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‘See my Banana’: प्राइवेट पार्ट की फोटो भेज हिंदू लड़की से बोला अशरफ सिद्दीकी, जिहादी का सपा कनेक्शन आया सामने

                              आरोपित अशरफ सिद्दीकी का निकला सपा कनेक्शन  (साभार : Organiser)
मुंबई के एग्रीपाड़ा इलाके में एक 19 साल की हिंदू लड़की को उसके पूर्व मुस्लिम सहकर्मी ने अश्लील मैसेज, वीडियो और गंदी बातों से मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में आरोपित अशरफ सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित समाजवादी पार्टी की पार्षद इरम सिद्दीकी का भतीजा है।

व्हाट्सएप ग्रुप से नंबर चोरी कर शुरू की गंदी बातें

पीड़िता महालक्ष्मी स्थित पिरामल कंस्ट्रक्शन में टेलीकॉलर का काम करती थी। नौकरी छोड़ने के बाद, आरोपित अशरफ सिद्दीकी ने कंपनी के व्हाट्सएप ग्रुप से उसका नंबर निकाल लिया। 21 अप्रैल 2026 को उसने मैसेज कर अपनी पहचान ‘अशरफ पिरामल वाला’ के तौर पर दी।

शुरुआत में उसने लड़की को ‘क्यूट’ बताया, लेकिन जल्द ही वह अपनी औकात पर आ गया। उसने करीब एक घंटे तक लड़की से व्हाट्सएप कॉल पर बात की और बेहद गंदी माँगें रखीं। पीड़िता ने पड़ोसी के फोन से कॉल रिकॉर्ड कर ली, जिसमें अशरफ उसे ‘लव फ्रेंडशिप’ करने, लॉज चलने और शारीरिक संबंध (Sex) बनाने के लिए मजबूर कर रहा था। उसने फोन पर ओरल सेक्स जैसी घिनौनी बातें भी कीं।

प्राइवेट पार्ट की फोटो भेजी और कहा- ‘See my banana’

अगले दिन यानी 22 अप्रैल को अशरफ की बदतमीजी और बढ़ गई। उसने पीड़िता को अन्य लड़कियों की तस्वीरें भेजीं और दावा किया कि उसने उन सबके साथ संबंध बनाए हैं। हद तो तब हो गई जब उसने अपने प्राइवेट पार्ट की फोटो लड़की को भेजी और मैसेज में लिखा, “See my banana”।
इसके बाद उसने पीड़िता को कई अश्लील वीडियो भेजे और बेहद भद्दे मैसेज किए जैसे, “Show me your ass”। इन हरकतों से पीड़िता बुरी तरह डर गई और उसने अपने पिता को सब बताया।

‘हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद हैं’

FIR में यह भी दर्ज है कि जब पीड़िता ने अपने धर्म का हवाला दिया, तो अशरफ ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, “आजकल हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़के पसंद आते हैं।” उसने लड़की को फँसाने के लिए यह भी कहा कि अगर वे शादी करते हैं, तो वह उसे धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा।

पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपित ने कंपनी के डेटा का गलत इस्तेमाल कर कई हिंदू लड़कियों के नंबर निकाले थे। जब पीड़िता ने अपनी अन्य सहेलियों से बात की, तो पता चला कि अशरफ उन्हें भी ऐसे ही अश्लील मैसेज भेज चुका था, जिसके बाद उन्होंने उसे ब्लॉक कर दिया था।

पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक कनेक्शन

एग्रीपाड़ा पुलिस ने 23 अप्रैल 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR (नंबर 187/2026) दर्ज की। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 78(2), 79 और आईटी एक्ट की धारा 67(A) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

आरोपित के परिवार से जुड़े साजिद सिद्दीकी ने कहा है कि पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस कॉल रिकॉर्डिंग और चैट की जाँच कर रही है ताकि आरोपित को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद UP सरकार का बड़ा कदम, मदरसों के बाहरी मौलाना-छात्रों का डेटा ATS को देना अनिवार्य

