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ईरान से मोहब्बत है तो वहीं जाओ : पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का शिया मौलवियों को दो टूक : भड़के मौलवियों ने जिया-उल-हक के दौर से की तुलना

                                      ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ (फोटो साभार: न्यूज 18)
पाकिस्तान में गुरुवार (19 मार्च 2026) को हुई एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक के बाद शिया मौलवी, फौज के मुखिया आसिम मुनीर पर भड़के हुए हैं। रावलपिंडी स्थित फौज के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने शिया मौलवियों से बातचीत की। इस दौरान मुनीर ने मौलानाओं से कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ, मैं आपको बता दूँ कि जिन्ना एक शिया थे।”

शिया समुदाय ने मुनीर के इस लेक्चर को अपने अपमान के रूप में लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बैठक में एक दर्जन से अधिक शिया उलेमा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत का माहौल शुरुआत से ही संतुलित नहीं रहा।

 शिया मौलवियों ने कहा कि आर्मी चीफ मुनीर ने लंबे समय तक केवल अपनी बात रखी और उलेमा को बीच में बोलने या अपनी बात विस्तार से रखने का मौका ही नहीं दिया गया। इससे बैठक धीरे-धीरे एकतरफा होती चली गई और कई मुद्दों पर असहमति उभरकर सामने आई।

शिया धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया और आरोप

शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इस्लामाबाद में शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने खुलासा किया कि बैठक के दौरान असीम मुनीर का रवैया काफी सख्त और आपत्तिजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान फील्ड मार्शल ने शिया समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।

नजफी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में ही असीम मुनीर ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों पर नाराजगी जताई। उन्होंने खासतौर पर फौज की एक इमारत को जलाए जाने की घटना को अस्वीकार्य बताया।

नजफी के अनुसार, माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया तो उन्होंने खुद हस्तक्षेप करते हुए मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी भी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामा अमीर हयात को ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से सम्मानित किया जा चुका है और उनके अन्य परिजन भी फौज में रह चुके हैं।

नजफी का कहना है कि इस पर असीम मुनीर का लहजा कुछ नरम पड़ा लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर वही टिप्पणी दोहराई कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतना लगाव है, तो उन्हें वहाँ चले जाना चाहिए। इस पर नजफी ने गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या कभी किसी शिया व्यक्ति ने इस्लामाबाद या कराची में किसी फौजी की हत्या की है?

उन्होंने यह भी कहा कि जिन तत्वों ने फौजियों के साथ बर्बरता की घटनाएँ कीं, क्या उनसे कभी यह कहा गया कि वे अफगानिस्तान चले जाएँ? लेकिन आज शिया समुदाय को इस तरह की बातें सुननी पड़ रही हैं। नजफी ने कहा कि असीम मुनीर ने बैठक में बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब पर हमला जारी रखता है तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।

जिया-उल-हक दौर से तुलना, शिया समुदाय के हालात पहले से ही खराब

शिया मौलवी सैयद जवाद नकवी ने पूरे घटनाक्रम की तुलना जिया-उल-हक के दौर से की। उनका कहना है कि उस समय की तरह अब भी एक खास सोच को थोपने का माहौल बनता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभक्ति की परिभाषा को सीमित किया जा रहा है और ईरान जैसे देशों से मजहबी या भावनात्मक जुड़ाव को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में मजहबी अल्पसंख्यकों, खासकर शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय स्थिति चिंताजनक है। एक ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम रही है।

एथेंस स्थित संस्था डायरेक्टस के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन ना केवल अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं बल्कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन एजेंसियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

रिपोर्ट में हाल ही में इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का उल्लेख किया गया है जिसमें 36 लोगों की मौत और करीब 170 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान में शिया आबादी कुल आबाद की करीब 10-15% है और यह बहुसंख्यक सुन्नी समुदायों के निशाने पर रहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिया, हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी समुदाय न केवल हिंसा बल्कि भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का भी सामना कर रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हवाले से यह भी कहा गया है कि कई मामलों में आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे हमलों को बढ़ावा मिल रहा है।

