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टेक्सास में बैन हुआ राहुल गाँधी के ह्यूस्टन प्रोग्राम से जुड़ा आतंकी संगठन CAIR, हमास-अलकायदा से कनेक्शन: हिंदू और भारत विरोधी कामों से जुड़ाव

   टेक्सास के गवर्नर एबॉट ने राज्य कानून के तहत CAIR को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया (फोटो साभार -     टेक्सास के गवर्नर एबॉट ने राज्य कानून के तहत सीएआईआर को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया/                  सीएआईआर))
टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) को राज्य कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन घोषित कर दिया। इस घोषणा में CAIR को मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ सूचीबद्ध किया गया है, जिसे एबॉट ने इसका उत्तराधिकारी संगठन बताया।

इस फैसले के बाद दोनों संगठनों पर टेक्सास में जमीन खरीदने-बेचने पर रोक लग गई है। इसके अलावा इन संगठनों की किसी भी तरह से मदद करने वालों के लिए कड़ी नागरिक और आपराधिक सजाओं का रास्ता भी खुल गया है।

                                                                                                                                    स्रोत: एक्स

घोषणा में क्या कहा गया है?

गवर्नर एबॉट के आदेश में सबसे पहले मुस्लिम ब्रदरहुड के इतिहास और विचारधारा का उल्लेख किया गया। इसमें इसे एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिस्ट आंदोलन बताया गया, जिसकी नींव हथियारबंद जिहाद और शरिया कानून लागू करने वाले वैश्विक खिलाफत के लक्ष्य पर रखी गई थी।

एबॉट ने इसके संस्थापक हसन अल-बन्ना और बाद में इसके सुप्रीम गाइड मोहम्मद बदी के बयानों का हवाला देकर कहा कि संगठन के उद्देश्यों में लगातार यही सोच बनी रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम ब्रदरहुड का नेटवर्क दुनिया भर में फैला है, जिसमें हमास भी शामिल है, जो इसका फ़िलिस्तीनी शाखा के रूप में शुरू हुआ था।

इसके बाद आदेश में CAIR का जिक्र किया गया और इसे अमेरिका में मौजूद मुस्लिम ब्रदरहुड के नेटवर्क का हिस्सा बताया गया। एबॉट ने इसके लिए फेडरल जाँचों, होली लैंड फ़ाउंडेशन टेरर फाइनेंसिंग केस के कानूनी निष्कर्षों और कई शैक्षणिक अध्ययनों का हवाला दिया, जिनमें CAIR के हमास और उससे जुड़े ढाँचे के साथ संबंध बताए गए थे।

आदेश में यह भी कहा गया कि 2008 में FBI ने CAIR के साथ अपने आधिकारिक संबंध खत्म कर दिए थे, और 2023 में बाइडेन प्रशासन ने भी कुछ संघीय दस्तावेजों से CAIR से जुड़े उल्लेख हटा दिए थे।

घोषणा का सबसे बड़ा हिस्सा उन CAIR से जुड़े व्यक्तियों पर केंद्रित था, जिन्हें बाद में आतंकवाद से जुड़े अपराधों में पकड़ा गया या उजागर किया गया। एबॉट ने इन मामलों को उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया ताकि यह दिखाया जा सके कि CAIR सिर्फ विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका ढाँचा चरमपंथी नेटवर्कों से परिचालन स्तर पर भी जुड़ा हुआ है।

