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भगवान शिव की अर्ध परिक्रमा क्यों होती है?


शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। 
वह इसलिए की शिव के सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता है। जब व्यक्ति आधी परिक्रमा करता है तो उसे चंद्राकार परिक्रमा कहते हैं।
शिवलिंग को ज्योति माना गया है और उसके आसपास के क्षेत्र को चंद्र। आपने आसमान में अर्ध चंद्र के ऊपर एक शुक्र तारा देखा होगा। यह शिवलिंग उसका ही प्रतीक नहीं है बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड ज्योतिर्लिंग के ही समान है।
''अर्द्ध सोमसूत्रांतमित्यर्थ: शिव प्रदक्षिणीकुर्वन सोमसूत्र न लंघयेत ।।
इति वाचनान्तरात।''
सोमसूत्र:
शिवलिंग की निर्मली को सोमसूत्र की कहा जाता है। शास्त्र का आदेश है कि शंकर भगवान की प्रदक्षिणा में सोमसूत्र का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, अन्यथा दोष लगता है।
सोमसूत्र की व्याख्या करते हुए बताया गया है कि भगवान को चढ़ाया गया जल जिस ओर से गिरता है, वहीं सोमसूत्र का स्थान होता है।
क्यों नहीं लांघते सोमसूत्र
सोमसूत्र में शक्ति-स्रोत होता है अत: उसे लांघते समय पैर फैलाते हैं और वीर्य निर्मित और 5 अन्तस्थ वायु के प्रवाह पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
इससे देवदत्त और धनंजय वायु के प्रवाह में रुकावट पैदा हो जाती है। जिससे शरीर और मन पर बुरा असर पड़ता है। अत: शिव की अर्ध चंद्राकार प्रदशिक्षा ही करने का शास्त्र का आदेश है।
कब लांघ सकते हैं
शास्त्रों में अन्य स्थानों पर मिलता है कि तृण, काष्ठ, पत्ता, पत्थर, ईंट आदि से ढके हुए सोम सूत्र का उल्लंघन करने से दोष नहीं लगता है, लेकिन ‘शिवस्यार्ध प्रदक्षिणा’ का मतलब शिव की आधी ही प्रदक्षिणा करनी चाहिए।
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‘ॐ नमः शिवाय’ बोलने का महत्व
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‘ॐ नमः शिवाय’ बोलने का महत्व
ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है सत्यम शिवम् सुन्दरम, सत्यम शिवम्
किस ओर से परिक्रमा करे
भगवान शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बांई ओर से शुरू कर जलाधारी के आगे निकले हुए भाग यानी जल स्रोत तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौटकर दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें।(पौराणिक कथाओं पर आधारित)

उत्तर प्रदेश : सरयू नदी से निकला 53 किलो का चांदी शिवलिंग; देखने जुटी हजारों की भीड़

सरयू नदी से निकला शिवलिंग (तस्वीर साभार: पंजाब केसरी)
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सरयू नदी पुल के नीचे से एक भारी भरकम शिवलिंग मिलने की खबर आ रही है। लोग सावन में मिले इस शिवलिंग को देख मान रहे हैं कि स्वयं शिव उन्हें दर्शन देने आए हैं। फिलहाल पुलिस ने इसे अपने कब्जे में लिया हुआ है। लेकिन जाँच के बाद यह स्थानीयों को लौटा दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि 16 जुलाई 2022 को 11 बजे राममिलन साहनी नाम का युवक मातेश्वरी घाट के समीप स्नान करने सरयू नदी पर गया था। वहीं उसे कुछ ठोस पदार्थ दिखा। जब उसने नदी के पास जमे बालू में खुदाई की तो अंदर से डेढ़ फुट लंबा और 1 फुट चौड़ा चांदी का शिवलिंग निकला। सूचना मिलते ही हजारों ग्रामीण शिवदर्शन के लिए इकट्ठा होते गए और जोर-जोर से हर-हर महादेव के नारे लगे।

इसके बाद रामचंद्र निषाद की 14 वर्षीय पुत्री द्वारा इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करवाई गई। फिर इसे मेला राम बाबा मंदिर के बगल में शिव मंदिर में रखा गया। यहाँ शिवलिंग का ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक किया।

जब पुलिस को इस तरह नदी के पास से शिवलिंग मिलने का पता चला तो वह शिवलिंग लेकर थाने आ गए। शिवलिंग मिलने की जानकारी देते हुए एसपी मऊ अविनाश पांडे ने बताया कि घाघरा नदी में किसी ने कुछ चमकती चीज देखी। जब इसे निकाला तो पता चला कि ये शिवलिंग है। इसे मलखाना के थाने में सम्मान के साथ रखा गया है। साथ ही जाँच एजेंसियों को सूचना दे दी गई है। जैसे ही पड़ताल पूरी होगी इसे लोगों को वापस कर दिया जाएगा।

