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बंगाल चुनाव में EVM से गायब हुई BJP: कमल छाप वाले बटन पर टेप चिपकाया, Video सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा- दोबारा कराएँगे मतदान

              बंगाल के फाल्टा विधानसभा के बूथ में EVM पर टेप लगाने का वीडियो आया सामने (फोटो साभार: X)
पश्चिम बंगाल में बुधवार (29 अप्रैल 2026) को दूसरे चरण की 142 सीटों पर मतदान जारी है। इसी बीच TMC गुंडों की हिंसा और EVM से छेड़छाड़ की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक वीडियो दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर शहर की फाल्टा/फलटा (Falta) विधानसभा से सामने आई, जहाँ बूथ 144 के EVM पर BJP के बटन पर टेप चिपकाया गया। इसी विधानसभा क्षेत्र से जहाँगीर खान TMC के उम्मीदवार हैं।
चुनाव आयोग को मतदान केंद्र पर नियुक्त सभी कर्मचारी और अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। और अदालतों को भी ऐसे कर्मचारी और अधिकारियों पर नरमाई बरतने की बजाए कठोर कार्यवाही करनी चाहिए। 

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए कहा, “ममता बनर्जी इसी बात का बचाव कर रही थीं जब उन्होंने डायमंड हार्बर के फाल्टा से TMC के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अपराधी जहाँगीर खान के लिए आवाज उठाई।” अमित मालवीय ने ऐसे कई बूथों पर BJP के बटन पर टेप लगाए जाने का दावा किया।

उन्होंने इस घटना को तथाकथित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ बताते हुए कहा, “वही मॉडल जिसने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लोकसभा सीट हासिल करने में मदद की थी।”

यह तथाकथित “डायमंड हार्बर मॉडल” है, वही मॉडल जिसने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लोकसभा सीट हासिल करने में मदद की थी। अमित मालवीय ने फाल्टा के ऐसे सभी बूथों पर दोबारा मतदान कराने की माँग की है, जहाँ EVM पर BJP के बटन पर टेप लगा दिया गया।

चुनाव आयोग की कार्ऱवाई

घटना का वीडियो सामने आने के बाद बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार ने संबंधित बूथ में दोबारा मतदान का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि बंगाल चुनाव में मतदान शुरू होने से पहले चुनाव आयोग ने सख्ती से निर्देश दिए थे कि अगर किसी भी मतदान केंद्र में EVM से छेड़छाड़ की घटना सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। इस निर्देश में खास तौर से EVM पर टेप, गोंद या परफ्यूम लगाने का भी जिक्र किया गया था।

विधानसभा से TMC उम्मीदवार है जहाँगीर खान

EVM पर टेप लगाने की घटना उसी फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से सामने आई है, जहाँ से TMC के टिकट पर जहाँगीर खान चुनाव लड़ रहे हैं। जहाँगीर खान वही व्यक्ति हैं, जिनके समर्थकों को यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा ने एक वीडियो में मतदाताओं को डराने-धमकाने को लेकर हड़काया था। इस विवाद पर TMC लगातार जहाँगीर खान का पक्ष लेते हुए IPS अफसर को बंगाल चुनाव से हटाने की माँग कर रही है।

EVM पर झूठ फैलाने के लिए राहुल गांधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे के खिलाफ बंबई हाईकोर्ट में याचिका

भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेशी ताकतें तरह-तरह के नैरेटिव बनाती हैं। और बिना तर्क के इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने में भारत का विपक्षी दल आगे आ जाता है। इसी तरह का एक नैरेटिव बनाया गया कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। लोकसभा चुनाव के रिजल्ट आने के 11 दिन बाद ईवीएम को लेकर यह झूठ फैलाया गया। सबसे पहले दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क ने 15 जून को लिखा- EVM को खत्म कर देना चाहिए। इसे इंसानों या AI द्वारा हैक किए जाने का खतरा है। इसके एक दिन बाद 16 जून, 2024 को मिड डे ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित की कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है, जिसने राजनीतिक हलकों और आम जनता में विवाद खड़ा कर दिया। इसके बाद एक चुनाव अधिकारी ने मिड-डे की एक रिपोर्ट को ‘झूठी खबर’ कहकर खारिज कर दिया। अधिकारी ने कहा कि पब्लिकेशन को मानहानि का नोटिस जारी किया गया है। नोटिस मिलते ही मिड डे ने माफीनामा प्रकाशित कर दिया लेकिन इंडी अलायंस के नेता राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे समेत विपक्षी नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश करते रहे। उधर ध्रुव राठी और अन्य लेफ्ट लिबरल एजेंडा चलाने वालों ने इसे जोर-शोर से उठाकर मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की। ईवीएम को लेकर जनता में भ्रम पैदा करने के लिए अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शिवसेना-यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की मांग को लेकर बंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शिवसेना-यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग को लेकर बंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इन नेताओं के खिलाफ EVM को लेकर झूठ फैलाने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि उक्त लोगों ने अपने ‘छुपे एजेंडे’ के तहत ईवीएम को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनाई और लोगों में भ्रम पैदा किया।