                 मदरसों के लिए बना नया नियम, ATS को देनी होगी जरूरी जानकारी (साभार: इंडिया टीवी)
कहते हैं "जहां न पहुंचे रवि, कहां पहुंचे कवि" जिसे 1958 में चरितार्थ किया कवि प्रदीप ने। प्रदीप के रचित इस गीत "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से..." से तत्कालीन नेहरू सरकार इतनी भयभीत हो गयी कि इसके प्रसारण पर प्रतिबन्ध लगा दिया। लेकिन उस प्रतिबंध को 1965 में हुए इंडो-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने। दूसरे, भारत में पल रहे गद्दारों को पकड़ने का शंखनाद शास्त्री जी ने कर दिया था। लेकिन उनके निधन के बाद मुस्लिम कट्टरपंथी और पाकिस्तानपरस्त नेताओं ने इस देशहित काम को ठन्डे बस्ते में डाल दिया। 

अगर शास्त्री जी द्वारा देशहित के काम पर काम होता देश आतंकवाद, पत्थरबाज़ी और अब हुए दिल्ली ब्लास्ट नहीं होते। मुस्लिम कट्टरपंथियों को मालूम था कि हमारी हरकतों को बचाने हमारी गुलाम सियासती पार्टियां है। ये मुस्लिम कट्टरपंथियों की गुलाम पार्टियां जो पहलगाम में धर्म पूछकर महिलाओं को विधवा बनाने पर Operation Sindoor होने पर हत्यारों को पकडे जाने पर पूछने वाले आज दिल्ली ब्लास्ट करने वाले डॉक्टरों को भटका हुआ, गुमराह और बेगुनाह बताने वालों पर भी सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए। इतना ही नहीं, पत्थरबाज़ी करने वालों में शामिल बच्चों को भी बच्चा समझ नहीं छोड़ना चाहिए। इन पर भी उसी तरह कार्यवाही करनी चाहिए जिस तरह बड़ों पर की जाती है। इन्हें आतंकवादियों का स्लीपर सेल मान कार्यवाही करनी होगी।         

दिल्ली में हाल ही में हुए धमाके और इसमें फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन सामने आने के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट मोड पर हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए मदरसों की निगरानी को और मजबूत करने का फैसला किया है।

अब प्रदेश के सभी मदरसों, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या बिना मान्यता के, उसको अपने कर्मचारियों, मौलानाओं और छात्रों का पूरा विवरण ATS (Anti-Terrorism Squad) को उपलब्ध कराना होगा।

15 नवंबर 2025 को जारी एक पत्र में UP ATS ने प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (DWO) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों के सभी मदरसों के छात्रों और शिक्षकों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराएँ।

सरकार के अनुसार यह केवल सर्वे या साधारण जानकारी एकत्रित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा ऑडिट है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मदरसे या मजहबी संस्थान में कोई संदिग्ध व्यक्ति छिपकर आतंकी गतिविधियाँ न चला सके।

इस कदम की पृष्ठभूमि में है अल-फलाह यूनिवर्सिटी का मामला, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को यह दिख चुका है कि एक निजी विश्वविद्यालय कैसे आतंक-संबंधी गतिविधियों के नेटवर्क के केंद्र के रूप में उभर सकता है।

यूपी सरकार ने मदरसों के लिए क्या नया नियम बनाया?

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी मदरसों, चाहे वो मान्यता प्राप्त हों या मान्यता प्राप्त ना हो, उसे यह सुनिश्चित करना है कि उन संस्थाओं में पढ़ने वाले सभी छात्रों तथा वहाँ कार्यरत मौलानाओं और शिक्षकों की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि, मोबाइल नंबर, आधार-संख्या, स्थायी पता आदि की जानकारी UP ATS को समय-बद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाए।
इसमें छात्रों के नाम, उनके पिता के नाम, पते और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियाँ शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मदरसे का इस्तेमाल असामाजिक या आतंकी गतिविधियों के लिए न हो सके। फिलहाल यह आदेश सिर्फ इन आठ जिलों के लिए लागू किया गया है।
प्रयागराज के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण मुरारी ने बताया कि जिले के लगभग 206 मदरसों की जानकारी ATS को भेज दी गई है और अब इन जानकारियों का जमीनी सत्यापन शुरू हो चुका है।
इस आदेश को लेकर यूपी पंचायती राज और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि पहले भी प्रदेश के कई मदरसों में अवैध गतिविधियों के मामले सामने आए हैं, इसलिए यह निगरानी जरूरी है।

