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‘हिंदू संगठन शेख हसीना के पालतू कुत्ते’: युनूस के एडवाइजर शफीकुल आलम ने उगला जहर

                                                              शेख हसीना और मोहम्मद युनूस
बांग्लादेश में हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों का अत्याचार बढ़ रहा है और उसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है यह बात किसी से अब छिपी नहीं है। हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बांग्लादेश की सरकार में नफरत किस कदर हावी हो गई है उसका अंदाजा यूनुस के चीफ एडवाइजर और प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम के बयान से लगाया जा सकता है। शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में हिंदू संगठनों की तुलना पालतू कुत्तों से की है।

शफीकुल आलम ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ‘भारत-बांग्लादेश’ के रिश्तों को लेकर कहा है कि भारत को बांग्लादेश को भूटान नहीं समझना चाहिए। आलम ने कहा, “हसीना के दौर में खुलेआम चुनाव में धांधली हुई। इसके बावजूद किसने हसीना का समर्थन किया, लोग ये सब समझते हैं। मुझे लगता है कि यूनुस, शेख हसीना की वापसी चाहते हैं। वे वहाँ रहकर बांग्लादेश में लोगों को भड़का रही हैं।”

कट्टरंपथी उस्मान हादी की हत्या को लेकर आलम ने कहा कि उस्मान को अवामी लीग (शेख हसीना की पार्टी) के समर्थकों ने मारा है। आलम ने कहा, “हमारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अवामी लीग के सीनियर लीडर ने हादी को मरवाने के लिए फंडिंग की है।” बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर भी आलम ने खुलेआम झूठ बोला है। आलम का दावा है कि कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। उसके मुताबिक, अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है।

वहीं, जब आलम से सवाल किया गया कि ‘हिंदू अल्पसंख्यक कम्युनिटी’ अपराध बढ़ने का डेटा जारी किया है। इस पर आलम ने कहा कि ऐसे संगठनों के नेता अवामी लीग से मिले हुए हैं। आलम ने कहा, “डेटा में से कोई भी घटना कम्युनल किलिंग की नहीं है। ज्यादातर मामले लूटपाट, आपसी रंजिश के हैं। बांग्लादेश हिंदू, बुद्ध, क्रिश्चियन परिषद नाम के संगठन और लोग हसीना के पालतू कुत्तों की तरह के हैं।”

शेख हसीना पर फैसले से पहले बांग्लादेश की सड़कों पर चले बम, प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश: पूर्व PM बोलीं- जिंदा हूँ, जिंदा रहूँगी


बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के कथित मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण यानी ICT-BD फैसला सुनाएगा। इसको लेकर बांग्लादेश में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। बांग्लादेश सरकार ने हिंसा करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। 

आखिर उपद्रवी अपने जिन आकाओं के इशारे पर बांग्लादेश को फूंक रहे थे, आज उन्ही उपद्रवियों के खिलाफ देखते ही गोली मारने के आदेश क्यों दिए गए? उपद्रवियों को सोंचना चाहिए कि सियासत के चलते उन्हें आगे कर आगजनी और अपनी महिला प्रधानमंत्री के अंतर्वस्त्रों का प्रदर्शन कर अपनी नीचता को दुनिया को दिखा दिया। दिखा दिया कि इस्लामिक मुल्क में किसी सम्मानित औरत को भी किस हद तक जलील किया जा सकता है। आम औरतों का तो कहना क्या?    

इससे पहले रविवार (16 नवंबर 2025) रात तक ढाका में आगजनी और देसी बम फटते रहे। इसको देखते हुए हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने कहा है कि उन्होंने हसीना के लिए फाँसी की सजा की माँग की है।

उनका कहना है कि कानून के मुताबिक हसीना सुप्रीम कोर्ट में तब तक अपील नहीं कर सकतीं, जब तक वह आत्मसमर्पण नहीं करती हैं अथवा 30 दिनों के अंदर खुद को कानून के हवाले नहीं करती हैं।

इस बीच शेख हसीना का एक ऑडियो संदेश सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा है कि डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह जिंदा है और वह जिंदा रहेंगी। साथ ही देश के लोगों का साथ देती रहेंगी। अवामी लीग के फेसबुक पेज पर ये संदेश जारी किया गया है। ट्रिब्यूनल के फैसले से पहले अवामी लीग ने बांग्लादेश बंद का आह्वान किया है।

बांग्लादेश तख्तापलट में CIA का था हाथ, हसीना की पीठ में छुरा घोंपने वाला था आर्मी चीफ वकार: ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश’ में पूर्व गृह मंत्री का दावा, बोले- अभिमन्यु की तरह घिरी थीं शेख हसीना

                                 बांग्लादेश में सत्ता के तख्तापल्ट में CIA का हाथ होने का दावा
बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापल्ट के बाद से कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इसमें सैन्य हस्तक्षेप से लेकर अमेरिकी की खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका तक की अलग-अलग जगहों पर चर्चा की जा रही थी। अब एक किताब में यह दावा किया गया है कि दरअसल शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के पीछे CIA का हाथ था।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के दौर में गृह मंत्री रहे असदुज्जमाँ खान कमाल ने इस तख्तापलट को ‘CIA की सटीक साजिश’ बताते हुए देश के सेना प्रमुख और हसीना के रिश्तेदार वकर-उज-जमाँ पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। असदुज्जमाँ खान ने दावा किया है कि वकार-उज-जमाँ CIA की जेब में है और उन्होंने हसीना की पीठ में छुरा घोंप दिया है।

यह चौंकाने वाला खुलासा दीप हलदर, जयदीप मजूमदार और साहिदुल हसन खोकन द्वारा लिखित और जगरनॉट द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन’ में किया गया है। हालाँकि, यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।

                                                        इंशाअल्लाह बांग्लादेश पुस्तक

पुस्तक में असदुज्जमाँ खान के हवाले से लिखा गया है, “यह हसीना को उखाड़ फेंकने के लिए लंबे समय से रची गई CIA की एक सटीक साजिश थी। हमें नहीं पता था कि वकार पर CIA का हाथ था।” कुछ समय पहले तक बांग्लादेश के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स रहे असदुज्जमाँ खान ने बताया है, “हमें नहीं पता था कि जनरल वकार-उज-जमाँ CIA के पे-रोल पर हैं।”

असदुज्जमाँ ने बताया कि उनके देश की प्राथमिक रक्षा खुफिया एजेंसी, बांग्लादेश के सैन्य खुफिया महानिदेशालय और साथ ही बांग्लादेश की प्रमुख नागरिक खुफिया एजेंसी, राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया ने प्रधानमंत्री हसीना को यह चेतावनी नहीं दी थी कि वकार ने उन्हें धोखा देने का मन बना लिया है। साथ ही, उन्होंने शक जताया है कि इस साजिश में में शीर्ष अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

क्यों किया CIA ने तख्तापलट?

