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दिल्ली : केजरीवाल पार्टी टूटी ; मुकेश गोयल ने बनाई ‘इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी’


दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 15 पार्षदों ने इस्तीफा देकर ‘इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी’ नाम से नया गुट बना लिया है। इनमें मुकेश गोयल भी शामिल हैं, जो MCD आप के सदन के नेता थे।

सम्भावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि कुछ विधायको के भी शामिल हो सकते हैं। यह सुगबुगाहट विधानसभा चुनावों के घोषित होने के बाद से ही चल रही थी, जिसके बारे में अरविन्द केजरीवाल भी अच्छी तरह जानते थे। दिल्ली में पार्टी के टूटने का असर पंजाब में भी पड़ने वाला है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इसके पीछे आतिशी का हाथ बताया जा रहा है।

  

शनिवार (17 मई 2025) को गोयल के नेतृत्व में पार्षदों ने नई पार्टी की घोषणा की। गोयल ने इसी साल फरवरी 2025 में आप के टिकट पर आदर्श नगर से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।

आप पार्टी से इस्तीफा देने वाले पार्षदों में हेमनचंद गोयल, दिनेश भारद्वाज, हिमानी जैन, उषा शर्मा, साहिब कुमार, राखी कुमार, अशोक पांडेय, राजेश कुमार, अनिल राणा, देवेंद्र कुमार और हिमानी जैन शामिल है।

पिछले नगर निगम चुनाव से पहले, कुछ नेताओं ने कॉन्ग्रेस पार्टी का दामन छोड़ आप को चुना था। वहीं कॉन्ग्रेस में 25 साल तक पार्षद रहे मुकेश गोयल 2021 में आप में शामिल हुए थे। इससे आप को दिल्ली में एक और बड़ा झटका लगा है, क्योंकि साल 2025 की शुरुआत में विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने आप को हरा दिया था। तब से, आप आंतरिक कलह से जूझ रही है।

कनाडा : महँगाई, भारत से लड़ाई, मंत्रियों की रुसवाई… तय थी जस्टिन ट्रूडो की विदाई: प्रधानमंत्री बनने की रेस में भारतवंशी अनीता आनंद, क्या ‘खालिस्तानी प्रेम’ पर लगेगा ब्रेक?

                  जस्टिन ट्रूडो की जगह के लिए अनीता आनंद भी दौड़ में थीं (फोटो साभार: Financial Express)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 6 जनवरी, 2025 को इस्तीफ़ा देने का ऐलान कर दिया है। ट्रूडो ने कहा कि वह आगामी आम चुनावों में लिबरल पार्टी का चेहरा बनने के लिए पसंदीदा उम्मीदवार नहीं हैं। लिबरल पार्टी से प्रधानमंत्री पद के लिए नए नेता का चयन होने के बाद जस्टिन ट्रूडो अपना इस्तीफ़ा दे देंगे। ट्रूडो के इस इस्तीफे की पटकथा बीते लगभग एक वर्ष से लिखी जा रही थी। इस खबर के बाद अब लिबरल पार्टी के नेताओं में प्रधानमंत्री पद की दौड़ शुरू हो गई है। इस दौड़ में एक भारतवंशी अनीता आनंद भी शामिल हैं।

क्यों ट्रूडो को जाना पड़ा?

