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गैवीनाथ धाम: जहाँ औरंगजेब ने शिवलिंग पर चलाई थी तलवार लेकिन सेना सहित जान बचाकर भागा, आज भी हैं निशान

गैवीनाथ धाम स्थित शिवलिंग पर आज भी हैं औरंगजेब की तलवार और छेनी-हथौड़े के निशान (फोटो : सोशल मीडिया/विकीपीडिया)
भारत के कई ऐसे महान मंदिर रहे जो इस्लामिक आक्रान्ताओं का शिकार हुए। अयोध्या, काशी और मथुरा सहित देश के कई बड़े-छोटे मंदिरों को इस्लामिक कट्टरपंथी आक्रान्ताओं ने अपने मजहबी उन्माद की भेंट चढ़ा दिया लेकिन कई ऐसे दिव्य मंदिर भी थे, जहाँ ये आक्रांता अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। ऐसा ही एक त्रेताकालीन मंदिर पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थित है, जहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब और उसकी सेना ने शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया था लेकिन उसे अपनी सेना सहित जान बचाकर भागना पड़ा।

त्रेताकालीन हैं भगवान गैवीनाथ

विंध्य समेत पूरे मध्य भारत में आस्था का केंद्र गैवीनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले से 35 किमी दूर बिरसिंहपुर नामक कस्बे में स्थित है। त्रेतायुग में यह स्थान देवपुर कहलाता था। इस स्थान और गैवीनाथ मंदिर का वर्णन पदम पुराण के पाताल खंड में मिलता है।
देवपुर में राजा वीर सिंह का राज्य हुआ करता था। राजा ठहरे महाकाल के अनन्य भक्त तो घोड़े पर सवार होते और पहुँच जाते महाकाल की नगरी उज्जैन। सालों तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब राजा वृद्ध हुए तब उन्होंने महाकाल से अपनी व्यथा बताई। तब महाकाल ने राजा के स्वप्न में देवपुर में ही दर्शन देने की बात कही। उसी समय नगर के ही गैवी यादव नामक व्यक्ति के यहाँ चूल्हे से शिवलिंग निकला लेकिन गैवी की माँ उस शिवलिंग को दोबारा जमीन के अंदर कर देती।
                                               गैवीनाथ धाम (फोटो : पत्रिका)
महाकाल एक दिन फिर से राजा वीर सिंह के स्वप्न में आए और बताया कि वह जमीन से निकलना चाहते हैं लेकिन गैवी की माँ उन्हें फिर जमीन में धकेल देती है। अंततः राजा गैवी के घर पहुँचे और जिस स्थान से शिवलिंग चूल्हे से बाहर आने का प्रयास कर रहा था, उस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और महाकाल के आदेश के अनुसार भगवान शिव इस स्थान पर गैवीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए। गैवीनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग को भगवान महाकाल का ही रूप माना जाता है।
औरंगज़ेब भागा था अपनी जान बचाकर 
बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम भी मुस्लिम आक्रान्ताओं की हिन्दू घृणा का शिकार हुआ था। यह अलग बात है कि आक्रांता न तो मंदिर का और न ही भगवान की मूर्ति का कुछ बिगाड़ सके। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार आज से 317 साल पहले 1704 में मुगल आक्रांता औरंगजेब हिन्दू मंदिरों को नष्ट करने के क्रम में इस स्थान पर पहुँचा था।
लाखों की झुण्ड में मधुमक्खियां निकली 
औरंगजेब के साथ उसकी सेना भी थी। औरंगजेब ने पहले अपनी तलवार से शिवलिंग पर प्रहार किया लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहने पर उसने अपनी सेना को आदेश दिया, जिसके बाद शिवलिंग को हथौड़े और छेनी से तोड़ने का प्रयास किया गया। कहा जाता है कि शिवलिंग पर पाँच प्रहार किए गए थे। पहले प्रहार में शिवलिंग से दूध निकला, दूसरे प्रहार में शहद, तीसरे प्रहार में खून और चौथे प्रहार में गंगाजल। जैसे ही औरंगजेब के सैनिकों ने शिवलिंग पर पाँचवाँ प्रहार किया, लाखों की संख्या में भँवर (मधुमक्खी) निकली। औरंगजेब और उसकी पूरी सेना तितर-बितर हो गई और किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी।
                                    बिरसिंहपुर के गैवीनाथ धाम स्थित शिवलिंग (फोटो सोर्स : सोशल मीडिया)
आज भी गैवीनाथ धाम में शिवलिंग पर तलवार के निशान हैं और खंडित शिवलिंग की ही पूजा होती है। हिन्दू धर्म में खंडित मूर्तियों की पूजा प्रतिबंधित है किन्तु गैवीनाथ धाम देश का इकलौता मंदिर है, जहाँ खंडित शिवलिंग ही पूजे जाते हैं और उनकी मान्यता पूरे हिन्दू धर्म में है।
बिरसिंहपुर के निवासी कहते हैं कि इसी शिवलिंग के कारण न केवल मंदिर की अपितु उनके शहर और उनकी माँ-बेटियों की रक्षा भी हो सकी। यही कारण है कि पूरे विंध्य क्षेत्र में गैवीनाथ धाम का महत्व भारत के किसी भी बड़े मंदिर की भाँति ही है।
मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि जमीन के अंदर कितनी गहराई तक शिवलिंग है, इसके विषय में कोई नहीं जानता। स्थानीय मान्यता है कि चारधाम धाम यात्रा तभी पूरी मानी जाती है, जब चार धामों का जल भगवान गैवीनाथ को अर्पित किया जाए। वैसे तो यह मंदिर हमेशा से ही भक्तों से भरा रहता है लेकिन सावन महीने और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों में यहाँ भक्तों की संख्या लाखों तक पहुँच जाती है।
कैसे पहुंचे 
सतना जिले से नजदीकी हवाईअड्डा खजुराहो में स्थित है। गैवीनाथ धाम से खजुराहो हवाईअड्डे की दूरी लगभग 142 किमी है। इसके अलावा बिरसिंहपुर पहुँचने के लिए सतना तक ट्रेन से पहुँचा जा सकता है। सतना रेलवे स्टेशन पूर्वी मध्य प्रदेश का एक बड़ा और व्यस्त रेलवे स्टेशन है और यहाँ से बस, टैक्सी एवं निजी वाहन के माध्यम से बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम पहुँच सकते हैं। प्रयागराज और वाराणसी के लोग रीवा होते हुए इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं। रीवा से गैवीनाथ धाम की दूरी लगभग 58 किमी है। (साभार) 