असदुज्जमाँ खान ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) दक्षिण एशिया में मजबूत नेतृत्व नहीं चाहती। उनका कहना है कि अमेरिका ऐसे देशों में कमजोर सरकारें देखना पसंद करता है ताकि अपने हितों को आसानी से साध सके। जब उनसे पूछा गया कि CIA के सहयोग से बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन करने से अमेरिका को क्या फायदा होगा।

उन्होंने कहा, “इसके दो कारण हैं। पहला, दक्षिण एशिया में बहुत ज्यादा शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष न हों। नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और शेख हसीना जैसे मजबूत नेता अगर उपमहाद्वीप पर राज करें, तो CIA के लिए अपने हित साधना मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी रणनीति हमेशा कमज़ोर सरकारों के साथ काम करने की रही है।” खान ने यह भी दावा किया कि इसके पीछे एक तात्कालिक कारण सेंट मार्टिन द्वीप था।

उनका कहना है कि भारतीय प्रेस अब इस पर रिपोर्ट कर रही है लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हमें बहुत पहले ही आगाह कर दिया था कि अमेरिका उन्हें सत्ता से बाहर करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह सेंट मार्टिन द्वीप पर अपना नियंत्रण चाहता है।

सेंट मार्टिन द्वीप क्यों चाहता है अमेरिका?

सेंट मार्टिन द्वीप को लेकर पहले शेख हसीना खुद भी ऐसा ही दावा कर चुकी हैं। हसीना ने सत्ता गँवाने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अगर वह इस द्वीप को अमेरिकियों को सौंप दें तो वह बिना किसी समस्या के सत्ता में बनी रह सकती हैं।

भौगोलिक दृष्टि से सेंट मार्टिन द्वीप की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के किसी भी हिस्से से समुद्री मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह एक प्रमुख जलमार्ग होने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा के करीब स्थित 7.3 किलोमीटर लंबा यह द्वीप समुद्र तल से लगभग 3.6 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है।

माना जाता है कि लगभग 5,000 वर्ष पहले यह टेकनाफ प्रायद्वीप का हिस्सा था लेकिन धीरे-धीरे समुद्र में डूब गया। करीब 450 वर्ष पूर्व इसका दक्षिणी भाग फिर से उभरा और अगले 100 वर्षों में उत्तरी और शेष भाग भी समुद्र से ऊपर उठ आए। वर्ष 1900 में ब्रिटिश भारत ने भूमि सर्वेक्षण के दौरान इस द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे चटगाँव के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मार्टिन के नाम पर सेंट मार्टिन द्वीप कहा गया।

इस द्वीप से बंगाल की खाड़ी और आस-पास के समुद्री इलाकों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे यह बांग्लादेश के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बन जाता है। दक्षिण एशिया के परिप्रेक्ष्य में भी यह द्वीप जियो-पॉलिटिक्स में शक्ति संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। बंगाल की खाड़ी स्वयं दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु की तरह कार्य करती है और व्यापारिक मार्गों के माध्यम से क्षेत्रीय देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाती है।

किसी आकस्मिक युद्ध की स्थिति में भी यहाँ से संपर्क और संचालन स्थापित करना आसान होता है, यही कारण है कि शक्तिशाली देश इस द्वीप की ओर आकर्षित हैं। व्यापारिक और सामरिक हितों के कारण चीन और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं जबकि भारत के लिए भी सेंट मार्टिन द्वीप का रणनीतिक महत्व अत्यधिक है। अमेरिका की रुचि का मुख्य कारण यह है कि यदि उसे इस द्वीप पर प्रभाव जमाने का अवसर मिलता है, तो वह यहाँ से पूरे क्षेत्र, विशेष रूप से चीन और भारत पर निगरानी रख सकता है।

अभिमन्यु की तरह घिर गई थीं शेख हसीना

दीप हलदर ने का कहना है कि यह खुलासा बांग्लादेश को और बेचैन कर सकता है। उनका कहना है कि जनरल वकार को हसीना ने अपने पद से हटने से ठीक पहले नियुक्त किया था। उन्होंने कहा, “पिछले साल और इस साल भी NCP (नेशनल सिटिजन्स पार्टी) के नेताओं द्वारा लगातार यह बयान दिया जाता रहा कि जनरल वेकर भारत के एजेंट हैं। अब यह बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे यह सवाल उठता है कि वकार किसकी तरफदारी कर रहे हैं।”

असदुज्जमाँ खान ने अपनी बात को समझाने के लिए महाभारत का हवाला भी दिया है। उन्होंने कहा, “जैसे अभिमन्यु को चारों तरफ से घेर लिया गया और फिर युद्ध में अपने ही हाथों ढेर कर दिया गया, वैसे ही वकार ने हसीना को गिराने के लिए बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों से हाथ मिला लिया। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने इससे पहले भी सभी कट्टरपंथी ताकतों को एक साथ लाया था।”

यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) जमात के साथ मिलकर काम कर रही थी। उन्होंने कहा, “कुछ ISI-प्रशिक्षित लोग जमात में घुसपैठ कर चुके थे और जून के अंत में पुलिसकर्मियों की हत्या में उनकी अहम भूमिका थी।”

उन्होंने दावा किया कि जब अराजकता फैली तो उन्हें शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ISI-प्रशिक्षित लोग जमात में घुसपैठ कर चुके हैं और छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के पास गए थे लेकिन उन्होंने उन्हें बताया गया कि सेना प्रमुख ने हसीना को आश्वासन दिया है कि वह आंदोलनकारी छात्रों की बढ़ती भीड़ को सँभाल लेंगे।

असदुज्जमाँ ने 4 अगस्त 2024 से पहले वाली शाम को हुई बैठक को लेकर कहा, “शेख हसीना के सामने वकार ने मुझसे कहा कि सड़कों पर हो रही हिंसा के कारण लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ गया है और बेहतर होगा कि सेना ही प्रवेश द्वारों पर आंदोलनकारियों को रोके। वकार ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। वह यह सुनिश्चित करेंगे कि सेना किसी को भी प्रधानमंत्री आवास के पास न आने दे।”

असदुज्जमाँ ने कहा कि इस बैठक के अगले दिन क्या हुआ यह सब जानते हैं। दरअसल, हिंसक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने हसीना के आवास पर धावा बोल दिया था और हजारों की संख्या में लोग उनके आवास में दाखिल हो गए थे जिसके कारण उन्हें देश छोड़कर भारत आने को मजबूर होना पड़ा।

जिस न्यूटन दास ने बांग्लादेश में किया शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन, वह अब पश्चिम बंगाल का नागरिक: TMC के साथ है लिंक

                बांग्लादेश में छात्र प्रदर्शन, बंगाल चुनाव में दिखा सुभाषीश ( फोटो साभार- पांचजन्य और एबीपी )
बांग्लादेशी नागरिकों को बंगाल की नागरिकता दिये जाने के सबूत सामने आए हैं। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए बांग्लादेश में ‘छात्र विरोध प्रदर्शन’ में भाग लेने वाला न्यूटन दास अब बंगाल का नागरिक है।

यह खुलासा सबसे पहले टीवी9 बांग्ला ने शनिवार (7 जून 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया था। बांग्लादेशी नागरिक का नाम पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप शहर की मतदाता सूची में शामिल है।

न्यूटन दास का विधानसभा क्षेत्र काकद्वीप है, जबकि संसदीय क्षेत्र मथुरापुर आरक्षित सीट है। भारत में रहने वाले न्यूटन दास के भाई तपस दास ने माना है कि वह बांग्लादेशी नागरिक है।

न्यूटन दास को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार ने नागरिकता दी है। उसका नाम वोटर सूची में भी मौजूद है यानी मतदान का अधिकार हासिल करने में वह कामयाब रहा है। उनके भाई तपस दास ने पुष्टि की, “उसे (न्यूटन दास) बांग्लादेश का मतदाता होना चाहिए। उनका जन्म वहीं हुआ था। वह कोविड-19 प्रकोप के बाद कुछ भूमि विवादों को निपटाने के लिए भारत आया था। मुझे नहीं पता कि वह अब कहाँ रहता है। मुझे नहीं पता कि वह यहाँ मतदाता कैसे बन गया?”