जस्टिन ट्रूडो 2015 में पहली बार कनाडा के प्रधानमंत्री बने थे। इस चुनाव में उन्होंने लिबरल पार्टी को बड़ी जीत दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने 2019 और 2021 में भी जीत हासिल की। 2021 की सरकार के लिए उन्हें जोड़-तोड़ करना पड़ा। वह 2013 से ही लिबरल पार्टी के नेता का रोल निभाते आ रहे हैं। जस्टिन ट्रूडो जब प्रधानमंत्री बने थे. तब उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। लेकिन समय के साथ उनके फैसलों और उनकी सरकार की विफलताओं के चलते अब इस्तीफे की नौबत आई है।
ट्रूडो की लोकप्रियता का जायजा लेने वाले एक ट्रैकर के मुताबिक, 2015-16 में लगभग 65% लोग उन्हें पसंद करते थे। 2025 आते-आते 75% लोग उन्हें नापसंद करने लगे हैं। मात्र 22% लोग अभी उनका समर्थन करते हैं। ट्रूडो का विरोध 2020 की कोविड महामारी के बाद तेजी से बढ़ा है। कनाडा में 2020 के बाद घरों की किल्लत, महंगाई, बढ़ता कट्टरपंथ, सुरक्षा चिंताएँ और रोजगार ऐसे मुद्दे रहे हैं, जिन्हें वह नहीं सुलझा पाए। इसके अलावा ट्रूडो की सदारत में लिबरल पार्टी अपने गढ़ रहे चुनाव भी हार गई।
ट्रूडो की सरकार से कुछ दिनों पहले जगमीत सिंह की NDP ने भी समर्थन वापस ले लिया था। इसी के साथ कुछ सांसदों ने उनको पद से हटाने के लिए कोशिश चालू कर दी। जनवरी आते-आते उन पर दबाव बढ़ गया और अब उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा। जस्टिन ट्रूडो ने 2023 के बाद से ही भारत से भी लड़ाई मोल ले ली। उन्होने खालिस्तानियों को खुश करने के लिए भारत से लड़ाई मोल ले ली और आतंकी निज्जर की हत्या का आरोप भारतीय एजेंसियों पर ठोंक दिया। इसके चलते उनकी और थू-थू हुई।

कौन अब रेस में?

कनाडा के नए प्रधानमंत्री की रेस में अब कई लिबरल नेता हैं। कनाडा की पूर्व वित्त मंत्री क्रिश्टिया फ्रीलैंड, बड़े नेता मार्क कारने, वित्त मंत्री डोमिनिक लीब्लांक, पूर्व विदेश मंत्री मेलीना जोली, पूर्व रक्षा मंत्री अनीता आनंद समेत जोनाथन विलकिंसन, करीना गौल्ड आदि प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। इनमें से कई नेताओं ने अपने समर्थन में लोगों को जुटाना भी चालू कर दिया है। उनका नाम सबसे आगे हैं, जिन्होंने दिसम्बर महीने में ट्रूडो की कैबिनेट से इस्तीफ़ा दिया था और ट्रूडो के भी इस्तीफे की माँग की थी।

अनीता आनंद कौन हैं?

ट्रूडो की जगह कनाडा के प्रधानमंत्री पद के लिए अनीता आनंद का भी नाम चल रहा है। अनीता आनंद 2019 में पहली बार सरकार में शामिल हुई थीं। ट्रूडो ने उन्हें 2019 में एक कम चमकधमक वाला मंत्रालय थमाया था। वह कनाडा की पहली हिन्दू कैबिनेट मंत्री थीं। उनको प्रोक्योरमेंट मंत्रालय मिला था, जो कनाडा के लिए बाकी जगह से आपूर्ति जुटाने का काम करता है। इस मंत्रालय का महत्व 2020 में तब और बढ़ गया जब पूरी दुनिया से वैक्सीन जुटानी थीं। इसके चलते अनीता आनंद को काफी प्रसिद्धि मिली।
इसी के चलते 2021 में उन्हें कनाडा का रक्षा मंत्री बना दिया गया। वह यूक्रेन-रूस संघर्ष के मौके पर रक्षा मंत्री रहीं। उन्हें कुछ दिनों के लिए कैबिनेट से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें दिसम्बर, 2024 में दोबारा कैबिनेट में शामिल करके परिवहन और व्यापार मामलों का मंत्री बना दिया गया। अनीता आनंद भारतवंशी है और उनके माता-पिता नाइजीरिया से कनाडा पहुँचे थे। वह कनाडा में ही जन्मी थीं। वकालत की पढ़ाई पढ़ने वाली अनीता आनंद 2013 से ही सांसद हैं। वह ट्रूडो के करीबियों में से एक मानी जाती हैं।

भारत से रिश्तों पर क्या असर?

