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‘सनातन धर्म और कुछ नहीं, जातियों में विभाजित समाज है’: हजरतबल दरगाह में सजदा करने वाले कार्ति चिदंबरम

हजरबल दरगाह में कार्ति चिदंबरम (साभार: कार्ति X हैंडल)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने के बयान पर बवाल हो गया है। इस बीच कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि सनातन धर्म और कुछ नहीं, बल्कि जातियों के बंटवारे पर आधारित समाज है। उन्होंने इसे अभिशाप बताया।

उदयनिधि के बयान पर जारी बहस के बीच कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सनातन धर्म जातियों में विभाजन के लिए नियम के अलावा और कुछ नहीं है। इसकी वकालत करने करने वाले सभी अच्छे पुराने दिनों के लिए उत्सुक हैं! जाति भारत का अभिशाप है।”

उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु की आम बोलचाल में ‘सनातन धर्म’ का अर्थ जाति पदानुक्रमित समाज है। ऐसा क्यों है कि हर कोई जो सनातन धर्म की वकालत कर रहा है, वह विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग से आता है और इस ‘पदानुक्रम’ का लाभार्थी है। किसी के खिलाफ ‘नरसंहार’ का कोई आह्वान नहीं किया गया था, यह एक शरारती फिरकी है।”

सनातन धर्म पर ज्ञान देने वाले कार्ति चिदंबरम ने सितंबर 2021 में कश्मीर के हजरतबल दरगाह जाकर वहाँ सजदा किया था। इसकी तस्वीर भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ ट्विटर पर डाली थी और कहा था कि कश्मीर के ‘हजरतबल में शुक्रवार की नमाज पढ़ा’। नमाज़ पढ़ने से शंका भी है कि क्या इस्लाम काबुल कर लिया है। 

कहा जाता है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का यहाँ बाल रखा हुआ है। 1963-64 में मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का बाल) चोरी हो गया था। हालांकि, बाद में यह रहस्यमयी ढंग से मिल भी गया था। उसके बाद से यह दरगाह चर्चित हो गया।

ये वही कार्ति चिदंबरम पर हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के कई केस हैं। प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने उन्हें 16 अक्टूबर 16 2019 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। कार्ति पर आरोप है कि अपने पिता पी. चिदंबरम के केंद्र में मंत्री रहते समय कार्ति ने कई कंपनियों से पैसे लेकर उन्हें फायदा पहुँचाया है।

अवलोकन करें:-

‘डेंगू-मलेरिया की तरह है सनातन धर्म, इसे खत्म करना होगा’: MK स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि ने उगल

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

कांग्रेस गिरफ़्तारी का राजनीतिकरण क्यों कर रही है?

विकास दुबे कांग्रेस ब्राह्मण
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब तक विकास दुबे की गिरफ़्तारी नहीं हुई थी, कांग्रेस उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर संरक्षण देने की बात कर रही थी, लेकिन मध्य प्रदेश में हुई गिरफ़्तारी से तेवर बदल गए और जाति ढूंढ भाजपा मुख्यमंत्री पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाने में देरी नहीं की। कांग्रेस शायद यह भूल रही कि योगी स्वयं एक योगी है और एक योगी ब्राह्मण विरोधी कैसे हो सकता है? दूसरे, यह कि विकास ब्राह्मण होकर शातिर क्यों बना? 
कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला मोस्टवॉन्टेड गैंगस्टर विकास दुबे को आखिरकार मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार कर लिया गया है। आज बृहस्पतिवार (जुलाई 09, 2020) सुबह ही ख़बरों के मुताबिक़ वह उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने के लिए भीतर दाख़िल हो रहा था तभी उसे मंदिर के एक सुरक्षाकर्मी ने पहचाना। जिसके बाद उसने इस मामले की सूचना पुलिस को दी। 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस समय मध्य प्रदेश पुलिस गैंगस्टर विकास दुबे से अज्ञात जगह पर पूछताछ कर रही है। अदालत से रिमांड मिलने के बाद उसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया जाएगा।
गिरफ्तारी के दौरान पूरे घटनाक्रम के तमाम वीडियो सामने आए। एएनआई द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में कुछ बातें मोटे तौर पर समझ आती हैं। गिरफ्तारी के ठीक बाद उसने अपनी पहचान बताई। इस घटना का एक वीडियो है, जिसमें पुलिस उसे पकड़ कर ले जा रही है। तभी वह चिल्ला कर कहता है, “मैं विकास दुबे हूँ, कानपुर वाला।” ऐसा कहने के ठीक बाद पीछे खड़े पुलिसकर्मी ने उसे एक थप्पड़ भी मारा और शांत रहने के लिए कहा।


