India-US Trade Deal की सबसे जरूरी बातों को समझें: मोदी सरकार ने कृषि-डेयरी सेक्टर को प्रोटेक्ट करने के लिए उठाए कदम


भारत और अमेरिका के बीच फरवरी 2026 में जिस अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Agreement के ढाँचे पर सहमति बनी है, उसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता, सप्लाई चेन संकट और भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है।

भारत और अमेरिका, दोनों ही देश इस बात को समझते हैं कि आने वाले समय में व्यापार केवल मुनाफे का साधन नहीं रहेगा, बल्कि भरोसेमंद साझेदारी, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन का मजबूत आधार बनेगा।

यही वजह है कि इस अंतरिम ट्रेड डील को जल्दबाजी में किया गया फैसला नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक संतुलित ढाँचा कहा जा रहा है।

इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि जहाँ एक ओर भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका का विशाल बाजार खुलने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर भारत ने अपने किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण आजीविका से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।

मोदी ने बताया दोनों देशों के लिए अच्छी खबर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को X पर एक पोस्ट में इसे भारत-अमेरिका के लिए बहुत अच्छी खबर बताया है। PM मोदी ने कहा, “दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के लिए एक ढाँचा तय हुआ है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने में व्यक्तिगत रुचि दिखाई।”

उन्होंने लिखा, “यह ढाँचा हमारे साझेदारी संबंधों में बढ़ती गहराई, भरोसे और ऊर्जा को दिखाता है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी और भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, MSMEs, स्टार्टअप इनोवेटर्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। भारत और अमेरिका दोनों नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ढाँचा निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगा।”

वहीं केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खुलेंगे। उन्होंने कहा, “इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे उद्योगों (MSMEs), किसानों और मछुआरों को होगा। निर्यात बढ़ने से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।”

अंतरिम ट्रेड डील का मतलब क्या है और यह क्यों जरूरी थी?

अंतरिम ट्रेड डील का सीधा मतलब है कि यह कोई अंतिम या पूर्ण व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाले बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement- BTA) की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है।

फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BTA की औपचारिक शुरुआत की थी, लेकिन ऐसे व्यापक समझौतों को अंतिम रूप देने में आमतौर पर कई साल लग जाते हैं। इसी देरी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने तय किया कि पहले एक ऐसा ढाँचा बनाया जाए, जिससे व्यापारिक रिश्तों को तुरंत गति मिल सके।

इस अंतरिम ढाँचे के जरिए दोनों देशों ने बाजार तक पहुँच बढ़ाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर सहमति जताई है।

यह समझौता इस बात का भी संकेत देता है कि भारत और अमेरिका लंबे समय तक आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे वैश्विक व्यापार में एक-दूसरे को रणनीतिक साझेदार के रूप में देखते हैं।

अमेरिका का बाजार खुला: भारत को व्यापार और निर्यात में क्या मिला?

इस समझौते से भारत को जो सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है, वह है अमेरिका के 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल बाजार तक बेहतर और आसान पहुँच। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा होंगे।

खास बात यह है कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय सामान वहाँ पहले के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ चुनिंदा मशीनरी जैसे सेक्टरों को इस फैसले से सीधा फायदा मिलेगा।

ये वही क्षेत्र हैं, जिनमें भारत में बड़ी संख्या में छोटे उद्योग, कारीगर और श्रमिक काम करते हैं। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं, रत्न और आभूषण, हीरे और विमान के पुर्जों जैसे उत्पादों पर अमेरिका ने टैरिफ पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है, जिससे भारत की निर्यात क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा दोनों दोनों देश टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, जिसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले दूसरे इक्विपमेंट शामिल हैं, इनमें ट्रेड बढ़ाने और उभरते टेक्नोलॉजी सेक्टर में जॉइंट कोऑपरेशन को बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं।

किन सेक्टरों में रोजगार और MSMEs को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह अंतरिम ट्रेड डील केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए नहीं, बल्कि छोटे उद्योगों के लिए भी अहम मानी जा रही है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, हस्तशिल्प और होम डेकोर जैसे क्षेत्रों में MSMEs की बड़ी भागीदारी है। अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की माँग पहले से मौजूद है और अब टैरिफ कम होने से भारतीय उत्पाद वहां और तेजी से पहुंच सकेंगे।

सरकार का दावा है कि निर्यात बढ़ने से उत्पादन बढ़ेगा और इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा। महिलाओं और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ श्रम की जरूरत ज्यादा होती है। मछुआरों और फिशरी सेक्टर को भी अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है, जिससे तटीय इलाकों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी।

अनाज, मसाले और सब्जियाँ: किसानों को कैसे मिला पूरा संरक्षण?

