Showing posts with label #anti-brahmin. Show all posts
Showing posts with label #anti-brahmin. Show all posts

ब्राह्मण विरोधी नफरत, कश्मीरी पंडितों का मजाक और विक्टिम कार्ड: अंबेडकरवादी लक्ष्य लेकी ने की साइबर बुलिंग, वकील ट्यूलिप शर्मा ने दर्ज कराई शिकायत

                                   लक्ष्य लेकी, ट्यूलिप शर्मा (फोटो साभार: Instagram)
खुद को अंबेडकरवादी बताने वाले लक्ष्य लेकी सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गए हैं। IIM इंदौर से पढ़े और TedX स्पीकर लक्ष्य के खिलाफ क्रिमिनल लॉयर और इन्फ्लुएंसर ट्यूलिप शर्मा ने साइबर शिकायत दर्ज कराई है। उस पर ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने, जातिगत गालियाँ देने और महिलाओं को अपमानजनक मैसेज भेजने का आरोप है।

ऑपइंडिया से बातचीत में ट्यूलिप ने शिकायत के बारे में कहा कि ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि लक्ष्य जैसे लोग एक जगह पर नहीं रुकते, वो लगातार ऐसी हरकतें करते रहते हैं।

लक्ष्य लेकी आईआईएम इंदौर के ग्रेजुएट हैं और टीईडीएक्स स्पीकर भी रह चुके हैं। वे ‘लक्ष्य स्पीक्स’ नाम से इंस्टाग्राम पेज और यूट्यूब चैनल चलाते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 5 लाख 53 हजार फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब पर 14 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स।

ट्यूलिप ने भारतनाट्यम और देवदासी पर उसके दावों पर उठाए सवाल, तो लक्ष्य ने ब्राह्मणों को दी गालियाँ

ट्यूलिप शर्मा ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को अपने इंस्टाग्राम हैंडल @_tulipsharma पर एक वीडियो डाला। इसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्य लेकी काफी समय से जाति-विरोध के नाम पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी है और इंटरनेट पर नफरत कोई नई बात नहीं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोई विरोधी राय बर्दाश्त न कर सके। वे ऐसे इन्फ्लुएंसर हैं जो अगर कोई उनके पोस्ट पर विरोधी कमेंट करे तो डीएम में आकर गंदी-गंदी बातें करते हैं।

ट्यूलिप ने बताया कि सब कुछ 11 फरवरी को शुरू हुआ जब लक्ष्य लेकी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो डाला। उसमें उन्होंने दावा किया कि भारतनाट्यम को ब्राह्मणों ने हड़प लिया है। उन्होंने कहा कि भारतनाट्यम ब्राह्मणों की सांस्कृतिक चोरी है, असली डांस सदिर अट्टम या दासी अट्टम था जो देवदासियां करती थीं। उनका कहना था कि तमिल ब्राह्मण महिला रुक्मिणी देवी ने उस डांस के सेक्सुअल/इरोटिक हिस्से को हटा दिया, उसे साफ-सुथरा बना दिया, लेकिन ऐसा करते हुए सदिर अट्टम की असली जड़ों से इसे अलग कर दिया।

इसके जवाब में ट्यूलिप शर्मा ने कमेंट किया, “आपकी लॉजिक के मुताबिक, ‘ब्राह्मण’ महिला रुक्मिणी देवी ने देवदासियों के यौन शोषण के चक्र को खत्म कर दिया। अब इसमें समस्या क्या है? एक तरफ आप इसे दमनकारी व्यवस्था मानते हैं, फिर कोई सुधार करे तो भी समस्या है सिर्फ इसलिए कि सुधार करने वाली ‘ब्राह्मण’ है। हंसते हुए। जिंदगी में थोड़ी क्लैरिटी लाओ और व्हाट्सएप नॉलेज पर निर्भर मत रहो।”

लेकिन ट्यूलिप शर्मा के तर्क का तथ्यों से जवाब देने की बजाय लक्ष्य लेकी उनके डीएम में घुस आए और जातिगत गालियाँ देने लगे। अपने दावे के समर्थन में शर्मा ने बातचीत के स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी शेयर किए। 