पत्रकार बृजेश मिश्रा के वीडियो में इस गिरफ्तारी के घटनाक्रम का शुरुआती हिस्सा नज़र आता है। जिसमें महाकाल मंदिर के कई सुरक्षाकर्मी और पुलिस वाले विकास दुबे को पकड़ कर बाहर ले आ रहे हैं। इस वीडियो में विकास दुबे स्पष्ट तौर पर अकड़ कर चलता हुआ नज़र आ रहा है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी उससे कुछ दूरी पर मौजूद हैं।  
घटनाक्रम के और भी कई वीडियो फेसबुक से लेकर ट्वीटर जैसे तमाम सोशल मीडिया मंच पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो के माध्यम से एक बात साफ़ होती है और कई सवाल उठते हैं।
कांग्रेस गिरफ़्तारी का राजनीतिकरण क्यों कर रही है?
कांग्रेस के साथ कुछ अन्य राजनीतिक दल भी गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी को जातिवादी रंग में ढालकर आठ पुलिसकर्मियों की मौत पर भी राजनीतिक लाभ लेने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने इस पर ट्वीट में लिखा है कि जिस तरह से योगी सरकार विकास दुबे के प्रकरण को लेकर चल रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार असली कहानी उजागर नहीं करना चाहती।
जितिन प्रसाद ने एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे के परिजनों की गिरफ्तारी का राजनीतिकरण करते हुए लिखा है कि दुबे गैंग के सदस्य के असहाय माता-पिता एवं 9 दिन पहले शादी हुई खुशी दुबे (अमर की विधवा) के उत्पीड़न से क्या होने वाला है?
जितिन प्रसाद ने ट्वीट किया है – “प्रभाकर मिश्रा जो हिरासत में था, उसकी मुठभेड़ दिखाकर एनकाउन्टर करना इस बात को दर्शाता है सरकार असली कहानी को छिपाने में लगी है ताकि बड़े चेहरे बेनकाब न हो जाए।” गौरतलब है कि विकास दुबे का सहयोगी अमर दुबे कल ही एनकाउंटर में मारा गया था और उसकी नौ दिन पहले ही शादी हुई थी।
इतना ही नहीं, जैसे ही विकास दुबे को पकड़ने के लिए UP पुलिस अभियान में जुटी, कांग्रेस के वॉट्सऐप ग्रुपों में योगी सरकार को ब्राह्मण-विरोधी बताने के लिए इसे आधार बनाया जा रहा था। जितिन प्रसाद ने तो यहाँ तक कह डाला था कि योगी सरकार के रहते हुए ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़े हैं।
इसी बीच विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मीडिया कई तरह के संदेह जता रही है। कुछ लोगों का मानना है कि विकास दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया बल्कि विकास दुबे ने आत्मसमर्पण किया है। ऐसे में गैंगस्टर विकास दुबे की माँ का बयान आया है कि सरकार को जो उचित लगे उन्हें वही करना चाहिए।
एक वीडियो में गैंगस्टर विकास दुबे की माँ कहते सुनाई दे रही हैं – “इस टाइम तो वो सपा में है, भाजपा में है नहीं… सरकार को जो उचित लगे कार्रवाई करे।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी पर कहा, “मैं एमपी पुलिस को विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए बधाई देता हूँ। मैं लगातार उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में हूँ और यूपी के सीएम आदित्यनाथ से भी बात की है। आगे की जाँच के लिए, उसे यूपी पुलिस को सौंप दिया जाएगा। दोनों राज्यों की पुलिस समन्वय में काम करेंगी।”
वहीं, विकास दुबे के परिवार के करीबियों का कहना है कि गैंगस्टर विकास दुबे नास्तिक था और वह मंदिर में सिर्फ सिर्फ इस कारण से छुपा था ताकि पुलिस मंदिर में गोली ना चलाए और वह ज़िंदा बच सके।




महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष का भी कहना है कि पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे जाने के डर से विकास दुबे आत्मसमर्पण करना चाहता था। पुजारी के अनुसार मंदिर परिसर पहुँचने के बाद विकास दुबे अपने बारे में बताने लगा था।
विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर मीडिया के एक वर्ग का अभी तक मानना है कि पुलिस की कार्रवाई उनकी समझ से परे है। मीडिया का यह वर्ग यकीन ही नहीं कर पा रहा है कि विकास दुबे पकड़ लिया गया है। मीडिया का यह वर्ग अभी तक यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर विकास दुबे की गिरफ्तारी में वो कौन सा कोण अपने लायक तलाश सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पकड़ने गई टीम के 8 पुलिसवालों की हत्या के मामले में वांछित अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी से पहले उसका बिकरु गाँव स्थित मकान ढहा दिया गया था। इसके साथ ही विकास के मकान में खड़े ट्रैक्टर सहित 60 लाख की कीमत वाली दो एसयूवी गाड़ियाँ भी तोड़ दी थीं।
एक बात साफ़ है कि जिस तरह का अपराध उसने किया है, उसे लेकर उसके ज़हन में कोई मलाल नहीं है। दूसरा क्या यह आत्मसमर्पण था? एक दिन पहले तक विकास दुबे की असल लोकेशन फ़रीदाबाद थी, ख़बर राजस्थान जाने की भी थी? पुलिस हाई एलर्ट पर थी, ऐसे में विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन तक कैसे पहुँचा?

चुनावों भरा होगा साल 2019, भारत का विकास स्टेट्समैन मोदी के अंदर ही हो सकता है, पॉलिटिशियन मोदी के अंदर नहीं। --न्यू यॉर्क टाइम्स

नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे कठिन अग्निपरीक्षा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
2019 के इस साल पर कईयों की नजर है। राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह साल काफी खास होने वाला है। क्योंकि 2019 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके अलाव कुछ राज्य भी हैं जहां पर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में आज हम 2019 में लोकसभा चुनाव के अलावा किन-किन राज्यों में विधान सभा चुनाव होने वाले उसके बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।इनके 
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई ने 2019 के आम चुनाव से पूर्व बूथ स्तर के लगभग 69,000 कार्यकर्ताओं से प्रभावी तरीके से जोड़ने के लिए ‘नमो अगेन’ नाम से एक व्हाट्सएप नंबर आरम्भ किया है.
वहीं उन्होंने सोशल मीडिया एवं आईटी सेल को सभी बूथ संयोजकों, प्रभारियों और पंच प्रमुखों से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर का उपयोग  करने के निर्देश जारी किए हैं. उल्लेखनीय है कि हर मतदान केंद्र पर पंच प्रमुख और बूथस्तर के कार्यकर्ता मतदाताओं के साथ जुड़ने के लिए पार्टी के लिंक के रूप में काम करते हैं. दिल्ली में कुल 13,816 मतदान केंद्र हैं. वहीं भाजपा ने हर मतदान केंद्र पर पांच पंच प्रमुख नियुक्त कर दिए हैं. इस तरह दिल्ली में बूथ स्तर के लगभग 69,000 कार्यकर्ता हैं.
दिल्ली भाजपा के सोशल मीडिया एवं आईटी सेल के वरिष्ठ अधिकारी नीलकंठ बख्शी ने बताया है कि, ”ऐसा पाया गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के निर्देश बूथस्तर के कार्यकर्ताओं तक समय पर नहीं पहुंच पाते हैं. जिससे सौंपे गये कार्य के पूरा होने में भी देरी हो जाती है. ”बख्शी ने कहा है कि ‘नमो अगेन’ मोबाइल नंबर एक व्हाट्सएप ग्रुप और ब्रॉडकास्ट लिस्ट के जरिए तिवारी और बूथ कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगा.

नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

2019 के मध्य में लोकसभा चुनाव होंगे। 3 जून को नरेंद्र मोदी सरकार का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में उससे पहले ही यानी अप्रैल और मई में ही आम चुनाव हो सकते हैं। ऐसे इस चुनाव को एनडीए और नरेंद्र मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। बता दें कि देश में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं। अब राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो अभी से ही चुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं। इस चुनाव को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ एनडीए और मोदी सरकार है तो दूसरी ओर बाकी दल एकजुट होने की कोशिश में लगे हुए हैं। लेकिन आखिरी फैसला देश की जनता ही करेगी कि आखिर सत्ता की गद्दी किस पार्टी को दी जाए और किसको विपक्ष में रखा जाए। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 282 सीटें आई थी और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का शपथ दिलाया गया था।
ओडिशा में नवीन पटनायक के लिए खास रहेगा साल 2019