काकद्वीप पंचायत के सदस्य ने पुष्टि की है कि न्यूटन दास एक स्थानीय मतदाता हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके बांग्लादेश से संबंधों के बारे में पता नहीं है।

बांग्लादेश में 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की तस्वीरें ऑनलाइन सामने आने के बाद आरोपित मुश्किल में पड़ गया। शेख हसीना सरकार के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों के दौरान उसे लाठी और झंडों के साथ पोज देते देखा गया था।

बीजेपी नेता सुकांत मजुमदार ने कहा, “असफल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विशेष प्रोत्साहन के कारण, सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने न केवल बम बनाने के उद्योग और कट मनी उद्योग में अग्रणी भूमिका निभाई है – बल्कि ‘अवैध घुसपैठ उद्योग’ भी काफी फल-फूल रहा है। तृणमूल कांग्रेस के बिना बंगाल के लोग कभी भी इस मॉडल को सही मायने में नहीं समझ पाते।”

उन्होने कहा कि ममता बनर्जी की घुसपैठ सिद्धांत और तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से हजारों बांग्लादेशी ‘न्यूटन’ बंगाल में मतदान करते हैं। अवैध मतदाताओं और इन लाठीधारी बदमाशों को अपना समर्थन आधार बनाकर, वह पश्चिम बंगाल नहीं चला रही हैं… वह ग्रेटर बांग्लादेश के लिए खाका तैयार कर रही हैं,”

इस बीच सोशल मीडिया पर न्यूटन दास की तृणमूल कांग्रेस के नेता सुभाशीष दास के साथ एक तस्वीर सामने आई है। सुंदरबन के टीएमसी नेता आरोपी का जन्मदिन मनाते नजर आए।

टीवी9 बांग्ला से बात करते हुए सुभाशीष दास ने दावा किया कि न्यूटन के बांग्लादेशी नागरिक होने के बारे में उसे कोई खबर नहीं है।

आरोपित न्यूटन दास ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर घड़ियाली आँसू बहाता हुआ दिखा।

न्यूटन ने आरोप लगाया कि 2024 में वारिस बनाए जाने के बाद वह भूमि विवादों को निपटाने के लिए बांग्लादेश गया था। ये महज संयोग है कि उसकी यात्रा और बांग्लादेश के ‘छात्र प्रदर्शन’ का वक्त एक ही था।

आरोपी ने दावा किया, “मैं 2014 से काकद्वीप में मतदाता हूँ। मैंने 2016 के विधानसभा चुनाव में भी भाग लिया था। हालाँकि, 2017 में मेरा वोटर कार्ड खो गया था, लेकिन हमारे विधायक की मदद से 2018 तक मुझे नया कार्ड मिल गया।”

इससे पहले मई 2022 में यह बात सामने आई थी कि तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार अलो रानी सरकार, जिन्होंने 2021 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा था, वह बांग्लादेश में अपने पति के साथ रहती है।

दिल्ली : कभी शेख हसीना के सौजन्य से खाते थे बिरयानी, अब हटा दी ‘बंगबंधु’ की तस्वीर: पत्रकारों ने बताया – ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में ‘साँपों’ ने मनाया बांग्लादेश तख्तापलट का जश्न

                         शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर PCI से हटाई गई (फोटो साभार: सुभाष S यादव)
बांग्लादेश में तख्तापलट क्या हुआ, ‘बंगबंधु’ कहे जाने वाले शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ से हटा दी गई है। बता दें कि शेख मुजीबुर रहमान ने ही ‘मुक्ति वाहिनी’ का गठन किया था, जो पाकिस्तानी फ़ौज से लड़ कर बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) की मुक्ति का कारण बना। PCI के दफ्तर में शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाए जाने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया में विरोध किया, जिसके बाद तस्वीर फिर से लगा दी है।

सुभाष S यादव ने सोमवार (5 अगस्त, 2024) को एक तस्वीर ली, जिसमें शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाई हुई दिख रही है। तस्वीर को देखिए:

                                                5 अगस्त को हटी हुई तस्वीर की ली गई फोटो

इसके बाद उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इसे लेकर आवाज़ उठाई। फिर 4 दिन बाद इस तस्वीर को लगा दिया गया। शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को उनके द्वारा ली गई इस तस्वीर को देखिए:

                            9 अगस्त को वापस लगा दी शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर

हमने PCI से जुड़े कुछ पत्रकारों से बात की, जिन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बताया कि अब फिर तस्वीर लगा दी है। उन पत्रकारों ने बताया कि खूब लानत-मलानत के बाद ये कदम उठाया गया है। हमें खबर मिल रही है कि तख्ता पलट के बाद वहाँ जश्न भी मनाया गया था। जश्न के दौरान तस्वीर हटाई गई थी। एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शेख हसीना ने ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में साँप पाल रखा था, जिसने मौका मिलते ही उन्हें ही डस लिया।

PCI में स्थित हमारे सूत्रों ने ये भी बताया कि शेख हसीना के सौजन्य से वहाँ पर बिरयानी पार्टी कभी शुरू की गई थी। बिरयानी बनाने के लिए बांग्लादेश से ही खानसामा आता था। वहीं मौका मिलते ही इन्होंने शेख हसीना के पिता की तस्वीर ही हटा दी। इन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रेस क्लब के वामपंथी किसी के नहीं है। दावा है कि PCI में तो भारत की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले सेनानियों की तस्वीरें तक नहीं लगी हैं। ये वामपंथी नेताओं और एक्टिविस्ट्स को जम कर मंच भी देते हैं।

शेख हसीना ने US के प्लान का किया पर्दाफाश : भारत के नजदीक सेंट मार्टिन द्वीप पर अमेरिकी सैन्य अड्डा, बांग्लादेश को काट कर ईसाई मुल्क बनाना…

                                                  सेंट मार्टिन द्वीप (साभार: The Diplomat)
हिंसाग्रस्त बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरोप लगाया है कि सेंट मार्टिन द्वीप नहीं देने के कारण अमेरिका ने उन्हें सत्ता से बेदखल किया है। शेख हसीना ने कहा कि सेंट मार्टिन द्वीप दे देने से अमेरिका को ‘बंगाल की खाड़ी’ पर प्रभाव जमाने में मदद मिलती। इतना ही नहीं, उन्होंने बांग्लादेश के नागरिकों को कट्टरपंथियों के बहकावे में नहीं आने की भी सलाह दी।

अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से भेजे गए संदेश में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा, “मैंने इस्तीफा दे दिया, ताकि मुझे शवों का जुलूस न देखना पड़े। वे (विपक्षी BNP) छात्रों की लाशों पर सत्ता में आना चाहते थे, लेकिन मैंने ऐसा नहीं होने दिया। मैंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मैं अपने देश के लोगों से विनती करती हूँ- कृपया कट्टरपंथियों के बहकावे में न आएँ।”

