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जयललिता से तृषा कृष्णन तक: कैसे तमिलनाडु की राजनीति में बार-बार निशाने पर आईं महिलाएँ

                                                    जयललिता, CM विजय और तृषा कृष्णन
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से बहुत तीखी और खतरनाक लड़ाइयों के लिए जानी जाती रही है। यहाँ पार्टियों के बीच का झगड़ा कई बार सारी हदें पार कर जाता है। राजनीति का यह गंदा रूप कई बार महिलाओं को सीधे तौर पर निशाना बना चुका है। करीब 36 साल पहले, 25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में एक ऐसी घटना हुई थी, जिसे आज भी राज्य के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े विवादों में गिना जाता है। उस दिन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष जे जयललिता फटी हुई साड़ी, बिखरे बाल और चोट के निशानों के साथ विधानसभा से बाहर निकली थीं।

अब एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में एक महिला का नाम चर्चा में है। इस बार विवाद अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़ा है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के एक कथित दोहरे अर्थ वाले बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई थी।

दोनों घटनाएँ पूरी तरह अलग हैं। एक मामला विधानसभा के अंदर कथित शारीरिक हमले से जुड़ा था, जबकि दूसरा एक राजनीतिक मंच से दिए गए बयान को लेकर है। लेकिन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं का नाम बार-बार विवादों में क्यों आता है।

वह काला दिन जिसने बदल दिया जयललिता का जीवन

 यह कहानी 25 मार्च 1989 की है जो विधानसभा के इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। उस समय जे जयललिता की उम्र 41 साल थी और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थीं। बजट सत्र के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की सरकार पर जमकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

इन आरोपों के बाद सदन के भीतर अचानक भयंकर हंगामा शुरू हो गया। एआईएडीएमके (AIADMK) और डीएमके विधायकों के बीच हाथापाई और तीखी झड़प होने लगी। इस पूरी अराजकता के दौरान जयललिता पर गंभीर शारीरिक हमले किए गए।

जयललिता ने बाद में खुद यह आरोप लगाया कि उन पर सदन के अंदर हमले किए गए थे। उनके अनुसार, विधायकों ने उनकी तरफ चीजें फेंकी थीं। जब पार्टी के दूसरे विधायक उन्हें सुरक्षित बाहर ले जा रहे थे, तब एक DMK मंत्री ने उनकी साड़ी खींच दी थी।

घटना के बाद जब जयललिता विधानसभा के मुख्य दरवाजे से बाहर आईं, तो उनका हाल बहुत बुरा था। उनकी साड़ी जगह-जगह से फटी हुई थी और उनके बाल पूरी तरह बिखरे हुए थे। उनकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे और शरीर पर चोट के निशान साफ दिख रहे थे।

यह दिल दहला देने वाला दृश्य पूरे देश की मीडिया की बड़ी सुर्खियाँ बन गया। तमिलनाडु की राजनीति में यह तस्वीर आज भी सबसे बड़ी और यादगार तस्वीरों में गिनी जाती है। इस अपमान के बाद जयललिता ने वहीं सबके सामने एक बहुत बड़ी कसम खाई थी।

उन्होंने गुस्से में ऐलान किया था कि वह विधानसभा के अंदर अब दोबारा कभी कदम नहीं रखेंगी। उन्होंने कहा था कि वह सदन में तभी लौटेंगी जब वह खुद इस राज्य की मुख्यमंत्री बनेंगी। अपनी इस जिद को उन्होंने सच करके भी दिखाया।

सिर्फ दो साल में पूरा किया अपना संकल्प

जयललिता ने हार नहीं मानी और जनता के बीच जाकर इस अपमान का बदला लेने की ठानी। जनता का भारी समर्थन उनके साथ आ खड़ा हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि सिर्फ दो साल बाद यानी 1991 में चुनाव हुए।

उन्होंने अपनी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) को बहुत बड़ी और प्रचंड जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालकर अपना संकल्प पूरा कर लिया। वह दिन उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित हुआ था।