आरोपियों पर चले आपराधिक अवमानना का मामला
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी और अन्य लोग लगातार फेक न्यूज फैलाकर आम जनता को भ्रमित करते हैं, ये उनकी आदत में शुमार है। ऐसा करना नीलेश नवलखा बनाम भारत संघ (2021) में बंबई हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उक्त आदेश में मीडिया को ‘मीडिया ट्रायल’ का सहारा लेने से बचने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार, राहुल गांधी, ध्रुव राठी समेत सभी आरोपितों ने उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि जिन मामलों की सुनवाई चल रही हो, उस पर कोई राय बनाकर जनता के बीच गलत बातें फैलाने पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आएगा। ऐसा करना कोर्ट की अवमानना अधिनियम की धारा 2(सी) के तहत दंडनीय अपराध है।

आरोपियों की ‘छिपी मंशा’ की जांच के लिए बने एसआईटी
इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस मोहिते-डेरे की बेंच में हुई। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में CBI, IB और ED सहित विशेष जांच दल (SIT) के गठन की भी मांग की है, ताकि राहुल गांधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे व अन्य लोगों की ‘छिपी मंशा’ की जांच की जा सके। याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(बी) और 12 के तहत राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से पुलिस को आईपीसी की धारा 192, 193, 107, 409, 120(बी) और 34 के तहत लंबित जांच के संबंध में सार्वजनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और झूठे सबूत बनाने के लिए उपरोक्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया।

जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले से अलग होने की अपील
इस दौरान याचिकाकर्ता ने जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले की सुनवाई से अलग होने की भी अपील की, क्योंकि जस्टिस डेरे की बहन शरद पवार की एनसीपी से जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, पीठ ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार किया। साथ ही कहा कि इसे गलत तरीके से उसके समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं से कहा गया कि वे चीफ जस्टिस से संपर्क करें और अपनी याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध करें।

विपक्षी दलों और लेफ्ट लिबरल एजेंडा चलाने वालों ने किस तरह ईवीएम पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की

मिडडे ने ईवीएम को लेकर झूठी खबर छापी
मिडडे अखबार ने 16 जून 2024 को एक खबर छापी थी, जिसमें ईवीएम मशीन को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने का दावा किया गया था। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम की रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था। इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जांच को भेज चुकी है। हालांकि बाद में मिड-डे ने अपनी खबर का खंडन छापा था और कहा था कि ये खबर गलत थी। ऐसा होना मुमकिन नहीं है

ध्यान भटकाने के लिए निकाला गया ईवीएम का जिन्न!
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राहुल गांधी ने गरीब महिलाओं के खाते में हर महीने 8500 और सालाना एक लाख रुपए भेजने की गारंटी दी थी। 4 जून को रिजल्ट आने के बाद 5 जून से देश के कई इलाकों में मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस का गारंटी कार्ड लेकर पहुंच रही हैं और एक लाख रुपए की मांग कर रही हैं। देश के कई शहरों में महिलाओं की लगातार जुटती भीड़ से कांग्रेस की काफी बदनामी होने लगी। यह गारंटी कांग्रेस के गले की फांस बन गई। कांग्रेस को इस गारंटी से पार पाने का रास्ता नहीं सूझ रहा था तो लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के 11 दिन बाद ईवीएम का जिन्न बाहर निकाला गया। मोदी विरोधी ग्लोबल पावर्स और डीप स्टेट ने इसके लिए एलन मस्क का इस्तेमाल किया। मस्क ने अमेरिका के संदर्भ में कहा कि EVM को हैक किए जाने का खतरा है इसलिए इसे खत्म कर देना चाहिए। इसके बाद राहुल गांधी को जैसे संजीवनी मिल गई। राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा- भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरह है। डीप स्टेट ने इसके बाद मिड डे में प्लांटेड खबर छपवा दी कि OTP से EVM को अनलॉक किया जा सकता है। जबकि यह भ्रामक बातें हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहीं है।

चुनाव आयोग को बदनाम करना मकसद
कांग्रेस के 99 सांसदों पर अयोग्यता की तलवार लटक रही है। ऐसे में चुनाव आयोग बदनाम करने के लिए ईवीएम मुद्दा उठाया गया है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी 99 नवनिर्वाचित सांसदों के खिलाफ याचिका दायर किया है। नई दिल्ली स्थित वकील विभोर आनंद ने कांग्रेस के सभी 99 सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए याचिका दायर की है। विभोर आनंद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने पर एक लाख रुपये देने का वादा करके मतदाताओं को रिश्वत का झांसा दिया है। उन्‍होंने याचिका में कहा है कि कांग्रेस ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(1) के तहत अपराध किया है। विभोर आनंद ने इस संबंध राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। उनसे चुनाव आयोग को मामले का तत्काल संज्ञान लेने का निर्देश देने की मांग की है। 

भारत की चुनावी प्रक्रिया की दुनिया ने की तारीफ
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाने वालों को चुप तो कराया ही पूरी दुनिया ने भी चुनाव नतीजों के बाद भारत की चुनावी प्रक्रिया की तारीफ की। मगर एलन मस्क ने अब एक अलग ही राग छेड़ा है। ये EVM का भूत खड़ा किया गया है ताकि देश का ध्यान कांग्रेस द्वारा 8500 रुपये वाले चुनावी फ्रॉड से हट सके। वहीं अब तक मुद्दाविहीन विपक्ष और खटाखट गारंटी से परेशान कांग्रेस ने ईवीएम मुद्दे को हाथोंहाथ लिया। राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक ने एलन मस्क के पोस्ट को री-ट्वीट कर ईवीएम पर चिंता जताने लगे। अगर राहुल और अखिलेश को ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो उन्हें अपने सभी सांसदों से इस्तीफा दिलवा देना चाहिए और फिर इस पर बात करनी चाहिए। विधवा विलाप करने से कोई फायदा नहीं है क्योंकि देशवासियों को इनकी करतूतें पता चल चुकी है।

