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ईरान से मोहब्बत है तो वहीं जाओ : पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का शिया मौलवियों को दो टूक : भड़के मौलवियों ने जिया-उल-हक के दौर से की तुलना

                                      ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ (फोटो साभार: न्यूज 18)
पाकिस्तान में गुरुवार (19 मार्च 2026) को हुई एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक के बाद शिया मौलवी, फौज के मुखिया आसिम मुनीर पर भड़के हुए हैं। रावलपिंडी स्थित फौज के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने शिया मौलवियों से बातचीत की। इस दौरान मुनीर ने मौलानाओं से कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ, मैं आपको बता दूँ कि जिन्ना एक शिया थे।”

शिया समुदाय ने मुनीर के इस लेक्चर को अपने अपमान के रूप में लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बैठक में एक दर्जन से अधिक शिया उलेमा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत का माहौल शुरुआत से ही संतुलित नहीं रहा।

 शिया मौलवियों ने कहा कि आर्मी चीफ मुनीर ने लंबे समय तक केवल अपनी बात रखी और उलेमा को बीच में बोलने या अपनी बात विस्तार से रखने का मौका ही नहीं दिया गया। इससे बैठक धीरे-धीरे एकतरफा होती चली गई और कई मुद्दों पर असहमति उभरकर सामने आई।

शिया धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया और आरोप

शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इस्लामाबाद में शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने खुलासा किया कि बैठक के दौरान असीम मुनीर का रवैया काफी सख्त और आपत्तिजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान फील्ड मार्शल ने शिया समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।

नजफी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में ही असीम मुनीर ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों पर नाराजगी जताई। उन्होंने खासतौर पर फौज की एक इमारत को जलाए जाने की घटना को अस्वीकार्य बताया।

नजफी के अनुसार, माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया तो उन्होंने खुद हस्तक्षेप करते हुए मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी भी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामा अमीर हयात को ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से सम्मानित किया जा चुका है और उनके अन्य परिजन भी फौज में रह चुके हैं।

नजफी का कहना है कि इस पर असीम मुनीर का लहजा कुछ नरम पड़ा लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर वही टिप्पणी दोहराई कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतना लगाव है, तो उन्हें वहाँ चले जाना चाहिए। इस पर नजफी ने गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या कभी किसी शिया व्यक्ति ने इस्लामाबाद या कराची में किसी फौजी की हत्या की है?

उन्होंने यह भी कहा कि जिन तत्वों ने फौजियों के साथ बर्बरता की घटनाएँ कीं, क्या उनसे कभी यह कहा गया कि वे अफगानिस्तान चले जाएँ? लेकिन आज शिया समुदाय को इस तरह की बातें सुननी पड़ रही हैं। नजफी ने कहा कि असीम मुनीर ने बैठक में बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब पर हमला जारी रखता है तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।

जिया-उल-हक दौर से तुलना, शिया समुदाय के हालात पहले से ही खराब

शिया मौलवी सैयद जवाद नकवी ने पूरे घटनाक्रम की तुलना जिया-उल-हक के दौर से की। उनका कहना है कि उस समय की तरह अब भी एक खास सोच को थोपने का माहौल बनता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभक्ति की परिभाषा को सीमित किया जा रहा है और ईरान जैसे देशों से मजहबी या भावनात्मक जुड़ाव को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में मजहबी अल्पसंख्यकों, खासकर शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय स्थिति चिंताजनक है। एक ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम रही है।

एथेंस स्थित संस्था डायरेक्टस के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन ना केवल अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं बल्कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन एजेंसियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

रिपोर्ट में हाल ही में इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का उल्लेख किया गया है जिसमें 36 लोगों की मौत और करीब 170 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान में शिया आबादी कुल आबाद की करीब 10-15% है और यह बहुसंख्यक सुन्नी समुदायों के निशाने पर रहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिया, हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी समुदाय न केवल हिंसा बल्कि भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का भी सामना कर रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हवाले से यह भी कहा गया है कि कई मामलों में आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे हमलों को बढ़ावा मिल रहा है।

बांग्लादेश तख्तापलट में CIA का था हाथ, हसीना की पीठ में छुरा घोंपने वाला था आर्मी चीफ वकार: ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश’ में पूर्व गृह मंत्री का दावा, बोले- अभिमन्यु की तरह घिरी थीं शेख हसीना

