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‘एट होम’ समारोह में राहुल गाँधी ने ‘नॉर्थ-ईस्ट’ का पटका पहनने से किया इनकार, राष्ट्रपति मुर्मू ने 2 बार किया ऑफर


राहुल गाँधी की हरकतों को देख शंका होती है कि राहुल Leader of Opposition हैं या Leader of Propaganda, नेता प्रतिपक्ष की वाणी और कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए कि सत्ता पक्ष भी लोहा माने ये नहीं नेता प्रतिपक्ष एक मजाक बन जाए। और राहुल अपनी हरकतों से सिर्फ एक मजाक बन चुके हैं। दरअसल इनके सलाहकारों ने ही उनको एक मजाक बना दिया है। दूसरे मणिपुर पर रोना रोने वाले राहुल गाँधी ने असम पटका क्यों नहीं पहना?   

गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में ‘एट-होम’ रिसेप्शन के दौरान राहुल गाँधी ने नॉर्थ ईस्ट का पटका पहनने से इनकार कर दिया। दरअसल कार्यक्रम की थीम नॉर्थ-ईस्ट थी। समारोह में शिरकत कर रहे पीएम मोदी से लेकर तमाम नेताओं ने इसे धारण किया। कार्यक्रम में शिरकत कर रहे यूरोपीय यूनियन के नेताओं, विदेशी राजदूतों तक सभी मेहमानों को नॉर्थ-ईस्ट का पटका दिया गया।

सबने पटके को गर्व के साथ पहना, लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ही एकमात्र रहे, जिन्होंने इसे नहीं पहना। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें दो बार याद भी दिलाया था।

राहुल गाँधी का यह व्यवहार सुर्खियों में आ गया है और इस पर सियासत गरम है। बीजेपी ने दावा किया है कि राहुल गाँधी वहाँ मौजूद एकमात्र ऐसे मेहमान थे, जिन्होंने स्वागत में मिले पारंपरिक ‘नॉर्थ-ईस्टर्न पटका’ को पहनने से परहेज किया।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए घटना को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने लिखा, शर्मनाक! राहुल गांधी, नॉर्थ ईस्ट को अलग-थलग किया और हमारे माननीय राष्ट्रपति का अपमान भी किया

दरअसल राष्ट्रपति भवन में इस साल थीम भारतीय संस्कृति पर आधारित होती है। इस बार नॉर्थ ईस्ट थीम थी। इसलिए नॉर्थ ईस्ट का पटका मेहमानों को दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्री, गणतंत्र दिवस के दोनों यूरोपीय यूनियन के नेता, जो मुख्य अतिथि थे, विभिन्न देशों के राजदूत और राजनयिकों समेत सभी वीवीआईपी मेहमानों को यह पटका द‍िया गया। सभी ने सम्मान स्वरूप उस पटके को पूरे कार्यक्रम के दौरान अपने कंधों पर रखा, लेकिन राहुल गाँधी ने एक बार भी इसे नहीं पहना। वे ऐसा करने वाले एकमात्र मेहमान थे।

फैयाज मंसूरी ने कहा था-‘बाबरी मस्जिद तुर्की की सोफिया मस्जिद की तरह फिर बनाई जाएगी’, सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द करने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले फैयाज मंसूरी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता मंसूरी के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि उसकी पोस्ट में कोई अश्लीलता नहीं था इसलिए आपराधिक केस को रद्द कर दिया जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंसूरी द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया था कि बाबरी मस्जिद एक दिन तुर्की की सोफिया मस्जिद की तरह फिर से बनाई जाएगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की है।

गौरतलब यह है कि मस्जिद के लिए मिली जमीन पर आज तक नींव तक खुदी। सुना है धन भी जमा है यानि "अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर बुझि टके सेर खा जा", जबकि अयोध्या में राममंदिर बनकर तैयार भी हो गया। श्रद्धालु दर्शन करने जा रहे हैं। लेकिन मस्जिद का कोई अता पता नहीं। और अपने फायदे के लिए मुसलमानों के जज्बातों से खेल अपनी तिजोरियां भरते हैं।  

