पद्मनाभन मंदिर के सातवें द्वार का क्या है रहस्य? जिस दिन सिद्ध पुरुष द्वार खोलेगा भारत ही नहीं विश्व की आंखे फटी रह जाएंगी ; किसी अन्य द्वारा खोलते ही आ जाएगी प्रलय


केरल के तिरुअनन्तपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर अपने रहस्य और अथाह खजाने की वजह से दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे भारत का सबसे अमीर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में कई गुप्त तहखाने बने हैं, जिसमें से कुछ को खोला जा चुका है और उसमें से अरबों-खरबों का खजाना भी मिला है, लेकिन इसका सातवां दरवाजा आज तक खोला नहीं गया है या यूं कहें कि कोई भी उसे खोल नहीं पाता है। बताया जाता है कि, इसके पीछे एक गहरा रहस्य छुपा हुआ है। 
पद्मनाभ स्वामी मंदिर का सांतवा दरवाजा आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है कि आखिर इस दरवाजे के पीछे क्या है ?  क्या सच में इस दरवाजे के खुलने पर मंदिर पानी में डूब जायेगा? आखिर दरवाजे पर नाग की डरावनी तस्वीर क्यों बनायी गयी है ? सातवें दरवाजे पर बनी नाग की तस्वीर के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो जरुर होगा। 400 साल पहले राजा के कारीगरों ने धन की सुरक्षा को लेकर ही इस दरवाजे का निर्माण किया होगा लेकिन इस दरवाजे का रहस्य कब खत्म होगा यह आने वाले समय पर निर्भर करता है।

कहते है कि 16वीं सदी का ’सिद्ध पुरूष’ ही पद्मनाभन मंदिर के सातवें द्वार को खोल सकता है। यह वह मन्दिर है जिसका कमरा खुलवाने के यूपीए सरकार स्वर्ण लेने के लिए कोर्ट पहुँच गयी थी। लेकिन भगवान विष्णु का चमत्कार देखिए कांग्रेस शासित यूपीए सरकार को मुंह लटकाना पड़ा। कहते हैं कि इस महान मन्दिर के एक ही कमरे में इतना स्वर्ण है दुनिया की आंखे फटी रह जाएँगी। लेकिन सिद्ध पुरुष ही इस कमरे को खोल सकता है। किसी अन्य ने अगर कोशिश की तो भगवान पद्मनाभन के प्रकोप से बच नहीं पाएगा।
भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक पद्मनाभस्वामी मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यह प्रमुख मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। केरल के तिरुवनन्तपुरम में स्थित इस अद्भुत मंदिर के दर्शन करने लोग देश-विदेश से आते हैं। मंदिर की विशालता व इसकी सुंदरता लोगों को आपनी ओर आकर्षित करती है।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है। जिसमें भगवान विष्णु शेषनाग पर श्यन मुद्रा में स्थापित हैं। श्री विष्णु का रहस्यमय मंदिर विश्वभर का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। मंदिर की तुलना स्विचज़रलैंड की संपत्ति के बराबर होती है। क्योंकि मंदिर की संपत्ति करीब 1,32,000 करोड़ के लगभग है।
पद्मनाभ स्वामी मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर के पुनर्निर्माण में अनेक महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा गया है। सर्वप्रथम इसकी भव्यता को आधार बनाया गया मंदिर को विशाल रूप में निर्मित किया गया जिसमें उसका शिल्प सौंदर्य सभी को प्रभावित करता है। मंदिर के निर्माण में द्रविड़ एवं केरल शैली का मिला जुला प्रयोग देखा जा सकता है।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रमुख देवता की प्रतिमा अपने निर्माण के लिए जानी जाती है जिसमें 12008 शालिग्राम हैं जिन्हें नेपाल की नदी गंधकी के किनारों से लाया गया था। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का गर्भगृह एक चट्टान पर स्थित है और मुख्य प्रतिमा जो लगभग 18 फीट लंबी है, को अलग-अलग दरवाजों से देखा जा सकता है। पहले दरवाजे से सिर और सीना देखा जा सकता है जबकि दूसरे दरवाजे से हाथ और तीसरे दरवाजे से पैर देखे जा सकते हैं।
मंदिर का गोपुरम द्रविड़ शैली में बना हुआ है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का अदभुत उदाहरण है। मंदिर का परिसर बहुत विशाल है जो कि सात मंजिला ऊंचा है गोपुरम को कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है। मंदिर के पास ही सरोवर भी है जो 'पद्मतीर्थ कुलम' के नाम से जाना जाता है।
मंदिर का रहस्य और संपत्ति




