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स्वरा भास्कर के शौहर को अखिलेश यादव ने बनाया अध्यक्ष, टिकट के लिए शरद पवार की पार्टी में गए: नवाब मलिक की बेटी से होगा मुकाबला; दल बदलुओं को वोट न कर सबक सिखाए जनता चाहे, ये दल बदलू चाहे किसी पार्टी से हों, ये कभी भी देश को मुसीबत में डाल सकते हैं

सियासत में कोई किसी का सगा नहीं। कौन कब पाला बदल ले नहीं कह सकते। ऐसे दल- बदलुओं को 2024 लोकसभा चुनावों में जनता सबक सिखाने की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'अब की बार 400 पार' की हवा इसीलिए निकली कि इतने वर्षों से कार्यरत और संघर्ष करने वालों को टिकट न देकर imported को टिकट देना। उस पर कांग्रेस के "खटाखट" ने सोने पर सुहागे का काम कर दिया।    
ऐसे दल बदलुओं पर न कोई ED कार्यवाही करती है और न ही कोई Income Tax क्यों? सियासत एक सफेदपोशी धंधा है। कोई सियासतखोर इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकता। बिना किसी लालच के कोई एक पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी में नहीं जाता। जब 56 इंच वाली सरकार ही कुछ नहीं कर रही, चुनाव में ऐसे लालची और दल बदलुओं को जनता एक भी वोट न देकर चारों खाने चित करें। यानि जो पार्टी का नहीं हुआ देश का क्या होगा? ये लालची कभी भी देश को मुसीबत में डाल सकते हैं।     

समाजवादी पार्टी के नेता और अभिनेत्री स्वरा भास्कर के शौहर फहद अहमद ने एनसीपी (शरद पवार) में शामिल होकर मुंबई की अनुशक्ति नगर सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। वे इस सीट पर एनसीपी (अजीत पवार) की सना मलिक के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। सना मलिक एनसीपी नेता नवाब मलिक की बेटी है।

एनसीपी-एससीपी नेता जयंत पाटिल ने बताया कि फहद एक पढ़े-लिखे और अनुभवी युवा नेता हैं। उन्होंने कहा, “फहद पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन हमारी बातचीत के बाद वे हमारे साथ आए हैं। हमने उन्हें अनुशक्ति नगर सीट से टिकट दिया है।”

फहाद ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से उनके नाम पर सहमति बनाई। फहद को सपा के यूथ विंग समाजवादी युवजन सभा का महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अखिलेश यादव ने ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी।

इससे पहले, एनसीपी-एससीपी ने महाराष्ट्र चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की थी, जिसमें कई प्रमुख नाम शामिल हैं। पहली सूची में 45 नाम थे। बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव में कॉन्ग्रेस, एनसीपी-शरद पवार और शिवसेना-उद्धव ठाकरे ग्रुप एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों पार्टियों के हिस्से 85-85 सीटें आई हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होंगे और 23 नवंबर को मतगणना होगी।

मालेगाँव ब्लास्ट में योगी आदित्यनाथ को फँसाने की थी साजिश, कोर्ट में बोले कर्नल पुरोहित- UPA सरकार के इशारे पर ATS ने किया टॉर्चर, नाम लेने का डाला दबाव

      कर्नल पुरोहित पर CM योगी का नाम लेने का दबाव डाला गया था (चित्र साभार: Indian Express & Reddit)
यूपीए के कार्यकाल में इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर हिन्दुत्व को कलंकित किये जाने का दुस्साहस किया जा रहा था। क्या हिन्दू कांग्रेस या INDI गठबंधन को सत्ता में लाकर उस पृष्ठभूमि को दोबारा दोहराना चाहेगा? कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा या फिर स्वामी असीमानंद हिन्दू धर्म को कलंकित होने से बचाने में यूपीए सरकार की ATS की कितनी प्रताड़नाएं इन्होने झेली है, यह ईश्वर ही जानता है। 

महाराष्ट्र ATS आतंक के मामले में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाना चाहती थी। इसके लिए उसने मालेगाँव बम धमाकों के मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को प्रताड़ित किया था। ATS ने उनको बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए लगातार यातनाएँ दी। कर्नल पुरोहित ने बताया है कि महाराष्ट्र ATS उनसे उनके ख़ुफ़िया मिशन के बारे में सारी जानकारी बताने को कह रही थी। कर्नल पुरोहित ने यह सभी खुलासे कोर्ट के सामने किए हैं।

कर्नल पुरोहित ने बुधवार (8 मई, 2024) को मुंबई के एक कोर्ट को बताया, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

कर्नल पुरोहित ने बताया कि यह सब कुछ तत्कालीन UPA सरकार और राज्य की कॉन्ग्रेस-NCP सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनकी शह पर किया गया था। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और मालेगाँव के मामले में में बताया है कि सब पूर्व नियोजित तरीके से हुआ था।

