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LoP राहुल ने लाल किला न पहुंचकर कर क्या स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार किया? 1990 से अमेरिका की गोद में बैठ भारत को ‘चुराए’ न्यूक्लियर हथियारों का डर दिखाता रहा है पाकिस्तान, मोदी ने निकाल दी हेकड़ी

                                                                                                               साभार: न्यूज18/हंस इंडिया
जब भारत स्वतंत्रता दिवस मना था और LoP राहुल गाँधी का लाल किला नहीं पहुंचना क्या साबित करता है? आखिर कांग्रेस प्रवक्ता कब तक राहुल और गाँधी परिवार की भयंकर गलतियों का बचाव करते रहेंगे? LoP का लाल किला नहीं पहुँचने से साबित हो गया कि कांग्रेस भारत विरोधियों के हाथ कठपुतली बन सारी संवैधानिक संस्थाओं को अपमानित क्यों जनता को गुमराह किया जा रहा है? कांग्रेस और INDI गठबंधन को वोट देने वालों को अब इस गैंग को वोट देने से देशहित में सोंचना होगा।     
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से यह साफ कर दिया कि भारत कोई न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं सहेगा। यह सीधे तौर पर उस न्यूक्लियर गीदड़भभकी का जवाब था जो कुछ दिनों पहले पाकिस्तानी फौज के मुखिया आसिम मुनीर ने अमेरिका की गोद में बैठकर दी थी।

परमाणु हथियारों के दम पर पाकिस्तान खुद को इस्लामिक मुल्कों का अब्बा समझता आया है और भारत को धमकाने की कोशिश करता रहा है। अतीत में उसकी धमकियाँ सफल भी हुईं लेकिन अब भारत की नीति बदल गई है। अब भारत ने नया ‘न्यू नॉर्मल’ बना लिया है, जिसमें किसी परमाणु ब्लैकमेल की कोई जगह नहीं है।

पाकिस्तान तक कैसे पहुँचे परमाणु हथियार

माना जाता है कि पाकिस्तान के परमाणु सपने की शुरुआत 1953 से ही हो गई थी जब Pakistan Atomic Energy Committee (PAEC) की स्थापना की गई। बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया जाने लगा। 1965 में जब भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान की हार हुई तो पाकिस्तान परमाणु हथियारों के लिए बिलबिलाने लगा।

चीन ने अक्टूबर 1964 में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर न्यूक्लियर पावर बन गया तो मार्च 1965 में पाकिस्तान ने चीन से भी परमाणु हथियार बनाने के लिए मदद माँगी लेकिन पाकिस्तान को कोई सहयोग नहीं मिल पाया।

मार्च 1965 में पाकिस्तानी के तत्कालीन विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था, “अगर भारत परमाणु बम बनाता है तो हम घास-पत्ते खा लेंगे, भूखे रहेंगे लेकिन हमें अपना परमाणु बम बनाना ही होगा।”

दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के दो हिस्से हो गए और बांग्लादेश का जन्म हुआ। इसके बाद पाकिस्तान की जग हँसाई होने लगी। देशी और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान की खूब खिल्ली उड़ाई गई। न्यूयॉर्क टाइम्स में तो यहाँ तक लिखा गया कि यह सैन्य अपमान उस मुस्लिम राष्ट्र के लिए बेहद दर्दनाक था जो भारतीयों को ‘मूर्ति पूजक, गौ-प्रेमी‘ कहकर घृणा करता है।

इसके कुछ ही समय बाद ही 18 मई 1974 को भारत ने राजस्थान के पोकरण में अपनी पहला सफल परमाणु परीक्षण ‘स्माइलिंग बुद्धा‘ भी कर दिया। यह ना केवल पाकिस्तान के लिए झटका था बल्कि अमेरिका भी इससे तिलमिला गया।

1974 के सितंबर में अब्दुल कादिर खान ने भुट्टो को पत्र लिखकर कहा कि उसके पास परमाणु बम बनाने के सारे ब्लूप्रिंट हैं। 1972 से ए.क्यू. खान सेंट्रीफ्यूज बनाने वाली नीदरलैंड्स की फिजिक्स डायनेमिक्स रिसर्च लेबोरेटरी में काम कर रहा था। दिसंबर 1974 में भुट्टो से मुलाकात के बाद ए.क्यू. खान यूरेनियम संवर्धन और सेंट्रीफ्यूज से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और ब्लूप्रिंट्स चुराने लगा।

इस बीच नीदरलैंड्स की एजेंसियों को शक हुआ तो खान की निगरानी होने लगी और जाँच एजेंसियाँ इससे पहले उसे पकड़ पाती वो दिंसबर 1975 में पाकिस्तान पहुँच गए। खान उन सप्लायर्स की लिस्ट भी लेकर आए जो न्यूक्लियर बॉम्ब बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मटेरियल से लेकर टेक्निकल चीजें तक बेचते थे।

खान ने 1976 में Pakistan Atomic Energy Commission (PAEC) के साथ काम करना शुरू किया लेकिन इसके मुखिया मुनीर अहमद खान के साथ उनके मतभेद हो गए। मुनीर दरअसल प्लूटोनियम पर काम करना चाहते थेक जबकि अब्दुल के पास ब्लूप्रिंट यूरेनियम के थे।