 उन्होंने कहा, “समय-समय पर मदरसों से अलग-अलग मामले सामने आते रहते हैं। जैसे, प्रयागराज में करेंसी छापने के मामले सामने आए, और इसी तरह कुशीनगर में भी। बहराइच में विदेशियों और बाहरी लोगों के मदरसों में रहने का इंतजाम पाया गया। इसी तरह, हाल ही में दिल्ली में हुए बम धमाके में एक डॉक्टर का नाम सामने आया और उसके आधार पर जाँच शुरू हुई।”

इस आदेश में यह स्पष्ट कहा गया है कि यह सिर्फ डेटा जमा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि एक सुरक्षा-ऑडिट है, ताकि किसी भी मदरसे में बाहरी राज्यों या देशों से आने वाले छात्रों-मौलानाओं की आवाजाही, संदिग्ध गतिविधियाँ व सुरक्षा-रिस्क पहले-से पकड़ी जा सके।

मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की कोशिशें

इस दिशा में यूपी सरकार का दृष्टिकोण सिर्फ सुरक्षा-निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह प्रयास भी करने लगी है कि मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक स्वीकार्यता के साथ जोड़ा जाए।
मदरसों में पढ़ने-वाले छात्रों व वहाँ पढ़ाने-वाले मौलानाओं की जानकारी जुटाना और ATS को उपलब्ध कराना: इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि मदरसे सिर्फ मजहबी शिक्षा का केंद्र न बनें बल्कि उनकी संरचना, छात्र-छात्राओं की पृष्ठभूमि और भविष्य-संभावनाएँ भी ज्ञात हों।
बाहर-राज्यों या विदेशी छात्रों की आवाजाही पर विशेष ध्यान देना: यह देखा जा रहा है कि कुछ मदरसों में बाहरी राज्यों से आए छात्रों की संख्या काफी अधिक है, जिसे अब खुफिया एजेंसियों ने सन्देह के घेरे में लिया है।
मदरसों को आधुनिक पाठ्यक्रम अपनाने, मान्यता प्राप्त करने, मुख्यधारा की शिक्षा-संस्थाओं से तालमेल बिठाने की दिशा में प्रेरित करना: ताकि मदरसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से स्वीकार्य बने और उनके छात्र आगे-व्यावसायिक या विश्वविद्यालय-स्तर पर भी सहजता से आगे बढ़ सकें।

अवैध मदरसों पर कार्रवाई और दिल्ली ब्लास्ट के बाद जाँच-तेजी

मदरसों पर निगरानी पहले से चल रही थी, लेकिन हाल के में सामने आई घटनाओं, विशेष रूप से 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट ने जाँच-प्रक्रिया को और अधिक तीव्र कर दिया है।
इस ब्लास्ट के बाद राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने निर्देश दिया कि मजहबी और शैक्षणिक संस्थानों में आने-जाने वालों की पहचान और आवाजाही पर विशेष नजर रखी जाए। इसी सिलसिले में यूपी ATS ने मदरसों से डेटा जमा करने का अभियान शुरू किया है।
इसका मतलब यह है कि अब मदरसों के कार्य-प्रभावों के साथ-साथ, सुरक्षा-विचारों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है, ताकि कोई भी संस्थान अनियंत्रित रूप से आतंकी गतिविधियों का माध्यम न बने।
दिल्ली के लालकिले धमाके के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की नजर फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर टिकी हुई है। इस यूनिवर्सिटी को संदेह के घेरे में रखा गया है क्योंकि यहाँ कई ऐसे प्रोफेसर और बाहरी लोग सक्रिय पाए गए हैं, जिन पर आतंकियों को पनाह देने और उनके साथ मिलकर खुफिया तौर पर गतिविधियाँ करने का शक है।