वहीं, याचिकाकर्ता के वकील तल्हा अब्दुल रहमान का दावा है कि जिस पोस्ट में अश्लीलता और भड़काऊ टिप्पणी की गई थी वह किसी अन्य व्यक्ति का है। अब्दुल ने दावा किया कि उसकी जाँच नहीं की गई है।

जस्टिस कांत ने इससे सहमत ना होते हुए कहा कि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की पोस्ट की जाँच की है। हालाँकि, जज ने चेतावनी देते हुए कहा, “हमसे कोई टिप्पणी ना माँगी जाए।” सुप्रीम कोर्ट ने अपराधिक मामले ना रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सभी तर्कों पर ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।

क्या है मामला?

लखीमपुर खीरी के रहने वाले याचिकाकर्ता मंसूरी के खिलाफ 6 अगस्त 2020 को FIR दर्ज की गई थी। इसमें जिसमें दावा किया गया था कि मंसूरी ने फेसबुक अकाउंट पर अपमानजनक संदेश पोस्ट किया, जिस पर समरीन बानो नामक व्यक्ति ने हिंदू समुदाय के देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की थी।

मंसूरी के खिलाफ यह FIR भारतीय दंड संहिता की (IPC) धारा 153ए, 292, 505 (2), 506, 509 और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 (IT Act) की धारा 67 के तहत दर्ज की गई थी।

इसके बाद लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 (NSA) के तहत निरोध आदेश पारित किया। हालाँकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2021 में इसे रद्द कर दिया।

इसके बाद मंसूरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए यह तर्क दिया कि उसका अकाउंट हैक कर लिया गया था। मंसूरी ने दावा किया कि उस पोस्ट में कोई आपराधिकता या दुश्मनी/वैमनस्य बढ़ाने का इरादा नहीं था। सितंबर में हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी और इसके बाद मंसूरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

विपक्ष से नहीं पच रहे Exit Poll के आँकड़े, बोले- इंडी गठबंधन जीतेगी 300+ सीट

वर्षो से एक चलन रहा है कि लोक सभा चुनाव संपन्न होने के बाद Exit Poll आने शुरू हो जाते हैं। बरहाल, इन Exit Poll में तीसरी बार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से मोदी विरोधियों में इतनी बेचैनी हो गयी कि आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती ने तो मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो 'मै सिर मुंडवा लूंगा' बात बोलने पर केंद्रीय मंत्री बाल्यान ने जवाब में कहा दिया कि बता दें कब करवाना है 'मै नाइ भेज दूंगा'।

साल 2024 लोकसभा चुनावों का मतदान खत्म होने के बाद एक्जिट पोल जारी हो गए हैं। लगभग सभी Exit Poll में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। Exit Poll के बाद जहाँ NDA गठबंधन के सभी घटक दलों और उनके समर्थकों में ख़ुशी की लहर है तो वहीं विपक्ष के तमाम नेता इसे पचा नहीं पा रहे हैं। इंडी गठबंधन के तमाम नेताओं के बयान भी सामने आने लगे हैं जिसमें उन्होंने एक्जिट पोल को सिरे से नकार दिया है।

कॉन्ग्रेस नेत्री और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे जनता नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी का एक्जिट पोल करार दे डाला है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन ने इस बार वैज्ञानिक विधि से अनुमान लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि INDI गठबंधन इस बार कम से कम 295 लोकसभा सीटें जीतने जा रहा है। आज जारी हुए एक्जिट पोल को सुप्रिया ने टीवी पर बज रहा झुनझुना बताया है।

पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता और गुरुदासपुर से लोकसभा प्रत्याशी सुखजिंदर सिंह रंधवा ने भी इंडी गठबंधन के ही जीतने का दावा किया है। उन्होंने कहा, “एग्जिट पोल कुछ भी हों लेकिन सरकार इंडी गठबंधन की ही बनेगी।”