लोकसभा चुनाव परिणाम आने के 11 दिन बाद क्यों उठा ईवीएम मुद्दा
लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के 11 दिन बाद एक बार फिर ईवीएम पर सवाल उठे हैं। आखिर 11 दिन बाद इस मुद्दे की उठने की वजह क्या हो सकती है? इसकी टाइमिंग लेकर यह साफ है कि राहुल गांधी की चुनावी गारंटी से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को उछाला गया है। जैसे ही यह मुद्दा उछला राहुल गांधी ने इसे लपक लिया। उन्होंने इसे ब्लैक बॉक्स बताया और कहा कि भारत जैसे देश में किसी को भी इसकी जांच करने की अनुमति नहीं है। राहुल ने इसके अलावा एक न्यूजपेपर की कटिंग भी शेयर की है जिसमें लिखा है कि मुंबई उत्तरपश्चिम लोकसभा सीट जीतने वाले शिवसेना सांसद(शिंदे गुट) रवींद्र वायकर के रिश्तेदार के पास ऐसा फोन है जिससे ईवीएम को आसानी से खोला जा सकता है।

यदि EVM हैक होती तो BJP 272 से नीचे क्यों रहती?
यहां सवाल यह उठता है कि यदि EVM हैक होती तो BJP 272 से नीचे क्यों रहती? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी काउंटिंग में पीछे क्यों चलते? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी मात्र डेढ़ लाख वोटों से क्यों जीतते? यदि EVM हैक होती तो BJP के 18 मंत्री चुनाव क्यों हारते? यदि EVM हैक होती तो BJP अयोध्या क्यों हारती? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी गठबंधन का रिस्क क्यों लेते?

ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहींः चुनाव आयोग
ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक का दावा करने वाली मिड डे अखबार की रिपोर्ट को चुनाव आयोग ने नकार दिया। चुनाव आयोग ने कहा, ‘आज एक न्यूजपेपर (मिड डे) में खबर आई कि ईवीएम को एक फोन से अनलॉक किया जाता है। यह बिलकुल गलत है। ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह वायरलेस प्रोसिजर है और स्वतंत्र है। चुनाव आयोग ने साफ कहा कि ईवीएम हैक नहीं हो सकती। यह खबर गलत है। जिस अखबार में यह खबर आई है, उसे हमने गलत खबर फैलाने के लिए धारा 499 और 505 के तहत नोटिस भेजा है।

मिड डे की न्यूज़ रिपोर्ट अपने आप में भ्रामक
मिड डे की न्यूज़ रिपोर्ट अपने आप में भ्रामक है। ओटीपी जनरेशन सर्विस वोटर के लिए मतदान में शामिल होने की एक प्रक्रिया का हिस्सा है। सर्विस वोटर (सेना, सुरक्षा बल और भारत सरकार में कार्यरत) एन्क्रिप्टेड ईटीपीबी फ़ाइल डाउनलोड करता है और फिर वोट डालने के लिए इस फ़ाइल को खोलने के लिए ओटीपी उत्पन्न होता है। ईटीपीबीएस ईवीएम से बहुत अलग है।

EVM को खत्म कर देना चाहिएः एलन मस्क
दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क ने 15 जून को लिखा- EVM को खत्म कर देना चाहिए। इसे इंसानों या AI द्वारा हैक किए जाने का खतरा है। हालांकि ये खतरा कम है, फिर भी बहुत ज्यादा है। अमेरिका में इससे वोटिंग नहीं करवानी चाहिए। दरअसल, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे और अगले अमेरिकी चुनावों के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर के एक पोस्ट के जवाब में एलन मस्क ने यह ट्वीट किया था। रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर ने अपने पोस्ट में प्यूर्टो रिको में हुए मतदान में अनियमितताएं बताई थीं। मस्क ने इसी पर एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए। इंसानों या एआई द्वारा हैक किए जाने का जोखिम, हालांकि छोटा है, फिर भी यह बहुत अधिक है।”

भारतीय EVM सुरक्षित हैंः राजीव चंद्रशेखर
एलन मस्क के ट्वीट पर भाजपा नेता और पूर्व IT मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा- मस्क के मुताबिक, कोई भी सुरक्षित डिजिटल हार्डवेयर नहीं बना सकता, ये गलत है। उनका बयान अमेरिका और अन्य स्थानों पर लागू हो सकता है – जहां वे इंटरनेट से जुड़ी वोटिंग मशीन बनाने के लिए नियमित कंप्यूट प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। भारतीय EVM सुरक्षित हैं और किसी भी नेटवर्क या मीडिया से अलग हैं। कोई कनेक्टिविटी नहीं, कोई ब्लूटूथ, वाईफाई, इंटरनेट नहीं। यानी कोई रास्ता नहीं है। फैक्ट्री प्रोग्राम्ड कंट्रोलर जिन्हें दोबारा प्रोग्राम नहीं किया जा सकता। EVM को ठीक उसी तरह डिजाइन किया जा सकता है, जैसा कि भारत ने किया है। भारत में इसे हैक करना संभव नहीं है। इलॉन, हमें ट्यूटोरियल (सिखाने वाला संस्थान) चलाकर खुशी होगी।

भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरहः राहुल गांधी
भारत की हर सफलता में नकारात्मकता ढूंढ़ने में माहिर राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा- भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरह है। किसी को भी इसकी जांच की अनुमति नहीं है। हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। जब संस्थाओं में जवाबदेही की कमी होती है, तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है। राहुल गांधी ने इस ट्वीट के साथ ईवीएम को लेकर मिड डे में छपी खबर को भी पोस्ट किया है।

ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती हैः सैम पित्रोदा
इसके बाद राहुल गांधी और उनके राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा ने कहा कि देश में बैलट पेपर से ही चुनाव कराया जाना चाहिए क्योंकि ईवीएम की व्यवस्था ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने ईवीएम की व्यवस्था का पूरा अध्ययन किया है और मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि यह व्यवस्था ठीक नहीं है और इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए बैलट पेपर से ही चुनाव कराना उचित होगा और इसी के जरिए चुनाव में हार-जीत का फैसला किया जाना चाहिए।

आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर होः अखिलेश यादव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर से ईवीएम पर शक जताया है। उन्होंने यह बात एलन मस्क के एक बयान के बाद यह बात कही है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश ने लिखा कि “टेक्नॉलजी समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। आज जब विश्व के कई चुनावों में EVM को लेकर गड़बड़ी की आशंका ज़ाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स EVM में हेराफेरी के ख़तरे की ओर खुलेआम लिख रहे हैं, तो फिर EVM के इस्तेमाल की ज़िद के पीछे की वजह क्या है, ये बात भाजपाई साफ़ करें। आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की अपनी मांग को हम फिर दोहराते हैं।” अखिलेश यादव जब ईवीएम पर शक है तो ऐसे में उन्हें अपने सभी सांसदों से इस्तीफा दिलवा देना चाहिए फिर इस पर बात करें तो लोगों को भरोसा होगा कि वे साफ नीयत से बोल रहे हैं।

5 कॉलम में EVM पर छापा झूठ, 5 लाइन के ‘स्पष्टीकरण’ में पूरी हो गई मिड डे की ‘पत्रकारिता’

साइड कॉर्नर में प्रकाशित छोटी सी सफाई
EVM को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने के मसले पर मिड-डे द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी पर समाचार पत्र ने सफाई दी है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे अपने अखबार के फ्रंट पेज के छोटे से कॉर्नर में लिखा है कि उन्होंने पहले जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी ‘ईवीएम को फोन पर आए ओटीपी से अनलॉक किया जा सकता है’, वो गलत थी, ऐसा नहीं हो सकता है।

इसके अलावा उन्होंने बड़ी ही खामोशी से अपने ऑनलाइन वर्जन से भी इस स्टोरी को हटा लिया है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। अपनी हालिया रिपोर्ट में उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर वंदना सूर्यवंशी से बात करके एक छोटा सी रिपोर्ट की।

इसमें वंदना सूर्यवंशी ने बताया कि ईवीएम एक नॉन प्रोग्रामेबल मशीन है और इस अनलॉक करने के लिए कोई ओटीपी जरूरी नहीं होता… इसी बयान के साथ बाद मिड ने अपनी रिपोर्ट के एकदम अंत में लिखा- उन्हें त्रुटि के लिए खेद है और अपनी रिपोर्ट खत्म कर दी।

रिपोर्ट को आधार बनाकर फैलाया गया झूठ

जिस रिपोर्ट को इतनी आसानी से मिड डे ने रफा दफा करने का प्रयास किया है वो कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं थी। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम की रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था। इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जाँच को भेज चुकी है।
इसी रिपोर्ट के बाद राहुल गाँधी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए चुनावों में फ्रॉड होने की बात कही थी। साथ ही लोकतंत्र पर प्रश्न खड़े किए।
सुप्रिया श्रीनेत ने बिन किसी जानकारी के कहा कि मुंंबई की पश्चिम सीट से एनडीए प्रत्याशी रवींद्र वायकर 48 वोट से जीते क्योंकि उनके रिश्तेदार का मोबाइल फोन उससे जुड़ा था। इसी से ईवीएम अनलॉक हुई।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले में निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए थे। कहा गया था कि एनडीए प्रत्याशी का रिश्तेदार फोन लेकर गया था। अगर चुनाव आयोग इस पर एक्शन नहीं लेता है तो ये बड़ा स्कैम हो सकता है।
इसी प्रकार अन्य नाम भी हैं जो इस रिपोर्ट के आधार पर झूठ फैला रहे थे और प्रश्न उठा रहे थे। हालाँकि, अब जब मिड डे द्वारा अपना आर्टिकल हटा लिया है तो लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या राहुल गाँधी जैसे नेताओं पर बिन सच्चाई जानें झूठी खबर फैलाने के मामले में कार्रवाई होगी। वो लोग अखबार के साथ रिपोर्टर की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

एलन मस्क आपके देश में वोटिंग के लिए उपयोग होने वाली Electronic Machines पर सवाल उठ सकता है; भारत की EVM में कोई दोष नहीं निकाल सका ; हम अमेरिका से बहुत आगे हैं ; चुनाव आयोग को एलन मस्क पर 50 करोड़ का मानहानि मुकदमा ठोक देना चाहिए

