बुजुर्गों की एक कहावत है कि जो परिवार अपने सदस्यों पर यकीन नहीं करने की बजाए परिवार से बाहर के लोगों पर ज्यादा यकीन करता है, उस परिवार में 24 घंटे कलेश रहता है जो एक सुखद परिवार के अच्छे लक्षण नहीं। वह परिवार आर्थिक और आत्म-सम्मान में किसी गिनती में नहीं रहता। ठीक वही हालत हमारे विपक्ष की है। जो अपने संसाधनों पर विश्वास करने की बजाए भारत विरोधी विदेशियों के हाथ कठपुतली बना हुआ है।
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लेखक चर्चित YouTuber |
टेस्ला के CEO और अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने कहा है कि हम लोगों को EVM को हटा देना चाहिए क्योंकि इसे मानव के अलावा Artificial Intelligence (AI) से हैक किया जा सकता है। बस इतना सुन कर विपक्ष की तो बांछें खिल गईं। राहुल गांधी उछल पड़ा कि हमारे EVM में पारदर्शिता की कमी है, EVM हमारा Black Box है। अखिलेश यादव फ़ैल गया कि बैलट बॉक्स से चुनाव होने चाहियें।
विपक्ष बैलेट क्यों चाह रहा है, आज की युवा पीढ़ी को मालूम हो कि EVM से पहले विपक्ष बूथ कैप्चरिंग कर अंधाधुंध बैलेट पर अपने चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाकर जीत जाते थे, इसीलिए विदेशी भीख पर आश्रित विपक्ष EVM का विरोध कर रहा है। राहुल से पूछा जाये कि नेहरू ने हारे हुए मौलाना आज़ाद को विजयी कैसे घोषित करवा, हिन्दू महासभा के विजयी उम्मीदवार विशन सेठ की वोटों को आज़ाद की मिलवाकर हारे हुए आज़ाद को विजयी घोषित करवा दिया। अगर उस समय EVM होती नेहरू को धूल ही चाटनी होती।
कांग्रेस के राशिद अल्वी ने कहा कि एलन मस्क बड़े आदमी हैं, सबसे अमीर उद्योगपति हैं, उन्होंने EVM पर कुछ बोला है तो ठीक ही होगा। एक भाई ने कहा कि जिस system पर उंगली उठे, उसे बंद कर देना चाहिए। फिर तो गांधी परिवार के कांग्रेस पर कब्जे पर भी उंगली उठती है, उन्हें भी कांग्रेस से बाहर करो।
यानी अमेरिकी मस्क कहे तो ठीक है, BBC कहे मोदी के खिलाफ तो वो भी ठीक है और जो भी विदेशी भारत के खिलाफ बोलते हैं, उनका कहा तो पत्थर की लकीर मान लेते हैं।
अब चुनाव आयोग ने एलन मस्क को चुनौती दी है कि भारत में आकर हमारी EVM को हैक करके दिखाइए। एक अख़बार के खिलाफ आयोग ने मुकदमा भी दर्ज किया है।
एलन मस्क, कांग्रेस और विपक्ष को इतना भी अहसास नहीं है कि कांग्रेस की सीटें करीब दोगुनी हो गई, सपा की सीट 5 से 37 हो गई और 10-12 दिन तक EVM पर किसी ने सवाल नहीं उठाया। अगर EVM में गड़बड़ होती तो भाजपा की सीट 400 ही होती, 303 से 240 नहीं रहती और कांग्रेस समेत विपक्ष की सीटें न बढ़ती। बस मुंह उठा कर EVM का चरित्र हनन करने से मतलब है।
एलन मस्क को पता नहीं भारत में अनेक लोगों ने EVM में छेड़छाड़ होने का दावा किया और जब चुनाव आयोग ने उन्हें आयोग में आकर छेड़छाड़ करके आरोप साबित करने को कहा तो कोई नहीं कर सका। केजरीवाल का सौरभ भारद्वाज आयोग में जाकर फेल होकर आया। एलन मस्क और कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष को पता है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 40 याचिकाएं लगाईं थी EVM में दोष निकाल कर उसे हटाने के लिए लेकिन सभी याचिकाएं अदालत ने ख़ारिज की और EVM में किसी प्रकार की त्रुटि मानने से मना कर दिया। अब मस्क भारत आएं और चुनाव आयोग की चुनौती स्वीकार करें। चुनाव आयोग को मास्क पर कम से कम 50 करोड़ रूपए मानहानि का मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
एलन मस्क, यह हो सकता है कि अमेरिका में उपयोग होने वाली Electronic Machines सफल ना हो रही हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी मशीन भी गलत है। भारत Technology में अमेरिका से कम नहीं है और कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि EVM सबसे पहले इंदिरा गांधी के समय में 1982 में शुरू हुई थी।
हम अमेरिका से कितने आगे हैं, एलन मस्क को यह भी पता होना चाहिए। भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आज़ादी मिलते ही मिल गया था जबकि अमेरिका में 1776 में आज़ादी मिलने के बाद 1920 यह अधिकार पहले White Women को मिला यानी 144 वर्ष बाद और अश्वेत महिलाओं को यह अधिकार उसके भी 50 वर्ष के बाद मिला। इसलिए भारत आपसे कहीं पीछे है, तो कहीं बहुत आगे भी है।
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