घोषणा में CAIR से जुड़े व्यक्तियों का उल्लेख

घोषणा में कई ऐसे लोगों के नाम दर्ज किए गए जो कभी CAIR के नेतृत्व, स्टाफ या फंडरेज़िंग नेटवर्क का हिस्सा रहे थे और बाद में आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए या आरोपित हुए। एबॉट ने कहा कि यह एक लंबे समय से चल रहा पैटर्न है कि CAIR ऐसे लोगों को अपने संगठन में महत्वपूर्ण जगह देता रहा है जिनके आतंकवादी संगठनों से सक्रिय संबंध रहे हैं।
सबसे प्रमुख नाम घसान इलाशी का था, CAIR टेक्सास के संस्थापक बोर्ड सदस्य और होली लैंड फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष। उन्हें 2009 में आतंक वित्तपोषण के लिए दोषी ठहराया गया था और 65 साल की सजा मिली थी।
दूसरा नाम अब्दुरहमान आलामूदी का था, जिसने CAIR द्वारा आयोजित एक रैली में भाषण दिया था और खुद को हमास और हिज्बुल्लाह का समर्थक बताया था। बाद में वह अल-कायदा को फंडिंग करने का दोषी पाया गया।
तीसरा नाम रैंडल टॉड रोयर का था, जो CAIR में कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट और सिविल-राइट्स कोऑर्डिनेटर था। उसे 2004 में अल-कायदा और तालिबान की मदद की साजिश के लिए 20 साल की जेल हुई।
इसके बाद नाम आया बासेम खाफागी का, जो CAIR में कम्युनिटी रिलेशंस डायरेक्टर था। उसने 2003 में बैंक और वीजा फ्रॉड की बात कबूल की थी और उस पर पैसा कट्टरपंथी संगठनों को भेजने और अमेरिका पर आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रकाशित करने के आरोप थे।
घोषणा में रबीह हद्दाद का नाम भी था, जो CAIR के लिए फंड जुटाता था। उसे ग्लोबल रिलीफ फ़ाउंडेशन के मामले में गिरफ्तार किया गया और बाद में देश से निकाला गया। यह संगठन 2002 में अल-कायदा को फंडिंग के चलते बंद किया गया था।
सूची में मुथन्ना अल-हनूटी का नाम भी शामिल था, मिशिगन का CAIR डायरेक्टर, जिसे 2011 में इराक के दो लाख बैरल तेल लेने और सद्दाम हुसैन की मदद के लिए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में दोषी ठहराया गया।
एक और बड़ा नाम सामी अल-अरियान का था, पीआईजे (पैलेस्टीनियन इस्लामिक जिहाद) का फाइनेंसर और दोषी आतंकवादी। CAIR ने उसे 2014 में ‘Promoting Justice Award’ दिया था और 2020 के एक कार्यक्रम में भी उसे मंच दिया, जहाँ उसने CAIR का समर्थन बढ़ाने की अपील की।
घोषणा में निहाद अवाद का जिक्र था, CAIR के लंबे समय से कार्यकारी निदेशक। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले पर खुशी जताई थी। इन गंभीर आरोपों और नामों के जवाब में CAIR ने ग्रेग एबॉट को कोर्ट में घसीटने की धमकी दी और उन्हें इजराइल फर्स्ट राजनेता कहा, साथ ही आरोप लगाया कि वह अमेरिकी मुसलमानों को बदनाम करने के लिए महीनों से एंटी-मुस्लिम माहौल बना रहे हैं।
                                                                                                                                  स्रोत: एक्स