मुस्लिम और विपक्ष कर रहा नए नियम का विरोध

मदरसों के लिए बनाए गए इन नियमों का मुस्लिम लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सरकार उनकी प्रोफाइलिंग करने की कोशिश कर रही है। जबकि एजेंसियाँ पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि यह सब कुछ केवल सुरक्षा की दृष्टि से किया जा रहा है।
वहीं इस कार्रवाई पर विपक्ष ने भी नाराजगी जताई है। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शहजाद आलम ने कहा कि सरकार सुरक्षा के नाम पर डर पैदा कर रही है और हर मुस्लिम को शक की निगाह से देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अगर ATS इतनी जाँच कर रही है तो उसे अपने मामलों के नतीजों पर भी श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, क्योंकि कई मामलों में कोर्ट में दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने भी कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है, लेकिन मदरसों को ATS से जाँच के दायरे में लाना अनावश्यक कदम है और इससे भ्रम और माहौल खराब होगा।
इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि जब एक मकान मालिक किसी नए किराएदार को घर में रहने की अनुमति देता है तो उससे पहले उससे न सिर्फ उसकी जानकारी लेता है बल्कि कुछ जरूरी दस्तावेज भी अपने पास जमा करवाता है। जाहिर सी बात है कि अगर मदरसों में देश के नहीं बल्कि बाहरी छात्रों की संख्या भी अधिक देखने मिल रही है, तो ऐसे में उनकी जानकारी आवश्यक है।
उस पर अल-फलाह जैसे विश्वविद्यालयों से सामने आ रही कश्मीरी छात्रों की संख्या, विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ा रहे जिहादी प्रोफेसर इन नियमों को लागू करना और भी आवश्यक बना देते हैं।

जॉर्ज सोरोस से लिंक पर घिरीं सोनिया गाँधी, जिस फाउंडेशन की को-चेयरपर्सन वह ‘आजाद कश्मीर’ की पैरोकार: BJP ने पूछा- भारत विरोधियों से कांग्रेस का कैसा रिश्ता? अब तक डरपोक खोजी पत्रकार क्यों चुप रहे?

जॉर्ज सोरोस, सोनिया गाँधी (फोटो साभार: TV9/Punjab Kesari)
कहते हैं 'जब जागो तब सवेरा', 2013 में बीजेपी नेता तेजेन्द्र सिंह बग्गा ने सोनिया गाँधी का कश्मीर विरोधी संस्था की co-president होने का खुलासा करने पर समस्त तथाकथित खोजी पत्रकार कहाँ थे? सोनिया ही नहीं अनेक भारतीय पत्रकार भी इस भारत विरोधी संस्था के सदस्य हैं। उन दिनों एक हिंदी पाक्षिक को सम्पादित करते इस खुलासे को विस्तार से प्रकाशित किया था। (देखिए नीचे पृष्ठ) अगर बीजेपी ने 2013 में ही बग्गा को गंभीरता से लिया होता, आज कांग्रेस की क्षेत्रीय दलों से बदतर हालत होती। 

    

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर विदेशी ताकतों से जुड़ाव का गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी ने कहा है कि सोनिया गाँधी का संबंध ‘फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसिफिक’ (FDL-AP) से है, जिसे जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन द्वारा वित्तीय मदद मिलती है। बीजेपी का दावा है कि यह संगठन कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करता रहा है। इस मुद्दे को लेकर संसद में जबर्दस्त हंगामा हुआ और कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

सोनिया-सोरोस मुद्दे पर संसद में हंगामा

सोमवार(9 दिसंबर 2024) को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर गर्मागर्म बहस देखने को मिली। जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने इसे बेबुनियाद आरोप बताते हुए जोरदार हंगामा किया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष को शांत करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार, लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इसी तरह, राज्यसभा में भी भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

बीजेपी ने सोनिया गाँधी पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी, एफडीएल-एपी की सह-अध्यक्ष होने के नाते, उस संगठन से जुड़ी रही हैं जो कश्मीर को स्वतंत्र राष्ट्र मानने का समर्थन करता है। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सोनिया गाँधी और जॉर्ज सोरोस के बीच का यह संबंध भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप को दर्शाता है।” बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राजीव गाँधी फाउंडेशन और सोरोस फाउंडेशन के बीच साझेदारी हुई थी, जो इस विदेशी प्रभाव को और पुष्ट करती है।

