TMC का विरोध पड़ा महँगा? पार्टी की गुंडागर्दी पर रील बनाने वाले इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी पर विवाद

                                     शमिक अधिकारी (साभार: Instagram/yournonsane)
कोलकाता पुलिस ने 25 साल के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शमिक अधिकारी को यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। शमिक को ऑनलाइन ‘नॉनसेन’ के नाम से जाना जाता है। उन्हें गुरुवार (5 फरवरी 2026) को दमदम से पकड़ा गया। पहले उन्हें गलत तरीके से कैद करने, हमला करने और महिला की इज्जत से खिलवाड़ करने के आरोप में पकड़ा किया गया था, लेकिन बाद में 22 साल की पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने रेप का केस भी जोड़ दिया।

शमिक को शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को कोर्ट में पेश किया गया और अब उन्हें 16 फरवरी 2026 तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है। पुलिस के मुताबिक, महिला ने शिकायत की थी कि शमिक ने उसे 2 फरवरी 2026 की रात करीब साढ़े नौ बजे से अगले दिन शाम 5 बजे तक अपने बेहाला वाले घर में जबरन रोका रखा।

इस दौरान महिला का आरोप है कि उसे मारा-पीटा गया, धमकाया गया। उसने कहा कि शमिक ने उसे गलत तरीके से छुआ, कपड़े खींचे और फिर जबरन यौन हमला किया।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता का मेडिको-लीगल टेस्ट एमआर बांगुर अस्पताल में हुआ। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसका बयान दर्ज किया और इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की रेप वाली धारा FIR में जोड़ी गई। पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान मिले और वह काफी आघात में थी, इसलिए शिकायत करने में देरी हुई।

पुलिस ने आगे कहा कि शमिक ने पीड़िता को अश्लील फोटो भेजकर धमकाया था। जाँचकर्ताओं के मुताबिक टावर लोकेशन से पता चला कि शिकायत में बताए समय पर दोनों आरोपित और पीड़िता अपराध वाली जगह पर मौजूद थे।

शमिक की तरफ से कहा गया कि दोनों पुराने दोस्त हैं और लंबे समय से जानते हैं। उस रात गलतफहमी हुई थी, लेकिन कोई जबरदस्ती नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जाँच में कुछ बचा ही नहीं है तो पुलिस कस्टडी की क्या जरूरत है।

वायरल रील जिसने छेड़ दी राजनीतिक बहस

शमिक कोई आम इंफ्लुएंसर नहीं हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 4.20 लाख और फेसबुक पर 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। लेकिन राजनीतिक सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@yournonsane’ पर 21 जनवरी को एक रील पोस्ट की। पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले की बात है।

यह रील वायरल हो गई, 30 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.5 लाख से ज्यादा लाइक्स आए। इसमें शमिक ने टीएमसी सरकार पर तीखा हमला किया था। वीडियो में वे खुद को आम वोटर दिखाते हैं जो वोट डालने जा रहा है। वहाँ एक लोकल टीएमसी गुंडा वोटरों को सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को वोट देने का दबाव डालता है और नहीं मानने पर धमकी देता है।

वीडियो में आगे राज्य की स्थिति दिखाने वाले फ्लैशबैक थे। इसमें 26 हजार सरकारी टीचर्स की नौकरी जाने और उसका भावनात्मक असर दिखाया गया। रात में अकेली चलती महिला को कुछ लोग पीछे चल रहे हैं।

रील में आरजी कर रेप-मर्डर केस का भी जिक्र था। उस केस में कोलकाता कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई और राज्य सरकार को पीड़िता के माता-पिता को 17 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया, हालाँकि पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं।

वीडियो ने सीधे सत्ताधारी सरकार को निशाना बनाया और चुनाव से ठीक पहले आया, इसलिए कई लोगों ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना। वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने लगीं।

TMC ने BJP से लिंक का किया दावा

रील वायरल होने के बाद कई टीएमसी लीडर्स और सपोर्टर्स ने दावा किया कि शमिक का बीजेपी से लिंक है। उनका कहना था कि वह सिर्फ कंटेंट क्रिएटर नहीं, राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।

TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर कड़ा बयान दिया और शमिक को ‘बीजेपी यूट्यूबर’ कहा। पोस्ट में उन्होंने कहा कि वही शख्स जो पश्चिम बंगाल सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में नाकाम होने का आरोप लगा रहा था, अब खुद महिला की इज्जत से खिलवाड़ और मारपीट के केस में फंसा है।

दत्ता ने केस में दर्ज धाराओं का जिक्र किया और बताया कि पीड़िता ने करीब 12 घंटे कैद रखने, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया है। एक विवादास्पद टिप्पणी में उन्होंने शमिक को बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय से जोड़ा और कहा कि महिलाओं का गलत इस्तेमाल करने वाले बीजेपी में शामिल हो जाते हैं।

अब टीएमसी की बात है कि यह सीधा-सादा क्रिमिनल मामला है और विपक्ष अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दे रहा है।

गिरफ्तारी पर उठे सवाल, झूठे मामले में फँसाने का शक

दूसरी तरफ बीजेपी सपोर्टर्स और कई इंफ्लुएंसर्स ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने इशारा किया कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है, खासकर क्योंकि शमिक की रील ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की थी।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तो यहाँ तक कह रहे हैं कि यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी बनाई गई है ताकि उन्हें चुप कराया जाए। उनका तर्क है कि वायरल वीडियो के ठीक बाद और चुनाव से पहले गिरफ्तारी हुई, जिससे शक पैदा होता है।

बीजेपी आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने ममता बनर्जी की सरकार पर कड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ‘तानाशाही शासन’ बन गया है जहाँ आलोचकों को झूठे और दुर्भावनापूर्ण FIR से निशाना बनाया जाता है।

मालवीय ने लिखा, “यह टीएमसी का शासन मॉडल है: अभिव्यक्ति की आजादी को दबाओ, आलोचकों को डराओ, पुलिस का इस्तेमाल करो और सत्ता में बने रहने के लिए प्रतिष्ठा बर्बाद करो। लेकिन बंगाल देख रहा है। और बंगाल चुप नहीं रहेगा। बीजेपी हर उस शख्स के साथ खड़ी है जो ममता बनर्जी के शासन का शिकार बना है।”

उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मिलकर हम डर को हराएँगे, सत्ता के दुरुपयोग को बेनकाब करेंगे और लोकतंत्र बहाल करेंगे। यह न्याय नहीं है। यह राजनीतिक उत्पीड़न है। और इसका अंत होगा।”

साथी इंफ्लुएंसर्स ने किया शमिक का समर्थन

शमिक को कुछ साथी कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स का भी समर्थन मिला है। एक एक्स यूजर ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बोलने वाले इंफ्लुएंसर्स के खिलाफ क्यों केस हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक आक्रोश क्यों नहीं होता।

समर्थकों का कहना है कि शासन और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए कानूनी परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालाँकि दूसरे लोग कहते हैं कि क्रिमिनल आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए और राजनीतिक बहस से अलग जाँच होनी चाहिए।

फिलहाल शमिक अधिकारी ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही और जाँच के नतीजे इस मुद्दे में बड़ी भूमिका निभाएँगे।

केस एक अपराध की शिकायत से शुरू हुआ था, लेकिन अब यह राजनीतिक बहस बन गया है जो आरोपी पर लगे आरोपों के साथ-साथ अभिव्यक्ति की आजादी, राजनीतिक दुश्मनी और चुनाव के समय सोशल मीडिया की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।

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