CAIR और उसका भारत विरोधी प्रचार

CAIR एक इस्लामिस्ट संगठन है, जिसने कई बार भारत और हिंदुओं के खिलाफ बयान दिए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि CAIR के रिश्ते आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। यह संगठन लगातार हिंदू-विरोधी हिंदूफोबिक अभियान और प्रोपेगैंडा फैलाता रहा है। पहले भी CAIR ने अत्यंत हिंदूफोबिक ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ़्रेंस का खुलकर समर्थन किया था।
CAIR ने जनवरी 2022 में राणा अय्यूब की रिपोर्ट के आधार पर हिंदू-विरोधी प्रोपेगैंडा चलाया। उन्होंने प्रेस रिलीज जारी कर हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशी’ को थिएटरों में रिलीज न करने की माँग की और फिल्म को घृणित और खतरनाक हिंदुत्व प्रेरित एंटी-मुस्लिम प्रोपेगैंडा तक बता दिया।
CAIR ने पाकिस्तानी आतंकी आफिया सिद्दीकी को भी रिहा करने की माँग की है, जो अमेरिकी सेना और FBI पर हमले के लिए 86 साल की सजा काट रही है।
उसी साल CAIR ने Still Suspect: The Impact of Structural Islamophobia नाम से रिपोर्ट जारी की और दावा किया कि अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, CAIR को एक साल में 6,720 शिकायतें मिलीं, जिनमें इमिग्रेशन, यात्रा संबंधी भेदभाव, कानून प्रवर्तन, सरकारी दखल, स्कूल घटनाएँ और फ्री स्पीच जैसे मुद्दे शामिल थे।
CAIR का दावा है कि अमेरिकी सरकार का भेदभाव मुसलमानों को अधिक प्रभावित करता है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जो CAIR अमेरिका में इस्लामोफोबिया की शिकायत करता है, वही भारत में हिंदू-विरोधी नैरेटिव को लगातार बढ़ावा देता है।
दिसंबर 2022 में भी CAIR ने न्यू जर्सी में एक मोबाइल ट्रक पर दिखाए गए 26/11 हमले के वीडियो और लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों के नामों पर आपत्ति जताई और इसे नफरत फैलाने वाला कहा, जबकि वीडियो में सिर्फ सच दिखाया गया था।
CAIR कई बार आफिया सिद्दीकी जैसे आतंकवादियों के समर्थन में भी खड़ा रहा है। जून 2023 में, जब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अमेरिका गए, तो वह सुनीता विश्वनाथ के साथ एक चर्चा में बैठे दिखाई दिए। वह HfHR नामक कट्टर हिंदू-विरोधी संगठन की सह-संस्थापक है और CAIR तथा ICNA जैसे संगठनों के लिए कार्यक्रम आयोजित करती रही है।
इसके अलावा राहुल गाँधी ने 2024 में कट्टर इस्लामिस्ट और भारत-विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर से भी मुलाकात की। ओमर इस्लामिस्ट एजेंडे को बढ़ावा देती हैं, मुस्लिम अपराधियों पर हुई कार्रवाई को इस्लामोफोबिया बताती हैं और आतंकवाद पर सवाल उठाने से बचती हैं।
वह 9/11 हमले को भी हल्के में लेते हुए CAIR के एक कार्यक्रम में बोली थीं कि यह कुछ लोगों ने कुछ कर दिया और इसके कारण मुसलमान अमेरिका में अपने अधिकार खो रहे हैं। इन सभी घटनाओं से CAIR के विचार, नेटवर्क और उसके भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी रुख स्पष्ट रूप से सामने आते हैं।

इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास के साथ संबंध

ध्यान देने वाली बात यह है कि CAIR के रिश्ते फ़िलिस्तीनी इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकी संगठन हमास से जुड़े रहे हैं। हमास का मानवाधिकार उल्लंघन का लंबा इतिहास है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा, इजरायल, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कई देशों ने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है।

क्यों अमेरिका ने पाकिस्तान की ‘आतंकी बेटी’ ‘लेडी अलकायदा’ आफिया सिद्दीकी को 86 साल के लिए जेल में किया है बंद?


अमेरिका की जेल में बंद ‘लेडी अलकायदा’ आफिया सिद्दीकी की रिहाई की माँग नए सिरे से की जा रही है। वह एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट हैं, जिस पर अमेरिकी सैनिकों पर गोलीबारी करने, अमेरिकी सैनिकों को मारने की कोशिश करने और एक हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। उसे 86 साल जेल की सजा मिली थी। वह फिलहाल टेक्सास के फोर्ट वर्थ के जेल में बंद है।

‘लेडी अल-क़ायदा’ आफिया सिद्दीकी कौन है?

 कभी एमआईटी से प्रशिक्षित एक प्रतिभाशाली न्यूरोसाइंटिस्ट आफ़िया सिद्दीकी की कहानी जिहाद, आतंकी साजिशों और 86 साल की अमेरिकी जेल की सजा तक पहुँच चुकी है। हालाँकि पाकिस्तान उसे अपने ‘मुल्क की बेटी’ कहता है। उसकी रिहाई को लेकर चल रहे इस्लामी दुष्प्रचार और वैश्विक अभियानों को भी उसने शह दी है।

एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट से लेकर कुख्यात ‘लेडी अलकायदा’ बनने के बावजूद वह पाकिस्तानी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों का समर्थन हासिल करती रही हैं। सिद्दीकी को 2010 में न्यूयॉर्क कोर्ट ने अफगानिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों की हत्या के प्रयास का दोषी पाया था।

ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार के बाद जब अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका गए, तो पाकिस्तान के आफिया समर्थकों को उम्मीद थी कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने उसकी रिहाई की बात करेंगे। लेकिन मुनीर ने इस मुद्दे को नहीं उठाया।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इससे पहले आफ़िया सिद्दीकी को माफी देने से इनकार कर दिया था। अमेरिकी सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सिद्दीकी की क्षमा याचिका को खारिज कर दी गई है।

पाकिस्तान में आफिया सिद्दीकी के मामले की सुनवाई के लिए गठित इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की बेंच को भंग कर दिया गया , क्योंकि न्यायमूर्ति इनाम अमीन मिन्हास ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और एक बड़ी पीठ के गठन करने का अनुरोध किया। यह याचिका आफिया सिद्दीकी की बहन फौजिया सिद्दीकी ने दायर की थी। इससे पहले, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल को पिछली अदालती आदेशों का पालन करने और मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं करने पर अवमानना ​​नोटिस जारी किया गया था।

मानवाधिकार उल्लंघन की शिकार या इस्लामी आतंकवादी?

