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दिल्ली में गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू मुहरिब पहले भी हुआ था अरेस्ट, ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने वाले ‘काफिर’ जज को मारने की दी थी धमकी: सिर्फ 4 माह में मिल गई थी जमानत

                             दिल्ली में ISIS के 2 आतंकी गिरफ्तार (साभार: OPIndia English)
राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार (24 अक्टूबर 2025) की सुबह एक आतंकवादी साजिश को नाकाम कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के एक आतंकवादी मॉड्यूल को तोड़ दिया। इस ऑपरेशन में दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक का नाम मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब है, जो दिल्ली का रहने वाला है। दूसरा अदनान खान उर्फ अबू मोहम्मद है, जो मध्य प्रदेश का रहने वाला था। मुहरिब की उम्र 19 साल तो अबू मोहम्मद की उम्र 20 साल है

इससे पहले, ऑपइंडिया ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि ISIS के एक आतंकवादी मोहम्मद अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब को उत्तर प्रदेश ATS ने पहले भी गिरफ्तार किया था।

वो 2024 से जमानत पर बाहर था। उसे उत्तर प्रदेश ATS ने UAPA के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली स्पेशल सेल ने कहा, “भोपाल से एक संदिग्ध को पहले UP ATS ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था; 2024 में जमानत मिलने के बाद उसने आतंकवादी गतिविधियां फिर शुरू कर दीं, मुख्य रूप से ऑनलाइन भर्ती और प्रोपगैंडा फैलाने के जरिए। निगरानी से पता चला कि मॉड्यूल ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने के लिए सामग्री जुटानी शुरू कर दी थी।”

दिल्ली स्पेशल सेल ने बताया कि मोहम्मद को सख्त UAPA एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कोर्ट ने 2024 में उसे जमानत दे दी थी। 

जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपनी आतंकवादी गतिविधियाँ फिर शुरू कर दीं और ISIS से जुड़ाव बढ़ा लिया। उसने सोशल मीडिया के जरिए इस्लामिक प्रोपगैंडा सामग्री फैलानी शुरू की और ISIS के लिए आतंकवादियों की भर्ती शुरू करती। उसने आतंकी हमलों के लिए IED बनाने की सामग्री भी जुटानी शुरू कर दी थी।

ऑपइंडिया ने अब वो केस ढूँढ निकाला है जिसमें अदनान को UP ATS ने गिरफ्तार किया था और बाद में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्पेशल NIA कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी।

ISIS आतंकवादी ने ज्ञानवापी केस में ‘काफिर’ जज को मारने की दी थी धमकी

दिल्ली स्पेशल सेल ने अब जिस ISIS आतंकी मोहम्मद अदनान को गिरफ्तार किया है, उसने ज्ञानवापी केस से जुड़े एक जज को धमकी दी थी। उसने इंस्टाग्राम पर लिखा, “THE KAFIRS BLOOD IS HALAL FOR YOU THOSE WHO FIGHT AGAINST YOUR DEEN.” तस्वीर में जज की आंखों के ऊपर लाल रंग में ‘KAFIR’ लिखा हुआ था।
FIR के मुताबिक, मोहम्मद अदनान ने अतिरिक्त जिला जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट) बरेली, रवि कुमार दीवाकर की फोटो शेयर की थी, जिन्होंने 2022 में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था।
UP ATS की FIR में लिखा है, “उनके विचारधारा से जुड़े लोग ज्ञानवापी केस सुन रहे जज को मारने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और ये पोस्ट दूसरी धर्मों वालों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रही है और वर्गों के बीच दुश्मनी व नफरत फैलाने के लिए राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ की जा रही हैं।”

जमानत देते वक्त कोर्ट ने क्या कहा था?