ओडिशा में नवीन पटनायक के लिए खास रहेगा साल 2019

2019 में होने वाले विधानसभा चुनावों की बात करें तो सूची में सबसे पहला नाम ओडिशा का है। 2019 में ओडिशा की नवीन पटनायक की सरकार के पांच साल पूरे हो रहे हैं ऐसे में यहां भी विधानसभा चुनाव होंगे। कहा ये भी जा रहा है कि ओडिशा की 147 सीटों वाली विधानसभा चुनाव के परिणाम लोकसभा चुनाव के साथ ही आएंगे। ओडिशा में फिलहाल बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार है और नवीन पटनायक यहां के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजद को 117 सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस को 15, भाजपा को 10 और एसकेआई और सीपीआई को एक-एक सीटें मिली थी। वहीं निर्दलीय के खाते में 2 सीटें आई थीं।
आंध्र प्रदेश में एन चंद्रबाबू नायडू की अग्निपरीक्षाअग्निपरीक्षा 2019 में होने वाले विधानसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश का नाम भी है। 
आंध्र प्रदेश में फिलहाल तेलुगू देशम पार्टी पार्टी के एन चंद्रबाबू नायडू की सरकार है। राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। 2019 लोकसभा चुनाव और राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए चंद्रबाबू नायडू कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुके हैं। गठबंधन की वजह से राज्य की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है। बता दें कि साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में चन्द्र बाबू नायडू के नेतृत्व में तेलुगू देशम पार्टी 294 सीटों में से 117 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। इसके बाद चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। आंध्र प्रदेश में भी मई और जून के बीच में चुनाव हो सकते हैं।
महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस के लिए चुनौती भरा रहेगा 
महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस के लिए चुनौती भरा रहेगा 20192019 विधानसभा चुनाव के हिसाब से 2019 का साल देवेंद्र फडणवीस के लिए भी खास होने वाला है। लोकसभा चुनाव के बाद या फिर उसके साथ ही महाराष्ट्र में भी विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। फडणवीस के लिए यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि पिछली बार मोदी लहर थी और राज्य में बीजेपी ने आसानी से जीत हासिल करते हुए सत्ता हासिल कर ली। लेकिन इस बार महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पिछली बार से काफी अलग नजर आ रहा है। क्योंकि अधिकतर पार्टियां एकजुट होती हुई नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना का रूख भी कभी बीजेपी के साथ रहता है तो कभी खिलाफ में खड़ी हो जाती है इसलिए यह चुनाव बीजेपी और देवेंद्र फडणवीस के लिए आसान नहीं होने वाला है। बता दें कि 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 19 अक्टूबर हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी 123 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और सत्ता की गद्दी हासिल की। चुनाव परिणाम में कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई।
हरियाणा में खट्टर सरकार के हो रहे पांच साल पूरे 
हरियाणा में खट्टर सरकार के हो रहे पांच साल पूरे2019 में हरियाणा में बीजेपी की मनोहर लाल खट्टर सरकार के भी पांच साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में सितंबर-अक्टूबर के महीने में यहां भी चुनाव हो सकते हैं। खट्टर सरकार और बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी अहम है। क्योंकि यहां पर पहले से ही बीजेपी की सत्ता है। ऐसे में बीजेपी चाहेगी कि किसी भी हाल में वो राज्य की गद्दी हासिल करें। दूसरी ओर विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी चुनाव की तैयारियों में अभी से जुट गई है।भ जबकि 2014 में दूसरे नंबर पर रही इंडियन नेशनल लोकदल भी राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। बता दें कि 2014 में 90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा में हुए चुनाव में बीजेपी को 47 सीटें प्राप्त हुई थी। इसके अलावा इंडियन नेशनल लोकदल ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस के खाते में केवल 15 सीटें आईं।
