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‘धार्मिक गतिविधि’ के नाम पर धर्मांतरण कराने वालों की विदेशी फंडिंग पर मोदी सरकार ने किया प्रहार, बदल डाले FCRA के नियम

     धर्मांतरण को ‘धार्मिक गतिविधि’ बताकर अब नहीं मिलेगी विदेशी फंडिंग (प्रतीकात्मक तस्वीर साभार: AI-Dall-e)
केंद्र की मोदी सरकार ने विदेशी फंडिंग को लेकर लागू विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए संशोधनों के तहत धर्मांतरण (proselytisation) को अब आस्था-आधारित गतिविधियों का हिस्सा नहीं माना जाएगा। सरकार के इस कदम का सीधा असर उन गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक संस्थाओं और चैरिटेबल संगठनों पर पड़ेगा जो विदेशी फंडिंग के जरिए धर्म परिवर्तन की साजिश रचते हैं।

सोमवार (22 जून 202) को गृह मंत्रालय द्वारा जारिए किए अधिसूचना में बताया गया कि नए नियमों में धार्मिक शिक्षा, पूजा-पाठ, प्रार्थना सभा, आध्यात्मिक कार्यक्रम, धार्मिक साहित्य का ज्ञान देना या समुदाय आधारित धार्मिक सेवाएँ तो आस्था-आधारित गतिविधियों की श्रेणी में रहेंगी, लेकिन किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना, प्रभावित करना या धर्म बदलने के लिए अभियान चलाना अब इस श्रेणी से बाहर माना जाएगा।

नए नियमों के अनुसार, रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने या सालाना रिटर्न दाखिल करने वाले संगठनों को अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देनी होगी। इन नियमों का मकसद ज़्यादा पारदर्शिता लाना भी है, खासकर तब जब पैसा ‘डोनर एड्वाइज़्ड फंड’ या पैसे भेजने के किसी दूसरे जरिए से आता है। ऐसे मामलों में, संगठन को असली दान देने वाले की पहचान, पता और ईमेल की जानकारी के साथ-साथ मिली हुई रकम की भी जानकारी देनी होगी।

नियमों में हुए इस बदलाव का मतलब यह है कि यदि कोई संस्था विदेशी फंड का उपयोग धर्म प्रचार या धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों में करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ FCRA के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में फंड के उपयोग की जाँच, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

सरकार ने कहा था कि विदेशी फंड का इस्तेमाल सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और वास्तविक धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, लेकिन धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए नहीं। इसी वजह से धर्मांतरण को आस्था-आधारित गतिविधियों की परिभाषा से अलग कर दिया गया है।

गृह मंत्रालय लंबे समय से यह कहता रहा है कि विदेशी धन का उपयोग जबरन, प्रलोभन या अन्य माध्यमों से धार्मिक परिवर्तन के लिए नहीं होना चाहिए। इसी संदर्भ में पहले भी FCRA नियमों को सख्त किया गया था। 2019 में भी सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए NGOs के प्रमुख पदाधिकारियों से यह घोषणा लेना अनिवार्य किया था कि वे धर्म परिवर्तन या सांप्रदायिक तनाव फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं।

हाल के FCRA संशोधन और संसद में हुई चर्चा के दौरान भी सरकार ने साफ संकेत दिए कि विदेशी फंड के कथित दुरुपयोग और धार्मिक परिवर्तन से जुड़े मामलों पर सख्त नजर रखी जाएगी। संसद में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि सरकार विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग और जबरन धार्मिक परिवर्तन जैसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

वहीं नए नियमों में बदलावों के लागू होने से ठीक 10 दिन पहले अमेरिकी सांसदों ने हाल ही में भारत सरकार द्वारा FCRA नियमों में किए गए बदलावों पर चिंता जताई थी। सीनेट की विदेश संबंध समिति के प्रमुख जेम्स रिष ने एक बयान में कहा था कि FCRA में प्रस्तावित बदलावों का ‘सिविल सोसाइटी समूहों’ पर बुरा असर पड़ सकता है, जिनमें ईसाई संगठन भी शामिल हैं। उन्होंने इन बदलावों को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया था।

उत्तराखंड : अवैध मदरसों पर धामी सरकार का एक्शन, 110 पर लगा ताला : हरिद्वार के SDM बोले – ‘आदेश मिलते जाएँगे, कार्रवाई करते जाएँगे’

                      उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी (फोटो साभार: News18)
उत्तराखंड में इन दिनों अवैध मदरसों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती खूब चर्चा में है। गुरुवार (20 मार्च 2025) को ऊधम सिंह नगर में 16 और हरिद्वार में 2 मदरसों को सील कर दिया गया। अब तक राज्य में 110 मदरसों पर ताला लग चुका है। पिछले एक महीने से प्रशासन लगातार ऐसे मदरसों पर कार्रवाई कर रहा है, जो बिना सरकार की अनुमति के चल रहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर में 3, जसपुर में 1 और हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में 2 मदरसे सील हुए। इससे पहले देहरादून और पौड़ी में 92 मदरसों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो चुकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि राज्य के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। उनके इस बयान से लोगों में उम्मीद जगी है कि गलत काम करने वालों को सबक मिलेगा। धामी ने कहा, “जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियां चलाएगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन होगा।”

हरिद्वार के गैंडीखाता की गुर्जर बस्ती में दो मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे, जिन्हें गुरुवार (20 मार्च 2025) को सील कर दिया गया। हरिद्वार के एसडीएम अजयवीर सिंह ने कहा, “हमें सीएम के आदेश मिले हैं। उन मदरसों पर कार्रवाई करने और उन्हें सील करने के आदेश दिए गए हैं जो न तो मदरसा बोर्ड और न ही शिक्षा विभाग से पंजीकृत हैं। आदेश आज ही आए हैं इसलिए जैसे-जैसे हमें पता चलता जाएगा हम सील की कार्रवाई करते जाएँगे।”

प्रशासन अब ये भी जाँच कर रहा है कि इन मदरसों के पीछे कौन लोग हैं और वहाँ बच्चों को क्या सिखाया जा रहा था। हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 60 से ज्यादा अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, बीते माह अधिकारियों ने बिना पंजीकरण के चल रहे 200 से ज़्यादा मदरसों की पहचान की, जिनमें उधम सिंह नगर ज़िले में सबसे ज़्यादा 129 मदरसे थे, उसके बाद देहरादून में 57 और नैनीताल में 26 मदरसे थे।