स्पेशल NIA जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने 26 सितंबर 2024 को मोहम्मद अदनान को जमानत दी। उन्होंने जमानत देने के दो मुख्य कारण बताए। पहला ये कि अदनान पर लगा अपराध 7 साल से कम सजा वाला था। वो जून 2024 से जेल में था, इसलिए उसे जमानत का हक था।
दूसरा कारण ये था कि उसका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था।
अदनान पर IPC की धारा 153A, 115 और 506 के साथ UAPA की धारा 13 लगी थी। उस केस में जमानत मिलने के बाद उसने कथित तौर पर चरमपंथी गतिविधियाँ फिर शुरू कर दीं। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और दूसरी प्लेटफॉर्म्स पर चैनल बनाकर चरमपंथी सामग्री पोस्ट की और समान विचार वाले लोगों की भर्ती की। उसने सीरिया में बैठे हैंडलर अबू इब्राहिम अल-कुरैशी से संपर्क होने की बात भी कबूल की।

बूढ़ा हूँ, जमानत दे दो… पहलगाम आतंकी हमले के बाद पोस्ट में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखने वाला अंसर अहमद इलाहाबाद HC के आगे गिड़गिड़ाया, अदालत ने खारिज की याचिका; बार एसोसिएशन को जेहादियों की पैरवी करने वाले वकीलों को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लेना चाहिए

                                                                                                 साभार 
जेहादी जब कानून की गिरफ्त में आने पर victim card खेलना शुरू कर देते हैं। इन जेहादियों की वकालत करने बेशर्म वकील भी अपनी तिजोरी भरने इन गद्दारों की पैरवी करने खड़े हो जाते हैं। क्यों नहीं कोर्ट भी इन लालची वकीलों को भी उसी श्रेणी में डालते? ईरान ने गद्दारों को दे दी फांसी। कोई वकील उनके बचाव में खड़ा हुआ। लेकिन ये भारत में ही संभव है कि जहां वकीलों को गद्दारों/जेहादियों की पैरवी करने की छूट दे दी जाती है। बार एसोसिएशन ऐसे वकीलों पर क्यों नहीं कोई कार्यवाही करती? अपनी कमाई के चक्कर में गद्दारों का साथ दोगे? "पाकिस्तान ज़िन्दाबाद" गद्दार ने 62 साल की उम्र में ही लिखा है जवानी में नहीं। बार एसोसिएशन को इस गंभीर मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 62 वर्षीय अंसर अहमद सिद्दीकी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सिद्दीकी पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखे फेसबुक पोस्ट शेयर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध संविधान के विरुद्ध और देश की स्वतंत्रता को चुनौती देने जैसा है।

आरोपित के वकील ने कोर्ट से कहा कि वह 62 साल के वृद्ध हैं और उनका मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है। लेकिन कोर्ट ने इसके बाद भी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपित का अपराध राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। वहीं, प्रोसेक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि यह फेसबुक पोस्ट पहलगाम आतंकी हमले के बाद ही शेयर किया गया था।

अवलोकन करें:-

3 को दी फाँसी, 700 को किया गिरफ्तार… ईरान ने सीजफायर का भी नहीं किया लिहाज, इजरालयी एजेंटों को पकड़क
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कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा, “आवेदक एक वरिष्ठ नागरिक है और उसकी उम्र से पता चलता है कि वह स्वतंत्र भारत में पैदा हुआ है। उसका गैर-जिम्मेदाराना और राष्ट्र-विरोधी आचरण उसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा माँगने का अधिकार नहीं देता है।” 

चंद्रचूड़ ने खेला कर दिया; अब केजरीवाल के लिए सड़क पर बेहोश होकर गिर कर अस्पताल में भर्ती होने के सिवाय कोई “चारा” नहीं बचा ; सुप्रीम कोर्ट ने ठोकर मार दी

सुभाष चन्द्र 

दिल्ली वालों ने जो मुफ्त की रेवड़ियों के लालच में अराजक और तानाशाह अरविन्द केजरीवाल को चढ़ाया, उन्हें इसकी हरकतें डूब मरने वाली बात है। केजरीवाल ने अपनी मनमानी की खातिर देश की सुप्रीम कोर्ट को भी आलोचना के घेरे में ले आया। यह आदमी देश के लिए कितना घातक है RAW अधिकारी रहे RPN Singh को सुनें। गृह मंत्रालय को उन सभी पोलिंग बूथों पर पैनी नज़र रखनी होगी, जहाँ आम आदमी पार्टी को 50 या 50 से अधिक वोट मिले हैं। देश को अगर शक्तिशाली बनाना है तो देशवासियों को केजरीवाल और इसके समर्थकों से दूरी बनानी होगी। अकेले नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ कुछ नहीं कर सकते। और कल यदि केजरीवाल पार्टी टूटती है तो किसी पार्टी विशेषकर बीजेपी को इसके किसी भी तथकथित नेता को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करना चाहिए।   