कर्नल पुरोहित ने कोर्ट से कहा, “करकरे और परमबीर सिंह बार-बार मुझ पर अपने खुफिया नेटवर्क की जानकारी देने के लिए दबाव डाल रहे थे। यह लोग मुझसे अपने उन मुखबिरों की सूची देने को कह रहे थे जिन्होंने आतंकी संगठन SIMI, ISI और डॉ. जाकिर नाइक की गतिविधियों का पता लगाने में मेरी सहायता की थी। मैंने अपने नेटवर्क का खुलासा करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह मुझे स्वीकार्य नहीं था।”

उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व पर हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “अचानक अगस्त 2008 में , NCP अध्यक्ष (शरद पवार) ने अलीबाग में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक रैली में बयान दिया कि सिर्फ़ आतंकवादी इस्लामी ही नहीं हैं, बल्कि हिंदू आतंकवादी भी हैं। यह पहली बार था जब ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द सामने आया था। इस बयान के बाद 29 सितंबर, 2008 की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई और उसमे हिन्दुओं को आतंकवादी बताया गया।”

कर्नल पुरोहित ने आरोप लगाया कि ATS गवाहों से बन्दूक की नोक पर बयान दिलवाती थी। उन्हें प्रताड़ित करती थी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन इसे कागजों में नहीं दिखाया गया। उन्हें मारपीटा गया और उनका पैर तोड़ दिया गया। कर्नल पुरोहित ने अपने एक सीनियर कर्नल पीके श्रीवास्तव पर भी आरोप लगाए हैं।

हिन्दू नेताओं को फँसाने की यह बात नई नहीं है। इससे पहले भी मालेगाँव मामले में एक गवाह भी ऐसी ही बात बता चुका है। गवाह ने 2021 में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत को बताया था कि ATS ने उसे उठाया और सात दिन तक बंद रखा। इस दौरान उसे प्रताड़ित किया गया और उसके परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई। गवाह ने बताया कि ATS ने उसे भाजपा के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के अलावा RSS के इंद्रेश कुमार, देवधर, काकाजी और स्वामी असीमानंद का नाम लेने के लिए मजबूर किया था।

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नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर वार, बाल पकड़ खींचे… कैप्टन अभिनंदन के साथ जो करने की हिम्मत न जुटा सका

सितंबर 2008 में मालेगाँव की एक मस्जिद के पास हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बाँधे गए विस्फोटक से धमाके को अंजाम दिया गया था। एटीएस ने इस मामले में शुरुआती जाँच की थी। तीन साल बाद 2011 में इस केस को एनआईए के पास ट्रांसफर किया गया था। मालेगाँव धमाका मामले में अब एनआईए की स्पेशल कोर्ट सुनवाई कर रही है।

क्या सनातन विरोध की जड़ में कांग्रेस? “बेलगाम” राम विरोधियों मत भूलो राम भक्त भी बेलगाम हो सकते हैं

 

सुभाष चन्द्र

सनातन धर्म की विरोध की जड़ में कांग्रेस और समूचा “सेकुलर” विपक्ष है और उसकी प्रेणास्त्रोत सोनिया गांधी है जिसका हिन्दू धर्म के विरुद्ध अभियान शुरू हुआ था “साम्प्रदायिकता हिंसा बिल, 2012” से।  

आज राहुल “कालनेमि” खुल कर हिन्दू और हिंदूवादियों को ख़त्म करने की बात करता है, भारत माता पर सवाल खड़ा करता है, हिन्दू धर्म का अपमान करने वाले ईसाई पादरी पोनैया से प्रवचन सुनता है। DMK खुल कर सनातन धर्म को मलेरिया डेंगू और कोढ़ बता कर उसे ख़त्म करने की बात करती है और कांग्रेस उसके साथ गठबंधन में है। 

चाहे स्वामी प्रसाद मौर्य का सनातन धर्म के खिलाफ विषवमन हो या लालू यादव के पोस्टर में राम मंदिर को गुलामी का प्रतीक कहा जाए, सोनिया गांधी या कांग्रेस का कोई नेता मुंह से एक शब्द विरोध में नहीं बोलता। लालू यादव चुप है, अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद के बयानों को निजी राय बता कर पल्ला झाड़ लेता है। 

लेखक 
तेजस्वी यादव कहता है कि मन्दिर जाने से किसी भूखे का पेट नहीं भरता, कोई पंडित इलाज नहीं करता। 

इस तरह की सनातन विरोधी बकवास सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को खुश कर उनकी वोट लेने की होड़ में दिए जा रहे हैं। लेकिन ये सनातन विरोधी भूल रहे हैं कि मुसलमान भी इन सनातन विरोधियों को ही नहीं बल्कि अपने ही मजहब में कट्टरपंथियों की दूषित मानसिकता को समझने लगी है। हालांकि उनका अनुपात लगभग शून्य ही है। और जिस दिन इनका अनुपात बढ़ गया, यही कौम इनके लिए जी का जंजाल बनने वाली है। हिन्दू से ज्यादा उग्र यही कौम होगी। राम मन्दिर बनने से मुसलमानों में यह बात घर कर रही है कि निर्णय देते समय मुसलमानों को भी मस्जिद के लिए जगह दी थी, हिन्दू तो अपना मंदिर बना रहे हैं, लेकिन मस्जिद का कोई अतापता नहीं।   