सुभाष चन्द्र

बुजुर्गों की एक कहावत है कि जो परिवार अपने सदस्यों पर यकीन नहीं करने की बजाए परिवार से बाहर के लोगों पर ज्यादा यकीन करता है, उस परिवार में 24 घंटे कलेश रहता है जो एक सुखद परिवार के अच्छे लक्षण नहीं। वह परिवार आर्थिक और आत्म-सम्मान में किसी गिनती में नहीं रहता। ठीक वही हालत हमारे विपक्ष की है। जो अपने संसाधनों पर विश्वास करने की बजाए भारत विरोधी विदेशियों के हाथ कठपुतली बना हुआ है। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राहुल गाँधी ने एक बार कहा था कि देश में मिट्टी का तेल फैला हुआ है बस एक माजिस दिखाने की जरुरत है। गलत नहीं कहा था, बिल्कुल ठीक कहा था; क्योकि तेल फ़ैलाने वाला यही विदेशियों के हाथ की कठपुतली और माजिस दिखाने वाला भी यही। सबूत सबके सामने हैं, तरस आता है बुद्धिविहीन विपक्ष को वोट देने वालों पर। 

टेस्ला के CEO और अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने कहा है कि हम लोगों को EVM को हटा देना चाहिए क्योंकि इसे मानव के अलावा Artificial Intelligence (AI) से हैक किया जा सकता है। बस इतना सुन कर विपक्ष की तो बांछें खिल गईं। राहुल गांधी उछल पड़ा कि हमारे EVM में पारदर्शिता की कमी है, EVM हमारा Black Box है। अखिलेश यादव फ़ैल गया कि बैलट बॉक्स से चुनाव होने चाहियें।

विपक्ष बैलेट क्यों चाह रहा है, आज की युवा पीढ़ी को मालूम हो कि EVM से पहले विपक्ष बूथ कैप्चरिंग कर अंधाधुंध बैलेट पर अपने चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाकर जीत जाते थे, इसीलिए विदेशी भीख पर आश्रित विपक्ष EVM का विरोध कर रहा है। राहुल से पूछा जाये कि नेहरू ने हारे हुए मौलाना आज़ाद को विजयी कैसे घोषित करवा, हिन्दू महासभा के विजयी उम्मीदवार विशन सेठ की वोटों को आज़ाद की मिलवाकर हारे हुए आज़ाद को विजयी घोषित करवा दिया। अगर उस समय EVM होती नेहरू को धूल ही चाटनी होती।   

कांग्रेस के राशिद अल्वी ने कहा कि एलन मस्क बड़े आदमी हैं, सबसे अमीर उद्योगपति हैं, उन्होंने EVM पर कुछ बोला है तो ठीक ही होगा। एक भाई ने कहा कि जिस system पर उंगली उठे, उसे बंद कर देना चाहिए। फिर तो गांधी परिवार के कांग्रेस पर कब्जे पर भी उंगली उठती है, उन्हें भी कांग्रेस से बाहर करो।

यानी अमेरिकी मस्क कहे तो ठीक है, BBC कहे मोदी के खिलाफ तो वो भी ठीक है और जो भी विदेशी भारत के खिलाफ बोलते हैं, उनका कहा तो पत्थर की लकीर मान लेते हैं।

अब चुनाव आयोग ने एलन मस्क को चुनौती दी है कि भारत में आकर हमारी EVM को हैक  करके दिखाइए। एक अख़बार के खिलाफ आयोग ने मुकदमा भी दर्ज किया है।

एलन मस्क, कांग्रेस और विपक्ष को इतना भी अहसास नहीं है कि कांग्रेस की सीटें करीब दोगुनी हो गई, सपा की सीट 5 से 37 हो गई और 10-12 दिन तक EVM पर किसी ने सवाल नहीं उठाया। अगर EVM में गड़बड़ होती तो भाजपा की सीट 400 ही होती, 303 से 240 नहीं रहती और कांग्रेस समेत विपक्ष की सीटें न बढ़ती। बस मुंह उठा कर EVM का चरित्र हनन करने से मतलब है।

एलन मस्क को पता नहीं भारत में अनेक लोगों ने EVM में छेड़छाड़ होने का दावा किया और जब चुनाव आयोग ने उन्हें आयोग में आकर छेड़छाड़ करके आरोप साबित करने को कहा तो कोई नहीं कर सका। केजरीवाल का सौरभ भारद्वाज आयोग में जाकर फेल होकर आया। एलन मस्क और कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष को पता है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 40 याचिकाएं लगाईं थी EVM में दोष निकाल कर उसे हटाने के लिए लेकिन सभी याचिकाएं अदालत ने ख़ारिज की और EVM में किसी प्रकार की त्रुटि मानने से मना कर दिया। अब मस्क भारत आएं और चुनाव आयोग की चुनौती स्वीकार करें। चुनाव आयोग को मास्क पर कम से कम 50 करोड़ रूपए मानहानि का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। 

एलन मस्क, यह हो सकता है कि अमेरिका में उपयोग होने वाली Electronic Machines सफल ना हो रही हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी मशीन भी गलत है। भारत Technology में अमेरिका से कम नहीं है और कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि EVM सबसे पहले इंदिरा गांधी के समय में 1982 में शुरू हुई थी।

हम अमेरिका से कितने आगे हैं, एलन मस्क को यह भी पता होना चाहिए। भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आज़ादी मिलते ही मिल गया था जबकि अमेरिका में 1776 में आज़ादी मिलने के बाद 1920 यह अधिकार पहले White Women को मिला यानी 144 वर्ष बाद और अश्वेत महिलाओं को यह अधिकार उसके भी 50 वर्ष के बाद मिला। इसलिए भारत आपसे कहीं पीछे है, तो कहीं बहुत आगे भी है।

मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रही कांग्रेस - आज फिर से EVM का चरित्र हनन कर ही दिया -

सुभाष चन्द्र 

नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने और सरकार का गठन करने के बाद फिर से EVM का रोना याद करा रहा है भारत में हुए पहले चुनाव की। जब रामपुर से हिन्दू महासभा के उम्मीदवार विशन सेठ ने कांग्रेस उम्मीदवार मौलाना आज़ाद को 6000+ वोटों से हराना दिया, सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लब पंत को साम, दाम, दंड भेद अपनाकर चुनाव परिणाम को पलटने का कहा। पंत ने अपने आका के हुकुम करते हारे हुए मौलाना आज़ाद को विजयी घोषित करवा दिया। यह लेख शीर्षक है "जवाहर लाल नेहरू: बूथ कैप्चरिंग का मास्टरमइंड" चुनावों के धांधली करने के कांग्रेस इतिहास को बता रहा है। जिसे विस्तार से निम्न लिंक पर पढ़ा जा सकता है। https://nigamrajendra.blogspot.com/2018/11/blog-post_45.html       

कांग्रेस मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रही है कि बस मोदी सरकार तो जब मर्जी गिर सकती है और फिर हम बैठेंगे सत्ता में। कांग्रेस ने नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने का झांसा देकर अपनी गठबंधन में लाने की कोशिश की लेकिन नीतीश बहकावे में आए नहीं क्योंकि नीतीश कुमार को  तो कांग्रेस ने गठबंधन का संयोजक भी बनाने से मना कर दिया था।

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नीतीश को पता था 4 दिन की चांदनी दिखा कर फिर उसके जीवन में अंधेरा कर देगी सोनिया गांधी जैसा उसकी सास इंदिरा ने किया चरण सिंह के साथ, पति राजीव ने किया चंद्रशेखर के साथ और सीताराम केसरी ने किया देव गौड़ा और गुजराल के साथ।

कांग्रेस के कुनबे में कह रहे हैं 233 लोग हैं, ममता भी इसमें शामिल की हुई है। उसे कैसे शामिल कर सकते हैं क्योंकि वह तो इंडी ठगबंधन छोड़ चुकी है। तब ही तो कांग्रेस TMC के खिलाफ लड़ी बंगाल में। अब ममता PM बनेगी तब ही इनके साथ रहेगी लेकिन न उसे कोई प्रधानमंत्री बनाना चाहता और न राहुल गांधी को, पर फिर भी वह सपना देख रहा है मुंगेरीलाल का कि मोदी की सरकार तो गिर ही जाएगी।

पहली बात तो सरकार कैसे बनाओगे और बनाओगे तो करोड़ों महिलाओं को khata khata khat 1 लाख रूपया कैसे दोगे? यही कारण है कांग्रेस अब सरकार बनाना ही नहीं चाहती।

233 में ममता के 29 सांसद निकाल दो तो इंडी के केवल 204 रह जाते हैं, फिर नीतीश के 12 और नायडू के 16 मिलकर भी 232 बनते हैं। फिर कांग्रेस क्यों भूल जाती है कि जो खेल तुम भाजपा के साथियों के साथ करना चाहते हो, वह भाजपा भी तुम्हारे साथ कर सकती है।

कांग्रेस के बड़े चौधरी खड़गे ने कहा है - “मोदी सरकार तो गलती से बन गई है, ये minority govt है, कभी भी गिर सकती है”। बड़े मियां खरगे साहब आप तो अपना विपक्ष का नेता भी नहीं बना पा रहे हो “गलती से”। जिसे कह रहे हो, राहुल को, कि घोड़ी चढ़ जा, वो 10 दिन बाद भी फैसला नहीं कर पा रहा कि Opposition leader की कुर्सी पर बैठूं या नहीं क्योंकि PM की कुर्सी तो खाली है नहीं; और आज फिर EVM को Black Box कह कर उस पर बदनामी का दाग लगा दिया राहुल गांधी ने। मतलब घूम फिर कर ठीकरा EVM पर ही फोड़ देते हो।

राहुल गांधी तुमसे न हो पायेगा। तुम तो इटली चले जाओ, तुम्हारी ननिहाल है। मम्मी से कहो मेलोनी के साथ तुम्हारा लगन करा दे। वो 47 की है और तुम 54 के। क्या perfect जोड़ी बनेगी, हो सकता है वो तुम्हे इटली का PM बनवा दे जैसे सोनिया भारत का PM बनने के फिराग में थी।

खड़गे की उम्र 81 साल हो गई है। लगता है उन्हें Memory Loss की बीमारी हो गई है।

खरगे तो इतना भी याद नहीं कि 1984 के बाद 10 चुनावों में कांग्रेस की आज तक कभी 240 सीट भी नहीं आई जो इस बार भाजपा की आई लेकिन तुम उसकी सरकार को Minority की सरकार कह रहे हो। 

1991 की नरसिम्हा राव की 232 सीट की सरकार, 2004 और 2009 में मनमोहन सिंह की सरकार जो 145 और 216 सीट पर बनी, वह कैसे Majority की सरकार थी, जब ये सभी सरकारें चली पूरे 5 साल तो मोदी की 240 सीट की सरकार क्यों नहीं चल सकती?