जस्टिन ट्रूडो के जाने की खबर भारत से रिश्तों के संबंध में बहुत मायने रखती है। भारत पर वह खुले तौर पर दखलअंदाजी और कनाडाई नागरिकों की हत्या के हवा-हवाई आरोप जड़ चुके हैं। भारत भी उन पर राजनीतिक फायदे के लिए राजनयिक रिश्तों की बलि चढ़ाने का आरोप लगाता आया है। हाल ही में दोनों ने एक-दूसरे ने शीर्ष राजनयिकों को भी वापस बुला लिया था। ट्रूडो के जाने के बाद भारत से रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव आने की कोई ख़ास उम्मीद नहीं है, लेकिन हाँ नया प्रधानमंत्री कौन होगा, इस आधार पर थोड़े परिवर्तन हो सकते हैं।
अवलोकन करें:-
कनाडा : मोदी से ‘लड़कर’ मजाक बने पीएम ट्रूडो, घर में ही विरोध के चलते देना पड़ा पद से इस्तीफा, अब क
इससे पहले जब उन्होंने भारत पर आरोप लगाए थे तब भी उनके खिलाफ कनाडा के अंदर से ही आवाजें उठी थीं। कनाडा के कई पत्रकार और नेताओं ने उन्हें लताड़ा था। ट्रूडो ने कोई सबूत भी नहीं दिखाए थे। इसको लेकर भी उन पर प्रश्न उठे थे।

बांग्लादेश में फौज ने सँभाली कमान, बोले जनरल वकार जमान- जल्द बनेगी अंतरिम सरकार: दावा- इस्तीफे के बाद भारत आईं शेख हसीना, लंदन जाएँगी


भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट की आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त माह में हुई देशव्यापी हिंसा के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफ़ा देने की सूचना आ रही है। बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी प्रधानमंत्री आवास में घुस गए हैं।

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये ऐलान बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने मीडिया के आगे किया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शेख हसीना के बाद अब सेना मुल्क में अंतरिम सरकार बनाएगी।

इस संबंध में आर्मी ने देश की प्रमुख पार्टियों के साथ मिलकर बैठक की है। अब 18 सदस्यीय अंतरिम सरकार प्रस्तावित की गई है। सेना इस सरकार को बनाएगी। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने कहा कि जो हत्या हुई उस पर न्याय होगा। हमने सभी दलों से बात की। हमारे बीच एक अच्छी बातचीत हुई है।

उन्होंने बताया, “पीएम शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। हम अंतरिम सरकार का गठन करके शासन करेंगे। हमारे देश का नुकसान हो रहा है। संपत्ति का नुकसान हो रहा है। मुझे दायित्व दीजिए, मैं सब संभाल लूँगा।” सेना प्रमुख ने जमान ने कहा, “आपकी जो माँग है उसे हम पूरा करेंगे। देश में शांति वापस लाएँगे। तोड़फोड़-आगजनी मारपीट से दूर रहिए। आप लोग हमारे साथ मिलकर चलेंगे तो हालात सुधरेंगे। मारपीट हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा। संघर्ष और अराजकता से दूर रहिए।”

बता दें कि मीडिया में सुबह से बांग्लादेश में हो रही हिंसा की खबरों के बीच आज दोपहर बताया गया कि पीएम शेख हसीना ने मिलिट्री हेलीकॉप्टर से उड़ान भर ली है। वह मुल्क छोड़ने से पहले अपना एक भाषण रिकॉर्ड करना चाहती थीं, हालाँकि उनको इसका मौका नहीं मिला। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ उनकी ओर बढ़ने लगी और उन्हें न चाहते हुए भी मुल्क को छोड़ना पड़ा। अब वह भारत के उत्तरपूर्वी इलाके अगरतला में उतरी हैं। सूत्रों से दी जा रही खबर के अनुसार भारत ने उनकी सेफ पैसेज की व्यवस्था की है। आगे वह लंदन जाएँगी।