                                 बांग्लादेश में सत्ता के तख्तापल्ट में CIA का हाथ होने का दावा
बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापल्ट के बाद से कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इसमें सैन्य हस्तक्षेप से लेकर अमेरिकी की खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका तक की अलग-अलग जगहों पर चर्चा की जा रही थी। अब एक किताब में यह दावा किया गया है कि दरअसल शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के पीछे CIA का हाथ था।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के दौर में गृह मंत्री रहे असदुज्जमाँ खान कमाल ने इस तख्तापलट को ‘CIA की सटीक साजिश’ बताते हुए देश के सेना प्रमुख और हसीना के रिश्तेदार वकर-उज-जमाँ पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। असदुज्जमाँ खान ने दावा किया है कि वकार-उज-जमाँ CIA की जेब में है और उन्होंने हसीना की पीठ में छुरा घोंप दिया है।

यह चौंकाने वाला खुलासा दीप हलदर, जयदीप मजूमदार और साहिदुल हसन खोकन द्वारा लिखित और जगरनॉट द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन’ में किया गया है। हालाँकि, यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।

                                                        इंशाअल्लाह बांग्लादेश पुस्तक

पुस्तक में असदुज्जमाँ खान के हवाले से लिखा गया है, “यह हसीना को उखाड़ फेंकने के लिए लंबे समय से रची गई CIA की एक सटीक साजिश थी। हमें नहीं पता था कि वकार पर CIA का हाथ था।” कुछ समय पहले तक बांग्लादेश के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स रहे असदुज्जमाँ खान ने बताया है, “हमें नहीं पता था कि जनरल वकार-उज-जमाँ CIA के पे-रोल पर हैं।”

असदुज्जमाँ ने बताया कि उनके देश की प्राथमिक रक्षा खुफिया एजेंसी, बांग्लादेश के सैन्य खुफिया महानिदेशालय और साथ ही बांग्लादेश की प्रमुख नागरिक खुफिया एजेंसी, राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया ने प्रधानमंत्री हसीना को यह चेतावनी नहीं दी थी कि वकार ने उन्हें धोखा देने का मन बना लिया है। साथ ही, उन्होंने शक जताया है कि इस साजिश में में शीर्ष अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

क्यों किया CIA ने तख्तापलट?

असदुज्जमाँ खान ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) दक्षिण एशिया में मजबूत नेतृत्व नहीं चाहती। उनका कहना है कि अमेरिका ऐसे देशों में कमजोर सरकारें देखना पसंद करता है ताकि अपने हितों को आसानी से साध सके। जब उनसे पूछा गया कि CIA के सहयोग से बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन करने से अमेरिका को क्या फायदा होगा।

उन्होंने कहा, “इसके दो कारण हैं। पहला, दक्षिण एशिया में बहुत ज्यादा शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष न हों। नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और शेख हसीना जैसे मजबूत नेता अगर उपमहाद्वीप पर राज करें, तो CIA के लिए अपने हित साधना मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी रणनीति हमेशा कमज़ोर सरकारों के साथ काम करने की रही है।” खान ने यह भी दावा किया कि इसके पीछे एक तात्कालिक कारण सेंट मार्टिन द्वीप था।

उनका कहना है कि भारतीय प्रेस अब इस पर रिपोर्ट कर रही है लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हमें बहुत पहले ही आगाह कर दिया था कि अमेरिका उन्हें सत्ता से बाहर करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह सेंट मार्टिन द्वीप पर अपना नियंत्रण चाहता है।

सेंट मार्टिन द्वीप क्यों चाहता है अमेरिका?

सेंट मार्टिन द्वीप को लेकर पहले शेख हसीना खुद भी ऐसा ही दावा कर चुकी हैं। हसीना ने सत्ता गँवाने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अगर वह इस द्वीप को अमेरिकियों को सौंप दें तो वह बिना किसी समस्या के सत्ता में बनी रह सकती हैं।

भौगोलिक दृष्टि से सेंट मार्टिन द्वीप की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के किसी भी हिस्से से समुद्री मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह एक प्रमुख जलमार्ग होने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा के करीब स्थित 7.3 किलोमीटर लंबा यह द्वीप समुद्र तल से लगभग 3.6 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है।

माना जाता है कि लगभग 5,000 वर्ष पहले यह टेकनाफ प्रायद्वीप का हिस्सा था लेकिन धीरे-धीरे समुद्र में डूब गया। करीब 450 वर्ष पूर्व इसका दक्षिणी भाग फिर से उभरा और अगले 100 वर्षों में उत्तरी और शेष भाग भी समुद्र से ऊपर उठ आए। वर्ष 1900 में ब्रिटिश भारत ने भूमि सर्वेक्षण के दौरान इस द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे चटगाँव के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मार्टिन के नाम पर सेंट मार्टिन द्वीप कहा गया।