आफिया सिद्दीकी पाकिस्तानी मूल की 52 वर्षीय आतंकवादी हैं। कराची में जन्मी सिद्दीकी 1990 में छात्र वीजा पर अमेरिका आई थीं। उसने एमआईटी से जीव विज्ञान में स्नातक और 2001 में ब्रांडीज विश्वविद्यालय से तंत्रिका विज्ञान में पीएचडी की। आफिया की माँ एक इस्लामी शिक्षिका और राजनीतिज्ञ थी और उनके पिता एक न्यूरोसर्जन थे। बोस्टन में आफ़िया सिद्दीकी अल-किफा केंद्र सहित इस्लामी ‘धर्मार्थ संस्थाओं’ के साथ जुड़ गई, जिसका संबंध अलकायदा से पाया गया था। सिद्दीकी ने 9/11 के इस्लामी आतंकवादी हमले के बाद भी अमेरिका विरोधी बयान दिया था। उसने जिहाद के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया था।

एफबीआई ने सिद्दीकी और उनके तत्कालीन पति अमजद खान से कुछ किताबों की खरीदारी को लेकर पूछताछ की थी। दोनों ने नाइट विज़न गॉगल्स, विस्फोटकों से संबंधित मैनुअल, बॉडी आर्मर और ‘द एनार्किस्ट्स आर्सेनल’ सहित 45 किताबें खरीदी थी। एफबीआई को दिए इंटरव्यू में अमजद खान ने दावा किया कि उन्होंने ये किताबें शिकार के लिए लाया था। एफबीआई जाँच के दौरान, आफिया और उसके पति का तलाक हो गया और वह अपने तीन बच्चों के साथ पाकिस्तान लौट आई।

सिद्दीकी और उसके बच्चे मार्च 2023 में पाकिस्तान के कराची में गायब हो गए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसके कथित अल-कायदा संबंधों पर पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने की बात मानी थी। लेकिन बाद में उसकी अलकायदा से जुड़े होने की बात से इनकार कर दिया। मई 2004 में, अमेरिकी एफबीआई ने आफिया सिद्दीकी को पहली महिला ‘मोस्ट-वांटेड’ आतंकवादी बताते हुए अलर्ट जारी किया। एफबीआई के मुताबिक वह एक अलकायदा आतंकवादी और कूरियर थी।

2003 और 2008 के बीच उसका ठिकाना बदलता रहा। सिद्दीकी का समर्थन करने वाली एक पत्रकार, यवोन रिडले ने दावा किया कि आफिया का अपहरण किया गया और बगराम एयर बेस पर गुप्त तरह से रखकर प्रताड़ित किया गया। हालाँकि अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह अल-कायदा जिहादी आतंकवादी और 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद के परिवार के साथ अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में छिपी थी।

सिद्दीकी ने बाद में खालिद शेख के भतीजे से निकाह कर ली। उसका नाम अम्मार अल-बलूची है। आफिया की बहन फौजिया सिद्दीकी ने निकाह से इनकार किया, लेकिन पाकिस्तानी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, अल-बलूची के परिवार और खुद आफिया ने निकाह की पुष्टि की।

2008 में अफगान अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। न्याय विभाग के अनुसार, उसके पास से कई चीजें मिलीं। इनमें हमले का जिक्र करते हुए हाथ से लिखा हुआ एक नोट भी शामिल था। उसके पास से अमेरिका के प्लम आइलैंड, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, वॉल स्ट्रीट और ब्रुकलिन ब्रिज जैसे कई अहम इमारतों की लिस्ट भी थी।

