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श्रद्धालुओं का दान और सिस्टम के भीतर सेंध पर शोर मचाने को क्या मस्जिदों और दरगाहों में घोटाला नहीं दिखता?

 
मीडिया को अपनी TRP की चिंता तो नेताओं को अपने वोटबैंक की। पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर में चढ़ावे में हुई चोरी पर मीडिया और विपक्ष ने फर्श से लेकर अर्श तक को सर पर उठा रखा है। इनमें से कोई ईमानदारी से बताए क्या किसी मजहबी जगह पर घोटाले नहीं। दिल्ली के ही एक स्थानीय मुस्लिम ने कई बार मस्जिदों और दरगाहों में हो रहे घोटाले को सरकार और वक़्फ़ बोर्ड के सामने लाने की कोशिश की जबकि वक़्फ़ बोर्ड तो क्या सभी जानते हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं। राममन्दिर की तरह जिस दिन दूसरे मजहबों पर हाथ डाला सबकी आंखें फटी रह जाएँगी। चोरी चोरी ही है चाहे वह मंदिर में हो या मस्जिद में।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हैंडलिंग में कथित गड़बड़ी का मामला अब जाँच के सबसे अहम दौर में पहुँच गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर इस मामले में FIR दर्ज हुई है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती, रखरखाव और उससे जुड़ी व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हुईं।

यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद यूपी सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया। SIT ने 23 जून को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट के दो दिन बाद कार्रवाई तेज हुई और मंदिर से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपितों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। इस रिपोर्ट में जानेंगे कि ये 8 लोग कौन हैं इन पर क्या आरोप हैं।

                                                            FIR की कॉपी का एक हिस्सा

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित चेहरा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जाता है और VHP के कारसेवकपुरम से भी जुड़ा रहा है। बताया गया है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में उसका हस्तक्षेप रहता था और दानपात्रों की निगरानी से लेकर उन्हें बेसमेंट तक पहुँचाने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका थी।

आरोप है कि दानपात्रों की चाबियाँ भी उसी के पास रहती थीं और ट्रस्ट के लोगों से करीबी होने के कारण वह मनमाने तरीके से काम करता था। FIR और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी शुरुआती चरण में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी हुई और उससे अयोध्या व आसपास के जिलों में संपत्तियाँ बनाने के आरोप लगे। हालाँकि, टिन्नू यादव ने कैश काउंटिंग में अपनी भूमिका से इनकार किया है और आरोपों के पीछे कुछ ‘जलने वाले लोगों‘ को जिम्मेदार बताया है।

रामशंकर मिश्रा

रामशंकर मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम से जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर दूसरे कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है। यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने बेटे अनुकल्प मिश्रा और दामाद लवकुश मिश्रा को भी चढ़ावा गिनने के काम में लगवाया।

पुलिस के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रामशंकर मिश्रा अन्य आरोपितों के साथ मिलकर दान की रकम में कथित हेराफेरी करते थे और कैश सॉर्टिंग प्रक्रिया के दौरान CCTV फुटेज में भी दिखे। जाँच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने तय वित्तीय प्रक्रिया को दरकिनार करने में भूमिका निभाई और लंबे समय तक कथित गड़बड़ी को आसान बनाया।

अनुकल्प मिश्रा

अनुकल्प मिश्रा, रामशंकर मिश्र का बेटा है और वह भी दान की रकम गिनने और संभालने की प्रक्रिया में शामिल था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र के बसावन गाँव का निवासी है। उसका संबंध ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी बताया गया है।

अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावा गिनने के काम में लगती थी। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि कैश काउंटिंग के दौरान रकम में कथित हेराफेरी की गई और अनुकल्प के घर से चोरी की रकम बरामद होने का दावा भी किया गया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि CCTV फुटेज और बरामदगी के आधार पर उसकी भूमिका की जाँच की जा रही है।

लवकुश मिश्रा

लवकुश मिश्रा भी दान की रकम गिनने वाली टीम का हिस्सा था। आरोप है कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के बाद उसके निपटान यानी ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी लवकुश पर थी। कहा गया है कि उसने मंदिर से चोरी कर करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है।

शुरुआती जाँच में उसके घर से रकम बरामद होने के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्ट्स में उसके घर से करीब 12 लाख रुपए कैश मिलने की बात कही गई है। जाँच एजेंसियाँ इस रकम के स्रोत की जाँच कर रही हैं और आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा के साथ मिलकर दान की रकम की हेराफेरी में सक्रिय रूप से शामिल था।

