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ईरान से मोहब्बत है तो वहीं जाओ : पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का शिया मौलवियों को दो टूक : भड़के मौलवियों ने जिया-उल-हक के दौर से की तुलना

                                      ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ (फोटो साभार: न्यूज 18)
पाकिस्तान में गुरुवार (19 मार्च 2026) को हुई एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक के बाद शिया मौलवी, फौज के मुखिया आसिम मुनीर पर भड़के हुए हैं। रावलपिंडी स्थित फौज के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने शिया मौलवियों से बातचीत की। इस दौरान मुनीर ने मौलानाओं से कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी मोहब्बत है तो आप ईरान चले जाओ, मैं आपको बता दूँ कि जिन्ना एक शिया थे।”

शिया समुदाय ने मुनीर के इस लेक्चर को अपने अपमान के रूप में लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बैठक में एक दर्जन से अधिक शिया उलेमा शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत का माहौल शुरुआत से ही संतुलित नहीं रहा।

 शिया मौलवियों ने कहा कि आर्मी चीफ मुनीर ने लंबे समय तक केवल अपनी बात रखी और उलेमा को बीच में बोलने या अपनी बात विस्तार से रखने का मौका ही नहीं दिया गया। इससे बैठक धीरे-धीरे एकतरफा होती चली गई और कई मुद्दों पर असहमति उभरकर सामने आई।

शिया धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया और आरोप

शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इस्लामाबाद में शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने खुलासा किया कि बैठक के दौरान असीम मुनीर का रवैया काफी सख्त और आपत्तिजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान फील्ड मार्शल ने शिया समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।

नजफी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में ही असीम मुनीर ने अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इस्लामाबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों पर नाराजगी जताई। उन्होंने खासतौर पर फौज की एक इमारत को जलाए जाने की घटना को अस्वीकार्य बताया।

नजफी के अनुसार, माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया तो उन्होंने खुद हस्तक्षेप करते हुए मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में बड़ी संख्या में शिया अधिकारी भी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामा अमीर हयात को ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से सम्मानित किया जा चुका है और उनके अन्य परिजन भी फौज में रह चुके हैं।

नजफी का कहना है कि इस पर असीम मुनीर का लहजा कुछ नरम पड़ा लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर वही टिप्पणी दोहराई कि अगर शिया समुदाय को ईरान से इतना लगाव है, तो उन्हें वहाँ चले जाना चाहिए। इस पर नजफी ने गहरी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या कभी किसी शिया व्यक्ति ने इस्लामाबाद या कराची में किसी फौजी की हत्या की है?

उन्होंने यह भी कहा कि जिन तत्वों ने फौजियों के साथ बर्बरता की घटनाएँ कीं, क्या उनसे कभी यह कहा गया कि वे अफगानिस्तान चले जाएँ? लेकिन आज शिया समुदाय को इस तरह की बातें सुननी पड़ रही हैं। नजफी ने कहा कि असीम मुनीर ने बैठक में बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है। ऐसे में यदि ईरान सऊदी अरब पर हमला जारी रखता है तो पाकिस्तान को सऊदी की रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।

जिया-उल-हक दौर से तुलना, शिया समुदाय के हालात पहले से ही खराब

शिया मौलवी सैयद जवाद नकवी ने पूरे घटनाक्रम की तुलना जिया-उल-हक के दौर से की। उनका कहना है कि उस समय की तरह अब भी एक खास सोच को थोपने का माहौल बनता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभक्ति की परिभाषा को सीमित किया जा रहा है और ईरान जैसे देशों से मजहबी या भावनात्मक जुड़ाव को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

पाकिस्तान में मजहबी अल्पसंख्यकों, खासकर शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय स्थिति चिंताजनक है। एक ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि ये समुदाय लगातार सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम रही है।

एथेंस स्थित संस्था डायरेक्टस के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन ना केवल अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं बल्कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन एजेंसियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

रिपोर्ट में हाल ही में इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का उल्लेख किया गया है जिसमें 36 लोगों की मौत और करीब 170 लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान में शिया आबादी कुल आबाद की करीब 10-15% है और यह बहुसंख्यक सुन्नी समुदायों के निशाने पर रहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिया, हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी समुदाय न केवल हिंसा बल्कि भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का भी सामना कर रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के हवाले से यह भी कहा गया है कि कई मामलों में आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे हमलों को बढ़ावा मिल रहा है।

जिस पूर्व फौजी के लिए पाक कर रहा था रेपिस्टों की सौदेबाजी, अब उसे घोषित किया आतंकवादी: क्यों आसिम मुनीर के लिए सिरदर्द बना UK में बैठा आदिल राजा

              आदिल राजा को पाकिस्तान ने घोषित किया आतंकवादी (फोटो साभार: व्हाइट हाउस/सोशल मीडिया)
पाकिस्तान सरकार ने फौज के पूर्व अफसर और यूट्यूबर आदिल फारूक राजा को आतंकवाद निरोधक अधिनियम 1997 (Anti-Terrorism Act, 1997) के तहत ‘प्रोस्क्राइब्ड पर्सन’ यानी प्रतिबंधित व्यक्ति घोषित कर दिया है। आसान भाषा में कहें तो पाकिस्तान ने आदिल को आतंकवादी घोषित कर दिया है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने शनिवार (27 दिसंबर 2025) को इसे लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी है।
                                         पाक के गृह मंत्रालय की नोटिफिकेशन (साभार: X/Adil Raja)

पाकिस्तान ने क्या कहा है?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान लगातार फौज के मुखिया आसिम मुनीर और पाक फौज की पोल खोलने वाले आदिल को लेकर पाकिस्तान ने कहा है कि सरकार के पास यह मानने के ठोस कारण हैं कि आदिल की गतिविधियाँ पाकिस्तान की सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। सरकार के अनुसार, राजा लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर रहे थे और ऐसे कंटेंट का प्रचार-प्रसार कर रहे थे, जो पाकिस्तान विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देता है।

अधिसूचना में आदिल पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रचार और प्रोपेगेंडा को न केवल बढ़ावा दिया बल्कि उसे बड़े स्तर पर प्रसारित भी किया। सरकार का कहना है कि इस तरह की गतिविधियाँ पाकिस्तान की संप्रभुता और राष्ट्रीय रक्षा के खिलाफ हैं।

यह फैसला केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया गया। गृह मंत्रालय ने 23 दिसंबर को इसका प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा था जिसे मंजूरी मिलने के बाद 27 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर दी गई।

इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने आदिल राजा के प्रत्यर्पण (UK से वापस लाने) से जुड़े कागजात ब्रिटेन हाई कमिश्नर को सौंपे थे। नकवी पहले ही कह चुके हैं कि सरकार फेक न्यूज फैलाने वाले यूट्यूबर्स और राज्य संस्थानों को निशाना बनाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी।

सरकारी अधिसूचना के बाद अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता और साफ हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘प्रोस्क्राइब्ड पर्सन’ घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति की संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

असली लोकतंत्र की लड़ाई लड़ता रहूँगा: आदिल राजा

आदिल ने पाकिस्तान की इस कायराना हरकत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आदिल ने X पर लिखा, “पाकिस्तान की सरकार मुझे UK से प्रत्यर्पित कराने में नाकाम रही। इसके बाद उसने मेरे परिवार के घर पर हमला करवाया और अब मुझे ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि मैं पत्रकारिता करता हूँ और सच लिखता-बोलता हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह सब पाकिस्तानी सेना के इशारे पर चल रहे उस अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद देश के बाहर रहकर आवाज उठाने वालों को डराना और चुप कराना है। यह लगातार हो रहा उत्पीड़न मुझे चुप नहीं करा सकता। उल्टा, इससे मेरा हौसला और मजबूत हुआ है।”

आदिल ने लिखा, “मैं पाकिस्तान के गरीबों की आवाज उठाता रहूँगा, असली लोकतंत्र की लड़ाई लड़ता रहूँगा। चाहे फासीवाद का अंधेरा कितना ही गहरा क्यों न हो, इतिहास गवाह है कि आखिरकार सच की ही जीत होती है।”

The Pakistani state, having failed in its attempt to extradite me from the UK and having escalated to an attack on my family home, has now resorted to formally declaring me a terrorist. This designation is not a consequence of any crime, but a direct reprisal for my practice of… pic.twitter.com/JyjxD2Yldu

— Adil Raja (@soldierspeaks) December 27, 2025

कौन है आदिल राजा?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखने वाले आदिल राजा की उम्र लगभग 45 वर्ष है। वह पाकिस्तान फौज में मेजर रह चुके हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल यूनिट्स में काम किया। वर्ष 2017 में सेना से इस्तीफा देने के बाद वे ब्रिटेन चले गए। वहीं से उन्होंने एक यूट्यूब चैनल शुरू किया, जिस पर वे पाकिस्तान की राजनीति, सेना और इमरान खान से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करने लगे। उनके चैनल के 5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं और उनके वीडियो लाखों बार देखे जाते हैं।
वे लगातार यह कहते रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना राजनीति में दखल देती है, लोकतंत्र को दबाती है और आम लोगों, खासकर बलूचों और गरीबों पर जुल्म करती है। उनके वीडियो में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और शीर्ष अफसरों पर सीधे आरोप लगाए जाते हैं, इसलिए वे पाकिस्तान की सत्ता के लिए एक बड़ी परेशानी बन गए।
राजा यह दावा भी कर चुके हैं कि आसिम मुनीर खुद को फील्ड मार्शल का रैंक दे चुके हैं और सिविल सत्ता को पीछे धकेलकर सेना को आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं। आदिल राजा के खिलाफ यूके की अदालत में भी केस किया गया है। आदिल इसे सोची-समझी योजना बताते हैं। वह कहते हैं कि पाकिस्तानी मिलिट्री और ISI यूके की कानूनी प्रणाली का दुरुपयोग कर विरोधियों को चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं।
वह Ex-Servicemen Society के पूर्व प्रवक्ता रहे हैं। आदिल राजा एक पर्सनल ब्लॉग भी लिखते हैं, जिसमें वो पाकिस्तान की राजनीति, सेना के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर खुलकर टिप्पणी करते हैं। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का समर्थक माना जाता है।

रेपिस्टों के बदल में किया था आदिल का सौदा

कुछ दिनों पहले सामने आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने UK से आदिल की वापसी के बदले पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के अपराधियों को वापस देने की बात कही थी। इनमें से अब्दुल रऊफ ने 13 साल की लड़की का रेप किया जबकि आदिल खान ने 15 साल की लड़की का रेप किया और भाग कर पाकिस्तान आ गए। इन दोनों बलात्कारियों के बदले में पाकिस्तान सरकार आदिल और एक अन्य राजनीतिक विरोधी को वापस लाना चाहती थी। नकवी ने इसके लिए ब्रिटेन के राजदूत को बुलाकर बात की थी। जिस दूसरे आदमी को पाकिस्तान माँग रहा था वो बैरिस्टर मिर्जा शहजाद अकबर हैं।
मीटिंग के बाद जारी आधिकारिक बयान में नकवी ने कहा कि दोनों लोगों का पाकिस्तान में होना जरूरी है और उन्हें जल्द से जल्द पाकिस्तान को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रत्यर्पण के लिए पाकिस्तान की ओर से पर्याप्त सबूत दिए गए हैं और विदेश में बैठकर देश को बदनाम करने वालों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ट्रम्प के लाडले आसिम मुनीर के अमेरिका घुसने पर लगेगी रोक? 49 US सांसदों ने की वीजा बैन की मांग

                                              आसिम मुनीर की वीजा पर बैन लगाने की मांग
पाकिस्तान में आसिम मुनीर की तानाशाही को लेकर अमेरिका के 49 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखा है. पत्र में सांसदों ने पाकिस्तान में लोकतंत्र के खत्म होने को लेकर चिंता जाहिर की है. सांसदों ने रुबियो से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा है. इन सांसदों का कहना है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र खत्म करने में आसिम मुनीर और सेना के कुछ अधिकारियों का अहम रोल है. इन सभी लोगों को अमेरिका घुसने पर प्रतिबंध लगाया जाए.

जिन सांसदों ने रुबियो को पत्र लिखा है, उनमें प्रमिला जयपाल, ग्रेग कैसर, जेम्स पी. मैकगवर्न, डी. क्लार्क और रशीदा तलीब का नाम प्रमुख हैं. सभी अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य हैं.

इस पत्र में पाकिस्तान के भीतर खत्म हो रहे मानवाधिकार के मुद्दे को भी उठाया गया है. साथ ही कहा गया है कि जो लोग सत्ता के खिलाफ बोल रहे हैं, उन्हें चुप कराने के लिए पाकिस्तान की सरकार साम-दाम, दंड और भेद अपना रही है.

