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ब्राह्मण विरोधी नफरत, कश्मीरी पंडितों का मजाक और विक्टिम कार्ड: अंबेडकरवादी लक्ष्य लेकी ने की साइबर बुलिंग, वकील ट्यूलिप शर्मा ने दर्ज कराई शिकायत

                                   लक्ष्य लेकी, ट्यूलिप शर्मा (फोटो साभार: Instagram)
खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लक्ष्य लेकी सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गए हैं। IIM इंदौर से पढ़े और TedX स्पीकर लक्ष्य के खिलाफ क्रिमिनल लॉयर और इन्फ्लुएंसर ट्यूलिप शर्मा ने साइबर शिकायत दर्ज कराई है। उस पर ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने, जातिगत गालियाँ देने और महिलाओं को अपमानजनक मैसेज भेजने का आरोप है।

ऑपइंडिया से बातचीत में ट्यूलिप ने शिकायत के बारे में कहा कि ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि लक्ष्य जैसे लोग एक जगह पर नहीं रुकते, वो लगातार ऐसी हरकतें करते रहते हैं।

लक्ष्य लेकी आईआईएम इंदौर के ग्रेजुएट हैं और टीईडीएक्स स्पीकर भी रह चुके हैं। वे ‘लक्ष्य स्पीक्स’ नाम से इंस्टाग्राम पेज और यूट्यूब चैनल चलाते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 5 लाख 53 हजार फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब पर 14 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स।

ट्यूलिप ने भारतनाट्यम और देवदासी पर उसके दावों पर उठाए सवाल, तो लक्ष्य ने ब्राह्मणों को दी गालियाँ

ट्यूलिप शर्मा ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल @_tulipsharma पर एक वीडियो डाला। इसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्य लेकी काफी समय से जाति-विरोध के नाम पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी है और इंटरनेट पर नफरत कोई नई बात नहीं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोई विरोधी राय बर्दाश्त न कर सके। वे ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं जो अगर कोई उनके पोस्ट पर विरोधी कमेंट करे तो डीएम में आकर गंदी-गंदी बातें करते हैं।

ट्यूलिप ने बताया कि सब कुछ 11 फरवरी को शुरू हुआ जब लक्ष्य लेकी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो डाला। उसमें उन्होंने दावा किया कि भारतनाट्यम को ब्राह्मणों ने हड़प लिया है। उन्होंने कहा कि भारतनाट्यम ब्राह्मणों की सांस्कृतिक चोरी है, असली डांस सदिर अट्टम या दासी अट्टम था जो देवदासियां करती थीं। उनका कहना था कि तमिल ब्राह्मण महिला रुक्मिणी देवी ने उस डांस के सेक्सुअल/इरोटिक हिस्से को हटा दिया, उसे साफ-सुथरा बना दिया, लेकिन ऐसा करते हुए सदिर अट्टम की असली जड़ों से इसे अलग कर दिया।

इसके जवाब में ट्यूलिप शर्मा ने कमेंट किया, “आपकी लॉजिक के मुताबिक, ‘ब्राह्मण’ महिला रुक्मिणी देवी ने देवदासियों के यौन शोषण के चक्र को खत्म कर दिया। अब इसमें समस्या क्या है? एक तरफ आप इसे दमनकारी व्यवस्था मानते हैं, फिर कोई सुधार करे तो भी समस्या है सिर्फ इसलिए कि सुधार करने वाली ‘ब्राह्मण’ है। हंसते हुए। जिंदगी में थोड़ी क्लैरिटी लाओ और व्हाट्सएप नॉलेज पर निर्भर मत रहो।”

लेकिन ट्यूलिप शर्मा के तर्क का तथ्यों से जवाब देने की बजाय लक्ष्य लेकी उनके डीएम में घुस आए और जातिगत गालियाँ देने लगे। अपने दावे के समर्थन में शर्मा ने बातचीत के स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी शेयर किए। 

ट्यूलिप शर्मा ने बताया कि बात ब्राह्मण लड़कियों की भी नहीं थी, फिर भी लक्ष्य लेकी अपनी ब्राह्मण एक्स गर्लफ्रेंड्स के बारे में डींगें हाँकने लगे। ट्यूलिप ने कहा, “बात ब्राह्मण लड़कियों की नहीं थी लेकिन लक्ष्य लेकी अपनी सारी एक्स को ब्राह्मण बताकर बहस जीतना चाहते थे। पूरी कम्युनिटी की लड़कियों को इस्तेमाल करके बहस जीतना दिखाता है कि वे कितने बड़े जातिवादी हैं।”

लक्ष्य लेकी की ब्राह्मण लड़कियों को ऑब्जेक्ट बनाने वाली सोच को और एक्सपोज करते हुए शर्मा ने बताया कि वो जाति खत्म करने के लिए ‘अंतरजातीय बच्चे’ पैदा करने की बात कर रहा था।

                                                          सोर्स: ट्यूलिप शर्मा का वीडियो

शर्मा ने वीडियो में कहा, “उनका पूरा प्रोफेशन ही ब्राह्मणों को गालियाँ देने पर टिका है और फिर वे अपनी ब्राह्मण एक्स के बारे में डींग मारते हैं। वे और आगे बढ़कर कहते हैं कि अंतरजातीय बच्चे बनाकर जाति खत्म कर रहे हैं।” शर्मा ने बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

एक वीडियो में लक्ष्य लेकी ने खुद कहा था कि वे अपनी एससी/एसटी कम्युनिटी के बाहर डेट करने की हिम्मत नहीं रखते, लेकिन ट्यूलिप शर्मा की एक फीमेल फॉलोअर के मैसेज बॉक्स में उसने लिखा, “ब्राह्मण गर्लफ्रेंड मुझे ब्लो जॉब देती है, प्रॉब्लम?”