कुछ लोग इस शिवलिंग का वजन 30 किलो कह रहे हैं जबकि अधिकांश मीडिया रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि ये शिवलिंग 53 किलो का है। सोशल मीडिया पर ये खबर आने के बाद लोगों में शिव के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई है। लोग हैरान हैं कि सरयू नदी से निकली दमकती चीज वाकई शिवलिंग ही है। यूजर्स इसे देख कह रहे हैं कि लग रहा है कि अब कलयुग का अंत होने वाला है क्योंकि स्वयं बाबा ने दर्शन दे दिए हैं।

हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने में छद्दम धर्म-निरपेक्ष मशहूर हस्तियाँ, नेता, पत्रकार और पॉपुलर ब्रांड्स तक हैं शामिल

           ऐसी 21 घटनाएँ जब मशहूर हस्तियों, नेताओं, पत्रकारों और ब्रांडों ने हिंदू देवी-देवताओं का उड़ाया मजाक
बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा और दिल्ली बीजेपी के पूर्व नेता नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणियों पर चल रहे विवाद के बीच, लोग हिंदू देवताओं पर टिप्पणियों की तुलना में पैगंबर पर की गई टिप्पणी पर एकतरफा चल रही प्रतिक्रिया पर 
सवाल उठा रहे हैं। जहाँ हिंदू देवताओं और सनातन परंपराओं पर बहुत खराब टिप्पणियाँ की गई हैं, जिन पर न कोई FIR हुआ और न मृत्युदंड की कोई माँग की गई, जबकि हर शहर में ‘लिबरल्स’ द्वारा समर्थित भीड़ नूपुर शर्मा के सिर पर लगातार ईनाम घोषित कर सिर कलम करने की माँग कर रही थी।

CAA में हिन्दुत्व विरोधी नारों पर भी छद्दम धर्म-निरपेक्षों के
मुंह में दही ही जमा था, सुनाई और दिखना भी बंद हो गया था 
इस्लामिक किताबों में लिखी बातों को आज नूपुर और नवीन जिंदल द्वारा कहे जाने पर जो बबाल मचा हुआ है, इसका मुख्य कारण सेकुलरिज्म नहीं बल्कि सेकुलरिज्म की आड़ में खेली गयी तुष्टिकरण की गन्दी सियासत। नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी का कोई नाम तक नहीं लेता,क्यों? अगर इस्लामिक किताब में लिखी बात को टीवी पर बुलवाने का असली गुनहगार रहमानी है, न शिवलिंग पर उकसाने वाली बात बोलता न ही नूपुर को बोलना पड़ता। दूसरे, हर देशप्रेमी को आंखें को अपने दिलो-दिमाग को खोल जन-विरोधी हरकतों में लिप्त नेताओं को पहचान जो हिन्दू नेता वोट बैंक की गन्दी घिनौनी सियासत कर नूपुर के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने वालों का समर्थन कर रहे है, ये लोग तब भी इन्हीं लोगों  खड़े थे, जब CAA विरोध में जब fuck hindutva के नारे लग रहे थे; इसी विरोध में हिन्दुओं की गैर-हाज़िरी में इन कट्टरपंथियों द्वारा भारत को इस्लामिक देश बनाये जाने पर नीतियां बनायीं जाती थीं। जब अपने सर्वाधिक पढ़े(एक लाख से अधिक) लेख में इसका उल्लेख किया था, किसी ने कट्टरपंथी ने विरोध तक नहीं किया था। 

हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में, कई मशहूर हस्तियों, पत्रकारों और राजनेताओं ने बिना किसी प्रतिरोध या प्रतिक्रिया के हिंदू देवी-देवताओं को गाली देना बंद कर दिया है। वास्तव में, उनमें से कई अपनी इस हरकत की वजह से अपने करियर में आगे बढ़े हैं। यहाँ ऐसी टिप्पणियों और सोशल मीडिया रिपोर्टों की एक छोटी सी सूची हम पेश कर रहे हैं। देखिए इन लोगों ने किस तरह से हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया है।

अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी

इससे पहले कि राम मंदिर निर्माण की बात थोड़ी दूर की कौड़ी लग रही थी, तब केजरीवाल ने 2014 में कहा था कि उनकी नानी (दादी) इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगी। वह बार-बार राम मंदिर की जगह स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने की माँग कर रहे थे।
राम मंदिर पर हिंदुओं का मजाक उड़ाने के अलावा, 2019 में, सीएम केजरीवाल ने एक अपमानजनक तस्वीर साझा की, जहाँ एक व्यक्ति अपने हाथ में झाड़ू (उनकी पार्टी का प्रतीक) के साथ हिंदू पवित्र प्रतीक स्वास्तिक को पीटते हुए दूर भगाने की कोशिश कर रहा था।
एक अन्य ट्वीट में, केजरीवाल ने भारत सरकार के साथ दिल्ली की आप सरकार के टकराव से ध्यान हटाने के लिए भगवान हनुमान द्वारा जेएनयू को जलाने का चित्रण करते हुए एक कार्टून साझा किया
आप में केवल केजरीवाल ही नहीं हैं जो हिंदू विरोधी बयान देते हैं या हिंदुओं के खिलाफ माहौल बनाने में लिप्त हैं। आप नेता संजय सिंह ने भी राजनीति में प्रासंगिकता हासिल करने के प्रयास में जून 2021 में भाजपा और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा धन की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए एक झूठा अभियान चलाया था। जो बाद में फेक साबित हुआ था।
अगस्त 2020 में, AAP के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने सिक्किम में कंचनजंगा की तस्वीरें साझा की थीं, जिन्हें हिंदुओं और बौद्धों, दोनों द्वारा पवित्र माना जाता है, उत्तराखंड में कामेट पीक और नंदा देवी पहाड़ियों, जहाँ नंदा देवी का एक पवित्र मंदिर है, जो एक अवतार है हिंदू देवी माँ दुर्गा की। इसने इन पवित्र चोटियों और दिल्ली के गाजीपुर में एक विशाल लैंडफिल के बीच समानता दिखाई। विवादित ट्वीट के साथ कैप्शन लिखा था, “भारत के सबसे ऊँचे पहाड़।”

ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ का अपमान

हाल ही में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिले ‘शिवलिंग’ का मजाक उड़ाने का एक सिलसिला शुरू हो गया। तब भी हिन्दुओं की तरफ से कोई तीखी प्रतिक्रिया या FIR की बात नहीं आई।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा करते हुए कटाक्ष करते हुए लिखा था कि उम्मीद है कि यह खुदाई सूची में अगला नहीं होगा।
यहाँ तक कि सबा नकवी ने ज्ञानवापी परिसर के अंदर मिले शिवलिंग का उड़ाने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा की। हालाँकि इसे आलोचना के बाद अब डिलीट कर दिया है।
वहीं राजद नेता कुमार दिवाशंकर ने भी अपने ट्वीट में भाजपा का मजाक उड़ाते हुए शिवलिंग का अपमानजनक संदर्भ दिया।
पीस पार्टी के शादाब चौहान ने भी वाराणसी की एक अदालत द्वारा ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को सील करने के आदेश के बाद एक अपमानजनक ट्वीट किया, जब उसके वुजुखाना के अंदर एक शिवलिंग मिला। चौहान ने छोटे खंभों के साथ लगे एक किनारे की तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें दावा किया गया था कि अगर कोई शिवलिंग पर दावा करता है तो न्यायाधीश उस क्षेत्र को सील कर देंगे।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता दानिश कुरैशी ने भी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर शिवलिंग मिलने पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर शिवलिंग पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वहीं इस टिप्पणी को लेकर गुजरात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
केवल नेता ही अपमानजनक टिप्पणी करने वाले नहीं हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने भी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र को शिवलिंग के रूप में चित्रित करके हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए एक मीम प्रकाशित किया था और बम भोलेनाथ कैप्शन दिया था। तस्वीर को प्रिंट संस्करण के MEME’S THE WORD कॉलम में शामिल किया गया था।
कॉलम में एक और कार्टून ताजमहल के तहखाने में बंद दरवाजों को खोलने की माँग का मजाक उड़ाता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल ने भी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि अगर वह शिवलिंग है, तो ऐसा लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना हुआ था।
प्रोफेसर रविकांत चंदन ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर एक बहस के दौरान टिप्पणी की थी कि पंडितों द्वारा परिसर में हो रही अवैध गतिविधियों को कथित रूप से देखने के बाद इसे औरंगजेब द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। उन्होंने जिस किताब और कहानी का जिक्र किया, उसका किसी ऐतिहासिक दस्तावेज में कोई जिक्र नहीं है। यहाँ तक कि किताब के लेखक ने खुद किताब को गंभीरता से नहीं लेने का सुझाव दिया था।
स्वतंत्र पत्रकार रकीब हमीद नाइक, एक कुख्यात हिंदू-फोबिक तत्व, ने ज्ञानवापी में शिवलिंग को बदनाम करने के लिए व्हाइट हाउस की एक तस्वीर और उसके सामने का एक फव्वारा लगाया। तथाकथित ‘पत्रकार’ के अनुसार, सर्वेक्षण दल को शिवलिंग नहीं मिला, बल्कि एक फव्वारे का पता चला है, जिसका उपयोग हिंदू पक्ष द्वारा ज्ञानवापी के स्वामित्व के लिए किया जा रहा है।