1976 में भुट्टो ने अब्दुल के लिए इस्लामाबाद से 50 किमी दूर कहुटा में इंजीनियरिंग रिसर्च लेबोरेटरी यानी ERL शुरू की जहाँ यूरेनियम पर काम होने लगा था। 1978 आते-आते में पाकिस्तान ने यूरेनियम एनरिचमेंट का काम लगभग कर लिया और वो बम बनाने ही वाला था।

इस बीच अप्रैल 1979 में दुनिया को जब खबर लगी तो अमेरिका ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगा दिए। हालाँकि, यह प्रतिबंध सिर्फ दिखावे के लिए थे। वहीं, 1983 में एक डच अदालत ने अब्दुल को 4 साल की कैद की सजा सुनाई लेकिन किन्हीं ताकतों ने अब्दुल को जेल जाने से बचा लिया।

1986 में पाकिस्तान-ईरान के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन अग्रीमेंट साइन हो गया। खबरें आईं कि पाकिस्तान ने वेपन ग्रेड यूरेनियम मटिरियल बना लिया है। कहा जाता है कि 1985-1990 के बीच पाकिस्तान के पास परमाणु बम के लिए जरूरी अत्यधिक संवर्द्धित यूरेनियम था।

इस बीच पाकिस्तान ने इराक, लीबिया, केन्या, माली, सूडान, मोरक्को, जैसों देशों के आतंकी संगठनों को कथित तौर पर सेंट्रीफ्यूज बेचकर मोटा पैसा कमाया था। इस बीच जब खुद को दुनिया का ‘बॉस’ समझने वाले अमेरिका को पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने चाहिए थे तो वो पाकिस्तान के समर्थन में दिख रहा था।

1990 की एक अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने एक परमाणु बम बना लिया था लेकिन इसका परीक्षण नहीं किया था। अक्टूबर 1990 मे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि ‘अब अमेरिका ये नहीं कहेगा कि पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हैं’।

इसके बाद आया 1998, भारत ने 11 और 13 मई को पोकरण रेंज में 5 परमाणु परीक्षण किए। इसके 15 दिन बाद ही 28-30 मई को पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया और वह पहला परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामिक देश बन गया।

पाकिस्तान की 1990 की परमाणु धमकी

पाकिस्तान के पास आधिकारिक तौर पर परमाणु बम 1998 में आया था लेकिन उसकी परमाणु धमकियों की शुरुआत 1990 से ही हो गई थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को मई 1990 में यकीन हो गया था कि पाकिस्तान, भारत पर परमाणु हमला करने वाला है।

व्हाइट हाउस से सीआईए के सीनियर एजेंट रॉबर्ट गेट्स को भारत-पाकिस्तान की यात्रा पर भेजा गया। 21 मई 1990 को अमेरिका ने दुनिया को बतया कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर युद्ध रुकवा दिया है।

1990 का दशक वही था जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देना शुरू कर दिया था। हिंदुओं को घरों से भगाया जा रहा था और हिंदू बेटियों का रेप-हत्या आम बात हो गई थी। उधर, पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो कश्मीर की आजादी का राग आलाप रही थी।

उस समय की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत ने अपने 2 लाख सैनिक, 5 अटैक यूनिट और टैंकों को पाकिस्तान के बॉर्डर पर तैनात कर दिया है। पाकिस्तान में इसे युद्ध की तैयारी के तौर पर देखा जाने लगा था। लेकिन तभी आया पहला ‘न्यूक्लियर बल्फ’। अमेरिका ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और कथित तौर पर भारत-पाकिस्तान के न्यूक्लियर वॉर को टलवा दिया।

इसके 3 साल बाद 1993 मे The New Yorker newspapaer मे ‘On the Nuclear Edge’ नाम से एक रिपोर्ट छपी जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान हमला करने वाला था। कहा गया कि बेनजीर भुट्टो इस प्लान में शामिल नहीं थी लेकिन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान और फौज के प्रमुख मिर्जा असलम बेग बस न्यूक्लियर बटन दबाने ही वाले थे।

हालाँकि, कभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि भारत ने एक गोली भी नहीं चलाई थी फिर भी पाकिस्तान अचानक से तमाम एस्कलेशन लैडर को पार करके सीधे न्यूक्लियर हमले तक क्यूँ और कैसे पहुँच गया। अमेरिका के अलावा किसी और जगह की खुफिया एजेंसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? और मामले सामने आने पर पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कारगिल में न्यूक्लियर वॉर की गीदड़भभकी

मई 1999 में, भारतीय सेना को कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की सूचना मिली। शुरू में इसे कबायली आतंकवादियों की घुसपैठ माना गया लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि इसमें पाकिस्तानी फौजी शामिल थे। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, जिसका उद्देश्य घुसपैठियों को हटाना और नियंत्रण रेखा (LoC) की स्थिति बहाल करना था।

उस समय CIA में काउंटर टेररिज्म के विशेषज्ञ रहे ब्रूस रीडेल ने अपनी किताब Avoiding Armageddon में इसका दावा किया है कि कारगिल युद्ध भी परमाणु हमले तक पहुँचने वाला था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिलने लगे थे कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों को तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

नवाज शरीफ इसके बाद एक बिना पूर्व निर्धारित यात्रा पर अमेरिका पहुँचे। नवाज शरीफ अमेरिका से ये चाहते थे कि उनकी सरकार को भारत के आगे झुककर शांति समझौते की माँग ना करनी पड़े। इसके बाद इस युद्ध को न्यूक्लियर धमकी की आड़ में रूकवा दिया गया। जिससे भारत पाकिस्तान के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई ना कर पाए।