इस द्वीप से बंगाल की खाड़ी और आस-पास के समुद्री इलाकों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे यह बांग्लादेश के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बन जाता है। दक्षिण एशिया के परिप्रेक्ष्य में भी यह द्वीप जियो-पॉलिटिक्स में शक्ति संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। बंगाल की खाड़ी स्वयं दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु की तरह कार्य करती है और व्यापारिक मार्गों के माध्यम से क्षेत्रीय देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाती है।

किसी आकस्मिक युद्ध की स्थिति में भी यहाँ से संपर्क और संचालन स्थापित करना आसान होता है, यही कारण है कि शक्तिशाली देश इस द्वीप की ओर आकर्षित हैं। व्यापारिक और सामरिक हितों के कारण चीन और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं जबकि भारत के लिए भी सेंट मार्टिन द्वीप का रणनीतिक महत्व अत्यधिक है। अमेरिका की रुचि का मुख्य कारण यह है कि यदि उसे इस द्वीप पर प्रभाव जमाने का अवसर मिलता है, तो वह यहाँ से पूरे क्षेत्र, विशेष रूप से चीन और भारत पर निगरानी रख सकता है।

अभिमन्यु की तरह घिर गई थीं शेख हसीना

दीप हलदर ने का कहना है कि यह खुलासा बांग्लादेश को और बेचैन कर सकता है। उनका कहना है कि जनरल वकार को हसीना ने अपने पद से हटने से ठीक पहले नियुक्त किया था। उन्होंने कहा, “पिछले साल और इस साल भी NCP (नेशनल सिटिजन्स पार्टी) के नेताओं द्वारा लगातार यह बयान दिया जाता रहा कि जनरल वेकर भारत के एजेंट हैं। अब यह बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे यह सवाल उठता है कि वकार किसकी तरफदारी कर रहे हैं।”

असदुज्जमाँ खान ने अपनी बात को समझाने के लिए महाभारत का हवाला भी दिया है। उन्होंने कहा, “जैसे अभिमन्यु को चारों तरफ से घेर लिया गया और फिर युद्ध में अपने ही हाथों ढेर कर दिया गया, वैसे ही वकार ने हसीना को गिराने के लिए बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों से हाथ मिला लिया। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने इससे पहले भी सभी कट्टरपंथी ताकतों को एक साथ लाया था।”

यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) जमात के साथ मिलकर काम कर रही थी। उन्होंने कहा, “कुछ ISI-प्रशिक्षित लोग जमात में घुसपैठ कर चुके थे और जून के अंत में पुलिसकर्मियों की हत्या में उनकी अहम भूमिका थी।”

उन्होंने दावा किया कि जब अराजकता फैली तो उन्हें शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ISI-प्रशिक्षित लोग जमात में घुसपैठ कर चुके हैं और छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना के पास गए थे लेकिन उन्होंने उन्हें बताया गया कि सेना प्रमुख ने हसीना को आश्वासन दिया है कि वह आंदोलनकारी छात्रों की बढ़ती भीड़ को सँभाल लेंगे।

असदुज्जमाँ ने 4 अगस्त 2024 से पहले वाली शाम को हुई बैठक को लेकर कहा, “शेख हसीना के सामने वकार ने मुझसे कहा कि सड़कों पर हो रही हिंसा के कारण लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ गया है और बेहतर होगा कि सेना ही प्रवेश द्वारों पर आंदोलनकारियों को रोके। वकार ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। वह यह सुनिश्चित करेंगे कि सेना किसी को भी प्रधानमंत्री आवास के पास न आने दे।”

असदुज्जमाँ ने कहा कि इस बैठक के अगले दिन क्या हुआ यह सब जानते हैं। दरअसल, हिंसक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने हसीना के आवास पर धावा बोल दिया था और हजारों की संख्या में लोग उनके आवास में दाखिल हो गए थे जिसके कारण उन्हें देश छोड़कर भारत आने को मजबूर होना पड़ा।

ये मुहर्रम का जुलुस था या जेहादियों का जमावड़ा? क्या Peace Committees हिन्दुओं को ही कटघरे में खड़ा करने के लिए हैं? जब जेहादी इतने हिंसक थे तो प्रशासन ने पुलिस को firing के आर्डर क्यों नहीं दिए?