आस्था का अपमान

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े जेएन मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ जितेंद्र कुमार अपनी कक्षा में यौन अपराधों के बारे में पढ़ा रहे थे। पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन में वे विषय की व्याख्या करते थे, डॉ कुमार ने हिंदू देवताओं के लिए अपमानजनक संदर्भ दिए। बलात्कार के एक संक्षिप्त इतिहास को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने बलात्कार को हिंदू देवी-देवताओं से जोड़ा। हालाँकि, कुमार को जाँच लंबित रहने तक विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उनके खिलाफ की गई किसी भी सख्त कार्रवाई पर अभी कोई अपडेट नहीं है।

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी द्वारा 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना में मारे गए 59 कारसेवकों और माँ सीता के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी को कोई कैसे भूल सकता है। हिंदुओं के विरोध के बाद हालाँकि उसके कई शो उस समय रद्द कर दिए गए थे। फिर भी उसे अभी एक बड़े रियलिटी शो लॉक अप में मौका दिया गया था जिसे उन्होंने जीता भी।

विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक इलियास शरफुद्दीन ने भी शिवलिंग की तुलना पुरुष शरीर के अंग से की है और कहा है कि हिंदुओं को मूर्ति और पुरुष के निजी अंग की पूजा करने की आदत है। वह ज़ी न्यूज़ द्वारा आयोजित ‘ताल ठोक के’ बहस में भाग लेने वालों में से एक थे। वेदों, गीता और उपनिषदों का हवाला देते हुए, शराफुद्दीन ने पहले तर्क दिया कि हिंदू ग्रंथों में उल्लेख है कि ‘जो लोग मूर्तियों की पूजा करेंगे उन्हें नरक में भेजा जाएगा’। “हिंदुओं को मूर्ति, लिंग और मानव शरीर के गुप्तांगों की पूजा नहीं करनी चाहिए”, उसने ‘ज्ञानवापी सर्वेक्षण वीडियो में शिवलिंग की उपस्थिति का मजाक उड़ाते हुए कई भद्दी टिप्पणियाँ की। यहाँ तक कि अन्य प्रतिभागियों को न सुनकर, वह हँसा और कहा, ” प्राइवेट पार्ट की पूजा नहीं होनी चाहिए (निजी अंगों की पूजा नहीं करनी चाहिए)”।

ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने भी हिन्दू देवी-देवताओं को ‘मनहूस’ कहा था।

बंगाली फिल्म अभिनेत्री सायोनी घोष ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर बेहद आपत्तिजनक कार्टून साझा किया था। जब उसे कार्रवाई की धमकी दी गई, तो उसने दावा किया कि उसका अकाउंट हैक कर लिया गया था। बाद में टीएमसी ने उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट भी दिया।

मशहूर हस्तियों, नेताओं और मीडिया घरानों के अलावा, ब्रांडों को भी हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने की आदत होती है और जब उन्हें इस पर फटकार लगती है, तो उन्हें अक्सर वामपंथी और लिबरलों का समर्थन मिलता है। हाल के दिनों में, हिंदुओं को लक्षित करते हुए कई आपत्तिजनक अभियान और ब्रांड शुरू किए गए थे। हालाँकि, ज्यादातर मामलों में विज्ञापनों को हिंदुओं के विरोध के बाद हटा दिया गया था, लेकिन ब्रांड हिंदू विरोधी विज्ञापनों के किसी भी गंभीर परिणाम के बिना आसानी से पीछा छुड़ा लिए।

2019 में, रेड लेबल ने हिंदुओं को घृणित कट्टरपंथियों के रूप में पेश करते हुए गणेश चतुर्थी पर एक विज्ञापन अभियान शुरू किया। विज्ञापन में एक व्यक्ति को घर ले जाने के लिए गणेश की मूर्ति की खरीदारी करते हुए दिखाया गया, जहाँ उसने एक बुजुर्ग मूर्ति निर्माता से बात की कि वह किस प्रकार की मूर्ति खरीदना चाहता है। मूर्ति निर्माता को हिंदू पौराणिक कथाओं का गहरा ज्ञान था, वह जिस पेशे में है, उसके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। बातचीत के दौरान मूर्ति निर्माता एक स्कल टोपी निकालता है और उसे पहनता है, जो यह दर्शाता है कि वह मुस्लिम है। यह देखकर, संभावित खरीदार हिचकिचाता है और कहता है कि वह आगे वापस आएगा, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि वह किसी मुसलमान से मूर्ति नहीं खरीदना चाहता था। मूर्ति निर्माता ने तब उसे चाय की पेशकश की और कुछ बातचीत की, जिसने हिंदू व्यक्ति का मन बदल दिया, और उसने तुरंत वह मूर्ति खरीद ली। खैर, हिंदुस्तान यूनिलीवर के एक ब्रांड रेड लेबल को ऐसे विज्ञापनों को जारी करने और बैकलैश के बाद उन्हें वापस लेने की आदत है।