फिलहाल भारत में रह रहीं शेख हसीना ने आगे कहा, “मैं सत्ता में बनी रह सकती थी अगर मैंने सेंट मार्टिन द्वीप को सौंपकर अमेरिका को बंगाल की खाड़ी पर कब्ज़ा करने दिया होता। अगर मैं देश में रहती तो और भी लोगों की जान चली जाती, और भी संसाधन नष्ट हो जाते। मैंने देश छोड़ने का बेहद कठिन फैसला लिया। मैं आपकी नेता बनी, क्योंकि आपने मुझे चुना। आप मेरी ताकत थे।”

अपने पिता को याद करके वह बोलीं, “जब मुझे यह खबर मिली कि कई नेता मारे गए, कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है, उनके घरों में आगजनी की है, तो मेरा दिल रो पड़ा। मैं सर्वशक्तिमान अल्लाह की कृपा से जल्द वापस आऊँगी। मैं बांग्लादेश के भविष्य के लिए प्रार्थना करूँगी। यह वह राष्ट्र जिसके लिए मेरे महान पिता ने संघर्ष किया। जिसके लिए मेरे पिता और परिवार ने अपनी जान दे दी।”

आरक्षण विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा, “मैं बांग्लादेश के युवा छात्रों से दोहराना चाहूँगी। मैंने आपको कभी रजाकार नहीं कहा। आपको भड़काने के लिए मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। मैं आपसे उस दिन का पूरा वीडियो देखने का अनुरोध करती हूँ। साजिशकर्ताओं ने आपकी मासूमियत का फायदा उठाया और देश को अस्थिर करने के लिए आपका इस्तेमाल किया।”

बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति के लिए अमेरिका पर आरोप

आरक्षण आंदोलन विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने से पहले शेख हसीना ने इस साल अप्रैल में संसद को बताया था कि अमेरिका उनके देश में शासन परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा था, “वे (अमेरिकी) लोकतंत्र को खत्म करने और ऐसी सरकार लाने की कोशिश कर रहे हैं जिसका लोकतांत्रिक अस्तित्व नहीं होगा।”
सूत्रों के हवाले से ET ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि शेख हसीना के करीबी अवामी लीग के नेताओं ने ढाका में शासन परिवर्तन के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस साल मई महीने में ढाका का दौरा करने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक इसके लिए जिम्मेदार थे। नेताओं ने आगे आरोप लगाया कि राजनयिक हसीना पर चीन के खिलाफ पहल करने के लिए दबाव डाल रहे थे।
इन नेताओं ने बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत पीटर हास ने खालिदा जिया की कट्टरपंथी सोच वाली विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का समर्थन किया था। अमेरिकी राजूदत पीटर हास का इस साल जुलाई में कार्यकाल समाप्त हो गया है। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने मानवाधिकारों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर ढाका की लगातार आलोचना की थी।
इतना ही नहीं, 15 दिसंबर 2023 को रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि अगर शेख हसीना अगले चुनाव में सत्ता में आती हैं तो अमेरिका उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए अपनी सारी शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका शासन परिवर्तन लाने के लिए अराजक ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी स्थिति पैदा करेगा।

सैन्य अड्डा के लिए ईसाई देश बनाने को भी तैयार अमेरिका

इस साल मई में पीएम रहते हुए शेख हसीना ने कहा था कि म्यांमार और बांग्लादेश के हिस्से काट कर एक ईसाई मुल्क बनाए जाने की साजिश है, जो कि पूर्वी तिमोर की तर्ज पर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे बांग्लादेश के चट्टोगाम और म्यांमार के सीमाई इलाके लेकर बनाया जाएगा, इसी के साथ बंगाल की खाड़ी में एक सैन्य ठिकाना बनाए जाने की भी योजना है।
अमेरिका का नाम लिए बिना शेख हसीना ने आरोप लगाया था कि यह सब गोरी चमड़ी वाले देश के लोग करना चाहते हैं। उन्होंने बताया था कि उन्हें यह प्रस्ताव मिला था कि यदि वह इस देश को बंगाल की खाड़ी में अपना सैन्य अड्डा बनाए जाने की अनुमति दे दें तो उनका दोबारा चुन कर आना काफी आसान कर दिया जाएगा। हालाँकि, उन्होंने देश का नाम नहीं लिया।
पीएम शेख हसीना ने कहा कि वह अपने देश के हिस्सों को बेच कर सत्ता में नहीं आना चाहती थीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अभी आगे और भी समस्याएँ बांग्लादेश के लिए खड़ी की जाएँगी, लेकिन उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने नया ईसाई मुल्क बनाने के बारे में कहा कि साजिश करने वालों की नजरें बंगाल की खाड़ी पर हैं।
दरअसल, इस इलाके में नियंत्रण के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। वह किसी भी स्थिति में अपना सैन्य अड्डा बनाना चाहता है। सेंट मार्टिन द्वीप नहीं मिलने की स्थिति में वह एक ईसाई देश का निर्माण ही कर देना चाहता है, जिसकी सुरक्षा के नाम वह वहाँ अपना सैन्य अड्डा बना सके। इसके लिए वह भारत, बांग्लादेश और म्यामांर के ईसाई वाले इलाकों को रेखांकित किया है।

द्वीप का अमेरिकी निगाह और इनकार

हालाँकि, अमेरिका ने इन सारे आरोपों से इनकार कर दिया था। 27 जून 2023 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था कि अमेरिका ने सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण करने के बारे में कभी कोई चर्चा नहीं की है और न ही ऐसा करने का कोई इरादा है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका बांग्लादेश की संप्रभुता का सम्मान करता है।
इससे पहले 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मैरी एन पीटर्स ने सेंट मार्टिन द्वीप कब्जे को लेकर मीडिया में चल रही अटकलों को खारिज कर किया था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि वॉशिंगटन सुदूर और मध्य-पूर्व के बीच कहीं अपनी सेना को तैनात करने के लिए ढाका से एक सैन्य अड्डा पट्टे पर लेने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने 2 जुलाई 2003 को बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में ‘दक्षिण एशिया की सुरक्षा: एक अमेरिकी परिप्रेक्ष्य’ शीर्षक से एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा था, “संयुक्त राज्य अमेरिका के पास सेंट मार्टिन द्वीप, चटगाँव या बांग्लादेश में कहीं और सैन्य अड्डा बनाने की कोई योजना, आवश्यकता या कोई इच्छा नहीं है।”

सेंट मार्टिन द्वीप का इतिहास?

