शेख हसीना (बाएँ) और उनके बेटे सजीब वाजेद (चित्र साभार: Dhaka Tribune & Wikimedia Commons)
बांग्लादेश में तख्ता पलट होने से मोदी सरकार को अति सतर्क रहने की जरुरत है। कल तक बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी के साये से भी दूर रहने की बात बोलती थी वही ममता आज मोदी की हर बात मानने को तैयार है। स्पष्ट संकेत दे रही है, मामला जरुरत से ज्यादा गंभीर है। विपक्ष, जमायते इस्लामी, चीन, ISI और CIA आदि की हर गतिविधि पर भारत सरकार को गिद्ध की नज़र रखने की भी जरुरत है।
राहुल गाँधी ने एक बार कहा था कि देश में kerosene फैला हुआ है बस माजिस दिखाने की जरुरत है आदि आदि। समय आ गया है कि राहुल के इस बयान को अति गंभीरता से लिया जाए अन्यथा नहीं। जिस तरह शेख हसीना कट्टरपंथियों पर नकेल डाल देश को प्रगति की राह पर ले जा रही थी, वहां के विपक्ष को यह रास नहीं आया और चुनाव का लगभग बहिष्कार ही कर दिया था। जबकि भारत में विपक्ष ने narrative चलाया कि 'मोदी आया तो संविधान बदल दिया जाएगा; देश में फिर दुबारा चुनाव नहीं होंगे", आदि आदि। बांग्लादेश और भारत के विपक्ष के प्रचार में समानता देखनी होगी। जिस तरह भारत में हुई प्रगति से विपक्ष ने जनता को गुमराह किया उसी तरह बांग्लादेश में भी हुआ। जिस तरह बांग्लादेश विपक्ष देश विरोधियों के हाथ की कठपुतली बन आग से खेल बांग्लादेश कोही जला दिया, ठीक उसी तरह मोदी विरोधी विदेशी ताकतों ने भी चुनावो में खूब पैसा खर्च किया। जिसकी सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई थी।
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट किए जाने के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है। बांग्लादेश में आवामी लीग के नेता और हिन्दू निशाने पर लिए जा रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़ कर भारत आ गई हैं। इस बीच उनके पुत्र सजीब वाजेद ने कहा है कि उनकी माँ इन सब से दुखी हैं। वाजेद ने कहा है कि बांग्लादेश के लोगों ने जो किया है, वह भुगतना अब उनकी जिम्मेदारी है।
शेख हसीना के undergarments लहराता
उपद्रवी
Wion को दिए इंटरव्यू में वाजेद ने कहा, “बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह डरावना है। बांग्लादेश में अराजकता है, कानून का कोई राज नहीं है। भीड़ सड़कों पर घूम रही है, घरों, कारखानों में तोड़फोड़ कर रही है और मैंने जो
सुना है उसके अनुसार वे अल्पसंख्यकों पर हमला कर रहे हैं। हमलावर अल्पसंख्यकों और हिंदू मंदिरों पर हमला कर रहे हैं। इसलिए बांग्लादेश सही में अराजकता की स्थिति में है।”
बंगबंधु मुजीब की मेटल पुतला भी तोड़ दिया
वाजेद ने बताया कि शेख हसीना सही हालत में हैं लेकिन काफी दुखी हैं। उन्होंने बताया कि शेख हसीना ने बांग्लादेश में काफी विकास किया जिसके उत्तर में उन्हें यह भुगतना पड़ा है। वाजेद ने चिंता जताई है कि बांग्लादेश अब दूसरा पाकिस्तान बन जाएगा। उन्होंने शेख हसीना की राजनीति में वापसी को भी नकार दिया है। उन्होंने बताया कि शेख हसीना अब 77 वर्ष की हैं और उनका वापस देश की राजनीति में लौटने का कोई विचार नहीं है।
वाजेद ने कहा बांग्लादेश के लोगों ने अपने नेता चुन लिए हैं और वहीं उन्हें मिलेंगे। वाजेद ने खुद के भी राजनीति में आने के कयासों पर रोक लगा दी। उन्होंने बताया कि उनकी भविष्य में ऐसी कोई योजना नहीं है। वाजेद ने कहा कि उनका परिवार तीन बार सैन्य तख्तापलट झेल चुका है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार बांग्लादेश को बचाते बचाते थक चुका है और अब बांग्लादेश के लोग खुद ही यह काम करें। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब उनकी समस्या नहीं है।
वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश के लोग कृतघ्न हैं। उन्होंने बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की मूर्तियाँ तोड़े जाने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि शेख हसीना ने बांग्लादेश को एक विफल देश से एशिया में बढ़ता हुआ देश बनाया और उनका कार्यकाल बांग्लादेश के लिए स्वर्णिम काल माना जाएगा।
वाजेद ने इन सब के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना भी की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हर मुद्दे पर बांग्लादेश की आलोचना की है और अब वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को मारे जाते हुए देखेंगे। उन्होंने कहा कि यही यह लोग चाहते थे। उन्होंने शेख हसीना के भविष्य को लेकर भी बात की।
उन्होंने बताया कि अब शेख हसीना अपने पोते-पोतियों के साथ वक्त बिताएँगी। वह अब कुछ दिन अपने बेटे-बेटी और बहन पास रहेंगी। वाजेद ने बांग्लादेश अंतरिम सरकार को लेकर चिंता जताई और कहा कि यह सरकार कहीं दिख नहीं रही और कुछ कर भी नहीं पा रही है।
वाजेद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने कहा कि जितना ही सरकार इस्लामी प्रदर्शनकारियों के सामने झुकती गई, उतना ही वह आगे बढ़ते गए। उन्होंने बांग्लादेश में चुनावों के गड़बड़ होने के आरोप खारिज कर दिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अब जो कुछ होगा वहां के लोगों की जिम्मेदारी है।
— Sajeeb Wazed (@sajeebwazed) August 5, 2024
गौरतलब है कि बांग्लादेश में जुलाई महीने से ही आरक्षण खत्म करने की माँग को लेकर प्रदर्शन चल रहे थे। इस प्रदर्शन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाइजैक कर लिया और इसके बाद भारी हिंसा हुई। यह हिंसा अगस्त में और बढ़ गई और प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार (5 अगस्त, 2024) को ढाका छोड़ कर भारत आ गईं। वर्तमान में वह भारत में हैं। उनके कुछ दिन भारत में रह कर आगे ब्रिटेन जाएँगी।
sheikh hasina son sajeeb wazed says bangladesh people ungrateful her mother will not return to politics

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