भारत की कार्रवाई रोकने के लिए पाकिस्तान का न्यूक्लियर बल्फ

2008 में मुंबई पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकियों ने हमला किया। इसमें सैकड़ों लोगों की जान गई और भारत को इस पर जवाबी कार्रवाई करने की जरूरत थी। डेविड हेडली से लेकर कसाब तक, पाकिस्तान आर्मी और वहाँ के आतंकी इको-सिस्टम से जुड़े लोग इसमें शामिल थे। भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सबूत भी थे।

उसी समय भारत ने अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील साइन की थी। इसके कई फायदे बताए जाते हैं लेकिन इस पर कई सवाल भी हैं। इस डील के बाद भारत के न्यूक्लियर हथियार टेस्ट करने, यूरेनियम एनरिचमेंट करने जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर एक अमेरिकी कैप लग गई। इस हमले के बाद पाकिस्तान पर भारत को अडवांटेज मिलता उससे पहले ही भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिकी नजर आकर टिक गईं।

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) की एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीय संसद पर हमला (2001), 26/11 मुंबई हमला (2008), उरी हमला (2016) और पुलवामा हमला (2019) जैसी घटनाओं में पाकिस्तान भारत की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए परमाणु हमले को ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है।

ऑपरेशन सिंदूर में भी न्यूक्लियर बल्फ लेकिन भारत ने दिया मुँहतोड़ जवाब

पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह किया। भारत की इस जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान बौखला गया और फिर सीधा डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुँचा।
ट्रंप ने इस युद्ध में मध्यस्थता का दावा करते हुए बार-बार कहा कि उन्होंने परमाणु युद्ध टाल दिया है। भारत ने इस हमले के बीच कभी भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी नहीं दी थी। अमेरिकी फिर वही पुरानी चाल के जरिए भारत पर पाकिस्तान के न्यूक्लियर बमों का दबाव बनाना चाहता है। पाकिस्तान की फौज का मुखिया आसिम मुनीर, ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को परमाणु युद्ध की गीदड़भभकी दे रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान की न्यूक्लियर ब्लैकमेल को अब भारत नहीं सहेगा। अगर पाकिस्तान कोई हमला करने की कोशिश करता है तो भारत पूरी ताकत से उसकी जवाब देगा।

डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठ असीम मुनीर ने भारत को दी ‘न्यूक्लियर हमले’ की गीदड़भभकी, कहा- आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे: सिंधु पर बाँध बना तो 10 मिसाइल मारेंगे

भूखे-प्यासे पाकिस्तान में जनता रोटी को तरस रही और हुक्मरान परमाणु बम का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान बीच बचाव के लिए अमेरिका से भीख माँग रहा था। अब पाकिस्तानी का सेना प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। वो भी न्यूक्लियर हमले की।

जिस तरह ट्रम्प और मुनीर की बीच खिचड़ी पक रही है, देखना यह है कि कौन किसको लेकर डूबेगा? एक का डूबना पक्का है। एक भी वर्षों से एक कहावत चलती आ रही है कि गरीब की जोरू को हर कोई भाभी बनाता आया है।   

पाकिस्तान और अमेरिका के हुक्ममारों को नहीं मालूम कि भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खतरों का खिलाडी है। मोदी को दी जाने वाली धमकी उग्र बनाती है। हर धमकी मोदी के लिए सफलता की सीढ़ी का काम करती है। अभी हाल में दुनिया ने देख भी लिया। आतंकी हमला का पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा। दूसरे, जिस अमेरिका के आगे दुनियां झुकती है लेकिन मोदी एक चट्टान बन खड़े हैं। मुनीर तो बिन बुलाए पाकिस्तान पहुँच गया लेकिन मोदी को डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से भारत वापस जाते हुए अमेरिका होकर जाने को कहा था। मोदी ने डिप्लोमेटिक तरीके से मना कर दिया। टैरिफ की धमकी भी मोदी पर बेअसर हो रही है। पाकिस्तान को नहीं मालूम कि उसके नुक्लिएर भारत के मुकाबले बहुत हलके हैं। पाकिस्तान के नुक्लिएर भारत में ज्यादा नुकसान नहीं कर पाएंगे लेकिन भारत के नुक्लिएर दुनियां के नक़्शे से पाकिस्तान का नाम गायब कर देगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी यही बात कह चुके हैं। जब कारगिल युद्ध के दौरान के जब अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की नुक्लिएर धमकी के जवाब में कहा था कि "पाकिस्तान सवेरे का सूरज नहीं देखेगा।"     

मुनीर ने क्या कहा?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी दौरे पर पहुँचे मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।” माना जा रहा है कि यह अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को पहली परमाणु धमकी है।

पाकिस्तान द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया है। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।” मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है, अल्हम्दुलिल्लाह।”

मुनीर ने खुद ही कर दी पाकिस्तान की बेइज्जती

मदरसे में पढ़े और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वाले मुनीर ने खुद ही पाकिस्तान की बेइज्जती भी कर दी है। पाकिस्तान की भूखी-नंगी हालात को मुनीर से बेहतर कौन जानता होगा। उसके उदाहरण भी वैसे ही है।

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज़ है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?”

