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अमेरिका से जैवलिन मिसाइल और आर्टिलरी खरीद रहा भारत, US कॉन्ग्रेस ने मंजूर की $93M की डील: दुश्मन के टैंक से लेकर ठिकाने तक होंगे ध्वस्त

           अमेरिका ने भारत को 93 मिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को दी मंजूरी (फोटो साभार: हिंदुस्तान)
अमेरिका ने भारत के लिए 93 मिलियन डॉलर (लगभग 822 करोड़ रुपए) के रक्षा सौदे को मंजूरी दे दी है। इस पैकेज में भारत को 100 FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स (CLU) और 216 M982A1 एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड्स मिलेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने अमेरिकी कॉन्ग्रेस को इसकी सूचना दे दी है। सौदे में ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स, लाइफसाइकल सपोर्ट, सिमुलेशन राउंड्स और तकनीकी सहायता भी शामिल है।

अमेरिका ने क्या कहा?

DSCA का कहना है कि यह सौदा न सिर्फ भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को भी और गहरा बनाएगा। एजेंसी के मुताबिक, ये हथियार भारत को मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने, अपनी सीमाओं की बेहतर रक्षा करने और क्षेत्रीय खतरों को प्रभावी ढंग से रोकने में मदद करेंगे।
अमेरिका ने साफ किया है कि इस बिक्री से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, किसी ऑफसेट व्यवस्था की जानकारी नहीं है। ऐसा कोई समझौता भविष्य में भारत और निर्माता कंपनियों के बीच अलग से किया जा सकता है।
जेवलिन मिसाइल सिस्टम, जिसे आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन संयुक्त रूप से बनाते हैं, पैदल सेना को लंबी दूरी पर बख्तरबंद लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बनाने की क्षमता देता है। एक्सकैलिबर आर्टिलरी राउंड्स की कीमत करीब 47 मिलियन डॉलर है, जिसे शामिल करने के बाद पूरी डील का मूल्य लगभग 93 मिलियन डॉलर तक पहुँचता है।

क्या है हथियारों की खासियत

FGM-148 जेवलिन एक आधुनिक, कंधे से दागी जाने वाली थर्ड-जेनेरेशन एंटी-टैंक मिसाइल है, जिसे RTX कॉरपोरेशन और लॉकहीड मार्टिन मिलकर बनाते हैं। यह मिसाइल टॉप-अटैक मोड में ऊपर से वार करती है, जहाँ किसी भी टैंक का कवच सबसे कमजोर होता है। इसके कारण यह दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को आसानी से निशाना बना लेती है।
जेवलिन में सॉफ्ट-लॉन्च तकनीक होती है, जिससे इसे इमारतों, बंकरों या किसी बंद जगह के अंदर से भी सुरक्षित तरीके से दागा जा सकता है। एक जैवलिन सिस्टम में एक डिस्पोजेबल लॉन्च ट्यूब और एक रीयूजेबल कमांड लॉन्च यूनिट (CLU) होती है। यह व्यवस्था सैनिकों को तेजी से मिसाइल तैनात करने और फायर करने में मदद करती है।

यह मिसाइल कई युद्ध क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है, सबसे ज्यादा चर्चा यूक्रेन में हुई, जहाँ इसने बड़ी संख्या में रूसी T-72 और T-90 टैंकों को नष्ट किया। आज यह कई देशों की सेनाओं में सक्रिय रूप से इस्तेमाल की जा रही है।

वहीं Excalibur गोले भारतीय तोपखाने को GPS-आधारित बेहद सटीक निशाना लगाने की क्षमता देते हैं। इससे पहले ही वार में लक्ष्य भेदने की संभावना बढ़ती है और अनचाहे नुकसान (collateral damage) कम होता है।

DSCA ने बताया है कि इस सौदे में प्राइमर, प्रोपेलेंट चार्ज, Portable Electronic Fire Control Systems (PEFCS), Improved Platform Integration Kit (iPIK), तकनीकी सहायता, डेटा, और मरम्मत सेवाएँ भी शामिल हैं।