रुबियो को यह पत्र क्यों लिखा गया है?

मार्को रुबियो को अमेरिकी कांग्रेस के 49 सांसदों ने ऐसे वक्त में पत्र लिखा है, जब पाकिस्तान के संविधान में बड़ा संशोधन किया गया है. इस संशोधन के तहत सेना प्रमुख को कई बड़े अधिकार दिए गए हैं. इन अधिकारों में सेना प्रमुख पर कभी मुकदमा का न चलना प्रमुख है.
पाकिस्तान में सेना प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाया गया है. फील्ड मार्शल के पास ही नौ, थल और वायु सेना का कमान रहेगा. इस पद को रक्षा प्रमुख का पद भी कहा गया है. पाकिस्तान की सरकार इस पद पर मुनीर को नियुक्त करने की तैयारी में है.
कहा जा रहा है कि मुनीर के रक्षा प्रमुख बनते ही आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान से लोकतंत्र को खत्म कर दिया जाएगा. पहले भी पाकिस्तान में सेना की पहल पर मार्शल लॉ लागू किए गए हैं

सांसदों ने अपने पत्र में क्या कहा है?

अमेरिकी सांसदों ने रुबियो को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए लिखा है- पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय दमन अभियान और बिगड़ते मानवाधिकार संकट से हम सब चिंतित हैं. सांसदों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार अमेरिका में रह रहे प्रवासी नागरिकों को निशाना बना रही है. प्रवासी नागरिकों को नहीं पकड़ पा रही है तो उनके रिश्तेदारों को टॉर्चर कर रही है.
पाकिस्तान की सरकार अपनी हुकूमत को बचाए रखने के लिए अत्याचार पर उतर आई है. सांसदों का कहना है कि इस पर अगर तुरंत एक्शन नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है. सांसदों ने रुबियो को कुछ एक्शन भी सुझाए हैं.
इन सुझावों में कहा गया है कि पाकिस्तान के जो अधिकारी इस अत्याचार में शामिल हैं, उनके अमेरिकी वीजा पर रोक लगाई जाए. उन्हें किसी भी सूरत में अमेरिका न आने दिया जाए.

क्या असीम मुनीर को बेताज बादशाह बनवा कर ट्रम्प ने पाकिस्तान को बर्बादी के ढेर पर बैठा दिया? SC की शक्तियों में कटौती और नई ताकतवर FCC अदालत का गठन

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पाकिस्तान प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ से ज्यादा आर्मी प्रमुख असीम मुनीर को तबज्जो देने के पीछे का खेल सामने आ गया है। मुनीर को लंच-डिनर में जो नमक खिलाया है उसे शाहबाज़ के हाथों हलाल करना किसी शतरंज की चाल से कम नहीं। शाहबाज़ इस साज़िश में बुरी तरह से ऐसे फंसे कि पाकिस्तान को ही दांव पर लगा दिया। पाकिस्तान को गृह युद्ध के कगार पर धकेल दिया गया है, जिसे रोकना शायद मुश्किल हो। आर्मी, जज, पुलिस और आम पब्लिक से सड़क पर आकर इसका विरोध करने के लिए कहा गया है, और लोग सडकों पर आने भी शुरू हो चुके हैं।    

शरीफ की पहली हार उस समय सामने आयी जब भारत के Operation Sindoor में चारों खाने चित हुए आर्मी प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाना, दूसरे मुनीर के साथ अमेरिका जाना और पाकिस्तान वापस आने पर आम नागरिक से लेकर राष्ट्रपति तक को मुनीर के अधीन बनाना पाकिस्तान के विनाश को खुला बुलावा दे दिया। पाकिस्तान के बर्बाद होने पर पाकिस्तान का इतिहास शाहबाज़ शरीफ को एक शैतान के नाम से जाना जाएगा।   
पाकिस्तानी फौज के हाथों में देश की कमान सौंपने के लिए शहबाज शरीफ सरकार सीनेट में लड़ाई लड़ रही है। दरअसल, सरकार संविधान में 27वाँ विधेयक को संशोधित करने की तैयारी में है। शनिवार (09 नवंबर 2025) को ही पाकिस्तान के सीनेट में 27वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक, 2025 पेश किया गया। इसके तहत पाकिस्तानी फौज में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) पद बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी फील्ड मार्शल असीम मुनीर को मिलेगी।

 संशोधित बिल में पाकिस्तान की फौज, नेवी और एयरफोर्स को सीधे असीम मुनीर के ही आदेश पर चलने का अधिकार देता है। पूरे पाकिस्तान के सैन्य बलों में CDF को सर्वोच्च माना जाएगा। इससे असीम मुनीर की शक्तियाँ भी बढ़ जाएँगी। फिर यही असीम मुनीर पाकिस्तान में खुलेआम आतंकवाद को पनाह देगा, जो फील्ड मार्शल की तारीफ करते नहीं थकते हैं। ये पद भारत की नकल कर लाया गया है, जैसा यहाँ थलसेना का प्रमुख CDS होता है।

संशोधन विधेयक को लेकर जहाँ पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि संशोधन से देश के प्रशासन और न्यायपालिका में संरचनात्मक सुधार लाएगा, वहीं विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों का आरोप है कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रांतीय स्वायत्तता और नागरिक शासन की शक्ति कमजोर होगी।

क्या है 27वाँ संवैधानिक संशोधन?

सीनेट में पेश किया गया 27वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक पाकिस्तान के संविधान में कई अहम बदलाव लाने की कोशिश है। प्रस्ताव में प्रमुख तौर पर संविधान के 5 अनुच्छेदों के संशोधन की बात कही गई है, इनमें अनुच्छेद 160 (3a), 213, 243, 191a और 200 में परिवर्तन शामिल हैं। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इससे देश की वित्तीय व्यवस्था, न्यायिक शक्तियों और प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति में बड़े बदलाव किए जाएँगे।

सरकार ने जो संशोधन ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, उसके अनुसार अनुच्छेद 160 (3a) में संघीय राजस्व में प्रांतो की हिस्सेदारी की सुरक्षा की संवैधानिक गारंटी वापस ली जा सकती है। इससे केंद्र को वित्तीय नियंत्रण (fiscal control) बढ़ेगा और प्रान्तों की स्वायत्तता (provincial autonomy) कम हो सकती है।