                                                         ट्यूलिप शर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी से

कई पब्लिकली शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने ट्यूलिप शर्मा को डीएम में लिखा, “होली चॉप्ड, ब्राह्मण लड़की के लिए तुम बहुत बदसूरत हो।” एक और मैसेज में उन्होंने लिखा, “मेरी गर्लफ्रेंड तुमसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। तुम तो बॉयफ्रेंड वाली भी नहीं लगतीं।”

एक और मैसेज में लक्ष्य ने लिखा, “4 ब्राह्मण एक्स, सब तुमसे ज्यादा खूबसूरत।”

इस बीच ट्यूलिप शर्मा ने अपने फॉलोअर्स को बताया कि उन्होंने आईटी एक्ट और संबंधित बीएनएस सेक्शन के तहत लक्ष्य लेकी के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज करा दी है।

बैकलैश के बीच लक्ष्य लेकी ने दावा किया कि ट्यूलिप शर्मा ने उनके जातिवादी और अपमानजनक मैसेज के जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, वे फेक हैं। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी केस में फंसाने की कोशिश हो रही है।  

एक और वीडियो में लक्ष्य ने फिर दोहराया कि शर्मा के साथ उनकी चैट के सारे स्क्रीनशॉट फेक हैं। इस अंबेडकरवादी जाति एक्टिविस्ट ने विक्टिम कार्ड खेला और खुद की तुलना रोहित वेमुला से कर दी।

लक्ष्य ने कहा कि रोहित वेमुला के साथ भी इसी तरह की तरकीबें इस्तेमाल की गई थीं। लक्ष्य का रोहित वेमुला से अपनी तुलना करना बहुत बेशर्मी भरा था, क्योंकि असल में तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि वेमुला एससी जाति से नहीं थे।  

अक्सर घटिया प्रोपेगेंडा करता रहा है लक्ष्य लेकी

ज्यादातर कथित जाति-विरोधी ‘एक्टिविस्ट्स’ की तरह लक्ष्य लेकी भी जाति श्रेष्ठता के विरोध के नाम पर ब्राह्मणों को निशाना बनाता रहा है। एक वीडियो में उसने कहा कि दूसरे देशों में वेजिटेरियन होते हैं लेकिन भारत में ‘प्योर वेजिटेरियन’ होते हैं। ब्राह्मणों के शाकाहार से जुड़े धार्मिक विश्वास पर हमला करते हुए उसने कहा, “केवल भारत में ही ‘प्योर वेजिटेरियन’ का कॉन्सेप्ट है। क्योंकि यहाँ शाकाहार सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं है। ये शुद्धता, श्रेष्ठता और जाति के बारे में है। ये कहने के बारे में है कि मैं भगवान के ज्यादा करीब हूँ और तुम मांस खाने वाले दलित कम हो। वो ब्राह्मणवादी नजरिया तो वीगन लोगों में भी दिखता है जब वे दलित एक्टिविस्ट्स को वीगन न होने पर शर्मिंदा करते हैं।”

लक्ष्य ने ये नैरेटिव फैलाया कि ‘प्योर’ शब्द का मतलब जातिगत श्रेष्ठता या भगवान से ज्यादा निकटता है, जबकि असल में ये सिर्फ शाकाहार में सख्ती को दिखाता है।

जुलाई 2025 में एक पॉडकास्ट में लक्ष्य ने दावा किया कि ब्राह्मणों ने मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भेदभाव किया। उसका कहना था कि ब्राह्मणों ने शिवाजी की जाति की वजह से उनका राजतिलक करने से इनकार कर दिया था और उन्हें बनारस से पुजारी बुलाने पड़े।

ये दावा कट्टर ‘जाति-विरोधी’ एक्टिविस्ट्स द्वारा गढ़ा गया ब्राह्मण-विरोधी नैरेटिव का हिस्सा है। हकीकत में स्थानीय ब्राह्मणों ने शिवाजी का ताज नहीं ठुकराया था क्योंकि उन्हें उनकी जाति से कोई समस्या थी, बल्कि इसलिए कि उन्हें ऐंद्रेय राजाभिषेक करना नहीं आता था। इसलिए बनारस से गागाभट्ट को बुलाया गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि गागाभट्ट भी मराठी ब्राह्मण थे, उनका परिवार महाराष्ट्र के पैठण से था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राजतिलक को लेकर विवाद वैदिक रीति बनाम तांत्रिक रीति को लेकर था।

अपने एक एक्स पोस्ट में लक्ष्य ने यादवों को हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसाया क्योंकि ब्राह्मण और ठाकुर उनके साथ शादी के रिश्ते नहीं जोड़ते। उसने लिखा, “और यादव, अपनी राजनीतिक ताकत और क्षत्रियता के दावों के बावजूद, ठाकुरों और ब्राह्मणों द्वारा बराबर नहीं माने जाते। कोई अंतरजातीय शादी नहीं। कोई सम्मान नहीं। सिर्फ ग्रेडेड इनइक्वालिटी। मेरे यादव भाइयों और बहनों इस जाति पिरामिड का हिस्सा बनने की कोशिश मत करो।”

आश्चर्य की बात नहीं कि लक्ष्य लेकी 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का फैन है। उन्होंने मुस्लिम विक्टिमहुड का नैरेटिव फैलाया और कन्हैया कुमार के राजनीतिज्ञ बनने की तुलना उमर खालिद के जेल में रहने से की, सिर्फ इसलिए कि खालिद मुस्लिम है।

खालिद की लंबी जेल पर दुख जताते हुए लक्ष्य ने लिखा, “दो स्टूडेंट लीडर्स। एक ही कैंपस। एक जैसे आरोप। लेकिन दो बहुत अलग किस्मत। कन्हैया कुमार आजाद हैं, मुख्यधारा की राजनीति में आ गए। उमर खालिद, एक मुस्लिम, बेल के बिना 5 साल जेल में। ये संयोग नहीं है। भारत में मुस्लिम होने की कीमत है।”

दिलचस्प बात ये है कि लक्ष्य ने कहा कि उमर खालिद ‘मुस्लिम होने की कीमत’ चुका रहा है, जबकि खालिद खुद को नास्तिक बताता रहा है।

इस्लामो-लेफ्टिस्टों द्वारा उमर खालिद के लिए समर्थन और सहानुभूति जुटाने के लिए फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव के विपरीत ऑपइंडिया ने पहले रिपोर्ट किया था कि 2023 और 2024 में 14 स्थगनों में से 7 स्थगन खुद उमर खालिद ने माँगे थे। इसलिए जमानत वापस लेना ‘देरी’ की वजह से नहीं था। जबकि इस्लामी-लेफ्ट इकोसिस्टम ‘अन्याय’ का रोना रोता रहता है, असल में आरोपित के वकील की नाकाम कोशिशों की वजह से खालिद इतने दिनों से जेल में हैं।

दरअसल, भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इस साल कहा था कि असली समस्या कुछ वकीलों और राजनीतिक ग्रुप्स की सोच में है जो अपने केस सिर्फ कुछ खास जजों से सुनवाना चाहते हैं। ऑपइंडिया ने बार-बार रिपोर्ट किया है कि खालिद की लीगल टीम ने फरवरी 2024 में ‘परिस्थितियों में बदलाव’ का हवाला देकर जमानत अर्जी वापस लेने से पहले कम से कम सात बार स्थगन माँगा था।