कल शरद पवार के प्यादे जीतेन्द्र आह्वाड ने सभी सीमाएं लांघ कर भगवान राम का मान मर्दन किया लेकिन शरद पवार चुप है। MVA का कोई भी नेता बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि अब सनातन प्रेमियों दे बढ़ते विरोध के कारण माफ़ी मांग ली है। क्योकि जो विष उगलना था, उगल दिया।

बड़ा सीधा सा सवाल है कि आप यदि भगवान राम, सनातन धर्म और हिन्दुओं के अपमान करने के लिए “कानून हाथ में लेकर” आग उगल सकते हो तो जो राम भक्त आपकी बातों से आहत होते हैं, वो क्या कानून हाथ में लेकर आपका न्याय सड़कों पर नहीं कर सकते या उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। सनातन पर नितरोज हो रहे प्रहारों को पुलिस, सरकार और कोर्ट सभी चुप्पी साधे हुए हैं, क्यों? क्या ये सब सनातनियों के धैर्य के टूटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 

एक किस्सा याद कीजिए जब 2015 में फ्रांस में चार्ली हेब्डो मैगज़ीन में इस्लाम के विरुद्ध एक कार्टून छप गया था तब किस तरह की प्रतिक्रिया हुई थी। और ऐसे ही मामले दुनिया और भारत में न जाने कितने हो चुके हैं। तस्लीमा नसरीन के नॉवल पर किस तरह आगजनी की गई थी, यह सबको याद होगा।

परंतु हिन्दू विरोधी अपनी “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की आड़ में हिन्दुओं के खिलाफ पूरी तरह बेलगाम हुए अनाप शनाप बकवास करते है। They are streching the limits of tolerance of Hindus लेकिन भूल जाते हैं कि यदि उनकी भी सहनशीलता की एक सीमा है और वे अगर उस सीमा को तोड़ कर सड़कों पर उतर आए तो क्या हो सकता है।

सबसे बड़ी समस्या है कानूनी प्रक्रिया में लेटलतीफी की जिसकी वजह से ऐसे लोग बचे रहते हैं क्योंकि उन्हें पता है वर्षों तक कुछ नहीं होने वाला। जो लोग अपनी कौम के अपमान को सहन नहीं करते, वो हाथों हाथ हिसाब चुकता कर लेते हैं।

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‘राम मांसाहारी, खाने के लिए करता था शिकार’ – इंडी गठबंधन नेता जितेंद्र आव्हाड
सबा नकवी के लिए राम मंदिर बकवास चीज: कहा- सब अयोध्या में माथा टेक रहे, हमारा मजाक बन रहा

अब शायद समय आ गया है जब हिन्दुओं को भी अपने आराध्य और अपने धर्म का अपमान करने वालों को तुरंत जवाब देने के लिए तैयार होना होगा। Enough is Enough - सारा कलेश मुस्लिम वोट बैंक का है जिसका जवाब देने के लिए हिन्दुओं को और संगठित होना होगा।

‘राम मांसाहारी, खाने के लिए करता था शिकार’ – इंडी गठबंधन नेता जितेंद्र आव्हाड

शरद पवार के साथ जितेंद्र आव्हाड
अयोध्या में राम मन्दिर के जीर्णोद्वार होने पर राम विरोधियों द्वारा जहर उगला जा रहा है, जनता को विवश करता है कि "क्या विपक्ष एक भी वोट लेने का अधिकार रखते हैं?" जो विपक्ष जनता की नब्ज नहीं पढ़ सकता, फिर किस अधिकार से जनता से वोट मांगता है? ज्ञात हो, 2014 चुनावों से पूर्व किसी भी चुनावी रैली/कॉर्नर मीटिंग तक में राम नाम का साहस नहीं था, जबकि खुले मंच से बाबरी की आवाज़ बुलंद कर वोट मांगे जाते थे, समय ने करवट ली, भाजपा की हर रैली में "जय श्रीराम" के नारे लगते हैं। 

विपक्ष ने रामजन्मभूमि मन्दिर पर सीमा से बाहर जाकर मुद्दे को लटकाने, भटकाने और तथ्यों को कोर्ट से छुपा कर जनता को भ्रमित करता रहा। लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर, छुपाये गए उन्ही तथ्यों को उजागर कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करते ही विपक्ष को पटखनी मिलनी शुरू से विपक्ष को सिवाए सनातन विरोध के कुछ नहीं सूझ रहा, जो इनके पतन का मुख्य कारण बन रहा है। क्योकि जो देश, नेता अथवा पार्टी ने इतिहास को भुला देती हैं, उसके पतन को कोई नहीं रोक नहीं सकता। जिसे समूचा विपक्ष नहीं समझ रहा। जिस तरह सनातन विरोधी सनातन के विरुद्ध बक रहे हैं, किसी अन्य मजहब के विरुद्ध बोल कर दिखाएं।   

भगवान राम मांस खाते थे। भगवान राम बहुजन समाज के थे। यह दोनों बातें NCP नेता जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने कही हैं। उनके इस बयान पर महाराष्ट्र बीजेपी के नेता राम कदम ने गिरफ्तारी की माँग की है। राम कदम ने कहा कि इंडी गठबंधन के नेताओं द्वारा हिंदुओं को उकसाने का काम किया जा रहा है।