ट्यूलिप शर्मा ने बताया कि बात ब्राह्मण लड़कियों की भी नहीं थी, फिर भी लक्ष्य लेकी अपनी ब्राह्मण एक्स गर्लफ्रेंड्स के बारे में डींगें हाँकने लगे। ट्यूलिप ने कहा, “बात ब्राह्मण लड़कियों की नहीं थी लेकिन लक्ष्य लेकी अपनी सारी एक्स को ब्राह्मण बताकर बहस जीतना चाहते थे। पूरी कम्युनिटी की लड़कियों को इस्तेमाल करके बहस जीतना दिखाता है कि वे कितने बड़े जातिवादी हैं।”

लक्ष्य लेकी की ब्राह्मण लड़कियों को ऑब्जेक्ट बनाने वाली सोच को और एक्सपोज करते हुए शर्मा ने बताया कि वो जाति खत्म करने के लिए ‘अंतरजातीय बच्चे’ पैदा करने की बात कर रहा था।

                                                          सोर्स: ट्यूलिप शर्मा का वीडियो

शर्मा ने वीडियो में कहा, “उनका पूरा प्रोफेशन ही ब्राह्मणों को गालियाँ देने पर टिका है और फिर वे अपनी ब्राह्मण एक्स के बारे में डींग मारते हैं। वे और आगे बढ़कर कहते हैं कि अंतरजातीय बच्चे बनाकर जाति खत्म कर रहे हैं।” शर्मा ने बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

एक वीडियो में लक्ष्य लेकी ने खुद कहा था कि वे अपनी एससी/एसटी कम्युनिटी के बाहर डेट करने की हिम्मत नहीं रखते, लेकिन ट्यूलिप शर्मा की एक फीमेल फॉलोअर के मैसेज बॉक्स में उसने लिखा, “ब्राह्मण गर्लफ्रेंड मुझे ब्लो जॉब देती है, प्रॉब्लम?”

                                                         ट्यूलिप शर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी से

कई पब्लिकली शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने ट्यूलिप शर्मा को डीएम में लिखा, “होली चॉप्ड, ब्राह्मण लड़की के लिए तुम बहुत बदसूरत हो।” एक और मैसेज में उन्होंने लिखा, “मेरी गर्लफ्रेंड तुमसे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। तुम तो बॉयफ्रेंड वाली भी नहीं लगतीं।”

एक और मैसेज में लक्ष्य ने लिखा, “4 ब्राह्मण एक्स, सब तुमसे ज्यादा खूबसूरत।”

इस बीच ट्यूलिप शर्मा ने अपने फॉलोअर्स को बताया कि उन्होंने आईटी एक्ट और संबंधित बीएनएस सेक्शन के तहत लक्ष्य लेकी के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज करा दी है।

बैकलैश के बीच लक्ष्य लेकी ने दावा किया कि ट्यूलिप शर्मा ने उनके जातिवादी और अपमानजनक मैसेज के जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, वे फेक हैं। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी केस में फंसाने की कोशिश हो रही है।  

एक और वीडियो में लक्ष्य ने फिर दोहराया कि शर्मा के साथ उनकी चैट के सारे स्क्रीनशॉट फेक हैं। इस अंबेडकरवादी जाति एक्टिविस्ट ने विक्टिम कार्ड खेला और खुद की तुलना रोहित वेमुला से कर दी।

लक्ष्य ने कहा कि रोहित वेमुला के साथ भी इसी तरह की तरकीबें इस्तेमाल की गई थीं। लक्ष्य का रोहित वेमुला से अपनी तुलना करना बहुत बेशर्मी भरा था, क्योंकि असल में तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि वेमुला एससी जाति से नहीं थे।  

