केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को संसद में बजट 2024 पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए टैक्स को सिंपल रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के रोगियों को राहत देते हुए उनसे जुड़ी 3 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म किया जाएगा। मोबाइल फोन के उत्पादन में भारत में 3 गुना बढ़ोतरी हुई है, इस पर पहले से कम कर के 15% कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी।
साथ ही अंतरिक्ष और रक्षा से जुड़े 25 मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म की जाएगी। चमड़ा और टेक्सटाइल के एक्सपोर्ट पर भी बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) कम की जाएगी। उन्होंने कॉम्प्रिहेंसिव इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की समीक्षा का भी ऐलान किया। फाइनेंस बिल के तहत चैरिटी के लिए टैक्सेशन के रेट को कम किया जाएगा। TDS भरने में देरी पर अब आपराधिक मामला नहीं बनेगा। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों को भी TDS में बड़ी छूट प्रदान की गई है। ये अब 1% से सीधा 0.1% हो जाएगा।
अब वेतन के TDS में ही TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) को समायोजित किया जा सकेगा। स्टार्टअप निवेशकों को फायदा देते हुए एंजेल टैक्स को खत्म कर दिया गया है। ये गैर-सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा शेयर जारी करने के माध्यम से जुटाई गई पूंजी पर लगाया जाता है। दो तिहाई करदाताओं ने ‘न्यू टैक्स रिजाइम’ के तहत विकल्प चुना है। स्टैण्डर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपए से 75,000 रुपए तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही नए टैक्स स्लैब की भी घोषणा की गई है।
Sitharaman: I propose to increase monetary limits for filing appeals related to direct taxes, excise and service tax in the tax tribunal, High Courts and the Supreme Court to ₹60 lakh, ₹2 crore and ₹5 crore respectively.
— Bar and Bench (@barandbench) July 23, 2024
To reduce litigation and provide certainlty in…
3 लाख रुपए तक की आय पर 0%, 7 लाख तय की आय पर 5%, 10 लाख तक की आय पर 10%, 12 लाख तक की आय पर 15%, 15 लाख तक की आय पर 20% और इससे ऊपर की आय पर 30% टैक्स लगेगा। वहीं कुछ फाइनेंसियल असेट्स पर शॉर्ट टर्म गेन पर 20% टैक्स लगेगा। 1 साल से अधिक रखे गए फाइनेंसियल असेट्स को अब लॉन्ग टर्म माना जाएगा। सोना और चाँदी पर भी कस्टम ड्यूटी अब 6% कर दिया गया है।
63000 गाँवों का विकास, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, छोटे कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार
‘विकसित भारत’ के लिए मोदी सरकार 9 प्राथमिकताएँ तय की हैं, जिनसे सबको मौका मिले – कृषि में उत्पादकता एवं लचीलापन, रोजगार एवं कौशल, समावेशी मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक न्याय, विनिर्माण एवं सेवाएँ, शहरी विकास, आपातकालीन सुरक्षा, बुनियादी ढाँचा, नवाचार अनुसंधान एवं विकास, अगली पीढ़ी के सुधार। शिक्षा, रोजगार एवं कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
कृषि अनुसन्धान के क्षेत्र में मोदी सरकार ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु के हिसाब से फसलों को विकसित करने के लिए एग्रीकल्चर रिसर्च सेटअप की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार और बाहर से विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी, प्राइवेट सेक्टर को भी फंडिंग मिलेगी। 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही 10,000 बायो इनपुट रिसॉर्स सेंटर स्थापित किए जाएँगे।
दालों एवं तिलहन की उत्पादकता, रख-रखाव और बाज़ार के लिए रणनीति बनाई जा रही है। रोजगार एवं कौशल विकास में महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कामकाजी महिला हॉस्टलों एवं शिशु गृहों की स्थापना की जाएगी। प्रतिवर्ष 25,000 छात्रों के लिए 7.50 लाख रुपए ऋण की व्यवस्था कौशल विकास के लिए की जाएगी। घरेलू संस्थानों में उच्चतर शिक्षा के लिए 10 लाख रुपए तक के ऋण पर 3% वार्षिक ब्याज छूट की व्यवस्था की जाएगी।
महिलाओं एवं कन्याओं से संबंधित योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। उत्तर-पूर्व में भारतीय डाक के 100 से अधिक शाखाएँ खोली जाएँगी। आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर बन रहे पोलावरम सिंचाई परियोजना के पूरी होने के बाद देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए कोप्पार्थी और हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए ओरवाकल नोड में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।
‘पूर्वोदय’ के तहत बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का विकास किया जाएगा। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, बोधगया-राजगीर-दरभंगा सड़क के लिए निधि उपलब्ध कराई जाएगी और बक्सर में गंगा नदी पर 26,000 करोड़ रुपए की लागत से पुल बनाया जाएगा। भागलपुर के पीरपैंती में 2400 MW का पॉवर प्लांट 21,400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम योजना’ की घोषणा भी की गई है।
इसके तहत जनजातीय बहुल गाँवों के विकास के लिए कदम उठाए जाएँगे। इससे 63,000 गाँवों में जनजातीय समाज के 5 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। MSME सेक्टर को बैंक लोन में आसानी के लिए नई व्यवस्था लाई जाएगी। मुद्रा लोन को 10 से अब 20 लाख रुपए तक बढ़ाया जाएगा। 50 मल्टी-प्रोडक्ट फ़ूड इरेडिएशन इकाइयाँ स्थापित की जाएँगी। पारंपरिक कारीगरों के लिए ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र PPP मोड में स्थापित किए जाएँगे, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार मिले।

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