2008 में एफबीआई के विशेष एजेंट मेहताब सैयद के अनुसार, अफगानिस्तान राष्ट्रीय पुलिस के अधिकारियों ने सिद्दीकी को एक लड़के के साथ गजनी के गवर्नर के परिसर में देखा था। अफगानिस्तीनी पुलिस ने सिद्दीकी से स्थानीय बोलियों, दारी और पश्तो में पूछताछ भी की, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। चूँकि सिद्दीकी उर्दू में बात कर रही थी, इसलिए अधिकारियों को लगा कि वह विदेशी है।

एएनपी अधिकारियों ने उसके पर्स की तलाशी ली। इसमें कई विवादित दस्तावेज मिले। इसमें विस्फोटकों, रासायनिक और जैविक हथियारों के निर्माण से संबंधित थे। आफिया सिद्दीकी के दस्तावेजों में न्यूयॉर्क सहित संयुक्त राज्य अमेरिका के अहम स्थलों की जानकारी भी थी।

सिद्दीकी के सामानों में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी और एक गीगाबाइट डिजिटल मीडिया स्टोरेज डिवाइस (थंब ड्राइव) मिले। उसके पास बोतलों में भरे हुए जेल और लिक्विड कैमिकल भी मिले।

18 जुलाई 2008 को, दो FBI एजेंट और एक अमेरिकी सैन्य दुभाषिया सिद्धीकी से मिलने अफगानिस्तान पहुँचे। इस दौरान अमेरिकी अधिकारी की राइफल छीनकर उसे अधिकारी पर ही तान दिया और अंग्रेजी में चिल्लाते हुए कहा कि ‘यहाँ से निकल जाओ’ और गोली चला दी।

इस दौरान सिद्दीकी को काबू में करने के लिए पैर पर गोली मारी गई। वह ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए अधिकारियों पर लात-घूँसे से हमला करने की कोशिश कर रही थी। वह अंग्रेजी में चिल्ला रही थी कि वह अमेरिकियों को मारना चाहती है। उसने कहा, “मैं आप सभी अमेरिकियों को मार डालूँगी।”

आफिया सिद्दीकी के बेहोश होने के बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। सिद्दीकी पर हत्या के प्रयास, हमले और हथियार रखने को लेकर केस दर्ज किया गया।

वेबसाइट पर आफिया सिद्दीकी की स्टोरी, लेख और तस्वीर मौजूद हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे एक शिक्षित पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला के साथ ‘जुर्म’ हो रहा है। इसमें बताया गया है कि कुरान कंठस्थ करने वाली ‘हाफिजा’ आज जेल में बंद है। अमेरिकी अधिकारियों ने ‘आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध’ के नाम पर ‘पीड़ित’ किया और ‘अत्याचार’ का शिकार बनाया। ऐसा ही एक वेबसाइट ‘द आफिया फाउंडेशन’ भी है।

2023 में, फ़ौजिया सिद्दीकी और वकील क्लाइव स्टैफोर्ड स्मिथ ने कहा कि आफ़िया ‘अमेरिका के लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखती’ और पाकिस्तान सरकार ने उसे वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। स्मिथ ने तो आफ़िया की जगह शकील अफ़रीदी को लाने की भी वकालत की थी। अफरीदी अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अमेरिका की मदद करने के आरोप में कई वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। लादेन 2012 में एबटाबाद में मारा गया था। पाकिस्तानी सरकार ने आफिया- अफरीदी की ‘अदला-बदली’ के लिए कोई कोशिश नहीं की।

वर्तमान में, आफ़िया आंदोलन आफ़िया सिद्दीकी की जेल से रिहाई के लिए शुरू किया गया है। इसे सोशल मीडिया, साक्षात्कारों, सेमिनारों, जागरूकता अभियानों और दूसरे माध्यमों से चलाया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस्लामी आतंकवादी ग्रुप, इस्लामी समर्थक ग्रुप, इस्लामी समर्थक ‘मानवाधिकार’ ग्रुप सिद्दीकी की कैद को ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ बता रहे हैं, वहीं आफिया का परिवार अलकायदा या किसी भी इस्लामी आतंकवादी समूह से उसके संबंधों से पूरी तरह इनकार कर रहा है।

आफिया सिद्दीकी एक घोर यहूदी विरोधी हैं। अपने मुकदमे के दौरान भी उन्होंने यह दावा करके कार्यवाही में बाधा डाली कि उनके खिलाफ एक यहूदी साजिश रची जा रही है। उन्होंने जूरी सदस्यों के डीएनए परीक्षण की भी माँग की। उन्होंने कहा कि अगर जस्टिस इजराइली या ‘जायोनी’ है, तो मुकदमा निष्पक्ष नहीं होगा।