आर्टिकल 191a में न्यायिक पुनर्संरचना (judicial restructuring) के बदलाव का प्रस्ताव है। इसमें नया ‘संवैधानिक न्यायालय’ (Constitutional Court) बनाने की बात कही गई है, जिसमें केवल संविधान संबंधित मुद्दों की पैरवी की जाएगी। ये प्रस्ताव न्यायालयों का ढाँचा बदलेगा, खासकर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट पर बोझ कम करेगा। यानि यह ‘संवैधानिक कोर्ट’ पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायालय कहलाएगा।

पाकिस्तान में चुनाव और न्यायपालिका कार्यों में बदलाव

संशोधन पाकिस्तान में चुनाव और न्यायपालिका पर भी असर डालता है। विधेयक के संशोधन में आर्टिकल 213 के तहत निर्वाचन चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव दिया गया है। इससे चुनावी संस्थाओं की संयोजना (structure) बदल सकती है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

वहीं अनुच्छेद 200 में उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के स्थानांतरण (transfer) संबंधित जुड़े प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इससे न्यायपालिका पर सरकार का नियंत्रण होगा। लेकिन सरकार का कहना है कि संशोधन से न्यायाधीशों की स्वतंत्रता, उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया आदि पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे न्यायपालिका के स्वायत्तता का प्रश्न उठता है।

27वाँ संशोधन में पाकिस्तानी फौज के लिए बड़ा बदलाव

इस संशोधन का सबसे अहम अनुच्छेद 243 है, जिस पर बहस छिड़ी हुई है। इस अनुच्छेद में प्रस्तावित संशोधन में पाकिस्तान की सैन्य सेवाओं में शीर्ष समन्वय कार्यालय ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के अध्यक्ष पद को 27 नवंबर 2025 को समाप्त कर देता है। इसी दिन वर्तमान CJCSC जनरल साहिर शमशाद मिर्जा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

सीनेट में संशोधित बिल पेश करने वाली पाकिस्तान की सरकार में कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने बताया कि अब CJCSC पद पर कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी क्योंकि फील्ड मार्शल असीम मुनीर सभी सुरक्षाबलों के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालेंगे, जो देश के पहले CDF बनेंगे। ये पद तीनों डिफेंस फोर्सेस को कमांड करेगा।

संशोधन के तहत, पाकिस्तान के राष्ट्रपति देश की आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के चीफ प्रधानमंत्री की सलाह से ही नियुक्त कर सकेंगे, लेकिन संवैधानिक तौर पर CDF ही तीनों डिफेंस फोर्सेस का प्रमुख माना जाएगा।

न्यूक्लियर मिशन में CDF की भूमिका

सेना का नया कमांडर CDF की भूमिका पाकिस्तान के न्यूक्लियर मिशन में भी अहम होगी। कमांडर ही पाकिस्तान न्यूक्लियर और रणनीतिक श्त्रागार की देखरेख करेगा। Dawn की रिपोर्ट के अनुसार, कमांडर एक आर्मी ऑफिसर ही होना चाहिए, जिसे CDF की कहने पर प्रधानमंत्री ने नियुक्त किया हो।

इसके अलावा यह संशोधित विधेयक पाकिस्तानी फौज में फाइव-स्टार रैंक वाले ऑफिसर को विशेष अधिकार भी प्रस्तावित करता है, इनमें फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और फ्लेट के एडमिरल शामिल हैं।

पाकिस्तानी फौज पर मेहरबान शहबाज शरीफ सरकार

इसके अलावा पाकिस्तान की फौजपरस्त सरकार का यह संशोधित विधेयक पाकिस्तानी फौज में फाइव-स्टार रैंक वाले ऑफिसर को विशेष अधिकार भी प्रस्तावित करता है, इनमें फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और फ्लेट के एडमिरल शामिल हैं।

इन आर्मी ऑफिसर का जीवनभर के लिए वर्दी, रैंक और औदा बना रहेगा। रिटायरमेंट के बाद भी सरकार इन्हें अलग जिम्मेदारी प्रधान करेगी। ये ऑफिसर राष्ट्रपति के समान संवैधानिक छूट का आनंद ले सकते हैं। सबसे अहम संशोधन है कि इन्हें केवल संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश कर ही पद से हटाया जा सकता है।

27वें संवैधानिक संशोधन विधेयक पर पाकिस्तान में राजनीतिक बवाल

पाकिस्तान की शहबाज शऱीफ द्वारा सीनेट में पेश किए गए इस 27वें संवैधानिक संशोधन विधेयक पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियाँ बिलावल भुट्टो जरदारी की PPP, इमरान खान की PT और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम इसे ‘लोकतंत्र की कब्र’ बता रही हैं। उनका आरोप है कि यह संशोधन सेना और केंद्र सरकार की असीमित शक्तियाँ देने के लिए लाया गया है।

वहीं कई बार एसोसिएशनों ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ साजिश करार दिया है। पाकिस्तान के कानूनी विश्लेषक अली दयाल ने कहा, “इस संशोधन के बाद पाकिस्तान दो हिस्सों में बंठ जाएँगा। एक संवैधानिक अदालत के हाथ में संविधान होगा और दूसरे के पास राजनीतिक सत्ता।”

पाकिस्तानी सीनेट में 27वाँ संशोधन विधेयक मंजूर होने में मुश्किल

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार कैबिनेट की मंजूरी से संसद में 27वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक ले तो आई लेकिन विधेयक को कानून बनाने में मुश्किल झेल रही है। दरअसल, शहबाज शरीफ सरकार को पाकिस्तानी संसद की निचली सदन में बहुमत है लेकिन ऊपरी सदन में सीनेट में विधेयक को मंजूरी के लिए विपक्ष की सहायता की जरूरत है।

इस बीच शहबाज शरीफ सरकार PPP को मनाने में लगी हुई है। PPP के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने खुलासा किया कि खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत PML-N के नेता ने संवैधानिक रिफॉर्म को सपोर्ट करने के लिए PPP से गुजारिश की है।

हालाँकि, सीनेट में पेश किए जाने के बाद विधेयक को पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली और सीनेट की कानून और न्याय संबंधी स्थायी समितियों के संयुक्त समीक्षा और विचार के लिए भेजा गया। संयुक्त समिति की बैठक के दौरान, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के दो सदस्यों और सीनेटर ने इस बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट में ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो 26वें संशोधन विधेयक में पहले ही नामंजूर किया गया था।

डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठ असीम मुनीर ने भारत को दी ‘न्यूक्लियर हमले’ की गीदड़भभकी, कहा- आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे: सिंधु पर बाँध बना तो 10 मिसाइल मारेंगे

भूखे-प्यासे पाकिस्तान में जनता रोटी को तरस रही और हुक्मरान परमाणु बम का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान बीच बचाव के लिए अमेरिका से भीख माँग रहा था। अब पाकिस्तानी का सेना प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। वो भी न्यूक्लियर हमले की।

जिस तरह ट्रम्प और मुनीर की बीच खिचड़ी पक रही है, देखना यह है कि कौन किसको लेकर डूबेगा? एक का डूबना पक्का है। एक भी वर्षों से एक कहावत चलती आ रही है कि गरीब की जोरू को हर कोई भाभी बनाता आया है।   

पाकिस्तान और अमेरिका के हुक्ममारों को नहीं मालूम कि भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खतरों का खिलाडी है। मोदी को दी जाने वाली धमकी उग्र बनाती है। हर धमकी मोदी के लिए सफलता की सीढ़ी का काम करती है। अभी हाल में दुनिया ने देख भी लिया। आतंकी हमला का पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा। दूसरे, जिस अमेरिका के आगे दुनियां झुकती है लेकिन मोदी एक चट्टान बन खड़े हैं। मुनीर तो बिन बुलाए पाकिस्तान पहुँच गया लेकिन मोदी को डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से भारत वापस जाते हुए अमेरिका होकर जाने को कहा था। मोदी ने डिप्लोमेटिक तरीके से मना कर दिया। टैरिफ की धमकी भी मोदी पर बेअसर हो रही है। पाकिस्तान को नहीं मालूम कि उसके नुक्लिएर भारत के मुकाबले बहुत हलके हैं। पाकिस्तान के नुक्लिएर भारत में ज्यादा नुकसान नहीं कर पाएंगे लेकिन भारत के नुक्लिएर दुनियां के नक़्शे से पाकिस्तान का नाम गायब कर देगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी यही बात कह चुके हैं। जब कारगिल युद्ध के दौरान के जब अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की नुक्लिएर धमकी के जवाब में कहा था कि "पाकिस्तान सवेरे का सूरज नहीं देखेगा।"     

मुनीर ने क्या कहा?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी दौरे पर पहुँचे मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।” माना जा रहा है कि यह अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को पहली परमाणु धमकी है।

पाकिस्तान द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया है। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।” मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है, अल्हम्दुलिल्लाह।”

मुनीर ने खुद ही कर दी पाकिस्तान की बेइज्जती

मदरसे में पढ़े और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वाले मुनीर ने खुद ही पाकिस्तान की बेइज्जती भी कर दी है। पाकिस्तान की भूखी-नंगी हालात को मुनीर से बेहतर कौन जानता होगा। उसके उदाहरण भी वैसे ही है।

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज़ है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?”

पाकिस्तान खुद को सड़क छाप, टक्कर मारने वाले गुंडे से ज्यादा क्या ही समझेगा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का ‘डंप ट्रक’ अब बिना पेट्रोल, बिना ड्राइवर और बिना ब्रेक के खाई में गिर चुका है। मुनीर ये मत भूलना कि भारत की मर्सिडीज दौड़ती रहेगी और पाकिस्तान का ट्रक कबाड़ में ही बिकेगा।

यह बात भी साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को ना सुनने का भी मन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोई न्यूक्लियर धमकी नहीं सुनी जाएगी।

मुनीर ने अपने दौरे के दौरान अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात की। इस दौरान मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरीला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर के कार्यभार ग्रहण समारोह में भी हिस्सा लिया है।

ईरान मात खाएगा इजराइल से नहीं पाकिस्तान से; आसिम मुनीर ने खोद दी पाकिस्तान की कब्र, डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात पर भड़क गया ईरान, ट्रम्प ने वसूली नमक खिलाने की कीमत

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर ने साबित कर दिया कि भिखारी भिखारी ही रहेगा। क्योकि उसके दिल और दिमाग में सिर्फ अपना पेट और तिजोरी तक ही रहता है। अब तक पाकिस्तान में जितने भी आर्मी चीफ से लेकर प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति तक सत्ता से बाहर होकर विदेशों में कैसे रहते हैं? पाकिस्तान की जनता समझती है ये हमारे रहनुमा है, जबकि अपने रहनुमा से कभी ये पूछने की हिम्मत नहीं करते कि विदेशों में इतना मोटा पैसा कहाँ से जमा हो रहा है? ताजा मिसाल सबके सामने है। रूस द्वारा धमकी देने के बाद ट्रम्प ने बिकाऊ पाकिस्तान को मोहरा बनाकर अमेरिका को बचाकर उस इजराइल की गोदी में बैठा दिया जिसे मुसलमान गाली देता है।  
ट्रम्प के मकड़जाल में फंसकर मुनीर ने चीन, रूस, ईरान और कई देशों को अपना दुश्मन बना लिया है। इसमें मुनीर का कसूर है दरअसल मदरसे से तालीम लेने वाली की सोंच हो भी क्या सकती है?
     
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक उच्च-स्तरीय कूटनीतिक कदम के तहत बुधवार को व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर के साथ एक बंद दरवाजे के लंच का आयोजन किया. वाशिंगटन में टॉप डिप्लोमैटिक सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक केवल औपचारिक नहीं थी क्योंकि ट्रंप क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को साकार करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कई व्यापक मांगें और प्रस्ताव उनके आसिम मुनीर के सामने रखे. इसमें से कुछ तो उन्हें फंसाने वाला भी हैं.
यह 15 वर्षों में इस तरह की पहली मुलाकात थी और इसने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तरफ इशारा किया. यह लंच उस वक्त हुआ जब इज़राइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाला सप्ताह निर्णायक होगा और इस बीच उन्होंने लंच की टेबल पर उस मुस्लिम देश के फील्ड मार्शल को बैठा रखा था, जो कुछ दिन पहले तेहरान से सहयोग के राग अलाप रहा था.