जेवलिन मिसाइल: आधुनिक युद्ध की सबसे भरोसेमंद ATGM

जेवलिन को दुनिया की सबसे घातक एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली माना जाता है। इसकी लगभग 4 किमी की रेंज और 90% से अधिक की सफलता दर इसे खास बनाती है। इसका ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ फीचर सैनिक को लॉन्च के बाद तुरंत सुरक्षित स्थान बदलने की सुविधा देता है।

साथ ही इसका टॉप-अटैक मोड टैंकों को ऊपर से निशाना बनाता है, जहाँ उनकी सबसे कमजोर कवच परत होती है। इन खूबियों के कारण भारतीय सेना को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ महत्वपूर्ण बढ़त मिलती है।

M982 Excalibur: प्रिसिजन आर्टिलरी का गेम-चेंजर

आर्टिलरी सिस्टम की वास्तविक ताकत उसकी मारक दूरी और वारहेड की क्षमता पर निर्भर करती है। Excalibur इन दोनों में बेहतरीन है। GPS-गाइडेंस के कारण यह सामान्य गोले की तरह बिखरकर नहीं गिरता, बल्कि बेहद सटीक बिंदु पर प्रहार करता है।

इसका हाई-एक्सप्लोसिव ब्लास्ट-फ्रेगमेंटेशन वारहेड मजबूत किलाबंदी, भूमिगत बंकर और मोटी कंक्रीट संरचनाओं को भी ध्वस्त कर सकता है। इसके अलावा, इसमें सेंसर-फ्यूज़्ड वारहेड का विकल्प मिलता है जो ऊपर से हमला करके टैंकों को नष्ट करता है।

क्लस्टर-टाइप बमलेट लगाने का विकल्प इसे बड़े क्षेत्र में नुकसान पहुँचाने में सक्षम बनाता है, खासकर दुश्मन की आर्टिलरी, सपोर्ट वाहनों और आगे बढ़ती टुकड़ियों के खिलाफ। सबसे खास बात यह है कि Excalibur छिपी हुई छोटी लेकिन खतरनाक टीमों, जैसे स्नाइपर, मशीन गन पोजिशन या ATGM लॉन्च टीम पर भी बेहद सटीक वार कर सकता है, जो आधुनिक युद्ध में निर्णायक साबित होता है।

सैन्य ठिकाने ही नहीं, अब अस्पतालों से लेकर मंदिरों की भी सुरक्षा में ‘सुदर्शन कवच’ रहेगा तैनात: PM मोदी ने कहा- श्रीकृष्ण के सुदर्शन से मिली प्रेरणा; क्या हिन्दू राष्ट्र का शंखनाद हो गया?

                                                                                                                        साभार - ग्रोक/एआइ
आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले दस साल, यानी 2035 तक, भारत के हर अहम सामरिक और नागरिक ठिकाने को ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत हाई-टेक सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा।

यह सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि अस्पताल, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल, बड़े बाजार और सार्वजनिक भीड़-भाड़ वाले सभी प्रमुख स्थान इसमें शामिल होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि इस मिशन की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से ली गई है। जैसे वह चक्र दुश्मन के वार को रोककर तुरंत पलटवार करता था, वैसे ही यह आधुनिक सुरक्षा कवच भी काम करेगा।

क्या है मिशन सुदर्शन चक्र और कैसे करेगा काम

मिशन सुदर्शन चक्र एक अत्याधुनिक बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसी भी हवाई, ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट हमले को पहले ही पहचानकर उसे निष्क्रिय करना है। इसकी खासियत यह होगी कि यह ‘डिटेक्ट डिफेंड काउंटर अटैक’ के सिद्धांत पर काम करेगा।

इस सिद्धांत के तहत पहले खतरे का पता लगेगा, फिर उसे नष्ट किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर हमलावर पर जवाबी कार्रवाई भी होगी। इसमें रडार नेटवर्क, हाई-स्पीड डेटा प्रोसेसिंग, इंटरसेप्टर मिसाइलें और लेजर डिफेंस सिस्टम शामिल होंगे।