अक्सर घटिया प्रोपेगेंडा करता रहा है लक्ष्य लेकी

ज्यादातर कथित जाति-विरोधी ‘एक्टिविस्ट्स’ की तरह लक्ष्य लेकी भी जाति श्रेष्ठता के विरोध के नाम पर ब्राह्मणों को निशाना बनाता रहा है। एक वीडियो में उसने कहा कि दूसरे देशों में वेजिटेरियन होते हैं लेकिन भारत में ‘प्योर वेजिटेरियन’ होते हैं। ब्राह्मणों के शाकाहार से जुड़े धार्मिक विश्वास पर हमला करते हुए उसने कहा, “केवल भारत में ही ‘प्योर वेजिटेरियन’ का कॉन्सेप्ट है। क्योंकि यहाँ शाकाहार सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं है। ये शुद्धता, श्रेष्ठता और जाति के बारे में है। ये कहने के बारे में है कि मैं भगवान के ज्यादा करीब हूँ और तुम मांस खाने वाले दलित कम हो। वो ब्राह्मणवादी नजरिया तो वीगन लोगों में भी दिखता है जब वे दलित एक्टिविस्ट्स को वीगन न होने पर शर्मिंदा करते हैं।”

लक्ष्य ने ये नैरेटिव फैलाया कि ‘प्योर’ शब्द का मतलब जातिगत श्रेष्ठता या भगवान से ज्यादा निकटता है, जबकि असल में ये सिर्फ शाकाहार में सख्ती को दिखाता है।

जुलाई 2025 में एक पॉडकास्ट में लक्ष्य ने दावा किया कि ब्राह्मणों ने मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भेदभाव किया। उसका कहना था कि ब्राह्मणों ने शिवाजी की जाति की वजह से उनका राजतिलक करने से इनकार कर दिया था और उन्हें बनारस से पुजारी बुलाने पड़े।

ये दावा कट्टर ‘जाति-विरोधी’ एक्टिविस्ट्स द्वारा गढ़ा गया ब्राह्मण-विरोधी नैरेटिव का हिस्सा है। हकीकत में स्थानीय ब्राह्मणों ने शिवाजी का ताज नहीं ठुकराया था क्योंकि उन्हें उनकी जाति से कोई समस्या थी, बल्कि इसलिए कि उन्हें ऐंद्रेय राजाभिषेक करना नहीं आता था। इसलिए बनारस से गागाभट्ट को बुलाया गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि गागाभट्ट भी मराठी ब्राह्मण थे, उनका परिवार महाराष्ट्र के पैठण से था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राजतिलक को लेकर विवाद वैदिक रीति बनाम तांत्रिक रीति को लेकर था।

अपने एक एक्स पोस्ट में लक्ष्य ने यादवों को हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसाया क्योंकि ब्राह्मण और ठाकुर उनके साथ शादी के रिश्ते नहीं जोड़ते। उसने लिखा, “और यादव, अपनी राजनीतिक ताकत और क्षत्रियता के दावों के बावजूद, ठाकुरों और ब्राह्मणों द्वारा बराबर नहीं माने जाते। कोई अंतरजातीय शादी नहीं। कोई सम्मान नहीं। सिर्फ ग्रेडेड इनइक्वालिटी। मेरे यादव भाइयों और बहनों इस जाति पिरामिड का हिस्सा बनने की कोशिश मत करो।”

आश्चर्य की बात नहीं कि लक्ष्य लेकी 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित उमर खालिद का फैन है। उन्होंने मुस्लिम विक्टिमहुड का नैरेटिव फैलाया और कन्हैया कुमार के राजनीतिज्ञ बनने की तुलना उमर खालिद के जेल में रहने से की, सिर्फ इसलिए कि खालिद मुस्लिम है।

खालिद की लंबी जेल पर दुख जताते हुए लक्ष्य ने लिखा, “दो स्टूडेंट लीडर्स। एक ही कैंपस। एक जैसे आरोप। लेकिन दो बहुत अलग किस्मत। कन्हैया कुमार आजाद हैं, मुख्यधारा की राजनीति में आ गए। उमर खालिद, एक मुस्लिम, बेल के बिना 5 साल जेल में। ये संयोग नहीं है। भारत में मुस्लिम होने की कीमत है।”

दिलचस्प बात ये है कि लक्ष्य ने कहा कि उमर खालिद ‘मुस्लिम होने की कीमत’ चुका रहा है, जबकि खालिद खुद को नास्तिक बताता रहा है।