ऐसे ही ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क द्वारा 2020 में लव जिहाद का महिमामंडन करने वाला एक विज्ञापन जारी किया गया था। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने उस विज्ञापन के लिए ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क के बहिष्कार का आह्वान किया, जिसमें एक मुस्लिम परिवार में विवाहित हिंदू महिला को दिखाया गया था। उसके गोद भराई की तैयारी हो रही थी। हालाँकि, विरोध के बाद उसे YouTube से हटा दिया गया था।

2021 में, लोकप्रिय एथनिक गारमेंट ब्रांड फैबइंडिया ने भी दिवाली पर ‘जश्न-ए-रिवाज़’ नाम का एक विज्ञापन लॉन्च किया। जिस पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने हिंदू त्योहार और भावनाओं के इस तरह से इस्लामीकरण पर आपत्ति जताई। बहुत से लोगों ने दिवाली को ‘जश्न-ए-रियाज़’ कहने का समर्थन नहीं किया। इसे भी विरोध के बाद हटा दिया गया। हालाँकि, बाद में फैबइंडिया ने दावा किया कि यह दिवाली अभियान भी नहीं था जो कि लोगों के विरोध से बचने के लिए एक तरह की बहानेबाजी थी।

सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानंद ने भी किया है ज्ञानवापी में स्थित शिवलिंग का उल्लेख

उगता भारत के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य ने अपने निम्न लेख में काशी ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग के होने का जो एक और प्रमाण दिया है। जिससे ध्यान हटाने के लिए कट्टरपंथियों द्वारा जो नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के बहाने देशभर में हिंसात्मक प्रदर्शन किये जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई उपद्रवियों के मुंह से बाहर आ ही गयी। देखिए SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।” जिसे नीचे दिए लिंक में विस्तार से पढ़ा एवं सुना जा सकता है।  

दुर्भाग्य यह है कि मोदी सरकार ने फेक न्यूज़ फैलाकर मुसलमानों बदनाम करने वाले जुबेर के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की, क्यों? सुनिए नूपुर की ज़ुबानी:-

https://www.facebook.com/watch/?extid=WA-UNK-UNK-UNK-AN_GK0T-GK1C&v=711695083470064  

प्रस्तुत है डॉ राकेश का लेख:-

आज ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जिस प्रकार लोगों को अनेक प्रकार के साक्ष्य एकत्र करने पड़ रहे हैं, उनके दृष्टिगत महर्षि दयानंद के ‘ सत्यार्थ प्रकाश’ की साक्षी भी बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि शिवलिंग के रूप में डाले जाने का उल्लेख महर्षि दयानंद ने भी ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में किया है । यद्यपि उसका प्रसंग थोड़ा दूसरा है ,परंतु शिवलिंग को उस समय कूप में डाल दिया गया था यह बात तो ऋषि दयानंद जी को भी ज्ञात थी और उन्होंने उसे यथावत अपने अमर ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में स्पष्ट किया है। उस प्रसंग को हम यहां यथावत प्रस्तुत कर रहे हैं :–

प्रश्न) जैसे स्त्री की पाषाणादि मूर्ति देखने से कामोत्पत्ति होती है वैसी वीतराग शान्त की मूर्त्ति देखने से वैराग्य और शान्ति की प्राप्ति क्यों न होगी?

(उत्तर) नहीं हो सकती। क्योंकि उस मूर्त्ति के जड़त्व धर्म आत्मा में आने से विचारशक्ति घट जाती है। विवेक के विना न वैराग्य और वैराग्य के विना विज्ञान, विज्ञान के विना शान्ति नहीं होती। और जो कुछ होता है सो उनके संग, उपदेश और उनके इतिहासादि के देखने से होता है क्योंकि जिस का गुण वा दोष न जानके उस की मूर्त्तिमात्र देखने से प्रीति नहीं होती। प्रीति होने का कारण गुणज्ञान है। ऐसे मूर्त्तिपूजा आदि बुरे कारणों ही से आर्य्यावर्त्त में निकम्मे पुजारी भिक्षुक आलसी पुरुषार्थ रहित क्रोड़ों मनुष्य हुए हैं। सब संसार में मूढ़ता उन्हीं ने फैलाई है। झूठ छल भी बहुत सा फैला है।

(प्रश्न) देखो! काशी में ‘औरंगजेब’ बादशाह को ‘लाटभैरव’ आदि ने बड़े-बड़े चमत्कार दिखलाये थे। जब मुसलमान उन को तोड़ने गये और उन्होंने जब उन पर तोप गोला आदि मारे तब बड़े-बड़े भमरे निकल कर सब फौज को व्याकुल कर भगा दिया।

(उत्तर) यह पाषाण का चमत्कार नहीं किन्तु वहां भमरे के छत्ते लग रहे होंगे। उन का स्वभाव ही क्रूर है। जब कोई उन को छेड़े तो वे काटने को दौड़ते हैं। और जो दूध की धारा का चमत्कार होता था वह पुजारी जी की लीला थी।

(प्रश्न) देखो! महादेव म्लेच्छ को दर्शन न देने के लिये कूप में और वेणीमाधव एक ब्राह्मण के घर में जा छिपे। क्या यह भी चमत्कार नहीं है?