कल(मई 28) सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने केजरीवाल की 7 दिन अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना करते हुए कहा कि केजरीवाल की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पूरी कर चुका है और फैसला 17 मई को सुरक्षित कर लिया है और अब हम इस याचिका पर कुछ नहीं कर सकते, आप CJI के पास जाएं, वे ही इसे listing के लिए आदेश दे सकते हैं। 

इसका मतलब साफ़ है कि मामला CJI चंद्रचूड़ के पास जाना चाहिए था और वो फैसला करते कि कब लिस्ट करनी है याचिका लेकिन आज(मई 29) याचिका सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने ही ख़ारिज कर दी और याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार करने से मना करते हुए कह दिया कि केजरीवाल के पास ट्रायल कोर्ट में regular bail के लिए जाने का रास्ता खुला है और plea is not maintainable.

लेखक 
चर्चित YouTuber 
वैसे तो केजरीवाल के साथ बहुत अच्छा हुआ जो उसे उसके ड्रामेबाजी का जवाब मिल गया लेकिन रजिस्ट्री का रोल कुछ हास्यास्पद लगता है जब एक बेंच ने अपनी राय दे दी तो जाहिर है मामला उस बेंच तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से होकर ही गया होगा और जैसा उस बेंच ने कहा मामला CJI चंद्रचूड़ के पास जाना चाहिए था क्योंकि एक तरह से जस्टिस माहेश्वरी की बेंच के पास भी रजिस्ट्री ने ही भेजा होगा

अब रजिस्ट्री स्वयं इस याचिका को ख़ारिज करती है यह बात समझ नहीं आती मुझे ऐसा लगता है CJI चंद्रचूड़ को लगा होगा कि कल ये सिंघवी आकर मेरे तरफ ललचाई नज़रों से देखेगा और आंखों से ही कहेगा, “मेरे दोस्त, मेरे भाई, मेरे बैचमेट कुछ मेहरबानी कर दे, मेरा कजरू मर जाएगा, इसे अभी कुछ और बचा दे जेल जाने से”, और इसलिए चंद्रचूड़ ने रजिस्ट्री के जरिए ही केजरी को निपटा दिया

अब एक काम और हो सकता है कि जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता केजरीवाल की गिरफ़्तारी को ही अवैध करार दे दें लेकिन उनके लिए भी शायद ऐसा करना कठिन होगा क्योंकि उन्होंने इसे जमानत दे कर गिरफ़्तारी स्वयं ही वैध करार कर दी थी

यह मेरा मानना था कि केजरीवाल कुछ नौटंकी जरूर करेगा जेल जाने से बचने के लिए और अब तो बहुत लोग कह रहे हैं कि प्रचार के अंत में या वोटिंग ख़त्म होने के बाद  केजरीवाल चक्कर खाकर गिरेगा और बेहोश होने का नाटक कर किसी अस्पताल में भर्ती हो जाएगा। अस्पताल के डॉक्टरों को खरीदना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं है 

लेकिन केजरीवाल को याद रखना चाहिए कि उसकी Credibility अब इतनी गिर चुकी है कि अब अगर वो सच भी कहेगा तो लोग उसे झूठ ही मानेंगे अब लोग उसकी बातों में नहीं आएंगे charge sheet दायर हो चुकी है अब केस भुगतना ही पड़ेगा केजरीवाल के साथ सिंघवी का भी मुंह पूरी तरह काला हुआ है

अभी भी केजरीवाल को नौटंकी करने से बाज आ जाना चाहिए लेकिन ऐसा संभव नहीं है बकबक आतिशी मार्लेना ने की और जब केस चल गया कोर्ट में तब भी केजरीवाल आतिशी की गलती मानने की बजाय भाजपा को कह रहा है कि आतिशी को जेल में डालने की साजिश कर रही है भाजपा स्वाति की पिटाई करा दी और विभव अब जेल में है मगर उसे बचाने में लगा है