शेख हसीना ने छोड़ा बांग्लादेश

आरक्षण के नाम पर मुल्क की सड़कों पर उतरी 4 लाख के करीब भीड़ के हिंसक होने से 100 के करीबन लोगों की मौत हो गई है। वहीं सैंकड़ों लोग घायल हैं। रविवार को इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के कारण एक ही थाने में 13 पुलिसकर्मियों की मॉब लिंचिंग हुई थी। वहीं अब तक 10 बिलियन डॉलर इकोनॉमी का नुकसान हो गया है। शेख हसीना के इस्तीफे तक पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगा था। अब सेना की जब अंतरिम सरकार बनने जा रही है तो सेना प्रमुख ने कहा कि कर्फ्यू की कोई जरूरत नहीं, वो खुद सब संभाल लेंगे।

राधिका खेड़ा ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, लिखा- पार्टी में राम नाम लेने वालों का विरोध

जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा होने वाली थी तब लिखा था कि राम मन्दिर से केवल अयोध्या ही नहीं, समस्त भारत की दिशा और दशा में ऐसा परिवर्तन आना शुरू होगा जिससे विश्व प्रभावित होगा। सनातन विरोधी छटपटा रहे हैं। लेकिन उनकी हर चाल नाकाम साबित हो रही है। 
जैसाकि संभावनाएं लगाई जा रही है कि जून 4 के बाद कांग्रेस 2 हिस्सों में बंट जाएगी, लेकिन लगता है चुनाव परिणाम आते-आते पार्टी टूट जाएगी। रोहन गुप्ता, गौरव बल्लभ और राधिका खेड़ा कांग्रेस के ऐसे योग्य प्रवक्ता थे जो जी जान से कांग्रेस पार्टी के लिए लड़ते थे! जबकि राधिका तो बुरी तरह बीजेपी प्रवक्ता से ऐसे भिड़ जाती थी, जिस कारण इन्हें कई उपनामों से सम्बोधित किया जाने लगा था। माना कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण करते हर हिन्दू धार्मिक स्थल को विवादित बना दिया, लेकिन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से जितना सनातन धर्म का अपमान होना शुरू है, इससे पहले नहीं। 

लेकिन सनातन विरोधी कांग्रेस को नहीं मालूम कि आदि काल(4+अरब वर्षो प्राचीन धर्म) से लेकर सनातन को ख़त्म करने वाले कितने आए कितने दफ़न हो गए सनातन को कोई समाप्त नहीं कर पाया और ना ही कर पाएगा।   
कांग्रेस नेता राधिका खेड़ा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कुछ दिनों पहले रायपुर में उनका सुशील आनंद शुक्ला के साथ विवाद हुआ था। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है। उसमें उन्होंने लिखा है कि पार्टी में राम नाम लेने वालों का विरोध किया जा रहा है।

उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर इस्तीफे का लेटर पोस्ट कर लिखा- आज अत्यंत पीड़ा के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता त्याग रही हूं व अपने पद से इस्तीफा दे रही हूं। हां मैं लड़की हूं और लड़ सकती हूं, और वही अब मैं कर रहीं हूं। अपने व देशवासियों के न्याय के लिए मैं निरंतर लड़ती रहूंगी।

आदिकाल से ये स्थापित सत्य है कि धर्म का साथ देने वालों का विरोध होता रहा है। हिरण्यकश्यप से लेकर रावण और कंस तक इसका उदाहरण हैं। वर्तमान में प्रभु श्री राम का नाम लेने वालों का कुछ लोग इसी तरह विरोध कर रहे हैं। हर हिंदू के लिए प्रभु श्री राम की जन्मस्थली पवित्रता के साथ बहुत मायने रखती है और राम लल्ला के दर्शन मात्र से जहां हर हिंदू अपना जीवन सफल मानता है वहीं कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

