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ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग का काला सच : गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या, इनका कैसे भी यूज करो…, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: एलन मस्क ने कहा- सरकार के लोगों को भी जेल में डालो

फिर से चर्चा में आया ग्रूमिंग गैंग
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

मानवाधिकार से लेकर यूएनओ तक सब खामोश क्यों? क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं का इसी तरह शोषण होता रहेगा? क्या महिलाओं का कोई आत्म-सम्मान नहीं? आखिर कब तक महिलाएं इन जेहादियों का शिकार होती रहेंगी? इस गंभीर समस्या पर विश्व को एकजुट होकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।     

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।

पीड़ितों की आपबीती

आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।
रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।
इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।
अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।
एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ग्रूमिंग गैंग पर बोले एलन मस्क और जेके रॉलिंग

इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है। 

‘डायरेक्टर के साथ रहना होगा वरना…’ : कास्टिंग काउच पर दिव्यांका त्रिपाठी ने तोड़ी चुप्पी

टेलीविजन दुनिया की मशहूर एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी ने कास्टिंग काउच पर खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब वो इंडस्ट्री में नई थीं तब वो एक ब्रेक की तलाश में थीं। इसी दौरान उन्हें एक डायरेक्टर के साथ समय बिताने का ऑफर आया था। दिव्यांका ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनसे कहा गया था कि या तो वो डायरेक्टर के साथ समय बिताएँ वरना उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा।

दिव्यांका ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि ऐसे लोग इस तरह के प्रस्ताव देते हैं और आपको यकीन दिलाते हैं कि इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच सामान्य चीज है। हर कोई इसे कर रहा है। बॉलीवुड बबल से बातचीत में वह बताती हैं, “एक शो खत्म करने के बाद दोबारा से संघर्ष शुरू हो जाता है। एक समय था जब मुझपर पैसे नहीं थे। मुझे अपने बिल देने होते थे। ईएमआई भरनी होती थी। बहुत प्रेशर होता था और उस समय आपको ऑफर आए कि आपको इस डायरेक्टर के साथ रहना होगा तो आपको ब्रेक मिल जाएगा। वो जिस तरह इस चीज को बेचते थे। ऐसा लगे कि यही रास्ता है अपनी जिंदगी बनाने का।”

भावी एक्टर्स को सलाह देते हुए दिव्यांका ने कहा, “जो लोग इस तरह के ऑफर देते हैं। वो लालच देते हैं कि ये काम तो सभी कर रहे हैं। ये सब मी टू मूवमेंट से पहले का है। कई बार ये लोग आपको करियर को खत्म करने की भी धमकी देते।” दिव्यांका बातचीत में बताती हैं कि उनके पास भले ही ऐसे ऑफर आए लेकिन उन्होंने जीवन में जो हासिल किया वो अकेले दम पर किया।

दिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बहुत जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘बनूँ मैं तेरी दुल्हन से’ की थी और इसके बाद वो स्टार प्लस के फेमस शो ये हैं मोहब्बतें की भी लीड एक्ट्रेस थीं। उन्हें हास में खतरों के ख़िलाड़ी शो में देखा गया था। मालूम हो कि दिव्यांका के अलावा कई एक्ट्रेस पिछले दिनों मनोरंजन की दुनिया में चल रहे कास्टिंग काउच के घिनौने खेल को उजागर कर चुकी हैं।

राजस्थान के मंत्री के साथ मॉडल पर सोने का था दबाव, नहाते हुए बना लिया था वीडियो

                                            फोटो साभार: जी न्यूज/ ट्विटर
पिछले दिनों राजस्थान के जोधपुर में मॉडल गुनगुन उपाध्याय होटल की सातवीं मंजिल से कूद गई थी। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार मॉडल पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मंत्री रामलाल जाट के साथ सोने का दबाव था। आरोपितों ने मॉडल का नहाते हुए वीडियो बना लिया था। इसके जरिए वे उस पर दबाव बना रहे थे और हनी ट्रैप के जाल में मंत्री को फँसाने की साजिश रची थी।

पुलिस ने साजिश रचने वाले युवक-युवती को 1 फरवरी 2022 को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान अक्षत (32) और दीपाली (30) के तौर पर हुई है। अक्षत शर्मा उर्फ नितिन उर्फ चिनू भीलवाड़ा के सुभाषनगर का रहने वाला है। दीपाली झुंझुनू की रहने वाली है और एक मॉडल है। अक्षत गिरोह का मास्टरमाइंड है। व्यापारियों और प्रभावशाली लोगों को फँसाकर ब्लैकमेल करने का इनका इतिहास रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों ने गुनगुन को फोटोशूट के लिए उदयपुर बुलाया था। यहाँ से उसे भीलवाड़ा ले गए। सर्किट हाउस के पास बने होटल में ठहरे। मॉडल जब बाथरूम में नहा रही थी तो आरोपितों ने उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया। इसके बाद उसे वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगे। लेकिन मॉडल भीलवाड़ा से निकल गई, जिससे आरोपितों की साजिश कामयाब नहीं हुई।