मुहर्रम के जुलुस में जेहादियों ने मजहब के नाम पर साम्प्रदायिकता का नंगा नाच खेला, क्या यह पूर्व नियोजित था? क्योकि इतने बड़े स्तर पर साम्प्रदायिक दंगा अचानक नहीं हो सकता। ये इतने पत्थर और लाठियां कहाँ से आयीं? जेहादियों के साथ साथ मुहर्रम के आयोजकों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। कुछ भी हो मुहर्रम के इस दंगे ने एक बात आइने की तरह साफ कर दी है कि हिन्दू त्योहारों पर दंगा दंगाइयों के आकाओं द्वारा करवाया जाता है। अब राज्य और केन्द्र सरकारों को पाकिस्तान से ज्यादा देश में पल इन गद्दारों से सतर्क रहने की जरुरत है जो लकड़ी में दीमक का काम कर रहे हैं। पाकिस्तान से तो निपटा जा सकता है लेकिन पहले इनसे और इनके आकाओं से भी निपटना जरुरी है। इन जेहादियों ने आर्मी चीफ (स्व) विपिन रावत को सच साबित कर दिया कि "हमें दुश्मन से एक मोर्चे पर नहीं बल्कि ढाई मोर्चे पर लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।"    
बिहार के कटिहार में 6 जुलाई 2025 की दोपहर मुहर्रम के जुलूस के दौरान कट्टरपंथियों ने नया टोला स्थित महावीर मंदिर पर पथराव करना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वार्ड नंबर 34 और 35 से ताजिया जुलूस निकल रहा था। तभी अचानक मंदिर और वहाँ रह रहे लोगों पर कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि मुहर्रम जुलूस शांति से निकाला जा रहा था, पर नया टोला में पहुँचते ही यह उग्र हो गया।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कट्टरपंथी महावीर मंदिर पर पत्थर फेंक रहे हैं। वे सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों और घरों पर भी पत्थर बरसा रहे हैं।


कुछ लोगों और पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। हिंसा सिर्फ नया टोला तक सीमित नहीं रही, यह पानी टंकी चौक, दौलत राम चौक और आजाद चौक जैसे अन्य इलाकों तक भी फैल गई।

कट्टरपंथियों के उपद्रव की अलग-अलग वीडियो

ये मुहर्रम जुलूस के नाम पर कट्टरपंथियों के जरिए हिंसा हो रही है। 3 अलग-अलग वीडियो है। एक वीडियो में स्थानीय लोगों ने अपने घर की बालकनी से पत्थरबाजी करते हुए रिकॉर्ड किया है, जिसमें ईंट के बड़े-बड़े टुकड़े लोगों पर और पुलिसकर्मियों पर फैंके जा रहे हैं।


दूसरी वीडियों में महावीर मंदिर के पास खड़े स्थानीय लोगों को कट्टरपंथी लाठी-डंडों से मारने के लिए दौड़े चले आ रहे हैं।

तीसरी वीडियो में देखा जा सकता है कि महावीर मंदिर के सामने कट्टरपंथी तोड़फोड़ कर रहे हैं। हाथों में लाठी-डंडे लिए हुए है। स्थानीय लोग अपने घरों से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

इस घटना पर पुलिस ने प्रतिक्रिया दी है। डीएम मनीष कुमार मीणा और एसपी वैभव कुमार शर्मा मौके पर पहुँचे। उन्होंने नगर वासियों से घरों में रहने और सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की अपील की।

बिहार गृह सचिवालय ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि गलत और भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। कटिहार शहर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

पुलिस और प्रशासन ने हिंसा में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। वर्तमान माहौल तनावपूर्ण है पर पुलिस की भारी तैनाती के बाद स्थिति नियंत्रण में है।

पुलिसकर्मी समेत लोग घायल

कट्टरपंथियों के पथराव का शिकार वहाँ की पुलिसकर्मी और आम जनता हुई। इसमें कई पुलिसकर्मियों समेत 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और एमएलसी अशोक अग्रवाल भी मौके पर पहुँचे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की ढीली व्यवस्था के कारण बवाल बढ़ा। डीएसपी और नगर विधायक इलाके में कैंप कर रहे हैं।