99 सीट से जीत नशे ऐसे झूम गए कि रजत शर्मा पर आरोप लगा दिया रागिनी नाइक ने कि शर्मा ने उन्हें भद्दी गाली दी है। कल दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्डर दिया कि रागिनी, जयराम  रमेश और पवन खेड़ा X से अपनी सारी पोस्ट हटा ले।  रजत शर्मा ने 100 करोड़ का केस ठोका है। सौदा बहुत महंगा पड़ेगा। 

इंडी के तेजस्वी यादव एक वीडियो में बुरी तरह शराब के नशे में बोल रहा है कि ललन सिंह को मोदी जी ने झुनझुना पकड़ा दिया पंचायती राज और पशुपालन मंत्रालय का मज़ाक उड़ा रहा था। ये नशेड़ी देश के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं।

इंडी वालों का ऊपर वाला ही मालिक है। इस लोकसभा चुनाव ने इनका हाजमा ख़राब कर दिया है। 

तर्कहीन याचिकाएं लगाने वाले लोगों और संगठनों पर सुप्रीम कोर्ट लगाम लगाएं और खुद पर भी कंट्रोल करें; वरना इसे सुप्रीम कोर्ट, ऐसे तत्वों और वकीलों की बीच Criminal Nexus माना जाएगा

सुभाष चन्द्र

पिछले महीने 27 अप्रैल को Association for Democratic Reforms (ADR) की EVM और VVPAT के शत प्रतिशत मिलान के लिए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था जिसे लड़ा था प्रशांत भूषण ने। ये सभी लोग किसी तरह भी चुनाव आयोग और मोदी को परेशान करने की कोशिश में लगे हैं।

इस याचिका के ठुकराने के बाद ADR के दिमाग में एक और फितूर पैदा हुआ और उसने प्रशांत भूषण के जरिए ही एक नई याचिका मात्र 15 दिन बाद 10 मई को सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी और ऐसी मांग की जिससे ADR को कुछ लेना देना नहीं है। ADR ने याचिका में कहा कि “चुनाव आयोग को हिदायत दी जाए कि चुनाव के 48 घंटे के भीतर “authenticated data of votes polled” जारी करें।

ADR also sought a direction to provide in the public domain a tabulation of the constituency and polling station-wise figures of voter turnout in absolute numbers and percentage form for the ongoing 2024 Lok Sabha elections.

फिर क्या था सुप्रीम कोर्ट को भी मौका मिल गया चुनाव आयोग का बाजा बजाने का और 17 मई को CJI चंद्रचूड़, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने आयोग को नोटिस जारी करके कहा कि एक हफ्ते में यानी 24 मई तक ADR द्वारा मांगी गई जानकारीके बारे में जानकारी दे  (authenticated records of voter turnout by uploading on its website scanned legible copies of Form 17C Part-I (Account of Votes Recorded) of all polling stations after each phase of polling in the on-going 2024 Lok Sabha elections)

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चुनावों की मारा मारी में चुनाव आयोग को ऐसे ही फालतू मुकदमों में उलझा कर रखने का क्या मकसद हो सकता है आप समझ सकते हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कल हलफनामा दाखिल करके बता दिया कि फॉर्म 17 C में वोटों की जानकारी मांगने का कोई अधिकार नहीं है। इस फॉर्म के आधार पर मतदान का डाटा सार्वजनिक किया गया तो मतदाताओं में भ्रम फ़ैल सकता है (और वही ADR का जैसे लक्ष्य है) क्योंकि इसमें डाकपत्रों की गिनती भी शामिल होगी। आयोग ने यहां तक बताया कि 17 सी में प्रत्येक मतदान केंद्र का रिकार्ड़ होता है और मतदान समाप्त होने के बाद हर प्रत्याशी के एजेंट को उनके हस्ताक्षर लेकर उसकी एक कॉपी दी जाती है।  

इसका मतलब 48 घंटे क्या, वोटिंग ख़त्म होते ही जब सूचना हर प्रत्याशी को दे दी जाती है तो फिर 48 घंटे में डाटा वेबसाइट पर डालने का क्या मतलब है। ये चाहते हैं कि करीब 70 करोड़ वोटरों का डाटा 48 घंटे में वेबसाइट पर डाल दिया जाए और चुनाव आयोग में अफरा तफरी मची रहे।

ऐसी संस्थाएं देश में किसी न किसी तरह अराजकता का माहौल पैदा करना चाहती है और बिना दिमाग लगाए सुप्रीम कोर्ट ऐसी याचिकाओं पर संज्ञान लेकर उनका साथ दे रहा है जो सर्वथा अनुचित है। एक बार मीलॉर्ड को सोचना चाहिए था और ADR से पूछना तो था कि आप को इस तरह की जानकारी से क्या मतलब है और आपकी क्या दिलचस्पी है इसमें, आप क्यों मामा बनने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मीलॉर्ड को तो बस पंचायत बिठानी है।

ADR के लिए कहा गया है कि यह एक गैर राजनीतिक, non-partisan और  non-profit organisation है। हम कैसे यह मान सकते हैं। इस संस्था के funds की जांच जरूरी है और जानना जरूरी है कि पैसा कहां से आता है। प्रशांत भूषण जैसे वकील यदि इसके साथ जुड़े हैं तो इसे किसी तरह गैर राजनीतिक और non-partisan नहीं माना जा सकता। क्या ये संगठन कभी किसी मामले में मोदी सरकार के पक्ष में खड़ा हुआ है, शायद नहीं, इसका लक्ष्य मोदी सरकार से टकराव का रहता है और प्रशांत भूषण की उपस्थिति यह साबित करने के लिए काफी है। 

प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई बंद होनी चाहिए; सुप्रीम कोर्ट खारिज मामले पर बार बार सुनवाई करके समय और पैसा बर्बाद क्यों कर रही है?