कई सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने 1990 के दशक में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार और पलायन का भी मजाक उड़ाया। एक कमेंट के जवाब में लक्ष्य ने लिखा, “कश्मीर ब्राह्मणों का यही हालत था।” एक और में लिखा, “मुझे कुछ नहीं होगा, तुम्हारे कश्मीरी पंडित भाइयों की तरह।”

हापुड़ : हनुमान चालीसा पाठ पर भड़के SC दबंग, प्रजापति माँ-बेटे को जूतों की माला पहनाकर निकाला जुलूस-अंबेडकर प्रतिमा के सामने रगड़वाई नाक

                      माँ-बेटे के साथ अपराध करने वाले 4 आरोपित गिरफ्तार (साभार X_@hapurpolice)
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ शाहपुर चौधरी गाँव में एक माँ और उसके बेटे को जूतों की माला पहनाकर पूरे गाँव में घुमाया गया और उन्हें अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया। इस पूरी घटना से जुड़ी FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है और अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

मंदिर में विवाद और जूतों की माला का ‘फरमान’

 जानकारी के अनुसार, घटना की जड़ें अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय से जुड़ी हैं। पीड़ित युवक दीपक चौधरी (प्रजापति समुदाय) के अनुसार, उस दौरान गाँव के मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था, तभी दलित समुदाय के एक युवक ने हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसका दीपक ने विरोध किया था।

आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 26 जनवरी 2026 को कुछ दलित युवकों ने दीपक को रास्ते में रोक लिया और गाली-गलौज की। इसके बाद उसकी माँ को भी मौके पर बुला लिया गया। गाँव की पंचायत ने कथित तौर पर एक ‘तालिबानी’ फरमान सुनाया कि दोनों को जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाए ताकि धर्म पर टिप्पणी का बदला लिया जा सके।

प्रतिमा के सामने नाक रगड़वाई और निकाला जुलूस

पीड़ित ने FIR में आरोप लगाया कि उसे और माँ को जबरन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने ले जाया गया और वहाँ उनकी नाक रगड़वाई गई। इसके बाद भीड़ ने दोनों के गले में जूतों और चप्पलों की माला डाल दी और पूरे गाँव में उनका जुलूस निकाला।
इस दौरान माँ-बेटे के साथ मारपीट भी की गई और उन्हें हाथ जोड़कर माफी माँगने पर मजबूर किया गया। यह पूरी शर्मनाक घटना गाँव में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस की कार्रवाई और गाँव में तनाव

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गढ़ कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर तत्काल 10 नामजद युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार आरोपितों (अनिल, अमित, सागर और विनीत) को गिरफ्तार कर लिया है।

गढ़ कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र विष्ट ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक आरोपित पुलिस विभाग से जुड़ा है, जिसकी जाँच की जा रही है। फिलहाल गाँव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मोहम्मद शमी की बेटी ने खेली होली, रंग-गुलाल वाली तस्वीर देख गाली देने लगे इस्लामी कट्टरपंथी: कहा- जाहिल-बेशर्म… रमजान का महीना है शर्म करो

                                           मोहम्मद शमी की बेटी को होली खेलने पर ट्रोल किया गया
भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस बार कट्टरपंथियों ने उनकी बेटी को अपना निशाना बनाया है। मोहम्मद शमी की बेटी के होली खेलने को लेकर कट्टरपंथी भड़क गए हैं रमजान, इस्लाम, इल्म आदि का ज्ञान दे रहे हैं। शमी की बेटी से जुमे की नमाज का समय पूछा जा रहा है, उनकी परवरिश पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों का यह गुस्सा मोहम्मद शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहाँ की एक पोस्ट पर निकला है। हसीन जहाँ ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को अपनी बेटी आयरा शमी की एक फोटो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की थी। इसमें दिखता है कि आयरा रंग खेल कर आई हैं। 

आयरा के कपड़ों और चेहरे आदि पर रंग-गुलाल लगा हुआ था। हसीन जहाँ ने इसी फोटो के साथ होली की शुभकामनाएँ भी दी। इसी फोटो को देखने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए और हसीन जहाँ तथा उनकी बेटी को लेकर बुरा भला कहने लगे।

 जुनैद नाम के एक व्यक्ति ने शमी की बेटी की फोटो पर लिखा, “जुमे की नमाज पहले पढ़ी है या बाद में?”

वहीं एक और अकाउंट ने लिखा, “रमजान मंथ है यार शर्म करो।”

इमरान शेख ने हसीन जहाँ पर प्रश्न उठाए और कहा, “वाह क्या तालीम दी है बेटी को!”

कुछ कट्टरपंथियों ने गालियाँ तक लिखीं और चाकू-बन्दूक वाले इमोजी कमेन्ट किए।

शमी की बेटी को इस्लाम सिखाने वालों ने उनकी माँ हसीन जहाँ को भी इसमें घसीट लिया। उनको बेशर्म और जाहिल करार दिया गया।

अब्दुल कलाम ने लिखा, “जाहिल औरत को रमजान महीने में भी शर्म नहीं आई, मैं इसे अभी ब्लॉक कर रहा हूँ।”

साकिब आलम ने लिखा, “बेशर्म औरत *सी।’ रहेब नाम के एक शख्स ने यह पूछ लिया कि आखिर वह मुस्लिम हैं भी या नहीं।

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मोहम्मद शमी इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आए हों। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्होंने ग्राउंड पर जूस पी लिया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए थे। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उन्हें गुनहगार बताया था।

मौलाना ने कहा था, “इस्लाम ने रोज़े को फर्ज़ करार दिया है। सभी पर रोज़ा फर्ज़ है। अगर कोई जानबूझकर रोज़ा नहीं रखता, तो वह गुनहगार है। ऐसा ही क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने किया। उन्होंने रोज़ा न रखकर बहुत बड़ा गुनाह किया है। शरिया की नज़र में यह कटघरे में खड़े हैं और मुजरिम हैं…।”

‘अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने झूठ फैला कर किसी को बदनाम नहीं कर सकते’: हटाओ रजत शर्मा वाला वीडियो: दिल्ली हाईकोर्ट से कॉन्ग्रेस नेताओं को झटका : बीजेपी को सीख लेनी चाहिए


न्यूज़ चैनल ‘India TV’ के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को मानहानि के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राहत दी है। साथ ही कांग्रेस नेताओं को रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स डिलीट करने के लिए कहा गया है। ‘आप की अदालत’ इंटरव्यू शो के लिए लोकप्रिय रजत शर्मा पर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी की प्रवक्ता रागिनी नायक को उन्होंने बीच शो में धीमे से गाली दी। हालाँकि, वीडियो में गाली सुनाई नहीं दे रही है।

रजत के इस प्रकरण से बीजेपी को सीख लेनी चाहिए। इसी चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा बीजेपी के विरुद्ध इतना दुष्प्रचार किया गया, जनता द्वारा चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवाई जा रही है, लेकिन बीजेपी को कोर्ट जाना था, कांग्रेस विजेताओं को अयोग्य घोषित करवाना चाहिए। क्या कर रहे गौरव भाटिया, निमेष पाठक और रवि शंकर प्रसाद और विधि प्रकोष्ठ आदि? 

कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के सेक्रेटरी इंचार्ज जयराम रमेश, मीडिया एवं पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा और पार्टी के विदेश मामलों की संयोजक रागिनी नायक को अब रजत शर्मा के खिलाफ किए गए ट्वीट्स हटाने पड़ेंगे। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इसके लिए तीनों नेताओं को एक सप्ताह का समय दिया है। Google को आदेश दिया गया है कि जो वीडियो सार्वजनिक हो चुके हैं उन्हें प्राइवेट किया जाए, बिना न्यायिक आदेश के उन्हें सार्वजनिक न किया जाए।

साथ ही इन तीनों नेताओं ने YouTube और X (पूर्व में ट्विटर) पर इस संबंध में जो भी पोस्ट किए, उनके URLs को हटाने के लिए भी दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है। मामला लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना के दिन चल रहे डिबेट शो का है। तीनों नेताओं ने एक एडिटेड वीडियो को ये कह कर पोस्ट किया कि ये इंडिया टीवी के डिबेट शो के रॉ फुटेज हैं। कोर्ट ने टी डिबेट का फुटेज देख कर कहा कि प्रारंभिक रूप से लगता है कि रजत शर्मा ने किसी गाली का इस्तेमाल नहीं किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर ये वीडियो सार्वजनिक मीडिया में मौजूद रहते हैं तो इससे रजत शर्मा को भविष्य में बदनाम किए जाने की आशंका बनी रहेगी और उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए व्यावहारिक रूप से नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकेगी। कोर्ट ने कहा कि मानहानि और आलोचना के बीच एक पतली सी रेखा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि अभिव्यक्ति एवं बोलने की आज़ादी के तहत किसी की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँचाई जा सकती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने ‘रजत शर्मा ने गाली दी’ वाक्य का इस्तेमाल किया, जो तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से पेश करने के बराबर है। कोर्ट ने कहा कि रजत शर्मा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ये सब किया गया। इंडिया टीवी ने पहले भी बताया था कि रजत शर्मा पर लगाए गए आरोप गलत हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रागिनी नायक अक्सर टीवी डिबेट्स में हल्ला-गुल्ला करने के लिए जानी जाती हैं। जयराम रमेश पहले भी कई बार झूठ फैला चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अत्यधिक सनसनी बनाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं ने झूठ फैलाया।

कर्नाटक /उत्तर प्रदेश : ताजुद्दीन ने राम मंदिर को ‘बाबरी मस्जिद’ बता कर लगा दिया पाकिस्तानी झंडा, राम-सीता को गाली दे रहे शख्स को उत्तर प्रदेश पुलिस ने उठाया

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने की कोशिश भी की गई। कर्नाटक में ताजुद्दीन दाफेदार नाम के युवक ने सोशल मीडिया पर राम मंदिर की फोटो को एडिट करके उस पर पाकिस्तान के तीन झंडे लगा दिए। यही नहीं, उसने फोटो पर बाबरी मस्जिद भी लिख दिया और इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने से सरकार और हिन्दू समाज को अधिक सतर्क रहने की जरुरत है। क्योकि कट्टरपंथियों और सनातन विरोधियों का असली खेल अब शुरू होगा। ये रामलला की प्राण प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि भारत के उस वास्तविक इतिहास से धूल हटने का शंखनाथ हुआ, जिसे कुर्सी के भूखे और अपनी तिजोरियों को भरने मुस्लिम कट्टरपंथियों के हाथ कठपुतली बन धूमिल कर दिया था।  

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीणा के तारों को छेड़ा है तो सनातन विरोधियों के विरुद्ध कठोर कानून भी बनाना चाहिए, जिसमें इन सनातन विरोधियों पर होती कार्यवाही का समर्थन करने वालों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। पत्थरबाजों पर blind firing और जिस स्थान(मकान, मंदिर/मस्जिद) पर पत्थरों का जमावड़ा मिले, उस स्थान को सरकार तुरंत अपने अधिकार में ले लेना चाहिए। पत्थर सप्लाई और उसके लिए धन देने वालों पर भी कठोर कार्यवाही करने का प्रावधान हो। पत्थरबाज़ी में नागरिक को तो चोट पहुँचती है, लेकिन पुलिस भी लपेटे में आती है।  

कर्नाटक में ताजुद्दीन ने लगाया पाकिस्तान झंडा

ये मामला कर्नाटक के गडग जिले का है। जहाँ ताजुद्दीन ने ऐसी घटिया हरकत को अंजाम दिया। इस मामले में हिंदू संगठन के लोगों ने आवाज उठाई। हालाँकि जब मामला हंगामे तब्दील होने लगा, तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपित की पहचान की और उसे ट्रेस करके गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, पुलिस ने आरोपित की आईडी से वो पोस्ट डिलीट करवा दी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है। इस मामले में गडग के एसपी बाबासाब नेमागौड ने बताया है कि आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। उसके बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है।

पीलीभीत में भगवान राम और माता सीता पर अभद्र टिप्पणी

उत्तर प्रदेश समेत सारा भारत रामलला के आगमन की खुशियाँ मना रहा था, तो खुद को एथीस्ट बताने वाले दिव्य यशस्वी नाम के एक्स हैंडल ने भगवान राम और माता सीता पर अभद्र टिप्पणी कर दी। उसने राम भक्तों को गोबरजीबी भी कहा। यही नहीं, उसने ये कह कर लोगों का मजाक उड़ाया कि सीता जी को छोड़ने वाले राम को ये गोबरजीवी लोग मर्यादा पुरुषोत्तम करते हैं।
                                                               
