दारुल उलूम देवबंद ने इस्लामिक मिशनरी आंदोलन तबलीगी जमात (tablighi Jamat) को ‘आतंकवाद का प्रवेश द्वार’ बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने के सऊदी अरब सरकार के फैसले का विरोध किया है। देवबंद के मुख्य मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सऊदी अरब से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मुस्लिमों के लिए गलत संदेश जाएगा।
भारत में इस्लामिक आतंकवाद के पैर पसारने के बाद से ही तब्लीग और मदरसों पर आतंकवाद को प्रोत्साहित करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन छद्दम सेक्युलरिस्ट्स इसे इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाकर तुष्टिकरण की सियासत करते रहे। लेकिन अब उसी काम को सऊदी अरब द्वारा अंजाम देने से राष्ट्रप्रेमियों के आरोप को सत्य सिद्ध कर दिया है। अब भारत में पल रहे छद्दम सेक्युलरिस्ट्स क्यों चुप हैं? देवबंद के सिवाए किसी ओर से कोई विरोध नहीं हो रहा, क्यों? कहाँ गए समस्त कट्टरपंथी? क्या सऊदी अरब द्वारा तब्लीग पर प्रतिबन्ध लगाने से इन छद्दमों के इस्लाम पर खतरा नज़र नहीं आ रहा?
यह पहली बार है जब देवबंद के इस्लामिक मदरसा ने सऊदी सरकार की खुलेआम निंदा की है। नोमानी ने तबलीगी जमात पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। साथ ही दावा किया कि जमात दीन (विश्वास) फैलाने का काम करने का काम करता है। इसके साथ ही देवबंद ने सऊदी सरकार के फैसले को पश्चिमी देशों की साजिश करार दिया है। उसका आरोप है कि जमात को बदनाम किया जा रहा है।
वहीं इस मामले में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मुख्यालय ने इस मामले में कहा है कि सऊदी का निर्णय प्रभावशाली पश्चिमी ताकतों के द्वारा लिया गया है, जो कि रियाद की मुस्लिम उम्मा से सदियों पुराने जुड़ाव को खत्म करना चाहता है। तब्लीगी जमात के प्रवक्ता समीरुद्दीन कासमी ने अपने सदस्यों का बचाव किया और कहा कि हमारा आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है।
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