सुभाष चन्द्र

अपने 15 अप्रैल के लेख में मैंने लिखा था कि EVM और VVPAT के उपयोग को चुनौती देने वाली प्रशांत भूषण की याचिका दायर करने के लिए उस पर एक करोड़ जुर्माना लगाना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट यह मामला सितंबर, 2023 में खारिज कर चुका है और 10 साल में EVM के खिलाफ 40 याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। फिर किस कारण या दबाव में सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई कर रही है?

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कल सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के सामने पूछने पर  प्रशांत भूषण ने कहा कि उसकी 3 मांगे हैं 

-बैलेट से चुनाव हो;

-vvpat पर्ची मतदाता को मिले और फिर वह उसे मशीन में डाले; और 

-VVPAT मशीन में पारदर्शी शीशा लगाया जाए जो 2017 में मशीन के Design को बदल कर हटा दिया गया था।

अगर बैलेट से चुनाव के लिए कोर्ट मान जाता है तो बाकि दो मांगे स्वतः ही ख़त्म हो जाएंगी। बैलट से चुनाव कराने के लिए उसने जर्मनी का उदहारण दिया जिस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने उसे लताड़ा कि वहां की आबादी 6-7 करोड़ है, हमारे यहां फिर पुरानी व्यवस्था में लौटना संभव नहीं लगता। उस चुनाव में क्या होता था, आप भूल गए लेकिन हमें याद है।

प्रशांत भूषण ने EVM और VVPAT में हेरफेर की आशंका जताई। उसने कहा कि वो यह नहीं कह रहे कि हेर फेर किया गया है, हम कह रहे हैं हेरफेर किया जा सकता है। EVM और VVPAT प्रोग्राम पर based चिप होते हैं और इनमे दुर्भावनापूर्ण चिप डाले जा सकते हैं।

इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा “मानवीय दखल से समस्या हो सकती है, वरना मशीन गलत result नहीं देगी। मानवीय कमजोरियां हो सकती हैं और पूर्वाग्रह हो सकता है।

मतलब साफ़ है कि खुद प्रशांत भूषण मान रहा है कि अभी तक EVM और VVPAT के उपयोग में कोई हेरफेर नहीं हुई है। अगर ऐसा है तो फिर क्या फितूर है दिमाग में। 

भूषण ने दलील दी ज्यादातर लोग EVM पर भरोसा नहीं करते जो एक प्राइवेट poll में बताया गया है। दत्ता ने पूछा आप कैसे उस पर भरोसा कर सकते हैं। ये ऐसे हो गया कि “आप” पार्टी ने सर्वे करा लिया और पाया कि 90% दिल्ली वाले केजरीवाल की गिरफ़्तारी को गलत मानते हैं, तो क्या इस सर्वे को सही मान कर केजरीवाल को छोड़ दिया जाए। प्रशांत भूषण भी तो वामपंथी होने के साथ पुराना “आपिया” ही है और ऐसी ही उलजुलूल बातें करेगा।

प्रशांत भूषण की याचिका पर अदालत ने चुनाव आयोग को मतदान से लेकर मतगणना तक follow की जाने वाली प्रक्रिया, आंकड़े, EVM मशीन VVPAT आदि की सुरक्षा की व्यवस्था के details देने को कहा।

40 याचिकाएं जो रद्द कर चुका है कोर्ट,  उनमे यह सब नहीं बताया गया होगा। अभी एक और याचिका VVPAT के खिलाफ चल रही है। उसके लिए आयोग ने 458 पेज का हलफनामा दाखिल किया है। ऐसे तो चुनाव के समय में आयोग का काम बढ़ता ही जायेगा ।

प्रशांत भूषण की और जस्टिस खन्ना की बात को ध्यान में रख यह देखना चाहिए कि यहां तो बात हेरफेर की तब हो रही है जब मानव और मशीन शामिल है लेकिन जब दोनों तरफ मानव हो तो फिर तो कुछ भी धांधला हो सकता है। मशीन को बिना किसी मानवीय दखल के perfect बताया है खन्ना जी ने। 

प्रशांत भूषण को यह बताना चाहिए कि यदि उसकी दलील पर चला जाए कि हेरफेर हो सकता है तो यह भी हो सकता है।

-पैसे के दम पर प्रशांत भूषण और  सुप्रीम कोर्ट के कई चर्चित दलाल वकील जजों को पैसा खिला कर अपने हक़ में फैसले कराते हैं क्योंकि दोनों तरफ मानव है। 

-पैसे के दम पर तीस्ता के लिए 3 घंटे में 2 बेंच बन गई और उसे जमानत दे दी गई।

-ऐसा भी तो हो सकता है IMA और विदेशी संस्थांए रामदेव को फ़साने के लिए जजों को पैसा देकर रामदेव को बदनाम कर रहे हैं।

कौन PIL दायर कर सकता है और किस विषय पर हो, इस पर पुनर्विचार होना चाहिए क्योंकि PIL एक  उद्योग बन चुका है।