सेंट मार्टिन द्वीप भारत और बांग्लादेश के पास बंगाल की खाड़ी में 8 वर्ग किलोमीटर में फैला एक द्वीप है। इस द्वीप को नारिकेल जिंजीरा (नारियल द्वीप) या दारुचिनी द्वीप (दालचीनी द्वीप) के नाम से भी जाना जाता है। सेंट मार्टिन द्वीप बांग्लादेश के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन यह म्यांमार तट से केवल आठ किलोमीटर दूर है। वहीं, राजधानी ढाका से इसकी दूरी 537 किलोमीटर है।
सेंट मार्टिन द्वीप के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से बंगाल की खाड़ी से घिरे हैं, जबकि उत्तरी तट बांग्लादेश की ओर है। यह द्वीप कॉक्स बाज़ार जिले के एक उपजिले टेकनाफ़ से लगभग नौ किलोमीटर दूर है। सेंट मार्टिन के पूर्व में म्यांमार का रखाइन राज्य स्थित है। यह वही प्रांत है, जहाँ के मुस्लिमों की चरपंथी गुट अराकान आर्मी ने म्यामांर की सेना के खिलाफ हथियार उठा लिया था।
इस द्वीप को लेकर म्यांमार और बांग्लादेश के बीच भी खींचतान चलती रहती है। म्यामांर आर्मी के जहाज और विमान कभी-कभी इस इलाके में घुस आते हैं। इसको देखते हुए बांग्लादेश द्वीप की हिफाजत के लिए सैन्य कार्रवाई भी करता है। इतना ही नहीं, म्यामांर से नाविक और मछुआरे से इस द्वीप पर घुस आते हैं। इसको लेकर दोनों देशों बीच संंबंधों में दरार है।
लगभग 5,000 साल पहले यह स्थान मुख्य भूमि टेकनाफ़ का हिस्सा थ। बाद में यह समुद्र के नीचे डूब गया। आधुनिक सेंट मार्टिन द्वीप का दक्षिणी क्षेत्र लगभग 450 साल पहले उभरा है। द्वीप का उत्तरी भाग और शेष भाग एक सदी बाद सामने आया। 18वीं शताब्दी में लगभग 250 साल पहले अरब व्यापारियों ने इस द्वीप की खोज की थी। दक्षिण पूर्व एशिया के साथ अपने व्यापार के दौरान अरब व्यापारी इस द्वीप पर रुकते थे।
उन्होंने इसका नाम ‘जज़ीरा’ रखा था। बाद में स्थानीय लोग ‘नारिकेल जिंजीरा’ कहने लगे, जिसका अर्थ है ‘नारियल द्वीप’। साल 1900 में एक ब्रिटिश भूमि सर्वेक्षण दल ने सेंट मार्टिन द्वीप को ब्रिटिश-भारत के हिस्से के रूप में शामिल किया और इसका नाम एक ईसाई पादरी सेंट मार्टिन के नाम पर रखा। उस समय बांग्लादेश में स्थित चटगाँव के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मार्टिन थे। यह भी होे सकता है कि यह नाम उनके नाम पर रखा गया हो।
साल 1937 में म्यांमार ब्रिटिश भारत से अलग हुआ था, तब भी यह द्वीप ब्रिटिश-भारत का हिस्सा था। 1947 में भारत के विभाजन के बाद सेंट मार्टिन द्वीप पाकिस्तान को मिल गया। आखिरकार 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद स्वतंत्र बांग्लादेश बना तो यह बांग्लादेश के हिस्से में आ गया। साल 1974 में बांग्लादेश और बर्मा (वर्तमान म्यांमार) इस समझौते पर पहुँचे कि सेंट मार्टिन द्वीप बांग्लादेश का हिस्सा है।
हालाँकि, विवाद जारी रहा। बांग्लादेश ने मार्च 2012 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी (ITLOS) में म्यांमार के खिलाफ समुद्री सीमा विवाद जीत गया। उस समय फिर स्पष्ट हो गया कि सेंट मार्टिन द्वीप बांग्लादेश का है। हालाँकि, इसको लेकर परोक्ष रूप से समुद्री सीमांकन के नाम पर दोनों देशों के विवाद बना रहता है।

सेंट मार्टिन द्वीप का क्या है रणनीतिक महत्व?

दरअसल, हिंद महासागर एवं विश्व में चीन की बढ़ती गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप पर नौसैनिक अड्डा स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह 1990 के दशक के अंतिम दौर से ही प्रयासरत है। हालाँकि, इसमें वह सफल नहीं हो पा रहा है। अमेरिका का यहाँ सैन्य अड्डा चीन के साथ-साथ भारत के लिए खतरनाक होगी।
दक्षिण एशिया के लिए इस द्वीप का एक व्यापक प्रभाव है। क्षेत्र में शक्ति संतुलन की जो स्थिति है, उसे देखते हुए किसी भी प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान से तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका की यहाँ गतिविधि कम होने के कारण उसे हिंद महासागर एवं बंगाल की खाड़ी में भारत का पर्याप्त प्रभाव है। अगर अमेरिका का यह नौसेना अड्डा स्थापित हो जाता है तो वह चीन को नियंत्रित करने के बहाने भारत पर अपने लादने की कोशिश कर सकता है।
इसके अलावा, यहाँ अमेरिकी गतिविधि के कारण भारत की रणनीतिक एवं व्यवसायिका गतिविधियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं। भले ही यह शॉर्ट टर्म में दिखाई ना दे, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसको देखते हुए भारत भी इस पक्ष में नहीं है कि अमेरिका का यहाँ सैन्य अड्डा हो।
अमेरिका का सबसे पड़ा प्रतिद्वंद्वी होने के कारण चीन तो कतई नहीं चाहता है कि बांग्लादेश का सेंट मार्टिन द्वीप पर अमेरिका का सैन्य अड्डा बने। अमेरिका एक साथ भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस आदि अन्य अन्य देशों के साथ-साथ इस इलाके के समुद्री व्यवसायिक मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए इस द्वीप पर अपना कब्जा चाहता है।
शेख हसीना की सरकार में वित्त एवं योजना मामलों की उप-समिति के सदस्य रहे स्क्वाड्रन लीडर (सेवानिवृत्त) सदरुल अहमद खान ने इस साल जून में बताया था कि अमेरिका वास्तव में नौसैनिक अड्डे की स्थापना के लिए बांग्लादेश से सेंट-मार्टिन द्वीप हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका चीन को नियंत्रित करना चाहता है, तो उसके पास प्रशांत क्षेत्र में ऐसा करने के लिए पर्याप्त अवसर हैं, जैसे मलक्का जलडमरूमध्य को नियंत्रित करना। हालाँकि, द्विपक्षीय व्यापार को देखते हुए उसने इस तरह की कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। चीन भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापार भागीदार है।

अमेरिका और ब्रिटेन शेख हसीना को शरण देने से मना करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में नंगे हो गए; टूल किट बड़े स्तर पर काम कर गया; शेख हसीना की 15 साल की देश के लिए मेहनत मिट्टी कर दी जाएगी

सुभाष चन्द्र

आज की खबर है कि अमेरिका और ब्रिटेन ने शेख हसीना को शरण देने से मना कर दिया और अब हो सकता है वह UAE से संपर्क करेगी। अमेरिका और ब्रिटेन दोनों मक्कार देश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने नंगे हो गए और साबित कर दिया कि चीन और पाकिस्तान के साथ वे भी शेख हसीना के तख्तापलट में शामिल है। 

है न कमाल की बात कि ये दोनों बड़े बड़े अपराधियों को अपने मुल्क में शरण देते हैं लेकिन 3 /4 बहुमत से जीतने वाली प्रधानमंत्री को पहले देश की आवाम को भड़का के हटाया और अब उसे आतंकियों को सौंप देना चाहते हैं।

तस्लीमा नसरीन का एक बयान आज बहुत वायरल हो रहा है जिसमे वह कह रही हैं कि “1999 में शेख हसीना ने इस्लामवादियों को खुश करने के लिए उन्हें बांग्लादेश से निकाल दिया था। जिन लोगों को शेख हसीना ने खुश किया था, आज उन्होंने ही उन्हें देश से निकाल दिया”।