बीजेपी ने सोनिया गाँधी पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी, एफडीएल-एपी की सह-अध्यक्ष होने के नाते, उस संगठन से जुड़ी रही हैं जो कश्मीर को स्वतंत्र राष्ट्र मानने का समर्थन करता है। पार्टी प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सोनिया गाँधी और जॉर्ज सोरोस के बीच का यह संबंध भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप को दर्शाता है।” बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राजीव गाँधी फाउंडेशन और सोरोस फाउंडेशन के बीच साझेदारी हुई थी, जो इस विदेशी प्रभाव को और पुष्ट करती है।
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने अडानी समूह के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओसीसीआरपी (ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) की रिपोर्ट का हवाला दिया था। ओसीसीआरपी को भी सोरोस फाउंडेशन से फंडिंग मिलती है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “राहुल गाँधी और ओसीसीआरपी के बीच यह संबंध दिखाता है कि विपक्ष किस तरह से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।”
निशिकांत दुबे ने संसद में अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाया और एक्स पर लिखा, “आज लोकसभा में मुझे बोलने का अवसर शून्य काल में था, लेकिन विपक्ष ख़ासकर कांग्रेस पार्टी ने सोरोस के सम्बन्ध में पोल खुलने के डर से मेरी आवाज़ को दबाया। संसद में नियम के अनुसार यदि आवाज़ उठाने पर हल्ला कर दबाया जाए तो लोकतंत्र ख़तरे में है। संविधान कैसे बचेगा?”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से की एकजुटता की अपील

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले को ‘भारत की संप्रभुता पर हमला बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई भारत-विरोधी ताकतों के साथ काम करता है, तो सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर उसका विरोध करना चाहिए। यह सिर्फ कांग्रेस का मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।” रिजिजू ने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि अगर उनकी पार्टी का कोई सदस्य देशविरोधी तत्वों से जुड़ा है, तो उसे सामने लाएँ।
वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इन आरोपों को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया। कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जब सरकार को कुछ छिपाना होता है, तो वह ऐसे मुद्दे उछालती है। अगर उनके पास कोई ठोस सबूत है, तो जाँच कराएँ।” वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने कहा, “सरकार को पहले अपने घर की सफाई करनी चाहिए। विपक्ष को डराने-धमकाने की यह कोशिश अब नहीं चलेगी।”

ओसीसीआरपी और सोरोस फाउंडेशन पर क्या हैं आरोप?

ओसीसीआरपी एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन है, जो अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करता है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि यह संगठन भारत की छवि खराब करने और मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिए विपक्ष के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालाँकि, अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओसीसीआरपी जैसे संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और उनकी संपादकीय नीति पर किसी का नियंत्रण नहीं होता।
बीजेपी के आरोपों पर अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर कहा, “यह निराशाजनक है कि भारत की सत्ताधारी पार्टी इस तरह के आरोप लगा रही है। अमेरिकी सरकार पत्रकारों को पेशेवर प्रशिक्षण और विकास के लिए मदद करती है, लेकिन इसका संपादकीय स्वतंत्रता से कोई लेना-देना नहीं है।” बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस बयान को आधार बनाते हुए कहा, “अमेरिका ने खुद स्वीकार किया है कि ओसीसीआरपी और सोरोस फाउंडेशन को उनके फंड मिलते हैं। यह साफ दिखाता है कि विपक्ष और विदेशी ताकतें भारत के खिलाफ साजिश रच रही हैं।”

