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असम : मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने क्यों कहा- पूरे इकोसिस्टम की जड़ें खोदेंगे; गौरव गोगोई से शादी के बाद भी एलिजाबेथ का कैसे रहा पाकिस्तान से जुड़ाव: CDKN-तौकीर शेख से क्या हैं कनेक्शन

       हिमंता बिस्वा ने पाकिस्तान लिंक को लेकर कई सवाल पूछे (साभार: India Today NE & Jogbani)
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई के ISI से लिंक वाले आरोपों पर SIT जाँच हो सकती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने SIT जाँच को जरूरी बताया है। उन्होंने गोगोई के पत्नी के शादी के बाद भी पाकिस्तान जाने के सबूत होने का दावा किया है। इस बीच एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तानी सुपरवाइजर पर नए खुलासे हुए हैं। गौरव गोगोई के पाकिस्तानी हाई कमिश्नर से मिलने को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
गंभीरता से मामले की जाँच होने पर उस राज से भी पर्दा उठेगा कि कांग्रेस पाकिस्तान की माला क्यों जपती रहती है? जब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी भारत कट्टरपंथी शेर होते रहेंगे। इतना ही नहीं पाकिस्तान और ISI जुड़ाव की सच्चाई सामने आने पर गौरव गोगोई पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। सांसद होने का मतलब संविधान की शपथ लेकर उसकी बेइज्जती करना नहीं होता। केंद्र सरकार को भी हस्तक्षेप करना चाहिए। संविधान हाथ में नचाने के लिए उसका पालन करने के लिए है।  

CM सरमा ने क्या कहा?

असम हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार (15 फरवरी, 2025) को कहा, “हमारे पास पक्की जानकारी है कि एलिजाबेथ गोगोई अपनी शादी के बाद भी पाकिस्तान गई हैं। वह सांसद के साथ गई थीं या अकेली, इन बातों की पुष्टि हो जाएगी। कई नई जानकारियाँ भी सामने आ रही हैं।”
उन्होंने कहा कि रविवार(16 फरवरी) को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मामले की SIT जाँच के लिए चर्चा होगी। CM सरमा ने स्पष्ट किया है कि यह जाँच मात्र एलिजाबेथ कोलबर्न तक ही नहीं बल्कि उसने जुड़े लोगों और बाकी इकोसिस्टम को भी दायरे में लेकर की जाएगी।
उन्होंने कहा है कि जाँच के लिए एक केस दर्ज किया जाएगा, इसके बाद उनके पासपोर्ट और वीजा की जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि क्या गौरव गोगोई के पिता तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री रहते हुए ISI का मुख्यमंत्री दफ्तर तक दखल था। उन्होंने इसकी जाँच भी करवाने की बात कही है।
सीएम हिमंता बिस्वा ने गौरव गोगोई की पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल बासित से मुलाक़ात को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न का एक पुराना ट्वीट दिखाया है, जिसमे वह इस्लामाबाद में होने सम्बन्धित बात लिख रही हैं।

कौन हैं एलिजाबेथ कोलबर्न?

गौरव गोगोई के ऊपर उठे विवाद के केंद्र में उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई हैं। कोलबर्न और गौरव गोगोई की मुलाक़ात संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में काम करने के दौरान 2010 में हुई थी। इसके बाद दोनों में प्रेम संबंध बन गया। 2013 में कोलबर्न और गोगोई का विवाह हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरव गोगोई के पिता और तब असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई इस विवाह के लिए पहले तैयार नहीं थे। हालाँकि, बाद में उन्होंने अपनी सहमति इसको लेकर दे दी थी। एलिजाबेथ लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हुई हैं और ज्यादातर करियर उनका NGO में काम करते हुए गुजरा है।
कोलबर्न वर्तमान में ऑक्सफ़ोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट संस्थान में काम करती हैं। यह संस्थान पर्यावरण को लेकर काम करता है। एलिजाबेथ कोलबर्न इससे पहले CDKN नाम के एक NGO में काम कर चुकी हैं। इस NGO में पाकिस्तानी हस्तक्षेप का आरोप है।

क्या हैं कोलबर्न पर आरोप?