एक्स पर अभद्र टिप्पणी
उसके इस पोस्ट पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक व्यक्ति ने उसके घर का पता पूछा, तो उसने अपना घर पीलीभीत बताया।
इस पोस्ट के थोड़ी ही देर बार पीलीभीत पुलिस ने एक्स पर जवाब दिया है कि आरोपित को लोकेट करके उसे हिरासत में ले लिया गया है।
                                  दो घंटे के भीतर पीलीभीत पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लिया
इधर पीलीभीत पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लिया, उधर लोगों ने माँग की है कि आरोपित की फोटो ज़रूर एक्स पर शेयर की जाए।

आतंकी जैसा, नफरत फैलाने वाला, भीख पर पलने वाला… मोहम्मद जुबैर को क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद द्वारा आईना दिखा, औकात दिखाने पर कांग्रेस और इस्लामिक कट्टरपंथी उतरे बचाव में


क्रिकेट की पिच पर फुदकते पाकिस्तानियों को पेवेलियन भेज औकात दिखाते थे वेंकटेश प्रसाद। वही फास्ट बोलर वेंकटेश अब सोशल मीडिया पर भी उसी फॉर्म में हैं – बेखौफ, बेधड़क! बस मैदान अलग है, टारगेट बदल गया है। मोहम्मद जुबैर नाम के फर्जी फैक्ट-चेकर ने जब वेंकटेश प्रसाद को टारगेट करना चाहा तो उसी की भाषा में चमाटेदार जवाब मिला।
                           वेंकटेश प्रसाद को डिलीट किए गए ट्वीट पर घेरना चाह रहा था जुबैर

इसकी शुरुआत होती है मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट से, जो उसने वेंकटेश प्रसाद को टारगेट कर लिखा। इसमें वेंकटेश प्रसाद के एक डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाया गया था। वेंकटेश ने यह ट्वीट 9 सितंबर को किया था, जो किसी कारण से डिलीट किया गया होगा। इसी पर ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ बनते हुए मोहम्मद जुबैर टूट पड़ा। बिना यह सोचे कि वेंकटेश उसे क्लिन बोल्ड करने वाले हैं। और हुआ भी ऐसा ही।

वेंकटेश प्रसाद ने मोहम्मद जुबैर की भाषा में ही जवाब दिया, उसके डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट लगाते हुए। उन्होंने लिखा:

“हाहाहा… हमेशा नफरत फैलाने वाला वो बोल रहा है, जिसने अपने एजेंडे के लिए कई लोगों की जान खतरे में डाल दी। तुम फैक्ट-चेकर के भेष में ठीक वैसे हो, जैसे कोई आतंकी शांति की बात कर रहा हो। अब पोस्ट करो कि तेरे को पैसे की जरूरत है, अपनी वेबसाइट के लिए भीख माँगो… क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाकर पेट पालने में तुम्हे कोई शर्म नहीं।”

राम-भक्त वेंकटेश को घेर रहे थे जुबैर के चमचे, खाए बाउंसर

जुबैर को उसके ट्वीट पर जब करारा जवाब मिल गया तो उसके चमचे वेंकटेश प्रसाद की ट्रोलिंग करने लगे। रोशन राय नाम के एक यूजर ने तो ‘राम-भक्त’ लिखते हुए वेंकटेश को चैलेंज तक कर डाला। लेकिन अफसोस! वेंकटेश ने यहाँ भी फास्ट बोलर वाली तेजी के साथ ही उसे धो डाला।
रोशन राय ने वेंकटेश प्रसाद के डिलीट किए गए ट्वीट के बारे में पूछा था, जिस पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने लिखा कि उनका ट्वीट एक सामान्य ट्वीट था। जिसमें उन्होंने एक भ्रष्ट व्यक्ति के कारण उसके संगठन पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव की बात कही थी। वेंकटेश ने यह भी कहा कि वर्ल्ड कप में टिकटों को लेकर वो बीसीसीआई की अक्षमता पर भी खुल कर लिख चुके हैं, इसी कारण से भ्रम पैदा हुआ। और ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने लिखा: “वरना नाम लेकर, खुल कर बोलने में रामभक्त किसी को छोड़ते नहीं, जय श्री राम।”
वेंकटेश प्रसाद को 9 सितंबर 2023 वाले ट्वीट को अगर गलत मंशा से डिलीट करना होता तो वो फिर से 10 सितंबर को वही ट्वीट एक लाइन जोड़ कर नहीं करते।
जुबैर ने बिना संदर्भ जाने उनको ट्रोल करना चाहा, जिसने कभी भारत का झंडा बुलंद किया है। और जुबैर ने क्या किया है? फर्जी और एडिट किए गए वीडियो के दम पर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगवाए, कट्टर इस्लामी लोगों को हिंदुओं की हत्या के लिए उकसाया।