महाराष्ट्र बीजेपी नेता राम कदम ने इस संबंध में पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर जितेंद्र आव्हाड के उस वीडियो को मँगवाया है, जिसमें वो भगवान राम के मांस खाने का जिक्र कर रहे। राम कदम ने कहा कि महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार में हिंदू धर्म का अपमान करने वालों को सजा मिलेगी।

जितेंद्र आव्हाड ने शिरडी में अपनी पार्टी के अध्ययन शिविर में कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया, “भगवान राम बहुजनों के राजा थे और मांसाहारी थे।” इसके बाद से ही उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इतिहास नहीं पढ़ते और राजनीति में सब कुछ भूल जाते हैं। राम हमारा है। हम बहुजनों का है। जो खाने के लिए शिकार करता था… राम कभी शाकाहारी नहीं था। वह मांसाहारी थे।”

जितेंद्र आव्हाड से जब मीडिया ने उनके बयान को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मीडिया पर ही सवाल दाग दिया कि जो आदमी 14 साल तक जंगल में रहा, वह शाकाहारी कैसे रह सकता है। एनसीपी विधायक की भाषा भी भगवान राम को लेकर तू-तड़ाक वाली रही। उन्होंने कहा, “खाते क्या थे राजा राम? राम क्षत्रिय था। क्षत्रियों का खाना ही मांसाहारी होता है।”

बवाल को शांत कराने या माफी माँगने के बजाय जितेंद्र आव्हाड ने इस मुद्दे को और तूल दिया। इस कंर्टोवर्सी को लेकर जब उनसे पूछा गया कि तो वो तैश में आकर बोले, “क्या कंर्टोवर्सी? राम का खाना क्या था? कोई बता दे कि राम मैथी की भाजी खाता था?”

जब उनसे मीडिया ने पूछा कि क्या आप अपने कहे पर कायम रहेंगे, तो पूरे जोश से जितेंद्र आव्हाड बोले, “हैं बिल्कुल। अरे बिल्कुल कायम हैं यार। क्या आप भारत को शाकाहारी बनाना चाहते हैं? इस देश के 80 प्रतिशत लोग जो आज भी माँसाहारी हैं, वो राम भक्त ही हैं न।”

NCP नेता जितेंद्र आव्हाड इंडी गठबंधन का हिस्सा है। यह वही गठबंधन है, जिसके नेता आए दिन राम मंदिर, अयोध्या, 370 आदि पर आग उगलते रहते हैं। मंदिर को मानसिक गुलामी का मार्ग बताते हैं लेकिन खुद क्रिसमस मनाते पाए जाते हैं।

‘The Kerala Story बनाने वाले को सरेआम फाँसी देनी चाहिए’: शहीद इशरत जहाँ एंबुलेंस सेवा की शुरु करने वाले NCP नेता जितेंद्र आव्हाड

             निर्माता विपुल अमृतलाल शाह, निर्देशक सुदीप्तो सेन और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड (बीच में)
शरद पवार को अपनी पार्टी की ओर ध्यान देना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि 
विधायक जितेंद्र आव्हाड की वजह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी क्षेत्रीय पार्टी भी न रहे। राष्ट्रीय दर्जा तो समाप्त हो ही चूका है। पार्टी के नेता ऐसी ऊल-जलूल बात करते रहे, फिर वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब पार्टी केवल नाम की ही रह जाएगी। जनता की नब्ज को पढ़ लो। तुष्टिकरण और छद्दम धर्म-निरपेक्षता के दिन लदने शुरू हो गए हैं। जितना The Kerala Story का विरोध किया जाता रहेगा, जनता उनको आतंकवाद समर्थक की सूची में डाल चुनावों में उस नेता को ही नहीं बल्कि पार्टी को धूल चटाने का मन बना रही है। 

शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के निर्माता को सार्वजनिक तौर पर फाँसी देने की डिमांड की है। अतीत में हिंदू त्योहारों को दंगों का कारण बता चुके आव्हाड ने कभी आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत भी की थी। हाल में जब पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था तो उनके समर्थन में इस्तीफा देने वालों में भी आव्हाड थे।

जितेंद्र आव्हाड ने कहा है, “द केरल स्टोरी के नाम पर एक राज्य और वहाँ की महिलाओं को बदनाम किया जा रहा। आधिकारिक आँकड़ा 3 का था, लेकिन इसे 32000 के तौर पर पेश किया गया। इस काल्पनिक फिल्म को बनाने वाले को सार्वजिनक रूप से फाँसी देना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है जबकि इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

इससे पहले जितेंद्र आव्हाड ने एक ट्वीट में केरल की साक्षरता समेत अन्य मुद्दों का जिक्र करते ‘द केरल स्टोरी’ को ‘झूठी फिल्म’ करार दिया था। उन्होंने लिखा था फिल्म में जैसा दिखाया गया है, सच्चाई उसके उलट है। 32000 महिलाओं का आँकड़ा फिल्म चलाने के लिए बताया जा रहा है। इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि महिलाएँ मूर्ख हैं और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता। फिल्म में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर दिखाया गया है। यही फिल्म की सच्चाई है। इस तरह की फिल्में नफरत और हिंसा फैलाकर चुनाव जीतने के लिए बनाई जाती हैं।