मैंने जिस पार्टी को अपने 22 साल से ज़्यादा दिए, जहां एनएसयूआई से लेकर एआईसीसी के मीडिया विभाग में पूरी ईमानदारी से काम किया, आज वहां ऐसे ही तीव्र विरोध का सामना मुझे करना पड़ा है क्योंकि मैं अयोध्या में राम लल्ला के दर्शन करने से खुद को रोक नहीं पाई।

मेरे इस पुनीत कार्य का विरोध इस स्तर तक पहुंच गया कि मेरे साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए घटनाक्रम में मुझे न्याय देने से इनकार कर दिया गया। मैंने हमेशा ही दूसरों के न्याय के लिए हर मंच से लड़ाई लड़ी है, किंतु जब स्वयं के न्याय की बात आई तो पार्टी में मैंने स्वयं को हारा हुआ पाया।

प्रभु श्री राम की भक्त व एक महिला होने के नाते मैं बेहद आहत हूं। बार बार पार्टी के समस्त शीर्ष नेताओं को अवगत कराने के बाद भी जब मुझे न्याय नहीं मिला, इससे आहत होकर मैंने आज यह कदम उठाया है।

‘मैं जाऊँगा अयोध्या, जिसको जो ऐक्शन लेना है ले…’: AAP सांसद हरभजन सिंह, प्राण प्रतिष्ठा का विरोध करने से दुखी कांग्रेस विधायक ने दिया इस्तीफा

AAP सांसद हरभजन सिंह (बाएँ) और पूर्व कांग्रेस नेता सीजे चावड़ा (साभार: Indianexpress & PRSindia)
अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह को स्थापित कर दिया है। विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होना है। इसको लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है और पूरा देश राममय हो गया है। हालाँकि, विपक्षी दल भगवान को लेकर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। 

अयोध्या में प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विपक्ष में जो कलह मची हुई है, कहाँ जाकर रुकेगी, कहना अति कठिन है, विपक्ष तुष्टिकरण करने में गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने को तैयार नहीं। नितरोज सनातन और रामायण को कलंकित करते इतना भी ज्ञान नहीं कि जो नेता एवं पार्टी अपनी संस्कृति और धर्म का अनादर करता है, उनका विलुप्त होना स्वाभाविक है।  

आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने राममंदिर को लेकर राजनीति ना करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ये सौभाग्य की बात है कि वर्तमान पीढ़ी के दौर में राम मंदिर में बन रहा है और इस मंदिर में सबको आशीर्वाद लेने के लिए जाना चाहिए। वहीं, गुजरात के कांग्रेस विधायक सीजे चावड़ा ने प्राण प्रतिष्ठा का न्यौता ठुकराने से दुखी होकर विधायकी से इस्तीफा दे दिया है।

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा, “कौन क्या कहता है, ये अलग बात है। सही बात ये है कि ये जो मंदिर… धाम… बनने जा रहा है, ये हम सबका सौभाग्य है कि हमारे दौर में ये सब चीजें हो रही हैं। हमें वहाँ जाना चाहिए और आशीर्वाद लेना चाहिए। मैं तो यही कहूँगा कि कोई जाए या ना जाए, मेरी जो भगवान में आस्था है और मेरा जो यकीन है, मैं तो जरूर जाऊँगा।”

हरभजन सिंह ने आगे कहा, “कोई पार्टी जाए या ना जाए, मेरा अपना ये स्टैंड है कि मैं भगवान में विश्वास करता हूँ और वहाँ जरूर जाऊँगा। कॉन्ग्रेस को जाना है जाए, नहीं जाना है नहीं जाए… जो करना है करे। मेरे जाने से अगर किसी को कोई दिक्कत है तो उन्हें जो करना है करे। मेरा मानना है कि मैं जीवन में जो कुछ भी हूँ, ये उसकी (भगवान की) कृपा है और आशीर्वाद लेने जरूर पहुँचूँगा।”

ये सिर्फ आम आदमी पार्टी के सांसद का विचार नहीं है, बल्कि कांग्रेस पार्टी में ऐसे कई लोग हैं जो पार्टी की लाइन से हटकर अयोध्या जा रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग ले रहे हैं। इनमें प्रमुख नाम हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके मंत्री बेटे विक्रमादित्य सिंह भी प्रमुख हैं। वहीं, गुजरात के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सीजे चावड़ा ने पार्टी के निर्णय के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