अमेरिका ने मांगा नमक का कर्जा 

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष की आशंकाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान से बिना शर्त सैन्य और रणनीतिक समर्थन मांगा है. ट्रंप ने मांग की है – ‘अगर अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में जाता है, तो हम पाकिस्तान को अपने पक्ष में चाहते हैं’, इस बात की पुष्टि एक टॉप डिप्लोमैटिक सोर्स ने की है. इस समर्थन में हवाई अड्डों तक पहुंच, जमीनी लॉजिस्टिक्स और संभावित समुद्री मार्ग भी शामिल होंगे, जो किसी भी पाकिस्तान को सैन्य मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना देगा. खबर है कि ट्रंप ने लंच के बाद आसिम मुनीर से कहा – ‘पाकिस्तान ईरान को अधिकांश देशों से बेहतर जानता है. वे जो हो रहा है उससे खुश नहीं हैं. पाकिस्तान के रिश्ते इजरायल के साथ भी बुरे नहीं हैं. वे दोनों पक्षों को जानते हैं.’ मुनीर भी उनके इस बयान में छिपे इशारे को समझ गए होंगे.

रूस और चीन से तोड़े ‘दोस्ताना’

बातचीत के दौरान ट्रंप का जो मुख्य संकेत था, उसके तहत उन्होंने पाकिस्तान को चीन और रूस से दूर रहने को कहा. खबर ये है कि ट्रंप ने मुनीर से पूर्वी गुटों, जिसमें BRICS शामिल है, उनसे पाकिस्तान को दूर रहने को कहा. इसके बदले उन्होंने पाकिस्तान को यूएस-नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे में फिर से शामिल होने का का ऑफर दिया. शासन के करीबी एक सूत्र ने बताया कि वाशिंगटन की पाकिस्तान को चीन-रूस से दूर करने की कोशिश है. इसलिए उन्होंने मुनीर से कहा – ‘हम अपने पुराने साथी को वापस चाहते हैं.’

कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा

ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच विवादास्पद मुद्दों—जिसमें कश्मीर, सीमा पार आतंकवाद और सिंधु जल संधि पर व्यक्तिगत रूप से मध्यस्थता करने की पेशकश की. ट्रंप ने एक बार फिर रटा-रटाया पहाड़ा सुनाते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान बड़ी परमाणु शक्तियां हैं और हम एक और युद्ध नहीं चाहते. उन्होने बताया कि फील्ड मार्शल मुनीर को भारत के साथ युद्ध में न जाने के लिए धन्यवाद दिया और एक बार फिर दोहराया कि ये परमाणु युद्ध बन सकता था.
मुनीर के प्रति ट्रंप की पहल को व्यापक रूप से पाकिस्तान को इस रणनीतिक ढांचे में लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. खासतौर पर जब अमेरिका ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय समर्थन को मजबूत कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूएस-पाकिस्तान संबंधों में 9/11 के बाद के आतंकवाद विरोधी गठबंधन के बाद सबसे महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है. हालांकि पाकिस्तान के लिए मुश्किल ये है कि वो चीन के साथ अपने संबंधों को इसके साथ कैसे बैलेंस कर सकता है.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने यह सपने में भी नहीं सोचा होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में उनकी मुलाकात पाकिस्तान को ही मुसीबत में डाल देगी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि मुनीर और ट्रंप की मुलाकात से ईरान भड़क गया है और उसने पाकिस्तान को चेतावनी भी दे डाली है. प्रेस ब्रीफिंग के दौरान शुक्रवार को मुनीर-ट्रंप के बारे में पूछे जाने पर भारत में ईरान के मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जावेद हुसैनी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान हमारे साथ खड़ा रहेगा.”
असीम मुनीर की ट्रंप से मुलाकात और ट्रंप का यह कहना कि ‘वे ईरान को बेहतर जानते हैं’ से ईरान गुस्से में है और उसने साफ शब्दों में कह दिया है कि किसी तीसरे पक्ष को ईरान और इजरायल के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कह दिया कि ईरान किसी भी सूरत में सरेंडर नहीं करेगा. ईरान ने आरोप लगाया कि इजरायल जंग की आड़ में आम लोगों को मार रहा है और उसने हमारे कई सैन्य अधिकारियों की भी हत्या कर दी है.

ईरानी न्यूक्लियर रिसर्च हेडक्वॉर्टर को इजरायल ने बनाया निशाना

दूसरी ओर, इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने शुक्रवार को घोषणा की है कि उसने गुरुवार रात को तेहरान में कई हवाई हमले किए, जिनमें ईरान के मिसाइल और परमाणु हथियार कार्यक्रमों से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों में मिसाइल बनाने वाली सैन्य औद्योगिक इकाइयां, ईरान का डिफेंस इनोवेशन और रिसर्च संगठन (एसपीएनडी) का मुख्यालय शामिल था.

आईडीएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “60 से अधिक वायु सेना के लड़ाकू जेट ने गुरुवार रात को ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसमें लगभग 120 हथियारों का उपयोग किया गया. इसमें तेहरान इलाके में कई मिसाइल बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां भी शामिल थीं.”

पोस्ट में आगे कहा गया, “ये ठिकाने कई सालों में बनाए गए थे और ये ईरान के रक्षा मंत्रालय का औद्योगिक केंद्र थे. हमले किए गए ठिकानों में मिसाइल घटकों के उत्पादन के लिए सैन्य औद्योगिक स्थल और रॉकेट इंजन बनाने के लिए कच्चे माल के उत्पादन स्थल शामिल थे.” आईडीएफ ने उल्लेख किया कि ईरान के परमाणु हथियार परियोजना को नुकसान पहुंचाने की अपनी कार्रवाइयों के तहत तेहरान में एसपीएनडी मुख्यालय की इमारत पर भी हमला किया गया.

आईडीएफ ने कहा, “एसपीएनडी मुख्यालय का इस्तेमाल ईरान के सैन्य क्षमताओं के लिए उन्नत तकनीकों और हथियारों के अनुसंधान और विकास के लिए किया जाता है, जिसे 2011 में ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम के संस्थापक फखरी जादेह ने स्थापित किया था.” 

क्या मुनीर ईरान के लिए पाकिस्तान के "मीर ज़फर" बनेंगे? क्योकि इधर मोदी से बात, उधर पलट गए ट्रंप: एक बार फिर लिया भारत-पाक सीजफायर को रोकने का श्रेय, आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाकर किस अधिकार से मुनीर से सौदा किया जा रहा है?