पाकिस्तान खुद को सड़क छाप, टक्कर मारने वाले गुंडे से ज्यादा क्या ही समझेगा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का ‘डंप ट्रक’ अब बिना पेट्रोल, बिना ड्राइवर और बिना ब्रेक के खाई में गिर चुका है। मुनीर ये मत भूलना कि भारत की मर्सिडीज दौड़ती रहेगी और पाकिस्तान का ट्रक कबाड़ में ही बिकेगा।

यह बात भी साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को ना सुनने का भी मन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोई न्यूक्लियर धमकी नहीं सुनी जाएगी।

मुनीर ने अपने दौरे के दौरान अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात की। इस दौरान मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरीला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर के कार्यभार ग्रहण समारोह में भी हिस्सा लिया है।

ऐसा हाइपरसोनिक बंकर बस्टर बना रहा DRDO: भारत बन जाएगा पांचवां देश : पाकिस्तान-चीन में 3000KM भीतर घुसकर जो मचा दे तबाही, जमीन के भीतर हो विस्फोट… : भारत के पास ऐसा क्या, जो इजरायल के पास भी नहीं

खास बात ये है कि ये हाइपरसोनिक है, यानी इतनी तेज कि कोई रडार इसे पकड़ नहीं सकता। अमेरिका के GBU-57 बम से भी ज्यादा ताकतवर, ये मिसाइल सस्ती और स्वदेशी है। पाकिस्तान के कहुटा और नूर खान जैसे ठिकानों को नष्ट करने में ये गेम-चेंजर होगी। DRDO की इस तकनीक ने भारत को दुनिया के टॉप डिफेंस पावर में ला खड़ा किया है।

खास बात ये है कि भारत की अग्नि-V मिसाइल ऐसी मिसाइल है, जिससे रेंज में दुनिया की कुछेक मिसाइलें भले ही आगे हों, लेकिन बंकर बस्टर के तौर पर, जैसा इसे बनाया जा रहा है, वैसी ताकत दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। 

अग्नि-V बंकर बस्टर मिसाइल क्या है?

भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) एक ऐसी मिसाइल बना रहा है, जो दुनिया के सबसे ताकतवर गैर-परमाणु हथियारों में से एक होगी। इसका नाम है अग्नि-V बंकर बस्टर मिसाइल। ये मिसाइल जमीन के नीचे बने मजबूत बंकरों, सैन्य ठिकानों और हथियारों के गोदामों को तबाह करने के लिए बनाई जा रही है। इसे खास तौर पर पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।
                                                                              साभार: AI ChatGPT
अग्नि-5 (AGNI-V) पहले से ही भारत की एक शक्तिशाली मिसाइल है, जो 5,000-7,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और परमाणु हथियार ले जा सकती है। लेकिन अब DRDO इस मिसाइल का एक नया वर्जन बना रहा है, जो पारंपरिक हथियार (यानी गैर-परमाणु) के साथ काम करेगा। इस नए वर्जन को खास तौर पर बंकर बस्टर के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। बंकर बस्टर का मतलब है ऐसा हथियार जो जमीन के नीचे गहरे बने बंकरों, सुरंगों और जमीन के नीचे या ऊपर कंक्रीट की मोटी परतों से बनाई गई इमारतों को ध्वस्त कर सके।

अग्नि-V मिसाइल की खास बातें

  • वजन और ताकत: ये मिसाइल 7,500-8,000 किलोग्राम (7.5-8 टन) का भारी वारहेड ले जा सकती है। इसका मतलब है कि इसमें इतना विस्फोटक होगा कि ये बहुत बड़े और मजबूत ढाँचों को भी उड़ा देगा। इसका खुद का वजन 50 हजार किलोग्राम तक है।
  • पेनेट्रेशन: ये मिसाइल जमीन में 80-100 मीटर गहराई तक घुसकर विस्फोट कर सकती है। यानी पहाड़ों या कंक्रीट के नीचे बने बंकर भी इससे नहीं बच सकते।
  • रेंज: भारी वारहेड की वजह से इसकी रेंज 2,500-3,000 किलोमीटर तक होगी, जो पाकिस्तान और चीन के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर सकती है।
  • गति: ये मिसाइल मैक 8 से मैक 20 (9,800-24,500 किमी/घंटा) की रफ्तार से चलती है। इतनी तेज गति की वजह से इसे रोकना लगभग नामुमकिन है।
  • दो तरह के वारहेड
  • एयरबर्स्ट वारहेड: ये हवा में फटेगा और हवाई अड्डों, रडार स्टेशनों, या सतह पर मौजूद ठिकानों को तबाह करेगा।
  • डीप-पेनेट्रेशन वारहेड: ये जमीन में गहराई तक जाएगा और बंकरों, मिसाइल साइलो, या कमांड सेंटर को नष्ट करेगा।
  • सटीकता शानदार: इसमें भारत का नाविक (NavIC) नेविगेशन सिस्टम, रिंग लेजर जायरोस्कोप और माइक्रो इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम है, जो इसे सटीक निशाना बनाने में मदद करते हैं।
  • ये मिसाइल कैनिस्टर-लॉन्च तकनीक का इस्तेमाल करती है, यानी इसे ट्रक या रेल से कहीं भी ले जाकर तेजी से लॉन्च किया जा सकता है। ये इसे और भी खतरनाक और लचीला बनाता है।
                                                                        साभार: AI ChatGPT

अमेरिका के GBU-57 और भारत के अग्नि-V में कितना अंतर?

