्रन ने सनातनियों को जातिवादी और नफरत फैलाने वाला बता दिया। उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व और सनातन आदि उत्तर भारत की उपज है। दक्षिण भारत के लोग शांतिप्रिय हैं। लक्ष्मी रामचंद्रन ने कहा था, “नफरत फैलाने वाले सनातन जातिवादी हिंदुत्व का दूसरा नाम है, जिसकी उत्पत्ति उत्तर में हुई है। दक्षिण में हमारा हिंदू धर्म शांतिप्रिय है और समावेशी होने का प्रयास करता है। रामानुजार, वल्लालर और नारायण गुरु प्रकार का हिंदू धर्म ही हमारा हिंदू धर्म है।”

‘The Kerala Story बनाने वाले को सरेआम फाँसी देनी चाहिए’: शहीद इशरत जहाँ एंबुलेंस सेवा की शुरु करने वाले NCP नेता जितेंद्र आव्हाड

             निर्माता विपुल अमृतलाल शाह, निर्देशक सुदीप्तो सेन और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड (बीच में)
शरद पवार को अपनी पार्टी की ओर ध्यान देना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि 
विधायक जितेंद्र आव्हाड की वजह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी क्षेत्रीय पार्टी भी न रहे। राष्ट्रीय दर्जा तो समाप्त हो ही चूका है। पार्टी के नेता ऐसी ऊल-जलूल बात करते रहे, फिर वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब पार्टी केवल नाम की ही रह जाएगी। जनता की नब्ज को पढ़ लो। तुष्टिकरण और छद्दम धर्म-निरपेक्षता के दिन लदने शुरू हो गए हैं। जितना The Kerala Story का विरोध किया जाता रहेगा, जनता उनको आतंकवाद समर्थक की सूची में डाल चुनावों में उस नेता को ही नहीं बल्कि पार्टी को धूल चटाने का मन बना रही है। 

शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के निर्माता को सार्वजनिक तौर पर फाँसी देने की डिमांड की है। अतीत में हिंदू त्योहारों को दंगों का कारण बता चुके आव्हाड ने कभी आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत भी की थी। हाल में जब पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था तो उनके समर्थन में इस्तीफा देने वालों में भी आव्हाड थे।

जितेंद्र आव्हाड ने कहा है, “द केरल स्टोरी के नाम पर एक राज्य और वहाँ की महिलाओं को बदनाम किया जा रहा। आधिकारिक आँकड़ा 3 का था, लेकिन इसे 32000 के तौर पर पेश किया गया। इस काल्पनिक फिल्म को बनाने वाले को सार्वजिनक रूप से फाँसी देना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है जबकि इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

इससे पहले जितेंद्र आव्हाड ने एक ट्वीट में केरल की साक्षरता समेत अन्य मुद्दों का जिक्र करते ‘द केरल स्टोरी’ को ‘झूठी फिल्म’ करार दिया था। उन्होंने लिखा था फिल्म में जैसा दिखाया गया है, सच्चाई उसके उलट है। 32000 महिलाओं का आँकड़ा फिल्म चलाने के लिए बताया जा रहा है। इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि महिलाएँ मूर्ख हैं और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता। फिल्म में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर दिखाया गया है। यही फिल्म की सच्चाई है। इस तरह की फिल्में नफरत और हिंसा फैलाकर चुनाव जीतने के लिए बनाई जाती हैं।

2016 में मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इसकी लॉन्चिंग में भी आव्हाड भी शामिल हुए थे। यही नहीं, आव्हाड हिंदुओं के प्रमुख त्योहार राम नवमी और हनुमान जयंती को दंगों की वजह भी करार दे चुके हैं। न्होंने कहा था कि लगता है जैसे रामनवमी और हनुमान जयंती सिर्फ दंगों के लिए ही मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ बैन

उत्तर प्रदेश में ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री हो गई है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है। ममता ने कहा है कि यह फैसला राज्य में नफरत और हिंसा को रोकने तथा शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।
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‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर ISIS में भेज दिया जाता है। फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है।

एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड की CAA को लेकर बिगड़े बोल

जितेंद्र आव्हाड
NCP नेता जितेंद्र आव्हाड
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर दिल्ली समेत देश के कई शहरों में लगातार विरोध हो रहा है। CAA और NRC को लेकर कई नेताओं के समर्थन और विरोध में बयान सामने आ रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता (NCP) और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने CAA और NRC को लेकर विवादित बयान दिया है।
एनसीपी नेता ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, “मैं दिल्ली के तख्त से पूछता हूँ, अब तू माँगेगा मुझसे सबूत मेरे देशवासी होने का, तो सुन, जब तेरा बाप सर झुकाकर अंग्रेजों के तलवे चाट रहा था, तब मेरा बाप फाँसी के तख्त को चूमके इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहा था।”
जितेंद्र के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद एनसीपी नेता के इस बयान की जमकर आलोचना की जा रही है। उल्लेखनीय है कि विपक्षी पार्टियाँ इस कानून को वापस लेने की माँग कर रही है। साथ ही जहाँ-जहाँ कांग्रेस की सरकार है, उन राज्यों में इसे लागू नहीं करने का ऐलान किया है। हालाँकि, यह असंवैधानिक है और इस बात को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी माना है।


इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने संशोधित नागरिकता कानून को राज्य में लागू नहीं करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “महाराष्ट्र में हमारी सरकार है। कई मुस्लिम भाइयों ने कहा था कि बीजेपी उनके लिए सबसे बड़ी दुश्मन है और इसलिए बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस को सत्ता में आना होगा। इसी कारण से हमने महाराष्ट्र में सरकार बनाई। जब तक महाराष्ट्र में हमारी सरकार है, हम महाराष्ट्र में सीएए लागू नहीं करेंगे।”
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वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि केंद्र सरकार कानून जरूर बना सकती है, लेकिन उसे लागू करने का जिम्मा पूरी तरह राज्य सरकार के पास होता है। देशमुख ने कहा था, “महाराष्ट्र में हमारी सरकार है और केंद्र सरकार कानून जरूर बना सकती है लेकिन इसे लागू करना या नहीं करना राज्य सरकार के हाथ में होता है।”