अविनाश शुक्ला

अविनाश शुक्ला को मंदिर की व्यवस्था और दान की रकम से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति बताया गया है। रिपोर्ट्स में उसे मंदिर का अटेंडेंट या काउंटिंग टीम से जुड़ा सदस्य बताया गया है। आरोप है कि वह दान की रकम को सुरक्षित तरीके से काउंटिंग रूम तक पहुँचाने और गिनती की प्रक्रिया में शामिल था।

पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह उस कथित सिंडिकेट का अहम सदस्य था, जिस पर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी का आरोप है। उसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपए बरामद होने की चर्चा भी रिपोर्ट्स में सामने आई है। उस पर दान की रकम के कथित दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने के आरोप लगाए गए हैं।

मनीष कुमार यादव

मनीष कुमार यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह टिन्नू यादव के छोटे भाई बलराम यादव का बेटा है। पुलिस के हवाले से कहा गया है कि मनीष मंदिर में दान की रकम गिनने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसके घर से भी चोरी की रकम बरामद हुई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान उसके घर से करीब 36 लाख रुपए नकद मिलने का दावा किया गया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम कहाँ से आई और इसका संबंध कथित गबन से किस तरह जुड़ता है।

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पूर्व बैंक कर्मचारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें राम मंदिर में कैश काउंटिंग स्टाफ का प्रभारी बनाया गया था। उनकी जिम्मेदारी दान की रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों की निगरानी और पूरी काउंटिंग प्रक्रिया को देखना था। बैंकिंग पृष्ठभूमि के कारण उन्हें इस काम की निगरानी के लिए रखा गया था।

FIR और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर निगरानी में कथित लापरवाही और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप हैं। जाँच एजेंसियाँ यह देख रही हैं कि उनके प्रभारी रहते हुए दान की रकम की गिनती में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।

करुणेश पांडेय

करुणेश पांडेय पर दान की रकम से जुड़ी रसीदों और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के साथ पूरी साजिश में शामिल था। जाँच एजेंसियों का दावा है कि वह श्रद्धालुओं के चढ़ावे को संभालने वाली कोर टीम का हिस्सा थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी जिम्मेदारी दान की रकम को गिनती वाले कमरे तक पहुँचाने से भी जुड़ी थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने रकम और रिकॉर्ड की हेराफेरी में भूमिका निभाई और कथित गड़बड़ी से संपत्ति अर्जित की।

भारत में रहते हुए भी पाकिस्तानी बॉस को रिपोर्ट कर रही गौरव गोगोई की पत्नी, भेजी कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट: जानिए- असम पुलिस की SIT ने क्या-क्या बताया; बेटा हिन्दू लेकिन लड़की ईसाई

                                                गौरव गोगोई और पत्नी एलिजाबेथ ( साभार-ABP)
कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई के पाकिस्तानी लिंक की जाँच असम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने पूरी कर ली है। रिपोर्ट को 8 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक कर दी। इसमें लोकसभा में विपक्ष के डिप्टी लीडर और उनकी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए गए।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरा केस केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं, क्योंकि असम पुलिस के पास सीमित अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि ये लिंक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और इनकी विस्तृत जाँच की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी जाँच में जो खुलासे हुए हैं वे बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मौजूदा सांसद का शामिल होना, मामले को ज्यादा ‘गंभीर’ बनाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोगोई ने 2015 में नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में एक युवक के साथ जाकर हाई कमिश्नर अब्दुल बासित से मुलाकात की थी।

सीएम के मुताबिक, मैं सिंगापुर में था जब मुझे यह तस्वीर मिली कि हमारे असम के सांसद एक युवक के साथ पाकिस्तानी दूतावास गए थे। उन्होंने कहा कि आज तक कॉन्ग्रेस का भी कोई नेता गोगोई की तरह किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तानी दूतावास नहीं गया।

सरमा के मुताबिक, एलिजाबेथ पहले US के पूर्व सीनेटर टॉम उडाल की सहयोगी थीं, जो भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े हैं। ये लोग मोदी सरकार समेत दुनिया भर में राष्ट्रवादी सरकारों को गिराना चाहते हैं।

सरमा ने इस मीटिंग की एक वायरल तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में लगा कि तस्वीर फोटोशॉप की हुई हैं, लेकिन बाद में पता चला कि यह तस्वीर असली थी। बताया जाता है कि इसके बाद अब्दुल बासित ने असम का दौरा किया, जो कोई इत्तेफाक नहीं था।

