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अयोध्या राममन्दिर चढ़ावा : चोरों के घर बाबा के बुलडोज़र तैयार : 20000 रूपए की नौकरी, राम मंदिर में चोरी… लवकुश ने चंदे के पैसों से खड़ा कर दिया 1.5 करोड़ रूपए का आलीशान महल

     मंदिर से चंदा चोरी करके लवकुश ने बनाया करोड़ों का महल, अब चलेगा बुलडोजर (फोटो साभार : X_@Bhupend29375158)
प्रभु श्रीराम के चढ़ावे की चोरी करने वालों को यह सोंचना था कि उत्तर प्रदेश में अब मुलायम सिंह/अखिलेश यादव की नहीं योगी आदित्यनाथ की सरकार है। जहां अपराध भी जितनी मुस्तैदी से होता है उसी मुस्तैदी से योगी का बुलडोज़र भी हरकत में आने को तड़पने लगते हैं। चोर खेल तो खेल गए लेकिन प्रभु श्रीराम के प्रकोप से नहीं बच सकते। प्रभु ने सैकड़ों वर्ष संघर्ष किया। अब उनको भव्य स्थान मिलने पर जो चढ़ावा आया उसमे चोरी। कोई चोर और इनके आका किसी भूल में नहीं रहे। प्रभु जब अपने आशीर्वाद से देते हैं तो झोलियां छोटी पड़ जाती हैं, लेकिन छल से उनके भंडारे को लूटने वालों(किसी बीमारी, बेटी की शादी या फिर किसी असहाय स्थित आदि में कोई सहायता नहीं मिलने पर स्थिति ठीक होने पर वापस करने की शर्त पर क्षमा) को क्षमा नहीं दंड देते हैं। 

चोरों को 80 के दशक में संजीव कुमार की बहुचर्चित फिल्म "यही है जिन्दगी" में घर के मन्दिर से शर्त के साथ चोरी करने पर प्रभु किस रूप में वापस लेते हैं प्राणी को पता तक नहीं होता। दूसरे, आज सनातन विरोधियों की क्या हालत हो रही है, उसे देख कर भी अगर किसी की आंखें नहीं खुलती उस हालत में कोई कुछ नहीं कर सकता।       

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपित लवकुश मिश्रा पर अब प्रशासन का बड़ा हंटर चलने वाला है। लवकुश मिश्रा की पत्नी के नाम पर बन रहे एक करोड़ से ज्यादा के आलीशान मकान को अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ढहाने को नोटिस थमा दिया है।

परिवार के पास जवाब देने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय मिला है, वरना मकान पर सीधे बुलडोजर चला दिया जाएगा। राम मंदिर में हुए इस महा-घोटाले के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंदर भी आपसी लड़ाई शुरू हो गई है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने खुलकर इस पर नाराजगी जताई है।

महंत दिनेंद्र ने इसके लिए सीधे तौर पर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल राव राम परंपरा को नहीं मानते हैं और उन्हीं की लापरवाही के कारण इतनी बड़ी चोरी हुई।

20 हजार की नौकरी और डेढ़ करोड़ का निवेश

चोरी के आरोपित लवकुश मिश्रा की असलियत देखकर हर कोई हैरान है। वह महज 20 हजार रुपए की नौकरी करता था। लेकिन उसने अयोध्या के शहादतगंज इलाके में जयपुरिया स्कूल के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपए का निवेश कर डाला। उसने अक्टूबर 2025 में अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर 25 लाख रुपए की जमीन खरीदी थी। इसके बाद उसने वहाँ बड़ी तेजी से आलीशान मकान बनवाना शुरू कर दिया।

पड़ोसियों के मुताबिक लवकुश इस मकान को बनाने में अब तक 80 से 90 लाख रुपए पानी की तरह बहा चुका है। यह तीन मंजिला मकान अगले 3-4 महीनों में बनकर तैयार होने वाला था। इस मकान के पहले फ्लोर पर एक बड़ा किचन, चार कमरे और बकायदा लिफ्ट लगाने की जगह छोड़ी गई थी। दूसरे फ्लोर पर पाँच कमरे बनाए जा रहे थे और तीसरे फ्लोर को भी खड़ा करने की पूरी तैयारी थी।

पुलिस रेड के बाद से पूरा परिवार फरार

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का खुलासा होने के बाद पुलिस ने लवकुश के घर पर छापेमारी की थी। पुलिस ने वहाँ से 14 लाख 25 हजार रुपए कैश बरामद किए थे। लवकुश की गिरफ्तारी होते ही उसका पूरा परिवार घर पर ताला लगाकर फरार हो गया है। फिलहाल वहाँ चल रहा निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद है और प्रशासन अब उसकी पूरी संपत्ति की कुंडली खंगाल रहा है।

उत्तर प्रदेश : अयोध्या में बाबरी के बदले मस्जिद बनाने के मंसूबों पर NOC भारी: सुप्रीम कोर्ट की कृपा से ‘खैरात’ में मिली जमीन तो चंदा खूब वसूला, लेआउट प्लान नहीं हुआ पास

                                               अयोध्या मस्जिद का प्रस्तावित डिजाइन (फोटो- टीवी9)
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जमीन दे दी लेकिन 5 साल बाद भी उस पर काम ठप पड़ा है। मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट ने चंदा तो जुटाया लेकिन सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं ले सका। अब NOC ना होने के चलते इसके लेआउट प्लान को भी अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने खारिज कर दिया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह द्वारा दाखिल RTI में सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों का अनिवार्य NOC ना होने के चलते ADA ने यह प्लान खारिज किया है।

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को ADA में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन दायर किया था।

RTI के जवाब में ADA ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने 4 लाख रुपए आवेदन और जाँच शुल्क के रूप में जमा किए। ADA के मुताबिक, मस्जिद निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग की NOC माँगी गई थी।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने क्या कहा?

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि उन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से आपत्तियाँ आई थीं। अग्निशमन विभाग की साइट जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊँचाई को देखते हुए अप्रोच रोड की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। जबकि मौके पर दोनों मार्ग छह मीटर से ज्यादा चौड़े नहीं पाए गए और मुख्य सड़क महज चार मीटर चौड़ी निकली थी।

हुसैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन देने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें जमीन दी। इसके बाद भी आवश्यक NOC क्यों नहीं मिलीं और ADA ने प्लान को क्यों खारिज किया, यह समझ से बाहर है।”

उन्होंने आगे कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बारे में उन्हें जानकारी है लेकिन बाकी किसी भी विभाग की आपत्ति को लेकर उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। बकौल हुसैन, RTI के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

इस बीच अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और यह पूरे होने के चरण में है। तो दूसरी और मस्जिद परियोजना लापरवाहियों के चलते अभी तक अधर में ही अटकी हुई है। जो लोग शताब्दियों तक कथित ढांचे को मस्जिद बताते हुए लड़ रहे थे, उनके लिए मस्जिद की प्राथमिकता कितनी है, यह 5 जमीन आवंटन के 5 वर्ष बाद स्पष्ट हो जाता है।