2016 में मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इसकी लॉन्चिंग में भी आव्हाड भी शामिल हुए थे। यही नहीं, आव्हाड हिंदुओं के प्रमुख त्योहार राम नवमी और हनुमान जयंती को दंगों की वजह भी करार दे चुके हैं। न्होंने कहा था कि लगता है जैसे रामनवमी और हनुमान जयंती सिर्फ दंगों के लिए ही मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ बैन

उत्तर प्रदेश में ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री हो गई है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है। ममता ने कहा है कि यह फैसला राज्य में नफरत और हिंसा को रोकने तथा शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।
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‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर ISIS में भेज दिया जाता है। फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है।

‘पत्थर क्या समझेगा, उसकी पूजा मत करो’: बारामती में लगा ‘येशु का दरबार’, कहा- ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी रैलियों से जुड़ो

महाराष्ट्र के बारामती में 'येशु का दरबार', हिन्दू धर्म का अपमान
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार के क्षेत्र बारामती में प्रार्थना सभा के नाम पर ‘यीशु का दरबार’ लगाया गया। कार्यक्रम में ईसाई प्रचारक वहाँ मौजूद लोगों से ईसाई धर्म से जुड़ने का आह्वान करते हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया के हस्तक्षेप के बाद कार्यक्रम का आयोजन तीसरे दिन नहीं हो सका।

कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय पादरी सुनील जाधव ने किया था और ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। जाधव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “ईसाई धर्म में विश्वास करो। यीशु के अस्तित्व में विश्वास करो। अगर आप अभी बदलते हैं तो ही आप देश भर में कई लोगों को बदल पाएँगे। आप नहीं जानते लेकिन ऐसा हो सकता है कि हम ‘भारत जोड़ो’ जैसी यात्रा में शामिल हो जाएँ और देश भर में रहने वाले लोगों को ईसाई धर्म के बारे में विश्वास दिला सकें।”

अब राहुल गाँधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' पर शंका व्यक्त की जा रही है कि "क्या यात्रा ईसाई मिशनरी के सहयोग से ईसाईकरण के प्रसार और विस्तार के लिए हो रही है?" दूसरे यह भी शंका चर्चा में है कि अधिकतर परिवार भक्त ईसाई बने हुए हैं। 

तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन का आयोजन शहर के मिशन हाई स्कूल में 8 दिसंबर, 2022 को किया गया था। कार्यक्रम में ज्यादा लोग उपस्थित नहीं थे और 30-35 लोगों के मैदान में आने के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ। हालाँकि वहाँ 300 लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई थी।

वहीं कार्यक्रम में मौजूद सिस्टर मर्सी ने कहा कि वे सभी लोग जो इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभु द्वारा चुना गया है और जो नहीं आए, वह प्रभु की इच्छा से नहीं आए हैं। कई गरीब हिन्दू महिलाओं (साड़ी, बिंदी और सिंदूर पहने हुए) को इस कार्यक्रम में देखा जा सकता था। ऑपइंडिया ने इस कार्यक्रम का वीडियो भी बना लिया था।

ईसाई महिला हिंदू महिलाओं से कह रही है कि ‘मूर्ति पूजा’ की
कोई अहमियत नहीं है
 इस बीच, इस कार्यक्रम में मौजूद ईसाई महिलाओं ने अन्य महिलाओं को ईसाई मजहब अपनाने का प्रलोभन दिया। वहाँ मौजूद एक महिला ने कहा, “ईश्वर अदृश्य है। हमें उसे महसूस करना चाहिए। पत्थरों (मूर्तियों) की पूजा नहीं करना चाहिए, जैसे हिंदू करते हैं। वह पत्थर क्या समझेगा? हम मनुष्य पापों से घिरे हुए हैं। अपनी आने वाली पीढ़ियों को पापों से मुक्त करने के लिए, हमें यीशु की पूजा करनी चाहिए।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘प्रोफेट’ डॉ अनीश विजगत ने दावा किया कि वह सिर्फ एक ‘प्रोफेट’ नहीं बल्कि एक बिशप हैं और 300 से अधिक प्रचारक उनके पुणे स्थित एनजीओ ‘ग्लोरियस इवेंजेलिकल प्रोफेटिक’ में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने से पहले वह एक ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकारी’ और ‘भ्रष्टाचार-विरोधी अधिकारी’ थे। हालाँकि, उनके सोशल मीडिया पेज के अनुसार, वह दो गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य हैं, जिनका नाम ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया और एंटी करप्शन एंड मीडिया इन्वेस्टिगेशन है।