(उत्तर) भला जिस के कोटपाल, कालभैरव, लाटभैरव आदि भूत प्रेत और गरुड़ आदि गणों ने मुसलमानों को लड़के क्यों न हटाये? जब महादेव और विष्णु की पुराणों में कथा है कि अनेक त्रिपुरासुर आदि बड़े भयंकर दुष्टों को भस्म कर दिया तो मुसलमानों को भस्म क्यों न किया? इस से यह सिद्ध होता है कि वे बिचारे पाषाण क्या लड़ते लड़ाते? जब मुसलमान मन्दिर और मूर्त्तियों को तोड़ते-फोड़ते हुए काशी के पास आए तब पूजारियों ने उस पाषाण के लिंग को कूप में डाल और वेणीमाधव को ब्राह्मण के घर में छिपा दिया। जब काशी में कालभैरव के डर के मारे यमदूत नहीं जाते और प्रलय समय में भी काशी का नाश होने नहीं देते तो म्लेच्छों के दूत क्यों न डराये? और अपने राज के मन्दिरों का क्यों नाश होने दिया? यह सब पोपमाया है।

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‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धम
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‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धम

इस उदाहरण से स्पष्ट है कि हिंदू समाज में प्रचलित आम धारणा के आधार पर महर्षि दयानंद ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में इस घटना को यथावत स्थान दिया । यदि महर्षि दयानंद जैसे महापुरुष ने इस घटना का उल्लेख किया है तो निश्चय ही यह घटना उस समय तक लोगों के चित्त में बनी बैठी रही होगी। इसके अतिरिक्त महर्षि दयानंद ने इस पर पर्याप्त अध्ययन करने के उपरांत ही इसे इस प्रकार उल्लेखित किया होगा।

‘क्यों करते हो प्राइवेट पार्ट्स की पूजा’ : मौलवी इलियास ने फिर शिवलिंग का अपमान करके लगाए जोर-जोर ठहाके

ज्ञानवापी मुद्दे पर होने वाले टीवी शो में शिवलिंग का अपमान अब सामान्य होता जा रहा है। मौलवी इलियास शराफुद्दीन ने एक बार फिर से ऑन टीवी शिवलिंग को प्राइवेट पार्ट बताकर उसके पूजन पर सवाल खड़े किए हैं और हिंदुओं की भावना आहत करके ठहाके भी लगाए हैं।