केजरीवाल अब एक डूबता जहाज बन चुका है

निकाले जाएँ CM केजरीवाल के कॉल रिकॉर्ड्स : NCW का आदेश; विभव कुमार की जमानत याचिका ख़ारिज, सुनवाई में YouTuber ध्रुव राठी का भी जिक्र

AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के PA रहे विभव कुमार की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। जस्टिस सुशिल अनुज त्यागी ने ये फैसला सुनाया। 18 मई, 2024 को विभव कुमार को गिरफ्तार किया गया था और उसे 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया था। 24 मई को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। आरोप है कि उसने स्वाति मालीवाल के पेट, छाती, पाँव और प्राइवेट पार्ट पर प्रहार किया।

वहीं दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि इस घटना का वीडियो फुटेज CCTV से गायब है। पुलिस ने आशंका जताई है कि इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण भी हो सकता है, वहीं ये जानबूझकर किया गया भी हो सकता है। दिल्ली पुलिस की तरफ से बताया गया कि विभव कुमार को अरविंद केजरीवाल के PA के पद से हटाए जाने के बावजूद CM आवास में सब उससे आदेश ले रहे थे, ये दिखाता है कि वो प्रभावशाली है। वहीं स्वाति मालीवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें जान से मार डालने और बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं।

उन्होंने बताया कि ध्रुव राठी द्वारा इस घटना पर वीडियो बनाने के बाद ये सब हो रहा है। स्वाति मालीवाल का कहना है कि अगर विभव कुमार बाहर आता है तो उन्हें और उनके परिवार को खतरा है। इस फैसले के बाद विभव कुमार अब दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करेगा। AAP ने अपने एक बयान में ये जानकारी दी है। उधर NCW (राष्ट्रीय महिला आयोग) ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में जुड़े लोगों के कॉल रिकार्ड्स निकालने को कहा है।

दिल्ली के CM और AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल के कॉल रिकॉर्ड्स भी खँगाले जाएँगे। संस्था ने कहा कि ये सूचना मिली है कि स्वाति मालीवाल के CM आवास पहुँचते ही विभव कुमार को फोन कॉल कर के बुलाया गया, ऐसे में ये पता लगाया जाना ज़रूरी है कि किसके आदेश पर ऐसा हुआ। पुलिस कमिश्नर को NCW अध्यक्ष रेखा शर्मा ने पत्र भेजा है। साथ ही स्वाति मालीवाल को धमकी देने वालों के खिलाफ 3 दिन के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कहा गया है।

लक्षद्वीप में सैनिक अनवर आलम ने 13 साल के बच्चे को दिया था लालच, केरल हाई कोर्ट ने बेल से किया साफ मना

                                                                                                                 साभार: Telegraph India
केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप के अनवर हुसैन नाम के एक सैनिक की जमानत याचिका ठुकरा दी है। अनवर पर आरोप है कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग बालक को सेक्स करने के लिए पैसे का लालच दिया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनवर को बेल देने से मना किया।

जानकारी के अनुसार, लक्षद्वीप के अमीनी गाँव में रहने वाले अनवर हुसैन टी पर आरोप है कि उसने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पैसों का लालच दिया कि वह उनके साथ सेक्स कर ले।

इस मामले में नाबालिग लड़के के परिजनों ने पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। हालाँकि, कोर्ट के सामने अनवर हुसैन ने कहा कि जिस नाबालिग लड़के के साथ सेक्स करने के लिए पैसे का लालच देने का आरोप उस पर लगाया गया है, उसके परिवार से उनका विवाद है।

अनवर ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसे पारिवारिक विवाद में फँसाने के लिए ऐसा किया गया है। अनवर के ऊपर POCSO के तहत मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। इसीलिए उसने केरल हाई कोर्ट के सामने जमानत याचिका लगाई थी।

लक्षद्वीप का परिक्षेत्र केरल हाई कोर्ट के अंतर्गत आता है। हाई कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। केरल हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जज सोफी थॉमस ने कहा, “एक सैनिक होने के कारण आरोपित (अनवर) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को और गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनसे यह आशा की जाती है कि वह देश के नागरिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे।”