वहीं कार्यक्रम के दौरान सिस्टर मर्सी को लोगों से डोनेशन माँगते देखा गया।

सुरक्षा कारणों से नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देने पर सहमत हुए स्थानीय ईसाइयों में से एक ने कहा कि पादरी सुनील जाधव एक स्वयंभू पादरी हैं और उन्होंने अपने घर की छत पर अपना चर्च बनाया है। यह कार्यक्रम क्रिसमस से पहले तीन दिन आयोजित किया जाना था, जिसमें से एक दिन इसका आयोजन मिशन हाई स्कूल में किया जाना प्रस्तावित था और। वहीं कार्यक्रम को दो दिन ‘ज्येष्ठ नागरीक संघ’ नामक एक प्रसिद्ध सार्वजनिक सामुदायिक हॉल में किया जाना निर्धारित था।

10 दिसंबर की सुबह ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर लगा ताला

‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के प्रशासक एम डब्ल्यू जोशी से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि ईसाइयों ने यह कहकर कार्यक्रम के लिए हॉल लिया था कि वे प्रार्थना सभा आयोजित करना चाहते हैं और उनके पास इसके लिए कोई जगह नहीं है।

धर्मांतरण के प्रयासों और पोस्टर पर पादरी द्वारा किए गए झूठे दावों के बारे में पूछने पर जोशी ने कहा कि वे लोग सिर्फ एक साथ प्रार्थना करने के लिए जगह चाहते थे। हालाँकि, ऐसा लग रहा था कि संघ के पदाधिकारी को आयोजकों के उद्देश्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आयोजन के तीसरे दिन शनिवार (10 दिसंबर, 2022) को ऑपइंडिया द्वारा जोशी से बात करने के बाद, सभा को रद्द कर दिया गया और कार्यक्रम स्थल ‘ज्येष्ठ नागरिक संघ’ के गेट पर ताले लगे देखे जा सकते हैं।

वहीं आरएसएस के एक स्थानीय सदस्य मुकुंद कुलकर्णी ने महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सब दिखावा है। वे (ईसाई) गरीब और जरूरतमंद लोगों को लुभाते हैं और उन्हें पैसे या बुनियादी सुविधाएँ देते हैं। वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हिंदू धर्म जैसे अन्य धर्मों के गरीब लोग हिंदू धार्मिक देवी-देवताओं से घृणा करें और ईसाई मजहब में विश्वास करना शुरू कर दें। जीसस क्राइस्ट या ईसाई मजहब बुरा नहीं है, वास्तव में, कोई धर्म बुरा नहीं है। लेकिन लोगों को बहला-फुसलाकर, फर्जी दावे करके और धर्म-परिवर्तन के लिए मजबूर करना गलत है।”


शिवसेना की लड़ाई से शरद पवार की नींदें भी उड़ी, भंग किए पार्टी के सभी राष्ट्रीय प्रकोष्ठ

कहावत है कि 'हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी लेकर डूबूंगे' महाराष्ट्र में शिव सेना में लगी आग की गरमाई शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में भी पहुँच गयी है। वैसे महाराष्ट्र सियासत में शरद पवार को काफी मंझा नेता के रूप में जाना जाता है, जिसने सोनिया गाँधी को विदेशी कहकर कांग्रेस छोड़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बना महाराष्ट्र का बेताज बादशाह बनने की लालसा में नए-नए पैतरे चलते रहे, परन्तु भाजपा को सत्ता से दूर रखने कांग्रेस और शिव सेना से समझौता कर महा अखाडी पार्टी बनाई, लेकिन शिव सेना में लगी आग से सरकार ही नहीं गयी, शरद पवार का भविष्य अधर में पड़ गया। 
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने पार्टी के सभी विभागों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी का यह फैसला मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार (MVA) के गिरने के बाद लिया गया है। जिस तरह से शिवसेना का बिखराव सामने आया है तो वहीं अतीत में भतीजे अजीत पवार भी बागी तेवर दिखा चुके हैं। ऐसे में अब NCP राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व में बड़ा बदलाव करने जा रही है।

राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने 20 जुलाई 2022 को ट्वीट कर पार्टी के फैसले के बारे में जानकारी दी। पार्टी के महासचिव प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के अनुमोदन से राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस को छोड़कर, राकांपा के सभी विभाग और प्रकोष्ठ तत्काल प्रभाव से भंग किए जाते हैं।” हालाँकि, पटेल ने पार्टी द्वारा अचानक उठाए गए कदम के कारण का खुलासा नहीं किया।

इस संबंध में पटेल ने सभी प्रकोष्ठ और विभागों के प्रमुखों को पत्र भी जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि राकांपा के सभी विभागों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। यह फैसला राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की सहमति से लिया गया है। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि यह फैसला महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य इकाई पर लागू नहीं होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि यह अहम फैसला 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र में लिया गया है।

एनसीपी शिवसेना के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी। शुरू से ही एनसीपी और शिवसेना के नेताओं के बीच मतभेद रहे हैं। शिवसेना सांसद संजय जाधव ने एनसीपी पर आरोप लगाया था कि वह शिवसेना को कमजोर कर रही है। राकांपा के दखल से वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते परभणी से शिवसेना सांसद संजय जाधव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा तक दे दिया था। इसका कारण जिंतुर नगरपालिका में एनसीपी का दखल बताया जा रहा था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा था। संजय जाधव ने अपने पत्र में कहा था कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इस आधार पर उन्हें सांसद बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