इस समझौते का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलू कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। यही वजह है कि गेहूँ, चावल, मक्का और सोयाबीन जैसे प्रमुख अनाजों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

                                                         (साभार:एक्स @ Piyushgoyal)

इसका मतलब यह है कि अमेरिकी अनाज भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर नहीं आ सकेंगे और घरेलू किसानों को कीमतों में गिरावट का डर नहीं रहेगा।

गौरतलब है कि इस ट्रेड डील को लेकर विपक्ष ने भी अफवाहें फैला कर किसानों और छोटे उद्यमियों के भड़काने की कम कोशिश नहीं की थी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केंद्र सरकार को भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की भी चेतावनी दी थी।

उस दौरान भी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयान का हवाला देते हुए खरगे के तमाम आरोपों का खंडन करते हुए बताया था कि यह समझौता समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुँचाएगा। भाषण में खरगे ने कहा था कि व्यापार समझौता किसानों को बर्बाद कर देगा।

इसी तरह कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था, “मोदी सरकार ने अमेरिका के सभी कृषि उत्पादों पर जीरो शुल्क लगाने का जो निर्णय किया है उससे एक बात साफ है कि अमेरिका से आने वाला कपास, गेहूँ, सब्जियाँ और दूसरे कृषि उत्पाद भारतीय किसानों की फसलों पर संकट होगा।”

जबकि आँकड़े साफ कहते हैं कि यह समझौता सिर्फ किसानों के हितों को ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र के तमाम कारीगरों को भी पूरी तरह से ध्यान में रखकर लिया गया है। मसालों के मामले में भी भारत ने पूरी सख्ती दिखाई है। काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, चक्रफूल, कसिया, सरसों, राई और अन्य पाउडर मसालों को पूरा संरक्षण दिया गया है।

                                                     (साभार:एक्स @ Piyushgoyal)

भारत की पहचान ही मसालों से जुड़ी हुई है और इनसे लाखों किसानों की रोजी-रोटी चलती है। इस समझौते में यह सुनिश्चित किया गया है कि अमेरिकी मसाले या उनके विकल्प भारतीय बाजार में आकर घरेलू उत्पादन को नुकसान न पहुँचा सकें।

सब्जियों के मामले में भी आलू, मटर, बीन्स और अन्य दलहनी सब्जियों के साथ-साथ फ्रोजन, डिब्बाबंद और अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियों पर कड़ा नियंत्रण रखा गया है, ताकि सब्जियों के मामले में भी भारतीय किसानों की आमदनी सुरक्षित रहे।

                                                         (साभार:एक्स @ Piyushgoyal)

डेयरी सेक्टर क्यों रहा सरकार की ‘रेड लाइन’?

डेयरी सेक्टर को लेकर भारत ने इस समझौते में सबसे कड़ा रुख अपनाया है। दूध, क्रीम, बटर, घी, चीज, योगर्ट, बटर मिल्क, व्हे प्रोडक्ट्स और अन्य डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। अमेरिका जैसे देश की बड़ी डेयरी कंपनियों को भारतीय बाजार में सीधी एंट्री नहीं दी गई है।

                                                       (साभार:एक्स @ Piyushgoyal)

इसका सीधा फायदा भारत के करोड़ों छोटे पशुपालकों को मिलेगा, जिनकी आजीविका दूध उत्पादन पर निर्भर है। भारत का डेयरी सेक्टर सहकारी मॉडल पर आधारित है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस समझौते ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के नाम पर इस सेक्टर को कमजोर न किया जाए।

मेक इन इंडिया, तकनीक और भविष्य की साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत और अमेरिका दोनों के लिए अच्छी खबर बताते हुए कहा है कि यह ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा और निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाएगा। दोनों देश इनोवेशन, डेटा सेंटर्स, जीपीयू, ऊर्जा और उन्नत तकनीकी उत्पादों के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं।

भारत ने अगले पाँच साल में अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पाद, विमान और तकनीक खरीदने का इरादा भी जताया है, जिससे व्यापार संतुलन बना रहेगा और सप्लाई चेन मजबूत होगी। भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील का यह ढाँचा केवल व्यापार बढ़ाने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक संतुलित समझौता है, जिसमें भारत ने अपने किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

एक तरफ जहाँ भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका का विशाल बाजार खुल रहा है, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील कृषि और खाद्य उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। यही संतुलन इस समझौते को खास बनाता है और यही कारण है कि इसे भारत के दीर्घकालिक आर्थिक हितों के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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