इस्लामवादी आफ़िया सिद्दीकी की रिहाई की माँग तेज

पाकिस्तान और अमेरिका, दोनों में कई ‘मानवाधिकार’ समर्थक ग्रुप और इस्लामी संगठन आफ़िया सिद्दीकी को ‘पीड़ित’ बताते हैं। 2022 में सिद्दीकी की रिहाई की माँग करने वाले व्यक्ति अकरम ने टेक्सास में एक यहूदी पूजास्थल पर आतंकी हमला किया था। ये हमला 15 जनवरी 2022 को कोलीविले में बेथ इजराइली धर्मसमाज में हुआ था। इस दौरान कई यहूदियों को बंधक बना लिया गया और इन बंधकों को मुक्ति के एवज में आफिया सिद्दीकी की जेल से रिहाई की माँग की गई।

आतंकियों ने सिद्दीकी को कैद किये गए फेडरल मेडिकल सेंटर कार्सवेल के पास मौजूद यहूदी पूजा स्थल को निशाना बनाया था। जिहादी अकरम ने जब चार लोगों को बंधक बनाया, उस वक्त यहूदी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हो रहा था। अकरम ने वहाँ खड़े होकर जिहादी भाषण दिए। करीब 10 से 11 घंटे के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आतंकियों पर काबू पाया और बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस दौरान अमेरिकी पुलिस ने अकरम को गोली मारी।

एफबीआई ने इसे आतंकी और यहूदी-विरोधी के साथ-साथ इस्लामी जिहादी कट्टरपंथियों द्वारा किया गया अपराध बताया अकरम की छानबीन के दौरान आफिया सिद्दीकी से जुड़ी जानकारी भी पुलिस के हाथ लगी।

2014 में, इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अमेरिकी बंधकों, पत्रकार जेम्स फोले और मानवाधिकार कार्यकर्ता कायला मुलर के बदले सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी। हालाँकि अमेरिका ने हमेशा इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया और फोले और मुलर दोनों को अलग-अलग घटनाओं में आईएसआईएस जिहादियों ने मार डाला।

‘काफ़िरों’ को मारने की कसम खाने वाले इस्लामी आतंकवादी समूहों ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की है और उसे मुस्लिम ‘पीड़ित’ बताया है। इस्लामवादियों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ‘मानवाधिकार’ समूहों ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है।

यहाँ तक कि पाकिस्तानी सरकारों और नेताओं ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है। पाकिस्तानी सीनेट ने 2018 के एक प्रस्ताव में ‘लेडी अल-क़ायदा’ आफ़िया सिद्दीकी को ‘पाकिस्तान की बेटी’ कहा था।

2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक ने सिद्दीकी की रिहाई के लिए अमेरिका से पैरवी की है। अलकायदा आतंकवादी की रिहाई के लिए प्रस्ताव, बयानबाजी और आग्रह वर्षों से पाकिस्तान की रणनीति रहे हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान के सीनेटरों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सिद्दीकी की रिहाई की माँग के लिए अमेरिका गया था।

साल 2024 में, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मानवीय आधार पर उसकी रिहाई के लिए एक पत्र लिखा था। हालाँकि, बाइडेन ने शरीफ़ के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

इस साल जुलाई में, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने आफ़िया सिद्दीकी के मामले की तुलना जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के मामले से करके विवाद खड़ा कर दिया था और इसे ‘उचित प्रक्रिया’ का मामला बताया था।

हाल ही में, आफ़िया सिद्दीकी के वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ ने कहा कि वह न्यूयॉर्क में एक नई अपील दायर करने की योजना बना रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें घटना के वीडियो सबूत मिले हैं जो कथित तौर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों को खारिज करते हैं।

                                      वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ और आफिया सिद्दीकी

इसके अलावा, जिहादी समूहों, पाकिस्तान सरकार, अमेरिका और ब्रिटेन स्थित ‘मानवाधिकार’ और इस्लामी समूहों जैसे सीएआईआर, एमनेस्टी इंटरनेशनल, केज इंटरनेशनल, कोड पिंक आदि ने ‘लेडी अल-कायदा’ की रिहाई की वकालत की है।