1989 की घटना पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

उस ऐतिहासिक दिन क्या हुआ था, इसको लेकर दोनों पार्टियों के अपने-अपने दावे रहे हैं। जयललिता जिंदगी भर यही कहती रहीं कि उनके साथ विधानसभा के अंदर बहुत बड़ी बदसलूकी और मारपीट की गई थी।

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और उनकी पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके विधायक पूरी तरह शांत बैठे थे। उन्होंने उल्टा विरोधी पार्टी के विधायक केए सेंगोट्टैयन पर गंभीर आरोप लगाए थे।

करुणानिधि का दावा था कि एआईएडीएमके विधायक ने ही उन पर हमला किया था और उनका चश्मा तोड़ दिया था। चाहे जो भी सच रहा हो, लेकिन उस दिन की घटना ने हमेशा के लिए इतिहास में अपनी एक अलग और डरावनी जगह बना ली है।

तृषा कृष्णन और उदयनिधि स्टालिन का नया विवाद

अब आते हैं आज के समय के ताजा विवाद पर जो कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर शुरू हुआ था। डीएमके पार्टी ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन रखा था, जिसमें पार्टी के बड़े नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन भी शामिल थे।

इस रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कुछ ऐसा कहा जिससे नया बवंडर खड़ा हो गया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि भीड़ में मौजूद कुछ लोग लगातार मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम ले रहे हैं।

राजनीतिक विरोधियों और सोशल मीडिया के लोगों ने इस बात को तुरंत पकड़ लिया। लोगों का मानना था कि यह बयान मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृषा के बीच चल रही पर्सनल चर्चाओं पर एक गंदा तंज था। 

सफाई के बाद भी नहीं थमा विवाद

जब इस बयान पर चारों तरफ हंगामा मचने लगा, तो उदयनिधि स्टालिन ने तुरंत अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनका मतलब कावेरी नदी से था, किसी और चीज से नहीं। लेकिन उनकी यह सफाई आग को बुझा नहीं पाई।

उनकी इस टिप्पणी की राजनीतिक गलियारों में बहुत तीखी आलोचना हुई। सत्तारूढ़ TVK पार्टी ने इसे महिलाओं का खुला अपमान बताया और नेशनल कमीशन फॉर वुमन यानी राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।

तमिलनाडु की भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस बयान को बेहद अश्लील और घटिया बताया। उन्होंने माँग की कि इस तरह की भाषा बोलने वाले नेता के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

महिलाओं को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि

तृषा कृष्णन को लेकर हुआ यह विवाद कोई पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन महिलाओं पर दिए गए बयानों से फंसे हों। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे बयानों के कारण आलोचना झेल चुके हैं।

कुछ समय पहले जब वह मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर हमला बोल रहे थे, तब उन्होंने विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम का नाम भी बीच में घसीट लिया था। उन्होंने उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों को अपने राजनीतिक भाषण का मुख्य हिस्सा बनाया था।

उस समय भी विपक्ष ने उन पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि वह अपनी राजनीतिक लड़ाई जीतने के लिए परिवार की महिलाओं को बीच में लेकर आते हैं। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था।

शशिकला का नाम लेकर भी उठाए थे सवाल

2021 के चुनाव प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एडप्पडी के पलानीस्वामी पर जमकर निशाना साधा था। उस भाषण में उन्होंने वी के शशिकला का नाम जबरदस्ती बीच में घसीट लिया था।

उन्होंने शशिकला का नाम लेकर उनकी राजनीतिक साख और विश्वसनीयता पर कई तरह के सवाल खड़े किए थे। इन सभी पुराने मामलों को देखकर विपक्ष हमेशा यही कहता आया है कि डीएमके नेता राजनीति में महिलाओं का इस्तेमाल सिर्फ अपनी दुश्मनी निकालने के लिए करते हैं।

विपक्षी पार्टियों का साफ आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए उनके घरों की महिलाओं को निशाना बनाना इस पार्टी की पुरानी आदत बन चुकी है।