इस्लामो-लेफ्टिस्टों द्वारा उमर खालिद के लिए समर्थन और सहानुभूति जुटाने के लिए फैलाए जा रहे झूठे नैरेटिव के विपरीत ऑपइंडिया ने पहले रिपोर्ट किया था कि 2023 और 2024 में 14 स्थगनों में से 7 स्थगन खुद उमर खालिद ने माँगे थे। इसलिए जमानत वापस लेना ‘देरी’ की वजह से नहीं था। जबकि इस्लामी-लेफ्ट इकोसिस्टम ‘अन्याय’ का रोना रोता रहता है, असल में आरोपित के वकील की नाकाम कोशिशों की वजह से खालिद इतने दिनों से जेल में हैं।

दरअसल, भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इस साल कहा था कि असली समस्या कुछ वकीलों और राजनीतिक ग्रुप्स की सोच में है जो अपने केस सिर्फ कुछ खास जजों से सुनवाना चाहते हैं। ऑपइंडिया ने बार-बार रिपोर्ट किया है कि खालिद की लीगल टीम ने फरवरी 2024 में ‘परिस्थितियों में बदलाव’ का हवाला देकर जमानत अर्जी वापस लेने से पहले कम से कम सात बार स्थगन माँगा था।

कई सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक लक्ष्य लेकी ने 1990 के दशक में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार और पलायन का भी मजाक उड़ाया। एक कमेंट के जवाब में लक्ष्य ने लिखा, “कश्मीर ब्राह्मणों का यही हालत था।” एक और में लिखा, “मुझे कुछ नहीं होगा, तुम्हारे कश्मीरी पंडित भाइयों की तरह।”

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान “हिंदू कोई धर्म नहीं, केवल धोखा है”,को अखिलेश यादव और I.N.D.I.A गठबंधन का मौन समर्थन

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य दलित वोटों का ठेकेदार बनने के लिए हिन्दू धर्म और उसकी धर्मिक पुस्तकों के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं। पहले उनके समर्थकों ने पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस की प्रतियों को जलाने का काम किया। अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दू धर्म के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्दू नाम का कोई धर्म नहीं नहीं है। हिन्दू धर्म केवल धोखा है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया में अपना एक वीडियो शेयर कर लिखा है कि ब्राह्मणवाद की जड़े बहुत गहरी है और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है। हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं, हिंदू धर्म केवल धोखा है। सही मायने में जो ब्राह्मण धर्म है, उसी ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर के इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फंसाने की एक साजिश है।

हिन्दू धर्म/सनातन को अपमानित कर आखिर विपक्ष क्या सिद्ध करना चाहता है? हिन्दू धार्मिक स्थलों को विवादित कर मुस्लिम तुष्टिकरण करने की नीति उनको हाशिए तक तो ले आयी है, देखना यही बाकि है और कितना नीचे हिन्दू विरोधी जाएंगे? पता नहीं, कब तक हिन्दुओं के सहिष्णुता की परीक्षा ली जाएगी? जिस दिन हिन्दुओं की सहिष्णुता का धैर्य टूटा परिणाम बहुत भयंकर होने वाले हैं, जिसके जिम्मेदार कोई और नहीं, हिन्दू धर्म/सनातन को अपमानित करने होंगे।  

अखिलेश यादव के इशारे पर हो रहा हिन्दू धर्म का अपमान 

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस विवादित बयान से अब सवाल उठ रहे हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य किसके इशारे पर हिन्दू धर्म के खिलाफ अभियान चला रहे हैं ? क्या अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत है ? क्या अखिलेश यादव हिन्दू धर्म में विश्वास नहीं करते हैं ? क्या उनका पूजा-पाठ करना सिर्फ दिखावा है ? क्या अखिलेश यादव दलित वोट के लिए हिन्दू धर्म को विभाजित कर रहे हैं ? अब सोशल मीडिया पर लोग इन सवालों के जवाब मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि अखिलेश यादव अगर हिन्दू धर्म में विश्वास करते हैं, तो उन्हें स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी से निकालना चाहिए। स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार विवादित बयानबाजी के बावजूद समाजवादी पार्टी में बने हुए है तो इसका मतलब उनको अखिलेश यादव का पूरा समर्थन मिल रहा है। अखिलेश यादव की सहमति से ही हिन्दू विरोधी बयान दे रहे हैं।

