शेख हसीना और मोहम्मद युनूस
बांग्लादेश में हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों का अत्याचार बढ़ रहा है और उसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है यह बात किसी से अब छिपी नहीं है। हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बांग्लादेश की सरकार में नफरत किस कदर हावी हो गई है उसका अंदाजा यूनुस के चीफ एडवाइजर और प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम के बयान से लगाया जा सकता है। शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में हिंदू संगठनों की तुलना पालतू कुत्तों से की है।
शफीकुल आलम ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ‘भारत-बांग्लादेश’ के रिश्तों को लेकर कहा है कि भारत को बांग्लादेश को भूटान नहीं समझना चाहिए। आलम ने कहा, “हसीना के दौर में खुलेआम चुनाव में धांधली हुई। इसके बावजूद किसने हसीना का समर्थन किया, लोग ये सब समझते हैं। मुझे लगता है कि यूनुस, शेख हसीना की वापसी चाहते हैं। वे वहाँ रहकर बांग्लादेश में लोगों को भड़का रही हैं।”
कट्टरंपथी उस्मान हादी की हत्या को लेकर आलम ने कहा कि उस्मान को अवामी लीग (शेख हसीना की पार्टी) के समर्थकों ने मारा है। आलम ने कहा, “हमारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अवामी लीग के सीनियर लीडर ने हादी को मरवाने के लिए फंडिंग की है।” बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर भी आलम ने खुलेआम झूठ बोला है। आलम का दावा है कि कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। उसके मुताबिक, अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है।
वहीं, जब आलम से सवाल किया गया कि ‘हिंदू अल्पसंख्यक कम्युनिटी’ अपराध बढ़ने का डेटा जारी किया है। इस पर आलम ने कहा कि ऐसे संगठनों के नेता अवामी लीग से मिले हुए हैं। आलम ने कहा, “डेटा में से कोई भी घटना कम्युनल किलिंग की नहीं है। ज्यादातर मामले लूटपाट, आपसी रंजिश के हैं। बांग्लादेश हिंदू, बुद्ध, क्रिश्चियन परिषद नाम के संगठन और लोग हसीना के पालतू कुत्तों की तरह के हैं।”
No comments:
Post a Comment