भारत के ऑपरेशन सिंदूर में हुए आक्रामक हमलों से पाकिस्तान अभी तक कराह रहा है। भारत से बचाने के लिए शहबाज-मुनीर अमेरिका, चीन और तुर्किए से गुहार लगा रहे हैं। आसिम मुनीर अपने कटोरा लेकर अमेरिका में ट्रंप को हाजिरी लगाने पहुंच चुके हैं, जबकि शहबाज शरीफ अगले हफ्ते ईरान जाने वाले हैं, जहां भीख में हथियार मांग सकते हैं। इस बीच मोदी सरकार ने साफ-साफ अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर पाकिस्तान ने अब सीजफायर तोड़कर हमले की हिमाकत दिखाई, तो इस दफा उसका संपूर्ण संहार तय है। जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह भी साफ कर दिया कि किसी भी तरह का आतंकी हमला भी ‘एक्ट ऑफ वार’ माना जाएगा। इसलिए भारत लगातार युद्धाभ्यास में जुटा है, जिससे पाकिस्तानी हुक्मरानों की घबराहट बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान पीएम मोदी की तासीर से अब बखूबी वाकिफ हो गया है, वे अंदर घुसकर मारने में यकीन रखते हैं। एकाधिक बार हुई सर्जिकल स्ट्राइक से उन्होंने यह साबित भी किया है। भारत का युद्धाभ्यास सीधा मुनीर-शहबाज को अल्टीमेटम है कि अगर सीजफायर तोड़ने की हिमाकत दिखाने की जुर्रत भी की, तो ऑपरेशन सिंदूर से भी बड़ा ऑपरेशन शुरू हो जाएगा क्योंकि टारगेट लॉक हो चुके हैं। काउंटडाउन शुरू हो जाएगा और उसके बाद पाकिस्तान का विनाश निश्चित है।

पीएम मोदी की नीति जो भारत को छेड़ेगा, उसको छोड़ा नहीं जाएगा
भारत युद्ध में पहल पर विश्वास नहीं करता, क्योंकि उसका मानना है कि यह युद्ध का युग नहीं है, बल्कि भारत बुद्ध का देश है, जो शांति में विश्वास रखता है। लेकिन इसके साथ ही पीएम मोदी की नीति है कि जो भारत को छेड़ेगा, उसको छोड़ा नहीं जाएगा। भारत ने इसके लिए जबरदस्त तैयारी शुरू कर दी है। सेना की ताकत में इजाफा किया जा रहा है, जिससे एक साथ तीन देशों को काउंटर किया जा सके। यदि पाकिस्तान ने सीजफायर करने की हिमाकत की तो इस बार भारत ट्रिपल प्रहार करेगा। सबसे पहले पाकिस्तान को तबाह करेगा। इस दौरान उसे हथियार भेजने वाले चीन और तुर्किए को भी सबक सिखाने की तैयारी है। पाकिस्तान में लगे चीन के डिफेंस सिस्टम और उसके हथियार डिपो तबाह कर दिए जाएंगे। इसी तरह तुर्किए के ड्रोन और वॉरशिप को भी निशाने पर लिया जाएगा। पाकिस्तान की घबराहट की सबसे बड़ी वजह भारत के हाईटेक हथियार हैं, जिन्होंने 48 घंटे में ही पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था।

दूरदर्शी विजन और अत्याधुनिक हथियारों से दुश्मन को किया नाकाम
पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन ने हमारी सेनाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही तीन हथियार ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल पहली बार किसी कॉम्बैट ऑपरेशन में किया गया, जिसमें वो शत-प्रतिशत सफल रहे। राफेल, जिससे पाकिस्तान और पीओके में आतंकी अड्डों को तबाह किया गया। दूसरा हथियार है ब्रह्मोस, जिसने पाकिस्तानी एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया और तीसरा हथियार है S-400, जिसने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम किया। हालांकि एस-400 के साथ आकाश और स्पाइडर के अलावा दूसरे एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन और जेट के के हमलों को 100 फीसदी नाकाम किया था।

भारत के अभेद्य सुरक्षा कवच को और अधिक मजबूत करने की तैयारी
भारत के अभेद्य सुरक्षा कवच के पीछे मजबूत वजह में लॉन्ग रेंज डिफेंस सिस्टम एस-400 है, जिसकी रेंज 400 किमी है। मीडियम रेंज का डिफेंस सिस्टम आकाश और बराक-8 है। आकाश की रेंज 70 से 80 किलोमीटर है, जबकि इजराइल के सहयोग से तैयार किए गए बराक की रेंज 70 से 100 किमी है। इसके अलावा शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम स्पाइडर और इग्ला-S है। स्पाइडर की रेंज 20 से 30 किमी है, जबकि इग्ला की रेंज 10 से 15 किमी है। इन डिफेंस सिस्टम का चक्रव्यूह तैयार किया गया, जिसमें पाकिस्तान का हर ड्रोन, हर मिसाइल फंस कर तबाह हो गए। अब भारत अपनी इस रक्षा प्रणाली में और ज्यादा इजाफा करने जा रहा है, जिसमें एयर डिफेंस के लिए तीन नई मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जबकि एस-400 के बाकी 7 सिस्टम इस साल के आखिर तक भारत को मिल जाएंगे। पीएम मोदी के कार्यकाल में ही साल 2018 में एस-400 की डील हुई थी, जिसमें से तीन भारत को मिल चुके हैं, बाकी जल्द मिल जाएंगे। ऐसे भी कयास हैं कि एस-400 को लेकर नए कंसाइनमेंट की डील हो सकती है।

इधर पीएम मोदी से की बात, उधर पलट गए ट्रंप: एक बार फिर लिया भारत-पाक सीजफायर को रोकने का श्रेय, आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस बुलाकर हो रहा सौदा 

भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर श्रेय लेने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “मैंने ही पाकिस्तान से वॉर को रुकवाया था। मुझे पाकिस्तान पसंद है, मैं सोचता हूँ मोदी भी शानदार व्यक्ति हैं।”

दरअसल, बुधवार (18 जून 2025) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान फौज के जनरल आसिम मुनीर ने व्हाइट हाउस में साथ में लंच किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत की। इस दौरान ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ्ता कराने का दावा किया।

साथ ही आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए कहा कि मध्यस्थता के दौरान पाकिस्तान ने भी काफी प्रभावी ढंग अपनाया। ट्रंप ने कहा कि इसमें आसिम मुनीर का खास नेतृत्व था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान न्यूक्लियर देश हैं, इसीलिए वॉर रुकवा दिया।

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर 35 मिनट बात की थी। इस दौरान पीएम ने साफ कहा था कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी। इसके बाद भी अब डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर करवाया।

पाकिस्तान की गुलाम कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने केवल पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा फैलाया: असीम मुनीर को नहीं आया था अमेरिका से कोई बुलावा, सच खुलने पर लग रही लताड़, लोग बोल रहे- माफी माँगो

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पाकिस्तानी फौज का मुखियाजनरल असीम मुनीर (फोटो साभार-newsX/Indiatoday)
समय आ गया है कि जनता को जानना चाहिए कि कांग्रेस स्थापना किसने की और क्यों? कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिशर द्वारा भारतीयों का ध्यान आज़ादी आंदोलन से हटाने के लिए की गयी और आज की कांग्रेस पार्टी की स्थापना के उद्देश्य को अपनाते हुए देश की अस्मिता के विरुद्ध जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है। पाकिस्तान जाकर रोते हैं "मोदी से बचाओ", इन पागलों से पूछो कि क्या मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान में चुनाव होंगे या भारत में?  