संसद में सोरोस चैप्टर कैसे शुरू हुआ

संसद में सोरोस का मुद्दा सबसे पहले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 6 दिसंबर को उठाया था। उन्होंने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सोरोस के करीबियों के साथ मुलाकात का जिक्र किया और इसे ‘भारत-विरोधी ताकतों’ से जोड़ा। उन्होंने संसद में कहा, “कांग्रेस का हाथ जार्ज सोरोस के साथ, राहुल गाँधी जी की भारत जोड़ो यात्रा का खर्च सोरोस ने दिया या नहीं, सोरोस ने 1000 भारतीय बच्चों को विदेश में पढ़ाई का खर्च दिया, उसमें कितने कांग्रेस नेताओं के बच्चे हैं? मेरा कांग्रेस पार्टी से प्रश्न पूछने का सिलसिला जारी रहेगा।” इसके बाद, यह मुद्दा संसद में हंगामे का कारण बन गया।
बीजेपी ने यह भी कहा है कि जॉर्ज सोरोस की फंडिंग से चलने वाले खोजी पत्रकारों ने ही अडानी पर हमले को लेकर राहुल गाँधी के भाषणों का प्रसारण किया। राहुल गाँधी भी इसे अपने सोर्स के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाए। बीजेपी ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी जॉर्ज सोरोस को अपना दोस्त बता चुके हैं।
बहरहाल, सोरोस और सोनिया गाँधी के बीच कथित संबंधों को लेकर संसद में उठा यह मुद्दा राजनीतिक संघर्ष का नया अध्याय बन गया है। जहाँ बीजेपी इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का सवाल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘ध्यान भटकाने की चाल’ करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद संसद के बाहर जनता के बीच कितना असर डालता है।

NEET पेपर लीक में बिहार के डिप्टी CM विजय सिन्‍हा का खुलासा : तेजस्वी यादव के PS ने सिकंदर यदुवंशी के लिए बुक करवाया कमरा:,अमित आनंद ने 30-32 लाख रूपए में डील कबूला

विजय सिन्हा ने तेजस्वी यादव पर लगाए गंभीर आरोप (फोटो साभार : न्यूज24)
नीट-यूजी पेपर लीक कांड से बिहार की राजनीति में भूचाल आ चुका है। इस पेपर लीक कांड का सरगना जिस सिकंदर यादवेंदु को बताया जा रहा है, वो बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्‍वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार का करीबी है। बिहार के डिप्‍टी सीएम विजय सिन्‍हा ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके खुद इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार ने ही सिकंदर के नाम से कमरे की बुकिंग के लिए बार-बार कॉल किए थे। उसी ने मंत्री जी के नाम से बुकिंग कराई थी। तेजस्वी यादव पहले मंत्री रहे हैं, इसलिए अनुराग नाम के अभ्यर्थी के लिए जो कमरा बुक किया गया था, उसकी बुकिंग के आगे ब्रेकट में (मंत्री जी) लिखा है। इस बीच, नीट पेपर लीक घोटाले के अभियुक्तों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने प्रत्येक अभ्यर्थी से 30-40 लाख रुपए की डील की थी।

बिहार के डिप्टी सीएम ने सिलसिलेवार तरीके से बताई कमरे की बुकिंग की कहानी

उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गेस्ट हाउस की बुकिंग के लिए तेजस्वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार और पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारी प्रदीप कुमार के बीच बातचीत का रिकॉर्ड भी सामने रखा। उन्होंने मीडिया कर्मियों से कहा, “1 मई को तेजस्वी यादव के निजी सचिव प्रीतम कुमार के मोबाइल नंबर 7488061813 से रात्रि 9 बजकर 7 मिनट में पथ निर्माण विभाग में कार्यरत प्रदीप कुमार के मोबाइल नंबर 9430469924 पर NHAI गेस्ट हाउस में सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरे की बुकिंग कराने के लिए फोन आया था। उस दिन प्रदीप कुमार इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “फिर 4 मई सुबह 8.49 मिनट में प्रीतम कुमार के मोबाइल नंबर 7488061813 से प्रदीप कुमार के मोबाइल पर कॉल कर सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरे की बुकिंग के लिए स्मारित किया गया। इस बार पथ निर्माण विभाग में कार्यरत प्रदीप कुमार द्वारा NHAI के गेस्ट हाउस में सिकंदर कुमार के नाम से बुकिंग के लिए पदास्थापित कनीय अभियंता को वॉट्सऐप पर मैसेज भेज दिया। प्रीतम कुमार पहले यहीं पर पीएस थे, जब विभाग के मंत्री थे तेजस्वी यादव, इसीलिए मंत्री शब्द का उपयोग करवा लिए। दोनों अधिकारियों ने ये बात लिखकर दी है।” उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कमरे के आबंटन के लिए कोई लेटर नहीं मिला है। ये बुकिंग फोन पर हुई, जिसकी जानकारी दी जा चुकी है।
नीट-यूजी पेपर लीक काँड में गिरफ्तार अनुराग यादव ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसके साथ कुछ और गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने भी अपना गुनाह कबूला है। अनुराग यादव ने बताया है कि उसे उसके फूफा सिंकदर यादवेंदु ने कोटा से बुलाया था और कहा था कि ‘पूरी सेटिंग हो गई है।’