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अगर अनवर के ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं तो एक सैनिक होने के नाते यह बड़ी ही अभद्र और सैन्य अफसर के व्यवहार के विपरीत होगी। कोर्ट ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनवर को जमानत देने से मना कर दिया।

जेल के बाहर भी आतंकी रहेगा ‘कैद’, भागेगा तो दबोचा जाएगा: जम्मू-कश्मीर पुलिस GPS ट्रैकर इस्तेमाल करने वाली देश की पहली पुलिस बनी

                                                                                             आतंकी गुलाम मोहम्मद भट्ट (साभार: ANI)
आतंकियों को जमानत पर छोड़ने के बाद उन पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। इसके लिए उनके पैरों में GPS ट्रैकर डालने का निर्णय लिया है। ऐसा करने वाली जम्मू-कश्मीर पुलिस देश की पहली पुलिस फोर्स बन गई है। आतंकियों के पैरों में डाले गए इस ऐंकलेट के जरिए आतंकी की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

GPS ट्रैकर एंकलेट एक डिवाइस होती है। इसे किसी शख्स के टखने के चारों तरफ चिपका दिया जाता है। इसे लगाने के बाद वह व्यक्ति जहाँ भी जाएगा, उसके बारे में ऑपरेटर को जानकारी मिलती रहेगी। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में जमानत या परोल पर जाने वाले कैदियों के लिए इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस का कहना है कि इस डिवाइस को NIA की स्पेशल कोर्ट के एक आदेश के बाद इस्तेमाल में लाया गया है। NIA की स्पेशल कोर्ट ने पुलिस को एक खूँखार आतंकी पर नजर रखने के लिए उस पर जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश दिया था। पश्चिमी देशों में इस डिवाइस का इस्तेमाल घर में नजरबंद कैदियों की निगरानी के लिए भी किया जाता है।

जिस आतंकी पर पहली बार इस ट्रैकर का इस्तेमाल किया गया है, उसका नाम गुलाम मोहम्मद भट्ट है। भट्ट को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसने जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन किया था। जमानत पर सुनवाई लंबित रहने के कारण आरोपित ने कोर्ट से अंतरिम जमानत की माँग की थी। इसके बाद कोर्ट ने यह निर्णय दिया।

आरोपित गुलाम भट्ट पर कई आतंकी संगठनों से जुड़े होने के आरोप हैं। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन केकहने पर कश्मीर में आतंकी फाइनेंसिंग में शामिल हो गया था। ऐसे ही एक मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उसे 2.5 लाख रुपए की टेरर फाइनेंसिंग करते समय गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, एक अन्य मामले में आतंकी संगठन से जुड़ने और साजिश रचने के आरोप में NIA कोर्ट और दिल्ली की पाटियाला हाउस कोर्ट ने उसे दोषी ठहरा चुकी है। इसको देखते हुए कोर्ट ने पुलिस से उस पर कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा था। इसके बाद अभियोजन पक्ष की दलील के बाद कोर्ट ने उस पर जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश दिया।

ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने सीमा हैदर को कैसे बेल दे दी, जबकि अवैध रह रहे नाइजीरियाई 2 महीने से जेल में?

                                                     सीमा हैदर और सचिन की 'प्रेम-कहानी'
मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर इस समय पाकिस्तान की सीमा हैदर की प्रेम कहानी सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस में सीमा हैदर को 4 जुलाई 2023 को हरियाणा के पलवल से गिरफ्तार किया था। इस मामले में सीमा हैदर के प्रेमी सचिन और सचिन के पिता नेत्रपाल पर भी पुलिस ने आईपीसी की साजिश रचने की धारा 120 B व विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत FIR दर्ज की थी।

जब सीमा हैदर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए माना जा रहा था कि उन्हें और उनके प्रेमी को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ेगा। हालाँकि ये तमाम कयास गलत साबित हुए। महज 3 दिनों में पाकिस्तानी महिला को उसके प्रेमी सहित नोएडा की एक अदालत ने जमानत दे दी।

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश शासन ने इस मामले का संज्ञान लेकर  नोएडा पुलिस से जवाब तलब किया है कि सीमा हैदर को इतनी आसानी व जल्दी से जमानत कैसे मिल गई। इस पूरे मामले में नोएडा प्रशासन ने अपनी आख्या शासन को भेज दी है।

सीमा हैदर को 3 दिन में बेल क्यों?