वोट के लिए हिन्दू धर्म को तोड़ने की बड़ी साजिश

खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टियां मुस्लिमों को खुश करने और उनका वोट हासिल करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाती रही हैं। कभी बीजेपी का डर दिखाकर, तो कभी उनके पिछेड़पन को मुद्दा बनाकर गुमराह करती रही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साबित कर दिया कि अब मुस्लिम वोट के बिना भी बीजेपी सरकार बन सकती है। इसको देखते हुए हिन्दू विरोधी पार्टियों ने अपनी रणनीति बदल दी है। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्ग का वोट हासिल करने के लिए ब्राह्मणवाद और हिन्दू धर्म ग्रंथों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।  

I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति के तहत विवादित बयान

I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधी दलों का जमावड़ा है। समाजवादी पार्टी भी इस गठबंधन में शामिल है। कांग्रेस इस गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। इसके अघोषित अध्यक्ष राहुल गांधी नफरत के खिलाफ और भाईचारा के लिए अभियान चलाने का दावा रहे हैं। भारत को जोड़ने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। अब देश की जनता जानना चाहती है और सवाल उठा रही है कि I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल एक पार्टी का नेता स्वामी प्रसाद मौर्य समाज में नफरत पैदा कर रहा है, तो इसके लिए क्या कांग्रेस पार्टी और यह गठबंधन जिम्मेदार नहीं है ? क्या कांग्रेस पार्टी भी स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत है ? क्या वह भी हिन्दू धर्म को धर्म नहीं मानती है ? लेकिन जिस तरह स्वामी प्रसाद मौर्य विवादित बयान दे रहा है, उससे लगता है कि वो I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति के तहत काम कर रहा है। यह सारा खेल I.N.D.I.A गठबंधन खेल रहा है। मोहब्बत की दुकान खोलने वालों की सहमति से हिन्दू धर्म को बांटने की कोशिश की जा रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्य समाज और देश के लिए खतरा, FIR दर्ज

स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान के बाद अब लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोगों ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर समाज में तनाव पैदा करने और लोगों को लड़ाने के लिए बयानबाजी करने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि यह व्यक्ति अब समाज और देश के लिए खतरा बन गया है। अगर इस पर जल्दी कार्रवाई नहीं की गई तो 2024 का आम चुनाव आने तक यह जातीय दंगा कराने की भी कोशिश कर सकता है। एक सामजिक कार्यकर्ता और वकील विनीत जिंदल ने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस से शिकायत की है। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

JNU के प्रोफेसर ने यौन-शोषण किया… लेकिन गैर-ब्राह्मण था, इसलिए चुप रह गई: मीना कंडासामी, कांग्रेस समर्थक

मीना कंडासामी (फोटो साभार: द गार्डियन)
ब्राह्मण विरोधी और कांग्रेस के प्रति निष्ठावान डॉक्टर मीना कंडासामी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर स्वीकार किया था कि उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ इसलिए शिकायत नहीं की, क्योंकि वह गैर-ब्राह्मण था।

कंडासामी ने ट्विटर पर JNU में 25 साल की उम्र में हुई छेड़छाड़ को लेकर अपनी चुप्पी को सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “साल 2010 में एक 25 वर्षीय लड़की के रूप में, जो JNU में यूजीसी की विजिटिंग फेलो थी, मैंने उस गैर-ब्राह्मण फैकल्टी (प्रोबेशन पर आए) पर आरोप नहीं लगाया, जिन्होंने मुझसे छेड़छाड़ की थी। हालाँकि, जेएनयू में GSCASH के कड़े नियम थे। मैंने जेएनयू में कई अकादमिक शुभचिंतकों, प्रोफेसरों और दिल्ली के लेखकों को बताया कि क्या हुआ, लेकिन मैंने कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि मैंने दो चीजों के बारे में सोचा था।”