अमित आनंद ने लीक कराया पेपर, सिकंदर लाया अभ्यर्थी

वहीं, नीट घोटाले में शामिल सिकंदर के सहयोगी ने अमित आनंद ने भी अपना गुनाह कबूल कर दिया है। उसने कबूलनामे में कहा कि नीट परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक हो गया था। परीक्षा से एक दिन पहले अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र रटाए गए थे और प्रश्न पत्र के बदले अभ्यर्थियों से 30-32 लाख रुपये लिए गए थे। उसने यह बात भी कबूली है कि वह पहले भी पेपर लीक कराता रहा है। पेपर लीक का मास्टरमाइंड अमित मुंगेर जिले का रहने वाला है। हालाँकि, वह वर्तमान में पटना के एजी कॉलोनी के एक किराए के फ्लैट में रह रहा था। इस कबूलनामे में उसने बताया है कि किस तरह से उसकी मुलाकात उन छात्रों से हुई, जिन्हें आंसर रटवाए गए थे।

ऐसे कराई गई अभ्यर्थियों को तैयारी

अमित ने अपने बयान में कहा, “मेरी दोस्ती सिकंदर से हुई थी, जो दानापुर नगर निगम कार्यालय में जूनियर इंजीनियर है। मैं अपने एक निजी काम से उससे मिलने गया था। मेरे साथ नीतीश कुमार भी था। बातचीत के सिलसिले में मैंने सिकंदर से कहा था कि मैं किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराकर अभ्यर्थियों को पास कराता हूँ। सिकंदर ने इसपर मुझसे कहा कि मेरे पास 4-5 अभ्यर्थी हैं, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पास करवा दीजिए। बच्चों को पास करने के बदले में मैंने बताया कि 30-32 लाख रुपए लगेंगे। इस पर सिकंदर तैयार हो गया और कहा कि वह 4 अभ्यार्थी की हमें देगा। इसी बीच नीट परीक्षा की तारीख आ गई। सिकंदर ने पूछा लड़कों को कब लाना है। मैंने कहा कि पाँच मई को परीक्षा है। चार मई की रात को अभ्यर्थियों को लेकर आना। चार मई की रात में नीट परीक्षा का क्वेश्चन पेपर लीक करवाकर सभी अभ्यर्थियों को उत्तर के साथ पढ़ाया-रटवाया जा रहा था।”
पुलिस को दिए कबूलनामे में मास्टरमाइंड अमित आनंद ने बताया, “सिकंदर को पुलिस ने पकड़ लिया और फिर उसकी निशानदेही पर हम लोग भी पकड़ गए। हमारे किराए वाले फ्लैट से पुलिस को नीट समेत अलग-अलग एग्जाम का एडमिट कार्ड, नीट का प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका का जला हुआ अवशेष बरामद हुआ है। पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है। मैंने पहले भी पेपर लीक करवाए हैं। मैं अपने अपराध को कबूल करता हूँ।”
अब तक इस मामले में 13 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिसमें 4 अभ्यर्थी भी हैं। इस मामले में सिकंदर की संलिप्तता के बाद बिहार में राजनीतिक भूचाल भी आ गया है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया है कि सिकंदर तेजस्वी यादव का करीबी है। इस मामले में तेजस्वी यादव के पीएस की भी अहम भूमिका है।