एलिजाबेथ कोलबर्न की नागरिकता को लेकर सबसे पहले CM बिस्वा सरमा ने प्रश्न उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि विवाह के 12 साल के बाद भी कोलबर्न के पास भारतीय नागरिकता क्यों नहीं और वह अपनी ब्रिटिश नागरिकता क्यों बनाए हुए हैं। विवाह के पहले और बाद भी जिन संगठनों के साथ कोलबर्न ने काम किया, उनको लेकर प्रश्न उठे हैं।
कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) के लिए काम किया था। दावा है कि वह इस दौरान अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। CDKN से ही जुड़े एक संगठन LEAD के लिए वह पाकिस्तान में काम करती थीं। उनके पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फ़ोर्स में भी शामिल रहने का दावा किया गया है।
यह टास्क फ़ोर्स कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए पैसा जुटाती थी। इसके ISI का एक मुखौटा होने का दावा है। इसी को लेकर उन पर ISI लिंक के आरोप लगाए गए हैं। पाकिस्तान और भारत में काम करने के दौरान कोलबर्न का सुपरवाइजर एक पाकिस्तानी अली तौकीर शेख था। उसका भारत विरोधी प्रोपेगेंडा भी अब सामने आया है।
CDKN के एक और संगठन ICLEI से जुड़े होने की बात सामने आई है। ICLEI को भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस ने 2.1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹17 करोड़) की धनराशि दी थी। इसके अलावा कोलबर्न के एक अमेरिकी सेंटर टॉम उडाल से भी जुड़े होने का आरोप लगाया गया है जो पाकिस्तान का हमदर्द रहा है।

सुपरवाइजर कर रहा था भारत को बदनाम

अली तौकीर शेख स्वयं को एक पर्यावरण और पानी से जुड़े मुद्दों का एक्सपर्ट बताता है। वह कई NGO के साथ काम कर चुका है। अब शेख के भारत विरोधी एजेंडा चलाने के सबूत सामने आए हैं। उसे अपने ट्विटर अकाउंट से भारत की गलत छवि विश्व के सामने पेश करने की कोशिश की थी।
एलिजाबेथ के साथ काम करने वाले शेख ने भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता चले जाने उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने जैसी अफवाह फैलाई जाएँगी।
शेख ने लव जिहाद और तबलीगी जमात के मामलों पर भी जहर फैलाया था। उसने दिल्ली दंगों का मामला संसद में उठाने पर कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई की तारीफ़ भी की थी। इसको लेकर उसने एक ट्वीट किया था। अली शेख इसके अलावा और भी कई भारत विरोधी ट्वीट कर चुका है।
उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारत में घुसने को समस्या मानने से इनकार किया था। उसने दावा किया था कि भाजपा इसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद की तरह पेश कर रही है। अली तौकीर शेख ने लगातार असम से जुड़े मुद्दों पर सरकार या फिर भाजपा के खिलाफ ट्वीट किए थे। जबकि पाकिस्तानी नागरिक होने के चलते इसने उनका कोई सीधा सरोकार नहीं था।

गौरव गोगोई पर भी सवाल

एलिजाबेथ कोलबर्न के अलावा उनके पति गौरव गोगोई को भी CM हिमंता बिस्वा सरमा ने घेरा है। CM बिस्वा सरमा ने बताया था कि 2015 में पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल ने गौरव गोगोई को बुलाया था। गौरव गोगोई इस मुलाक़ात में अपने साथ 50-60 छात्रों को लेकर गए थे। CM सरमा ने पूछा है कि तब क्या गौरव गोगोई ने विदेश मंत्रालय से अनुमति ली थी।
CM सरमा ने एक ट्वीट में बताया है कि अब्दुल बासित से मुलाक़ात के कुछ ही दिनों बाद गौरव गोगोई ने भारत के कोस्ट गार्ड के विषय में कई प्रश्न पूछे थे। गौरव गोगोई ने पूछा था कि कोस्ट गार्ड कौन से नए राडार स्टेशन स्थापित कर रहा है और कौन सर्विलांस के साजोसामान खरीद रहा है। उन्होंने इसे सिर्फ एक संयोग मानने से इनकार किया है।
CM सरमा ने इन प्रश्नों की टाइमिंग को लेकर प्रश्न उठाए हैं। MP गौरव गोगोई के NGO के एक लेख में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर दया दिखाने की बात कही गई थी। इसमें BSF पर मानवाधिकार उल्लंघन करने की बात कही गई थी। इसको लेकर भी प्रश्न उठे हैं।
वहीं लोकसभा में कॉन्ग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वह ऐसे आरोपों पर कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि अगर उनकी पत्नी ISI एजेंट हैं तो वह स्वयं R&AW के एजेंट हैं।