गुजरात के विजापुर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक चावड़ा ने शुक्रवार (19 जनवरी 2024) को गाँधीनगर में विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने इस्तीफे में चावड़ा ने कहा कि अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में खुशी का माहौल है, लेकिन कॉन्ग्रेस इसका बहिष्कार कर रही है। इससे वे परेशान हैं।

सीजे चावड़ा ने कहा, “मैंने कांग्रेस से इस्तीफा दे रहा हूँ। मैंने 25 साल तक कांग्रेस में काम किया है। इसका कारण यह है कि जब पूरे देश के लोग राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खुश हैं। हर तरफ खुशी की लहर है। उस खुशी की लहर का हिस्सा बनने के बजाय इस पार्टी (कांग्रेस) ने जो रुख अपनाया है, वही परेशान होने का कारण है।”

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए चावड़ा ने आगे कहा, “हमें गुजरात के दो बड़े नेताओं पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यों और नीतियों का समर्थन करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस में रहते हुए मैं ऐसा नहीं कर पाता। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया है।” चावड़ा के इस्तीफे के बाद 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या अब सिर्फ 15 रह गई है।

चावड़ा ने जिस तरह का संकेत दिया है, उससे माना जा रहा है कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले आणंद जिले के खंभात से कांग्रेस विधायक चिराग पटेल ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। बता दें कि लोकसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बँटवारे पर सहमति बन जाने की खबर आ रही है।

केरल : राहुल गाँधी लड़कियों को सीखा रहे Aikido, पार्टी में महिलाओं की अनदेखी

                 राहुल गाँधी लड़कियों को सीखा रहे Aikido (बाएँ), केरल कांग्रेस की उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा (दाएँ)
‘युवा’ राहुल गाँधी कांग्रेस को मजबूत करने के लिए इन दिनों युवक-युवतियों से मिल रहे हैं। केरल में दो दिवसीय चुनावी दौरे के दौरान वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने कोच्चि के महिला सेंट टेरेसा कॉलेज में मार्च 22 को छात्राओं से मुलाकात की।

हालाँकि, इन सबके बावजूद कांग्रेस नेता अपनी पार्टी को एकजुट करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि राहुल और प्रियंका के भ्रमित बयानों के कारण कांग्रेस को मिल रही पराजय के कारण कांग्रेस में लोग राहुल गाँधी के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं, जिसके चलते वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। इससे कांग्रेस मजबूत होने की बजाय और बिखर रही है।

केरल में कांग्रेस पार्टी से नेताओं का इस्तीफा देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मार्च 22 को केरल प्रदेश कांग्रेस समिति में उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पार्टी नेता केसी रोसाकुट्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक रोसाकुट्टी ने कहा, ‘वह पार्टी में आपसी गुटबाजी से तंग आ गई थीं और इसलिए इस्तीफा देने का निर्णय लिया।’

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी में लगातार महिलाओं की अनदेखी की जा रही है। इतना ही नहीं, पार्टी आलाकमान भी गुटबाजी में लगा हुआ है। केरल महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रोसाकुट्टी 1991-96 में वायनाड की सुल्तान बाथेरी विधानसभा सीट से विधायक रह चुकी हैं।

इससे पहले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को पर्याप्त उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज केरल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष लतिका सुभाष ने कॉन्ग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने विरोध जताते हुए तिरुवनंतपुरम में पार्टी दफ्तर के बाहर ही सिर भी मुँड़वा लिया था।

केरल में हाल में कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी है। इनमें प्रदेश सचिव एमएस विश्वनाथन, महिला कांग्रेस सचिव सुजया वेणुगोपाल, इंटक महासचिव पीके अनिल कुमार, प्रदेश कार्य समिति सदस्य केके विश्वनाथन जैसे नेता शामिल हैं।