महाराष्ट्र से कॉन्ग्रेस नेता नाना पटोले का दावा है कि इस बार के चुनावों में इंडी गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव भाजपा और जनता के बीच में था। नाना पटोले ने 4 जून को हर हाल में इंडी गठबंधन की जीत का भरोसा जताया है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल के आंकड़ों से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जनता मुँह मोड़ चुकी है और आने वाले 4 जून को इंडी गठबंधन ही सरकार बनाएगा। NDA को अखिलेश यादव अधिकतम 140 सीटों पर सिमटता हुआ बता रहे हैं। अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल जारी करने वाली मीडिया पर ही आरोप जड़ दिया और कहा कि ये सब अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

1 जून को तमाम मीडिया व सर्वे संस्थानों ने अपने-अपने एक्जिट पोल जारी कर दिए हैं। लगभग सभी संस्थानों के पोल के अनुसार भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में आ रही है। अधिकतर अनुमानों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 350 से अधिक सीटें मिलती दिख रहीं हैं। इंडी गठबंधन को इन सभी आंकड़ों में 150 सीटों के आसपास सिमटता दिखाया गया है।


संदेशखाली के ‘शैतान’ शेख शाहजहाँ को CBI से बचाने SC पहुँची ममता बनर्जी सरकार की सुप्रीम कोर्ट नहीं सुनी एक भी दलील


संदेशखाली के ‘शैतान’ शेख शाहजहाँ को कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ये भी कहा था कि सीबीआई और ईडी भी उसकी गिरफ्तारी कर सकती हैं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार शेख शाहजहाँ का कुछ ऐसे बचाव कर रही है, जैसे वो ममता सरकार का ‘सबसे कीमती’ आदमी हो। कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार (05 मार्च 2024) को जब सीबीआई को शेख शाहजहाँ को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अनुमति दी, तो ममता बनर्जी की सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। ममता बनर्जी की सरकार शेख शाहजहाँ को सीबीआई को सौंपने का विरोध कर रही है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को झटका दे दिया।

ममता बनर्जी की सरकार ने संदेशखाली और शेख शाहजहाँ मामले में सीबीआई जाँच के तुरंत सुनवाई की माँग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई तुरंत करने की जगह इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को फैसला करना है कि मामले की सुनवाई कब हो।

मंगलवार (5 मार्च) को कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईडी टीम पर हमले की जाँच को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे। दरअसल, ममता सरकार का कहना है कि एसआईटी इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है। सीबीआई को मामला सौंपना बिल्कुल गलत है। ममता सरकार का दावा है कि पश्चिम बंगाल सरकार की एसआईटी की जाँच सही दिखा में जा रही है।

 दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जाँच के खिलाफ पहुँची ममता बनर्जी की सरकार ने तुरंत दूसरी अर्जी भी दाखिल की थी और इस मामले की तुरंत सुनवाई की माँग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट 2 सदस्यीय पीठ ने कहा कि ये काम आप सीजेआई को करने दें, वो लंच के बाद इस केस को सूचीबद्ध करने पर फैसला लेंगे। ये उन्हीं का विशेषाधिकार है।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अदालत में ये अर्जी लगाई थी। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सीबीआई जाँच सौंपे जाने के हाई कोर्ट के फैसले पर सीबीआई तुरंत शेख शाहजहाँ को अपने कब्जे में लेना चाहती है, जबकि हमारे राज्य की एसआईटी इस मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में शेख शाहजहाँ को सीबीआई को तुरंत नहीं सौंपना चाहिए।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस के खिलाफ ईडी को याचिका दायर करने की दी अनुमति

इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (06 मार्च 2024) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस बात की अनुमति दे दी कि वो पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर कर सके। हाई कोर्ट ने शेख शाहजहाँ को ईडी और सीबीआई को सौंपने के निर्देश पश्चिम बंगाल सरकार को दिए थे, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस और सरकार ने शेख शाहजहाँ को सीबीआई को नहीं सौंपा था। इस मामले में ईडी के वकील कलकत्ता हाई कोर्ट से अवमानना की कार्रवाई के तहत केस दर्ज कराने की अनुमति माँगी थी, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट ने मान लिया।
पिछले महीने राशन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय शाहजहाँ शेख के घर छापा मारने आई थी। हालाँकि उसके समर्थकों ने ईडी पर ही उलटा हमला कर दिया और शाहजहाँ शेख फरार हो गया। उसके बाद से टीएमसी नेता कहाँ था ये किसी को नहीं पता था। बाद में संदेशखाली में महिलाओं का मुद्दा उठा और गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई। कई टीएमसी नेता पकड़े गए और आखिर में 27 फरवरी शाहजहाँ शेख भी गिरफ्तार हुआ।