महाराष्‍ट्र में सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और झटका लग सकता है और इस बार शिवेसना पर उनका दावा ही हाथ से निकलने की सम्भावना नजर आ रही है। दरअसल, शिंदे गुट ने पार्टी चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है। एकनाथ शिंदे समूह ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिह्न को आवंटित करने की माँग की है।

मंच पर बैठे मंत्री जयंत पाटिल और धनंजय मुंडे के सामने NCP नेता अमोल मितकारी ने खुलेआम हिंदू रीति-रिवाजों का उड़ाया मजाक

                            अमोल मितकारी द्वारा पुजारी की नकल करने पर ठहाका लगाते धनंजय मुंडे
महाराष्ट्र (Maharashtra) में हिंदुओं (Hindus) का लगातार मजाक उड़ाया जा रहा है। राज्य में शरद पवार (Sharad Pawar) की पार्टी एनसीपी के एमएलसी अमोल मितकारी (NCP MLC Amol Mitkari) ने 19 अप्रैल 2022 को पश्चिम महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर में एनसीपी परिवार संवाद यात्रा के दौरान रैली में शादियों में किए जाने वाले कन्यादान और हिंदू रीति-रिवाजों का मखौल उड़ाया। यहीं नहीं, उन्होंने झूठे मंत्र और उनके झूठे अर्थ भी बताकर ब्राह्मणों को अपमानित किया।

 

दरअसल, लाउडस्पीकर से अजान विवाद के बीच मनसे चीफ राज ठाकरे (MNS Chief Raj Thackeray) ने राज्य सरकार को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है तो उनकी पार्टी अजान की तुलना में दोगुनी आवाज में मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा बजाएगी। इस बीच अब राज ठाकरे को जबाव देने के लिए अमोल मितकारी ने सबसे पहले हनुमान चालीसा का पाठ किया और कहा, “राज ठाकरे को हमें हमारे धर्म का प्रचार करने की आवश्यकता नहीं है। लाउडस्पीकर लगाने से पहले उन्हें पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि क्या वह हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मुझे पूरी हनुमान चालीसा याद है और मैं इसका पाठ कर सकता हूँ।”

मितकारी ने हनुमान चालीसा के कुछ छंदों को पढ़ा भी। इस पर उनकी प्रशंसा करते हुए एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जयंत पाटिल (Jayant Patil) ने उन्हें मारुति स्तोत्रम का पाठ करने के लिए कहा। इस पर मितकारी ने मारुति स्त्रोतम की जगह रामरक्षा स्तोत्रम का एक श्लोक पठा, जिसमें भगवान हनुमान का वर्णन किया गया है। जब इसके लिए उनकी तारीफ हुई तो उन्होंने संक्षिप्त रामायण के श्लोक का पाठ किया। इसमें केवल चार पंक्तियों में भगवान राम की पूरा कथा का वर्णन किया गया है। इसके अंत में मितकारी ने पुजारी की नकल करते हुए कहा, “अपनी आँखों में जल डाल दो।”

इतना सुनते ही मंच पर बैठे जयंत पाटिल और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ठहाके मार के हँसने लगे। हिंदू परंपराओं के प्रति अपनी नफरत को जाहिर करते हुए मितकारी ने कहा, “यह ऐसे किया जाता है। कौन जाने हमारा बहुजन समाज इससे कब उबरेगा?” वो यहीं नहीं रुके। हिंदुओं के प्रति अपनी भड़ास निकालते हुए एनसीपी नेता ने आगे कहा, “आचमन करो। जल छोड़ दो।”

मितकारी ने धनंजय मुंडे को संबोधित करते हुए कहा, “मुंडे साहब, एक बार मैं एक जगह गया था। कन्यादान की रस्म अदा की जा रही थी। लड़की के पिता ने मुझे कुछ देर बैठने को कहा। उन्होंने कहा कि कुछ देर बैठिए कन्यादान चल रहा है। मैंने उनसे पूछा सर, मैंने अन्नदान (भोजन दान), नेत्रदान, रक्तदान आदि के बारे में सुना है। क्या बेटी दान की वस्तु है? उन्होंने कहा कि हाँ बस ऐसे ही है। हमें इस तरह सिखाया गया है। जैसे ही उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा, मैं वहीं एक कुर्सी पर बैठ गया।”

एनसीपी नेता ने कहा, “दूल्हा पीएचडी था और दुल्हन एमए थी।” पुजारी की नकल उतारते हुए अमोल मितकारी ने कहा, “धूपं दीपं नैवेद्यं नमस्कारम। जल को आँखों से लगाओ।” लगातार मंत्रों का जाप करते हुए मितकारी ने कहा, “अपना हाथ मेरे हाथ में दो। अपनी पत्नी का हाथ मेरे हाथ में दो। इसके बाद पुजारी कहता है मैं जो कहूँ वो कहो, मैं अपनी पत्नी को आपको समर्पित करता हूँ। मैं उस दूल्हे के कानों में बुदबुदाया। तुम एक बेवकूफ हो! वह पुजारी आपकी पत्नी को ले जाने के लिए कह रहा है।”