9 मुस्लिम, 90 लाख रूपए का फ्रॉड, अग्रिम जमानत पर सवाल… उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजियाबाद कोर्ट में क्यों भाँजी लाठियाँ, क्यों हड़ताल पर वकील?

                        गाजियाबाद कोर्ट में पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में अलीगढ़ में वकीलों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के वकील 4 नवंबर 2024 को हड़ताल पर हैं। दिल्ली बार एसोसिएशन भी इसका समर्थन कर रहा है। यह पूरा विवाद 29 अक्टूबर को गाजियाबाद जिला कोर्ट में हुए लाठीचार्ज से पैदा हुआ है। कथित तौर पर जालसाजी के एक मामले में मुस्लिम आरोपितों की अग्रिम जमानत को लेकर जज अनिल कुमार और वकीलों के बीच बहस हुई। फिर पुलिस की एंट्री हुई। अब यह मामला लाठीचार्ज की SIT जाँच को लेकर हाई कोर्ट में याचिका से हड़ताल तक पहुँच चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा है कि जिला जज अनिल कुमार के आदेश पर वकीलों पर लाठीचार्ज किया गया। SCBA ने एक प्रस्ताव पारित कर जिला जज अनिल कुमार के आचरण की जाँच इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में कराने की माँग की है। गाजियाबाद बार एसोसिएशन लाठीचार्ज की SIT जाँच की माँग कर रहा है। इसको लेकर एडवोकेट जवाहिर यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका घटनास्थल के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और FIR में नामजद वकीलों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की गई है।

गाजियाबाद जिला कोर्ट में वकीलों पर लाठीचार्ज

29 अक्टूबर को दोपहर के समय जिला जज अनिल कुमार की अदालत में कई वकीलों का जमावड़ा हो गया था। कुछ ही देर में कोर्ट परिसर में शोर-शराबा मच गया। तभी अचानक कैम्पस में पुलिस की एंट्री हुई। घटना के वायरल वीडियो में से कुछ में पुलिसकर्मी वकीलों पर बल प्रयोग करते दिख रहे हैं। वकीलों को भी कुर्सियाँ उठा कर फेंकते देखा जा सकता है।

वकीलों के मुताबिक लाठीचार्ज के लिए जिला जज जिम्मेदार

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले एडवोकेट जवाहिर यादव का दावा है कि एक मामले में जमानत को लेकर घटना की कुछ वकील जिला जज अनिल कुमार की अदालत में बहस कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात पर वकीलों और जज में गर्मागर्म बहस हो गई। आरोप है कि जज अनिल कुमार ने अपना आपा खो दिया और डायस पर खड़े हो कर वकीलों को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे।
एडवोकेट जवाहिर यादव के अनुसार थोड़ी देर बाद जज अनिल कुमार के आदेश पर पुलिस कोर्ट रूम में घुसी और वकीलों को पीटना शुरू कर दिया। जज पर आरोप है कि वे पुलिस को बार-बार वकीलों को गोली मारने के लिए उकसा रहे थे। घटना के बाद में कोर्ट कैम्पस में CRPF की टुकड़ी तैनात कर दी गई। इसके पीछे भी वकील जज अनिल कुमार को ही बता रहे हैं।

पुलिस की FIR में क्या?

