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‘कट्टरपंथी रच रहे हत्या की साजिश, बताते हैं काफिर’: ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश देने वाले जज के लिए NIA ने माँगी सुरक्षा, घर के पास से धराया था PFI एजेंट; सरकार को उपद्रवियों और इनके समर्थकों को भी आजीवन कारावास देनी चाहिए

                                        जिस जज ने दी ज्ञानवापी में सर्वे की अनुमति, उन्हें मिल रही धमकी
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज को धमकी मिल रही है, जिसके बाद NIA ने उसके लिए सुरक्षा की माँग की है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2022 में ज्ञानवापी के ढाँचे की मूल प्रकृति का पता लगाने के ASI द्वारा इसके वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं, जबकि मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने यहाँ मंदिर ध्वस्त कर उसके ऊपर मस्जिद खड़ी कर दी थी। इसके भीतर कलश और त्रिशूल से लेकर कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी मिली हैं।

NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की ज़रूरत है। 3 सप्ताह पहले भी अदनान खान नामक शख्स ने उन्हें धमकी दी है, जिसे लेकर FIR भी दर्ज की जा चुकी है। NIA ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसे एक बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर अदनान की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

रवि कुमार दिवाकर बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। वो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी जून 2022 में पत्र लिख कर निवेदन किया था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। 13 मई, 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने को कहा था, लेकिन इसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। दिवाकर ने कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समाज का ब्रेनवॉश कराने में लगे हैं और उन्हें ‘काफिर’ बताते हैं। वर्तमान में उन्हें 2 पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन आतंकी हमलों से निपटने के लिए उनके पास उचित हथियार तक नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश ATS ने 3 जून, 2024 को अदनान खान के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। वो जस्टिस रवि कुमार दिवाकर को धमकाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है। जून 2022 में उन्हें ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की तरफ से धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इसके उनके परिवार की हत्या की धमकी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया गया था। अप्रैल 2024 में दिवाकर ने बरेली के SSP को भी पत्र लिख कर कहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल आ रहे हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से PFI के एक एजेंट की गिरफ़्तारी भी हुई थी।