अतीत और वर्तमान: परिस्थितियों में अंतर लेकिन सोच वही

अगर हम 1989 की जयललिता वाली घटना और आज के तृषा कृष्णन विवाद को देखें, तो दोनों की परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग हैं। एक मामला सीधे तौर पर विधानसभा के अंदर हुए शारीरिक हमले और बदसलूकी से जुड़ा हुआ था।

जबकि दूसरा मामला किसी राजनीतिक मंच से सार्वजनिक रूप से दिए गए विवादित बयान और छींटाकशी का है। दोनों घटनाओं के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन इन दोनों ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

यह सवाल यह है कि तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा महिलाओं को ही क्यों निशाना बनाया जाता है? राजनीति के इस गंदे खेल में महिलाओं को बार-बार बीच में क्यों घसीटा जाता है?

जयललिता के लिए 25 मार्च 1989 का वह दिन बहुत बड़ा झटका था, लेकिन वही उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट भी बन गया था। फटी साड़ी में बाहर आती उनकी तस्वीरों ने उन्हें एक कमज़ोर महिला की जगह एक बहुत बड़ी आयरन लेडी बना दिया था।

आज का तृषा कृष्णन विवाद भी राजनीतिक भाषा और जनप्रतिनिधियों की मर्यादा पर एक गहरी चोट है। नेता अपनी कुर्सी और फायदे के लिए यह भूल जाते हैं कि सार्वजनिक मंचों से महिलाओं के खिलाफ कैसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह वक्त ही बताएगा कि तृषा कृष्णन से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में पूरी तरह खत्म होगा या यह भी राज्य की राजनीति का एक नया और बड़ा अध्याय बनकर रह जाएगा। लेकिन इस पूरे मामले से एक बात बहुत साफ हो जाती है कि 1989 की उस खौफनाक घटना के लगभग चार दशक बीत जाने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। आज भी तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को राजनीतिक हमलों का आसान शिकार बनाया जा रहा है।

जब तक नेता अपनी घटिया राजनीति से बाहर आकर महिलाओं का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक ऐसे विवाद बार-बार उठते रहेंगे। जनता अब इन सब चीजों को बहुत गौर से देख रही है और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।

तृषा कृष्णन और CM विजय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार, पहले भी महिलाओं पर दे चुके हैं विवादित बयान: सनातन को खत्म करने का भी देखते हैं सपना

                     तृषा कृष्णन और सीएम विजय पर अश्लील टिप्पणी कर फंसे उधयनिधि स्टालिन, गिरफ्तार
जब नेता महिला का सम्मान नहीं कर सकते फिर किस कीमत पर उनके वोट और उनके हित की बात करते हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड तमिल नाडु में जयललिता के साथ विधानसभा में शर्मनाक हरकत पर किस आधार पर महिलाएं इन पार्टियों में हैं? यह सोंचने की बात है।  

तमिलनाडु की राजनीति में विरोधी दलों से जुड़ी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसी सिलसिले में DMK के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की आलोचना करते हुए अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

तृषा कृष्णन को निशाना बनाकर की गई इस मानहानिकारक टिप्पणी के मामले में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया।

3 अगस्त को कर्नाटक के साथ कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर तंजावुर में आयोजित एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सीएम विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार कावेरी का पानी नहीं मिलने के मुद्दे पर चुप है और उसका पूरा ध्यान DMK नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज कराने पर है।

इसी दौरान रैली में मौजूद DMK कार्यकर्ताओं ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर उदयनिधि स्टालिन कुछ पल रुके, मुस्कुराए और एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी के तौर पर देखा।

तृषा कृष्णन का नाम लिए बिना उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “हमारे यहाँ पानी आए या न आए, वहाँ पानी जरूर पहुँचना चाहिए। उन्हें बस इसी की चिंता है।” इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “मेरा मतलब कावेरी के पानी से था।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है, जिस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और वैचारिक पृष्ठभूमि के लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर उदयनिधि स्टालिन की कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की आलोचना की है।