मध्‍यप्रदेश : टॉर्च की रोशनी में किया गया नसबंदी का ऑपरेशन

VIDEO: मध्‍यप्रदेश में टॉर्च की रोशनी में किया गया नसबंदी का ऑपरेशन, मोमबत्तियां भी जलाई गईंमोबाइल टॉर्च और मोमबत्ती की रोशनी में कथित तौर पर 35 महिलाओं की नसबंदी का मामला मध्यप्रदेश में सतना के बिरसिंहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आया है। ऑपरेशन के बाद मरीज़ों को फर्श पर ही लिटाने का भी आरोप परिजनों ने लगाया है। सतना जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिरसिंहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नवम्बर 30 को 35 महिलाओं की नसबंदी किया जाना था। घरवालों का आरोप है कि उन्हें सुबह 9 बजे बुलवा लिया गया, लेकिन डॉक्टर शाम 5:00 बजे के बाद अस्पताल पहुंचे। यही नहीं ऑपरेशन भी शुरू हुआ तो अंधेरा होने के बाद। अस्पताल में ना तो पर्याप्त बेड थे ना ही कंबल और ना ही बिजली का सही इंतज़ाम। बिजली जाने के बाद अस्पताल में जनरेटर भी चालू हालत में नहीं था। 
त्रिवेणी पांडे, विक्रम साकेत और सुरेश जैसे लोगों ने सीधे अस्पताल और डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाये वहीं डॉक्टर नरेन्द्र सिंह का कहना था कि ऑपरेशन के वक्त ओटी में बिजली चली गई लेकिन ऑपरेशन के यंत्रों में रोशनी होती है जिससे सर्जरी पूरी की गई, लेकिन चूंकि मरीज़ों को टांके लगाने ज़रूरी थी इसलिये उन्हें ओटी से बाहर निकालकर टांके लगाये गये। 

इस मामले में ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी अशोक अवधिया का कहना था कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि 5-7 मिनट के लिये बिजली गई थी, फिर भी वो इस बारे में लिखित में स्पष्टीकरण मांगेंगे, क्योंकि इस बात को लेकर सख्त निर्देश हैं कि मरीजों को बेड कंबल की व्यवस्था के बिना ऑपरेशन नहीं किया जा सकता है। 
वैसे सतना से कुछ ही दिनों पहले विदिशा ज़िले में 41 महिलाओं को ऑपरेशन के बाद अस्पताल के फर्श पर लिटाने का मामला सामने आया था फरवरी में कटनी ज़िले में भी इस तरह का मामला सामने आ चुका है। 

भाजपा नेता के घर के बाहर महिला की चेन और हार लूट ले गए बाइक सवार लुटेरे

बर्रा विश्वबैंक में पल्सर सवार लुटेरे भाजपा नेता संदीप ठाकुर के घर के बाहर सचेंडी के जुगराजपुर के ग्राम प्रधान की बहू प्रिया सिंह से तीन चेन व एक हार लूट ले गए। वह भाजपा नेता के यहां परिवार के साथ लड़की देखने आई थीं। घटना को अंजाम देने के बाद लुटेरे बर्रा गांव की ओर भाग निकले।
भाजपा नेता के पिता बीबी सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान का परिवार फरवरी 6 को उनके सतना मध्यप्रदेश निवासी साले श्याम सुंदर सिंह की बेटी अंशिका को देखने के लिए घर आए थे। दरवाजे के सामने गाड़ी खड़ी करने के बाद उतर कर पैदल गेट की तरफ बढ़े थे कि पल्सर सवारों ने घटना को अंजाम दिया। प्रिया के मुताबिक बाइक चलाने वाले ने हेलमेट पहना था। लूटने वाले के लंबे बाल थे। बिना नंबर वाली बाइक से लुटेरों ने घटना को अंजाम दिया। वहीं भाजपा नेता के घर लगे सीसीटीवी कैमरे खराब होने जानकारी हुई है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगालने में जुटी है।