देशभर में मुहर्रम पर अन्य हिंसक घटनाएँ

देश के कई हिस्सों में 6 जुलाई 2025 को मुहर्रम के ताजिया जुलूसों के दौरान हिंसा और सांप्रदायिक तनाव की खबरें सामने आई हैं।
  • मध्य प्रदेश- उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान खजूर वाली मस्जिद के पास हंगामा हुआ। उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की जिद की। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो हमला किया गया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जुलूस के आयोजक इरफान खान उर्फ लल्ला समते 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
  • राजस्थान- राजसमंद के कुंभलगढ़ किले में मुहर्रम जुलूस की अनुमति को लेकर पाँच दिनों से विवाद चल रहा है। हिंदू संगठनों और व्यापारियों ने 5 जुलाई 2025 को बाजार बंद कर विरोध प्रदर्शन किया।
  • उत्तर प्रदेश- रायबरेली में 4 जुलाई 2025 को कुढ़ा गाँव में बिना अनुमति निकाले गए मुहर्रम जुलूस के दौरान आपत्तिजनक नारेबाजी हुई। विरोध करने पर मुस्लिम लोग उग्र हो गए और लाठी-डंडों व हथियारों से हमला किया। 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ दिए गए। 150 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
  • कुंडा- मुहर्रम से पहले शांति व्यवस्था के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को नजरबंद किया गया।
  • महाराजगंज- मुहर्रम जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया।
  • देवरिया– मुहर्रम जुलूस में एक कट्टरपंथी को फिलिस्तीन की टीशर्ट पहनने पर हिरासत में लिया गया। श्रीनगर में भी ऐसे ही झंडे दिखे थे।
  • आजमगढ़– भुजी गांव में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम युवक आपस में भिड़ गए, जिसमें 7 लोग घायल हुए। 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
  • कुशीनगर- गुलहरिया रेगुलेटर पर मुहर्रम जुलूस के दौरान एक प्राचीन शिव मंदिर के सामने इस्लामिक झंडा फहराया गया और भड़काऊ नारे लगाए गए, जिससे तनाव फैल गया। रामकोला में डीजे की आवाज को लेकर विवाद में एक बच्चा घायल हुआ।
  • बरेली– साहूकारा बाजार में ताजिया रखने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव हुआ। हिंदू व्यापारियों ने विरोध में बाजार बंद कर दिया।
  • बिहार- गोपालगंज माँझा थाना क्षेत्र में ताजिया मिलान के दौरान हिंसक झड़प और पत्थरबाजी हुई, जिसमें 6 से अधिक लोग घायल हुए।
  • भागलपुर में दो पक्षों में भिड़ंत हुई। इसमें 8 लोग घायल हुए। एक वीडियो में एक युवक फायरिंग करते देखा गया था।
  • वैशाली में दो अखाड़ों के बीच झड़प हुई। इसमें आजाद अखाड़ा और पगला अखाड़ा शामिल था।

पिछली घटनाएँ और उठते सवाल

कटिहार की इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। खासकर सांसद तारिक अनवर के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं का होना चिंताजनक है। साल 2017 में भी मुहर्रम के समय ही दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा हुई थी।
अब 8 साल बाद फिर से मुहर्रम पर यह घटना हुई है। 2017 की घटना के बाद हिंदू संगठनों ने त्योहारों पर कोई अनहोनी न हो, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ली थी। 2022 और 2025 में बजरंग दल ने हिंदू शोभायात्राओं के दौरान मस्जिद पर रंग गुलाल पड़ने से रोकने के लिए ह्यूमन चेन भी बनाई थी।

प्रशासन की सतर्कता और पीस कमेटी पर सवाल

इन सभी घटनाओं के बाद प्रशासन अलर्ट पर है। बिहार और यूपी में सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। बिना अनुमति जुलूस निकालने पर रोक है। भड़काऊ हरकतों पर सख्ती बरती जा रही है।
कई जिलों में ड्रोन और CCTV से निगरानी हो रही है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। डीएम और एसपी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
हैरानी की बात यह है कि इन सभी जगहों पर पीस कमेटियों (शांति समितियों) की बैठकें हुई थीं। लेकिन इसके बावजूद हिंसा का दौर नहीं थमा।
ऑपइंडिया ने अपने लेख में बताया था कि इन पीस कमेटियों की बैठकों का इस्तेमाल अक्सर हिंदुओं को कटघरे में खड़ा करने के लिए होता है। जबकि घटना को अंजाम हमेशा इस्लामी पक्ष देता है।

महाराष्ट्र में ईरान समर्थक बैनर

महाराष्ट्र के पुणे में लोनी खलबोर गाँव में मुहर्रम पर ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और रुहोल्ला खुमैनी के ईरान के झंडे वाले बैनर लगाए गए।
बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस और नगर निगम ने बैनर हटाए। पुलिस ने बताया कि बैनर लगाने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी।      साथ में हर्षवर्धन
                                                                                                                                   (साभार)