अमेरिका का GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP): ये दुनिया का सबसे मशहूर बंकर बस्टर बम है। इसका वजन 13,600 किलोग्राम (30,000 पाउंड) है, जिसमें 2,400-2,700 किलोग्राम विस्फोटक होता है। ये 60 मीटर गहरे कंक्रीट या 130 फीट चट्टान में घुस सकता है। लेकिन इसे इस्तेमाल करने के लिए B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर चाहिए, जो बहुत महँगा है। अमेरिका ने 21 B-2 बनाए, लेकिन अब सिर्फ 19 सक्रिय हैं। हालाँकि अग्नि-V इन महँगे झंझटों से मुक्त है और पूरी तरह से सटीक हमले करने में सक्षम है।

अग्नि-V और GBU-57 में अंतर

डिलीवरी का तरीका: GBU-57 को B-2 जैसे स्टील्थ बॉम्बर से गिराया जाता है, जो महंगे हैं और उनकी देखभाल में भारी खर्चा आता है। जबकि अग्नि-V एक मिसाइल है, जो कैनिस्टर से लॉन्च होती है। इसे बॉम्बर की जरूरत नहीं, जिससे ये सस्ता और तेज़ है।
पेलोड: GBU-57 का विस्फोटक 2,400-2,700 किग्रा है, जबकि अग्नि-V 7,500-8,000 किग्रा का वारहेड ले जा सकती है। यानी अग्नि-V ज्यादा तबाही मचा सकती है।
पेनेट्रेशन: GBU-57 60 मीटर तक घुस सकता है, लेकिन अग्नि-V 80-100 मीटर तक जा सकती है।
रेंज: GBU-57 की रेंज B-2 बॉम्बर पर निर्भर करती है, जो 11,000 किमी तक जा सकता है। वहीं, अग्नि-V की रेंज 2,500-3,000 किमी है, जो भारत के लिए काफी है।
गति: GBU-57 की गति मैक 1 (जब 50,000 फीट से गिराया जाता है) है। जबकि अग्नि-V मैक 8-20 की हाइपरसोनिक गति से चलती है, जिसे दुश्मन की मिसाइल डिफेंस सिस्टम रोक नहीं सकते।
मोबिलिटी : अग्नि-V को तेजी से तैनात किया जा सकता है। इसे दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम भी ट्रैक नहीं कर सकते।
कुल मिलाकर अग्नि-V ज्यादा सस्ता, तेज़ और पाकिस्तान-चीन जैसे क्षेत्रीय खतरों के लिए बेहतर विकल्प है।
                                                                                         साभार: AI ChatGPT

दुनिया में किन देशों के पास ये ताकत

कई देशों ने बंकर बस्टर हथियार बनाए हैं, लेकिन उनकी ताकत अलग-अलग है-
  • अमेरिका: GBU-57 MOP (60 मीटर पेनेट्रेशन), GBU-28, और BLU-109 बम। इन्हें B-2 या B-52 बॉम्बर ले जाते हैं।
  • चीन: DF-15C बैलिस्टिक मिसाइल, जिसका पेलोड 500-750 किग्रा और पेनेट्रेशन 20-25 मीटर है। ये अग्नि-V से कम ताकतवर है।
  • रूस: KAB और BetAB बम, जो 1.5-5 मीटर तक घुस सकते हैं।
  • दक्षिण कोरिया: Hyunmoo-4 और Hyunmoo-5 मिसाइलें, 600 किमी रेंज और 24 मीटर पेनेट्रेशन।
  • भारत: अग्नि-V अपने भारी पेलोड और गहरी पेनेट्रेशन की वजह से GBU-57 के बाद दूसरा सबसे ताकतवर बंकर बस्टर हो सकता है।
                                                                        साभार: AI ChatGPT
खास बात ये है कि इजरायल के पास इस रेंज की मिसाइल तो है, लेकिन उसके पास ऐसी मार करने वाली क्षमता नहीं है। इजरायल की जेरिको-3 मिसाइल की रेंज 11 हजार किमी के आसपास है, लेकिन वो सिर्फ 800-900 किलोग्राम का ही वॉरहेड ढो सकता है।

पाकिस्तान के कौन से ठिकाने भारत के निशाने पर?