लक्षद्वीप में सैनिक अनवर आलम ने 13 साल के बच्चे को दिया था लालच, केरल हाई कोर्ट ने बेल से किया साफ मना

                                                                                                                 साभार: Telegraph India
केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप के अनवर हुसैन नाम के एक सैनिक की जमानत याचिका ठुकरा दी है। अनवर पर आरोप है कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग बालक को सेक्स करने के लिए पैसे का लालच दिया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनवर को बेल देने से मना किया।

जानकारी के अनुसार, लक्षद्वीप के अमीनी गाँव में रहने वाले अनवर हुसैन टी पर आरोप है कि उसने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पैसों का लालच दिया कि वह उनके साथ सेक्स कर ले।

इस मामले में नाबालिग लड़के के परिजनों ने पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। हालाँकि, कोर्ट के सामने अनवर हुसैन ने कहा कि जिस नाबालिग लड़के के साथ सेक्स करने के लिए पैसे का लालच देने का आरोप उस पर लगाया गया है, उसके परिवार से उनका विवाद है।

अनवर ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसे पारिवारिक विवाद में फँसाने के लिए ऐसा किया गया है। अनवर के ऊपर POCSO के तहत मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। इसीलिए उसने केरल हाई कोर्ट के सामने जमानत याचिका लगाई थी।

लक्षद्वीप का परिक्षेत्र केरल हाई कोर्ट के अंतर्गत आता है। हाई कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। केरल हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जज सोफी थॉमस ने कहा, “एक सैनिक होने के कारण आरोपित (अनवर) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को और गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनसे यह आशा की जाती है कि वह देश के नागरिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे।”

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अगर अनवर के ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं तो एक सैनिक होने के नाते यह बड़ी ही अभद्र और सैन्य अफसर के व्यवहार के विपरीत होगी। कोर्ट ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनवर को जमानत देने से मना कर दिया।

केरल हाईकोर्ट :नाबालिग भाई से हुई 12 साल की 34 हफ्ते की गर्भवती लड़की की गर्भ गिराने की याचिका ठुकराई, आदेश – ऑपरेशन से हो बच्चे का जन्म

                                                                                                       प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
केरल हाई कोर्ट ने एक मामले में एक 12 वर्ष की गर्भवती लड़की को गर्भपात की अनुमति देने से मना कर दिया है। बच्ची के अपने ही नाबालिग भाई से सम्बन्ध थे जिसके कारण वह गर्भवती हो गई और अब उसने इस मामले में केरल हाईकोर्ट के सामने गर्भ गिराने की इजाजत माँगी थी। यह निर्णय केरल हाईकोर्ट ने 22 दिसम्बर, 2023 को सुनाया था।

न्यायिक मामलों के बारे में रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट ‘लाइव लॉ’ के अनुसार, एक 12 वर्षीय नाबालिग ने कोर्ट के सामने यह याचिका लगाई थी कि उसे चिकित्सीय तौर पर गर्भपात की इजाजत दी जाए। इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने बच्ची के गर्भ की जाँच के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था।

मेडिकल बोर्ड के गठन के बाद यह सामने आया था कि बच्ची 34 सप्ताह की गर्भवती है और ऐसे में उसे गर्भपात की इजाजत उसकी कम आयु के चलते दी जा सकती है और यह उसकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करेगा। हालाँकि, कोर्ट ने इस पर दुबारा जाँच करने को कहा। कोर्ट को गर्भपात की जगह पर मेडिकल बोर्ड ने सुझाया कि 2-3 सप्ताह के बाद बच्ची के ऑपरेशन के जरिए उसके गर्भ को निकाला जाए क्योंकि वो बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ है। ऐसे में कोर्ट ने गर्भ के विकसित हो जाने और अन्य कारणों को सामने रखते हुए गर्भपात की इजाजत देने से मना कर दिया।