उन्होंने कहा कि एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के ‘संबंधों’ का भी उन्हें पता चला। जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, एलिजाबेथ ने 18 मार्च, 2011 से 17 मार्च, 2012 तक पाकिस्तान में LEAD पाकिस्तान नाम के एक पाकिस्तानी संगठन के लिए काम किया। इस दौरान, कथित तौर पर उनके अली तौकीर शेख के साथ करीबी रिश्ते बन गए, जिन्हें CM सरमा ने पाकिस्तानी आर्मी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और देश के प्लानिंग कमीशन से कनेक्शन रखने वाला ‘पाकिस्तानी एजेंट’ बताया।

सरमा के मुताबिक, शेख सिर्फ पर्यावरणविद नहीं था, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति था जिसने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ‘भारत विरोध’ को बढ़ावा दिया। खासकर सिंधु जल संधि और दूसरे भारत-पाकिस्तान के झगड़ों को लेकर भारत की छवि धुमिल करने की कोशिश की। शेख ने 2010 और 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत का दौरा किया, जिससे भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी भूमिका का शक जताया गया। सीएम सरमा ने कहा कि UPA सरकार ने उन्हें भारत आने से नहीं रोका, जबकि उनके भारत विरोधी कमेंट्स के बारे में सबको पता था।

सरमा ने SIT रिपोर्ट से कई चौंकाने वाली बातें बताईं, जिसमें दावा किया गया कि एलिज़ाबेथ का भारत ट्रांसफर हो गया था, लेकिन उनके ट्रांसफर के बाद भी उन्हें पाकिस्तानी फर्म से सैलरी मिलती रही। इतना ही नहीं, ट्रांसफर से एक साल पहले उन्हें भारत आने का अपॉइंटमेंट लेटर जारी किया गया था।

SIT जाँच के मुताबिक, LEAD इंडिया को LEAD पाकिस्तान के तहत लाया गया, ताकि एलिजाबेथ की सैलरी पाकिस्तान से भारत ट्रांसफर की जा सके।

सरमा ने कहा कि LEAD पाकिस्तान सीधे एलिजाबेथ को सैलरी नहीं भेज सकता था, क्योंकि FCRA के तहत फंड ट्रांसफर सिर्फ भारतीयों को की जा सकती है और वह भारतीय नागरिक नहीं हैं। इसलिए उनकी सैलरी देने के लिए एक भारतीय संस्था LEAD इंडिया को फंड भेजा जाता था।

एलिज़ाबेथ कोलबर्न गोगोई, लीड इंडिया में भावना लूथरा के अंडर काम करती थीं, जिनसे SIT ने इस केस के सिलसिले में पूछताछ की थी। लीड इंडिया के फाइनेंशियल रिकॉर्ड की जाँच से पता चला कि LEAD इंडिया को ऑर्गनाइज़ेशनल काम के नाम पर LEAD पाकिस्तान से फंड मिला था। असल में यह पैसा गोगोई की सैलरी के लिए था।

सरमा ने कहा कि एलिजाबेथ के पाकिस्तान में एक्टिव बैंक अकाउंट थे, लेकिन उसने SIT को अकाउंट की डिटेल्स बताने से मना कर दिया। एक और चौंकाने वाली बात यह थी कि उसकी सैलरी भारत में उसके सीनियर से बहुत ज़्यादा थी। जहाँ उसे ₹2,50,000 मिलते थे, वहीं भावना लूथरा की सैलरी ₹50,000 थी।

जाँच के अनुसार, गोगोई को FCRA के ज़रिए पाकिस्तान से कुल ₹82.41 लाख मिले। LEAD इंडिया को LEAD पाकिस्तान से ₹63.48 लाख मिले, जबकि सितंबर 2012 से नवंबर 2014 तक कुल ₹91.27 लाख मिले। इसमें से 90% रकम अकेले गौरव गोगोई की पत्नी को मिली।

इससे यह साफ हो जाता है कि LEAD इंडिया पूरी तरह से LEAD पाकिस्तान के अंडर था, यह एक अजीब अरेंजमेंट है क्योंकि आम तौर पर, इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन की कंट्री यूनिट्स का रैंक और स्टेटस बराबर होता है, और उन्हें रीजनल/ग्लोबल हेड्स चलाते हैं। लेकिन इस मामले में, एक लोकसभा MP की पत्नी पाकिस्तान के सीधे कंट्रोल वाले ऑर्गनाइज़ेशन के अंडर काम करती थी। सीएम ने इसे गंभीर मामला बताया।