सीमा हैदर केस की सुनवाई ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नाजिम अकबर की कोर्ट में हुई। मजिस्ट्रेट नाजिम ने सीमा को 30-30 हजार रुपए के 2 स्थानीय जमानतियों की जमानत पर रिहा कर दिया। इसी के साथ यहीं से सचिन और नेत्रपाल को भी जमानत मिल गई।
ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक जमानत की शर्तों में बिना अनुमति देश व वर्तमान पता न छोड़ना और दोबारा कोई अपराध न करना शामिल है। सीमा के जमानतदार सचिन मीणा के परिचित व करीबी हैं। हमारी पड़ताल में यह भी निकल कर सामने आया है कि मजिस्ट्रेट नाजिम अकबर ने सीमा हैदर की जमानत स्वीकृत करने से पूर्व पुलिस से काउंटर नहीं माँगा। साथ ही आरोपितों को रिहा करने से पहले जमानतदारों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ। जो ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नाजिम अकबर की कार्यशैली पर शंका उत्पन्न करती है। चर्चा यह भी है कि सरकार मजिस्ट्रेट नाज़िम पर भी नज़र रख सकती है।  
सीमा हैदर केस की FIR में वादी खुद पुलिस बनी है। शिकायतकर्ता SHO रबूपुरा इंस्पेक्टर सुधीर कुमार हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक यह केस निष्पक्ष जाँच के लिए अब थाना जेवर भेज दिया गया है। इसकी आगे की जाँच SHO जेवर कर रहे हैं। कोर्ट में एक महिला कॉन्स्टेबल इस केस की पैरोकारी भी कर रही है। इस मामले में शुरू से अब तक हुए तमाम अपडेट को उच्चाधिकारियों और उत्तर प्रदेश शासन को अवगत भी करवाया जा रहा है।

सीमा हैदर और अवैध रह रहे नाइजीरियाई में फर्क क्या?

जब हमने सीमा हैदर केस का उसी जगह और उसी तरह के दूसरे केसों से तुलनात्मक अध्ययन किया तो यह मामला बाकियों से थोड़ा अलग निकला। 2 जून 2023 को नोएडा पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाते हुए सूरजपुर थानाक्षेत्र में रह रहे 23 अफ्रीकी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। मूल रूप से ये सभी नाइजीरिया के निवासी थे, जो अवैध तौर पर नोएडा में बिना वीजा के रह रहे थे। इसमें 15 पुरुष व 8 महिलाएँ शामिल थीं।
सीमा हैदर पर लगाई गई विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 ही इन सब नाइजीरिया लोगों पर भी लगाई गई थी। इसके अलावा अफ्रीकी नागरिकों पर आपराधिक अधिनियम की धारा 7 के साथ IPC 332, 353 व 147 भी लगी थी। सीमा हैदर पर विदेशी अधिनियम के साथ साजिश रचने की धारा 120 B भी लगी हुई है।
उल्लेखनीय यह है कि लगभग डेढ़ माह से वो सभी नाईजीरियाई अभी तक जेल में हैं। इन सभी द्वारा निचली अदालत में दिए जमानती प्रार्थना पत्र पर कोर्ट ने केस के पुलिस विवेचक तक को तलब कर लिया था। लेकिन सीमा हैदर केस में मजिस्ट्रेट नाजिम अकबर द्वारा महज 3 दिनों में जमानत दे दी गई।
ऑपइंडिया के पास सीमा हैदर और नाइजीरिया मामले से संबंधित दोनों FIR मौजूद हैं।
यदि कोई व्यक्ति पुलिस की मौजूदगी में संज्ञेय अपराध करता है तो 41 (1) के खंड क के अनुसार उसकी गिरफ्तारी होगी। इसमें ये नहीं देखा जाएगा कि उस मामले में कितनी सजा है। 332 आईपीसी लगी है तो इस बात की ज्यादा संभावना है कि पुलिस के साथ मारपीट की गई हो। चूँकि 332आईपीसी गैर जमानती है, इसलिए नाइजीरिया के लोग अभी भी जेल में हैं।

वकील, पुलिस की क्या है सीमा हैदर मामले में राय?