गौरतलब है कि टेक्सास सिनेगॉग हमले से ठीक दो महीने पहले, सीएआईआर इंटरनेशनल (अमेरिकी-इस्लामिक संबंध परिषद) ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी और उसके समर्थन में कार्यक्रम और रैलियाँ आयोजित की थी। सीएआईआर टेक्सास डीएफडब्ल्यू सिद्दीकी के समर्थन में कई ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियान चलाता है और सजा के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई के लिए धन भी जुटाता है।

ऑपइंडिया ने पहले सीएआईआर इंटरनेशनल की हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति, क्राउडफंडिंग घोटाले की आरोपित ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब के प्रति उनके समर्थन और बेहद हिंदू-विरोधी ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ सम्मेलन को उनके समर्थन के बारे में रिपोर्ट छापी थी।

2022 में, रटगर्स विश्वविद्यालय और नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया। इसमें दिखाया गया कि टेक्सास में यहूदी पूजास्थल पर हमले से पहले ‘फ्री आफ़िया मूवमेंट’ को लेकर ट्विटर पर अभियान चलाया गया। अलजजीरा और क्रिसेंट इंटरनेशनल जैसे इस्लामी प्रचार माध्यम भी आफ़िया सिद्दीकी के पक्ष में बोल रहे हैं।

आफ़िया सिद्दीकी की बहन डॉ. फ़ौज़िया सिद्दीकी भी ‘आफ़िया मूवमेंट’ चला रही हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार, “आफिया मूवमेंट एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जो डॉ. आफिया सिद्दीकी के लिए न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है, जो एक पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला है और वर्तमान में अमेरिकी संघीय जेल में 86 साल की अन्यायपूर्ण सजा काट रही है।”

ट्रंप की पार्टी की महिला नेता वेलेंटीना गोमेज ने फायर गन से फूँक दिया कुरान, कहा- अमेरिका से खत्म कर दूँगी इस्लाम: LGBT+ से लेकर अश्वेतों के खिलाफ भी मुखर

            अमेरिका के टेक्सास से रिपब्लिकन उम्मीदवार वेलेंटीना गोमेज ( साभार-x @Valentina Gomez)
अमेरिका में टेक्सास की 31वीं संसदीय सीट से चुनाव लड़ रही रिपब्लिकन उम्मीदवार वेलेंटीना गोमेज (Valentina Gomez) एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह फ्लेमथ्रोवर गन से कुरान जलाती हुई दिख रही हैं। हालाँकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे बैन कर दिया गया है, लेकिन ट्विटर पर ये वीडियो अभी भी वायरल है।

कौन हैं वेलेंटीना गोमेज

रिपब्लिकन उम्मीदवार गोमेज राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) कैम्पेन की समर्थक हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम हमेशा ईसाई देशों में हिंसा फैलाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सब लोग उनके मिशन में उनका साथ दें।

वेलेंटीना गोमेज का जन्म 8 मई 1999 को कोलंबिया के मेडेलिन शहर में हुआ था। 2009 में वह परिवार के साथ अमेरिका आ कर बस गईं। पढ़ाई-लिखाई के बाद रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर में हाथ आजमाया। वह नेस्ले से भी जुड़ी रही हैं।

राजनीति में आते ही गोमेज का करियर विवादों से घिर गया। सार्वजनिक तौर पर मुसलमानों, LGBT+ कम्युनिटी, अश्वेतों और इमिग्रेंट्स के खिलाफ उन्होंने विवादित बयान दिए।

अमेरिका से इस्लाम खत्म करना चाहती हैं गोमेज

नए वीडियो में गोमेज कहती हैं कि उनका उद्देश्य ‘टेक्सास से इस्लाम को खत्म करना है।’ इसके बाद उन्होंने गालियाँ दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मुस्लिम दुनिया के 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।

गोमेज के मुताबिक, “अगर हम इस्लाम को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर देते, तो आपकी बेटियों का बलात्कार होगा और आपके बेटों का सिर कलम कर दिया जाएगा।” फिर वह कैमरे पर कुरान जलाती हैं और कहती हैं, “अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र है, इसलिए वे आतंकवादी मुसलमान 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।”