मोहम्मद जुबैर: फैक्ट-चेकर की भेष में इस्लामी कट्टरपंथी

वो मोहम्मद जुबैर ही था जो ‘Times Now’ चैनल पर आए नाविका कुमार की उस डिबेट का एडिट किया हुआ वीडियो इस्लामी संगठनों तक लेकर गया था, जिसमें नूपुर शर्मा ने इस्लामी साहित्य में लिखी किसी बात का उल्लेख किया था। उससे पहले इस्लामी कट्टरपंथी तस्लीम रहमानी क्या कह रहा था, किस तरह शिवलिंग और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बना रहा था – इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसे एक साजिश के तहत एडिट कर दिया था मोहम्मद जुबैर ने।
एडिट वीडियो वायरल होने के बाद क्या हुआ? मोहम्मद ज़ुबैर वामपंथी मीडिया का हीरो बना… लेकिन नूपुर शर्मा और उनके परिवार को छिप कर रहना उनकी मजबूरी है। कन्हैया लाल तेली, उमेश कोल्हे और प्रवीण नेट्टारू को तो मार ही डाला गया।
फर्जी फैक्ट-चेकर जुबैर कैसे खबरों से खेल कर फेक न्यूज फैलाता है, BefittingFacts नाम के ट्विटर (अब X) यूजर ने इस पर लंबा थ्रेड लिखा है। वेंकटेश प्रसाद ने इस थ्रेड पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह अपने मालिक लोगों से सवाल नहीं करेगा और फिर से पत्रकारिता के नाम पर भीख माँग कर पेट पालेगा।
कॉन्ग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने लिखा, “प्रिय वेंकटेश प्रसाद आप हर किसी के लिए हीरो की तरह हैं। इस दुनिया ने आपको बहुत कुछ दिया है। कृपया कृतज्ञ रहें। जिस तरह आप जुबैर के लिए निगेटिव हैं, दूसरों के लिए निगेटिव न बनें। आपके पास जो कुछ भी है उसकी खुशी मनाएँ। आप पॉवर में हैं, उसे टारगेट न करें। ये उचित नहीं है।”
प्रोपेगेंडा कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य ने लिखा, ‘मैं दशकों से आपका फैन रहा हूँ। लेकिन इस भाषा ने मेरा दिल तोड़ दिया, वेंकी सर।”
रेडियो जॉकी से न्यूजपेडलर बनी सायमा ने लिखा, “एक-एक करके सभी हीरो गिर रहे हैं। यह कितना निराशाजनक है। अपनी भाषा देखिए। कैसी बीमार मानसिकता है। यह बेहद शर्मनाक है।”
कथित पत्रकार जोया रसूल ने अपना परमानेंट टाइप ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए लिखा, “एक पूर्व क्रिकेटर अब एक ट्रॉल बन गया है। सामूहिक हत्यारों का समर्थक और मॉब लिंचर से सहानुभूति रखने वाला आतंकियों के बारे में बात कर रहा है? आप कायर हैं जो हर दिन हत्या करने वाले आतंकियों को मौन समर्थन देते हुए एक मुस्लिम को आतंकी कहने से पहले दो बार नहीं सोचते।”
कर्नाटक के उडुपी में हुए टॉयलेट कांड में लीपापोती करने की कोशिश करने वाली ‘पत्रकार’ अनुषा रवि सूद ने लिखा कि हमारे बचपन के नायक आखिर कितना नीचे गिरेंगे।

वेंकटेश प्रसाद ने दिया जवाब

कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथियों और इस्लामवादियों के गुट द्वारा वेंकटेश प्रसाद को भला-बुरा कहे जाने के बाद पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने ‘बाउंसर’ के जरिए जवाब दिया। उन्होंने बताया कि कैसे मोहम्मद जुबैर एक पार्टी विशेष के खिलाफ एजेंडे के तहत काम कर रहा है, पैसे बनाने के लिए। उन्होंने कहा कि वो सब कुछ है, लेकिन फैक्ट-चेकर नहीं।
प्रोपेगेंडाधीश सतीश आचार्य को जवाब देते हुए उन्होंने लिखा, “ऐसे कई उदाहरण हैं जिनसे यह साबित होता है कि यह व्यक्ति अपना एजेंडा आगे बढ़ा रहा है। वीडियो को आसानी से एडिट कर रहा है। पैसे कमाने के लिए किसी राजनीतिक दल के खिलाफ चुनिंदा और पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। वह एक फैक्ट-चेकर के अलावा कुछ भी नहीं है। सच्चाई को न देखने के लिए किसी का अंधा होने की जरूरत नहीं है।”
तहसीन पूनावाला को जवाब देते हुए लिखा कि स्वघोषित फैक्ट-चेकर जुबैर फैक्ट-चेक के नाम पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कई लोगों की जान खतरे में डाल चुका है। लेकिन इसके बाद भी वह अब तक नहीं सुधरा है। अनजाने में ही सही लेकिन शायद आप भी उसे अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
वेंकटेश ने आगे लिखा, “बीसीसीआई ने विश्व कप की टिकट को लेकर जिस तरह का रवैया अपनाया है। उसकी आलोचना करता रहा हूँ। लेकिन अब इस तरह के एजेंडा पेडलर्स का एक उदाहरण दिखाइए जहाँ वह अपने मालिकों के खिलाफ बोल रहा हो। उनकी गै-रजिम्मेदारी और हरकतों ने कई लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।” इन तमाम बातों के बीच वेंकटेश प्रसाद ने डिलीट किए गए पोस्ट को फिर से शेयर किया है।

मोदी विरोध के चक्कर में हिन्दू घृणा : संस्कृत श्लोक में कांग्रेस ने खोजी अश्लीलता

कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी घृणा में संस्कृत भाषा और हिन्दू धर्म को लेकर अश्लीलता फैलाने में लग गई है। मोदी ने दिल्ली में ‘ऑल इंडिया डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटीज’ की पहली बैठक को दिल्ली में 30 जुलाई, 2022 को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने एक संस्कृत श्लोक पढ़ा। बस फिर क्या था, कांग्रेस ने इस श्लोक के एक शब्द को पकड़ कर अश्लील बताना शुरू कर दिया। ये समस्या केवल कांग्रेस ही नहीं, समस्त भाजपा विरोधियों के साथ है, जिन मुद्दों पर सरकार का विरोध करना चाहिए, उन पर सबके मुंह में दही जमा है। 

अब कांग्रेस के इस कृत्य में वामपंथी और लिबरल गिरोह साथ न दे, ऐसा हो ही नहीं सकता है। हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर ‘अश्लील नरेंद्र’ ट्रेंड कराया जाने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस श्लोक के जरिए न्यायपालिका का महत्व को समझा रहे थे, लेकिन विरोधियों को इन सबसे कोई मतलब नहीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में भारतीय इतिहास में क्या कहा गया है। कांग्रेस नेता गौरव पांधी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “सॉरी, क्या कहा?”

बताते हैं कि वो श्लोक कौन सा है। मोदी ने जिस संस्कृत श्लोक का जिक्र किया, वो है – “अंगेना गात्रम नयनेन वक्रतम न्यानेन राज्यम लवनेन भोज्यम। धर्मेना हीनं खालू जीवितं चा न राजते चंद्रमासा बिना निशा।।” इस श्लोक का अर्थ है कि बिना किसी अंग के मानव शरीर, आँखों के बिना चेहरा, एक प्रभावी और शक्तिशाली न्यायपालिका के बिना एक राष्ट्र, बिना नमक के पका हुआ भोजन, धर्म के बिना मानव जीवन और धर्म का पालन करना, वास्तव में आकाश में चंद्रमा एक अंधेरी रात की तरह अलंकृत या दैदीप्यमान नहीं कहा जाता है।

इस श्लोक में जिक्र है कि न्यायपालिका के बिना देश को प्रकाश विहीन समझा जाए, यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझाना चाह रहे थे। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। अब भारत के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के उच्चारण अलग-अलग हैं, क्योंकि यहाँ कुछ ही किलोमीटर पर बोली और भाषाएँ बदल जाती हैं। इसी ही मुद्दा बना कर कॉन्ग्रेस हंगामा कर रही है।