जी न्यूज के ही एक शो में ठाकुर देवकी नंदन के साथ इलियास ने ज्ञानवापी के वीडियो लीक मामले में कहा, “क्यों कर रहे हो तुम लोग प्राइवेट पार्ट्स की पूजा। मैं ये पूछना चाहता हूँ कि क्यों कर रहे हो। वेदा-गीता के खिलाफ जाकर, श्रीराम श्रीकृष्णा के खिलाफ जाकर प्राइवेट पार्ट्स की पूजा क्यों कर रहे हो, तुम्हारा प्राइवेट पार्ट्स से क्या लेना-देना है।”
वीडियो में देख सकते हैं कि इलियास शिवलिंग को प्राइवेट पार्ट बता कर कितना खुश होता है और लगातार हँसता रहता है। थोड़ी देर में शांत होने के बाद इलियास दोबारा वही शब्द कहता है, “क्यों कर रहे हो प्राइवेट पार्ट्स की पूजा। क्यों लिंग और योनि की पूजा कर रहे हो। क्यों जहन्नुम में ले जा रहे हो बेचारे करोड़ों हिंदुओं को… श्रीराम और श्रीकृष्ण के रस्ते पर आओ। रावण और कंस का रास्ता छोड़ दो।”
जी न्यूज के शो से इलियास के बयान की क्लिप को काटकर अब सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। भाजपा नेता तजिंदर पाल बग्गा ने यूपी पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। सामान्य यूजर भी इसे शेयर करके पूछ रहे हैं कि जब नुपूर शर्मा पर कार्रवाई हो सकती है तो इस पर क्यों नहीं? वीडियो को शेयर करके ध्यान दिलाया जा रहा है कि किस प्रकार महादेव का अपमान करके भी इलियास राक्षसों वाली हँसी हँसता रहा और उसपर किसी ने संज्ञान नहीं लिया।
इलियास की एक वीडियो पिछले दिनों भी सामने आई थी। उस समय उसने ताल ठोक के शो में बहस करते हुए कहा था, “हिंदुओं को मूर्तियों और पुरुषों के गुप्तांग की पूजा करने की आदत है।” शराफुद्दीन ने तर्क दिया था कि हिंदू ग्रंथों में उल्लेख किया गया है, “जो लोग मूर्तियों की पूजा करेंगे, उन्हें नरक में भेजा जाएगा। इसलिए हिंदुओं को मूर्ति, लिंग और पुरुषों के गुप्तांगों की पूजा नहीं करनी चाहिए।” इस वीडियो में भी शराफुद्दीन को हँसते हुए देखा गया था। शो के दौरान शराफुद्दीन ने हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने वाले हिंदुओं को ‘बुद्धिहीन, अक्ल के अंधे’ कहा था और एक अन्य पैनलिस्ट को गाली भी दी थी, जिसके बाद चैनल को उसे शो के बीच से ही हटाना पड़ा था।
महंत योगेश पुरी ने शिवलिंग और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए मौलवी को शो के बीच में फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि शराफुद्दीन की टिप्पणी से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। महंत पुरी ने बहस के दौरान मौलवी से महंत ने कहा, “आपको शिवलिंग के बारे में कुछ भी कहने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बारे में आप क्या जानते हैं? शिवलिंग पुरुष के गुप्तांग के समान नहीं है। इसका आपकी घटिया मानसिकता से कुछ भी लेना-देना नहीं है।” इसके बाद भी मौलवी हँसता रहा और कहा, “हिंदुओं को मानव अंगों की पूजा करना बंद कर देना चाहिए।” शो में अपने कुतर्कों को सही ठ​हराते हुए शराफुद्दीन ने आसाराम बापू का उदाहरण देते हुए कहा कि आसाराम बापू जैसे कितने लोगों ने आश्रम में कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया है। इसके बाद इस्लामिक स्कॉलर ने कर्नाटक के उडुपी में हिजाब पहनने वाली लड़कियों प्रशंसा करते हुए ‘हिजाब लाओ, बेटी बचाओ’ का नारा लगाया।
यही नहीं शराफुद्दीन ने हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने वाले हिंदुओं को ‘बुद्धिहीन, अक्ल के अंधे’ कहा। उसने इस बार शिवलिंग की तुलना पत्थर से करते हुए कहा, “हिंदू लिंग और योनि की पूजा करके देश को बर्बाद कर रहे हैं।” उन्होंने इस दौरान अन्य पैनलिस्ट को गाली भी दी, जिसके बाद चैनल को उन्हें शो के बीच से ही हटाना पड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इलियास शराफुद्दीन की विवादास्पद टिप्पणी की निंदा की करते हुए शो में पूछा क्या अब मौलवी के खिलाफ फतवा जारी किया जाएगा? हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और हिंदू प्रथा का मजाक उड़ाने वाले शराफुद्दीन को नेटिज़न्स ने भी सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया।

गैवीनाथ धाम: जहाँ औरंगजेब ने शिवलिंग पर चलाई थी तलवार लेकिन सेना सहित जान बचाकर भागा, आज भी हैं निशान

गैवीनाथ धाम स्थित शिवलिंग पर आज भी हैं औरंगजेब की तलवार और छेनी-हथौड़े के निशान (फोटो : सोशल मीडिया/विकीपीडिया)
भारत के कई ऐसे महान मंदिर रहे जो इस्लामिक आक्रान्ताओं का शिकार हुए। अयोध्या, काशी और मथुरा सहित देश के कई बड़े-छोटे मंदिरों को इस्लामिक कट्टरपंथी आक्रान्ताओं ने अपने मजहबी उन्माद की भेंट चढ़ा दिया लेकिन कई ऐसे दिव्य मंदिर भी थे, जहाँ ये आक्रांता अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। ऐसा ही एक त्रेताकालीन मंदिर पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थित है, जहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब और उसकी सेना ने शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया था लेकिन उसे अपनी सेना सहित जान बचाकर भागना पड़ा।