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “गर्भ अब 34 सप्ताह का हो गया है और अब पूरी तरह से विकसित हो कर बाहर की जिन्दगी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती और बच्चे को जन्म लेने दिया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने इस बात पर हैरानी जताई कि बच्ची के गर्भवती होने के विषय में अब तक माता-पिता को जानकारी ही नहीं थी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्ची को उसके माता-पिता के साथ रखा जाए ताकि उसकी देखभाल की जाए। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि नाबालिग के बच्चे के जन्म के लिए ऑपरेशन का सहारा लिया जाए या फिर सामान्य तरीके से जन्म इसका निर्णय लेने की छूट माता-पिता को दी है।

कोर्ट ने बच्ची के नाबालिग भाई, जिसके ऊपर उसे गर्भवती करने के आरोप हैं, उसे उसके आसपास आने देने से रोकने को कहा है। उन्होंने कहा है कि उसका नाबालिग भाई बच्ची से किसी भी तरह का सम्बन्ध ना स्थापित कर पाए। इसकी जिम्मेदारी बच्ची के माता-पिता को दी गई है।

‘The Kerala Story’ पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, ‘हेट स्पीच’ बता बैन माँग रहे थे निजाम पाशा-कपिल सिब्बल

सुप्रीम कोर्ट ने ‘The Kerala Story’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, वहीं सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया है। ‘The Kerala Story’ केरल की उन लड़कियों की वास्तविक कहानी पर आधारित है, जिन्हें झूठे प्यार और इस्लामी धर्मांतरण के जाल में फँसा कर ISIS आतंकियों का सेक्स स्लेव बना दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में फिल्म के खिलफ एक इंटरलॉक्यूटरी एप्लिकेशन (IA) दाखिल किया गया था।

हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 2 मई, 2023 को इस पर सुनवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस BV नागरत्न की पीठ के समक्ष इसका जिक्र किया गया था। हेट स्पीच संबंधी अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पेंडिंग रिट पेटिशन दाखिल की गई है, उसी के तहत इस IA को डाला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके जरिए किसी फिल्म की रिलीज को चुनौती देना ठीक तरीका नहीं है।

वकील निजाम पाशा ने इस पर तुरंत सुनवाई की माँग की थी। उन्होंने इसे ‘हेट स्पीच की सबसे बुरी घटना’ बता कर पेश किया था। उन्होंने इसे ‘ऑडियो-विजुअल हेट प्रोपेगंडा’ भी करार दिया था। इस पर जजों ने कहा कि इसे हाईकोर्ट क्यों नहीं ले जाया जा सकता और हर प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट से ही क्यों शुरू हो। कपिल सिब्बल ने भी इसके ट्रेलर के ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने की माँग की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफाई कर दिया है, इस पर एक याचिका दायर कर के ही सुनवाई की माँग की जा सकती है।

हालाँकि, कपिल सिब्बल ये दलील देते रहे कि फिल्म की रिलीज को अब कम समय ही बचा है। उन्होंने कहा कि वो मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष याचिका दायर कर त्वरित सुनवाई की माँग करेंगे। जस्टिस जोसेफ ने कहा, “मुझे इस फिल्म के बारे में पता है। मैंने एक टीवी डिबेट में देखा। हम भी टीवी देखते हैं।” उक्त फिल्म शुक्रवार (5 मई, 2023) को रिलीज हो रही है। सुदीप्तो सेन ने इसका निर्देशन किया है जबकि विपुल अमृतलाल शाह इसके निर्माता हैं।

अयोध्या में राममन्दिर निर्माण से लेकर ‘The Kerala Story’ तक हर सच्चाई को उजागर होने से रोकने कपिल सिब्बल क्यों खड़े हो जाते हैं? वह हर सच्चाई को सामने नहीं आने देने से क्यों जनता को गुमराह करना चाहते हैं?  

सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलावों के साथ इसे रिलीज के लिए तैयार किया है। एक दृश्य में हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी (मुस्लिम किरदार द्वारा) थी, जिसे हटाया गया है। भारतीय कम्युनिस्टों को दोहरे रवैये वाला बताने वाली एक टिप्पणी में से ‘भारतीय’ शब्द हटाया गया है। केरल के एक पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदम ने राज्य के इस्लामी स्टेट बनने की भविष्यवाणी की थी, उस टीवी इंटरव्यू को हटाया गया है। सेंसर बोर्ड ने 10 दृश्य हटा कर इसे रिलीज के लिए आगे बढ़ाया है।


योगी सरकार के बुलडोजर पर ब्रेक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार


कानपुर दंगे के बाद दंगाइयों के अवैध कब्जों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (16 जून 2022) को अहम फैसला सुनाया। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन जमीयत-ए-उलेमा हिन्द (Jamiat-Ulema-E-Hind) की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की याचिका पर अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस AS बोपन्ना और जस्टिस बिक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वो राज्य सरकार से बुलडोजर एक्शन को रोकने के लिए नहीं कह सकता, लेकिन कोर्ट सरकार को नियम के तहत ऐसा करने को कह सकता है।

ऐसे में कोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को जरूर कहा है कि मंगलवार (21 जून) को मामले की अगली सुनवाई होने तक कुछ भी न करें। कोर्ट ने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पैरवी कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की ओर से जो भी विध्वंस किए गए हैं, उनमें सभी तरह की उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में एफिडेविट फाइल करने का भी समय माँगा था।

क्या है मामला 

भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के बाद 3 जून को कानपुर में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की। इसके बाद 10 जून को कई जगहों पर कट्टरपंथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दंगा करने वालों के अवैध ठिकानों को ढहाने का नोटिस जारी किया और बाद में उसे ढहा दिया था।

इन्हीं दंगाइयों के बचाव में उतरते हुए जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने कानपुर दंगे के मुख्य साजिशकर्ता जफर हयात हाशमी का समर्थन किया था। इस्लामिक संगठन ने ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

केरल यूनिवर्सिटी का राष्ट्रपति को डॉक्टरेट डिग्री देने से इनकार, ठुकराया राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का प्रस्ताव

                                                                                                                     साभार: इंडियन एक्सप्रेस
देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (D Lit) की मानद उपाधि देने के केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अनुरोध को केरल विश्वविद्यालय (Kerala University) ने ठुकरा दिया है। अब इस मामले में राज्य सरकार और वामपंथी पी विजयन सरकार (P vijyan Government) के बीच टकराव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कथित राजनीतिक दवाब में आकर विश्वविद्यालय ने राष्ट्रपति को डी लिट की मानद उपाधि देने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल के अनुरोध पर केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ वीपी महादेवन पिल्लई ने गवर्नर को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय सिंडिकेट को राष्ट्रपति कोविंद को डी लिट की डिग्री देने में कोई रुचि नहीं है।

राष्ट्रपति कोविंद को डी लिट की उपाधि देने के बजाय संस्कृत विश्वविद्यालय ने पहले अभिनेत्री शोभना, म्यूजिशियन डॉ टीएम कृष्णा और अपने ही पूर्व कुलपति डॉ एनपी उन्नी को यह डिग्री देने का फैसला किया था। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालय की इस सिफारिश को स्वीकार भी कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने यह इशारा भी किया कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों ने देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है।

राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के कुलपति को राजभवन बुलाकर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने के लिए कहा था। उन्होंने ये लिखित में भी दिया था। लेकिन, उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया। बताया जाता है कि वीसी ने सिंडिकेट सदस्यों को राज्यपाल के निर्देश से अवगत कराया था। इसको लेकर राजनीतिक कार्यकारिणी से भी बात की गई. बाद में कुलपति ने राज्यपाल से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने से इनकार कर दिया।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से माँगा जवाब

राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने से केरल सरकार के निर्देश पर खारिज किया गया। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नितला (Ramesh channithala) ने पिनरई विजयन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की है कि आखिर उसने किस आधार पर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने की सिफारिश को खारिज किया।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद विश्व विद्यालय के कुलाधिपति हैं। इस पर उन्होंने कहा है कि उन्हें कुलाधिपति बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है और वो उच्च शिक्षामंत्री को कुलाधिपति के अधिकार को ट्रांसफर करने के लिए तैयार हैं।