इस दौरान कई लोगों ने जवाहर लाल नेहरू की तस्वीरें शेयर कर के कांग्रेस को बताया कि असली अश्लील कौन है। कुछ ने दिग्विजय सिंह की तस्वीरें भी डालीं। शशि थरूर के भी जिक्र आए। लोगों का कहना है कि संस्कृत को बदनाम कर के कांग्रेस पार्टी ने हिन्दू धर्म के प्रति अपनी घृणा दिखाई है, मोदी के विरोध के चक्कर में। कांग्रेस का हिन्दू विरोध का इतिहास पुराना रहा है। ये कोई पहली बार पार्टी के नेता इस तरह की हरकत नहीं कर रहे हैं।

‘जुलाहे $#डी की औलाद हैं’: योगी सरकार में बुनकर समाज के दानिश आज़ाद अंसारी को मंत्री बनाए जाने से भड़के मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल में राज्य मंत्रिमंडल में दानिश आज़ाद अंसारी नाम के एक मुस्लिम चेहरे को भी जगह दी है। उनके पिछले कार्यकाल में मोहसिन रज़ा योगी  सरकार में मंत्री थे। दानिश आज़ाद अंसारी को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग भी सौंपा गया है। उन्हें राज्यमंत्री का पद दिया गया है। हालाँकि, मुस्लिमों के एक समूह को ये पसंद नहीं आ रहा है।

लेखक और पसमांदा कार्यकर्ता फैयाज अहमद फैजी ने कुछ स्क्रीनशॉट्स शेयर किए, जिसमें मुस्लिम ही दानिश आज़ाद अंसारी को गाली दे रहे हैं। उन्होंने साथ ही लिखा, ‘क्या आपने कभी ऐसा देखा है कि किसी हिन्दू पिछड़े दलित को राजनैतिक भागीदारी मिलने पर सवर्ण समाज की तरफ से इस प्रकार गाली-गलौज किया जाता है? जिस तरह से अशराफ़ समाज के नौजवानों और बुजुर्गो द्वारा एक देशज पसमांदा को भागीदारी मिलने पर लगातार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि मुस्लिमों में नस्लवाद/जातिवाद कितनी गहरी है और उनमें सामाजिक न्याय की कितनी आवश्यकता है। उनके द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में इरफ़ान जिब्रान नाम के एक व्यक्ति ने लिखा है, “ये जुलाहे आजकल खुश क्यों नजर आ रहे हैं? कोई लौकरी लगी है क्या?” वहीं मोहम्मद शाहिद हुसैन ने लिखा, “तुम लोगों से न आज तक कुछ उखड़ा है और न आगे उखड़ेगा। बीएस विधवा विलाप करते रहो।”

वहीं खुद को सामाजिक कमेंटेटर बताने वाले डॉक्टर सैयद रिजवान अहमद ने दानिश आज़ाद अंसारी के एक समर्थक को लिखा, “दो कौड़ी के गटर की औलाद, जुलाहे, कि तेरी जुलाहा सुन कर जली क्यों? सैय्यद-अशरफ सुन कर मेरी तो नहीं जलती गली की पैदाइश? सुन जुलाहे, तेरे जुलाहे भाई ने हरामखोर बोला तो मुझे बुरा नहीं लगा। लेकिन, जुलाहा सुन कर तेरी जल गई। क्या जुलाहा बोलना गाली से भी बदतर है जुलाहे?”

उनके फेसबुक पर 3 लाख से भी अधिक फॉलवर्स हैं। इसी तरह कई अन्य मुस्लिमों ने भी दानिश आज़ाद अंसारी और उनके समाज को खुल कर गाली दी। AIMIM समर्थक रिजु खान ने लिखा, “पूरे हिंदुस्तान की अंसारियों की बहन की $#”। इसी तरह उसने कई बार गंदी-गंदी गालियों का प्रयोग किया और माँ-बहन की लगातार गाली दी। उन्होंने जुलाहा को ‘#$डी की औलाद’ भी कह डाला। इससे अंसारी समाज में खासा गुस्सा है।

उन्होंने मंत्री बनने के बाद बताया कि वो अंसारी परिवार से आते हैं, जिनका मुख्य पेशा बुनकर का रहा है। उनके पिता भी एक बुनकर ही रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक आम बुनकर लड़के को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी ने इतना बड़ा पद देकर विपक्षियों के मुँह पर करारा तमाचा मारा है। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी को मुस्लिमों का सच्चा हितैषी भी करार दिया। 32 साल के दानिश आज़ाद अंसारी लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और ABVP से छात्र राजनीति करने के बाद वो भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी हैं।

‘बिकनी पहन कर मोदी का बिस्तर…’: रुबिका लियाकत द्वारा स्कूलों में बुर्के का विरोध करने पर गाली-गलौज पर उतरे इस्लामी कट्टरपंथी

                                रुबिका लियाकत के लिए महिला विरोधी भाषा का किया गया प्रयोग
कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में बुर्का पहन कर आने की अनुमति के लिए मुस्लिम छात्र हिंसा पर उतारू हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी मीडिया का गिरोह विशेष और विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाए हुए हैं। जब ‘ABP News’ की पत्रकार रुबिका लियाकत ने कहा कि स्कूलों-कॉलेजों में हिजाब या बिकनी नहीं चलेगा, तो वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी उन पर पिल पड़े। जबकि रुबिका लियाकत भी मुस्लिम ही हैं। अयान खान नाम के यूजर ने उनसे पूछ डाला, “क्या तुमने कभी हिजाब पहना है?”

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी ने ट्वीट किया था कि लड़की बिकनी पहने या हिजाब, ये तय करने का अधिकार उन्हें संविधान देता है। हालाँकि, इस दौरान वो ये भूल गईं कि स्कूल-कॉलेजों में अनुशासन पर महत्व दिया जाता है और वहाँ तय ड्रेस कोड का अनुसरण करना होता है। रुबिका लियाकत ने प्रियंका गाँधी को जवाब दिया, “प्रियंका गाँधी जी, आप तो लड़कियों को लड़ना सिखा रही थीं। आपसे ये उम्मीद नहीं थी। स्कूल में न बिकनी चलेगी, न घूँघट, न ही हिजाब चलेगा।”