हिंदू परंपराओं का मजाक बनाते हुए अमोल मितकारी ने कहा, “ये लोग आज हनुमान चालीसा के बारे में हमें बता रहे हैं। मेरे भाषण के बाद कई और नेता बोलेंगे। साहेब, अब मैं उद्यापन करूँगा। बस मुझे उचित दक्षिणा मिलनी चाहिए। जैसे ही दक्षिणा मिलेगी मैं गायब हो जाऊँगा।” मितकारी का कहना था कि पुजारी को केवल दक्षिणा चाहिए, बस।

कन्यादान पर फैलाया झूठ

सनातन परंपरा में कन्यादान का बड़ा महत्व है। कन्यादान संस्कृत शब्द है, जो कन्या+आदान से मिलकर बना है। इसमें कन्या का अर्थ लड़की है तो आदान का अर्थ प्राप्त करना होता है। अर्थात शादी समारोहों में विवाह के दौरान दूल्हा अपने परिवार में लड़की को प्राप्त करने के लिए सहमत होता है। हालाँकि, मितकारी ने इसे किसी प्रकार का दान समझकर महिलाओं का विरोध किया।

इतना ही नहीं, एनसीपी के एमएलसी ने हाथ में हाथ लेने की बात पर झूठ फैलाया। विवाह की रस्मों के संकल्प की शुरुआत करते हुए दुल्हन, उसके माता-पिता और दूल्हा हाथों को मिलाते हैं। अमोल मितकारी ने झूठ फैलाया कि पुजारी जोड़े का हाथ अपने हाथ में लेता है और दूल्हे को अपनी पत्नी को पुजारी को सौंपने के लिए कहता है।

‘मोदी को अंगार लगा सुलगा डालो’: बुर्का के समर्थन में NCP, हिजाबी महिला ने की पीएम की हत्या वाली बात, FIR दर्ज

  NCP के बुर्का समर्थित विरोध प्रदर्शन में बुर्का पहली महिला ने उगला जहर (फोटो साभार: TV9 Marathi/Twitter)
भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

दूसरे, CAA प्रोटेस्ट से लेकर अब इन हिजाब की आड़ में हो रहे उपद्रव से मोदी विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण दे रहे हैं कि मोदी विरोधियों को न CAA से कुछ लेना है, न ही कृषि कानूनों से और अब नए उपद्रव हिजाब से लेना देना है, बल्कि किसी न किसी बहाने से देश में अराजकता फैलाकर मोदी को बदनाम करना है।  

सोशल मीडिया पर अभी एक वीडियो वायरल है। यह वीडियो बुर्का/हिजाब के समर्थन में पुणे में शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) द्वारा आयोजित एक ‘विरोध’ प्रदर्शन का है। इसमें एक महिला को कहते हुए सुना जा सकता है, “कर्नाटक में चार दिन से स्कूल, कॉलेज सब बंद हो गए हैं। बहुत बड़ी परेशानी है। यह अचानक कुछ भी निकालता है मोदी कायदा-कानून। ये मोदी को सब अंगार लगा कर सुलगा डालो।”

अब इस मामले में केस दर्ज कराया गया है। यह केस महाराष्ट्र के RSS के सह संयोजक पीयूष जगदीश कश्यप ने करवाई है। उन्होंने पीएम के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने के लिए महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सायबर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि महिला ने पीएम मोदी के खिलाफ धमकी भरा और अपमानजक शब्द का इस्तेमाल किया।

 

जगदीश ने अपनी शिकायत में उस वीडियो का यूट्यूब लिंक और सीडी भी उपलब्ध कराई है। हालाँकि अब वह वीडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है। RSS कार्यकर्ता ने कहा कि इस तरह की भाषा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उस पोस्ट के खिलाफ भी नफरत पैदा करती है। उन्होंने कहा कि वीडियो देख कर साफ तौर पर उसका इरादा पता चलता है कि वह जनता के बीच पीएम मोदी की अच्छी छवि को धूमिल करना चाहती है। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और वह भी इसी तरह की व्यवहार कर सकते हैं।

10 फरवरी 2022 को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में बुर्का (जिसे लोग हिजाब भी कह रहे हैं, जबकि दोनों में अंतर है) पहनने वाली मुस्लिम लड़कियों के समर्थन में महाराष्ट्र के पुणे जिले में प्रदर्शन किया। एनसीपी की पुणे इकाई के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने भगवा दुपट्टा डाले उन लड़कों पर निशाना साधा, जिन्होंने बुर्के का विरोध किया था।

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उन्होंने कहा, “कर्नाटक के उडुपी में एक मुस्लिम लड़की का कुछ दिन पहले कई दक्षिणपंथी युवकों ने पीछा किया था। इस घटना से भारतीयों के सिर शर्म से झुक गए हैं।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जगताप ने शिक्षण संस्थानों में धर्म और राजनीति लाने के लिए भाजपा सरकार की भी आलोचना की। हालाँकि बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए वह यह भूल गए कि कर्नाटक में बुर्का विवाद की शुरुआत सबसे पहले आठ मुस्लिम लड़कियों ने की थी, जिन्होंने कॉलेज की यूनिफॉर्म के नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया था।