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उत्तराखंड : अवैध मदरसों पर धामी सरकार का एक्शन, 110 पर लगा ताला : हरिद्वार के SDM बोले – ‘आदेश मिलते जाएँगे, कार्रवाई करते जाएँगे’

                      उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी (फोटो साभार: News18)
उत्तराखंड में इन दिनों अवैध मदरसों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती खूब चर्चा में है। गुरुवार (20 मार्च 2025) को ऊधम सिंह नगर में 16 और हरिद्वार में 2 मदरसों को सील कर दिया गया। अब तक राज्य में 110 मदरसों पर ताला लग चुका है। पिछले एक महीने से प्रशासन लगातार ऐसे मदरसों पर कार्रवाई कर रहा है, जो बिना सरकार की अनुमति के चल रहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर में 3, जसपुर में 1 और हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में 2 मदरसे सील हुए। इससे पहले देहरादून और पौड़ी में 92 मदरसों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो चुकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि राज्य के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। उनके इस बयान से लोगों में उम्मीद जगी है कि गलत काम करने वालों को सबक मिलेगा। धामी ने कहा, “जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियां चलाएगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन होगा।”

हरिद्वार के गैंडीखाता की गुर्जर बस्ती में दो मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे, जिन्हें गुरुवार (20 मार्च 2025) को सील कर दिया गया। हरिद्वार के एसडीएम अजयवीर सिंह ने कहा, “हमें सीएम के आदेश मिले हैं। उन मदरसों पर कार्रवाई करने और उन्हें सील करने के आदेश दिए गए हैं जो न तो मदरसा बोर्ड और न ही शिक्षा विभाग से पंजीकृत हैं। आदेश आज ही आए हैं इसलिए जैसे-जैसे हमें पता चलता जाएगा हम सील की कार्रवाई करते जाएँगे।”

प्रशासन अब ये भी जाँच कर रहा है कि इन मदरसों के पीछे कौन लोग हैं और वहाँ बच्चों को क्या सिखाया जा रहा था। हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 60 से ज्यादा अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, बीते माह अधिकारियों ने बिना पंजीकरण के चल रहे 200 से ज़्यादा मदरसों की पहचान की, जिनमें उधम सिंह नगर ज़िले में सबसे ज़्यादा 129 मदरसे थे, उसके बाद देहरादून में 57 और नैनीताल में 26 मदरसे थे।

हिंदू गंदे हैं, इसलिए उनका पुनर्जन्म होता है… हाफिज जन्नत ले जाता है: दरभंगा के इरफान-अफगान चला रहे थे अवैध मदरसा, जकात के पैसे से खरीद रहे अपने लिए जमीन


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा स्थित एक अवैध मदरसे से 21 बच्चों को बचाया गया है। बच्चों ने बताया कि वहाँ पढ़ाने वाला हाफिज या मौलवी उनका ब्रेनवॉश करता था। वह बच्चों को जन्नत पाने से संबंधित तालीम देता था। मौलवी कहता था कि एक हाफिज अपने साथ 10 बच्चों को जन्नत ले जाता है। वहीं, हिंदुओं में गंदा काम करने वालों का पुनर्जन्म होता है।

मदरसे से रेस्क्यू किए गए 7 से 15 साल इन बच्चों को मोहान रोड स्थित राजकीय बालगृह में रखा गया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि जिस तरह से इन बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। जो बच्चे ठीक से हिंदी तक नहीं बोल पाते, वे पुनर्जन्म बोल रहे हैं। हिंदू धर्म और इस्लाम में अंतर बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन बच्चों को दीन (इस्लाम मजहब) की शिक्षा दी जा रही थी और जन्नत के सपने दिखाए जाते थे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई से दूर रखा जा रहा था। चतुर्वेदी ने राज्य के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने एक कमिटी बनाकर इसकी जाँच करने और ऐसे मदरसों पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे सैकड़ों मदरसे संचालित किए जा रहे हैं।

जाँच में पता चला है कि बिहार के दरभंगा के रहने वाले इरफान और अफसान दुबग्गा में अवैध मदरसा चला रहे थे। बाल आयोग के सदस्यों का कहना है कि अवैध मदरसा चलाने वाले ये लोग मुस्लिम समाज से जकात (दान) के नाम पर पैसे लेते थे। जकात के पैसे से निजी संपत्ति बनाने का भी खुलासा हुआ है। जकात में मिले पैसों से एक ट्रस्ट का गठन कराया गया, जिसमें 3.5 लाख रुपए जमा हुए हैं।

इतना ही नहीं, इन पैसों से दोनों निजी जमीन भी खरीदी है। यह मदरसा आवासीय शिक्षा के नाम पर खोला गया था और इसमें बच्चों को इस्लाम की शिक्षा दिया जा रहा था। इनके पास बच्चों के माता-पिता का सहमति पत्र भी नहीं है। जिस मकान में मदरसा संचालित हो रहा था उसका एग्रीमेंट भी नहीं है। मकान में शौचालय तक नहीं है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की गई है।

वहीं, जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने शुक्रवार (3 मई 2024) को राजकीय बालगृह का निरीक्षण किया और बच्चों से बात की। इस दौरान सात साल के एक बच्चे ने कहा, “अंकल जी, अब्बा-अम्मी की बहुत याद आ रही है। उन्हें बुला दीजिए।” इस अधिकारी ने कहा कि वे जल्दी आने वाले हैं। बच्चों ने यह भी बताया कि वे 15 दिन पहले मदरसे में आए थे।

लखनऊ के दुबग्गा में अवैध तरीके से घर में एक मदरसे का संचालन हो रहा था। इसके बारे में सूचना मिलते ही 1 मई 2024 को 23 बच्चों (कुछ रिपोर्ट में 21 बच्चे) को बचाया गया था। इसके बाद इन बच्चों को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। ये सारे बच्चे बिहार के रहने वाले हैं। अभी तक इन बच्चों के अभिभावकों ने अपने बच्चों की खोज खबर नहीं ली है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ में पंजीकृत मदरसों की कुल संख्या 131 है, जबकि 111 मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। पंजीकृत मदरसों में कुल 18 ऐसे मदरसे हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से अनुदान मिलता है। वहीं, अधिकांश मदरसे सिर्फ मान्यता के आधार पर चलते हैं।