मिशन के तहत देश भर में एकीकृत सुरक्षा ग्रिड बनाया जाएगा, जो सभी बड़े शहरों, संवेदनशील क्षेत्रों और सीमा इलाकों को आपस में जोड़ेगा। जैसे ही किसी भी दिशा से हमला करने वाली मिसाइल, ड्रोन या हवाई जहाज का संकेत मिलेगा, यह ग्रिड तुरंत सक्रिय हो जाएगी।

सेकंडों में खतरे की पहचान होगी, लक्ष्य का ट्रैकिंग होगा और फिर उसे नष्ट करने के आदेश जारी होंगे। इस पूरी प्रक्रिया में AI और मशीन लर्निंग तकनीक का बड़ा योगदान होगा, जो पिछले हमलों के पैटर्न के आधार पर भविष्य के खतरों को भी भांप लेगी।

एस-400 – सुदर्शन से मिली प्रेरणा

इस मिशन की अवधारणा भारतीय वायुसेना के पास मौजूद एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के अनुभव से आई है। भारत ने रूस से 2018-19 में 35,000 करोड़ रुपए  में पाँच एस-400 स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता किया था।

अब तक तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं और बाकी दो 2026 तक आ जाएँगे। इस सिस्टम को भारतीय वायुसेना ने ‘सुदर्शन’ नाम दिया है। एस-400 की ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को निशाना बनाया।

इस ऑपरेशन में सुदर्शन ने 300 किलोमीटर दूर से पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक AEW&C की निगरानी विमान को मार गिराया। यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का अब तक का सबसे लंबी दूरी का सफल हमला था।

इसके अलावा, इस सिस्टम ने दर्जनों ड्रोन और मिसाइल हमलों को भी नाकाम किया। पाकिस्तान के कई कमांड सेंटर, रडार स्टेशन और आतंकी ठिकाने तबाह हुए। इस घटना ने साबित कर दिया कि लंबी दूरी की और तेज प्रतिक्रिया देने वाली एयर डिफेंस प्रणाली देश की सुरक्षा के लिए कितनी अहम है।

2035 तक का लक्ष्य

पीएम मोदी के अनुसार, मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य अगले दस सालों में पूरा होगा। इस अवधि में देश के सभी रणनीतिक और संवेदनशील स्थानों पर यह सुरक्षा कवच लगाया जाएगा।

पहले चरण में सेना के ठिकाने, वायुसेना स्टेशन, नौसेना के बेस, परमाणु संयंत्र, रॉकेट लॉन्च स्टेशन और रक्षा उद्योग केंद्रों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट, अस्पताल, धार्मिक स्थल, बड़े स्टेडियम और भीड़-भाड़ वाले बाजारों को भी इस प्रणाली से कवर किया जाएगा।

इस मिशन के लिए बड़े पैमाने पर घरेलू रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी। इसके लिए सरकार ने ‘प्लस वन नीति’ अपनाने का फैसला किया है, जिसमें हर विदेशी तकनीक के साथ एक भारतीय तकनीक का विकास अनिवार्य होगा।

यानी अगर कोई उपकरण बाहर से खरीदा जाएगा, तो उसका एक स्वदेशी संस्करण भी तैयार किया जाएगा। इससे तकनीकी आत्मनिर्भरता के साथ-साथ निर्यात की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।

क्यों जरूरी है यह मिशन

भारत की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा चुनौतियाँ इस मिशन को बेहद अहम बनाती हैं। एक ओर पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश हैं, जिनसे सैन्य तनाव बना रहता है, वहीं दूसरी ओर ड्रोन और मिसाइल तकनीक का प्रसार आतंकवादी संगठनों तक भी पहुँच चुका है।

हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से कई बार ड्रोन के जरिये हथियार और विस्फोटक भेजे गए हैं। 2021 में जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमला इसका उदाहरण है। इसके अलावा, देश के भीतर भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा खतरे बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसे में सिर्फ फिजिकल सुरक्षा इंतजाम काफी नहीं हैं। एक ऐसी ऑल-इन-वन तकनीक की जरूरत है जो खतरे को दूर से भांपकर तुरंत प्रतिक्रिया दे सके। मिशन सुदर्शन चक्र इस कमी को पूरा करेगा और देश को एक आधुनिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

DRDO बनाएगी 5th जेनेरेशन का विमान ‘AMCA’, निजी कम्पनियाँ भी हो सकेंगी शामिल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी हरी झंडी, फाइटर जेट बनाने को मोदी सरकार ने दिए थे 15000 करोड़ रूपए

            रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA के निर्माण कार्यक्रम का जानकारी एक्स पर साझा की (photo- rmoX)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने वाले कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। ये पाँचवी जेनेरेशन का फाइटर जेट होंगे। इसके जरिए स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मंत्री कार्यालय के एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की गई है।

एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा गया है कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) कार्यक्रम के एक्जीक्यूशन (निष्पादन) मॉडल को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को इसे बनाने की मंजूरी दे दी है। ADA के साथ इस 5th जेनेरेशन फाइटर जेट को बनाने में निजी कंपनियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और योग्यता का उपयोग करके AMCA प्रोटोटाइप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।इससे एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 5th जेनेरेशन वाले AMCA फाइटर जेट के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम की सफलता से भारत को विदेशी फाइटर जेट पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी कंपनियाँ भी नई और अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर सकेंगी। इससे भविष्य में भारत अपने बनाए फाइटर जेट्स अन्य देशों को बेचने की क्षमता पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल के निर्माण के लिए भारतीय कंपनियों के लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जा सकता है। इसके बाद इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने कि लिए भारतीय सरकारी और निजी कंपनियाँ बिडिंग (bidding) में भाग ले सकती हैं। निजी कंपनियाँ ज्वाइंट वेंचर या कंसोर्टियम की तरह भी सम्मिलित हो सकती हैं।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी पर रक्षा मंत्रालय काफी ध्यान दे रहा है। देश पर अमेरिका और रूस से 5th जेनेरेशन का लड़ाकू विमान खरीदने का भी काफी दबाव है। ऐसे में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने वाले इस कार्यक्रम से काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। इसके निर्माण के लिए चुनी गई कंपनियाँ भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।

क्या परमाणु इस्तेमाल कर पाकिस्तान दुनिया के नक़्शे से मिटने की तैयारी कर रहा है?

                                     भारत ने पाकिस्तानी हमलों को किया नाकाम (साभार: India Today)
अपनी जेहादी मानसिकता के चलते पाकिस्तान मस्जिदों को छोड़ मन्दिरों और गुरूद्वारे निशाना बना रहा है। जिनका श्राप पाकिस्तान को उसको अकाल मौत के मुंह में धकेल रहा है। दूसरे, हमास के तरह नागरिकों को निशाना बनाने की घिनौनी और जहरीली सोंच दर्शा रही है। 10 मई की रात को पाकिस्तान ने दिल्ली को निशाना बनाते जो मिसाइल दागी जिसे हरियाणा में गिराने के बाद पाकिस्तान के 3 air base समाप्त कर दिए। और सुबह श्रीनगर, अमृतसर आदि शहरों पर हमला करने पर उसके 3 airjets को बर्बाद करने के बाद अपने परमाणु कमेटी की मीटिंग बुलाना बहुत खतरनाक खेल खेलने की शरारत करने का मन बना रहा है। और अगर पाकिस्तान परमाणु इस्तेमाल करता है निश्चित रूप से पाकिस्तान दुनिया के नक़्शे से अपना नाम मिटाने की ओर कदम उठा लेगा। देखना है भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है।     

ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार (8 मई 2025) को जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में हमास की स्टाइल में हमले किए। पाकिस्तानियों ने ड्रोन उड़ाए, मिसाइलें दागीं, तोपें गरजाईं। मगर भारत की फौज ने आँखें तरेरते हुए सारे हमले नाकाम कर दिए। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से 400-500 एयर अटैक सिर्फ हमले के लिए नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान की ये चाल थी भारत की एयर डिफेंस को चेक करने की। यानी भारत का डिफेंस सिस्टम कितना और कहाँ प्रभावी है और कहाँ कमजोर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की प्लानिंग ये देखने की थी कि पश्चिम की पूरी सीमा पर भारत किस तरह से मुस्तैद है। ये सब 7 मई 2025 को भारत के जबरदस्त ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुआ। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। वो कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हिंदुओं के नरसंहार के जवाब में की गई थी।

ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 16 लोग मरे। फिर उसने भारत के 15 फौजी ठिकानों पर हमले की कोशिश की, लेकिन सारी कोशिशें धरी रह गईं। उल्टा, लाहौर में उनका एक डिफेंस सिस्टम ही खराब हो गया।

पाकिस्तान ने क्या चक्कर चलाया?

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से गुरुवार (8 मई 2025) के हमले भारत की ताकत को टटोलने की चाल थी। पाकिस्तान ने 40 से ज्यादा जगहों पर हमले किए, लेकिन उनके ड्रोन और मिसाइलों में या तो बारूद था ही नहीं, या बहुत कमजोर था। एक सूत्र ने कहा, “दुश्मन ऐसा करके देखता है कि उसका ड्रोन कहाँ बिना पकड़े घुस जाता है। अगर ड्रोन वापस आ जाए, तो उन्हें लगता है कि वहाँ हमारा डिफेंस कमजोर है। अगर पकड़ा जाए, तो समझ जाते हैं कि हमारा सिस्टम टाइट है।”

बहरहाल, पाकिस्तान के हमलों के बाद भारत ने कोई मौका नहीं छोड़ा। हमारे ड्रोन सियालकोट, लाहौर और कराची जैसे बड़े ठिकानों पर मंडराए। डिफेंस सिस्टम चालू किए गए और नियंत्रण रेखा पर जमकर जवाबी फायरिंग हुई।

पाकिस्तान और हमास की दोस्ती

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक तरफ ध्यान देना जरूरी हो जाता है, वो इस साल हमास के कुछ लोग पाकिस्तान और पीओके पहुँचे थे। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर वाले अड्डे और पाकिस्तानी फौज के एक वॉर ट्रेनिंग सेंटर को देखा। ये सेंटर बहावलपुर कोर के नीचे है, जो राजस्थान की सीमा के पास पाकिस्तान का तेज हमला करने वाला दस्ता है।
यही वहीं, फरवरी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े आतंकी रावलाकोट, पीओके में ‘कश्मीर सॉलिडेटरी डे’ के मौके पर जमा हुए थे। वहाँ हमास के एक नेता खालिद काद्दौमी ने ‘अल अक्सा फ्लड’ के नाम से भाषण भी दिया था। भारतीय एजेंसियों को शक है कि ये कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दों को मिलाकर ‘कब्जे के खिलाफ जंग’ का नया ड्रामा रचने की कोशिश थी।

फौजी भाषा में पाकिस्तान की इस चाल को क्या बोलते हैं?

फौजी भाषा में टटोलना यानी ऐसा खेल, जिसमें दुश्मन की डिफेंस को चेक करने के लिए छोटे-मोटे हमले किए जाते हैं। मकसद जमीन जीतना नहीं, बल्कि उसकी ताकत-कमजोरी भाँपना होता है। इस बार पाकिस्तान शायद भारत के रडार की रेंज और जवाब देने की स्पीड को समझना चाहता था।

भले ही इन हमलों से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन मामला गंभीर है। अगर ये टटोलने की चाल थी, तो पाकिस्तान किसी बड़े हमले की प्लानिंग कर सकता है। भारत को हर वक्त चौकस रहना पड़ेगा।