पुलिस द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में वकीलों को हिंसा का जिम्मेदार बताया गया है।सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने कवि नगर थाने में केस दर्ज करवाया है। अपनी तहरीर में उन्होंने बताया है कि 29 अक्टूबर को वे साथी सिपाहियों के साथ कचहरी में ड्यूटी पर थे। तभी एक अदालत में करीब 50 वकीलों के इकट्ठा हो कर हंगामा करने की सूचना मिली।
संजय कुमार की शिकायत के अनुसार हंगामे के दौरान वकील कुर्सियाँ फेंकते हुए गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे। उन्होंने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ हंगामा कर रहे वकीलों को अदालत से बाहर निकाला। इसके बाद नीचे आकर वकीलों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। कचहरी में बनी पुलिस चौकी में आग लगा दी। वकीलों की भीड़ ने चौकी के आसपास लगे CCTV कैमरे भी तोड़ दिए।
सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने बताया है कि वकीलों की पत्थरबाजी में कोर्ट परिसर के लगे कई शीशे टूट गए। दारोगा राजेश कुमार के सिर पर चोटें आईं हैं। इस हंगामे से कचहरी में भगदड़ मच गई। हालत संभालने के लिए कोर्ट कैम्पस में CRPF के साथ PAC की टुकड़ी तैनात करनी पड़ी।
संजय कुमार की तहरीर पर लगभग 50 अज्ञात वकीलों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 121 (1) और 121 (2), 131, 352, 324 (4), 326 (G), 61 (2), 3 (5) और 118 (1) के साथ आपराधिक कानून 1932 की धारा 7 व सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के सेक्शन 3/4 के तहत केस दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।
गाजियाबाद पुलिस के एडिशनल कमिश्नर दिनेश कुमार ने बताया है कि जिला जज के चैंबर की तरफ बढ़ रही हमलावर वकीलों की भीड़ को पुलिस ने जैसे-तैसे काबू किया था। उन्होंने बताया कि जब पुलिस जिला जज को सुरक्षित करने में जुटी थी तभी वकीलों ने नीचे उतर कर आगजनी की है। बकौल एडिशनल सीपी सबूत और तथ्य जुटाए जा रहे हैं जिनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

न्यायिक कर्मचारी की FIR में भी वकील ही हिंसा के जिम्मेदार

पुलिस के अलावा एक दूसरी FIR न्याय विभाग के कर्मचारी संजीव गुप्ता ने दर्ज करवाई है। गाजियाबाद कचहरी में नाजिर के पद पर तैनात संजीव गुप्ता की तहरीर में बताया गया है कि 29 अक्टूबर को एडवोकेट नाहर सिंह यादव, उनके बेटे अभिषेक यादव तथा उनके रिश्तेदार दिनेश यादव ने कोर्ट परिसर में साजिशन हंगामा किया। हंगामे में 40 से 50 अन्य अराजक लोग भी शामिल थे।
संजीव की शिकायत के अनुसार अराजक भीड़ ने कोर्ट रूम में घुस कर न्यायिक कार्य में बाधा डाली। खिड़कियों और शीशों को तोड़ दिया। फर्नीचरों को उठा कर फेंक दिया। सर्वर मशीन को तहस-नहस कर दिया।

जिस मामले में जमानत से शुरू हुआ विवाद, उसमें मुस्लिम आरोपित, हिंदू वकील पीड़ित

जिस मामले में जमानत को लेकर वकीलों और जज के बीच बहस की बात कही जा रही है वह एक जालसाजी से जुड़ा केस है। इस जालसाजी के शिकार वकील जितेंद्र सिंह हैं। उनकी शिकायत पर इस मामले में गुलरेज आलम, रिजवान अली, हसमुद्दीन, मोहम्मद फहीम, नसरुद्दीन, फातिमा परवीन, जफरुद्दीन, ख़ुर्शीदन और हाजी आरिफ अली नामजद हैं।
इन सभी पर जमीन के सौदे के नाम पर जितेंद्र सिंह से 90 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। अदालत के आदेश पर यह FIR 2 अक्टूबर 2024 को दर्ज हुई थी। आरोपितों पर IPC की धारा 420, 406, 467, 468, 471 और 120 बी लगाई गई है। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए वकील जितेंद्र सिंह ने बताया कि नियमों के विरुद्ध जाते हुए जिला जज अनिल कुमार ने आरोपितों को अग्रिम जमानत दी थी। वकील इस केस पर सुनवाई की माँग कर रहे थे। लेकिन अनिल कुमार इसके लिए तैयार नहीं थे। उनके यह भी दावा है कि यही जज पूर्व में 18 लाख की एक अन्य धोखाधड़ी केस में अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर चुके हैं।