तस्लीमा नसरीन का यह दावा बिल्कुल गलत है क्योंकि वह 1994 में बांग्लादेश को छोड़ चुकी थी और तब शेख हसीना सत्ता में नहीं थी, वह पहली बार प्रधानमंत्री 1996 में बनी थी। 

दुनियाभर के इस्लामिक देश आज खामोश हैं, 57 इस्लामिक देशों में से किसी एक ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जबकि अमेरिका ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों दे “शांतिपूर्ण” प्रदर्शन की अनुमति देते रहने की वकालत की है लेकिन किसी ने हिंदुओं पर हो रही बर्बरता और मंदिरों में तोड़फोड़, मूर्तियों को नष्ट करने और आग लगाने पर कोई एक शब्द नहीं बोला। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
बांग्लादेश का कोर्ट भी कैसे टूल किट का हिस्सा बन गया, जैसे कई बार भारत में भी दिखाई देता है, उसका सीधा उदाहरण सामने है। बांग्लादेश में प्रदर्शन चल ही रहे थे कि हाई कोर्ट ने 2018 में शेख हसीना ने जो Freedom  Fighters के परिवारों के लिए 30% आरक्षण ख़त्म किया था, उसे बहाल कर दिया और यह एक कारण था बड़े पैमाने पर हिंसा फैलने का। 

इतना ही नहीं जब हिंसा ज्यादा भड़की तो कोर्ट ने आग में घी डालने के लिए Freedom Fighters के आरक्षण को ख़त्म करने के साथ साथ 8% विकलांगों का, 10 % महिलाओं का और अक्सर बाढ़ में रहने वाले जिलों का 10% कोटा भी ख़त्म कर दिया।

यही टूक किट का काम था जिसके पीछे विदेशी शक्तियां थी।

शेख हसीना मुझे अभी भी लगता है सेना के संरक्षण में भारत आई है भारत सरकार को confidence में लेकर वरना अगर सेना उसके विरोध में होती तो उसे हेलीकॉप्टर और C-130 प्लेन क्यों देती बल्कि उसे देश भी नहीं छोड़ने देती और गिरफ्तार कर लेती।

अब एक और नंगा होने वाला व्यक्ति है तख्तापलट का मास्टरमाइंड नोबेल प्राइज विजेता मुहम्मद यूनुस जो कह रहा है कि मैं अंतरिम सरकार चलाने के लिए तैयार हूं  और इसे अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया भी जा रहा है।

बांग्लादेश में 1971 में 20% हिन्दू थे जो अब केवल 8% हैं यानी लगभग 1 करोड़ 30 लाख और लगता है जल्दी ही जिहादी उन्हें या तो भगा देंगे या कत्ल कर देंगे।

शेख हसीना के समय में 2010 की गरीबी 11.9% से घटकर 2022 में केवल 5% रह गई, GDP 2022 में 7.15 % हो गई लेकिन अब 5 साल बाद बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ हाथ में कटोरा लिए खड़ा होगा बाजार में।  

बांग्लादेश अब बनेगा पाकिस्तान, शेख हसीना राजनीति में नहीं लौटेंगी: तख्तापलट के बाद बोले शेख हसीना के बेटे – ‘अब देश हमारी समस्या नहीं’; CIA और जमाते इस्लामी का खेल

     शेख हसीना (बाएँ) और उनके बेटे सजीब वाजेद (चित्र साभार: Dhaka Tribune & Wikimedia Commons)
बांग्लादेश में तख्ता पलट होने से मोदी सरकार को अति सतर्क रहने की जरुरत है। कल तक बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी के साये से भी दूर रहने की बात बोलती थी वही ममता आज मोदी की हर बात मानने को तैयार है। स्पष्ट संकेत दे रही है, मामला जरुरत से ज्यादा गंभीर है। विपक्ष, जमायते इस्लामी, चीन, ISI और CIA आदि की हर गतिविधि पर भारत सरकार को गिद्ध की नज़र रखने की भी जरुरत है। 

राहुल गाँधी ने एक बार कहा था कि देश में kerosene फैला हुआ है बस माजिस दिखाने की जरुरत है आदि आदि। समय आ गया है कि राहुल के इस बयान को अति गंभीरता से लिया जाए अन्यथा नहीं। जिस तरह शेख हसीना कट्टरपंथियों पर नकेल डाल देश को प्रगति की राह पर ले जा रही थी, वहां के विपक्ष को यह रास नहीं आया और चुनाव का लगभग बहिष्कार ही कर दिया था। जबकि भारत में विपक्ष ने narrative चलाया कि 'मोदी आया तो संविधान बदल दिया जाएगा; देश में फिर दुबारा चुनाव नहीं होंगे", आदि आदि। बांग्लादेश और भारत के विपक्ष के प्रचार में समानता देखनी होगी। जिस तरह भारत में हुई प्रगति से विपक्ष ने जनता को गुमराह किया उसी तरह बांग्लादेश में भी हुआ। जिस तरह बांग्लादेश विपक्ष देश विरोधियों के हाथ की कठपुतली बन आग से खेल बांग्लादेश कोही जला दिया, ठीक उसी तरह मोदी विरोधी विदेशी ताकतों ने भी चुनावो में खूब पैसा खर्च किया। जिसकी सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई थी।      

शेख हसीना के undergarments लहराता 
उपद्रवी 
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट किए जाने के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है। बांग्लादेश में आवामी लीग के नेता और हिन्दू निशाने पर लिए जा रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़ कर भारत आ गई हैं। इस बीच उनके पुत्र सजीब वाजेद ने कहा है कि उनकी माँ इन सब से दुखी हैं। वाजेद ने कहा है कि बांग्लादेश के लोगों ने जो किया है, वह भुगतना अब उनकी जिम्मेदारी है।

Wion को दिए इंटरव्यू में वाजेद ने कहा, “बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह डरावना है। बांग्लादेश में अराजकता है, कानून का कोई राज नहीं है। भीड़ सड़कों पर घूम रही है, घरों, कारखानों में तोड़फोड़ कर रही है और मैंने जो

बंगबंधु मुजीब की मेटल पुतला भी तोड़ दिया 
सुना है उसके अनुसार वे अल्पसंख्यकों पर हमला कर रहे हैं। हमलावर अल्पसंख्यकों और हिंदू मंदिरों पर हमला कर रहे हैं। इसलिए बांग्लादेश सही में अराजकता की स्थिति में है।”

वाजेद ने बताया कि शेख हसीना सही हालत में हैं लेकिन काफी दुखी हैं। उन्होंने बताया कि शेख हसीना ने बांग्लादेश में काफी विकास किया जिसके उत्तर में उन्हें यह भुगतना पड़ा है। वाजेद ने चिंता जताई है कि बांग्लादेश अब दूसरा पाकिस्तान बन जाएगा। उन्होंने शेख हसीना की राजनीति में वापसी को भी नकार दिया है। उन्होंने बताया कि शेख हसीना अब 77 वर्ष की हैं और उनका वापस देश की राजनीति में लौटने का कोई विचार नहीं है।

वाजेद ने कहा बांग्लादेश के लोगों ने अपने नेता चुन लिए हैं और वहीं उन्हें मिलेंगे। वाजेद ने खुद के भी राजनीति में आने के कयासों पर रोक लगा दी। उन्होंने बताया कि उनकी भविष्य में ऐसी कोई योजना नहीं है। वाजेद ने कहा कि उनका परिवार तीन बार सैन्य तख्तापलट झेल चुका है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार बांग्लादेश को बचाते बचाते थक चुका है और अब बांग्लादेश के लोग खुद ही यह काम करें। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब उनकी समस्या नहीं है।

वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश के लोग कृतघ्न हैं। उन्होंने बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की मूर्तियाँ तोड़े जाने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि शेख हसीना ने बांग्लादेश को एक विफल देश से एशिया में बढ़ता हुआ देश बनाया और उनका कार्यकाल बांग्लादेश के लिए स्वर्णिम काल माना जाएगा।

वाजेद ने इन सब के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना भी की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हर मुद्दे पर बांग्लादेश की आलोचना की है और अब वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को मारे जाते हुए देखेंगे। उन्होंने कहा कि यही यह लोग चाहते थे। उन्होंने शेख हसीना के भविष्य को लेकर भी बात की।

उन्होंने बताया कि अब शेख हसीना अपने पोते-पोतियों के साथ वक्त बिताएँगी। वह अब कुछ दिन अपने बेटे-बेटी और बहन पास रहेंगी। वाजेद ने बांग्लादेश अंतरिम सरकार को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह सरकार कहीं दिख नहीं रही और कुछ कर भी नहीं पा रही है।

वाजेद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने कहा कि जितना ही सरकार इस्लामी प्रदर्शनकारियों के सामने झुकती गई, उतना ही वह आगे बढ़ते गए। उन्होंने बांग्लादेश में चुनावों के गड़बड़ होने के आरोप खारिज कर दिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अब जो कुछ होगा वहां के लोगों की जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं। उनके कुछ दिन भारत में रह कर आगे ब्रिटेन जाएँगी।

sheikh hasina son sajeeb wazed says bangladesh people ungrateful her mother will not return to politics

बांग्लादेश : पत्रकार-नेताओं की हत्या, मंदिर पर हमले… हिंदू बने आसान शिकार: शेख हसीना को छोड़ना पड़ा देश


बांग्लादेश में अराजक माहौल पैदा होने के बाद वहाँ की प्रधानमंत्री शेख हसीना को मुल्क छोड़ कर भागना पड़ा है। उनका विमान सोमवार (5 अगस्त, 2024) की शाम को गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। बता दें कि यहाँ भारतीय वायुसेना का बेस है। बता दें कि AJAX1431 कॉल साइन वाला C-130 एयरक्राफ्ट जैसे ही भारतीय सीमा की तरफ बढ़ा था, भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इसे ट्रैक कर रही थीं। विमान पटना के ऊपर से होकर उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ।

शेख हसीना के मुल्क छोड़ने के कुछ ही देर बाद वहाँ के सेनाध्यक्ष वकार-उज-जमान ने घोषणा की कि विपक्षी दलों के साथ सलाह-मशविरा कर नई अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका के धानमंडी स्थित ‘सुधा सदन’ को आग के हवाले कर दिया है। उससे पहले यहाँ लूटपाट मचाई गई। प्रदर्शनकारियों ने PM आवास ‘गण भवन’ में घुस कर भी लूटपाट की और के सामान तहस-नहस कर दिए।

ढाका स्थित शाहजमाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। वहीं इसी प्रदर्शन की आड़ में बांग्लादेश में हिन्दुओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। हरधन रॉय नामक हिन्दू पार्षद को रंगपुर में मार डाले जाने की खबर है। साथ ही ISKCON के मंदिरों में भी तोड़फोड़ मचाई गई है। काली मंदिरों में घुस कर भी प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। बांग्लादेश में पहले से ही हिन्दू डरे हुए हैं। 2021 के दशहरा के दौरान ईशनिंदा का झूठा आरोप लगा कर कई पूजा पंडालों और मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था।

हिन्दू पत्रकार की भी हत्या हुई है। रायगंज प्रेस क्लब को घेर कर प्रदर्शनकारियों ने पत्रकार प्रदीप कुमार भौमिक को मार डाला। इन सबके बीच भारत सरकार से भी हस्तक्षेप की माँग की जा रही है। हिन्दू संगठनों का कहना है कि मोदी सरकार को बांग्लादेश की नई व्यवस्था और फ़ौज के समक्ष ये स्पष्ट कर देना चाहिए कि वहाँ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। भारत में कई वामपंथी इस अराजकता को ‘युवा शक्ति व लोकतंत्र की जीत’ बता कर इसका महिमामंडन कर रहे हैं। जबकि मुल्क के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति ही तोड़ डाली गई है।

बांग्लादेश में फौज ने सँभाली कमान, बोले जनरल वकार जमान- जल्द बनेगी अंतरिम सरकार: दावा- इस्तीफे के बाद भारत आईं शेख हसीना, लंदन जाएँगी


भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट की आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त माह में हुई देशव्यापी हिंसा के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफ़ा देने की सूचना आ रही है। बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी प्रधानमंत्री आवास में घुस गए हैं।

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये ऐलान बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने मीडिया के आगे किया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शेख हसीना के बाद अब सेना मुल्क में अंतरिम सरकार बनाएगी।

इस संबंध में आर्मी ने देश की प्रमुख पार्टियों के साथ मिलकर बैठक की है। अब 18 सदस्यीय अंतरिम सरकार प्रस्तावित की गई है। सेना इस सरकार को बनाएगी। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने कहा कि जो हत्या हुई उस पर न्याय होगा। हमने सभी दलों से बात की। हमारे बीच एक अच्छी बातचीत हुई है।

उन्होंने बताया, “पीएम शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। हम अंतरिम सरकार का गठन करके शासन करेंगे। हमारे देश का नुकसान हो रहा है। संपत्ति का नुकसान हो रहा है। मुझे दायित्व दीजिए, मैं सब संभाल लूँगा।” सेना प्रमुख ने जमान ने कहा, “आपकी जो माँग है उसे हम पूरा करेंगे। देश में शांति वापस लाएँगे। तोड़फोड़-आगजनी मारपीट से दूर रहिए। आप लोग हमारे साथ मिलकर चलेंगे तो हालात सुधरेंगे। मारपीट हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा। संघर्ष और अराजकता से दूर रहिए।”

बता दें कि मीडिया में सुबह से बांग्लादेश में हो रही हिंसा की खबरों के बीच आज दोपहर बताया गया कि पीएम शेख हसीना ने मिलिट्री हेलीकॉप्टर से उड़ान भर ली है। वह मुल्क छोड़ने से पहले अपना एक भाषण रिकॉर्ड करना चाहती थीं, हालाँकि उनको इसका मौका नहीं मिला। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ उनकी ओर बढ़ने लगी और उन्हें न चाहते हुए भी मुल्क को छोड़ना पड़ा। अब वह भारत के उत्तरपूर्वी इलाके अगरतला में उतरी हैं। सूत्रों से दी जा रही खबर के अनुसार भारत ने उनकी सेफ पैसेज की व्यवस्था की है। आगे वह लंदन जाएँगी।