पाकिस्तान ने अपनी सीमाओं पर कई मजबूत भूमिगत सैन्य ठिकाने बनाए हैं, जो भारत के लिए खतरा हैं। अग्नि-V बंकर बस्टर इन ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाई जा रही है। कुछ अहम ठिकानों के बारे में भी जान लीजिए।
कहुटा न्यूक्लियर फैसिलिटी
  • ये पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण परमाणु हथियार अनुसंधान और उत्पादन केंद्र है।
  • इसे पहाड़ों के नीचे बनाया गया है, ताकि हवाई हमलों से बचा जा सके।
  • क्यों निशाना बनाना जरूरी?: अगर युद्ध हुआ, तो ये सुविधा पाकिस्तान के परमाणु हमलों का आधार हो सकती है। इसे नष्ट करना भारत की रक्षा के लिए जरूरी है।
किराना हिल्स
  • ये पाकिस्तान की सीक्रेट न्यूक्लियर वेपन साइट है। यहाँ पाकिस्तान न सिर्फ न्यूक्लियर वेपन्स रखता है, बल्कि टेस्टिंग भी करता है।
  • यहाँ भूमिगत सुरंगें और बंकर हैं, जहाँ हथियार छिपाए जाते हैं।
  • इन हथियारों को नष्ट करके भारत पाकिस्तान की हमलावर क्षमता को कम कर सकता है।
नूर खान एयरबेस
  • इस एयरबेस के नीचे भूमिगत हथियार गोदाम और कमांड सेंटर हैं।
  • ये पाकिस्तान की वायुसेना का अहम ठिकाना है।
  • इसे तबाह करने से पाकिस्तान की हवाई ताकत और कमांड-कंट्रोल सिस्टम कमजोर होगा।
मसरूर एयरबेस
  • कराची के पास ये एयरबेस मिसाइल और परमाणु हथियारों का भंडारण करता है।
  • इसकी तबाही से पाकिस्तान की मिसाइल ताकत को बड़ा झटका लगेगा।
  • पाकिस्तान के पलटवार की संभावनाएँ लगभग नष्ट हो जाएँगी।
पाकिस्तान ने भारत के साथ कई युद्ध लड़े हैं और उसकी परमाणु ताकत भारत के लिए लगातार खतरा है। अगर युद्ध हुआ, तो ये ठिकाने भारत पर हमले का आधार बन सकते हैं। अग्नि-V की गहरी पेनेट्रेशन और हाइपरसोनिक गति इन ठिकानों को तेजी से और पूरी तरह नष्ट कर सकती है, जिससे भारत की सुरक्षा बढ़ेगी।

भारत को इस बंकर बस्टर की जरूरत क्यों?

  • पाकिस्तान और चीन का खतरा: दोनों देशों ने जमीन के नीचे बंकर, मिसाइल साइलो, और कमांड सेंटर बनाए हैं। ये भारत के लिए खतरा हैं। अग्नि-V इन ठिकानों को नष्ट करके भारत को रणनीतिक बढ़त देगी।
  • पहाड़ी युद्ध में फायदा: हिमालय जैसे इलाकों में दुश्मन सुरंगों और बंकरों का इस्तेमाल करता है। अग्नि-V इनका जवाब है।
  • सस्ता और तेज़ विकल्प: अमेरिका की तरह महँगे स्टील्थ बॉम्बर की जरूरत नहीं। मिसाइल सस्ती और तेजी से तैनात हो सकती है।
  • ईरान पर अमेरिकी हमले से मिली प्रेरणा: 22 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान के फोर्डो परमाणु सुविधा पर GBU-57 का इस्तेमाल किया। इससे साबित हुआ कि बंकर बस्टर हथियार कितने जरूरी हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत: ये मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी है, जो भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता दिखाती है।
अग्नि-V बंकर बस्टर मिसाइल भारत की रक्षा में एक गेम-चेंजर है। ये अमेरिका के GBU-57 से ज्यादा ताकतवर, सस्ती और तेज़ है। इसकी हाइपरसोनिक गति और 80-100 मीटर की पेनेट्रेशन क्षमता इसे दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक बनाती है। खास तौर पर पाकिस्तान के कहुटा, किराना हिल्स और नूर खान जैसे ठिकानों को नष्ट करने की इसकी क्षमता भारत को रणनीतिक बढ़त देती है। साथ ही ये मिसाइल भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा ताकत का प्रतीक है।

चीन-पाकिस्तान के बंकर में रखे हथियार भी उड़ाएगा भारत, जमीन के 100 मीटर नीचे भी मार करेगा अग्नि-5 मिसाइल का ‘बंकर बस्टर’ वेरिएंट: DRDO कर रहा डेवलप, 9800 KM/H की रफ़्तार से चलेगी

            DRDO अब अग्नि-5 मिसाइल का नया वैरिएंट बना रहा है (फोटो साभार: X/@Kunal_Biswas707)
Operation Sindoor से भारत ने दुनिया को दिखाने के बाद हर दिन एक से बढ़कर एक नया हथियार बनाने की होड़ में लग अमेरिका जैसे देशों के लिए ही चुनौती नहीं बन रहा है, बल्कि चीन और पाकिस्तान की नींद हराम कर दी। पाकिस्तान तो बौखलाहट में फिर जहर उगल रहा है। जबकि अपने हवाई अड्डे तक ठीक नहीं करवा पाया। अब पाकिस्तान चीन के उकसावे पर जहर उगल रहा है या अमेरिका के कहने पर। लेकिन मौत पाकिस्तान के सिर मंडराने लगी है। दुनिया देख रही है कि अब भारत 2014 से पहले वाला भारत नहीं रहा।  
ईरान और इजरायल के युद्ध में बड़े-बड़े हथियार, बम और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। युद्ध के बीच जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु हथियार फोर्डो पर हमला किया, तो उस वक्त बंकर बस्टर GBU-57/A को तैनात किया गया था। इसने ईरान के परमाणु हथियार बनाने के अड्डे को सतह तक तबाह कर दिया था।

ऐसे में अब भारत भी अपने मिसाइल सिस्टम को मजबूत करने में लगा है। इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अब एग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल को अब नए रूप में विकसित करने जा रहा है। फिलहाल इस अग्नि-5 मिसाइल को 5000 किलोमीटर की रेंज तक फेंका जा सकता है। अब नए वैरिएंट में 7500 किलोग्राम बंकर बस्टर की क्षमता होगी।

इससे भारत अपने दुश्मन चीन और पाकिस्तान के ठिकानों को आसानी से निशाना बना लेगा। जमीन की कितने भी भीतर दुश्मन घुसा हो, यह मिसाइल तबाह करने में सफल होगी।