जब ऑपइंडिया ने इस मामले का कानूनी पक्ष जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल को कॉल किया, तब उन्होंने बताया कि धाराओं में आरोपित कर के कोर्ट तक भेजना पुलिस का काम है लेकिन उसे छोड़ना या जेल भेजना न्यायालय तय करता है।
ऑपइंडिया ने इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड डिप्टी एसपी विवेकानंद तिवारी और अवनीश गौतम से बात की।
विवेकानंद तिवारी ने हमें बताया कि जब तक सीमा हैदर मामले का सरकार के स्तर पर कोई स्थाई समाधान ना हो जाए तब तक उनका मुक्त होकर घूमना देश हित में फिलहाल तो नहीं है। विवेकानंद तिवारी ने यह भी बताया कि सीमा हैदर की जमानत को ऊपरी अदालत में पुलिस द्वारा चैलेंज किया जाना चाहिए। सीमा हैदर की नेपाल में हुई शादी को भारत में वैलिड न मानते हुए विवेकानंद तिवारी ने बताया कि इस मामले में पुलिस के खुफिया विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी ही होगी।
वहीं पूर्व डिप्टी एसपी अवनीश गौतम ने भारत के विदेशी अधिनियम कानून को काफी कमजोर बताते हुए इसे और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। अवनीश गौतम ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सरकार को दो में से एक विकल्प पर पहुँचना ही होता है। इसमें पहला विकल्प सीमा हैदर को उसके देश वापस कर देना और दूसरा विकल्प यदि ये संभव न हो तो भारत की नागरिकता देना होता है।

हैदराबाद : टी राजा सिंह को बेल मिलते ही कट्टरपंथी भड़के, 4 पुलिसकर्मी घायल, उत्तेजक नारेबाजों पर कार्यवाही कब?

                                                                             साभार: वायरल वीडियोज के स्क्रीनशॉट)
हैदराबाद में भाजपा के निलंबित विधायक टी राजा सिंह को बेल मिलने से कट्टरपंथी भड़क गए हैं। उन्होंने इसके विरोध में पूरी रात प्रदर्शन किया। हर जगह ‘सर तन से जुदा’ के नारे गूँजते रहे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन खबर है कि इन सबके बीच में सब इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

नूपुर शर्मा के बाद टी राजा सिंह को पार्टी से निकाले जाने पर भाजपा समर्थकों में यह बात घर करने लगी है कि "क्या भाजपा तुष्टिकरण में अपने विरोधियों को मात देने जा रही है?" नूपुर से लेकर अब राजा सिंह तक जिन पार्टियों के नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की, उन पर कार्यवाही करने से कौन-सा डर सता रहा है? ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग पर अभद्र टिप्पणी करने वालों पर क्यों नहीं की जा रही कार्यवाही? 'सिर तन से जुदा' नारेबाजों पर क्यों नहीं की जा रही कार्यवाही? अगर भाजपा ने भी वही तुष्टिकरण करना है, फिर भाजपा को वोट क्यों? कहते हैं न चाकू खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर कटना खरबूजे को ही है। कट्टरपंथी इस तरह के नारों से कौन-से सौहार्द का परिचय दे रहे हैं? क्या यह आतंकवाद का नया रूप नहीं?

टी राजा सिंह के वकील ने बेल याचिका में दलील दी थी कि विधायक को सीआरपीसी की धारा 41 (ए) के तहत कोई नोटिस नहीं दिया गया। कोर्ट ने वकील की यह दलील मानी और टी राजा सिंह को बेल दे दी। इसके बाद राज्य भर में प्रदर्शन चालू हो गए। भीड़ और नारेबाजी इतनी बढ़ गई कि पुलिस को लाठी चार्ज करके, आँसू गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।

खबरों के अनुसार अंबरपेट, तल्लबकट्‌टा, मोगलपुरा, खिलवत, बहादुरपुरा और चंचलगुडा में राजा सिंह के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। वहीं बरकस से चंद्रयानगुट्टा तक सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया।

हैदराबाद के शालीबांदा में तो पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़प की घटना घटी। पुलिस वैन में भी कथिततौर पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। इसके अलावा बाजारों से दुकानें जबरन बंद कराने की, राजा सिंह के पोस्टर्स पर चप्पल मारने की, उनका पुतला जलाने की घटना भी प्रकाश में आई है।