नहीं सुधर रही कांग्रेस, मोदी के अपमान के बाद बीड़ी की कर दी बिहार से तुलना

                                             केरल कांग्रेस ने बीड़ी से की बिहार की तुलना
महात्मा और बिच्छू की कहानी तो आपने सुनी होगी, एक महात्मा पानी से बिच्छू को निकालने की कोशिश करते हैं लेकिन बिच्छू बार-बार डंक मारता रहता है। लोग कहते हैं कि इसे पानी में ही छोड़ दीजिए तो वह कहते हैं कि डंक मारना बिच्छू की फितरत है। महात्मा कहते हैं, “मेरी फितरत बचाने की है।” वे उसे बाहर निकाल ले आते हैं।

बिहार में कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गाली दी गई। इसके बाद खूब बवाल हुआ तो लगा कि कांग्रेस अब आगे इससे कुछ सीख लेगी। अब उसके मंचों से ऐसी बातें नहीं कही जाएँगी। लेकिन लगता है कि कांग्रेस भी बिच्छू की तरह ही अपनी आदत से मजबूर है।

कांग्रेस अब पीएम मोदी के अपमान से और 4 कदम आगे बढ़ गई है, पार्टी की केरल इकाई ने X हैंडल से एक पोस्ट किया गया। इस पोस्ट में पूरे बिहार का ही अपमान कर दिया गया। केरल कांग्रेस ने बिहार की तुलना बीड़ी से करते हुए लिखा, “बीड़ी और बिहार ‘बी’ से शुरू होता है। अब इसे पाप नहीं माना जा सकता है।” कांग्रेस ने इसे बीड़ी पर कम किए गए GST से जोड़ा था।

                                                                          केरल कांग्रेस का पोस्ट

BJP-JDU ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया

जाहिर है कि यह पूरे बिहार का अपमान था। तो तुरंत हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी और जेडीयू ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों ले लिया है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी ने इसे कांग्रेस का असली चरित्र बताया है।

सम्राट ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “पहले हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पूजनीय माता जी का अपमान और अब पूरे बिहार का अपमान, यही है कांग्रेस का असली चरित्र, जो बार-बार देश के सामने उजागर हो रहा है।”

वहीं, राज्यसभा सांसद और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी कांग्रेस पर भड़क गए। उन्होंने लिखा, “कांग्रेस की एक और अत्यंत शर्मनाक हरकत! आपको बता दें कि B से सिर्फ बीड़ी नहीं, बुद्धि भी होती है, जो आपके पास नहीं है! B से बजट भी होता है, जिसमें बिहार को विशेष सहायता मिलने पर आपको मिर्ची लगती है।”

उन्होंने आगे लिखा, “यकीन मानिए, बिहार की महान जनता कांग्रेस द्वारा बार-बार किये जा रहे अपमान का करारा जवाब आगामी विधानसभा चुनाव में देगी—बीड़ी के धुएं से नहीं, वोट की चोट से।”

कांग्रेस ने डिलीट किया पोस्ट

बिहार में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं तो जाहिर है कि कांग्रेस को वोट बैंक की चिंता थी क्योंकि मान-अपमान की चिंता कांग्रेस कितना करती हैं यह खुद में भी एक सवाल हैं। वोट के डर से केरल कांग्रेस ने यह पोस्ट डिलीट कर दिया हैं।

साथ ही, कांग्रेस ने अपने इस पोस्ट के लिए माफी माँग ली है। कांग्रेस ने लिखा, “GST दरों को लेकर मोदी के चुनावी हथकंडे पर हमारे तंज को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। अगर आपको ठेस पहुँची हो तो क्षमा करें।” कांग्रेस के इस कथित माफीनामे को पढ़ेंगे तो समझ आएगा कि यह माफी को भी एक चुनावी स्टंट बना दिया है।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के लिए वैसे भी बिहार और बिहारियों को अपमानित करना अब कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी से रेवंत रेड्डी तक और उनकी सहयोगी DMK के एमके स्टालिन तक बिहार के लोगों को लेकर अपमानजनक और विवादित टिप्पणियाँ कर चुके हैं।