त्रेताकालीन हैं भगवान गैवीनाथ

विंध्य समेत पूरे मध्य भारत में आस्था का केंद्र गैवीनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले से 35 किमी दूर बिरसिंहपुर नामक कस्बे में स्थित है। त्रेतायुग में यह स्थान देवपुर कहलाता था। इस स्थान और गैवीनाथ मंदिर का वर्णन पदम पुराण के पाताल खंड में मिलता है।
देवपुर में राजा वीर सिंह का राज्य हुआ करता था। राजा ठहरे महाकाल के अनन्य भक्त तो घोड़े पर सवार होते और पहुँच जाते महाकाल की नगरी उज्जैन। सालों तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब राजा वृद्ध हुए तब उन्होंने महाकाल से अपनी व्यथा बताई। तब महाकाल ने राजा के स्वप्न में देवपुर में ही दर्शन देने की बात कही। उसी समय नगर के ही गैवी यादव नामक व्यक्ति के यहाँ चूल्हे से शिवलिंग निकला लेकिन गैवी की माँ उस शिवलिंग को दोबारा जमीन के अंदर कर देती।
                                               गैवीनाथ धाम (फोटो : पत्रिका)
महाकाल एक दिन फिर से राजा वीर सिंह के स्वप्न में आए और बताया कि वह जमीन से निकलना चाहते हैं लेकिन गैवी की माँ उन्हें फिर जमीन में धकेल देती है। अंततः राजा गैवी के घर पहुँचे और जिस स्थान से शिवलिंग चूल्हे से बाहर आने का प्रयास कर रहा था, उस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और महाकाल के आदेश के अनुसार भगवान शिव इस स्थान पर गैवीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए। गैवीनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग को भगवान महाकाल का ही रूप माना जाता है।
औरंगज़ेब भागा था अपनी जान बचाकर 
बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम भी मुस्लिम आक्रान्ताओं की हिन्दू घृणा का शिकार हुआ था। यह अलग बात है कि आक्रांता न तो मंदिर का और न ही भगवान की मूर्ति का कुछ बिगाड़ सके। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार आज से 317 साल पहले 1704 में मुगल आक्रांता औरंगजेब हिन्दू मंदिरों को नष्ट करने के क्रम में इस स्थान पर पहुँचा था।
लाखों की झुण्ड में मधुमक्खियां निकली 
औरंगजेब के साथ उसकी सेना भी थी। औरंगजेब ने पहले अपनी तलवार से शिवलिंग पर प्रहार किया लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहने पर उसने अपनी सेना को आदेश दिया, जिसके बाद शिवलिंग को हथौड़े और छेनी से तोड़ने का प्रयास किया गया। कहा जाता है कि शिवलिंग पर पाँच प्रहार किए गए थे। पहले प्रहार में शिवलिंग से दूध निकला, दूसरे प्रहार में शहद, तीसरे प्रहार में खून और चौथे प्रहार में गंगाजल। जैसे ही औरंगजेब के सैनिकों ने शिवलिंग पर पाँचवाँ प्रहार किया, लाखों की संख्या में भँवर (मधुमक्खी) निकली। औरंगजेब और उसकी पूरी सेना तितर-बितर हो गई और किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी।
                                    बिरसिंहपुर के गैवीनाथ धाम स्थित शिवलिंग (फोटो सोर्स : सोशल मीडिया)
आज भी गैवीनाथ धाम में शिवलिंग पर तलवार के निशान हैं और खंडित शिवलिंग की ही पूजा होती है। हिन्दू धर्म में खंडित मूर्तियों की पूजा प्रतिबंधित है किन्तु गैवीनाथ धाम देश का इकलौता मंदिर है, जहाँ खंडित शिवलिंग ही पूजे जाते हैं और उनकी मान्यता पूरे हिन्दू धर्म में है।
बिरसिंहपुर के निवासी कहते हैं कि इसी शिवलिंग के कारण न केवल मंदिर की अपितु उनके शहर और उनकी माँ-बेटियों की रक्षा भी हो सकी। यही कारण है कि पूरे विंध्य क्षेत्र में गैवीनाथ धाम का महत्व भारत के किसी भी बड़े मंदिर की भाँति ही है।
मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि जमीन के अंदर कितनी गहराई तक शिवलिंग है, इसके विषय में कोई नहीं जानता। स्थानीय मान्यता है कि चारधाम धाम यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब चार धामों का जल भगवान गैवीनाथ को अर्पित किया जाए। वैसे तो यह मंदिर हमेशा से ही भक्तों से भरा रहता है लेकिन सावन महीने और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों में यहाँ भक्तों की संख्या लाखों तक पहुँच जाती है।
कैसे पहुंचे 
सतना जिले से नजदीकी हवाईअड्डा खजुराहो में स्थित है। गैवीनाथ धाम से खजुराहो हवाईअड्डे की दूरी लगभग 142 किमी है। इसके अलावा बिरसिंहपुर पहुँचने के लिए सतना तक ट्रेन से पहुँचा जा सकता है। सतना रेलवे स्टेशन पूर्वी मध्य प्रदेश का एक बड़ा और व्यस्त रेलवे स्टेशन है और यहाँ से बस, टैक्सी एवं निजी वाहन के माध्यम से बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम पहुँच सकते हैं। प्रयागराज और वाराणसी के लोग रीवा होते हुए इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं। रीवा से गैवीनाथ धाम की दूरी लगभग 58 किमी है। (साभार)