कर्नाटक : चुनाव आयोग आंखे खोलो, चुनाव रद्द करो; हजारों महिलाओं की सेक्स वीडियो रिकॉर्डिंग, घर-घर जाकर अश्लील फोटो दिखा वोट न करने की अपील: एक्शन में महिला आयोग

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (बाएँ) और कर्नाटक महिला आयोग प्रमुख नागालक्ष्मी चौधरी (साभार: Deccan Herald & ET)
कर्नाटक महिला आयोग ने राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को एक पत्र लिख कर एक मामले में SIT जाँच की माँग की है। कर्नाटक महिला आयोग ने यह जाँच कथित तौर पर हासन में वायरल हो रही सेक्स वीडियो के विषय में करने को कहा है। आयोग ने कहा है कि हासन में बड़े नेता ने महिलाओं से सेक्सुअल फेवर की माँग की और कुछ का रेप तक किया।

कर्नाटक महिला आयोग ने कहा है कि हासन में हजारों महिलाओं सेक्स वीडियो की वीडियो रिकॉर्ड की गई हैं। उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है और इससे समाज का सर शर्म से झुक गया है। आयोग ने कहा है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया एक SIT बनाकर इस मामले में की जाँच करवाएँ।

कर्नाटक महिला आयोग की अध्यक्ष नागलक्ष्मी चौधरी ने इस पत्र में कहा है कि उनको इन वीडियो के वायरल होने की शिकायत कर्नाटक राज्य महिला दुर्जन्य विरोधी वेदिके नाम की एक संस्था से मिली है। आयोग ने कहा है कि महिलाओं की यह आपत्तिजनक वीडियो पेन ड्राइव के जरिए वायरल की जा रही हैं। महिला आयोग ने एक पत्र कर्नाटक के DGP को भी लिखा है।

दूसरी तरफ हासन के वर्तमान सांसद और जेडीएस नेता प्रज्व्वल रेवन्ना के एक पोलिंग एजेंट ने पुलिस से एक शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि जेडीएस सांसद की फर्जी अश्लील वीडियो वायरल की जा रही हैं।

पोलिंग एजेंट तेजस्वी एमजी ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके सांसद की अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर कुछ लोग हर दरवाजे जा रहे हैं और प्रज्ज्वल रेवन्ना के खिलाफ वोट ना देने की अपील कर रहे हैं। इससे चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। तेजस्वी एमजी ने आरोप लगाया कि नवीन नाम का शख्स कुछ लोगों के साथ मिलकर यह काम कर रहा है।

प्रज्व्व्ल रेवन्ना देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। वह 2019 में हासन से सांसद बने थे। इस बार वह फिर इस सीट से ताल ठोंक रहे हैं। इस बार उनको भाजपा का भी समर्थन प्राप्त है क्योंकि राज्य में दोनों पार्टियों ने गठबंधन किया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के श्रेयस एम पटेल से है।

कांग्रेस ने हासन में वायरल हो रहे वीडियो को लेकर एचडी कुमारस्वामी को भी घेरा है। कांग्रेस ने एक ट्वीट में लिखा है, “कुमारस्वामी क्या आप जिस पेन ड्राइव को लम्बे समय से सीक्रेट बना कर रख रहे थे अब बाहर आ गई है? क्या हासन की सड़कों पर घूम रही पेन ड्राइव आपकी है?”