हैदराबाद में टी राजा सिंह के बयान के बाद बवाल

सोमवार को राजा सिंह ने मुनव्वर फारूकी के विरुद्ध एक वीडियो बनाया था। इसमें उन्होंने इस्लाम पर बात करते हुए एक बुजुर्ग पर बात की थी, जिस पर मुस्लिमों ने कहा कि वो पैगंबर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी है। हालाँकि, राजा सिंह ने उसे मजाक बताया। इसके बाद शहर भर में प्रदर्शन हुए। मंगलवार सुबह पुलिस ने टी राजा को गिरफ्तार किया। दोपहर में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया और फिर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा।
                                                                    भाजपा ने टी राजा सिंह को निलंबित किया।
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इस बीच मुस्लिम संगठन जहाँ टी राजा सिंह की टिप्पणी को शर्मनाक, हैरान करने, दंगे भड़काने वाला बताते रहे। वहीं टी राजा के समर्थकों ने उनकी रिहाई की माँग की। देर रात कोर्ट ने उनकी बेल याचिका मंजूर की। लेकिन इसके बाद फिर शहर का माहौल बिगड़ गया। कट्टरपंथी भारी तादाद में सड़क पर आ गए। अब राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है। लगातार निलंबित भाजपा विधायक पर कार्रवाई की माँग हो रही है। सर तन से जुदा के नारे लग रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 387 उम्मीदवारों की जमानत जब्त किसने करवाई हिंदुओं ने या हिंदुत्ववादियों ने ?

परिवार भक्तों द्वारा सोनिया गाँधी को अध्यक्षा बनाने के लिए सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर करने के दिन से कांग्रेस निरंतर पतन की ओर अग्रसर है। और इस पतन के ग्राफ को राहुल-प्रियंका जोड़ी पाताललोक में लेकर जाने में प्रयासरत हैं। 

एक समय था जब अधिकतर आज़ाद उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती थी, दूसरे नंबर पर क्षेत्रीय पार्टियां रही, फिर तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी है और अब उसी पंक्ति में कांग्रेस भी शामिल हो गयी है। 
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। लेकिन कांग्रेस का नारा ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ की चर्चा आज भी हो रही है। लोगों का कहना है कि यूपी के सियासी दंगल में कांग्रेस की मर्दानी यानि महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा खूब लड़ी, लेकिन अपने 399 में से 387 उम्मीदवारों की जमानत बचाने में नाकाम रही। अगर प्रतिशत की दृष्टि से देखे तो कांग्रेस के 97 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। सिर्फ दो ही प्रत्याशी अपनी सीट बचा सके। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कांग्रेस के इस बेहद खराब प्रदर्शन को लेकर लोग खूब मजे ले रहे हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि कांग्रेस की इस दुर्गति के लिए कौन जिम्मेदार है- हिन्दू या हिन्दुत्ववादी।

सोशल मीडिया पर लोग राहुल गांधी को उनके ट्वीट की याद दिला रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए लिखा था, ” हिंदुत्ववादी गंगा में अकेला स्नान करता है। हिंदू गंगा में करोड़ों लोगों के साथ स्नान करता है एक तरफ हिंदू है, दूसरी तरफ हिंदुत्ववादी है। एक तरफ सच है, दूसरी तरफ झूठ है हिंदू सच बोलते हैं, हिंदुत्ववादी झूठ बोलते हैं।”

कांग्रेस की दुर्दशा के लिए प्रियंका वाड्रा पर तंज

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर लिखा है, ” प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी में खुद को कांग्रेस का चेहरा बताया था और ” मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ” के नारे के साथ महिलाओं को भरमाने की कोशिश की थी, लेकिन जनता ने उन्हें केवल 2 सीटें दीं।

 इसके बावजूद कांग्रेस के किसी नेता ने महासचिव पद से उनका इस्तीफा नहीं मांगा।”

एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि ये वही “मौसी” है जो अपने आप को “लड़की” बोलकर लड़ना चाहती थी… किंतु कहीं से भी नहीं लड़ी… फिर भी हार गई।