शेख हसीना ने छोड़ा बांग्लादेश

आरक्षण के नाम पर मुल्क की सड़कों पर उतरी 4 लाख के करीब भीड़ के हिंसक होने से 100 के करीबन लोगों की मौत हो गई है। वहीं सैंकड़ों लोग घायल हैं। रविवार को इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के कारण एक ही थाने में 13 पुलिसकर्मियों की मॉब लिंचिंग हुई थी। वहीं अब तक 10 बिलियन डॉलर इकोनॉमी का नुकसान हो गया है। शेख हसीना के इस्तीफे तक पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगा था। अब सेना की जब अंतरिम सरकार बनने जा रही है तो सेना प्रमुख ने कहा कि कर्फ्यू की कोई जरूरत नहीं, वो खुद सब संभाल लेंगे।

बांग्लादेश-म्यांमार को तोड़कर ईसाई मुल्क बनाना चाहते हैं गोरी चमड़ी वाले देश: शेख हसीना, प्रधानमंत्री

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि उनके देश के हिस्सों को तोड़ कर ईसाई मुल्क बनाए जाने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्से मिला कर गोरे लोगों वाला एक देश यहाँ एक ईसाई मुल्क बनाना चाहता है।

 प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक कायर्क्रम में यह खुलासे किए हैं। यह कार्यक्रम बांग्लादेश के आम चुनावों के बाद 14 पार्टियों की एक बैठक को लेकर रखा गया था। इसकी शुरुआत पीएम शेख हसीना के भाषण से हुई। पीएम हसीना सत्ताधारी अवामी लीग की अध्यक्ष भी हैं।

पीएम शेख हसीना ने कहा कि म्यांमार और बांग्लादेश के हिस्से काट कर एक ईसाई मुल्क बनाए जाने की साजिश है, जो कि पूर्वी तिमोर की तर्ज पर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे बांग्लादेश के चट्टोगाम और म्यांमार के सीमाई इलाके लेकर बनाया जाएगा, इसी के साथ बंगाल की खाड़ी में एक सैन्य ठिकाना बनाए जाने की भी योजना है।

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि यह सब गोरी चमड़ी वाले देश के लोग करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रस्ताव मिला था कि यदि वह इस देश को बंगाल की खाड़ी में अपना सैन्य अड्डा बनाए जाने की अनुमति दे दें तो उनका दोबारा चुन कर आना काफी आसान कर दिया जाएगा। हालाँकि, उन्होंने देश का नाम नहीं लिया।

शेख हसीना ने कहा कि वह अपने देश के हिस्सों को बेच कर सत्ता में नहीं आना चाहती थीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अभी आगे और भी समस्याएँ बांग्लादेश के लिए खड़ी की जाएँगी, लेकिन उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने नया ईसाई मुल्क बनाने के बारे में कहा कि साजिश करने वालों की नजरें बंगाल की खाड़ी पर हैं।

शेख हसीना ने अपने बयान में नए मुल्क बनाने की कोशिश करने वाले देश का नाम नहीं लिया लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनका इशारा अमेरिका की तरफ था। इससे पहले भी वह आरोप लगा चुकी हैं कि अमेरिका उनकी सरकार का तख्तापलट करके इस्लामी कट्टरपंथियों को सत्ता में बिठाना चाहता है।

अमेरिका बांग्लादेश के चुनावों पर भी लगातार प्रश्न उठाता आया है, उसने बांग्लादेश के कई अधिकारियों पर अमेरिका में घुसने पर रोक लगाई थी। वहीं शेख हसीना ने पूर्वी तिमोर का उदाहरण दिया जो कि एक ईसाई मुल्क है और 2002 में ही बना है।

तिमोर द्वीप के एक हिस्से में बसे इस देश को पुर्तगाल ने 1974 में छोड़ दिया था, इसके बाद इस पर इंडोनेशिया का कब्जा हो गया। हालाँकि, यहाँ कई समूह पैदा हो गए जिन्होंने तिमोर के एक हिस्से को आजाद करवा लिया। तिमोर में 99% जनता ईसाई है।

मालद्वीप की राह पर बांग्लादेश विपक्ष :विपक्ष के ‘इंडिया आउट’ अभियान पर बांग्लादेश की शेख हसीना का पलटवार, बोलीं –‘बीवियों की साड़ियाँ जलाओ’: भारतीय मसालों के बिना पका खाना खाकर दिखाओ

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वहाँ की विपक्षी पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘इंडिया आउट’ कैम्पेन पर जम कर बरसी हैं। इस्लामी मुल्क में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) भारत के खिलाफ अभियान चला रही है। वहीं शेख हसीना, जिन्होंने हाल ही में लगातार चौथा चुनाव जीता है, वो भारत के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्तों के लिए जानी जाती हैं। शेख हसीना को अक्सर साड़ी में देखा जाता है और उन्होंने विपक्ष पर हमले के लिए इसी पहनावे का इस्तेमाल किया गया।

शेख हसीना और उनकी ‘आवामी लीग’ पार्टी के विरोधी अक्सर उन्हें प्रो-इंडिया साबित करने में लगी है। इनका दावा है कि जनवरी 2024 में हुए चुनावों में ‘आवामी लीग’ की जीत में भारत की भूमिका है। इसके बाद उन्होंने भारतीय उत्पादों के बहिष्कार को लेकर अभियान छेड़ दिया। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद कुछ दिनों तक शेख हसीना चुप रही, लेकिन अब उन्होंने BNP को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पूछा है कि BNP नेताओं की पत्नियाँ कितनी साड़ियाँ पहनती हैं?

शेख हसीना ने कहा कि BNP के नेता भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की बात कर रहे हैं, उसमें वो अपनी बीवियों को क्यों नहीं ले जा रहे हैं। शेख हसीना की ये बात सुन कर वहाँ मौजूद लोग हँस पड़े। उन्होंने चुनौती दी कि BNP के नेता अपनी पार्टी के दफ्तर के सामने अपनी बीवियों की साड़ियाँ जलाएँ, तभी ये अच्छी तरह साबित होगा कि वो भारतीय उत्पादों के बहिष्कार को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नेता और उनकी पत्नियाँ भारत से साड़ियाँ खरीद कर उन्हें बांग्लादेश में बेचती थीं।

उन्होंने बताया कि जब BNP सत्ता में थी तब तब उन्होंने देखा था कि उसके नेताओं की बीवियाँ समूह में विमान से भारत जाती थीं और भारतीय साड़ियाँ खरीदती थीं। इसके बाद वो बांग्लादेश में इन साड़ियों को बेचती थीं। उन्होंने बताया कि ये औरतें भारत से मसाले भी लाती थीं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भारत से मसलों का आयात करते हैं, प्याज, लहसुन और अदरक समेत कई खाने की वस्तुएँ लेते हैं। उन्होंने पूछा कि BNP के नेता अपने घरों में भारतीय मसलों के बिना भोजन क्यों नहीं पकता?

शेख हसीना ने कहा कि इन विपक्षी नेताओं को भारतीय मसालों के बिना बना हुआ भोजन करना चाहिए। बता दें कि मालदीव की तर्ज पर ही बांग्लादेश में ये अभियान शुरू किया गया था। तेल, प्रोसेस्ड फ़ूड, बाथरूम के सामान, मेकअप की वस्तुएँ और कपड़ों समेत कई भारतीय वस्तुओं को ढाका के बाजार में दुकानदारों ने लेना बंद कर दिया था। यूरोप-अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशियों प्रवासियों ने ‘इंडिया आउट’ अभियान का नेतृत्व किया। हालाँकि, इसका अधिकतर प्रभाव सोशल मीडिया तक ही सीमित रहा।