अरुणाचल में भी खत्म हो रहा पेमा खांडू की सरकार का कार्यकाल 
अरुणाचल में भी खत्म हो रहा पेमा खांडू की सरकार का कार्यकालचुनाव के लिहाज से अरुणाचल प्रदेश के लिए भी 2019 का साल काफी खास रहने वाला है। क्योंकि 1 जून 2019 को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की सरकार का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश में भी चुनाव की गहमा गहमी रहेगी। फिलहाल यह राज्य बीजेपी के कब्जे वाला राज्य है। यहां का विधानसभा चुनाव 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के साथ ही हुआ था। जिसके बाद कांग्रेस बहुमत में आई और सरकार भी बनी। लेकिन 2016 के आखिरी महीनों में कांग्रेस के कई विधायक बीजेपी में शामिल हो गए जिसकी वजह से वर्तमान समय में अरुणाचल में बीजेपी की सरकार है। राज्य में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 31 सीटों की जरूरत होती है। राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू मुक्तो विधानसभा सीट से विधायक हैं।
सिक्किम में चामलिंग की अग्निपरीक्षा
चुनाव के हिसाब से 2019 का साल सिक्किम के लिए भी खास है। सिक्किम में कुल 32 विधानसभा सीटें हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग 12 दिसंबर को मुख्यमंत्री के रूप में अपना 20वां साल पूरा कर लिए हैं। चामलिंग के साथ सबसे खास बात ये हैं कि इनकी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने 2009 में हुए विधानसभा चुनाव मेमं 32 सोटों में से 32 पर जीत हासिल करने में सफल रही। ऐसे में यहां पर किसी दूसरे दल को राज्य में पैरा जमाना आसान नहीं होगा। क्योंकि राज्य की जनता का पूरा सपोर्ट चामलिंग को है।
पांच राज्यों के असेम्बली चुनावो के परिणाम के बाद, न्यू यॉर्क टाइम्स ने एक आलेख लिखा, जिसका यथासम्भव हिंदी अनुवाद किया है:--
"भारतीयों द्वारा वोट देने का पैटर्न एक दम साफ है उससे वर्तमान सरकार को सबक सीखना चाहिये...
- भारतीय मतदाता, फिस्कल डेफिसिट नही समझता और उसे, कोई मतलब नही कि ये 2.4% रहे चाहे 3.4%. उन्हें सब्सिडी और फ्री-बी (मुफ्त देने की योजना) की भी समझ नही। उन्हें तो ये भी नही पता कि सब्सिडी और फ्री-बी एक उधार है जिसे एक दिन कोई न कोई चुकायेगा।
भारतीय जनता को GDP रेट से कोई मतलब नही, भले ही पिछले चार सालों में 3.8 से बढ़कर 7.4 हो गया, जो कि अमरीका, ब्रिटेन जापान आदि देशों से आगे है
- भारतीय लोग हमेशा शिकायत करेंगे, सिर्फ प्याज और दाल पर ही नही, डीजल पेट्रोल पर भी। उन्हें चीजे सस्ती भी मिलनी चाहिये और किसानों को भी अच्छी कीमत मिलनी चाहिये।
- भारतीयों के पुरानी आदते सुधारने को मत कहिये, उनकी नजर में ये सरकार का काम है कि हर चीज वही बदले
- भारतीयों को लॉन्ग टर्म मुद्दों से कोई लेना देना नही, उन्हें हर चीज आज ही चाहिये, और आज ही नही, अभी के अभी चाहिये
- भारतीयों की यादाश्त कमजोर और उनका दृष्टिकोण बहुत ही संकीर्ण होता है। वो पिछला भूल जाते है और नेताओं के पिछले कुकर्मो को माफ कर देते है
- वो ढीठई से जातिवाद पर वोट करते है और जातिवाद एक मुख्य शत्रु है जो युवाओं का उत्थान नही करता बल्कि लोगों को बांटकर रख देता है... और चीन और पाक जैसे देश, भारतीयों को ही जातिवाद फैलाने का हथियार बनाते हैं क्योंकि, दोनों ही अपने GDP के लिये भारतीय बाजार पर निर्भर हैं