वीडियो के अंत में गोमेज कहती हैं कि ईसा मसीह के बताए रास्ते पर वह चलती हैं। गोमेज ने एक और पोस्ट शेयर किया है, जिसमें वह कहती हैं, “मैं अपनी बातों पर कायम हूँ और मैं उस किताब के आगे कभी घुटने नहीं टेकूँगी, जो 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार है। उस दिन एबी गेट पर 13 अमेरिकी सैनिकों की हत्या कर दी गई थी।”

यह पहली बार नहीं है जब गोमेज ने मुस्लिमों के खिलाफ खुल कर बोला हो। मई 2025 में, उन्होंने टेक्सास में एक मुस्लिम सहभागिता कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की थी। माइक्रोफोन छीन कर जबरदस्ती अपनी बात की। उन्होंने कहा था कि टेक्सास में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। कॉन्ग्रेस उनकी मदद करे, ताकि अमेरिका के इस्लामीकरण को रोक जा सके। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ गॉड से डरती हैं।

20 जनवरी से ही पहले ट्रम्प काम पर :एलन मस्क ने की व्यापार जगत के भारतीय दिग्गजों से मुलाकात, कहा- पॉजिटिव डायरेक्शन में भारत- अमेरिका संबंध


दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने टेक्सास के अपने स्पेसएक्स स्टारबेस फैसिलिटी में व्यापार जगत के भारतीय दिग्गजों से मुलाकात की है। इंड‍िया ग्‍लोबल फोरम (India Global Forum) के तत्वाधान में हुई इस मुलाकात में टेस्ला और स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क ने उनसे भारत-अमेरिकी संबंधों के साथ तमाम मुद्दों पर बात की।

टेस्ला सीइओ ने बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका के बीच का संबंध पॉजिटिव डायरेक्शन में आगे बढ़ रहा है। भारतीय व्यापारियों और स्टार्टअप जगत के प्रमुख हस्तियों के साथ मुलाकात में एलन मस्क ने भारत को प्राचीन सभ्यता और जटिलता का अद्भुत मिश्रण बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग की वकालत की।

इस मुलाकात से आने वाले दिनों में भारत- अमेरिका के बीच संबंधों में और मजबूती आने की संभावना और बढ़ गई है। स्पेसएक्स के सीईओ अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काफी करीबी हैं। उन्हें आगामी ट्रंप सरकार में एक अहम पद के लिए भी चुना गया है। निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने उनका चयन कामकाज में दक्षता बढ़ाने के लिए सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के सह-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है।

एलन मस्क की भारतीय व्यापारिक हस्तियों के साथ यह मुलाकात दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और स्पेस इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी की नई संभावनाओं को जन्म दे सकती है। ऐसा इसलिए भी है कि बातचीत में उन्होंने भारत को वैश्विक नवाचार में एक अहम देश बताते हुए स्पेस साइंस में भारत की प्रगति की सराहना की।

इंड‍िया ग्‍लोबल फोरम के नेतृत्व में मस्क से मिलने वालों में भारत के दूसरे सबसे बड़े को-वर्किंग प्लेटफॉर्म Innova के संस्थापक रितेश मलिक, ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल, फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण रमन, आदित्य बिड़ला ग्रुप के निदेशक आर्यमन बिड़ला, एस्सार कैपिटल के निदेशक प्रशांत रुइया, कोटक811 के सह-प्रमुख जय कोटक, बेस्टसेलिंग लेखक अमीश त्रिपाठी जैसे नाम शामिल थे। इन व्यापारिक हस्तियों ने एलन मस्क के साथ टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा की।

अब तक 60 से ज्यादा स्टार्ट-अप्स में निवेश कर चुके रितेश मलिक ने कहा कि हमें सहस्राब्दी के व्यक्ति एलन मस्क के साथ समय बिताने का एक अविश्वसनीय सम्मान मिला। इसके लिए उन्हें धन्यवाद। रितेश मलिक ने कबा कि फ्लाइट 7 का प्रक्षेपण देखना और दुनिया के बारे में एलन के विचारों के बारे में बात करना अविश्वसनीय था।

इंडिया ग्लोबल फोरम के संस्थापक मनोज लाडवा ने कहा कि यह आयोजन बेहद अहम था। अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में पहले बातचीत काफी मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत प्रतिभाशाली लोगों से भरा हुआ है। इंडिया ग्लोबल फोरम में हमारा उद्देश्य दुनिया भर की सरकारों और व्यवसायों के माध्यम से इन अवसरों को वैश्विक समुदाय तक पहुंचाना है।