जोधपुर डीसीपी भुवन भूषण के अनुसार दो अन्य लड़कियों के साथ दीपिका और अक्षत ने भीलवाड़ा के सर्किट हाउस में रामलाल जाट से मुलाकात भी की थी। उन्हें कुछ दस्तावेज दिखाए थे। लेकिन जाट ने बताया कि यह मामला उनसे जुड़ा नहीं है और बात आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद मंत्री के संपर्क में आने के लिए वे मॉडल को चारा बनाकर उन्हें फँसाने की कोशिश में लगे थे।

गुनगुन ने 30 जनवरी 2022 को होटल 7 लॉर्ड्स की सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी। वह एक कार के ऊपर गिरी, जिससे उसकी जान बच गई। उसे घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया। 19 साल की गुनगुन शनिवार को जोधपुर आई और रातानाडा के होटल में रुकी। सुसाइड की कोशिश से पहले उसने अपने पिता को फोन किया था। उनसे कहा था, “पापा मैं सुसाइड करने जा रही हूँ, बस मेरा चेहरा देख लेना।’ उनके पिता गणेश उपाध्याय ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस जब तक लोकेशन ट्रैस कर गुनगुन तक पहुँचती वह छलांग लगा चुकी थी।

‘सेक्स करने को कहते हैं पादरी, करते हैं ब्लैकमेल’: ईसाई महिलाओं की याचिका सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

                                                                                       प्रतीकात्मक 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (जनवरी 8, 2021) को केरल की ईसाई महिलाओं की एक रिट याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया, जिसमें मालंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च में अनिवार्य कन्फेशन की परम्परा को चुनौती दी गई है। याचिका में इसे धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध करार दिया गया है। मुख्य याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन कर और नए फैक्ट्स आलोक में लाने की अनुमति भी दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस रमासुब्रमण्यन की पीठ इस मामले को सुनेगी। हालाँकि, इस दौरान पाँचों ईसाई महिलाओं के वकील मुकुल रोहतगी से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि वो इस मामले में केरल हाईकोर्ट क्यों नहीं जा रहे हैं। इसके जवाब में रोहतगी ने कहा कि सबरीमाला जजमेंट में ऐसे सवाल उठ चुके हैं, जिस पर 9 सदस्यीय पीठ सुनवाई कर रही है, इसलिए हाईकोर्ट ऐसे विचाराधीन मामलों में फैसला नहीं सुना सकती। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कन्फेशन के एवज में पादरी यौन फेवर माँगते हैं, सेक्स करने को कहते हैं।

इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें अपने चुने हुए पादरी के समक्ष भी कन्फेशन करने दिया जाए। साथ ही ये भी कहा गया कि ईसाई महिलाओं के लिए कन्फेशन अनिवार्य करना असंवैधानिक है, क्योंकि पादरियों द्वारा इसे लेकर ब्लैकमेल करने की घटनाएँ सामने आई हैं। केरल और केंद्र की सरकारों को भी इस मामले में पक्ष बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत के अटॉर्नी जनरल केसी वेणुगोपाल से भी प्रतिक्रिया माँगी है। AG ने बताया कि ये मामला मालंकारा चर्च में जैकोबाइट-ऑर्थोडॉक्स गुटों के संघर्ष से उपज कर आया है।

ये संघर्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था, लेकिन तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला दे दिया था। मुकुल रोहतगी ने ध्यान दिलाया कि ऐसे मामले संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ ये भी देखना होगा कि क्या कन्फेशन एक अनिवार्य धार्मिक प्रक्रिया हुआ करती थी। किसी बिलिवर की ‘राइट टू प्राइवेसी’ का धार्मिक प्राधिकरण के आधार पर पादरी द्वारा उल्लंघन किया जा सकता है या नहीं, उन्होंने इस पर भी विचार करने की सलाह दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पादरी महिलाओं द्वारा किए गए कन्फेशन का गलत इस्तेमाल करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, जिस पर रोहतगी ने कहा कि वो याचिका में संशोधन कर ऐसी घटनाओं को जोड़ेंगे। कन्फेशन को लेकर इससे पहले भी याचिकाएँ आ चुकी हैं। कन्फेशन के अंतर्गत लोग पादरी की उपस्थिति में अपने ‘पापों’ को लेकर प्रायश्चित करते हैं।

2018 में केरल हाईकोर्ट ने कन्फेशन को हटाने की याचिका को रद्द करते हुए कहा था कि जब कोई किसी खास धर्म को मानता है तो इसका अर्थ है कि वो इसके अंतर्गत आने वाले नियम-कानूनों को भी स्वीकार करता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि ये प्रक्रिया ईसाई महजब का एक अंग रहा है और याचिककाकर्ता किसी धर्म की परम्पराओं से नाराज हैं तो वो उसे छोड़ सकते हैं। NCW भी यौन शोषण के आरोपों के कारण इस प्रक्रिया को बंद करने की सलाह दे चुका है।

केरल के एक नन ने अपनी आत्मकथा में आरोप लगाया था कि एक पादरी अपने कक्ष में ननों को बुला कर ‘सुरक्षित सेक्स’ का प्रैक्टिकल क्लास लगाता था। इस दौरान वह ननों के साथ यौन सम्बन्ध बनाता था। उसके ख़िलाफ़ लाख शिकायतें करने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ा। उसके हाथों ननों पर अत्याचार का सिलसिला तभी थमा, जब वह रिटायर हुआ। सिस्टर लूसी ने लिखा था कि उनके कई साथी ननों ने अपने साथ हुई अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया और वो सभी भयावह हैं।