                                                                                                 स्रोत: ट्विटर

अपने ऊपर हुए यौन हमले के बारे में चुप रहने का एक कारण यह भी है कि उन्हें कथित यौन करने वाली की पत्नी से अपने जीवन का पहला वेतन चेक मिलना था। हालाँकि, उन्होंने अपने साथ छेड़छाड़ के बारे में बात नहीं करने का प्राथमिक कारण छेड़छाड़ करने वाले का गैर-ब्राह्मण होना बताया। उन्हें डर था कि उत्पीड़क के खिलाफ आरोप लगाने के कारण उन्हें ‘ब्राह्मण के हाथों की कठपुतली’ कहा जाएगा।

उन्होंने लिखा, “मैं बहुत युवा थी। कोई भी मुझे उस युवती के रूप में नहीं देखता जो न्याय चाहती है। वे इसे केवल एक ब्राह्मण विभाग प्रमुख (प्रोफेसर जिसने मुझे आमंत्रित किया) द्वारा एक गैर-ब्राह्मण बुद्धिजीवी के खिलाफ मेरा इस्तेमाल करने के रूप में देखेंगे। मुझे एक एजेंट बताया जाएगा। अगर मुझे जेएनयू में किसी दलित या बहुजन ने आमंत्रित किया होता तो मैं अलग तरह से सोचती। मैंने अपनी चुप्पी बनाए रखने का फैसला किया, क्योंकि अपमान के साथ रहना ब्राह्मण के हाथों की कठपुतली कहलाने से बेहतर था।”

जाहिरा तौर पर, ब्राह्मणों के प्रति घृणा ने कंडासामी को इतना परेशान कर दिया था कि उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, क्योंकि वह एक गैर-ब्राह्मण था और न्याय दिलाने से ब्राह्मणवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अपने खिलाफ यौन हमले को दृढ़ता से सहन किया, क्योंकि इसके खिलाफ बोलने से, उनकी विकृत समझ के अनुसार, ब्राह्मणवाद को बल मिलता।

कंडासामी ने अफसोस जताते हुए लिखा, “यह मैं ही हूँ। मैं 2.0 प्रकार के लोगों से अनुरोध करतीं हूँ कि जो भी नाम से आप मुझे बुलाना चाहें बुलाएँ। मैंने पहली बार ब्राह्मणवाद और उसके वर्चस्व की विषाक्तता देखी है। और हाँ, इस खबर के लिए मुझे के लिए खेद है, लेकिन मैं इसके वर्चस्ववादी परियोजना में शामिल होने वाली बच्ची नहीं हूँ।”

संभवत: वह ‘ब्राह्मणवादी वर्चस्व को खत्म करो’ गिरोह के सम्मानित सदस्यों में से एक हैं, जिनकी ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणों पर सभी बुराइयों का दोष मढ़ने की आदत है। साल 2020 में कंडासामी ने अपने एक ट्विटर थ्रेड में ‘ब्राह्मणवादी वर्चस्व को नष्ट करने’ की आवश्यकता पर जोर दिया था।

                                                                                                                                  स्रोत: ट्विटर

मीना कंडासामी ने ट्वीट किया था, “कई युवतियाँ आपकी ओर देख रही हैं। उन्हें जाति व्यवस्था को नष्ट करने के लिए कहो। उन्हें बताओ कि आत्मनिर्णय का अर्थ है जाति की अवज्ञा करना। उन्हें ब्राह्मणवादी वर्चस्व को तोड़ने के लिए कहो। मनुस्मृति में आग लगाने के लिए कहो। उन्हें डॉ अम्बेडकर को पढ़ने के लिए कहो। उन्हें विद्रोह करने के लिए कहो।”

मीना कंदासामी के इस ट्वीट से लगता है कि ब्राह्मणवाद शायद समाज को बुरी तरह से प्रभावित करने वाली सभी बुराइयों की जड़ है। शायद इसलिए उन्होंने खुद के साथ हुई छेड़छाड़ से उन्होंने आँखें मूँद लीं, ताकि उन पर ब्राह्मणवाद के एजेंट के रूप में कार्य करने का तोहमत ना लगे।