जमीन के 100 मीटर अंदर घुसकर मचाएगा तबाही

डीआरडीओ अब अग्नि-5 के नए वैरिएंट में बढ़ी क्षमता को विकसित कर रहा है। यह जमीन के 80 से 100 मीटर भीतर घुसकर तबाही मचाएगा। इस मिसाइल को विकसित करने से भारत अमेरिका की उपलब्धियों से भी आगे बढ़ जाएगा। अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए बंकर बस्टर बम GBU-57/A का इस्तेमाल किया था। यह बम की विश्व में सबसे बड़ा बंकर बस्टर बम कहलाता है।

भारत भी अब स्वदेशी की राह पर चल रहा है। जहाँ अमेरिका की तरह डिलीवरी के लिए बड़े और महंगे एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहने के बजाय भारत अपने बंकर बस्टर को मिसाइल डिलीवरी के लिए डिजाइन कर रहा है।

मैक 8 से मैक 20 की स्पीड में बनाई जा रही मिसाइल

फिलहाल अग्नि-5 के दो वैरिएंट बनाए जा रहे हैं। एक में जमीन के ऊपर के ठिकानों को तबाह करने की क्षमता होगी। वहीं, दूसरी एक गहरी पैठ वाली मिसाइल होगी, जो जमीन की गहराई में बने ठिकानों में घुस सकेगा। इसका डिजाइन GBU-57 की तरह बनाया गया है, लेकिन इसकी कीमत कम होगी।

हर मिसाइल का वजन आठ टन तक हो सकता है। यह अब तक विश्व में सबसे अधिक वजन वाली मिसाइल मानी जाएगी। हालाँकि, अग्नि-5 के नए वैरिएंट में 2500 किलोमीटर की कम रेंज होगी, बावजूद इसके उसका सटीक निशाना पुराने वाले से ज्यादा विनाशकारी होगा।

इन मिसाइल की गति मैक 8 से मैक 20 के बीच होगी, जो इन्हें हाइपरसोनिक हथियारों की श्रेणी में रखता है। ये अमेरिकी बंकर-बस्टर वेपन की स्पीड के बराबर ही होंगे, लेकिन इनकी पेलोड कैरी करने की क्षमता काफी अधिक होगी।

क्या किराना हिल्स के आसपास के गाँव खाली कराए गए? न्यूक्लियर रेडिएशन लीक के सवाल का अमेरिका ने क्यों नहीं दिया जवाब? पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर स्ट्राइक के चर्चे

    किराना हिल्स मामले पर अमेरिका ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है (फोटो साभार: Mint & @ImtiazMadmood/X)
भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की कोशिश की। भारत ने इसका तगड़ा जवाब दिया और उसके 11 एयरबेस तबाह कर दिए। इसी के साथ यह भी रिपोर्ट्स सामने आईं कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु हथियार स्टोरेज फैसिलिटी पर हमला किया है। यह फैसिलिटी सरगोधा एयरबेस के साथ बनी किराना हिल्स बताई गई। हालाँकि, भारतीय वायुसेना ने इस हमले से इनकार किया, लेकिन लगातार आ रही सूचनाओं से किराना हिल्स को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। किराना हिल्स के आसपास के गांव खाली करवाने पर पूरी दुनिया अचंभित है। 

इससे पहले सोशल मीडिया में लगातार एक विमान को किराना हिल्स पर हमले से जोड़ कर देखा गया था। यह विमान अमेरिकी एनर्जी विभाग का बीचक्राफ्ट B350 था। इसको लेकर कहा गया था कि यह पाकिस्तान के भीतर परमाणु हथियार फटने के चलते हुए रेडियो विकिरण की जाँच करने आया है। यह भी दावे किए गए थे कि एक अमेरिकी टीम भी यहाँ जाँच करने आई है। इसको लेकर अब अमेरिका ने कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय से 13 मई, 2025 को इस संबंध में प्रश्न किया गया था। इस प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगट से एक पत्रकार ने पूछा, “क्या अमेरिका ने पाकिस्तान में कुछ जगह परमाणु विकिरण के रिसाव की रिपोर्ट के बाद इस्लामाबाद या पाकिस्तान में कोई टीम भेजी है?”

इस पर टॉमी पिगट ने कहा, “मेरे पास इस पर कहने के लिए अभी कुछ नहीं है।” इसी पर पत्रकार ने आगे और भी सवाल जब पत्रकार ने करना चाहा तो प्रवक्ता पिगट ने इस सवाल को टाल दिया। उन्होंने आगे दोनों देशों के बीच सीजफायर पर बात चालू कर दी।

अमेरिका का इस सवाल को टालना इस पूरे मामले को और खिचड़ी बना गया। यदि अमेरिका ने ऐसी कोई टीम पाकिस्तान नहीं भेजी थी तो स्पष्ट रूप से इनकार कर सकता था। हालाँकि, उसने ना स्पष्ट रूप से इस पर इनकार किया और ना ही यह स्वीकार किया कि उसने कोई ऐसी टीम भेजी है।

इस बीच किराना हिल्स को लेकर और भी दावे सामने आ गए हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने बताया है कि पाकिस्तानी फौज किराना हिल्स के आसपास के गाँव खाली करवा रही है। इस संबंध में पाकिस्तान का एक वीडियो का हवाल दिया जा रहा है।