तृषा इन दिनों अभिनेता से राजनेता बने और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ अपने कथित निजी संबंधों को लेकर भी चर्चा में हैं। उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी को लेकर तमिलनाडु की राजनीति भी गरमा गई है।

TVK विधायक रेवन्थ चरण ने इसे ‘घृणित और अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा, “इसी वजह से तमिलनाडु की जनता ने आपको नकार दिया और आज आप जिस स्थिति में हैं, वहीं सीमित कर दिया। अरिवालयम के पहले से ही बेहद निम्न स्तर के बावजूद यह उससे भी नीचे की बात है।”

तमिलनाडु भाजपा ने भी विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे ‘घृणित, अश्लील, अभद्र और शर्मनाक’ करार देते हुए उनके बयान पर सवाल उठाए।

तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन की एक महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर मौन क्यों हैं। उन्होंने उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी की भी माँग की थी।

इधर सत्तारूढ़ TVK ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को पत्र लिखकर उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। पार्टी का कहना है कि उनकी भाषा सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को वस्तु समझने और मौखिक उत्पीड़न (Verbal harassment) को सामान्य बनाती है तथा सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से अपेक्षित मर्यादा को गंभीर रूप से ठेस पहुँचाती है।

TVK ने यह भी कहा कि इस तरह का आचरण सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करता है। TVK ने राष्ट्रीय महिला आयोग से आग्रह किया है कि वह उदयनिधि स्टालिन से इस मामले में स्पष्टीकरण माँगे और उन्हें बिना शर्त सार्वजनिक माफी जारी करने का निर्देश दे।

साथ ही पार्टी ने माँग की है कि उनके खिलाफ सार्वजनिक अश्लीलता फैलाने और महिला की मर्यादा का कथित रूप से अपमान करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए।

राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए महिलाओं को घसीटने के आरोपों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि स्टालिन

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर कथित तौर पर निशाना साधते हुए की गई दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से जुड़ी महिलाओं को निशाना बनाते हुए लैंगिक (सेक्सिस्ट) टिप्पणियाँ करने के आरोप पहले भी उन पर लग चुके हैं।

2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, प्रचार के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “जब भी मैं अपने चुनावी भाषण में एडप्पडी सरकार का जिक्र करता हूँ, लोग मुझसे एडप्पडी नहीं, बल्कि ‘एडुपुडी’ (किसी के इशारों पर चलने वाला) कहने को कहते हैं। मैं पूछता हूँ कि एडुपुडी कौन है, तो लोग कहते हैं, मोदी का एडुपुडी। मेरी हाल की एक रैली में भीड़ से किसी ने कहा कि वह एडुपुडी नहीं, बल्कि ‘डेड बॉडी’ है, क्योंकि वह शशिकला के पैरों में गिर चुका है।”

इसी वर्ष जब TVK ने सरकार बनाई, तब उदयनिधि स्टालिन ने TVK प्रमुख जोसेफ विजय पर अपने राजनीतिक हमलों में उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम को भी घसीटा था। उन्होंने कहा था, “उनका (विजय का) ‘कुट्टी स्टोरी’ सुनाने वाला भाषण विधानसभा की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। चेंगलपट्टू कोर्ट में अपने पति को तलाशती पत्नी की कहानी पूरे तमिलनाडु को पता है।”

मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी के बीच निजी विवाद को अपने राजनीतिक हमलों में घसीटने को लेकर उदयनिधि स्टालिन की उस समय कड़ी आलोचना हुई थी। और अब एक बार फिर उदयनिधि स्टालिन ने छोटे राजनीतिक लाभ के लिए तृषा कृष्णन और सीएम विजय के कथित निजी संबंधों को अपने राजनीतिक हमले का हिस्सा बनाया है।

उदयनिधि स्टालिन पिछले कई वर्षों में अलग-अलग कारणों से विवादों में रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू, मलेरिया’ से करते हुए इसके ‘उन्मूलन’ का आह्वान किया था। उस समय देशभर में उनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी डीएमके नेता को फटकार लगाई थी।