मंदिर की रहस्यमय कहानियों के पीछे कई बड़े राज़ छुपे हैं जिन्हें जानकर सभी हैरान हो जाते हैं। मंदिर का उल्लेख ग्रंथों में भी आता है। श्री विष्णु का पद्मनाभ मंदिर 18वीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था। त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी दौलत पद्मनाभ मंदिर को सौंप दिया था और उसके बाद पूरे शाही परिवार ने खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया था।
वर्तमान समय में पद्मनाभ मंदिर की देखरेख शाही परिवार के अधीनस्थ एक प्राइवेट ट्रस्ट करता है। लेकिन भारत के इस प्रसिद्ध मंदिर की संपत्ति और रहस्य को देखते हुए कई बार जनता ने मंदिर के द्वार खोलने की बात कई है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसके द्वार खोले भी गए हैं। अब तक मंदिर के 6 द्वार खोले गए हैं,
जिनमें करीब 1,32,000 करोड़ की संपत्ति मिली है। परंतु मंदिर का सांतवा द्वार अब तक रहस्य का कारण बना हुआ है। पूरी दुनिया की नजरें इस द्वार पर टीकी हुई है। क्योंकि मंदिर का द्वार काफी रहस्यमय है लेकिन क्यों आइए आपको बताते हैं...
पद्मनाभ मंदिर के सांतवे द्वार को खोलने व उसके खजाने को खोलने की बात होती है, तो एक भय व अनहोनी की कहानी सामने आ जाती हैं। क्योंकि मंदिर के सांतवें द्वार पर कोई ताला नहीं लगा है ना ही को कुंड़ी लगी है। बल्कि सांपों के प्रतिबिंब ही इस द्वार की रक्षा करते हैं और इस गेट को खोलने के लिए किसी कुंजी की ज़रूरत नहीं पड़ती है,
इसे मंत्रोच्चारण की मदद से ही खोल सकते हैं। यह एक गुप्त गृह है, जिसके द्वार को खोलने के लिए 16वीं सदी के सिद्ध पुरूष, योगी या फ़िर कोई तपस्वी की आवश्यकता है। गरुड़ मंत्र की मदद से ही इस द्वार को खोला जा सकता है। क्योंकि नियमों के अनुसार गरुड़ मंत्र का स्पष्ट तरीके से उच्चारण करने वाला सिद्ध पुरूष ही इस गेट को खोल पाएगा। अगर उच्चारण सही से नहीं किया गया, तो उसकी मृत्यु हो जाती है।
मंदिर के सातवें द्वार के खुलने पर आ सकता है प्रलय





सातवें दरवाजे को खोलने के बारे में देश का उच्चतम न्यायालय फैसला करने वाला है। वहीं मंदिर के बारे में 90 वर्षीय त्रावणकोर राजपरिवार के प्रमुख तिरुनल मार्तंड वर्मा का कहना है की मंदिर के सातवें द्वार के खुलने का मतलब देश में प्रलय आना है।
हमारी कोशिश है कि इसे रहस्य ही रहने दिया जाए। इस मंदिर से मिली संपत्ति को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वाकई यह काफ़ी रहस्यमयी मंदिर है। कई लोगों का मानना है कि सभी संपतियों को जनता की भलाई के कामों में लगा देना चाहिए, जो काफ़ी हद तक सही भी है।
31 जुलाई 2011 को केरल हाई कोर्ट के आदेश पर पद्मनाभ स्वामी मंदिर के गर्भ गृह के दरवाज़े को खोल दिया गया। मंदिर के गर्भ गृह में कुल 7 दरवाज़े थे। 6 दरवाजों को एक एक कर खोला गया लेकिन आखिरी दरवाज़ा नहीं खोला जा सका, ऐसा बताया जाता है कि अंतिम दरवाज़े के खोलने पर मंदिर पूरी तरह से जमीन में धंस सकता था या फिर पूरा मंदिर पानी में डूब सकता था। आखिरी दरवाज़े को मंदिर की सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है क्योंकि उस दरवाज़े पर नागों के चित्र अंतिक है जो उसकी रक्षा करते है। मंदिर के अंदर जो स्वर्ण भंडार मिला उसमें करीब 7 फीट लंबी एक सोने की माला, सोने के वस्त्र और बोरियों में भरा सोने का सिक्का व हीरे पाये गये। मंदिर से करीब 1 हजार किलोग्राम सोना पाया गया जिसकी कुल कीमत 1 लाख 20 हजार करोड़ आकी गयी थी लेकिन यह ऐतिहासिक सोना और आभूषण थे तो इनकी कीमत बाजार में और अधिक हो सकती है।
हिंद महासागर के तट पर बसे केरल राज्य में पद्मनाभ स्वामी का मंदिर है जो अपनी आस्था और धनी होने के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां सिर्फ हिन्दू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते है और उनके लिए भी परिधान निश्चित है। हिन्दू पुरुष को सफेद धोती और स्त्रियों को साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर में भगवान विष्णु की स्थापना की गयी है और उनका ही नाम पद्मनाभ है जिसकी सभी लोग पूजा करते है। मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति के ठीक नीचे बने गर्भ गृह में मंदिर का खजाना रखा हुआ था। केरल हाई कोर्ट के आदेश पर गर्भ गृह के सभी 6 दरवाज़ों को तो खोल दिया गया लेकिन आखिरी का 7वां दरवाज़ा नहीं खोला जा सका क्योंकि सर्वे करने वालों ने ऐसा अंदेशा जताया कि इस दरवाज़े को मंदिर और उसके धन की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। आखिरी दरवाज़े के अंदर से पानी की आवाज़ें भी आ रही है जिससे यह अंदेशा लगाया गया कि अगर यह दरवाज़ा खुलेगा तो पूरे मंदिर में पानी भर जायेगा और मंदिर डूब जायेगा।
आज से करीब 400 साल पूर्व राजा मारतंड वर्मा जिन्होनें युद्ध से आस पास के सभी राज्यों पर विजय प्राप्त कर ली और राज्य को व्यावसायिक बना दिया जिससे दूर दूर से व्यापारी यहां आयुर्वेदिक औषधि, मासाले और सूखे मेवे खरीदने आते थे  और इनके दाम के बदले सोना, चाँदी और हीरे देते थे जिससे राजा के पास जल्द ही बहुत अधिक संपत्ति हो गयी। सन 1750 के करीब राजा मारतंड वर्मा ने धन की सुरक्षा को लेकर एक मंदिर का निर्माण कराया और उसके गर्भ गृह में सारा धन जमा कर दिया। राजा मारतंड ने मंदिर में भगवान विष्णु की स्थापना की और खुद को भगवान का भक्त भी घोषित कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि राजा मार्तंड के स्वप्न में खुद भगवान विष्णु आये थे और उन्हे ऐसा करने के लिए कहा था।
।। जय तिरुपति बालाजी वेंकटेश्वराय ।।

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