इसके बाद कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया डिपार्टमेंट के अध्यक्ष रोहन गुप्ता ने उनसे पूछा कि प्रियंका गाँधी की ट्वीट में हिजाब शब्द कहाँ लिखा है? इस पर रुबिका लियाकत ने पलटवार करते हुए उनसे पूछा कि स्कूल की नोटिस में ये कहाँ लिखा है कि बाहर आप बुर्का/हिजाब नहीं पहन सकते? अबसर आलम नाम के यूजर ने लिखा, “तुमसे ज्ञान नहीं चाहिए रुबिका।” इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें ‘दलाल’ कह कर भी सम्बोधित किया। सद्दाम शेख ने लिखा, “अल्लाह के पास सत्ता की दलाली नहीं, हमारे नेक आमाल जाएँगे। आप ईमानदारी का टॉनिक खाइए।”

नसीम अहमद सिद्दीकी नाम के सोशल मीडिया यूजर ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा, “बिकनी पहन कर तू नरेंद्र मोदी का बिस्तर गर्म करती रहो। तुझे क्या पता कि इस्लाम और शरीयत क्या है। पत्रकारिता छोड़ और किसी वेश्या के कोठे पर बैठ जा।”

इन सबके अलावा भी कई अन्य लोगों ने रुबिका लियाकत पर निशाना साधा। सोशल मीडिया पर ‘घूँघट’ का विरोध करने वाले कई एक्टिविस्ट्स अब इस्लाम में महिलाओं को जबरन पहनाए जाने वाले बुर्का का समर्थन कर रहे हैं। उच्च-न्यायालय में इसके समर्थन में कुरान और हदीस से दलीलें दी जा रही हैं। जबकि सच्चाई ये है कि कट्टर सोच वाले मौलानाओं ने महिलाओं पर कई बंदिशें लगाई हुई हैं और ’72 हूर’ की बातें करते हुए उनका अक्सर अपमान करते रहते हैं।

उत्तर प्रदेश चुनाव : ब्राह्मण-क्षत्रिय चोर हैं, हमें इन दोनों जातियों का वोट नहीं चाहिए: अबरार अहमद, सपा विधायक

हिन्दू और हिन्दुत्व को गाली देना इन दिनों सिरफिरे नेताओं ने मजाक समझ रखा है। फिरोज जहांगीर का पोता एवं पोती राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा जनेऊ पहन मंदिरो में जाकर ऐसे माथा टेक रहे हैं जैसे ये बहुत बड़े हिन्दू हैं, मुलायम सिंह यादव निहत्ते रामभक्तों पर गोली चलवाते हैं, अरविन्द केजरीवाल हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, लेकिन इनके वोट बैंक द्वारा किसी हिन्दू की हत्या करने पर चुप्पी साध लेते हैं, विपरीत इसके किसी अख़लाक़ के मारे जाने पर जमीन आसमान एक देते हैं, मायावती कहती थी, तिलक, तराज़ू और तलवार इनके मारो जूते चार, नागरिक संशोधक कानून के विरोध को समर्थन देने वाली पार्टियां हिन्दुत्व विरोधी नारों का समर्थन करती हैं, फिर भी बेशर्म हिन्दू अपने आत्मसम्मान को चूल्हे में डाल ऐसे हिन्दू विरोधी पार्टियों की जी-हजूरी करते हैं। हिन्दुओं जागो, आंखें खोलो और हिन्दुत्व विरोधी पार्टियों को पाताललोक पहुंचाओ। 

संविधान की दुहाई देने वाली इन्हीं पार्टियों ने हिन्दुओं को जात-पात में बांट संविधान का घोर अपमान किया है। आज तक इनमें से किसी की मुस्लिम समाज में हिन्दुओं से अधिक जातियों को एक दूसरे के विरुद्ध करने का साहस नहीं हुआ, क्योकि ये सभी पार्टियां जानती हैं कि जिस दिन ये काम हुआ, कोई इन्हें पानी पिलाने वाला नहीं मिलेगा, क्योकि इस्लाम के नाम पर ये सब एकजुट हैं। जबकि हिन्दू किस तरह जात-पात के नाम पर विभाजित हो गया है। 

लेकिन उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव निकट आ रहे हैं, फिर समाजवादी पार्टी के नेताओं के बोल बिगड़ने शुरू हो गए हैं। हिन्दुओं को ऐसे नेता और पार्टियों को धूल चटानी चाहिए। 

क्या समाजवादी पार्टी को ब्राह्मण-क्षत्रिय वोट नहीं चाहिए? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो से तो ऐसा ही लगता है। 
एक तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जातिगत समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं. प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं, भगवान परशुराम की मुर्ति लगवा रहे हैं. वहीँ दूसरी ओर सपा विधायक ब्राह्मणों और क्षत्रियों को चोर बता रहे हैं और कह रहे हैं की हमें इन दोनों जातियों का वोट नहीं चाहिए। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी विधायक अबरार अहमद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में अबरार अहमद ब्राह्मण और क्षत्रिय जाति के वोटर को ‘चोट्टा’ बोलते हुए सुने जा सकते हैं। उनका कहना है कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें ब्राह्मणों और क्षत्रियों के वोट की जरूरत नहीं है, उनके बिना भी वह जीत सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ब्राह्मण और क्षत्रिय जाति के मतदाताओं को ‘चोट्टा’ बोलते हुए सुने जा सकते हैं. अबरार अहमद कह रहे हैं कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें ब्राह्मणों और क्षत्रियों के वोट की जरूरत नहीं है, उनके बिना भी वह जीत सकते हैं. वायरल वीडियो में इसौली सपा विधायक कह रहे हैं कि मुसलमान ही उनके वास्तविक वोटर्स हैं.

सपा विधायक अबरार अहमद वीडियो में कहते सुने जा सकते हैं कि मैं जब सड़कों पर चलता हूं तो लोग हाथ उठाकर मेरा अभिवादन करते हैं. बहुत से लोग ऐसे हैं, जो यादवों और मुस्लिमों को उनके जाति और धर्म से संबोधित करते हैं. हमें ऐसे लोगों का वोट नहीं चाहिए. हमें जिनके वोट की जरूरत है, उनका मत हमें मिलता है.

अबरार अहमद पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए नही तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जी @yadavakhilesh जी मैं अपनी सारी सेवा वापस लें लूंगा और पार्टी को छोड़ने पर मजबूर हो जाऊंगा ब्राह्मण विरोधी लोग नही होने चाहिए..@RoliTiwariMish1 @Santoshpandemla @profamishra @samajwadiparty @NareshUttamSP pic.twitter.com/SWk4qtcL6H

— जीतेन्द्र पाठक (@imjitedrapathak) September 29, 2021

इस वीडियो के आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। आप भी देखिए…