जाँच के दौरान SIT ने यह एग्रीमेंट हाथ लगी। CM सरमा के मुताबिक, जब एलिजाबेथ पाकिस्तान से इंडिया ट्रांसफर हुई, तो वह इंडिया में काम करने वाली LEAD पाकिस्तान की ‘शैडो एम्प्लॉई’ बनी रही। उन्होंने कहा कि SIT ने LEAD इंडिया ऑफिस से पाकिस्तान से इंडिया में पैसे के फ्लो को दिखाने वाले डॉक्यूमेंट्स ज़ब्त किए हैं, और भावना लूथरा ने भी इसकी पुष्टि की है।

सरमा ने एक और सनसनीखेज आरोप लगाया कि एलिजाबेथ ने भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान को दी। इसमें शेख को भेजा गया 50 पेज का एक कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट भी शामिल है। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के सोर्स का जिक्र था। रिपोर्ट को कॉन्फिडेंशियल मार्क किया गया था। यह ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के सेक्शन 2 का सीधा उल्लंघन है।

पूछताछ के दौरान एलिजाबेथ ने माना कि उसने रिपोर्ट लिखी थी। CM के मुताबिक रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह है जिसमें एलिजाबेथ पर लो रिस्क, लो विजिबिलिटी रणनीति को बढ़ावा देने का आरोप है। इस रणनीति के तहत पाकिस्तानी एजेंटों को सलाह दी गई थी कि वे केंद्र सरकार के बजाय राज्य सरकारों और क्षेत्रीय राजनीतिक तनावों का फायदा उठाएँ। उन्होंने लिखा था कि PM मोदी के राज में केंद्र और राज्यों के बीच तनाव बढ़ेगा।

जब वह LEAD इंडिया में काम कर रही थीं, तो 6 बार इस्लामाबाद गईं। LEAD इंडिया छोड़ने और ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट में जुड़ने के बाद तीन बार फिर पाकिस्तान गईं। CM सरमा के मुताबिक, हर बार उन्होंने फ्लाइट के बजाय अटारी बॉर्डर के रास्ते का इस्तेमाल किया। SIT के मुताबिक, LEAD इंडिया की हेड भावना लूथरा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि एलिजाबेथ पाकिस्तान क्यों गईं।

SIT का एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई का खुलासा

  • सीनेटर टॉम उडाल के जरिए जॉर्ज सोरोस से लिंक
  • अली तौकीर शेख के अंडर LEAD पाकिस्तान में नौकरी
  • पाकिस्तानी बैंक अकाउंट की जानकारी देने से मना कर दिया
  • LEAD इंडिया के साथ पहले से तय नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट (जॉइन करने से 18 महीने पहले जारी किया गया)
  • भारत में एंट्री आसान बनाने के लिए ‘शैडो नौकरी’ का इंतजाम
  • रिपोर्टिंग मैनेजर से 500% ज्यादा सैलरी और FCRA का उल्लंघन
  • पाकिस्तान से फंडिंग का सोर्स छिपाया
  • LEAD इंडिया मैनेजमेंट की तरफ से कोई निगरानी नहीं, सीधे पाकिस्तान को रिपोर्ट की गई
  • पाकिस्तान को कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट भेजना (5 अगस्त, 2014)
  • रिपोर्ट में सीक्रेट IB कम्युनिकेशन का जिक्र था
  • पाकिस्तानी एक्टर्स के लिए ‘लो रिस्क लो विज़िबिलिटी’ स्ट्रैटेजी की वकालत की गई
  • राज्य-लेवल पर बातचीत करने और केंद्र सरकार को बायपास करने की सलाह दी गई
  • खुफिया रिपोर्ट में केंद्र-राज्य के राजनीतिक तनाव का फायदा उठाया गया
  • अली तौकीर शेख के साथ नौकरी से पहले एक साथ 3 बार यात्रा
  • LEAD इंडिया में रहते हुए पाकिस्तान की 6 बार बिना इजाजत दौरा
  • ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट जॉइन करने के बाद पाकिस्तान के 3 और दौरे
मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई के बारे में भी बात की और कहा कि 2013 में अपने पहले लोकसभा चुनाव जीतने से 5 महीने पहले, गोगोई इजरायल की यात्रा के दौरान अपना पासपोर्ट खो जाने के बाद ज़मीनी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गए थे। CM सरमा ने पाकिस्तान पहुँचने पर गोगोई के सिंगल एंट्री वीजा को मल्टीपल-एंट्री में अपग्रेड करने और बॉर्डर पर झड़पों के बीच पाकिस्तानी शहरों में ISI के आकाओं से मुलाकात का आरोप लगाया।
CM के मुताबिक, गोगोई का वीजा सिर्फ लाहौर के लिए था, लेकिन पाकिस्तान पहुँचने के बाद, उनके वीजा को इस्लामाबाद और कराची तक के लिए बढ़ा दिया गया। यह एक्सटेंशन पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा लिखे गए एक लेटर के आधार पर किया गया था। CM सरमा ने कहा कि SIT ने वीजा लोकेशन बढ़ाने के लिए मंजूरी दिखाने वाला पासपोर्ट हासिल कर लिया है।