इंडियन रक्षा तंत्र पिछले पांच सालों में बहुत मजबूत हुआ है पाकिस्तान और गल्फ देशों के बनिस्बत, और ये देश, खुल्लम खुल्ला हिंदुस्तान को शासन का निर्देश नही दे सकते, इसलिये वो विध्वंसकारी संगठनों को अरबो खरबो की फंडिंग करते है कि हिंदुस्तान को बर्बाद करो.....
और मोदी ही, इसे कूटनीतिक युद्ध से जीत सकते हैं और
दुख की बात है कि ये बात, भारतीय ही नही समझते
अगर मि. मोदी, अगले 5 महीनों तक लॉन्ग टर्म प्लान फिक्स करने मे रह जाते हैं तो, वो 2019 खो बैठेंगे फिर एक मृत और गिरा सिपाही देश के लिये कुछ नही कर सकता। उन्हें, अगले 5 साल की सरकार बनाने के लिये हर हाल में कठोर बनकर जिंदा रहना होगा। अब उन्हें बचे 5 महीनों में राजनीतिज्ञ बनना पड़ेगा
अगर पब्लिक सस्ता पेट्रोल डीजल चाहती है, तो दीजिये उसे।
अगर किसान कर्जमाफी चाहते है, तो निराश मत कीजिये उन्हें ...
वे 'सबका साथ सबका विकास नही जानते, वे सिर्फ अपने पॉकेट में आये गांधी को जानते हैं
हम, मोदी को सलाह देंगे कि अगले 5 महीने स्टेट्समैनशिप छोड़िये और पॉलिटिशियन बनिये । 2019 की जीत के बाद ही स्टेट्समैन बनिये, क्योंकि भारत का विकास स्टेट्समैन मोदी के अंदर ही हो सकता है, पॉलिटिशियन मोदी के अंदर नहीं। "
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किसी खोजी पत्रकार तक ने इन सब्ज़ी और दूध
फेंकने वालों की तिजोरियों की जाँच
करवाए जाने की मांग नहीं की, क्यों?
न्यू यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित उपरोक्त आलेख समस्त भारतीयों की आँखे खोलने वाला है, लेकिन यहाँ तो "अन्धे की आँख में सुरमा डालने पर रोता है, हाय मेरी आँख फोड़ दी"; दूसरे, मोदी-योगी सरकारों को #metoo, #not in my name, #mob lynching, #intolerence, #dalit appeasement, #casteism आदि षड्यंत्रकारियों से भी सतर्क रहना चाहिए। इन आने वाले चुनावों में ये षड्यंत्रकारी कौन से नए कलेवर के साथ जनता को भ्रमित करेंगे, कहा नहीं जा सकता। 2019 में पुनः सत्ता में आने पर देश के विकास और शौचालय को ताक पर रख इन षड्यंत्रकारियों के पंख काटने चाहिए, जिस दिन से इन षड्यंत्रकारियों के पंख कटने का श्रीगणेश हुआ नहीं, देश भी स्वतः विकास की ओर चल पड़ेगा। 
सड़क पर दूध एवं सब्ज़ी आदि फेंकने वालों के बैंक खातों आदि की गम्भीरता से जाँच करवानी होगी, क्योकि कोई भूखा अथवा क़र्ज़ में डूबा किसान अपने उत्पाद को सड़क पर नहीं फेंकेगा। इतने वर्षों से इन्ही षड्यंत्रकारियों ने देश को खोखला कर दिया।  
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किसानों का क़र्ज़ माफ़ी 
जहाँ तक किसानों के क़र्ज़ माफ़ी की समस्या है, अभी कुछ दिन पूर्व कुछ लोगों से एक बहुत ही गम्भीर एवं षड्यंत्रकारी नीति के बारे में जानकारी मिली कि बड़े-बड़े जमींदार लोगों को पट्टे पर अपनी जमीन दे देते हैं, मोटा धन तो जमींदार को मिल गया, लेकिन पट्टा होने से पूर्व खेतों में कैमिकल डलवा देते हैं, जिससे एक/दो वर्ष तो खूब फसल होती है, परन्तु उसके बाद ज़मीन बंजर होने लगती है। जिस कारण वही किसान अपनी अच्छी फसल के आधार पर बैंक पर क़र्ज़ तो ले लेता है, परन्तु फसल न होने के कारण बैंक का कर्ज़ा नहीं दे पाता। यदि यह बात सच है तो सरकार को कर्ज़ा माफ़ करने से पूर्व इन बारीकियों की भी जाँच करनी चाहिए। 
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क्योकि कुछ दिन पूर्व, एक चैनल पर चर्चा के दौरान, महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री देवेन्द्र से जब महाराष्ट्र में हुए किसान आन्दोलन के विषय में किये गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्पष्ट कहा कि "जब मैंने आंदोलनकारी किसानो से बात की, उनका कहना था कि हमारे पास तो खेती के लिए ज़मीन ही नहीं है, हमें तो धन देकर लाया गया है।" मतलब यह की कर्ज़ा ले कोई रहा है और प्रदर्शन कोई और कर रहा है।