इस वीडियो को बना रहा शख्स एक गाँव दिखाता है जो खाली हो चुका है। इसमें यह व्यक्ति दावा करता है कि वह जिस गाँव में खड़ा है वह पूरी तरह से खाली हो चुका है और यहाँ कोई भी मर्द-औरत नहीं बचे हैं। वह बताता है कि इस गाँव को फ़ौज ने सख्ती से खाली करवा लिया है।

इस वीडियो में बोलने वाला शख्स परमाणु हथियार पर हमले और किराना हिल्स का नाम नहीं लेता। सोशल मीडिया पर दावा है कि यह वीडियो किराना हिल्स के पास गाँव का है। इसको लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन लगातार किराना हिल्स को लेकर आशंकाएँ जताई जा रही हैं।

किराना हिल्स पहाड़ का नाम है। यह इलाका पूरी तरह से पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अपने कब्जे में ले रखा है। यहाँ पाकिस्तान ने पहाड़ के नीचे अपनी स्टोरेज फैसिलिटी बनाई हुई है, इसमें हथियार रखे जाते हैं। यह भी सामने आया है कि यहाँ पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार छुपाए हुए हैं। 

सबसे पहले यहाँ के एक धमाके की वीडियो, उसके बाद पाकिस्तान के भीतर अमेरिकी विमान की आमद और फिर ईजिप्ट से कथित तौर पर बोरान लेकर आने वाले विमानों ने परमाणु हथियारों पर हमले की थ्योरी को बल दिया है। हालाँकि, इसको लेकर वायुसेना ने पूरी तरह से इनकार कर दिया था।

तालिबानियों ने परमाणु बम-एनर्जी बनाने वाले 17 पाकिस्तानियों को बंदूक से डरा कर किया अपहरण: खदान से यूरेनियम भी लूटा; शंका की जा रही है कि इनका अपहरण हुआ है या अपहरण का ड्रामा?

टीटीपी ने जारी की अपहृत लोगों की पहचान (फोटो साभार: X_JawadYousufxai)
आतंकवाद को पालने पोसने वाला पाकिस्तान आज खुद उसी आग में जलना शुरू हो गया है। जिस तरह तालिबानियों ने परमाणु बम-एनर्जी बनाने वाले 17 पाकिस्तानियों का अपहरण किया है। गौरतलब करने की बात है कि पाकिस्तान के नुक्लेयर वैज्ञानिक द्वारा ईरान को परमाणु बनाने की विधि को बेच दिया गया था। इस प्रकरण के याद आने पर शंका की जा रही है कि तालिबान ने परमाणु बनाने वालो का अपहरण किया है या मोटा धन मिलने के लालच में खुद ही चले गए हैं? 

पाकिस्तान अपने ही न्यूक्लियर साइंटिस्ट, इंजीनियरों को नहीं बचा पा रहा है। पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान (TTP) ने उसके 17 साइंटिस्टों-इंजीनियरों-कामगारों को अगवा कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमिशन के 17 कर्मचारियों को अगवा कर लिया। इन कर्मचारियों को कबूल खैल एटॉमिक एनर्जी माइनिंग प्रोजेक्ट में काम के दौरान किडनैप किया गया। इस दौरान टीटीपी के आतंकियों ने कर्मचारियों की गाड़ियाँ भी जला दीं। टीटीपी ने एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि इन कर्मचारियों को तब तक रिहा नहीं किया जाएगा, जब तक पाकिस्तान की जेलों में बंद उनके कैदियों को छोड़ा नहीं जाता। वीडियो में अगवा कर्मचारी पाकिस्तान सरकार से अपनी रिहाई के लिए बातचीत करने की अपील करते नजर आए।

खास बात ये है कि पाकिस्तान सरकार ने पहले तो नकार दिया कि ऐसी कोई घटना भी हुई है, फिर कहा कि वो उसके आदमी ही नहीं थे… लेकिन तालिबान ने पाकिस्तानी सरकार को पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा करते हुए अगवा किए कर्मचारियों के आईडी कार्ड तक जारी कर दिए, तब जाकर पाकिस्तान ने माना कि उसे तालिबान ने बड़ी चोट दी है। इसके बाद तालिबान ने 8 अगवा लोगों को रिहा कर दिया, तो पाकिस्तान ये दावा करते हुए खुद की पीठ थपथपाने लगा कि उसने 8 बंधकों को छुड़ा लिया है, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान को फिर से आईना दिखाते हुए कहा कि उसने खुद ही अगवा किए लोगों को छोड़ा है और महत्वपूर्ण लोगों को अपने पास रखा है, ताकि वो अपने लड़ाकों को पाकिस्तान की कैद से आजाद करा सके।

कुछ समय बाद पाकिस्तान सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 17 में से 8 अगवा कर्मचारियों को बचा लिया है। इसमें कुछ घायल भी हैं। हालाँकि, टीटीपी ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि उसने खुद ही इन बंधकों को छोड़ा है। तालिबान ने सभी बंधकों की आईडी भी जारी की है। TTP ने ये भी है कि उसने इन लोगों को सिर्फ सौदेबाजी के लिए अपने पास रखा है, वो इन्हें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

अगवा लोगों में मजदूर और एटॉमिक एनर्जी कमिशन के अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि टीटीपी ने खदान से यूरेनियम भी लूटा है, तो परमाणु उर्जा-बम बनाने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण खनिज है। लक्की मरवत इलाका अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और टीटीपी की गतिविधियों का गढ़ माना जाता है।