अवलोकन करें:-

क्या चुनाव आयोग कुछ मामलों में लड़खड़ाया हुआ है? कांग्रेस के “Communal Manifesto” और राहुल के बयानों पर स्वतः

कर्नाटक के हासन में शुक्रवार (26 अप्रैल, 2024) को मतदान है। इन कथित सेक्स वीडियो के सामने आने के बाद इनका प्रभाव चुनाव पर भी पड़ सकता है।

क्या हिंदू नववर्ष पर करौली में हिंसा के पीछे PFI? अब RSS को दोषी बता रहे कांग्रेस के मंत्री

                               हिंसा से 2 दिन पहले PFI ने गहलोत सरकार और DGP को लिखी थी चिट्ठी
राजस्थान के करौली में हिंदू नव वर्ष पर 2 अप्रैल 2022 को हिंसा हुई थी। क्या इसके पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) का हाथ है? यह सवाल एक पत्र से खड़ा हुआ है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस हिंसा से ठीक पहले लिखी गई थी।

1 अप्रैल को PFI ने एक प्रेस रिलीज जारी कर विवाद की बात कही थी। इस संबंध में राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ द्वारा सीएम को चिट्ठी लिखने की बात बताई थी। य​ह चिट्ठी राज्य के पुलिस महानिदेशक को भेजे जाने की बात भी कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि हाल के समय में देश के कई हिस्सों में सुनियोजित हिंसा में पीएफआई का नाम सामने आया है।

इस पत्र में लिखा गया था, “दिनांक 2 से 4 अप्रैल तक राजस्थान के तमाम जिलों, तहसीलों और कस्बों में RSS और उनके अन्य संगठनों द्वारा हिन्दू नववर्ष के अवसर पर भगवा रैली आयोजित की जा रही है। इन रैलियों में धार्मिक उन्माद फैलाने वाले नारों को प्रतिबंधित करने, साम्प्रदायिक सौहार्द को बचाने, कानून-व्यवस्था को कायम रखने और इन आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करवाने की माँग की जाती है।”

                                                         1 अप्रैल को पीएफआई की प्रेस रिलीज

इस संबंध में पूछे जाने पर राजस्थान सरकार के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, “सरकार के पास इनपुट था। पुलिस ने उसकी तैयारी भी की थी। सब जगह पुलिस साथ में चल रही थी। हम बहुत सख्त हैं और आगे कार्रवाई भी होगी। लेकिन जिस तरफ से BJP के लोग जुलूस निकाल रहे हैं, तो अगर BJP और RSS अपने कार्यालय में बैठ कर तय करवाते हैं कि राजस्थान में दंगे करवाने हैं तो इसका कोई इलाज ही नहीं है। इनका एजेंडा तय है कि दंगे करवाने हैं।”

भाजपा एवं संघ विरोधियों को किसी भी दंगे में भाजपा या आरएसएस ही क्यों दिखती है? क्या छतों से पत्थर बीजेपी और आरएसएस वाले फेंक रहे थे? आखिर कब तक ये छद्दम सेक्युलरिस्ट्स दंगाइयों को संरक्षण देते रहेंगे? इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने में भाजपा विरोधी हाशिए पर आने लगे हैं, उसके बावजूद अभी भी कोई अपनी गलती को सुधारने को तैयार नहीं।  

वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने करौली हिंसा के मामले में एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद उन्होंने कहा, “अपराधी चाहे किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। SIT की टीम मौके से सबूत जुटा रही है। पुलिस ने अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी बताई है। लगभग 15 लोग हिरासत में हैं जिनसे पूछताछ की जा रही है। CCTV फुटेज चेक कर बाकी आरोपितों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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राजस्थान : करौली में हिन्दू नव वर्ष के जुलूस पर हमला ; गंगा-जमुनी तहजीब किसके इशारों पर हुई तार-ता

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राजस्थान : करौली में हिन्दू नव वर्ष के जुलूस पर हमला ; गंगा-जमुनी तहजीब किसके इशारों पर हुई तार-ता

करौली हिंसा में कुल 43 लोग घायल हुए थे। अभी भी इंटरनेट बंद हैं। जिन छात्रों की क्लास 12 बोर्ड की परीक्षाएँ चल रही हैं, उनके प्रवेश पत्र ही उनके पास के तौर पर काम आएँगे। बच्चों को परीक्षा केंद्र तक ले जाने के लिए उनके अभिभावकों को भी छूट दी गई है। सरकारी कर्मचारी अपना पहचान-पत्र दिखा कर ऑफिस जा सकते हैं।