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‘हम भी सनातन को खत्म करने मैदान में आए हैं’ : उदयानिधि स्टालिन के बाद TVK के मुस्तफा ने जाहिर की हिंदू घृणा

तमिलनाडु में जिस तरह चुनावों में सेकुलरिज्म के गुमराह करने वाले नारों का इस्तेमाल कर सनातन विरोधियों ने सत्ता हथियाई उससे हिन्दुओं को आंखें खोलने चाहिए। बहुत कलाकार को मुख्यमंत्री बनाने का नशा चढ़ा था। अब 5 साल भुगतना। मोदी-योगी-अमित से रहम की भीख मत मांगना। हिन्दू किसी भी राज्य का हो उसे सेकुलरिज्म और जातिगत सियासत के नशे से बाहर आना होगा। ताली कभी एक हाथ से नहीं बजी। सनातन को अपमानित करने वाली DMK पार्टी को वोट देने वालों पर शर्म आती है। मुसलमान बीजेपी को हराने एकजुट वोट करता है और हिन्दू जातिगत सियासत में फंस पागलों की तरह सेकुलरिज्म के नशे में डूब वोट करता है। योगी ने ठीक कहा था "बंटे तो कटे"। बंगाल में जब तक विभाजित रहा ममता की ज्यादतियों का शिकार हुआ और एकजुट हुआ राहत की साँस ली। 

तमिलनाडु में डीएमके के उदयानिधि स्टालिन के बाद तमिलनाडु मुस्लिम लीग (TNML) के संस्थापक और मदुरै सेंट्रल से TVK विधायक वीएमएस मुस्तफा ने सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राजनीति में ‘सनातन धर्म को खत्म करने’ के उद्देश्य से उतरी है। उन्होंने कहा, “हमारे पास पेरियार और आंबेडकर की विचारधारा है और हम सनातन को समाप्त करने के लिए मैदान में आए हैं।”

मुस्तफा ने मदुरै सेंट्रल सीट पर जीत हासिल की है। जहाँ हिंदुओं का विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर स्थित है। यह देखते हुए उनके बयान पर राजनीतिक विवाद और गहरा गया गया है। भाजपा नेता के अन्नामलाई ने ऐसी प्रतिक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि ये लोग ध्यान रखे हिंदू धर्म कोई पंचिंग बैग नहीं है।

इससे पहले, 12 मई 2026 को तमिलनाडु विधानसभा में उदयानिधी स्टालिन ने भी सनातन धर्म पर अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराते हुए कहा, “जो सनातन लोगों को बाँटता है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।” इस भाषा के वक्त सदन में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय भी मौजूद थे और उन्होंने भाषण के बाद उदयनिधि का अभिवादन भी किया था किया।


रट्टू तोते की तरह भाई राहुल की बातों को दोहरा रही प्रियंका गाँधी, फिर से EC को बनाया निशाना

                           राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी (साभार - पीटीआई और एसजीटी टाइम्स)
बिहार के रीगा विधानसभा क्षेत्र में 6 नवंबर 2025 को कांग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा ने चुनाव आयोग (ECI) पर सीधा हमला बोलते हुए वही राग अलापा जो उनके भाई राहुल गाँधी पहले से गा रहे हैं।
भागवत गीता में लिखा है "विनाश काल विपरीत बुद्धि" जो INDI गठबंधन पर सटीक बैठता है। जितना वोट चोरी का रोना रोया जायेगा उतना ही उल्टा असर हो रहा है। राहुल तो कांग्रेस को बर्बाद करने के लिए बहुत था लेकिन प्रियंका के आने बहुत जल्दी कांग्रेस अपने अंजाम पर पहुँचने वाली है या यूँ भी कह सकते "बर्बाद करने को एक ही उल्लू काफी है, यहाँ(मतलब कांग्रेस) हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा।"       

प्रियंका ने सभा में दावा किया कि हाल ही में समाप्त हुए विशेष मतदाता सूची संशोधन के दौरान बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए। उन्होंने देश के वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के नाम लेकर जनता से पूछा कि क्या उन्होंने कभी इनके नाम सुने हैं और खुद ही कहा, “आपने इनके नाम कभी नहीं सुने होंगे, क्योंकि ये सब अपनी कुर्सियों और आयोग के पीछे छिपते रहते हैं।”

प्रियंका ने आगे कहा कि ये वही लोग हैं जो “देश के संविधान और लोकतंत्र से खिलवाड़ कर रहे हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की कि इन अधिकारियों के नाम याद रखें क्योंकि “इन्हीं के कारण जनता के अधिकारों से खिलवाड़ हो रहा है।”

दरअसल, प्रियंका गाँधी के ये आरोप उनके भाई राहुल गाँधी की बयानबाजी की तर्ज पर हैं। राहुल गाँधी ने अगस्त 2025 में चुनाव आयोग के अधिकारियों को खुलेआम धमकी दी थी कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कर्नाटक की मतदाता सूची में चुनाव आयोग ने वोट चोरी की, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया। हाल ही में राहुल ने हरियाणा चुनाव को लेकर भी यही आरोप दोहराया।

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी से इन आरोपों के लिए औपचारिक शिकायत दर्ज करने को कहा था, ताकि तथ्यों की जाँच की जा सके। लेकिन राहुल गाँधी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गाँधी को मालूम था कि उनके आरोप सबूतों की कसौटी पर टिक नहीं पाएँगे, इसलिए उन्होंने कोई आधिकारिक शिकायत नहीं की।

यह पहली बार नहीं है जब गाँधी परिवार ने हार की झुंझलाहट चुनाव आयोग पर निकाली हो। 2019 में भी राहुल गाँधी ने संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और RBI पर समझौते के आरोप लगाए थे, लेकिन तब भी वो अपने दावों को साबित नहीं कर पाए थे।

अब प्रियंका गाँधी ने उसी पुराने ‘वोट चोरी’ नैरेटिव को दोहराते हुए न केवल चुनाव आयोग बल्कि उसके वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाने पर लिया है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कॉन्ग्रेस अब हार से पहले ही बहाने गढ़ने में लग गई है?