CM के मुताबिक, पाकिस्तान जाने के बाद गोगोई की पर्सनैलिटी पूरी तरह बदल गई और उन्होंने दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में न्यूक्लियर पावर प्लांट, यूरेनियम रिज़र्व, बॉर्डर सिक्योरिटी, डिफेंस हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, एयर पावर, घरेलू हथियार बनाने, जासूसी जैसे कॉन्फिडेंशियल मामलों से जुड़े पार्लियामेंट्री सवाल उठाए। उन्होंने नेशनल वॉटर मिशन स्ट्रेटेजी पर भी सवाल पूछे, जो एलिजाबेथ के काम के एरिया से जुड़ा मामला था।
CM ने एक इंटरव्यू का वीडियो क्लिप भी दिखाया, जिसमें गौरव गोगोई ने कहा था कि वह पाकिस्तान इसलिए गए थे क्योंकि उनकी पत्नी वहाँ काम कर रही थीं, लेकिन CM सरमा ने बताया कि उनकी पत्नी का उनके दौरे से एक साल पहले LEAD इंडिया में ट्रांसफर हो गया था।
हालाँकि गौरव गोगोई की बेटी ब्रिटिश नागरिक है, क्योंकि उसका जन्म लंदन में हुआ था। CM सरमा के मुताबिक उन्होंने अपने भारत में जन्मे बेटे का इंडियन पासपोर्ट सरेंडर कर दिया। उन्होंने दिल्ली में रीजनल पासपोर्ट द्वारा जारी किया गया सरेंडर सर्टिफिकेट दिखाया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट 12 मई 2022 को सरेंडर किया गया था। CM सरमा ने इसे बहुत अफसोस की बात बताया कि असम के पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे ने अपने बेटे का इंडियन पासपोर्ट सरेंडर कर दिया।
CM ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि जब बेटे कबीर गोगोई के पास इंडियन पासपोर्ट था, तो उसका धर्म हिंदू लिखा था, लेकिन उसके ब्रिटिश पासपोर्ट में किसी धर्म का जिक्र नहीं है। दूसरी तरफ बेटी माया गोगोई के ब्रिटिश पासपोर्ट में उसका धर्म क्रिश्चियन लिखा है।
CM सरमा ने कहा कि उनके बेटे का ईसाई में धर्मांतरण हो रहा है और गौरव गोगोई अब अपने ही परिवार में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं।
हिमंता सरमा ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा, “SIT ने सबूत दिया है कि तीन लोगों का पाकिस्तान से सीधा लिंक है— अली तौकीर शेख, एलिजाबेथ गोगोई और गौरव गोगोई। SIT रिपोर्ट देखने के बाद हमारे कैबिनेट मंत्री भी हैरान रह गए।”
उन्होंने आगे कहा कि शुरू में असम पुलिस की CID जाँच कर रही थी। उसमें जब गंभीरता का अंदाजा लगा तो इंटरपोल की मदद की जरूरत पड़ी और असम पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्लासिफाइड डेटा तक पहुँच की जरूरत थी। कैबिनेट ने 7 फरवरी को रिपोर्ट पर चर्चा की। कैबिनेट ने कॉन्फिडेंशियल बातों को छोड़कर इसके कुछ हिस्से को बताने की मंजूरी दी। कैबिनेट ने आगे की जाँच के लिए रिपोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी सवाल उठाया है कि गौरव गोगोई से शादी के इतने साल बाद भी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई ने अपना UK वीजा क्यों रखा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि उनके बच्चे भी ब्रिटिश नागरिक क्यों हैं और भारतीय नागरिकता के लिए कोई आवेदन क्यों नहीं किया गया है।