गौरतलब बात है कि कांग्रेस के कार्यकाल में हो रहे आतंकी हमलों पर "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दुओं को बदनाम कर अपने आका पाकिस्तान के आतंकियों को बचाने का काम किया जा रहा था। माना अमेरिका पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है इसका मतलब यह नहीं कि पाकिस्तान इतनी बड़ी गलती दुनियां में बेनकाब हो जाए।      

पिछले दिनों एक खबर आई थी कि पाकिस्तानी फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर को अमेरिका ने सेना दिवस के मौके पर अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। खबर उड़ी कि मुनीर को व्हाईट हाउस बुलाया गया है। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत की आलोचना की थी। अब अमेरिका ने इसे फर्जी खबर करार दिया है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सामने आ रहा है।

असीम मुनीर के न्यौते पर अपने ट्वीट में जयराम ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। लिखा, “यह खबर भारत के लिए कूटनीतिक और सामरिक दृष्टि से एक बड़ा झटका है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मोदी सरकार कह रही है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, ऐसे में पाकिस्तानी सेना प्रमुख का अमेरिकी सेना दिवस में बतौर अतिथि शामिल होना निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है”।

जयराम रमेश ने अमेरिका पर भी सवाल उठाया था और कहा था “यह वही व्यक्ति है जिसने पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले भड़काऊ और उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया था, सवाल उठता है कि अमेरिका की मंशा क्या है?”

हालाँकि कुछ समय बाद ही अमेरिका ने स्पष्ट किया कि असीम मुनीर के न्यौते वाली बात पूरी तरह से अफवाह है। अब, जब पूरी खबर ही झूठी निकल गई तो सोशल मीडिया पर जयराम रमेश को लोगों ने घेरना शुरू कर दिया। एक के बाद एक कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट कर कहा कि जयराम रमेश को अपने आलोचनात्मक और झूठे बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए।

किसी वरिष्ठ नेता की तरफ से इस तरह की खबरें फैलाना और उसी खबर के आधार पर देश के ही खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणी करना उन पर भी कई सवाल खड़े करता है।

जयराम रमेश ने जब पोस्ट किया था तब कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी भारत के खिलाफ इसी तरह की बयानबाजी की थी। हालाँकि बाद में जो खबर आई वो जयराम के बयान और सोशल मीडिया पर फैली अफवाह से एक रत्ती भी मेल नहीं खा रही है। ऐसे में लोगों का गुस्सा भी जायज है।

भारत का हमला होते ही बंकर में छिप गया था मुल्ला मुनीर, अब सेफ हाउस में हुआ शिफ्ट; जिस मुल्क का आर्मी चीफ ही छिपकर बैठ जाए उस मुल्क का बर्बाद होना निश्चित

दंगाई को हमेशा दंगा करवाकर छिपते देखा गया है, ठीक वही हालत पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर की है। पहलगाम करवाकर उसका बदला शुरू होते ही डरपोकों की तरह छुप गया, और अपनी फौज ही नहीं अपने मुल्क को बर्बादी की राह पर धकेल दिया। आज (मई 12) को DGMO की होने वाली मीटिंग भी शाम तक के लिए टलने के पीछे भारत की शर्तें उनके लिए मुसीबत बनती नज़र आ रही है। बचे हुए आतंकवादियों को भारत के हवाले नहीं करेगा। अगर कर दिया भिखारी पाकिस्तान फिर किस तरह हाथ में कटोरा लेकर घूमेगा। दरअसल, पाकिस्तान सरकार और आर्मी IMF और दूसरे मुल्कों से पैसा लेकर जनता की बजाए आतंकियों के पोषण और अपनी तिजोरियां भरते हैं। यही वजह यह है पाकिस्तान आतंकवादियों की खान बन चूका है। मुनीर ने हिन्दू मुसलमान तो कर दिया लेकिन पलटवार से हिल गया। 

पाकिस्तान भूल रहा है कि अब इंदिरा गाँधी वाला भारत नहीं। जब शिमला समझौते में भारत के आगे सरेंडर 92000 पाकिस्तानी फौजियों को रिहा करवाकर ले जाते हैं लेकिन इंदिरा गाँधी अपने उन 93 भारतीय फौजियों को नहीं छुड़वा पायी जो पाकिस्तान के कब्जे में थे। आज का भारत एक गोली का जवाब गोलों से देने वाला है।   

उधर क्रिकेटर शाहिद अफरीदी सडकों पर भारत के खिलाफ जहर उगलते अपनी सेना को बड़ा पराक्रमी बताते घूम रहे हैं। यानि पाकिस्तान में आतंकवादियों की कोई कमी नहीं।   
भारत की वायुसेना ने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर जबरदस्त हमला किया, जिससे पाकिस्तानी फौज में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, इस हमले ने पाकिस्तान के फौजी चीफ जनरल असीम मुनीर को इतना डरा दिया कि उसे तुरंत रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर्स (जीएचक्यू) में एक सुरक्षित बंकर में 
छिपना पड़ा। भारत की इस सटीक मार से पाकिस्तानी सेना के शीर्ष नेतृत्व में डर साफ झलक रहा है।

सीएनएन न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। रात भर छिपकर अपनी जान बचाने वाला मुनीर अब अपना बेस भी बदल सकता है।

इस्लामाबाद से मात्र 10 किलोमीटर दूर नूर खान एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना का बड़ा केंद्र है। हमले में वहाँ के ईंधन ट्रक, गोदाम और एक सी-130 विमान को भारी नुकसान पहुँचा। सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे के पास मलबा और तबाही साफ दिख रही है।